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मूर्तियों को परखने फील्ड में उतरे अफसर, बाजार के बाद मूर्तिकारों के घर पहुंचे, रोज ऐसे ही जांच…

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शहर में पीओपी की प्रतिबंधित मूर्तियों की जांच करने अफसरों की टीम मंगलवार से ही फील्ड पर उतर गई है। अफसरों की अलग-अलग टीमों ने पहले बाजार की एक-एक दुकान में जाकर मूर्तियों की जांच की। उसके बाद वे मूर्तिकारों तक पहुंच गए। जहां-जहां जो मूर्तियां बना रहे हैं, वहां जाकर देखा गया कि वे किसका उपयोग कर रहे हैं। जांच के दौरान दुकानदारों और मूर्तिकारों को समझाइश दी गई कि वे किसी भी सूरत में पीओपी की मूर्तियों का उपयोग न करें अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी की सख्ती के बाद प्रशासन पीओपी की मूर्तियों के उपयोग रोकने सक्रिय हो गया है। जिला प्रशासन और निगम के अफसर अलग-अलग स्तर पर जागरुकता अभियान भी चला रहे हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि पीपीओ की मूर्ति से प्रदूषण को किस तरह से नुकसान हो रहा है।

मूर्ति में उपयोग किए जाने वाले सिंथेटिक कलर से भी पानी के प्रदूषण का हवाला दिया जा रहा है। इस बीच जिला और निगम प्रशासन ने अफसरों को साफ कह दिया है कि किसी भी सूरत में पीओपी की मूर्तियों की बिक्री नहीं होनी चाहिए। इसके लिए अफसरों की अलग टीमें बनाईं गईं हैं। मंगलवार को गणेश उत्सव के पहले कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने अफसरों की क्लास लेकर निर्देश दिए।  निगम कमिश्नर शिव अनंत तायल ने भी अलग से अफसरों की बैठक लेकर उनसे फील्ड सर्वे की जानकारी ली।
 

अस्थायी कुंड में होगा मूर्तियों का विसर्जन : महादेव घाट में भी मूर्तियों का विसर्जन अस्थायी कुंड में होगा। इसके लिए तैयारी कर ली गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार ही अस्थायी कुंड बनाया गया है। मूर्तियों का विसर्जन अस्थायी कुंड में ही किया जाएगा। इसके अलावा निर्देश जारी कर दिया गया है कि विसर्जन के समय मूर्ति एवं पूजा सामग्री जैसे फूल, कपड़े, कागज एवं प्लास्टिक से बनी सजावट की चीजें पहले ही अलग कर ली जाएं। 

विसर्जन स्थल पर वेस्ट मटेरियल जलाना प्रतिबंधित रहेगा।

गणेश पंडाल में स्वर्ग-नरक की झलकी :  गुढ़ियारी पड़ाव की 101 साल पुरानी गणेश उत्सव समिति इस साल 31 लाख रुपए की लागत से झांकी तैयार कर रही है। 80 स्वचलित भगवान की प्रतिमाएं इस झांकी का मुख्य आकर्षण है। यमराज और इंद्र देवता का दरबार लगाकर स्वर्ग और नरक की झलक झांकी में देखने को मिलेगी। 40 हजार वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में गणेश झांकी का निर्माण किया जा रहा है। मशहूर कलाकर प्रलय देवानंद और उनकी 25 सदस्यों की टीम पिछले तीन महीने से गणेश झांकी बना रही है। गणेश भगवान की 9 फीट ऊंची मूर्ति भी आकर्षण का केंद्र रहने वाली है। झांकी के मुख्य प्रवेश द्वार पर राक्षस की विशाल प्रतिमा है, इसके मुंह से ही लोग गणेश झांकी देखने के लिए प्रवेश करेंगे।

ओबीसी का कोटा 27% करने के बाद गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण…

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राज्य के ओबीसी वर्ग को नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण देने के फैसले के बाद सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इसके अंतर्गत आने वाले लोगों का क्राइटेरिया तय कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य में अब आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 82 हो जाएगा। इसे लागू करने के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 10% आरक्षण के लिए जो नार्म्स तय किए गए हैं, उनका पालन किया जाएगा। साथ ही आरक्षण की नई व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यकता होने पर कमीशन का भी गठन किया जाएगा। बता दें कि 15 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की थी। साथ ही एससी का आरक्षण एक फीसदी बढ़ाकर 13 फीसदी करने का ऐलान किया था। इसके बाद सामान्य वर्ग से भी आरक्षण की मांग उठ रही थी। यही वजह है कि कैबिनेट ने आरक्षण की परिधि से बाहर यानी सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने का फैसला किया है।

सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी होता है चीकू

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चीकू बच्चो से लेकर बड़ो तक का सबसे पसंदीदा फल होता हैं चीकू ना केवल स्वाद में अच्छा होता हैं बल्कि ये सेहत के लिए भी बहुत ही ज्यादा लाभकारी होता हैं|

समें विटामिन ‘A’ पाया जाता हैं। इसका नियमित उपयोग आंखों के लिए रामबाण औषधि का काम भी करता हैं। चीकू के प्रतिदिन सेवन से धातुपुष्ट होती है तथा पेशाब में जलन की समस्या भी दूर होती है।

चीकू की छिलके में टैन्निक पाया जाता है इसलिए सूजन और बुखार में चीकू बहुत ही फायदेमंद है। चीकू शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में सहायक हैं। चीकू में विटामिन ‘A’ के अलावा भी विटामिन ‘B’ और ‘E’ भी होता है जो त्वचा को सुरक्षा प्रदान करता है तथा त्वचा की नमी को भी बरकरार रखता है।कब्ज और दस्त की बीमारी को ठीक करने में सहायक चीकू खाने से आंतों मजबूती आती है और आंतें बहुत अधिक मजबूत होती हैं।

चीकू में कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन जैसे तत्वों से भरपूर होता हैं। चीकू का रोजाना सेवन शरीर की कमजोरियों को दूर करता है।

हैंड जेल के उपयोग से बच्चों को रखना चाहिए दूर

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गर इसका इस्तेमाल आप बहुत अधिक मात्रा में करते हैं, तो तत्काल रोगाणु नष्ट हो सकते हैं, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव कुछ और है। हैंड जेल्स की सफलता इस पर भी निर्भर करती है कि आपके हाथों में मिट्टी की मौजूदगी कितनी मात्रा में है। सच यह है कि पानी और साबुन से हाथ धोना बहुत ज्यादा असरदायक होता है।

कई सर्वे के अनुसार हैंड जेल्स आपकी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकता है। इसमें ट्राइकोल्सन होता है और इससे हॉर्मोन में गड़बड़ी पैदा होती है यहां तक कि यह जीवाणु प्रतिरोधी क्षमता को कम करता है। ट्राइकोल्सन के कारण पेट और अंतड़ी में समस्या भी होती है बच्चों को इसे लेकर सतर्क रखना चाहिए क्योंकि उल्टी की आशंका भी बनी रहती है

कई सर्वे के अनुसार हैंड जेल्स आपकी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकता है। इसमें ट्राइकोल्सन होता है और इससे हॉर्मोन में गड़बड़ी पैदा होती है यहां तक कि यह जीवाणु प्रतिरोधी क्षमता को कम करता है। ट्राइकोल्सन के कारण पेट और अंतड़ी में समस्या भी होती है बच्चों को इसे लेकर सतर्क रखना चाहिए क्योंकि उल्टी की आशंका भी बनी रहती है

अमेठी: राम अवतार के परिजनों से मिलीं प्रियंका, हिरासत में हुई थी मौत

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कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मंगलवार देर रात अचानक अमेठी पहुंचीं. यहां प्रियंका ने शिवरतनगंज थाना क्षेत्र के भिखारीपुर गांव पहुंचकर पुलिस हिरासत में दम तोड़ने वाले राम अवतार के परिजनों से मुलाकात की. प्रियंका गांधी ने मामले की पूरी जानकारी हासिल की. साथ ही मृतक के पिता से बात करते हुए प्रियंका भावुक भी हो गईं. प्रियंका ने मृतक की दादी और बहन को गले लगाकर उन्हें सांत्वना दी. राम अवतार के परिजनों के मुताबिक, पुलिस हिरासत में पिटाई से राम अवतार की मौत हुई लेकिन पुलिस ने अस्पताल में मौत का हवाला दिया. इस दौरान प्रियंका गांधी के सामने पुलिसकर्मी सफाई देते दिखे.

