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cg” संत कबीर का संदेश आज भी समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक : कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत…”

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संत कबीर के आदर्शों पर चलकर समाज में समरसता और सेवा की भावना मजबूत होगी : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय”

सोनपैरी कबीर आश्रम में संत कबीर जयंती महोत्सव आयोजित”

मुख्यमंत्री श्री साय ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश”

3 महीने बढ़ाई जाएगी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना : सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों के साथ लंबित बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे उपभोक्ता”

“गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।**

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं।***

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं।***

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है।***

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।***

मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे।***

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।***

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।***

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष श्री चंदूलाल साहू, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा,  डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, श्री अखिलेश सोनी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि एवं कबीरपंथी अनुयायी उपस्थित थे।***

” स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों की समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा…”

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” केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।”

“बच्चों के स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों की समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।”

“सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) का भी शुभारंभ करेंगे। यह एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य जन्म से लेकर 36 माह तक के बच्चों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।”

“यह सम्मेलन विज्ञान भवन में आयोजित होगा, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी), खाद्य एवं औषधि सुधार तथा संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।”

“आधिकारिक बयान के अनुसार, एसएसबीएसके का शुभारंभ देश के प्रत्येक बच्चे को व्यापक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।”

“यह कार्यक्रम जन्म से लेकर 36 माह तक के बच्चों के लिए घर और समुदाय आधारित देखभाल की एक निर्बाध व्यवस्था उपलब्ध कराने की परिकल्पना करता है। इसमें जीवन के पहले तीन वर्षों को बच्चे के जीवित रहने, उसके विकास, पोषण और मस्तिष्क के प्रारंभिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।”

“एसएसबीएसके, होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (एचबीएनसी) और होम-बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) जैसी दो प्रमुख सामुदायिक आधारित योजनाओं को एकीकृत कर एक समग्र राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में कार्य करेगा।”

“इन दोनों कार्यक्रमों के एकीकरण से जन्म से लेकर जीवन के पहले तीन वर्षों तक बच्चों की देखभाल में निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, एक समेकित दृष्टिकोण के माध्यम से बच्चों के जीवित रहने, पोषण, स्वस्थ विकास और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को मजबूत किया जाएगा।”

“पहली बार इस कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं और “जोखिमग्रस्त (एट-रिस्क)” बच्चों के लिए जोखिम-आधारित (रिस्क-स्ट्रैटिफाइड) प्रणाली लागू की जाएगी। ऐसे बच्चों को उनके जोखिम के स्तर के अनुसार अतिरिक्त घरेलू स्वास्थ्य सेवाएं और फॉलो-अप प्रदान किया जाएगा।”

“कार्यक्रम के तहत “जोखिमग्रस्त” नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले 42 दिनों के भीतर अधिकतम नौ बार घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी, जबकि “जोखिमग्रस्त” बच्चों को 36 माह की आयु तक अधिकतम आठ बार घरेलू स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।'”

“यह कार्यक्रम आशा कार्यकर्ताओं (आशा), सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) द्वारा संयुक्त रूप से घर-घर जाकर सेवाएं प्रदान करने के माध्यम से देखभाल की निरंतरता को भी मजबूत करेगा।””

“इसके अतिरिक्त, प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर वेल-बेबी सेशन तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रत्येक माह शिशु शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि “जोखिमग्रस्त” बच्चों की समय रहते पहचान, मूल्यांकन और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।”

“कार्यक्रम में निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस), चाइल्ड ट्रैकिंग एप्लीकेशन, रेफरल प्रणाली और अलर्ट मैकेनिज्म जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे निगरानी, फॉलो-अप और माताओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।”

” ITR वेरिफिकेशन नोटिस के लिए आखिरी तारीख”  30 जून” ” सब्सिडी वाले LPG e-KYC के लिए डेडलाइन” 30 जून “

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30 जून आम लोगों और बिज़नेस मालिकों, दोनों के लिए एक अहम तारीख है, क्योंकि इस दिन कई फाइनेंशियल और टैक्स से जुड़ी डेडलाइन होती हैं। महीने के आखिर तक, सब्सिडी पाने के हकदार लोगों को अपनी LPG e-KYC की प्रक्रिया पूरी करनी होगी; इनकम टैक्स डिपार्टमेंट 30 जून तक कुछ खास रिटर्न के लिए वेरिफिकेशन नोटिस जारी कर सकता है; और बिज़नेस को GST से जुड़ी ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

