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अभी नहीं मिलेगी रायपुर के लोगों को बारिश से राहत, जारी हुआ यलो अलर्ट…

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अगस्त गुजर चुका है और प्रदेश में अब तक 907.6 मिमी बारिश हो चुकी है। यह औसत आंकड़े से तीन फीसद कम है। अब तक सर्वाधिक चक्रवात, द्रोणिका का असर बस्तर संभाग में रहा। हालांकि रायपुर, दुर्ग से लेकर बिलासपुर संभाग में भी बारिश हुई, लेकिन ये जिले अभी भी कम बारिश वाले जिलों की सूची में शामिल हैं, मगर मौजूदा सिस्टम अच्छी बारिश करा रहा है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 10 दिन में दो और सिस्टम सक्रिय हो रहे हैं, जो मध्य छत्तीसगढ़, उत्तर छत्तीसगढ़ को प्रभावित करेंगे।

शनिवार को रायपुर में खासी बारिश हुई, हालांकि खंड वर्षा के रूप में। सुबह से ही बादलों ने डेरा जमाए रखा। शाम को आधे घंटे से अधिक समय तक देवेंद्र नगर, जयस्तंभ चौक, फाफाडीह क्षेत्र में गर्जना के साथ वर्षा हुई, जबकि लालपुर क्षेत्र, जहां पर मौसम विभाग का कार्यालय है, वहां बारिश नहीं हुई, इसलिए बारिश के आंकड़े नहीं मिल सके हैं।

मौसम वैज्ञानी एचपी चंद्रा का कहना है कि मौसम में लगातार परिवर्तन होते जा रहे हैं, इसलिए पूर्वानुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। पहले पश्चिम, फिर उत्तर-पश्चिम और फिर पश्चिम छत्तीसगढ़ में सिस्टम सक्रिय हुआ। अगले 24 घंटे में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है।

जिले- तापमान- बारिश के आंकड़े-

रायपुर- 32.6- 0.2

बिलासपुर- 32.5- 0.0

पेंड्रा- 31.4- 1.0

अंबिकापुर- 31.0- 2.6

जगदलपुर- 29.8- 63.4

दुर्ग- 31.8- 12.2

राजनांदगांव- 31.5- 0.0

(आंकड़े मिमी में)

ये पूर्वानुमान- समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका सक्रिया है जो दक्षिण पूर्व होते हुए उत्तर अंडमान से होकर गुजर रही है, जो मध्य समुद्र तल से 0.9 किमी की ऊंचाई पर विस्तारित है। वहीं मध्यप्रदेश पर एक कम दाब का क्षेत्र बना हुआ है, जो समुद्र तल से 3.6 किमी की ऊंचाई पर फैला हुआ है। ऊंचाई के साथ दक्षिण पूर्व की तरफ झुका हुआ है।

40 घंटे महिलाऐं करेंगी निर्जला व्रत, निभाई कडू भात सेवन की रस्म…

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पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना का पर्व तीजा रविवार को मनाया जाएगा। तीजा की पूर्व संध्या पर शनिवार को महिलाओं ने कड़ू भात (करेला और चावल) पकाकर खाने की रस्म निभाई। इसी के साथ महिलाओं का निर्जला व्रत शुरू हो गया। अब 40 घंटे तक महिलाएं बिना जल ग्रहण किए उपवास रहेंगी।

रविवार को शिव-पार्वती की पूजा करके रात भर भजन-कीर्तन में रमी रहेंगी। चतुर्थी को सुबह पुनः पूजा करके पारणा करेंगी। दिन भर बेटियों के मायके आने का क्रम जारी रहा। बेटियों के मायके पहुंचते ही परिवार में उत्साह छा गया। इसके बाद शाम को व्रतधारी महिलाएं मार्केट पहुंचीं, जहां श्रृंगार सामग्री, साड़ियां, जेवरों की खरीदारी की।

