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राशन कार्ड नहीं बना तो हो जाइए खुश, मिलेगा 35 किलो चावल जल्द से जल्द करें ये काम

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राशन कार्ड भारतीय रियायती दर पर खाद्य और ईंधन (एलपीजी और केरोसिन) की खरीद के लिए मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है ‘यह की गरीबों को पहचान उपलब्ध कराने के सबूत और सरकार डेटाबेस के साथ एक कनेक्शन के लिए एक महत्वपूर्ण निर्वाह उपकरण है। भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की पहचान, पात्रता , और पात्रता के अपने कार्यों सहित, राशन कार्ड के आधार पर चल रही है
अब एक बड़ी खुशखबरी उन लोगों के लिए निकल कर आ रही है। जिनका अभी तक राशन कार्ड नहीं बना हुआ है कि, अब राशन कार्ड बनवाने का चांस उन लोगों को मिल रहे हैं। जिनका राशन कार्ड नहीं बना है तो इस खबर को आखिर तक जरूर पढ़ लीजिए।
मिलेगा 35 किलो चावल
मोदी सरकार के निर्देश अनुसार इस नियम को लागू किए जाने के बाद अब 35 किलो तक चावल मिल पाएगा। आपकी जानकारी के लिए बताते हैं कि, अगर घर में 1 सदस्य हैं तो उसको 10 किलो चावल दिया जाएगा। अगर 3 सदस्य हैं तो 20 किलो चावल दिया जाएगा और, अगर 3 से 5 के बीच व्यक्ति है तो 35 किलो चावल दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त जितने भी आपके घर में होंगे उनको 7.7 किलोग्राम चावल दिया जाएगा।
यहां के निवासी बनवाए राशन कार्ड
दरअसल 7 लाख आयकर दाताओं के लिए और गैर कथाओं के लिए राशन कार्ड बनाने का सुनहरा अवसर आया है। आपको छत्तीसगढ़ का निवासी होना जरूरी है, मोदी सरकार के निर्देश अनुसार छत्तीसगढ़ में यह फैसला किया गया है। क्योंकि वहां के ऐसे कई लोग हैं। जिनका राशन कार्ड नहीं बना हुआ है ऐसे 7 लाख लोगों का राशन कार्ड बनवाने की तारीख 6 सितंबर 2019 रखी गई है तो, अगर आपका राशन कार्ड नहीं बना है और छत्तीसगढ़ के निवासी हैं तो, राशन कार्ड बनवा लीजिए और अतिरिक्त चावल का लाभ उठाइए

प्याज खाने वालों के लिए ये खबर बुरी- शौक़ीन रोयेंगे खून के आंसू

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यदि आप भी खाते है प्याज तो आपके लिए आई ये बुरी खबर। जैसा कि आप सभी जानते है, कि आज के समय में ज्यादातर लोग प्याज खाना ज्यादा पसंद करते है। क्योंकि प्याज सब्जियों का जायका बढ़ा देता है, और साथ ही सेहद के लिए भी लाभदायक होता है, तो यदि आप भी प्याज खाते है, तो आपके लिए एक बुरी खबर आई है। तो वो क्या बुरी खबर आई है। आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देंगे, तो आइये जानते है।

प्याज खाने वालों के लिए ये बुरी खबर प्याज महंगा होने को लेकर आई है। दरअसल कई दिनों से प्याज का भाव जिस तेजी से बढ़ रहा है वह अभी शुरूआत है। आगामी तीन-चार माह तक प्याज अपने शौकीनों को तेज आंसू बहाने पर विवश करेगा।

अभी प्याज मार्किट में 40 से 50 रुपये किलो बिक रहा है।

दोस्तों यही हालत रही तो प्याज का भाव 100 तक पहुंच सकता है। व्यापारियों की मानें तो अनवरत बारिश से प्याज की फसल काफी बर्बाद हुई है। इससे प्याज महंगा होने की ज्यादा संभावना है।

मोदी सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। प्याज की कीमतों के मद्देनजर उपभोक्ता मामलों (DoCA) के सचिव अविनाश के श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हाल ही में अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में निर्णय लिया गया है, कि सफल स्टोर केवल 23.90 रुपये प्रति किलो के दाम पर ग्रेड ए प्याज बेचेगा।

