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चमकते फलों में होता है जहरीला पदार्थ, खाने से पहले ऐसे करें साफ

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बिहार के एक जाने माने केंद्रीय मंत्री हैं राम विलास पासवान. एनडीए सरकार में केंद्रीय उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री हैं. अभी कुछ दिनों पूर्व ही उन्होंने दिल्ली के खान मार्केट से सेब मंगाया. लेकिन पासवान के घर जो सेब पहुंचा उसमें काफी अधिक मात्रा में वैक्स लगा था. जिसके बाद इसकी जांच होने लगी. लेकिन क्या आपको ये बात पता थी कि मार्केट में मिलने वाला चमचमाता सेब नैचुरली वैसा नहीं होता. न की कश्मीर के सेब इतने चमकीले होते हैं. बल्कि इन पर केमिकल वैक्स की परत चढ़ाकर बेचा जाता है.

दुकानदारों को भी पता है कि खरीददार चमकने और ज्यादा सुंदर दिखने वाले सेबों की तरफ ही आकर्षित होगा. इधर खरीददार भी सोचता है कि कितना साफ-सुंदर और हेल्दी सेब खरीद रहे हैं.

हालांकि फलों पर तीन तरह के वैक्स के इस्तेमाल की अनुमति होती है

आयात होने वाले फलों पर जेनरली वैक्स लगा होता है. लेकिन एडिबल कलर की तरह ही ये वैक्स एडिबल यानी खाने वाले होते हैं. ये तीन तरह के होते हैं और इनका यूज भी एक से दो बूंद ही होता है.

ऊपर से यह भी अनिवार्य है कि सेब पर यह लिखा हो कि इसमें वैक्स की कोटिंग है.फलों में इस्तेमाल होने वाले इन वैक्स को मधुमक्खी के छत्ते से निकलने वाले वैक्स से भी तैयार किया जाता है. लेकिन घरेलू बाजारों में सब्जियां और फलों को चमकाने के लिए पेट्रोलियम लुब्रिकेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है. ये स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह होते हैं.

वैक्स हटाने के तरीके

  • अगर आप ये सोच रहे हैं कि सेब को छील कर खाने से वैक्स हट जाएगा तो यह पूरी तरह सही नहीं है. इसलिए सबसे बढ़िया तरीका है कि सेब को काफी गर्म पानी में एक मिनट के लिए डालकर छोड़ दें. फिर निकालकर साफ तौलिए से पोछकर अलग रख दें.
  • आप पानी में नींबू के रस और बेकिंग सोडा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • इसके अलावा पानी में शिरका या एसीवी का भी उपयोग कर सकते हैं.

3 हजार का चालान कटा तो जूनियर इंजीनियर ने कटवा दी चौकी और थाने की बिजली

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नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर का चालान काटना चौकी और थाने के लिए महंगा पड़ गया. गुरुवार को तेजगढ़ी चौराहे पर जेई सोम प्रकाश गर्ग बिना हेलमेट लगाए स्कूटी से जा रहे थे. रास्ते में चौराहे पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल राजेश कुमार ने उन्हें रोका और गाड़ी के कागज दिखाने को कहा. जेई ने अपनी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और आरसी दिखाई. लेकिन उनके पास इंश्योरेंस और पोल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं था और न ही उन्होंने हेलमेट पहन रखा था. चालान कटता देख जेई ने खुद को सरकारी कर्मचारी बताया. लेकिन फिर भी उनका तीन हजार का चालान काट दिया गया. जिससे नाराज जेई ने थाने और चौकी की बिजली कटवा दी.

इस दौरान जेई और हेड कॉन्स्टेबल में सड़क पर जमकर बहसबाजी हुई. इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में जेई यह कहते नजर आ रहे हैं कि पुलिस कौन से नियम का पालन करती है. पुलिस चौकी और थाने पर लाखों का बिजली बिल बकाया है. जिसके बाद जेई ने फोन कर के लाइनमैन को बुला लिया. पहले तेजगढ़ी चौकी और फिर मेडिकल थाने की बिजली काट दी गई.

