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 चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश में कितना महंगा हो गया डीजल-पेट्रोल, भारत से कितनी ज्यादा कीमत चुका रहे लोग…

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भारत के पड़ोसी देशों में पेट्रोलियम की कीमतें और सप्लाई का हाल काफी तनावपूर्ण है. ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने से ग्लोबल ऑयल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर पड़ोसी देशों पर पड़ रहा है.

भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और मालदीव जैसे देश शामिल हैं.

पाकिस्तान में रॉकेट बनीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं. डॉन न्यूज के मुताबिक, 7 मार्च 2026 से सरकार ने पेट्रोल को Rs 321.17 प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल को Rs 335.86 प्रति लीटर कर दिया. ये Rs 55 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी है, जो करीब 20% ऊपर है. इसकी वजह बताई गई है मिडिल ईस्ट में युद्ध से तेल की कीमतों का बढ़ना. कराची, इस्लामाबाद और लाहौर जैसे सभी छोटे-बड़े शहरों में आम लोग पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें लगा रहे हैं. ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ रहा है. पाकिस्तान ने इसे 14 देशों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बताया है.

पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ ने सोमवार रात राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका-इजरायल के ईरान पर युद्ध से ग्लोबल ऑयल क्राइसिस पैदा हो गई है, जिसके चलते सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. इनमें सभी सरकारी दफ्तरों को चार दिन काम करने का नियम लागू करना शामिल है, यानी सोमवार से गुरुवार तक. शुक्रवार को अतिरिक्त छुट्टी मिलेगी, लेकिन ये बैंक पर लागू नहीं होगा.

चीन में टैंक फुल कराने पर करीब 29 यूआन ज्यादा खर्च

चीन में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ रहा है. नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने 9 मार्च 2026 को रिटेल फ्यूल प्राइस कैप में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है, जो मार्च 2022 के बाद सबसे ज्यादा है. NDRC के मुताबिक, गैसोलीन (पेट्रोल) की रिटेल प्राइस कैप 695 युआन ($100.46) प्रति मीट्रिक टन बढ़ाई गई है और डीजल की 670 युआन ($96.84) प्रति मीट्रिक टन. ये बदलाव 10 मार्च 2026 से लागू हो गए हैं. इससे औसतन 92-ऑक्टेन गैसोलीन 0.55 युआन प्रति लीटर, 95-ऑक्टेन 0.58 युआन प्रति लीटर, और डीजल 0.57 युआन प्रति लीटर महंगा हुआ है. एक 50 लीटर टैंक भराने पर 27-29 युआन एक्स्ट्रा लग रहे हैं.

बांग्लादेश में फ्यूल की सप्लाई पर बड़ा संकट

बांग्लादेश की नई तारिक रहमान की सरकार ने 6-8 मार्च से फ्यूल राशनिंग लगा दी है ताकि पैनिक बाइंग रुके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कारों को रोज 10 लीटर, मोटरसाइकिल को 2 लीटर, ट्रक-बस को ज्यादा लेकिन लिमिटेड पेट्रोल-डीजल मिल रहा है. पेट्रोल की कीमत Tk 116 प्रति लीटर, डीजल Tk 100 प्रति लीटर पर स्थिर है, लेकिन सप्लाई की वजह से स्टेशनों पर लंबी कतारें और रात भर इंतजार की खबरें हैं. बांग्लादेश 95% फ्यूल इंपोर्ट करता है, इसलिए युद्ध से डिले हो रहा है. भारत ने फ्रेंडशिप पाइपलाइन से 5,000 टन डीजल भेजा है और कुल 2.80 लाख टन इंपोर्ट फाइनल किया गया है ताकि मार्च में कमी न हो. लेकिन पैनिक बाइंग से स्थिति टाइट है.

नेपाल में ज्यादा नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

नेपाल की राजधानी कठमांडू में पेट्रोल NPR 157 प्रति लीटर और डीजल NPR 142 प्रति लीटर बिक रहा है. NOC नेपाल के मुताबिक, तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ी हैं (करीब 0.03 डॉलप प्रति लीटर), लेकिन ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई. नेपाल भारत से ज्यादातर फ्यूल इंपोर्ट करता है, इसलिए भारत की स्थिरता से फायदा मिल रहा है. लेकिन ग्लोबल प्राइस बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर असर है. कोई बड़ा राशनिंग या शॉर्टेज रिपोर्ट नहीं है.

श्रीलंका में मामूली बढ़ीं तेल की कीमतें

श्रीलंका में पेट्रोल की कीमत LKR 340 प्रति लीटर (95 ऑक्टेन) और डीजल LKR 279 प्रति लीटर के आसपास है. श्रीलंका में पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दिखी है, यानी 0.01 डॉलर प्रति लीटर. लेकिन मार्केट प्राइस फॉर्मूला से थोड़ा कम है. कोई बड़ा संकट नहीं, लेकिन ग्लोबल क्राइसिस से ट्रांसपोर्ट और इकोनॉमी पर दबाव है.

भूटान और मालदीव में कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं

भूटान में डीजल INR 61.69 प्रति लीटर (करीब 70 BTN) है, जो भारत से इंपोर्ट पर निर्भर है. मालदीव में भी कीमतें हाई हैं लेकिन स्पेसिफिक मार्च 2026 डेटा में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा. दोनों देशों में भारत की सप्लाई से स्थिरता है.

कुल मिलाकर, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां कीमतें तेज बढ़ीं और सप्लाई पर राशनिंग लगी. नेपाल और श्रीलंका में कीमतें बढ़ीं लेकिन सप्लाई ठीक है. भारत ने घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाकर और रूस-अमेरिका से इंपोर्ट डाइवर्सिफाई करके कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन पड़ोसियों पर युद्ध का असर साफ दिख रहा है. ऑयल प्राइस 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, इसलिए आगे और दबाव बढ़ सकता है.