बीजेपी अध्यक्ष की कंपनी पर पड़ी मंदी की मार, 4000 कर्मचारियों को किया बाहर

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लोढ़ा ग्रुप के फाउंडर और बीजेपी विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा (62) देश के सबसे अमीर बिल्डर हैं. उनके पास 27,150 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अनुमान है. अब बीजेपी के अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा की कंपनी पर भी मंदी की मार देखने को मिल रही है. कर्ज के बढ़ते बोझ और बिक्री में गिरावट की वजह से मंगल प्रभात लोढ़ा की कंपनी ने बड़ी संख्या में छंटनी कर दी है. कंपनी पर कर्ज का बोझ 25,600 करोड़ रुपए को पार कर चुका है.

हालांकि, देश के सबसे बड़े रीयल एस्टेट समूह ने कहा है कि इन कर्मचारियों की छंटनी उनके कामकाज के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद की गई है. मुंबई भाजपा अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा प्रवर्तित कंपनी में कर्मचारियों की छंटनी ऐसे समय की गई है जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर छह साल के निचले स्तर पांच प्रतिशत पर आ गई है. दो वैश्विक रेटिंग एजेंसियों मूडीज इन्वेस्टर्स एंड सर्विस तथा फिच रेटिंग्स ने लोढ़ा समूह की रेटिंग को नकारात्मक परिदृश्य के साथ नीचे किया.

फिच की इकाई इंडिया रेटिंग्स द्वारा हाल में जारी रेटिंग में कहा गया है कि बीते वित्त वर्ष 2018-19 में मैक्रोटेक का कर्ज 13 प्रतिशत बढ़कर 25,640 करोड़ रुपए पर पहुंच गया. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘मैक्रोटेक ने अपनी विभिन्न परियोजनाओं में करीब 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दिया है. मौजूदा छंटनी सालाना प्रदर्शन के आकलन का हिस्सा है.’ सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने मध्यम से कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों को बाहर किया है. फिलहाल लोढ़ा ग्रुप की 42 आवासीय परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं.

सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस में शामिल हुईं अलका लांबा

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आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अलका लांबा ने अब कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया है. उन्होंने पहले ट्वीट कर कांग्रेस में शामिल होने के बारे में ऐलान किया था और शुक्रवार शाम को सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद वह कांग्रेस में शामिल भी हो गईं. चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा शाम को कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया से मिलने गईं और वहीं पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर लिया.

इससे पहले अलका लांबा ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी और कहा, ‘आज शाम 6 बजे, 10 जनपथ पहुंच कर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करुंगी.’

इससे पहले दिल्ली के चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने आज सुबह आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘AAP को गुड बाय कहने का समय आ गया है. पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. पिछले 6 साल की यात्रा मेरे लिए काफी सिखाने वाली रही.’

पिछले दिनों मंगलवार को अलका लांबा ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. तभी से यह कयास लगने लगा था कि अलका लांबा जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं.

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अलका लांबा पिछले कुछ महीनों से आम आदमी पार्टी के साथ कई मुद्दों पर खुलकर भिड़ती नजर आ रही थीं. पिछले महीने लांबा ने कहा था कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया है और वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी.

लांबा के जवाब में आम आदमी पार्टी ने कहा था कि वह उनका इस्तीफा स्वीकार करने के लिए तैयार है.

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अलका लांबा ने पार्टी की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से हार के लिए जवाबदेही मांगी थी, जिसके बाद उन्हें पार्टी सदस्यों के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया था.

