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” कृषि क्षेत्र पर मौसम का असर” फसलों की बुवाई में गिरावट” जलस्तर और मानसून की स्थिति…”

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इस वर्ष, भारत के कृषि क्षेत्र में मौसम की दोहरी चुनौती सामने आई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के देर से आने और उसकी धीमी प्रगति के कारण धान समेत अन्य प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में भारी कमी आई है।

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 182.72 लाख हेक्टेयर तक सीमित रह गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 236.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 प्रतिशत कम है.

केवल धान ही नहीं, बल्कि दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है। आमतौर पर, खरीफ फसलों की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है। आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई 25 जून तक 25.17 प्रतिशत घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 34.41 लाख हेक्टेयर थी.

दलहनों की बुवाई 30.47 प्रतिशत घटकर 14.92 लाख हेक्टेयर रह गई, जो एक वर्ष पहले 21.46 लाख हेक्टेयर थी। तिलहनों का रकबा 53.33 प्रतिशत घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 36.41 लाख हेक्टेयर था. मूंगफली का रकबा 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.87 लाख हेक्टेयर और सोयाबीन का रकबा 19.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर रह गया.

कपास की बुवाई 34.61 प्रतिशत घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 45.36 लाख हेक्टेयर थी। हालांकि, गन्ने का रकबा मामूली बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, खरीफ बुवाई के लिए महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 जून तक सामान्य से 42 प्रतिशत कम रहा.

केंद्रीय जल आयोग की निगरानी में 166 प्रमुख जलाशयों में 25 जून तक कुल 48.405 अरब घन मीटर जल उपलब्ध था, जो उनकी पूर्ण भंडारण क्षमता का 26.37 प्रतिशत है। यह जल भंडारण पिछले वर्ष के स्तर का 73.21 प्रतिशत और सामान्य स्तर का 105.67 प्रतिशत है.

चीन का समर्थन और भारत की चिंताएँ….

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चीन ने भारत की चिंताओं के बावजूद तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापना परियोजना (TRCMRP) के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बांग्लादेश के साथ चीन का सहयोग किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सहयोग किसी अन्य देश को लक्षित नहीं करता है। तीस्ता नदी का बेसिन भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के निकट स्थित है, जिससे भारत की चिंताएँ बढ़ गई हैं।

परियोजना का महत्व और बांग्लादेश का दृष्टिकोण

जियाकुन ने बताया कि तीस्ता नदी का समुचित प्रबंधन और पुनर्स्थापना एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़ा है और बांग्लादेश इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण मानता है। चीन इस परियोजना में हर संभव सहायता देने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि चीन बांग्लादेश के साथ विकास रणनीतियों में बेहतर समन्वय स्थापित करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।

तकनीकी अध्ययन और समझौते की प्रगति

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बताया कि दोनों देशों के विशेषज्ञ इस परियोजना के लिए तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए हैं, जबकि पिछली बार यह मामला इस चरण पर नहीं था। चीन ने कहा है कि वह इस परियोजना के लिए हर संभव मदद करेगा, क्योंकि व्यवहार्यता अध्ययन इसे सही ठहराता है।

भारत की सुरक्षा चिंताएँ

इस साल जनवरी में बांग्लादेश वॉटर डेवलपमेंट बोर्ड (BWDB) और चीन की सरकारी कंपनी POWERCHINA ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे तीस्ता प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत को चीन की इस परियोजना में भागीदारी को लेकर चिंता है, क्योंकि यह नदी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट है। इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी प्रभाव, विशेषकर चीन की उपस्थिति, भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकती है।

” वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रगति की समीक्षा…”

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नई दिल्ली में केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को शाम 4 बजे सभी केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे। इस बैठक में सरकार की प्रमुख योजनाओं की प्रगति, प्रशासनिक सुधारों और नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रगति की समीक्षा करना है।

सुधारों और सुशासन पर ध्यान केंद्रित”