देर शाम जोड़ी गई बिजली

बिजली कटते ही पुलिस विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया. इंस्पेक्टर ने पता किया तो जेई की स्कूटी का चालान काटने के बदले में बिजली काटने की बात सामने आई. फिर इंस्पेक्टर ने बिजली विभाग के बड़े अफसरों से संपर्क कर बिजली जुड़वाने की गुहार लगाई. इसके बाद देर शाम बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई. इंस्पेक्टर ने बताया कि थाने का 27 हजार रुपए का बिल भुगतान नहीं हुआ है. चौकी के बिल की जानकारी उनके पास नहीं है.

अधीक्षण अभियंता ने कही जांच की बात

उधर मेल में अधीक्षण अभियंता ए.के पाठक ने कहा कि जेई ने बकाया बिल होने पर मेडिकल थाने और तेजगढ़ी चौकी की बिजली कटवा दी थी. उच्च अधिकारियों से बातचीत और बकाया जमा करने के आश्वासन पर कनेक्शन दोबारा जुड़वा दिया गया. चालान काटे जाने के विरोध में बिजली काटने की जांच कराई जाएगी.

21 साल की युवती को सांप ने काटा, डॉक्टर के मृत बताने के बाद श्मशान में लौटी सांसें

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कहते हैं कि मरा हुआ इंसान फिर जिंदा नहीं हो सकता लेकिन राजथान के भरतपुर में इस हकीकत को झुठलाने वाला मामला सामने आया है. यहां के रुदावल कस्बे ) की रहने वाली 21 वर्षीय युवती श्वेता को सर्पदंश के बाद भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था. लेकिन जब उसके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी तभी श्मशान घाट में उसकी सांसें लौट आईं. इस घटना के बारे में पहले तो किसी ने यकीन नहीं किया लेकिन जब श्वेता को लेकर उसके परिजन वापस लौटे तो घर पर लोगों की भीड़ लग गई. वहीं इससे जुड़ी एक और अजीबोगरीब घटना घटी, जब श्वेता को मृत घोषित करने के बाद श्मशान घाट ले जाया गया तो घर पर एक नाग-नागिन का जोड़ा नाचता देखा गया. महिलाओं ने इसकी सूचना श्मशान घाट पहुंचे परिजनों को भी दी. इसके बाद जब उन्होंने श्वेता की नब्ज टटोली तो उसे जिंदा पाया गया.

श्मशान घाट में नब्ज मिली तो गोठियाओं से करवाया उपचार
परिजन श्वेता की सांसें लौटने के बाद उसे श्मशान घाट से वापस घर लेकर लौटे. यहां देवताओं के गोठियाओं (सर्पदंश का कथित उपचार करने वाले) से उपचार करवाया जा रहा है. फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है.

घर पर नाचते दिखे नाग-नागिन, श्मशान में ‘मृत’ श्वेता की सांसें लौटीं 

जानकारी के अनुसार श्मशान घाट में जिस समय श्वेता के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी उसी वक्त उसके घर पर एक नाग-नागिन का जोड़ा नजर आया. कथितरूप से यह जोड़ा घर में नाच रहा था और उसे देखकर घर की महिलाओं ने श्मशान घाट गए परिजनों को फोन कर इसकी जानकारी दी थी. इसी दौरान चमत्कारिक रूप से मृत घोषित कर दी गई श्वेता की सांसें लौट आई.

रुदावल कस्बे में आग की तरह फैली खबर
सांप काटने की यह घटना गुरुवार सुबह रुदावल कस्बे की शीतला कॉलोनी में हुई. श्वेता को घर पर सांप ने काटा था. उसे फौरन भरतपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद श्मशान में उसकी सांसें लौट आने की खबर पूरे कस्बे में आग की तरह फैल गई. इस अजीबोगरीब वाकये के बाद उनके घर पर लोगों की भीड़ लग गई.

मुंबई में चार मंजिला इमारत का हिस्सा गिरा, राहत एवं बचाव कार्य जारी

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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) से इस वक्त बड़ी खबर आ रही है. शहर के लोकमान्य तिलक रोड पर स्थित चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिर गया है. घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की सात गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं. राहत एवं बचाव कार्य जारी है. इस घटना में अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने बताया कि लोकमान्य तिलक रोड पर जिस चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरा है, उसमें कोई भी फंसा हुआ नहीं है. उन्होंने बताया कि यह इमारत पहले से ही खाली थी. खतरा के अंदेशा को ध्यान में रखकर बीएमसी ने इसे पहले ही खाली करा लिया था.