राम अवतार दलित परिवार से था जिसे बीते गुरुवार चोरी के शक में पुलिस ने घर से हिरासत में लिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार तक उसे स्थानीय थाने में हिरासत में रखा गया. राम अवतार के परिजनों का आरोप है कि थाने में पुलिस ने उसे काफी प्रताड़ित किया. राम अवतार के परिजनों से मिलने के बाद प्रियंका गांधी ने कहा, ‘यूपी में अराजकता फैली है और हिरासत में मौत के मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को सजा मिलनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और उनके साथ जो नाइंसाफी हुई है उसके खिलाफ लड़ाई में आगे भी साथ खड़ी रहेगी.’

इस घटना के बाद थाना इंचार्ज ज्ञानचंद शुक्ला और आउटपोस्ट इंचार्ज धीरेंद्र वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है. इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं. हिरासत में मौत के मामले की विस्तृत जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भिखारीपुर गांव पहुंच गए हैं.

HC ने लगा दी पत्नी को फटकार, अब जेल से बाहर नहीं आ पाएगा राम रहीम

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को विवादास्पद बाबा और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा की पैरोल याचिका को फिर से खारिज कर दिया है. अदालत के इस फैसले से कई नेताओं को सियासी नुकसान हो सकता है. बता दें कि अपनी ही दो अनुयायी महिलाओं के साथ बलात्कार करने के मामले में राम रहीम को 20 साल की सजा हुई है.

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का हरियाणा और पंजाब में खासा असर है. इसलिए वहां के हर चुनाव में उसकी भूमिका और अपील का खासा असर होता रहा है. अब कुछ ही दिनों बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. वहां की सत्तारुढ़ पार्टी और अन्य दल किसी ना किसी तरह से बाबा को कैश करने की जुगत में हैं.

यही वजह है कि कुछ समय पहले भी राम रहीम के वकीलों ने पैरोल के लिए आवेदन किया था. जिसे जेल प्रशासन ने ठुकरा दिया था. इसी तरह फिर से राम रहीम की पत्नी ने पैरोल के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी. लेकिन अदालत ने उसे ठुकरा दिया. ठुकराया ही नहीं बल्कि राम रहीम की पत्नी को फटकार भी लगाई.

हाई कोर्ट के इस इनकार ने राम रहीम के साथ-साथ उन तमाम नेताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जो बाबा के पैरोल पर जेल से बाहर आने का इंतजार कर रहे थे.

गौरतलब है कि दोषी बाबा की पत्नी हरजीत कौर ने बाबा की 85 वर्षीय बीमार मां नसीब कौर की देखभाल के लिए उसे तीन सप्ताह की पैरोल मांग की थी. अदालत का मत था कि राम रहीम अपनी पैरोल के लिए खुद ही याचिका दायर कर सकता है. अच्छे आचरण की रिपोर्ट के आधार पर पैरोल देने की मांग की गई थी.

हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि राम रहीम की मां का इलाज उसके संप्रदाय द्वारा चल रहे अस्पताल में करवाया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि उसका पूरा परिवार पहले से ही उसकी मां के साथ रह रहा है और उनके द्वारा बीमार की सेवा की जा सकती है.

बता दें कि गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा इस वक्त रोहतक की जेल में अपनी सजा काट रहा है. इससे पहले जेल प्रशासन ने बीमार मां से मिलने के लिए मांगी गई पैरोल को भी खारिज कर दिया था.

पपीता खाने से व्यक्ति का यौवन बना रहता है बहुत ही लंबे समय तक

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औषधीय गुणों से भरपूर पपीता एक ऐसा फल है जो हमारे यहाँ पुरे साल मिलता है। यह एक ऐसा फल है जिसका सिर्फ सेवन करने से ही शरीर कई बीमारियों से बचा रह सकता है। पपीते को तो संजीवनी बूटी भी कहा जाता है। सामान्यतः शरीर के सभी रोग पेट खराब होने से ही होते हैं, पर पपीता पेट के लिए ही सबसे बड़ा रामबाण है। पपीते में विटामिन सी, विटामिन ई और बीटा कैरोटीन जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट बहुत ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे व्यक्ति का यौवन बहुत ही लंबे समय तक बना रहता है
1. कब्ज 
जो लोग कब्ज की समस्या परेशान रहते है उन्हें पपीते का नियमित सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि इसमें फाइबर की बहुत ही भरपूर मात्रा पाई जाती है।