बेटियों को मायके बुलाकर आवभगत की मान्यता

ऐसी मान्यता है कि जब राजा दक्ष की इच्छा के खिलाफ उनकी पुत्री सती ने शंकर से ब्याह रचाया तो राजा दक्ष नाराज हो गए और उन्होंने अपनी बेटी से नाता तोड़ लिया। एक बार राजा दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ में तीनों लोक के राजा-महाराजाओं व देवगणों को आमंत्रित किया, लेकिन अपनी पुत्री सती व दामाद शंकर को नहीं बुलाया।

सती ने शंकर से जिद की कि वे अपने पिता के महायज्ञ में जाना चाहती हैं। भगवान शंकर के मना करने के बावजूद सती बिना बुलाए अपने मायके पहुंचीं, लेकिन उनके पिता ने बेटी का अपमान करते हुए दामाद शंकर को अपशब्द कहे, जिसे सती बर्दाश्त नहीं कर पाईं और यज्ञ के हवन कुंड में कूदकर जान दे दी।

ऐसी मान्यता है कि राजा दक्ष ने अपनी पुत्री का अपमान किया था। इसके प्रायश्चित स्वरूप कालांतर में माता-पिता द्वारा अपनी विवाहिता बेटी को मायके बुलाकर आवभगत करने की परंपरा चल पड़ी। चूंकि भादो शुक्ल की तृतीया तिथि पर सती ने अगले भव में पार्वती के रूप में जन्म लेकर पुनः शंकर से ब्याह रचाया था, इसलिए तृतीया के दिन को ही तीजा के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

अनेक प्रांतों में मनाते हैं तीजा

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, ओडिशा में जहां भादो शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है, वहीं राजस्थान, गुजरात में तीजा 15 दिन पूर्व भादो कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जा चुका है। प्रायः सभी समाज में तीजा मनाने का विधि-विधान एक सरीखा है। महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करके दीर्घायु की कामना करती हैं।

अमेरिकी व्यापारियों ने वेंकटेश्वर मंदिर को 14 करोड़ रुपये का दान दिया, लेकिन रखी ये शर्त…

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 तिरुपति वेंकटेश्वर के मंदिर में भगवान विष्णु के अवतार तिरुपति बाला जी का निवास है। यहां 18,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं, जो वहां की साफ-सफाई और उस क्षेत्र में ट्रैफिक का काम संभालते हैं। यहां भक्त भगवान तिरुपति वेंकटेश्वर को अपने बाल चढ़ावे के तौर पर अर्पण करते हैं।

तिरुपति के वेंकटेश्वर मंदिर को कौन नहीं जानता। इस मंदिर से जुड़ी आस्था, प्यार और रहस्य की वजह से लाखों लोगों की भीड़ यहां खिची चली आती है। आंध्र प्रदेश में वेंकटेश्वर मंदिर को दान करने से पहले, अमेरिकी व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त रखी। इन व्यवसायियों ने आंध्र प्रदेश में वेंकटेश्वर मंदिर को दान करने से पहले एक शर्त रखी। उन्होंने शर्त रखी कि किसी को भी यह जानकारी नहीं दी जानी चाहिए कि दान किसने किया।

वेंकटेश्वर मंदिर के एक सदस्य के अनुसार, दानकर्ता ने अपनी पहचान छुपाने की शर्त पर यह दान किया था। व्यवसायियों ने देवी श्री व्रत लक्ष्मी व्रत पर्व के लिए १४ करोड़ रुपये दान किए हैं।

मंदिर में दर्शन करने वाले दोनों व्यवसायी अपने परिवार के साथ यहां आए। दोनों परिवारों ने मंदिर में पूजा करने के बाद, मंदिर के प्रशासक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के विशेष अधिकारी को 14 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सौंपा।

माना जाता है कि पिछले साल उन्होंने 13.5 करोड़ रुपये का दान दिया था।रुपति के दान पात्र में लोग शादी का कार्ड, सोना, चेक, पैसे, हीरे आदि चढ़ाते हैं। इस दान पात्र में भक्त ओम, भगवान वेंकटेशवर, गोविंद के नाम से यदि चेक डालते हैं