‘मोदी-शाह मेरी जेब में हैं, मुनाफ पटेल ने कहा और जान से मारने की धमकी दी’

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वर्ल्डकप 2011 में युवराज सिंह मैन ऑफ द सीरीज रहे. सचिन ने हमेशा की तरह रन बनाए. बॉलिंग में सब लोग जहीर, जहीर कर रहे थे. मगर एक बॉलर था जो चर्चा में तो कम रहा. मगर उसने कई मैच निकाले. 8 मैचों में 11 जरूरी विकेट लेकर. सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ तो मुनाफ बंपर चले थे. 10 ओवर में 40 रन देकर 2 विकेट लिए थे. विकेट भी हफीज और रज्जाक के थे. फिलहाल गुजरात का ये क्रिकेटर गायब हो गया था. मगर अब एक खबर आई है. उन पर एक व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है. वडोदरा क्रिकेट हित रक्षक समिति के सदस्य देवेंद्र सुरती ने पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.

कारण क्या?

देवेंद्र सुरती ने शिकायत में कहा है कि उनका संगठन वडोदरा क्रिकेट हित रक्षक समिति वडोदरा क्रिकेट एसोसिएशन में अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रहा है. मुनाफ पटेल ने हमारे अभियान को खत्म करने के लिए कुछ गलत हरकतें कीं, जिन्हें हमने अखबार में खबर के रूप में निकलवाया. इस पर मुनाफ ने मुझे फोन पर जान से मारने की धमकी दी.

मुनाफ ने काफी वक्त तक भारत के लिए क्रिकेट खेला.

शिकायत में यह भी कहा गया है कि शहर में हमने क्रिकेट हित रक्षक समिति के बोर्ड लगाए, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को धन्यवाद दिया था. उस समय भी मुनाफ ने हमें धमकी दी थी. कहा था –

तुम्हारे मोदी और अमित शाह मेरी जेब में है. यह सारे धंधे बंद कर दो.

अब आप कहेंगे कि मुनाफ क्यों धमका रहे हैं. उन्हें वडोदरा क्रिकेट असोसिएशन से क्या मतलब. तो मुनाफ फिलहाल वडोदरा क्रिकेट असोसिएशन की सीनियर टीम्स के मेंटर हैं. हालांकि मुनाफ ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वो क्यो ये करेंगे. सुरती को टीम में खिलाड़ियों के सेलेक्शन से दिक्कत है. क्योंकि मैं सिर्फ मेंटर हूं, तो इसमें मेरा कोई रोल नहीं होता. मुझे इसमें जबरन खींचा जा रहा है.

जिस थाने में ये शिकायत पहुंची है, इस नवपुरा थाने के इंस्पेक्टर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सुरती ने अभी सिर्फ एप्लीकेशन दी है. इसमें कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.

पाकिस्तान से एक नया खतरा, जानवरों पर भी है कड़ी नजर, सीमा पर अलर्ट

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पाकिस्तान से एक बार फिर भारत को नया खतरा पैदा हो गया है. बीएसएफ के जवानों की बार्डर पर दुश्मनों के साथ-साथ वहां के जानवरों पर भी कड़ी नजर है. इस बार खतरा पाकिस्तान के जानवरों से है. पाकिस्तान में फैले कांगो हेमेरेजिक फीवर ने भारत में भी पैर पसारने का खतरा पैदा कर दिया है.

भारत सरकार और राजस्थान सरकार ने बॉर्डर से सटे सभी इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है. पाकिस्तान में इस रोग के फैलने के बाद राजस्थान के चिकित्सा विभाग ने बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और जोधपुर के इलाके में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेज दी है.

कांगो हेमेरेजिक फीवर

गुजरात में भी क्रीमियन कांगो हेमेरेजिक फीवर बीमारी (सीसीएचएफ) फैलने का खतरा पैदा हो गया है. इसके रोगियों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार भी चिंतिति है और सरकार ने भी नेशनल सेंटर डिसीज ऑफ कंट्रोल की 2 सदस्य टीम को स्थिति का जायजा लेने के लिए राजस्थान भिजवाया है.

राजस्थान से लगते पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सीसीएचएफ कांगो रोग के अब 45 रोगी सामने आ चुके हैं, जिसमें 16 की मौत हो चुकी है. यह रोग अब भारत के लिए खतरा बनता जा रहा है. इस रोग के 2 संदिग्ध रोगी जोधपुर में मिले हैं. हालांकि, उनमें कांगो रोग की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चिकित्सक संदेह जता रहे हैं कि उनमें कांगो रोग हो सकता है. इसके अलावा बाड़मेर के एक रोगी की जोधपुर में मृत्यु हुई है, उसमें भी कांगो रोग के कीटाणु होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

वायरस फैलने का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान से भारत आ-जा रहे लोगों में इस बीमारी का वायरस फैलने का खतरा है. सीमा पार कर आ रहे मवेशी और पालतु पशुओं से भी अब खतरा जताया जा रहा है.