छत्तीसगढ़ : धमकी के बाद स्टेशन में सुरक्षा की सुरक्षा बढ़ाने कवायद

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दुर्ग रेलवे स्टेशन को बस से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद रेलवे प्रशासन स्टेशन की सुरक्षा को लेकर गंभीर हो गया है। बुधवार को डीआरएम कार्यालय रायपुर से आए अफसरों ने रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। अफसरों ने सुरक्षा के लिहाज से 50 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने योजना बनाए जाने के निर्देश दिए।

पाकिस्तानी संगठन जैश ए मोहम्मद द्वारा दुर्ग रेलवे स्टेशन को आठ अक्टूबर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। धमकी भरा पत्र मिलने के बाद रेल प्रबंधन स्टेशन की सुरक्षा को लेकर कवायद शुरू कर दी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को रायपुर रेल मंडल के अधिकारी निरीक्षण के लिए दुर्ग स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने स्टेशन का निरीक्षण कर 50 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने हेतु चि-ति करने कहा है। वहीं आरपीएफ का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से स्टेशन परिसर में नए स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने की पहल उनकी ओर से की जा रही है। हांलाकि टीम के दुर्ग स्टेशन पर पहुंचने के संबंध में स्थानीय अफसरों ने अनभिज्ञता जताई है।

स्टेशन में सुरक्षा जांच जारी

आतंकी हमले की धमकी के बाद स्टेशन में सुरक्षा को लेकर एहतियात बरता जा रहा है। आरपीएफ की टीम ने बुधवार को स्टेशन में सुरक्षा की जांच के लिए सघन अभियान चलाया। सुरक्षा जांच के लिए डॉग स्कायड की मदद ली गई। यात्री प्रतीक्षालय में यात्रियों के सामानों की जांच की गई। इसके अलावा स्टेशन परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों पर भी नजर रखी जा रही है।

योजना बनाई जाएगी

स्टेशन परिसर में सुरक्षा के लिए योजना बनाई जा रही है। कुछ और स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाना है। आतंकी हमले की धमकी के बाद स्टेशन परिसर में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को भी यह अभियान जारी रहा।

-पुरुषोत्तम तिवारी, प्रभारी आरपीएफ

छत्तीसगढ़ : डिपो के कर्मचारियों का कमाल, रेलवे के कबाड़ से बना दी नई बोगी

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कहते हैं जब राहें मुश्किलों से भरी हों तो इंसान उससे पार पाने के लिए नए-नए प्रयोग करने में जुट जाता है। आखिकार खुद की इच्छा शक्ति की बदौलत चमत्कार कर बैठता है। कुछ ऐसा ही हुआ मंडल के भिलाई डिपो में, जहां रेलवे कर्मचारियों ने अपने इंजीनियर के साथ मिलकर जुगाड़ तकनीक खोज डाली। वे रेलवे के कबाड़ से नए मालगाड़ी के नए वैगन तैयार कर लिये। इसके लिए उन्होंने एक नहीं बल्कि 20 से अधिक बार प्रयोग किए। उन्होंने अपनी जुगाड़ तकनीक को बोगी साईफ्रेम फिक्सर नाम दिया है।

इसके मास्टर माइंड थे, भिलाई डिपो के वरिष्ठ अनुभाग इंजीनियर बलाई सील। इन्होंने अपनी टीम के सदस्य जी राजेश, चंदू, श्रीनाथ बाबू, रेवा राम, राम रतन के साथ अब डिपो में कबाड़ से नए वैगन बनाने के लिए एक अलग से अनुभाग भी बना लिया है।

इनके कारनामे की खबर डीआरएम कौशल किशोर को लगी तो वे इंजीनियरिंग शाखा के सदस्यों के साथ डिपो में पहुंचे। उन्होंने डिपो में इस तकनीक से नए वैगन बनाने के लिए हरी झंडी दे दी। इसके साथ ही मंडल भिलाई के इस नए अविष्कार की सूचना भारतीय रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। मंडल के मुताबिक जल्द ही इस तकनीक को पूरे देश में रेलवे के डिपो में अपनाया जाएगा।

