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अब दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर कराना होगा आसान! सरकार खत्म करने जा रही ये बड़ी रिपोर्ट्…

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अगर आप अपनी गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. अभी तक दूसरे राज्य में गाड़ी ले जाने पर सबसे बड़ी परेशानी NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होती है.

इसके लिए लोगों को कई बार RTO के चक्कर लगाने पड़ते हैं और काफी समय भी लगता है, लेकिन अब सरकार इस प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी कर रही है.

रिपोर्ट्स के अनुसार नीति आयोग की एक कमेटी ने सुझाव दिया है कि राज्यों के बीच वाहन ट्रांसफर करते समय NOC की जरूरत को खत्म कर दिया जाए. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. अगर यह नियम लागू हो जाता है तो वाहन मालिकों को पुराने RTO से NOC लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी.

अभी काफी मुश्किल है वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया

फिलहाल अगर कोई व्यक्ति अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे राज्य में कराना चाहता है तो उसे कई तरह की कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले पुराने राज्य के RTO से NOC लेना जरूरी होता है. यह प्रमाण होता है कि गाड़ी पर कोई रोड टैक्स या चालान बाकी नहीं है. इसके बाद ही नया राज्य उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन लेता है. इसके अलावा वाहन मालिक को पुरानी RC, फिटनेस सर्टिफिकेट, टैक्स की रसीद और NOC जैसे कई डाक्यूमेंट्स जमा करने पड़ते हैं.

वाहन पोर्टल से आसान हो सकता है ट्रांसफर

कमेटी का सुझाव है कि गाड़ी से जुड़ी सभी जानकारी पहले से ही ‘वाहन’ पोर्टल पर मौजूद है. इस पोर्टल पर देशभर की गाड़ियों का पूरा डेटाबेस ऑनलाइन उपलब्ध है. ऐसे में यह आसानी से जांच की जा सकती है कि गाड़ी पर कोई टैक्स या चालान बाकी है या नहीं. अगर ये सिस्टम लागू होता है तो NOC की जगह ऑनलाइन ऑटोमैटिक क्लियरेंस मिल सकता है.

गाड़ी की फिटनेस होगी जरूरी

कमेटी ने एक और अहम सुझाव दिया है. इसके अनुसार गाड़ियों की उम्र के बजाय उनकी फिटनेस पर ध्यान दिया जाना चाहिए. अभी कई जगहों पर एक तय उम्र के बाद गाड़ियों को सड़कों से हटाना पड़ता है, भले ही वे अच्छी स्थिति में हों. अगर नया नियम लागू होता है तो पुरानी गाड़ियां भी सड़कों पर चल सकेंगी, बशर्ते वे सभी फिटनेस और सुरक्षा मानकों को पूरा करती हों. इससे वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है.

मदरसों में बड़े बदलाव, अब यूनिवर्सिटीज देंगी डिग्री! 53 साल पुराने एक्ट में होगा संशोधन…

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उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने की तैयारी में है. इसके तहत मदरसा शिक्षा परिषद की कामिल और फाजिल कक्षाओं की परीक्षाएं संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा कराई जाएंगी.

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार ‘उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973’ में संशोधन कराने जा रही है. संशोधन लागू होने के बाद महाविद्यालयों की तरह मदरसों को भी उसी जिले में स्थित विश्वविद्यालय से संबद्धता दी जाएगी.

विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को देश-विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने, नौकरी पाने और अन्य शैक्षिक कार्यों में काफी सुविधा होती है. उनकी डिग्रियों को हर जगह मान्यता भी मिलती है. इसके विपरीत, मदरसों से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को कुछ विशेष क्षेत्रों को छोड़कर इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता और उनकी डिग्रियों को हर जगह मान्यता भी नहीं मिलती. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है, ताकि मदरसों के विद्यार्थियों को भी अन्य छात्र-छात्राओं के समान मान्यता प्राप्त डिग्री मिल सके और उन्हें शिक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक स्थान और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें.

नई व्यवस्था के तहत जिस विश्वविद्यालय से मदरसा संबद्ध होगा, वही विश्वविद्यालय अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मदरसों में शुचिता के साथ परीक्षाएं आयोजित कराएगा और सफल विद्यार्थियों को डिग्री भी प्रदान करेगा.

मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973’ में संशोधन का प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तैयार कर लिया गया है. अंतिम परीक्षण के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा.

मदरसों को विश्वविद्यालय से जोड़ने पर क्या बोले योगी के मंत्री?