2. हाइपरटेंशन 
पपीते के नियमित सवेन से हाई बीपी भी पूरी तरह कंट्रोल हो जाता है। इसका सेवन नाश्ते में बहुत अच्छा रहता है।
3. बढ़ती उम्र को रोके 
लंबी उम्र पाने और लंबे समय तक जवान रहने के लिए पपीता खाना बहुत फायदेमंद है।
4. मोटापे का काल 
अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो लगातार नाश्ते में इस फल का सेवन करके अपना वजन कंट्रोल कर सकते है।
5. डायबिटीज 
पपीता दिल के मरीजों और डायबिटीज के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होता है।इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होने लगता है।
6. पेट के लिए वरदान 
पपीते को पेट के लिए वरदान समझा जाता है। यह पेट की सारी तकलीफों को दूर कर देता है। इससे बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या भी खत्म हो जाती है।

7. कैंसर 
आजकल काफी लोगों को यह बीमारी होने लगी है लेकिन यदि पपीते का रोज अपनी डाइट में सेवन किया जाए तो इस बीमारी से बचा जा सकता है।
8. त्वचा संबंधी समस्याएं 
नियमित रूप से पपीता खाने से झुर्रियां, बालों का झड़ना, चर्मरोग से सम्बन्धित समस्याएं भी खत्म हो जाती है। इससे दाद, खाज, खुजली भी दूर हो जाती है

ज्यादा पनीर का सेवन भी शरीर को पहुंचा सकता हैं बहुत नुकसान

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पनीर एक ऐसी चीज़ हैं जिसको बच्चो से लेकर बुजुर्ग तक भी खूब पसंद करते हैं कई लोग पनीर को अपने रोजाना की डाइट में भी फॉलो करते हैं जो शरीर से दुबला होता हैं तो कई डाइट गुरु उनको खाने में पनीर के लिए हमेसा बोलते हैं लेकिन ज्यादा पनीर भी हमारे शरीर को बहुत नुकसान पंहुचा सकता हैं कैसे आईये हम आपको बताते हैं|

एक रिसर्च में बताया गया हैं कि पनीर में सेचुरेटेड फैटी एसिड ज्यादा होता हैं और पनीर के बहुत ज्यादा सेवन से दिल के रोगों की आशंका बढ़ सकती हैं यही नहीं दूध, मक्खन, मांस और चॉकलेट्स आदि का भी जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है।

ये भी सेचुरेटेड फैटी एसिड के प्रमुख स्रोत हैं एक सीमा तक इनका इस्तेमाल सही हैं लेकिन इनका जरूरत से ज्यादा सेवन आपको दिल का रोगी बना सकता हैं रिसर्च में बताया गया हैं कि इन चीजों की जगह आपको अनाज, कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन आदि का सेवन करना चाहिए।

हॉर्वर्ड टीएचचान स्कूल ऑव पब्लिक हैल्थ में डॉक्टरेट के स्टूडेंट जेंग जांग ने बताया कि बैलेंस्ड डाइट की सिफारिशों में सेचरेटेड फैट को अनसैचुरेटेड फैट या खड़े अनाज से बदले जाने की बात होनी चाहिए। यह हार्टया नर्व से संबंधित रोगों को रोकने के तौर पर प्रभावी कदम होगा।

सैचुरेटेड फैट: 
कोई भी फैट जो रूम टेंपरेचर (सामान्य तापमान पर) भी जमा रहता है उसे सेचुरेटेड फैट भी कहा जाता हैं जबकि अनसेचुरेटेड फैट सामान्य तापमान पर भी द्रव्य रूप में तरल बना रहता है।

सैचुरेटेड फैट के बारे में जाने: 
कोई भी फैट, जो कमरे के तापमान पर भी जमा रहता हैं वह विल्कुल सैचुरेटेड फैट होता हैं और संतुलित मात्रा मे इसका इस्तेमाल किया जाए तो हार्ट के लिए बहुत ही अच्छा होता हैं स्वस्थ जीवन के लिए हम जितनी कैलरी लेते हैं उसका 25-35 फीसदी या उससे कम हिस्सा ही फैट का होना चाहिए। सैचुरेटेड फैट कुल कैलोरी का 7 फीसदी से कम होना चाहिए।

रोजाना हरी मिर्च के सेवन से सेहत रहती है दुरुस्त

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आप यह जानकर बहुत हैरान हो जाएंगे की हरी मिर्ची सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। जी बिलकुल, आज हम आपको तीखी-तेज हरी मिर्ची का इफेक्ट क्यों और कैसे होता हैं, ये बताएँगे .