तो बिना किसी सवाल के उसे ले लिया जाता है और बिना किसी परेशानी के वह इनकैश भी हो जाता है। तिरुपति से तिरूमाला के लिए जाने वाली सड़क को रात 12 बजे से सुबह 3 बजे तक बंद रखा जाता है। इस दौरान कोई भी गाड़ी इस सड़क पर आ या जा नहीं सकती।

रायपुर के उरला में इस्पात फैक्ट्री के पैनल में धमाका, तीन मजदूर झुलसे…

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उरला में बनकेश्वर इस्पात फैक्ट्री में रविवार सुबह पैनल में धमाका हो गया, घटना में पास खड़े तीन मजदूर झुलस गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। तीनों मजदूर चेहरे और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह झुलस गए हैं। सूचना मिलने के बाद उरला पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। घटना के बाद फैक्ट्री के बाकी मजदूरों में रोष का माहौल है। पैनल में धमाके के बाद मजदूर घबराकर चिल्लाने लगे थे। फैक्ट्री में हादसे का यह पहला मामला नहीं है, यहां कई फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता, जिससे मजदूरों की जान दाव पर आ जाती है।

बाजार ने समझी मोटे अनाज की कीमत तो उगाने लगा किसान…

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खरीफ में धान रबी में गेहूं सरसों और जायद में खेतों को खाली वाले किसान मुरारी लाल शर्मा जब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली सरसों अनुसंधान केंद्र भरतपुर और कृषि विज्ञान केंद्र पर आयोजित होने वाली सेमिनारों मं शामिल हुए तो वह खाद्यान्न मार्केट की चाल भी समझ गए। धान की खेती को नमस्ते कर ज्वार बाजरा उड़द मूंग अरहर और तिल का उत्पादन करने लगे। अधिकांश किसान ज्वार का उत्पादन पशुओं के चारे के लिए करते हैं लेकिन मुरारी लाल बाजरा तिल उड़द और ज्वार बाजार में बेचने के लिए करते हैं। मोटे अनाज की फसलों से उनके खेत आज भी लहलहा रहे हैं।

किसान मुरारी लाल शर्मा जब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली, सरसों अनुसंधान केंद्र भरतपुर और कृषि विज्ञान केंद्र पर आयोजित होने वाली सेमिनारों मं शामिल हुए तो वह खाद्यान्न मार्केट की चाल भी समझ गए। धान की खेती को नमस्ते कर ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, अरहर और तिल का उत्पादन करने लगे। अधिकांश किसान ज्वार का उत्पादन पशुओं के चारे के लिए करते हैं, लेकिन वाटी गांव के मुरारी लाल बाजरा, तिल, उड़द और ज्वार बाजार में बेचने के लिए करते हैं। मोटे अनाज की फसलों से उनके खेत आज भी लहलहा रहे हैं।

सदर तहसील के गांव वाटी के किसान मुरारी लाल कहते हैं कि करीब बीस साल पहले उनके खेत में चना, जौ और गेहूं की फसलें रबी में होती थीं, जबकि खरीफ में ज्वार, तिल, अरहर, बाजरा, उड़द और जायद में मूंग की खेती होती थी। सर्द मौसम में बाजरा की रोटियां बनती और बाकी दिनों में गेहूं, चना और जौ के आटे की रोटियां बनाई जाती थीं। उस समय गेहूं और चावल का उत्पादन बहुत कम होता था। कृषि क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन आया और गेहूं, चावल का उत्पादन बढ़ गया। मोटे अनाजों के उत्पादन में कमी आ गई। मगर, सेमिनारों से उनको जानकारी हुई बाजार में एक बार फिर से मोटे अनाज की मांग में बढ़ोतरी हो रही है तो उन्होंने खरीफ में बाजरा, ज्वार, उड़द और तिल की खेती करना शुरू कर दिया। उनके पास 11 बीघा जमीन खुद की है और इतनी ही जमीन अपने भाई की भाड़े पर लेकर कर रहे हैं। आज करीब पंद्रह बीघा में मोटे अनाज की खेती कर रहे हैं। ग्रामीण लहजे में वह कहते हैं कि हम तो किसान है, मोटा अनाज उगाते हैं, मोटा खाते हैं और दूर की सोचते हैं। उनका मतलब था कि गेहूं-चावल खाने से शरीर को वो ताकत नहीं मिल पाती है, जो पहल गुरचनी (गेहूं, चना, जौ और मक्का, ज्वार और बाजरा) की रोटी से मिलती थी। दूध को सफेद पानी कहने वाले मुरारी कहते हैं कि गुरचनी रोटी हो और गरमा दूध, उससे बढि़या कोई भोजन नहीं है। वह दूसरे भी कहते हैं कि मोटा अनाज उगाओ, आने वाला समय उसी का है। –मोटे अनाज के सेवन करने से पेट से संबंधित रोगों नहीं होते हैं। ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। मोटे अनाज के सेवन करना सेहत के लिए अच्छा रहता है।