बनाने में कीमत नहीं, बल्कि काम के आठ घंटे की लागत

बोगी साईफ्रेम फिक्सर तकनीकी से कम समय और कम लागत में वैगन तैयार किए जाएंगे। क्योंकि मालगाड़ी के एक नए वैगन का बाजार मूल्य करीब ढाई लाख रुपये है। इस तकनीकी से महज आठ घंटे में तैयार कर दिया जाता है। लागत के नाम पर सिर्फ डिपों में रेलवे के कलपुर्जे और पुराने वैगन के पार्ट्स हैं, जिसे फिक्सर सिस्टम के जरिए जोड़कर नए वैगन तैयार कर देते हैं।

एक साल लग जाते थे नए वैगन मिलने में, तब सोची कुछ नया करने की

भिलाई डिपो के वरिष्ठ अनुभाग इंजीनियर बलाई सील ने बताया कि मालगाड़ी के लिए नए वैगन की खरीदी करने में एक साल का समय लग जाता था क्योंकि यहां से डिमांड जाने के बाद बजट आदि के जारी होने में काफी समय लग जाता था। ऐसे में मालगाड़ी के वैगनों की आपूर्ति नहीं हो पाती थी। इसके बाद हमने सोचा कि क्यों न पुराने और रिजेक्ट हो चुके वैगन के अच्छे हिस्सों के इस्तेमाल से वैगन तैयार किया जाए। फिर क्या था, टीम वर्क की मेहनत ने रंग लाई।

अब कबाड़ से 150 वैगन बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित, रेलवे के बचेंगे डेढ़ करोड़ रुपये

अब रेलवे के पुराने कोच और वैगन के कबाड़ से नए वैगन बनाने का लक्ष्य भी तय कर लिया गया है। ऐसे में मंडल के मुताबिक करीब सलाना डेढ़ से दो करोड़ रुपये की बचत होगी। अभी तक नए वैगन की खरीदी के लिए रेलवे से 20 करोड़ रुपये फंड की जरूरत होती थी।

सालाना डिपो में डेढ़ हजार बोगियों की होती है मरम्मत

आरओएच डिपो में पीपी यार्ड भिलाई में 750 प्रति माह आरओएच एवं लगभग 1500 बोगियों की मरम्मत की जाती है। इनसे निकलने वाले पुर्जों को इस्तेमाल में लाया जा रहा है। दो रिजेक्टेड बोगी के हिस्सों के सही पार्ट्स को निकालकर एक में फिक्स कर दिया जाता है।

– इस तकनीक के इस्तेमाल से अब काफी संख्या में हम अपने डिपो में नए वैगन बना सकते हैं। आने वाले समय में इसे देश के सभी डिपो अपनाएंगे। इसके लिए इंजीनियरों की टीम बधाई का पात्र है। – कौशल किशोर, डीआरएम, रायपुर मंडल

अंतरराष्ट्रीय क्रेता- विक्रेता सम्मेलन का आज CM भूपेश करेंगे उद्घाटन

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राजधानी रायपुर में शुक्रवार से अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन शुरू होगा। जापान, पोलैंड, जर्मनी, सिंगापुर सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल। जीई रोड स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम का सुबह साढ़े 10 बजे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उद्धाटन करेंगे। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविंद्र चैबे और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार उपस्थित रहेंगे। आयोजन 22 सितंबर तक चलेगा।

कृषि उपज, वनोपज, हैंडलूम और कोसा की होगी मार्केटिंग

छत्तीसगढ़ के कृषि उपज, वनोपज, हैंडलूम, कोसा इत्यादि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन-विक्रय को बढ़ावा देने के लिए इसका आयोजन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध विशेष गुणों से भरपूर फसलों अनाज, दलहन, तिलहन, वनोपज और साग-सब्जी इत्यादि उत्पादों की ब्रांडिंग की जाएगी।

देश- विदेश से आएंगे क्रेता

इस सम्मेलन में 19 देशों के अंतरराष्ट्रीय स्तर के लगभग 62 क्रेता, देश के अन्य प्रदेशों से लगभग 60 क्रेताओं और प्रदेश से लगभग 120 विक्रेताओं के भाग लेने की संभावना है। सम्मेलन 22 सितंबर को आम जनता के लिए प्रदर्शनी के अवलोकन तथा क्रय-विक्रय के लिए खुला रहेगा।