मदरसों में दी जाने वाली प्रमुख डिग्रियों की समकक्षता इस प्रकार है-हाईस्कूल के समकक्ष ‘मुंशी’, इंटरमीडिएट के समकक्ष ‘मौलवी’, स्नातक के समकक्ष ‘कामिल’ और परास्नातक के समकक्ष ‘फाजिल’ माने जाते हैं.

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्ताव को शासन स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इस संबंध में शासनादेश जारी करेगी.

वहीं मंत्री संजय निषाद ने यूपी मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने की योजना पर कहा, ये देश पहले शरीयत से चलता था, अब संविधान से चलता है और हर शिक्षा संविधान के आधार पर होनी चाहिए और एक समान शिक्षा होनी चाहिए. मैंने यही बात बार-बार कही है. कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए और चाहे वह धार्मिक शिक्षा हो किसी भी प्रकार की शिक्षा हो.

 चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश में कितना महंगा हो गया डीजल-पेट्रोल, भारत से कितनी ज्यादा कीमत चुका रहे लोग…

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भारत के पड़ोसी देशों में पेट्रोलियम की कीमतें और सप्लाई का हाल काफी तनावपूर्ण है. ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने से ग्लोबल ऑयल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर पड़ोसी देशों पर पड़ रहा है.

भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और मालदीव जैसे देश शामिल हैं.

पाकिस्तान में रॉकेट बनीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं. डॉन न्यूज के मुताबिक, 7 मार्च 2026 से सरकार ने पेट्रोल को Rs 321.17 प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल को Rs 335.86 प्रति लीटर कर दिया. ये Rs 55 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी है, जो करीब 20% ऊपर है. इसकी वजह बताई गई है मिडिल ईस्ट में युद्ध से तेल की कीमतों का बढ़ना. कराची, इस्लामाबाद और लाहौर जैसे सभी छोटे-बड़े शहरों में आम लोग पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें लगा रहे हैं. ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ रहा है. पाकिस्तान ने इसे 14 देशों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बताया है.

पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ ने सोमवार रात राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका-इजरायल के ईरान पर युद्ध से ग्लोबल ऑयल क्राइसिस पैदा हो गई है, जिसके चलते सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. इनमें सभी सरकारी दफ्तरों को चार दिन काम करने का नियम लागू करना शामिल है, यानी सोमवार से गुरुवार तक. शुक्रवार को अतिरिक्त छुट्टी मिलेगी, लेकिन ये बैंक पर लागू नहीं होगा.

चीन में टैंक फुल कराने पर करीब 29 यूआन ज्यादा खर्च

चीन में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ रहा है. नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने 9 मार्च 2026 को रिटेल फ्यूल प्राइस कैप में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है, जो मार्च 2022 के बाद सबसे ज्यादा है. NDRC के मुताबिक, गैसोलीन (पेट्रोल) की रिटेल प्राइस कैप 695 युआन ($100.46) प्रति मीट्रिक टन बढ़ाई गई है और डीजल की 670 युआन ($96.84) प्रति मीट्रिक टन. ये बदलाव 10 मार्च 2026 से लागू हो गए हैं. इससे औसतन 92-ऑक्टेन गैसोलीन 0.55 युआन प्रति लीटर, 95-ऑक्टेन 0.58 युआन प्रति लीटर, और डीजल 0.57 युआन प्रति लीटर महंगा हुआ है. एक 50 लीटर टैंक भराने पर 27-29 युआन एक्स्ट्रा लग रहे हैं.

बांग्लादेश में फ्यूल की सप्लाई पर बड़ा संकट

बांग्लादेश की नई तारिक रहमान की सरकार ने 6-8 मार्च से फ्यूल राशनिंग लगा दी है ताकि पैनिक बाइंग रुके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कारों को रोज 10 लीटर, मोटरसाइकिल को 2 लीटर, ट्रक-बस को ज्यादा लेकिन लिमिटेड पेट्रोल-डीजल मिल रहा है. पेट्रोल की कीमत Tk 116 प्रति लीटर, डीजल Tk 100 प्रति लीटर पर स्थिर है, लेकिन सप्लाई की वजह से स्टेशनों पर लंबी कतारें और रात भर इंतजार की खबरें हैं. बांग्लादेश 95% फ्यूल इंपोर्ट करता है, इसलिए युद्ध से डिले हो रहा है. भारत ने फ्रेंडशिप पाइपलाइन से 5,000 टन डीजल भेजा है और कुल 2.80 लाख टन इंपोर्ट फाइनल किया गया है ताकि मार्च में कमी न हो. लेकिन पैनिक बाइंग से स्थिति टाइट है.