इसलिए, 30 जून की डेडलाइन बहुत अहम है। सब्सिडी वाले LPG e-KYC के लिए डेडलाइन

जो LPG ग्राहक 30 जून तक अपना आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक e-KYC पूरा नहीं कर पाएंगे, उन्हें सीधे अपने बैंक अकाउंट में LPG सब्सिडी मिलनी बंद हो जाएगी। हालांकि LPG सिलेंडर की बुकिंग पहले की तरह होती रहेगी, लेकिन सब्सिडी नहीं मिलेगी और ग्राहकों को सिलेंडर की पूरी कीमत चुकानी होगी। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ़ किया है कि सभी LPG ग्राहकों के लिए e-KYC ज़रूरी नहीं है; यह खास तौर पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों (जिन्हें हर साल e-KYC पूरा करना होता है) और उन अन्य लाभार्थियों के लिए ज़रूरी है जिनका वेरिफिकेशन अभी तक नहीं हुआ है। जिन ग्राहकों ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में e-KYC पूरा कर लिया है और जो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी नहीं हैं, उन्हें यह प्रक्रिया दोबारा करने की ज़रूरत नहीं है।

ITR वेरिफिकेशन नोटिस के लिए आखिरी तारीख: 30 जून

हालांकि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026 है, लेकिन 30 जून उन टैक्सपेयर्स के लिए एक अहम तारीख है जिन्होंने पहले ही अपना रिटर्न फाइल कर दिया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस तारीख तक कुछ खास रिटर्न के लिए सेक्शन 143(2) के तहत वेरिफिकेशन – यानी डिटेल्ड जांच – का नोटिस जारी कर सकता है। अगर टैक्स अथॉरिटी को ITR और फॉर्म 26AS, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS), बैंक रिकॉर्ड या दूसरे फाइनेंशियल डेटा के बीच कोई अंतर मिलता है, तो रिटर्न को वेरिफिकेशन के लिए चुना जा सकता है। बहुत ज़्यादा वैल्यू वाले ट्रांज़ैक्शन, इनकम बताने में गड़बड़ी, रीवैल्यूएशन की कार्यवाही या सर्च और सर्वे ऑपरेशन से जुड़े मामलों को भी इस प्रक्रिया के लिए चुना जा सकता है।

बिज़नेस मालिकों को GST से जुड़े ज़रूरी काम भी पूरे करने होंगे

30 जून फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही का आखिरी दिन है, इसलिए यह बिज़नेस मालिकों के लिए एक अहम तारीख है। कंपनियों को जुलाई में GST, TDS और TCS रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन के लिए तैयारी करनी चाहिए। इसके लिए, उन्हें तिमाही खत्म होने से पहले अपने अकाउंट्स की बुक्स, टैक्स कटौती के रिकॉर्ड और कानूनी रिकॉर्ड अपडेट कर लेने चाहिए।

भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 बड़े समझौतों और विकास परियोजनाओं की घोषणा…

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भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 बड़े समझौतों और विकास परियोजनाओं की घोषणा की।

प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हारमिनी की मौजूदगी में लिए गए इन फैसलों से रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा।

“सबसे अहम घोषणा सेशेल्स में भारत के UPI-आधारित डिजिटल पेमेंट सिस्टम को शुरू करने की थी। भारत ने अब तक 23 से ज़्यादा देशों के साथ UPI से जुड़े समझौते किए हैं और यह सुविधा अभी नौ देशों में चल रही है।”

“इसके अलावा, भारत स्थानीय विकास परियोजनाओं के लिए सेशेल्स को ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन (लोन) दे रहा है। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि, एक नए राष्ट्रीय अस्पताल के निर्माण और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर भी अहम समझौते किए। भारत ने सेशेल्स को एक तेज़ गश्ती पोत (fast patrol vessel), 10 यूटिलिटी वाहन, पांच नावें, छह एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट सौंपा।”

“साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौते किए गए। ये घोषणाएं दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने के जश्न के दौरान की गईं।”

“गोल्डन जुबली नेशनल डे पर मुख्य अतिथि के तौर पर मोदी”

रविवार को प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया।

उन्हें अब तक 34 देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुके हैं। आज मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर सेशेल्स की आज़ादी की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में शामिल होंगे।

भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी, भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे जहाज INS इक्षक परेड और समारोह में हिस्सा लेंगे।

भारतीय नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और नौसेना बैंड भी परेड में शामिल होंगे। सेशेल्स की यात्रा के दौरान पीएम मोदी के दौरे की 4 अहम बातें

गोल्डन जुबली नेशनल डे पर मुख्य अतिथि

पीएम मोदी 29 जून को सेशेल्स के आज़ादी के 50वें जश्न में मुख्य अतिथि होंगे। भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी, भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे जहाज INS इक्षक भी परेड और समारोह में हिस्सा लेंगे। 2. $175 मिलियन का आर्थिक पैकेज