हरी मिर्च सिर्फ हमारे खाने का स्वाद बढ़ाने के काम नहीं आता है बल्कि इसके कई हेल्थ बेनिफिट भी हैं। तीखी हरी मिर्च का सेवन सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद होता है। ये त्वचा से लेकर शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करती हैं। रोजाना हरी मिर्च का सेवन करने से सेहत दुरुस्त रहती है।

हरी मिर्च में कैप्सियासिन नामक यौगिक मौजूद होता है, जो इसे मसालेदार बनाता है। मिर्च खाने से खून साफ होता है और नसों में इसका फ्लो तेजी से होता है, जिससे चेहरे पर पिंपल्स की समस्या नहीं होती। मिर्च में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी और विटामिन ई पाया जाता है।

छोटी-छोटी फुन्सियां उठने पर हरी मिर्च का लेप लगाने से फुन्सियां दूर हो जाती हैं। खाज-खुजली के लिए मिर्च को तेल में जलाकर मालिश करने से आराम मिलता है। हरी मिर्च या फिर शिमला मिर्च में आपको काफी ज्यादा विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट मिल जाएगा। एंटीऑक्सीडेंट हमारी त्वचा और सेहत के लिये बहुत अच्छा माना जाता है। मिर्च खाने से चेहरे पर जल्दीं झुर्रियां नहीं पड़तीं।

हरी मिर्च में विटामिन ई होता है, जो कि त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। हरी मिर्च में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण को दूर रखते हैं। हरी मिर्च को खाने से आपको त्वचा रोग नहीं होगा। महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी हो जाती है, लेकिन अगर आप हरी मिर्च खाने के साथ रोज खाएंगे तो आपकी यह कमी भी पूरी हो जाएगी और एनीमिया की समस्या दूर हो जाएगी।

मध्य प्रदेश में बच्चों के सेहत से हो रहा है खिलवाड़, हुआ ये खुलासा

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नया भारत बनाने की घोषणा के साथ देश में बच्चों को पढ़ाने और बढ़ाने के नारे जोरों से सुनाई देते हैं, मगर जब कभी हकीकत सामने आती है तो रूह कांप उठती है। मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक ऐसा सच सामने आया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का खुलासा करता है। यहां स्कूली बच्चे मध्यान्ह भोजन की थालियां गंदे पानी में धोने को मजबूर हैं।

यहां हम बात सागर जिले की कर रहे हैं, जो संभागीय मुख्यालय भी है। यहां के मकरोनिया इलाके में सरकारी प्राथमिक पाठशाला है। इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों को भी मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। ये बच्चे जिस थाली में खाना खाते हैं, उसे पास के एक गड्ढे में भरे गंदे पानी में धोने के लिए कहा जाता है। स्कूली महकमा बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किए जा रहे खिलवाड़ से अनजान बना हुआ है।

इस प्राथमिक पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र अधिकतम 10 से 11 साल तक की है। इन्हें खाना थालियों में दिया जाता है, जिसे उन्हें खाना खाने के बाद गंदे पानी में धोना पड़ता है। गंदे पानी से भरा एक गड्ढा स्कूल के पास ही है। बच्चों का कहना है कि स्कूल में पानी का इंतजाम नहीं है, इसलिए वे गंदे पानी में थाली धोते हैं।

बच्चे एक दिन जिस थाली को गंदे पानी से धोते हैं, उसी थाली में अगले दिन फिर खाना खाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसाती मौसम है और गंदे पानी से धोई गई थाली में खाना खाने से बीमारी फैलने की आशंका को कोई नकार नहीं सकता। जब स्कूल के जिम्मेदार अधिकारियों से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई तो कोई भी बात करने को तैयार नहीं हुआ।

शिक्षा विभाग के परियोजना अधिकारी एच.पी. कुमीर् ने हालांकि संवाददाताओं के सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा जूठी थाली गंदे पानी में धोए जाने की जानकारी उन तक आई है, वे मामले की जांच करा रहे हैं। इसके लिए जो भी कोई जिम्मेदार होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि मध्याह्न भोजन योजना का काम स्वसहायता समूह के जिम्मे है। यही समूह बच्चों को भोजन उपलब्ध कराते हैं और बर्तन साफ कराने की जिम्मेदारी भी इन्हीं समूहों की है। राज्य के कई स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों को ही जूठे बर्तन साफ करना पड़ता है