नेपाल में ज्यादा नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

नेपाल की राजधानी कठमांडू में पेट्रोल NPR 157 प्रति लीटर और डीजल NPR 142 प्रति लीटर बिक रहा है. NOC नेपाल के मुताबिक, तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ी हैं (करीब 0.03 डॉलप प्रति लीटर), लेकिन ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई. नेपाल भारत से ज्यादातर फ्यूल इंपोर्ट करता है, इसलिए भारत की स्थिरता से फायदा मिल रहा है. लेकिन ग्लोबल प्राइस बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर असर है. कोई बड़ा राशनिंग या शॉर्टेज रिपोर्ट नहीं है.

श्रीलंका में मामूली बढ़ीं तेल की कीमतें

श्रीलंका में पेट्रोल की कीमत LKR 340 प्रति लीटर (95 ऑक्टेन) और डीजल LKR 279 प्रति लीटर के आसपास है. श्रीलंका में पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दिखी है, यानी 0.01 डॉलर प्रति लीटर. लेकिन मार्केट प्राइस फॉर्मूला से थोड़ा कम है. कोई बड़ा संकट नहीं, लेकिन ग्लोबल क्राइसिस से ट्रांसपोर्ट और इकोनॉमी पर दबाव है.

भूटान और मालदीव में कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं

भूटान में डीजल INR 61.69 प्रति लीटर (करीब 70 BTN) है, जो भारत से इंपोर्ट पर निर्भर है. मालदीव में भी कीमतें हाई हैं लेकिन स्पेसिफिक मार्च 2026 डेटा में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा. दोनों देशों में भारत की सप्लाई से स्थिरता है.

कुल मिलाकर, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां कीमतें तेज बढ़ीं और सप्लाई पर राशनिंग लगी. नेपाल और श्रीलंका में कीमतें बढ़ीं लेकिन सप्लाई ठीक है. भारत ने घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाकर और रूस-अमेरिका से इंपोर्ट डाइवर्सिफाई करके कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन पड़ोसियों पर युद्ध का असर साफ दिख रहा है. ऑयल प्राइस 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, इसलिए आगे और दबाव बढ़ सकता है.

क्या लोक अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में दी जा सकती है चुनौती, जानें यहां कौन से मामले नहीं सुने जाते?

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देश की कानूनी व्यवस्था में लोक अदालत को समझौते के जरिए न्याय का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है. अदालतों में लंबित करोड़ों मामलों के बोझ को कम करने के लिए यह एक वरदान है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या लोक अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला अंतिम होता है?

क्या इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है? कानूनी साक्षरता के इस दौर में यह जानना बेहद जरूरी है कि लोक अदालत की शक्ति क्या है और वे कौन से मामले हैं जिनकी सुनवाई इस मंच पर चाहकर भी नहीं की जा सकती है.

लोक अदालत के फैसले की कानूनी स्थिति

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, लोक अदालत द्वारा दिया गया फैसला एक सिविल कोर्ट की डिक्री के समान होता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आपसी सहमति पर आधारित होता है. चूंकि लोक अदालत का आदेश दोनों पक्षों की रजामंदी से आता है, इसलिए कानूनी रूप से इसके खिलाफ किसी भी उच्च अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) में कोई अपील दायर नहीं की जा सकती है. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि विवादों का हमेशा के लिए निपटारा हो सके और अदालतों पर बोझ न बढ़े.

क्या हाई कोर्ट में चुनौती देने का कोई रास्ता बचा है?

हालांकि लोक अदालत के फैसले के खिलाफ सीधे तौर पर अपील नहीं की जा सकती है, लेकिन कानून में एक छोटा सा झरोखा खुला है. अगर किसी पक्ष को लगता है कि लोक अदालत का फैसला धोखाधड़ी, दबाव या नियमों के घोर उल्लंघन के माध्यम से लिया गया है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के तहत हाई कोर्ट में ‘रिट याचिका’ (Writ Petition) दायर कर सकता है. ध्यान रहे, यह कोई नियमित अपील नहीं है, बल्कि केवल प्रक्रियात्मक खामियों या मौलिक अधिकारों के हनन के आधार पर की जाने वाली एक विशेष चुनौती है.