बता दें कि राजस्थान के पाकिस्तान से लगती सीमा पर कई बार मवेशी इस पार आ जाते हैं. इन मवेशियों के शरीर पर सीसीएचएफ वायरस की वाहक हायलोमा चींचड़ चिपके रहने से वायरस के भारत के मवेशियों पर आने की आशंका रहती है.

पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर जिले में कांगो फीवर के दो मामले सामने आए हैं. जोधपुर के एक शख्स का गुजरात के अहमदाबाद में हुए टेस्ट में सामने आया कि उसे कांगो फीवर हुआ है.

क्या हैं बीमारी के लक्षण

मुख्य चिकित्सा अधिकारी भूपेंद्र बारूपाल ने बताया, ‘यह बीमारी हिमोरल नामक परजीवी से फैलती है, इसलिए इसकी चपेट में आने का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है जो गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि जनावरों को पालते हैं. सीसीएचएफ बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रीबावेरीन ज्यादा कारगर नहीं है.

यह एक वायरसजनित बीमारी है. इसमें सबसे पहले तेज बुखार, जी मचली, सिरदर्द, मसल्स, गर्दन व पीठ में दर्द होता है. इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खरास शुरू होने के बाद शरीर में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है.’

तिहाड़ जेल से बैरंग लौटी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, जानें क्‍यों नहीं हुई चिदंबरम से मुलाकात

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कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल जब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात के लिए तिहाड़ जेल पहुंचा तब तक मिलने का समय खत्‍म हो गया था और उन्‍हें वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा।

नई दिल्‍ली, एएनआइ। तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम से मिलने में शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल असफल रहा। दरअसल, शुक्रवार को जब तक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल जेल पहुंची तब तक कैदियों से मुलाकात का समय समाप्‍त हो चुका था।

चिदंबरम से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में मुकुल वासनिक, पीसी चाको मनिक्‍कम टैगोर, अविनाश पांडे व कई अन्‍य नेता शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने जेल सुपरिटेंडेंट से मिलकर चिदंबरम का हाल लिया। प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्‍य ने बताया कि वे चिदंबरम से मिलने कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के कहने पर गए थे।

चिदंबरम की ओर से विशेष सीबीआइ अदालत में तीन आवेदन पेश करके जेल के अंदर जेड-सिक्योरिटी सुरक्षा देने, अलग सेल में रखने, उनके डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई दवाइयां और अपना चश्मा ले जाने, बुजुर्ग होने के कारण पाश्चात्य शैली के टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई। अदालत ने सभी बिंदुओं पर गौर करने के बाद इन सुविधाओं की अनुमति दे दी। पी. चिदंबरम को जिस जेल संख्या सात में रखा गया है, उसे 18 से 20 वर्ष के आयु वर्ग में आने वाले कैदियों के लिए बनाया गया है। अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर से जुड़े मामले में आरोपित रतुल पुरी को भी जेल संख्या सात में ही रखा गया था।

भारत से पहले रॉकेट छोड़ने वाला पाकिस्तान स्पेस प्रोग्राम में क्यों हुआ फेल

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पाकिस्तान लंबी लंबी बातें तो बहुत करता है. अंतरिक्ष को लेकर भी उसने भारत से कहीं पहले अपने स्पेस प्रोग्राम की शुरुआत की थी लेकिन अब तो इस मामले में इतना पिछड़ चुका है कि जब वो अंतरिक्ष या चांद पर जाने की बात करता है तो खुद उसके देश के लोग ही उसकी हंसी उड़ाने लगते हैं. आखिर क्यों पाकिस्तान अंतरिक्ष के मामले में टांय-टांय फिस्स हो गया.