– फिजिशियन डॉ. अशीष गोपाल, सरल हेल्थ केयर — एक जमना था, जब मोटे अनाज की रोटिया खाते थे और मीलों पैदल चले जाते थे। दिन भर काम करते थे। शरीर में रोग भी नहीं लगते थे। थकान भी कम महसूस होती थी। आजकल के युवाओं को बाजरा, चना, ज्वार और मक्का की रोटी अच्छी नहीं लगती है। हम तो सवां कोदो भी खाया करते थे, इनका तो आजकल की पीढ़ी नाम तक नहीं जानती है।

आज से बदल गए कैश निकालने के नियम, जान लें नहीं तो लगेगा तगड़ा झटका…

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आज यानी 1 सितंबर 2019 से कैश विदड्रॉल ( Cash withdrawal) में लेन-देन के नियम बदल गए हैं. मोदी सरकार (Modi Government) ने एक साल में एक लिमिट से ज्यादा के कैश निकालने पर 2 फीसदी स्रोत पर कर कटौती (TDS) लगाया है. इसका मतलब अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में 1 करोड़ रुपये से अधिक कैश अपने बैंक, पोस्ट ऑफिस या को-ऑपरेटिव बैंक के खाते से निकलता है तो उसे 2% TDS देना होगा. ये कदम कैशलेस इकॉनमी बढ़ावा और बड़े नकद लेनदेन को रोकने के लिए उठाया गया है.

आज से कैश का नया नियम हुआ लागू 
1 सितंबर से साल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद लेनदेन पर 2 फीसदी टीडीएस (TDS) कटेगा. ये फैसला आज से लागू हो गया. नकद लेनदेन (Cash Transaction) कम करने के लिए सरकार (Government) ने बड़ा फैसला किया है.

अगर कोई व्यक्ति 31 अगस्त 2019 से पहले ही अपने बैंक खातों, डाक घर खातों और सहकारी बैंक खातों से 1 करोड़ अथवा इससे अधिक नकद निकासी कर चुका है तो उनसे कोई TDS नहीं वसूला जाएगा. लेकिन इसके बाद के सभी बड़े विदड्राल पर 2 फीसदी TDS लगेगा.

यह नियम सरकार, बैंकिंग कंपनी, बैंकिंग में लगी सहकारी समिति, डाकघर, बैंकिंग प्रतिनिधि और व्हाइट लेबल एटीएम परिचालन करने वाली इकाइयों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि व्यवसाय के तहत उन्हें भारी मात्रा में नकद का इस्तेमाल करना होता है.

आपको बता दें कि वित्त मंत्री ने लोकसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 में 448 कंपनियां ऐसी रहीं, जिन्होंने बैंक खातों से 5.56 लाख करोड़ रुपये की राशि की नकद निकासी की है.

यही वजह है कि सरकार को बैंक खाते से साल में एक करोड़ रुपये से अधिक की निकासी करने वाले व्यक्तियों और इकाइयों पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लगाना पड़ा है.

उपरोक्त 448 इकाइयों के मामले में प्रत्येक ने अपने बैंक खातों से साल में 100-100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाली.