छत्तीसगढ़ में डेढ़ साल से अटका है आयुष दवाओं का टेंडर

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 डेढ़ साल से आयुष दवाओं के टेंडर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। वैसे इसकी खरीदी के लिए अलग-अलग वेरायटी की आयुष दवाओं के टेंडर को फाइनल करने के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन (सीजीएमसी) ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी, लेकिन एक ही फर्म के आगे आने पर नियम और शर्तों के चलते मामला अटका पड़ा है।

ऐसे में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के अस्पताल के अलावा प्रदेश के अन्य आयुष के अस्पतालों में जरूरी दवाओं की कमी हो गई है। ऐसे में अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बाहर से दवाएं लेनी पड़ती हैं। आयुष कंपनियों से निर्मित एक हजार प्रकार की दवाएं आयुर्वेदिक अस्पतालों में पहुंचाने का प्रावधान है, लेकिन सिर्फ देखा जाए तो आयुष के अस्पतालों में महज 20 प्रकार की ही आयुर्वेदिक दवाएं मौजूद हैं।

उदाहरण के तौर राजधानी के शासकीय आयुर्वेद अस्पताल में सामान्य बीमारियों के अलावा पंचकर्म तक के दवाएं नहीं हैं। यहां के डॉक्टर मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की भी सलाह देते हैं।

वहीं चौंकाने वाला तथ्य है यह कि जिन दवाओं की यहां आपूर्ति की जाती है, उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगा है यानी अधिकांश ऐसी वेरायटी की दवाएं हैं, जिनकी आपूर्ति करने वाली कंपनियां खुद के घाटे को पूरा करने के लिए दवाओं की गुणवत्ता से समझौता कर लेती हैं। वैसे पूर्व में भी दवाओं की आपूर्ति के प्रकरण में कई घोटाले भी सामने आ चुके हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक करीब 350 से अधिक आयुष दवाओं की आपूर्ति पिछले साल से ही बंद हैं।

आयुर्वेदिक शासकीय अस्पताल में 20 वेरायटी

आयुर्वेदिक अस्पताल में 1000 प्रकार की दवाएं पहुंचती हैं, जो कई बीमारी के इलाज में कारगर साबित होती हैं, मगर अभी यहां केवल 20 प्रकार की दवाएं मौजूद हैं। आयुर्वेद में काढ़ा की अधिक उपयोगिता मानी जाती है, मगर यहां केवल चूर्णयुक्त दवा ही है। दवाओं में सितोपलादी, त्रिकूट, अर्जुन चूर्ण, अष्टांग लवण, दाडिमांक, त्रिफला, रास्ना सप्तक, दशमूल, मैंसूफोर्ट, टंकण क्षार, लवंग, शतावरी, अमलकी समेत करीबन 20 प्रकार के औषधि रखी गई हैं।

सब रोगों में काम करने वाली ही औषधि देते हैं

दवाओं के नाम पर ऐसी भी शिकायत है कि शासकीय आयुर्वेद अस्पताल में प्रमुख रोग की दवाएं तो मौजूद नहीं है। लेकिन मरीज की दिलासा के खातिर जो स्वास्थ्य वर्धन जैसी दवाएं, जिसमें पेट साफ के सामान्य दवाओं को अस्पताल के औषधि केंद्र से लेने के लिए लिख देते हैं। बाकी अन्य दवाओं को बहार से लेने की सहाल दी जाती है। इसमें डॉक्टरों की भी मजबूरी हैं, जो दवाएं यहां नहीं हैं। उन्हें बाहर से लेने के लिए कहना पड़ता है।

इधर सीजीएमसी का दावा टेंडर प्रक्रिया दस दिन में फाइनल हो जाएगा

इधर, सीजीएमसी के एमडी भुवनेश यादव का दावा है कि 20 से अधिक टेंडर की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। इनके फाइनल नहीं होने के पीछे कारण था कि सिर्फ एक ही कंपनी टेंडर में शामिल हुई थी। इस वजह से पूरा नहीं हो पा रहा था।