हम सब ये जानते हैं कि भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो दुनिया की सबसे ताकतवर स्पेस एजेंसियों में से एक है. लेकिन क्या आपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपारको के बारे में सुना है.

बहुत कम लोगों को मालूम है कि भारत से कई साल पहले शुरू हुआ था पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम. सुपारको की स्थापना 1961 में हुई थी जबकि इसरो की स्थापना करीब इसके आठ साल बाद 1969 में हुई थी.

साल 1960 में पाक में सबसे बड़े शहर कराची में पाकिस्तान-अमरीकी काउंसिल का लेक्चर चल रहा था. इस काउंसिल के एक वैज्ञानिक ने अपने एक बयान से सबको चौंका दिया थ. उन्होंने कहा था, ‘पाकिस्तान अब स्पेस एज में दाखिल होने वाला है और हम बहुत जल्द ही अंतरिक्ष में एक रॉकेट भेजने वाले हैं.’ ये वैज्ञानिक थे प्रोफ़ेसर अब्दुस सलाम. तब पाकिस्तानी वैज्ञानिक के दावे ने खलबली मचा दी थी
उनके इस बयान ने इस पूरे ‘सब कॉन्टिनेंट’ और अंतरराष्ट्रीय जगत में खलबली मचा दी. दूसरे देशों के वैज्ञानिक पाकिस्तान की ये तरक्की के दावे पर दंग रह गए. ये वही वैज्ञानिक अब्दुस सलाम थे जो आगे चल कर विज्ञान के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार जीतने वाले पहले मुसलमान और पाकिस्तानी बने थे.

अयूब खान जब प्रेसिडेंट बने तो अब्दुस सलाम ने उन्हें पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम को लेकर कई आइडियाज दिए थे. अयूब खान की भी दिलचस्पी इस क्षेत्र में थी, पाकिस्तान को लेकर उन्हें स्पेस में कई संभावनाएं उन्हें नजर आ रही थीं. तारीख 16 सितंबर 1961 को कराची में ‘सुपारको’ यानी पाकिस्तानी ‘स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन’ की स्थापना हुई. इसमें अमेरिका ने भी पाकिस्तान की मदद करनी शुरू की.

पाकिस्तान ने अपना पहला रॉकेट साल 7 जून 1962 में छोड़ा था. इस रॉकेट का नाम ‘रहबर-1’ था. सुपारको के इस रॉकेट का मुख्य मकसद मौसम के बारे में जानकारी जुटाना था. पर भारत इसके करीब एक साल बाद ऐसा कर सका.

इस रॉकेट लॉन्चिंग के बाद पूरे उपमहाद्वीप में पाकिस्तान ऐसा करने वाला पहला मुल्क बन गया था. साथ ही पूरे एशिया महाद्वीप में पाकिस्तान ऐसा तीसरा मुल्क. उस समय वो दुनिया का 10वां मुल्क था, जिसने अंतरिक्ष में सफलता पूर्वक रॉकेट छोड़ा था.

ये वो दौर था जब विज्ञान जगत में अब्दुस सलाम की तूती बोलती थी. जानकार बताते हैं कि जनरल अयूब खान के दौर में पाकिस्तानी स्पेस कार्यक्रम काफ़ी आगे बढ़ा. उन दिनों अमेरिका और पश्चिमी देशों तक ने पाकिस्तान के स्पेस प्रोग्राम को सराहा था. पर पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम का स्वर्णिम दौर केवल दस साल रहा. जनरल याह्या खान और प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो के दौर में प्राथमिकताएं तेज़ी से बदलीं. जनरल जिया-उल-हक और बाद के शासकों के आने के बाद ‘सुपारको’ बिल्कुल ही हाशिए पर चला गया.

फिर क्यों पीछे चला गया पाकिस्तान स्पेस प्रोग्राम
स्पेस प्रोग्राम की फंडिंग में लगातार कटौती होती रही. सुपारको को मिलने वाले पैसे अब सुरक्षा क्षेत्र में खर्च होने लगे थे. ये सिलसिला जनरल जिया-उल-हक में भी ऐसे ही चला. स्थिति ऐसी थी कि सारा पैसा एटॉमिक हथियार हासिल करने में खर्च हो रहा था. हालांकि पाकिस्तान अपने इस एटॉमिक प्रोग्राम काफी गुप्त तरीके से अंजाम दे रहा था ताकि दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगे. भारत पहले ही परमाणु परीक्षण कर चुका था.