आज से अगर कोई व्यक्ति या एचयूएफ किसी ठेकेदार अथवा प्रोफेशनल व्यक्ति को साल भर में किसी सेवा के लिए 50 लाख का भुगतान करता है तो उसे 5 प्रतिशत टीडीएस देना होगा. यह उन लोगों पर असर डालेगा, जो घर बनवाते समय या फिर शादी के लिए किसी एक व्यक्ति को ही सारा भुगतान करते हैं.

लाखों रुपये के नोट उत्तर प्रदेश के इटावा की सड़कों पर 4 किलोमीटर तक बिखरे पड़े मिले…

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सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के गृह जनपद इटावा में शनिवार सुबह बसरेहर इलाके के राहिन रोड पर 4 किमी के दायरे में लाखों रुपये के फटे हुए नोट बरामद किए गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नोटों के इस ढेर में नोटबंदी के बाद चलन में आये 50 के नए नोट भी शामिल हैं। एक ओर जहां ग्रामीण सड़क पर बिखरे पैसों को लेकर तमाम तरह के कयास लगा रहे हैं तो वहीं पुलिस की टीम अब इनके यहां बिखरे होने के पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है।

शनिवार को सुबह 5 बजे के आसपास सबसे पहले स्थानीय लोगों ने सड़क पर बिखरे हुये फटे हुये नोटों के टुकड़ों को देखने के बाद स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। नोटों के टुकड़े मिलने के बाद में बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां जुट गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने अनुमान लगाते हुए कहा कि ऐसा हो सकता है कि किसी गाड़ी में इन नोटों को यहां से ले जाया जा रहा हो और इसी दौरान यह सड़क पर बिखर गए हों।

इसके अलावा मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस के अधिकारी भी अब तक इन नोटों को लेकर कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। ऑफिसर्स का कहना है कि उच्च स्तर पर अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे दी गई है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि सड़क पर फैले इन नोटों के पीछे की कहानी क्या है? अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही करंसी के यहां पर पहुंचने और इस हालत में सड़क पर बिखरने की वजह का पता चल सकेगा।

वैज्ञानिकों ने किया सोने का निर्माण,इससे आभुषण नहीं बल्कि ये होगा निर्माण…

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जयपुर, आभूषण आमतौर पर सोने से बनाए जाते हैं। लेकिन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने सोने का निर्माण किया है जिसका उपयोग दूसरे उद्देश्य के लिए किया जाएगा। यह दुनिया का सबसे पतला सोना है। लीड्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सोने का यह नया रूप बनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोने में इंसानों के नाखूनों की तुलना में करीब 1 मिलियन गुना पतला होता है। इसकी मोटाई 2.5 नैनोमीटर है। यह सोना दो चीजों से बना है। यह माना जाता है कि आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले सोने की तुलना में लगभग 4 गुना अधिक उपयोगी है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सोने का यह 3-डी रूप प्रौद्योगिकी के विकास में बहुत फायदेमंद होगा। इसका उपयोग कैंसर चिकित्सा उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का विस्तार करेगा।

वर्तमान में, एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में उपकरणों का उत्पादन करने के लिए सोने का उपयोग किया जाता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि सोने का यह नया रूप मेडिकल परीक्षणों को गति देगा और पानी की सफाई की प्रक्रिया को और बेहतर बना देगा। वहीं, इसके इस्तेमाल से मशीनों की लागत बढ़ेगी, जिससे निर्माताओं को फायदा होगा।

शोध के प्रोफेसर स्टीवन इवांस ने कहा, ‘हमें 2 डी गोल्ड के उपयोग के लिए कुछ विचार मिले हैं। विभिन्न स्थानों का उपयोग करके इसका लाभ उठाया जा सकता है। हम जानते हैं कि सोना अब की तुलना में अधिक प्रभावी होगा।

स्विस बैंक आज करेगा बड़ा खुलासा, सौंपेगा काला धन रखने वालों की लिस्ट…

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बीते 5 सालों में मोदी सरकार ने ब्‍लैकमनी पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी और बेनामी प्रॉपर्टी से जुड़े कई अहम फैसले लिए. अब सरकार के दूसरे कार्यकाल में ब्‍लैकमनी को लेकर जो खबर आई है वो थोड़ी राहत देने वाली है. दरअसल, स्विस बैंकों में किन भारतीयों के बैंक खाते हैं, इस बात से आज पर्दा उठने वाला है. स्विट्जरलैंड में बैंक खाते रखने वाले भारतीय नागरिकों की जानकारी आज से टैक्स अधिकारियों के पास उपलब्ध हो जाएगी.