वे मामले जिनकी सुनवाई लोक अदालत में वर्जित है

लोक अदालत हर तरह के विवाद को नहीं सुलझा सकती है, इसकी अपनी सीमाएं हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘गैर-शमनीय’ (Non-Compoundable) आपराधिक मामले यहां नहीं सुने जा सकते हैं. यानी ऐसे गंभीर अपराध जिनमें कानूनन समझौता करने की अनुमति नहीं है (जैसे हत्या, बलात्कार या डकैती), वे लोक अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं. इसके अलावा, जिन मामलों में किसी एक पक्ष की सहमति नहीं होती है, लोक अदालत उनमें जबरन फैसला नहीं सुना सकती है. पारिवारिक विवादों में भी अगर तलाक जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हों, तो लोक अदालत सीधे तौर पर डिक्री नहीं देती है.

लोक अदालत में केस ले जाने के फायदे और प्रक्रिया

लोक अदालत में मामला ले जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां कोई अदालती शुल्क (Court Fee) नहीं लगता है. यदि आपका मामला पहले से किसी अदालत में लंबित है और लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो पहले भरी गई कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है. यहां कोई सख्त प्रक्रियात्मक नियम (जैसे साक्ष्य अधिनियम) लागू नहीं होते, बल्कि वकील और जज के बजाय एक पैनल (जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता भी हो सकते हैं) बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने में मदद करता है.

“UP में PM आवास योजना के लिए योगी सरकार का अहम निर्णय, EWS और LIG श्रेणी वालों की बल्ले-बल्ले”

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प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत भागीदारी में किफायती आवास और किफायती किराया आवास घटकों के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार नई नीति जारी करने जा रही है. भारत सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में इन दोनों घटकों के संचालन के लिए 2026 की नीति प्रस्तावित की गई है.

योगी सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सीमा में बदलाव किया गया है. पहले ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के लिए जो सीमा थी, उसे बढ़ाकर अब 9 लाख रुपये तक कर दिया गया है. इसके साथ ही इन वर्गों के लिए बनने वाले आवासों का क्षेत्रफल 30 वर्गमीटर तक निर्धारित किया गया है.

इस योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से आर्थिक सहायता दी जाएगी. प्रत्येक आवास पर केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी.

योजनांतर्गत वाइटलिस्टेड परियोजनाओं में काम करने वाले विकासकर्ताओं को प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. इसके तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति और बाह्य विकास शुल्क में छूट का प्रावधान किया गया है. साथ ही लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में भी राहत दी जाएगी.

किफायती किराया आवास मॉडल-2 के तहत शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, उद्योगों और औद्योगिक संपदाओं में काम करने वाले कर्मचारियों तथा अन्य पात्र ईडब्ल्यूएस और एलआईजी परिवारों के लिए किराये के आवास बनाने का प्रावधान किया गया है. इन आवासों का निर्माण, संचालन और रखरखाव निजी या सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किया जा सकेगा.

अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव

इसके साथ ही अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके लिए नजूल भूमि को नगर निगम के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. जिलाधिकारी अयोध्या की ओर से नगर आयुक्त, नगर निगम अयोध्या के पत्र के आधार पर यह प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है. प्रस्ताव के अनुसार चक संख्या 4, मोहल्ला वशिष्ठ कुंड, परगना हवेली अवध, तहसील सदर स्थित नजूल भूमि को स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए नगर निगम अयोध्या को हस्तांतरित किया जाएगा.

हाई कोर्ट के पूर्व जज भी बने पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया का हिस्सा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया अपीलों के निपटारे के लिए विशेष ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश…

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पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों की अपील सुनने के लिए ट्रिब्यूनल का गठन होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इन ट्रिब्यूनलों में हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और पूर्व जजों को शामिल करने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल SIR में स्वतंत्र अपील व्यवस्था की कमी को लेकर चिंता जताई.

ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश पर SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों की सुनवाई न्यायिक अधिकारी (निचली अदालत के जज) कर रहे हैं. ऐसे में कोर्ट का यह मानना था कि न्यायिक अधिकारियों के निर्णय के खिलाफ अपील पर सुनवाई प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं दी जा सकती है इसलिए, चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने विशेष ट्रिब्यूनलों के गठन का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पूर्व हाई कोर्ट जजों को नियुक्त करें. जरूरी संख्या में पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और पूर्व जजों को इस काम मे लगाया जाए. 2 पूर्व जजों की हर बेंच को एक ट्रिब्यूनल के रूप में नोटिफाई किया जाए. फाइनल लिस्ट में जगह न पाने वाले लोगों की अपील पर यह ट्रिब्यूनल फैसला लेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस चुनाव आयोग से चर्चा कर इन पूर्व जजों का मानदेय तय करेंगे और उसका भुगतान चुनाव आयोग करेगा.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट अब तक प्रकाशित न होने का भी मसला उठाया. उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जैसे-जैसे दावों का निपटारा होता जाए, पूरक लिस्ट का प्रकाशन हो. 28 फरवरी को फाइनल लिस्ट के प्रकाशन के बाद से अब तक 10 लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा हो चुका है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की मंजूरी मिलने के बाद चुनाव आयोग सप्लीमेंट्री लिस्ट का प्रकाशन करे.