रायपुर एम्स में यूनानी पद्धति से होगा अब गठिया और गर्दन दर्द का इलाज

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संसथान ( एम्स) रायपुर के यूनानी चिकित्सा विभाग ने कपिंग थैरेपी की सुविधा गुरुवार से प्रारंभ कर दी। इससे गठिया, गर्दन दर्द समेत विभिन्ना बीमारियों का इलाज होगा। पहले ही दिन 500 मरीजों का इलाज किया गया।

यूनानी चिकित्सा विभाग में कार्यरत डॉ. अदनान मस्तान ने बताया कि कपिंग थैरेपी वैकल्पिक चिकित्सा का एक प्राचीन रूप है। इसके अंतर्गत त्वचा पर एक स्थानीय सक्शन बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और उपचार में मदद मिलती है।

इस थैरेपी से ऊतक संपीडन के बजाय नकारात्मक दबाव का उपयोग करती है। सक्शन कप थैरेपी एक पारंपरिक, समय से सम्मानित उपचार है जो दुनिया भर में लाखों लोगों का पसंदीदा है, क्योंकि यह सुरक्षित, आरामदायक है और उल्लेखनीय परिणाम देता है।

इन रोगों का किया जा रहा उपचार

घुटने के पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस, पीठ दर्द और काठ का दर्द (लम्बागो), सरल गठिया, गठिया और मस्कुलोस्केलेटल दर्द, फाइब्रोमायल्गिया और फाइब्रोसाइटिस, गर्दन और कंधे में दर्द, सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस, दर्दनाक तनाव, मोच, प्लांटार फासिसाइटिस, उच्च रक्तचाप, चर्बी का ज्यादा होना, सिरदर्द और माइग्रेन, कार्पल टनल सिंड्रोम, क्रोनिक साइनोसाइटिस (एंटीबायोटिक प्रतिरोधी क्रोनिक साइनोसाइटिस), ओटिटिस मीडिया, त्वचा की सभी बीमारी में, सफेद दाग, गंजापन एवं बालों का झड़ना, सोरायसिस, थायराइड की शिथिलता, हार्मोनल असंतुलन की स्थिति, थैलेसीमिया, सेल्युलाइटिस का इलाज किया जा रहा है।

गरीब की बेटियों को गोद लेकर उन्हें पाल रही किन्नर गुडिया…

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वाराणसी के जलीलपुर के एक बुनकर परिवार में जन्मी गुड़िया के घर वालों को जब पता चला कि वो किन्नर है तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पर घर वालों ने गुड़िया का साथ दिया। गुड़िया बचपन में खाना बनाते समय जल गयी थी। उनका बदन का आधा हिस्सा जला हुआ है।

जला हुआ शरीर मेरी रोजी रोटी के आड़े आने लगा जहां मैं गुरु के साथ बधाई गाने जाऊं तो लोग कहें कि आदमी मरने के बाद जलता है तुम तो शमशान से आ रही हो। गुरु का काम खराब होने लगा था जिसपर मैंने गुरु को बताकर बधाई गाना छोड़ दिया और ट्रेन में भीख मांगने लगी ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारगुड़िया ने अपने बड़े भाई की मदद से और अपनी कमाई के पैसे से अपने घर मे एक पावर लूम लगा लिया । गुड़िया की वजह से भाई के परिवार में भी अंशाति होने लगी तो उसने भाई का घर छोड़ दिया और यहां जमीन लेकर मकान बनवा लिया । गुड़िया ने भाई की बड़ी बेटी, जो दिव्यांग है, उसे गोद ले लिया है । उन्हे पढ़ा रही है।

गुड़िया ने 4 साल पहले कैंट के लक्ष्मी मेडिकल हॉस्पिटल से एक घंटे की एक लडकी को गोद लिया है । जिसे गुड़िया स्कूल भेज रही है ।

गुड़िया बताती है कि मैं जैनब को डॉक्टर बनना चाहती हूं । इसलिए उसे पढ़ा रही हूं। लोग लड़कियों को कम आंकते हैं पर यही मेरे जीवन का सहारा हैं। गुड़िया किन्नर समाज मे अपना एक मुकाम बना चुकी हैं। समाज मे गलत निगाह से देखे जाने वाले किन्नर के घर से आज चार बेरोजगारों को काम मिल है और वो बुनकरी करके अपना पेट भर रहे हैं ।