पाकिस्तान का सारा फोकस एटम बम, मिसाइल तकनीक और फायटर जेट हासिल करने पर चला गया. जो बेहतरीन वैज्ञानिक थे वे एटोमिक परीक्षण के काम में लग गए और दूसरे मिसाइल बनाने में. और इस तरह पाकिस्तान का स्पेस कार्यक्रम अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चला गया.

1980 के दशक में पाकिस्तान के मशहूर वैज्ञानिक मुनीर अहमद ख़ान ने जिया-उल-हक़ के साथ मिलकर सुपारको में नई जान फूंकने की कोशिश थी. कई नए मिशन लॉन्च किए गए, रिसर्च के लिए पैसे भी दिए गए. लेकिन बात बनी नहीं.

सुपारको असफताओं के चरम पर पहुंच गया
बाद में पाकिस्तान के स्पेस प्रोग्राम में जान डालने की कोशिश तो हुई लेकिन ये चीन की वैसाखियों पर ज्यादा चलाने की कोशिश हुई. पाकिस्तान के पहले सेटेलाइट बद्र-1 को 1990 में चीन से अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था.

बद्र-1 के लॉन्च होते ही पाकिस्तान ने अपने दूसरे सेटेलाइट के लॉन्चिंग पर काम करने लगा. तीन साल तक काम करने के बाद भी सुपारको अपना दूसरे सेटेलाइट को तय समय पर तैयार नहीं कर सका. इसके बाद सुपारको को इसकी लॉन्चिंग रिशिड्यूल करनी पड़ी. फिर यूएस की मदद से 2001 में इसकी लॉन्चिंग हो पाई. इसका नाम पाकसैट-1ई था. पर सेटेलाइट पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ी नाकामयाबी साबित हुई. सुपारको दो सालों में ही इसपर नियंत्रण खो बैठा.

सुपारको के असफल होने के पीछे ये भी वजह है कि आगे चलकर इसके प्रमुख भी वरिष्ठ फ़ौजी अफ़सर होने लगे. रिसर्च का काम धीमा होता गया. मिसाल के तौर पर साल 2001 के बाद से सुपारको के चीफ पाकिस्तान फ़ौज के मेजर जनरल रैंक के अफ़सर होते रहे हैं.

नासा की रिपोर्ट, कोरबा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक

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अंतरिक्ष विज्ञान के लिए दुनिया भर में मशहूर अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने प्रदूषण को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला रिपोर्ट जारी की है । इस रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने दुनिया भर के 50 सबसे प्रदूषित शहरों को सूचीबद्ध किया है। इस सूची में छत्तीसगढ़ के कोरबा और रायगढ़ को शामिल किया गया है। कोरबा को जहां 50 में 17वां स्थान दिया है तो वही रायगढ़ 48 वें पायदान पर है।

. पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस की रिपोर्ट की माने तो कोयले पर आधारित पावर प्लांट के कारण दुनियाभर में प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। दुनिया के 90 फ़ीसदी आबादी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण विश्व संगठन के दिशा निर्देश से भी अधिक है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण हर साल 42 लाख लोग वक्त से पहले मौत के मुंह में समा जाते हैं।

नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार ओजोन मॉनिटरिंग इंस्ट्रूमेंट ने पता लगाया है कि मानव जनित सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन के हॉटस्पॉट की तुलना में भारत में 15% अधिक है। भारत के प्रमुख so2 उत्सर्जन हॉटस्पॉट मध्यप्रदेश के सिंगरौली, तमिलनाडु के नवेली, चेन्नई, उड़ीसा के तालचेर, झारसुगुड़ा, छत्तीसगढ़ के कोरबा, गुजरात के कच्छ, तेलंगाना के रामागुंडम और महाराष्ट्र के चंद्रपुर व कोराड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अधिकतर कोयला आधारित पावर प्लांट में प्रदूषण रोकने के आवश्यक उपाय नहीं किए गए हैं।