भारत ने सेशेल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए US$175 मिलियन (₹1,651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा, भारत ने सेशेल्स को ‘PS Le Vigilant’ (असली नाम ‘PS Le Espoir’) नाम का भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) तोहफे में दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह जहाज सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हेर्मिनी को सौंपा। इससे सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत होगी।

नए समझौतों पर हस्ताक्षर

भारत और सेशेल्स ने 19 अहम समझौतों और घोषणाओं की जानकारी दी। इनमें प्रत्यर्पण संधि और UPI-आधारित डिजिटल पेमेंट सिस्टम की शुरुआत वगैरह शामिल हैं।

मोदी ने कोको डी मेर के पौधे लगाए

कोको डी मेर का पौधा और उसका फल प्राकृतिक रूप से सिर्फ सेशेल्स में ही पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाले बीज दुनिया में सबसे बड़े और भारी माने जाते हैं; एक बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम के बीच हो सकता है।

कोको डी मेर के पेड़ ‘डायोशियस’ (dioecious) होते हैं, यानी नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला की कमर जैसा दिखता है और इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है, जबकि नर फूल पुरुष जननांग जैसा दिखता है। इस अनोखी बनावट की वजह से सदियों से इस पौधे के बारे में कई लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित रही हैं।

पेड़ को बड़ा होने और फल देने में 20 से 40 साल लगते हैं, और एक फल को पूरी तरह पकने में 6 से 7 साल लगते हैं। इस पेड़ की उम्र बहुत लंबी होती है। माना जाता है कि यह 200 से 350 साल तक जीवित रहता है।

पुराने समय में, जब यह फल समुद्र में तैरकर मालदीव या भारत के तट तक पहुँचता था, तो लोग इसे समुद्र की तलहटी में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल मानते थे। इसीलिए इसका नाम फ्रेंच में ‘कोको डी मेर’ रखा गया, जिसका मतलब है ‘समुद्र का नारियल’।

मोदी सेशेल्स का दौरा करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री हैं

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1976 में सेशेल्स का दौरा किया था – उसी साल जब देश को आज़ादी मिली थी। भारत ने सेशेल्स के आज़ादी के जश्न के लिए नौसेना का युद्धपोत INS नीलगिरी भी भेजा था।

इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर से सेशेल्स का दौरा किया। उनके दौरे के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स का दौरा नहीं किया। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ़ ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही, मोदी को अब 34 देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। पुरस्कार मिलने के बाद, पीएम मोदी ने सेशेल्स की जनता और सरकार के साथ-साथ राष्ट्रपति पैट्रिक हेर्मिनी का भी धन्यवाद किया।

“भारतीय शेयर बाजार फिर से दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट…”

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“भारतीय शेयर बाजार फिर से दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बन गया है और इसका मार्केटकैप 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है।”

“वहीं, हाल ही मार्केटकैप में भारतीय स्टॉक मार्केट को पछाड़ चुके ताइवान और साउथ कोरिया के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।”

“इससे फिर से दोनों बाजारों का मार्केटकैप भारत से कम हो गया है।”

“मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केटकैप 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। ताइवान के शेयर बाजार का मार्केटकैप 4.97 ट्रिलियन डॉलर और साउथ कोरियाई बाजार का मार्केटकैप 4.66 ट्रिलियन डॉलर है।”

“इस दौरान, अमेरिका और चीन के बाजार पूंजीकरण और रैंकिंग में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर शेयरों में हाल के महीनों की जबरदस्त तेजी के बाद निवेशकों ने ताइवान और दक्षिण कोरिया में मुनाफावसूली की है, जिससे दोनों बाजार में की रैकिंग में बदलाव आया है।”

“इसके अलावा, जून में वैश्विक इक्विटी बाजारों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा, जबकि भारतीय शेयरों ने काफी हद तक मजबूती देखी गई।”

“इस महीने के दौरान, भारत का मार्केटकैप 2.75 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान के मार्केटकैप में क्रमशः 4.7 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत की गिरावट आई।”

“अन्य प्रमुख बाजारों में, जापान का बाजार पूंजीकरण लगभग 1 प्रतिशत गिरा, हांगकांग में 8.3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, कनाडा में 3 प्रतिशत की कमी आई , यूके में लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई, फ्रांस 1.1 प्रतिशत गिरा और जर्मनी में 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।”

“कई एनालिस्ट्स ने भारतीय इक्विटी में इस मजबूती का कारण कच्चे तेल की कीमतों में कमी, बेहतर होते वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों की लगातार दिलचस्पी को बताया है।””