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन को सरल बनाना) और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार में आसानी) से संबंधित सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए गए सुधारों और आम जनता के लिए शुरू की गई नई पहलों की समीक्षा करेंगे। बैठक में कई मंत्रालयों के सचिव अपने विभागों की उपलब्धियों, चल रही योजनाओं और सुधारों की प्रगति पर प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा, भविष्य में लागू किए जाने वाले नए सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी।

लंबित कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश”

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और जनता से जुड़े मामलों का समय पर समाधान सुनिश्चित करने की सलाह दे सकते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ बिना किसी देरी के मिले और शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो।

विकसित भारत 2047 पर चर्चा”

सरकार ने पहले ही वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में अगले दस वर्षों के लिए सुधारों की रूपरेखा पर चर्चा होने की उम्मीद है। हाल के आर्थिक आंकड़ों में देश की मजबूत विकास दर को भी बैठक में आधार बनाया जा सकता है। जनवरी से मार्च तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। सरकार इसे सुधारों और निवेश का सकारात्मक परिणाम मानती है।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति”

बैठक में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। इस बैठक के माध्यम से सरकार आने वाले वर्षों के लिए प्रशासनिक सुधारों की नई दिशा तय करने की योजना बना रही है।

” मानसून की संभावित शुरुआत” अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर, लेकिन अब स्थितियां अनुकूल हो रही हैं…”

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उत्तर भारत के उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून एक या दो दिन में आ सकता है। स्काईमेट वेदर ने बताया है कि मौसमी परिस्थितियां दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के लिए अनुकूल हो गई हैं।

यूपी में बारिश की संभावना: 2 जुलाई तक बारिश की उम्मीद

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मानसून अगले दो दिनों में उत्तराखंड में पहुंच जाएगा। स्काईमेट के अनुसार, 2 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भरी पूर्वी हवाएं यूपी के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पहुंचने लगी हैं, और इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मानसून उत्तर दिशा में तेजी से बढ़ेगा और बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।

मानसून का सामान्य समय: मानसून का सामान्य आगमन

आमतौर पर, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मानसून 20 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार अल नीनो के कारण यह कमजोर और सुस्त रहा है। अल नीनो के प्रभाव से देश के अन्य हिस्सों में भी मानसून समय से पीछे चल रहा है। स्काईमेट के अनुसार, पूर्वी यूपी में 30 जून से हल्की से मध्यम बारिश शुरू होने की संभावना है। आईएमडी ने बताया कि 1 जुलाई को मौसम प्रणाली मजबूत होगी और बारिश का दायरा बढ़ेगा।

येलो अलर्ट जारी

पिथौरागढ़, पौड़ी और बागेश्वर के लिए येलो अलर्ट

उत्तर प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों और पूरे उत्तराखंड में 2 जुलाई तक मानसूनी बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़, पौड़ी और बागेश्वर जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही, प्रदेश के सभी पर्वतीय जिलों में तेज बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।

” जुलाई में घूमने का प्लान ” ” जुलाई में यात्रा के लिए बेहतरीन टूर पैकेज “

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क्या आप जुलाई में यात्रा करने की योजना बना रहे हैं? यदि हां, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। जुलाई का महीना कल से शुरू होने वाला है। यदि आपका बजट 20,000 रुपये है, तो आप इन स्थानों पर यात्रा कर सकते हैं।

भारतीय रेलवे जुलाई में कई नए टूर पैकेज पेश करने जा रही है। ये पैकेज विभिन्न तारीखों पर शुरू होंगे, इसलिए आप अपने वीकेंड के अनुसार यात्रा की योजना बना सकते हैं।

पैकेज बुकिंग की जानकारी

ध्यान दें कि पैकेज की टिकट बुकिंग पहले से की जाती है, लेकिन यात्रा की शुरुआत निर्धारित तारीख पर ही होगी। आइए जानते हैं जुलाई के विभिन्न पैकेज के बारे में:

मुंबई से शिरडी बाबा टूर पैकेज

यह पैकेज 4 जुलाई 2026 से शुरू होगा। इसमें आपको 1 रात और 2 दिनों की यात्रा का अनुभव मिलेगा। जब यह पैकेज चालू होगा, तो आप हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को यात्रा कर सकेंगे। यात्रा ट्रेन से होगी और शहर में घूमने के लिए कैब की सुविधा भी उपलब्ध होगी.