ये है भारत के 5 सबसे आमिर गांव, हर व्यक्ति है करोड़ों का मालिक

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1. धर्माज (आनंद, गुजरात ) :

गुजरात के आणंद जिले का धर्माज गांव आज भारत के धनी गांवों में शामिल है। इस गांव की आबादी लगभग 11000 है। इस गांव के ज्यादातर लोग विदेशों में बिजनेस करते हैं। इस गांव में कुल 13 बैंक हैं। यह गांव पढ़ाई के मामले में पहले से बहुत आगे आगे निकल चुका है। यहाँ के लोगो की जिंदगी किसी राजा महाराजा से कम नहीं है। गांव के 1,700 परिवारों के सदस्य ब्रिटेन में रहते हैं, जबकि 300 के परिवार अमेरिका में, 160 के न्यूजीलैंड में, 200 के कनाडा में और 60 परिवारों के सदस्य ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। कुल मिलाकर यहां 3,120 परिवार विदेश में रहते हैं और झोली भर भरकर गाँव में पैसा भेजते हैं।

2. माधोपट्टी (जौनपुर, उत्तर प्रदेश) :

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में सिरकोनी ब्लाक के इस गांव की कहानी आपको बहुत पसंद आएगी. कहते हैं कि इस गांव में सिर्फ आईएएस और आईपीएस ही पैदा होते हैं। पूरे जौनपुर में ये गांव अफसरों वाले गांव के नाम से जाना जाता है। 75 घर वाले इस गांव के आईएएस , आईपीएस , पीसीएस समेत कुल 47 अफसर देश के अलग-अलग राज्यों में सेवा कर रहे हैं। इस गांव के कुछ लोग वैज्ञानिक तो कुछ लोग भाभा और विश्व बैंक तक में काम करते हैं।

3. माधापुर (कच्छ, गुजरात) :

राजस्थान के नागौर जिले का बेरी गांव सबसे अमीर गांव माना जाता है। इस गांव में लगभग 10,000 लोग रहते हैं। इस गांव में करीब 200 से ज्यादा लोग भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं। इस गांव में हर दूसरे घर से एक आदमी सेना में भर्ती है। भाभा परमाणु संस्थान के जाने माने वैज्ञानिक खान मोहम्मद खान इसी गांव के निवासी हैं। इस गांव में राजस्थान की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस है।

4. मड़ावग (शिमला, हिमाचल प्रदेश) :

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की चौपाल तहसील में बसा मड़ावग गांव खेती के लिए जाना जाता है। इस गांव की ज्यादातर आमदनी का जरिया खेती ही है। गांव के किसानों ने अपनी मेहनत और लगन से इस गांव को एशिया का सबसे अमीर गांव बना दिया। इस गांव के सभी किसान सेब की खेती करते हैं और इस गांव के ज्यादातर सेब विदेशों में इस्तेमाल किए जाते हैं। गांव के किसान अपनी खेती में कई तरह के टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेट के जरिये भी किसान जुड़े रहते हैं। इससे बाजार भाव के अनुसार ही वे सेब बेचते हैं इन किसानों की सेब से होने वाली कमाई अरबों रुपये में होती है।

5. हिवेरा बाजार गाँव (अहमदनगर, महाराष्ट्र) :

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का यह गांव हिवेरा बाजार कभी बहुत गरीब हुआ करता था। इस गांव के युवाओं ने खेती के तरीके में नई तकनीक का इस्तेमाल किया और धीरे धीरे गांव में ही जैविक खेती का सफल प्रयोग कर डाला। उसके बाद गांव के युवकों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा उनके जोश और लगन से आज उस गांव का नक्शा ही बदल गया। आज इस गांव में 80 किसान करोड़पति हो चुके हैं और गांव की पहचान करोड़पतियों किसानों वाले गांव के रूप में हो गई है। कभी दाने-दाने के लिए मोहताज रहने वाला यह गांव आज करोड़पति हो गया है और देशभर के किसानों का रोल मॉडल बन गया है।