इस कदम को लेकर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा, ‘काले धन के खिलाफ सरकार की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है और स्विस बैंकों के गोपनीयता का युग आखिरकार सितंबर से खत्म हो जाएगा.’ सीबीडीटी आयकर विभाग के लिए नीति बनाता है. वहीं सीबीडीटी ने बताया कि भारत को स्विट्जरलैंड में भारतीय नागरिकों के साल 2018 में बंद किए खातों की जानकारी भी मिलेगी.

सीबीडीटी का कहना है कि सूचना आदान-प्रदान की यह व्यवस्था शुरू होने के ठीक पहले भारत आए स्विट्जरलैंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व सचिव एबी पांडेय, बोर्ड के चेयरमैन पीसी मोदी और बोर्ड के सदस्य (विधायी) अखिलेश रंजन के साथ बैठक की. 29-30 अगस्त के बीच आए इस प्रतिनिधिमंडल की अगुआई स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्त मामलों के राज्य सचिवालय में कर विभाग में उप प्रमुख निकोलस मारियो ने की.

कितना है काला धन?

इस साल लोकसभा में जून महीने में वित्त पर स्टैंडिंग कमिटी की एक रिपोर्ट पेश की गई थी. इसके मुताबिक साल 1980 से साल 2010 के बीच 30 साल के दौरान भारतीयों के जरिए लगभग 246.48 अरब डॉलर यानी 17,25,300 करोड़ रुपये से लेकर 490 अरब डॉलर यानी 34,30,000 करोड़ रुपये के बीच काला धन देश के बाहर भेजा.

5 फीट का जहरीला कोबरा राजघाट के शौचालय बैठा था, सफाई वाले के घुसते ही हुआ ये…

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 देश की राजधानी दिल्ली में शौचालय मे कोबरा सांप मिलने से लोगों में दहशत फैल गई। ये घटना राजघाट के स्थित दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) डिपो की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शौचालय के फ्लश टैंक में खतरनाक कोबरा सांप बैठा था। ये घटना शुक्रवार है। शौचालय की सफाई करते वक्त ये कोबरा दिखा। बड़ी मुश्किल के बाद सांप पकड़ा गया।

ड्यूटी पर तैनात डिपो के अधिकारी मुन्नी लाल ने बताया कि यह कोबरा सांप डिपो के शौचालय की सफाई के वक्त दिखा। सूचना मिलने पर पहुंची वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम ने सांप को काबू में किया। बड़ी मुश्किल से सांप को पकड़े जाने के बाद लोगों ने और विभाग की टीम ने राहत की सांस ली।

पांच फुट का था कोबरा

वाइल्ड लाइफ एसओएस के अधिकारी वसीम अकरम के मुताबिक शौचालय से पकड़े गए सांप की लंबाई लगभग 5 फीट है। उन्होंने बताया कि कोबर को विभाग की निगरानी में रखा गया है। गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब राजघाट डिपो में खतरनाक जंगली प्राणी नजर आए हो। अधिकारी के मुताबिक पिछले साल डिपो-2 से 10 फुट लंबा कोबरा पकड़ा गया था।

ओडिशा में पार्सल में मिला था कोबरा

गौरतलब है कि कि हाल ही में ओडिशा के एक शख्स को मिले ऑनलाइन ग्रॉसरी की डिलिवरी वाले पार्सल में से कोबरा निकला था। इस घटना का भी एक वीडियो सामने आया था। दरअसल ग्रॉसरी पार्सल को चूहे ने काट कर उसमें छेद कर दिया था, उसी में से कोबरा अंदर घुस गया। जब ग्राहक ने पार्सल खोला तो अंदर से कोबरा निकला जिसे देखकर वह दहशत में आ गया।