Haryana LPG Crisis: हरियाणा में कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर लग सकती है रोक! मंत्री राजेश नागर का बड़ा बयान…

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हरियाणा के खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने एक बयान दिया है. उन्होंने उसमें कहा कि केंद्र सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है, जिसके तहत कुछ समय के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर रोक लगा दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर भी एडवाइजरी जारी की गई है. इस मामले में आज शाम खाद्य आपूर्ति विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने सभी तेल कंपनियों के साथ बैठक बुलाई, जिसमें मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने राज्य में LPG की उपलब्धता को लेकर विस्तृत डाटा मांगा है. साथ ही राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों और DFC को निर्देश दिए गए हैं कि गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर रोजाना रिपोर्टिंग की जाए.

राहुल गांधी के कॉम्प्रोमाइज्ड PM वाले बयान पर संजय राउत की प्रतिक्रिया, ‘ऐसी विस्फोटक जानकारी…

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम वाले बयान पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया सामने आई है. मंगलवार (10 मार्च) को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास विश्वभर से ऐसी विस्फोटक जानकारी आती है.मोदी की सरकार राहुल गांधी का सामना करने से डरती है. जवाब नहीं दे पाती, भाग जाती है

प्रधानमंत्री मौन क्यों हैं- संजय राउत

वहीं, अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का मामला चलता रहेगा. ईरान-इजरायल युद्ध पर उन्होंने कहा कि कल दोनों सदनों में ये मांग उठेगी कि विश्व में हिंदुस्तान के आस-पास जो युद्ध चल रहा है उसमें भारत की भूमिका क्या है. प्रधानमंत्री मौन क्यों हैं और उसका भारत पर क्या असर पड़ेगा. खासकर महंगाई है, एनर्जी है, पेट्रोल-डीजल के दाम हैं. इन बातों पर चर्चा करना देशहित की बात होती है. लेकिन सरकार उस पर बात नहीं करती है.

‘कौन सी शांति के पक्ष में हैं?’

संजय राउत ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शांति की बात की है. कौन सी शांति के पक्ष में हैं? ईरान से लेकर इजरायल तक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, आग ही आग है. आग का धुआं भारत में आया है और शांति की बात करते हो?

‘ईरान के सुप्रीम लीडर को मार दिया गया क्या प्रधानमंत्री…’

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद ने कहा, “अगर आप शांति की बात करते हो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्ध से एक दिन पहले इजरायल में क्या कर रहे थे? ऐसे माहौल में आप इजरायल जाकर क्या कर रहे थे? अगर आप शांति की बात करते हो तो ईरान में जिस स्कूल पर हमला किया उसमें 150 से ज्यादा छोटी बच्चियां मारी गईं, क्या आपने उस पर दुख प्रकट किया? ईरान के सुप्रीम लीडर को मारा गया, क्या प्रधानमंत्री ने दुख प्रकट किया? ये कौन सी शांति हैं?

“Indian Railways:  रेलवे का बड़ा कदम, 15 मार्च से 4 वंदे भारत ट्रेनों के टाइम में क‍िया बदलाव, देखें नई Timing”

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अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं और खासकर सेमी-हाई स्पीड ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ के मुसाफिर हैं, तो यह खबर सीधे आपके काम की है। भारतीय रेलवे ने परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) को सुधारने और यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए साउथ वेस्टर्न रेलवे (SWR) जोन की 4 प्रमुख वंदे भारत ट्रेनों के समय में बदलाव करने का फैसला किया है।

देशभर में दौड़ रही 164 वंदे भारत ट्रेनों के नेटवर्क के बीच, इन चुनिंदा ट्रेनों की नई समय सारणी 15 मार्च 2026 से प्रभावी हो जाएगी।