पैकेज फीस

– यदि आप अकेले यात्रा करना चाहते हैं, तो एसी कोच के लिए आपको 14,100 रुपये का भुगतान करना होगा।

– 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 10,300 रुपये है।

– यदि आप 3 लोगों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो आपको 9,650 रुपये देने होंगे।

– बच्चों के लिए अलग से फीस निर्धारित की गई है, एसी कोच में यात्रा करने के लिए 9,650 रुपये का भुगतान करना होगा। आप चाहें तो स्लीपर कोच में भी यात्रा कर सकते हैं।

चेन्नई से महाबलीपुरम टूर पैकेज

यदि आप पुडुचेरी और महाबलीपुरम दोनों स्थानों का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह पैकेज आपके लिए उपयुक्त है। यह पैकेज 6 जुलाई 2026 से शुरू होगा। यात्रा के आरंभ होने के बाद, आप हर सोमवार और बुधवार को यात्रा कर सकेंगे। इस पैकेज में पूरी यात्रा कैब से की जाएगी।

पैकेज फीस

– अकेले यात्रा करने पर यात्रियों को 16,850 रुपये का भुगतान करना होगा।

– 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति 8,750 रुपये का शुल्क है।

– यदि 3 यात्री यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पैकेज फीस 6,350 रुपये होगी।

कोच्चि से मुन्नार टूर पैकेज

यह टूर पैकेज केवल 2 रात और 3 दिनों का है। यह पैकेज 4 जुलाई से शुरू होगा, जिसके बाद आप हर दिन यात्रा कर सकेंगे। पूरी यात्रा कैब से की जाएगी और खाने-पीने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस पैकेज का कोड SEH020 है। आप टिकट बुकिंग IRCTC की वेबसाइट पर कर सकते हैं।

पैकेज फीस

– यदि आप अकेले यात्रा कर रहे हैं, तो पैकेज फीस 22,450 रुपये है।

– 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति 11,700 रुपये का शुल्क है।

– यदि 3 लोग यात्रा कर रहे हैं, तो उन्हें 9,300 रुपये का भुगतान करना होगा।

” गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व पर पंजाब सरकार की नई पहल…”

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मुख्यमंत्री भगवंत मान की विशेष पहल

मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को विशेष रूप से मनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज संगरूर में आयोजित एक कार्यक्रम में, सीएम भगवंत मान ने 50 प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वैन पूरे पंजाब के 13,000 गांवों में जाएंगी। प्रत्येक वैन में 30 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जाएगी, जिसमें गुरु रविदास जी के जीवन और उनके शिक्षाओं को दर्शाया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से लोगों को गुरु रविदास जी के संदेश, समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय की शिक्षा दी जाएगी।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस कार्यक्रम में संत समाज के कई सम्मानित प्रतिनिधि विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस पहल की सराहना की और कहा कि गुरु रविदास जी के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने का यह एक उत्कृष्ट प्रयास है। सीएम भगवंत मान ने कहा कि गुरु रविदास जी का संदेश आज भी प्रासंगिक है। उनकी शिक्षाएं समाज को एकजुट रखने और सभी वर्गों के उत्थान में सहायक होती हैं। सरकार का उद्देश्य है कि इन शिक्षाओं को पूरे पंजाब में आम लोगों तक पहुंचाया जाए, विशेषकर युवा पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए।

इस पहल के लाभ

इस पहल के माध्यम से गांवों में गुरु रविदास जी की जयंती और शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार होगा, जिससे लोगों में सामाजिक सद्भाव और समानता की भावना बढ़ेगी और युवाओं को सकारात्मक विचार प्राप्त होंगे। यह कार्यक्रम गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व (जन्मोत्सव) के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। पंजाब सरकार की यह पहल न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत करने वाली है। संगरूर के इस कार्यक्रम के बाद ये प्रचार वैन पूरे पंजाब में निकल पड़ी हैं। आने वाले दिनों में लाखों लोग गुरु रविदास जी के जीवन और उनके संदेश से जुड़ सकेंगे।

” इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती…”

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” पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव” 

डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय “इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी।

मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं।

यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

”  यूरिया वितरण में किसानों को बड़ी राहत ” ” पिछले साल जितनी मात्रा इस बार भी मिलेगी “

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खरीफ सीजन में किसानों को यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने उर्वरक वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार अब पात्र किसानों को खरीफ 2025 में मिली यूरिया की मात्रा के बराबर ही खरीफ 2026 में भी यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।

इससे किसानों को समय पर खाद मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

प्रदेश में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए पहले लागू कुछ प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार यूरिया का वितरण किया जाएगा।”

यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तो किसानों को एकमुश्त यूरिया दिया जाएगा। वहीं, स्टॉक सीमित होने की स्थिति में उपलब्ध मात्रा पहले वितरित की जाएगी और शेष यूरिया बाद में स्टॉक पहुंचते ही संबंधित किसान को उपलब्ध कराया जाएगा।”

शासन ने स्पष्ट किया है कि डीएपी उर्वरक के वितरण की पूर्व व्यवस्था यथावत लागू रहेगी, जबकि संशोधित निर्देश केवल यूरिया वितरण के लिए प्रभावी होंगे। इसका उद्देश्य उर्वरकों का संतुलित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।”

राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा सहकारी संस्थाओं को निर्देश दिए हैं कि संशोधित व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करें।”

सरकार का मानना है कि समय पर और सुचारु रूप से यूरिया उपलब्ध होने से खरीफ फसलों की बुवाई और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी तथा किसानों को खेती के दौरान किसी प्रकार की उर्वरक संकट की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

” मोर अंगना के शोर साझा बाल काव्य संग्रह का हुआ विमोचन” साहित्य और तकनीक के अभिनव समन्वय (क्यूआर कोड) की हुई सराहना “

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” बाल साहित्य और नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम”

– वन मंत्री केदार कश्यप**

छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप आज राजधानी रायपुर के वृंदावन भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने साझा बाल काव्य संग्रह मोर अंगना के शोर का विमोचन किया और सभी संबंधित रचनाकारों व शिक्षकों को सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास शिक्षा, संस्कार और साहित्य के माध्यम से ही संभव है। बाल साहित्य हमारी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का काम करता है।

NEP और FLN के उद्देश्यों को मिलेगी मजबूती

मंत्री श्री कश्यप ने पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोर अंगना के शोर केवल कविताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बच्चों की कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और भाषा कौशल को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। यह अभिनव प्रयास नई शिक्षा नीति (NEP) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)उद्देश्यों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

तकनीक और साहित्य का अनूठा संगमर- क्यूआर कोड आधारित नवाचार

इस बाल काव्य संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल तकनीकी नवाचार है। पुस्तक में प्रत्येक कविता के साथ एक क्यूआर (QR) कोड जोड़ा गया है। इस पहल की सराहना करते हुए वन मंत्री ने कहा कि इससे बच्चे केवल कविताओं को पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें सुनकर भी सीख सकेंगे। यह साहित्य और तकनीक का एक बेहतरीन समन्वय है जो शिक्षा को अधिक रोचक, सरल और समावेशी बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यह अनूठी पहल दिव्यांग बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे वे भी समान रूप से सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।

राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों की भूमिका

मंत्री श्री कश्यप ने पुस्तक के संपादक श्री वीरेंद्र कुमार साहू, सभी लेखकों, शिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा, साहित्य और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की दिशा और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्मोर अंगना के शोरश् छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल साहित्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगी।

इस विमोचन एवं सम्मान समारोह में स्थानीय विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा, श्री अमित चिमलानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में साहित्यकार, रचनाकार और शिक्षक गण उपस्थित रहे।

” नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति” किसान भईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी”

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छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।

नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।

छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।