यशवंतपुर-काचेगुड़ा और काचेगुड़ा-यशवंतपुर वंदे भारत एक्सप्रेस

सितंबर 2023 से पटरी पर दौड़ रही यशवंतपुर-काचेगुड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 20704) के समय में हिंदूपुर स्टेशन पर बदलाव किया गया है। अब यह ट्रेन दोपहर 12:08 के बजाय 12:17 बजे हिंदूपुर पहुंचेगी। इसी तरह, वापसी की ट्रेन यानी काचेगुड़ा-यशवंतपुर वंदे भारत (ट्रेन नंबर 20703) जो शुक्रवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन चलती है, अब हिंदूपुर स्टेशन पर दोपहर 15:48 के स्थान पर 15:55 बजे आया करेगी।

कलाबुरागी-SMVT

बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस (22231)

कलाबुरागी से बेंगलुरु के बीच 550 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस ट्रेन के समय में दो प्रमुख स्टेशनों पर फेरबदल हुआ है। 15 मार्च से यह ट्रेन श्री सत्य साई प्रशांति निलयम स्टेशन पर अपने पुराने समय 11:00 बजे के बजाय अब 11:13 बजे पहुंचेगी। वहीं, येलहंका स्टेशन पर पहुंचने के समय में भी बड़ा बदलाव हुआ है; अब यह दोपहर 12:28 की जगह 12:58 बजे वहां पहुंचा करेगी।

SMVT

बेंगलुरु-कलाबुरागी वंदे भारत एक्सप्रेस (22232)

वापसी दिशा में चलने वाली ट्रेन नंबर 22232, जो गुरुवार को छोड़कर रोज चलती है, उसके समय में भी संशोधन किया गया है। नए शेड्यूल के अनुसार, यह ट्रेन अब येलहंका स्टेशन पर दोपहर 15:05 के बजाय 15:09 बजे पहुंचेगी। इसके साथ ही श्री सत्य साई प्रशांति निलयम स्टेशन पर इसके पहुंचने का समय अब शाम 16:23 से बदलकर 16:45 बजे कर दिया गया है।

राज्यसभा: तमिलनाडु से छह, छत्तीसगढ़ से दो उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, हिमाचल से अनुराग शर्मा जीते…

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”तमिलनाडु से राज्यसभा चुनाव लड़ने वाले सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं.”

”राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए AIADMK के एम थंबीदुरई और अन्य नेता”

”तमिलनाडु से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने वाले सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए. इसी तरह, कांग्रेस नेता अनुराग शर्मा हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए. छत्तीसगढ़ में, बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुनी गईं.”

”तमिलनाडु में खाली हुईं राज्यसभा की छह सीटों के लिए नामांकन वापस लेने की समय सीमा सोमवार दोपहर 3 बजे खत्म हो गई. राज्यसभा चुनाव ऑफिसर शांति ने कहा, “तमिलनाडु से राज्यसभा चुनाव लड़ने वाले सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं.”

”शांति ने कहा, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) से एम थंबीदुरई, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) से डॉ. अंबुमणि रामदास, कांग्रेस से क्रिस्टोफर थिलक, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) से त्रिची शिवा और प्रोफेसर कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, और डीएमडीके से एलके सुधीश को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 53(2) और कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के नियम 11(1) के अनुसार निर्विरोध चुना गया.”

”चुनाव अधिकारी शांति ने सोमवार को थंबीदुरई, अंबुमणि रामदास और सुधीश को संसद के उच्च सदन के लिए उनके चुनाव का सर्टिफिकेट दिया.”

”डीएमके गठबंधन की तरफ से निर्विरोध विजयी घोषित किए गए उम्मीदवारों को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की मौजूदगी में सर्टिफिकेट दिए जाएंगे.”

”एलके सुधीश पहली बार DMDK से संसद में जाएंगे. दूसरी ओर, त्रिची शिवा और थंबीदुरई को सबसे अधिक बार राज्यसभा जाने का गौरव प्राप्त है. तमिलनाडु से राज्यसभा में कुल 18 सांसद हैं.”

”इस बीच, हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अनुराग शर्मा को आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के लिए चुने जाने का सर्टिफिकेट सौंप दिया. सचिवालय को राज्यसभा चुनाव के लिए सिर्फ एक नामांकन मिला था. नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 9 मार्च थी. क्योंकि विरोध में कोई और उम्मीदवार नहीं था, इसलिए शर्मा को निर्विरोध चुना गया. हिमाचल से मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है. उनका टर्म खत्म होने के बाद, शर्मा राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे.”