“उनके अनुसार, निफ्टी का प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल लगभग 24 गुना से घटकर करीब 18 गुना हो गया है, जिससे वैल्यूएशन अधिक आकर्षक हो गए हैं।”

“इसके अलावा, भारतीय इक्विटी बेंचमार्क ने कई ग्लोबल मार्केट्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया।”

“इस महीने अब तक, डॉलर के हिसाब से सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः लगभग 4 प्रतिशत और करीब 3 प्रतिशत की बढ़त हुई है।”

**पीएम ने नेशनल असेंबली को संबोधित किया** **पीएम मोदी को सम्मान * *

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के दौरे पर हैं, जहाँ उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ़ द ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लिया और परेड देखी।

कार्यक्रम के दौरान, जब भारतीय टुकड़ी मार्च करते हुए गुज़री, तो वे उनके सम्मान में खड़े हो गए। सैनिकों के प्रति पीएम मोदी का यह लगाव लोगों का दिल जीत रहा है।

सेशेल्स की अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुँचने के बाद, पीएम मोदी ने यह सम्मान स्वीकार किया और इसे 1.4 अरब भारतीयों तथा दोनों देशों के बीच 50 साल पुरानी गहरी दोस्ती को समर्पित किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान, उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत के ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विज़न और अपनी ‘पड़ोसी पहले’ (नेबरहुड फर्स्ट) नीति को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित किया और ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सेशेल्स के साथ भारत के संबंध 50 साल से कुछ ज़्यादा पुराने हैं; इनकी शुरुआत अगस्त 1770 में हुई थी, जब पाँच भारतीय ‘टेलेमैक’ जहाज़ से वहाँ पहुँचे थे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के लिए सेशेल्स का बहुत महत्व है।

इससे पहले, सेशेल्स ने पीएम मोदी को अपने सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ़ द ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया था। सेशेल्स के राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और ‘ग्रीन विज़न’ को बढ़ावा देने में पीएम मोदी के बेहतरीन और साहसी वैश्विक नेतृत्व को देखते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया।

” राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल-बंटवारे पर सहमति” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे…”

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राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल-बंटवारे पर सहमति के बाद सोमवार को दोनों राज्य दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस दौरान, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी उपस्थित होंगे।

इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच तीन दशक से चला आ रहा गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रविवार को हुई एक लंबी बैठक में दोनों राज्यों के अधिकारियों की ओर से रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। अभी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समझौते को औपचारिक रूप देंगे।

सीएमओ अधिकारियों ने सोमवार को पुष्टि की कि भजनलाल शर्मा सुबह 8.30 बजे जयपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए। यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में आयोजित किया जाएगा।

यमुना जल परियोजना राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के तीन जिलों सीकर, चूरू और झुंझुनू को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराएगी। अधिकारियों ने कहा, “समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्र सरकार के साथ-साथ राजस्थान और हरियाणा सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में होंगे।”

दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में बीते दिन दो घंटे चली बैठक के बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों में यह सहमति बनी। राजस्थान का प्रतिनिधित्व मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता भुवन भास्कर ने किया। हरियाणा का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल और मुख्य अभियंता वीरेंद्र सिंह ने किया, जबकि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

सहमति के अनुसार, हरियाणा कई तय जगहों से पानी लेगा। इसमें दनोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सरसौद डिस्ट्रीब्यूटरी से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंडवान से 70 क्यूसेक, सरसाना माइनर पर पट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल के पास प्योदा से 43 क्यूसेक और कैथल के पास चंदना-मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी लिया जाएगा। इसके अलावा, हरियाणा को एक और तय इनटेक पॉइंट का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी और जरूरत पड़ने पर हसियावास के तीन अन्य जलाशयों में से किसी एक से पानी लेने की इजाजत होगी।

इस प्रोजेक्ट का आर्थिक बोझ राजस्थान सरकार उठाएगी, साथ ही केंद्र सरकार से भी आर्थिक मदद पाने की कोशिश की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि यही पाइपलाइन नेटवर्क भविष्य के किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी प्रोजेक्ट्स से राजस्थान के हिस्से का पानी पहुंचाने में भी मदद करेगा।

हालांकि, हरियाणा ने 1994 के समझौते के बाद बदलती जरूरतों को देखते हुए पानी के बंटवारे पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन दोनों राज्य फिलहाल मूल समझौते को लागू करने पर सहमत हो गए हैं। समझौते के तहत राजस्थान को यमुना का 1,917 क्यूसेक पानी मिलेगा।

पानी की सप्लाई को आसान बनाने के लिए हथिनीकुंड से हसियावास तक तीन पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी, जिनमें से हर एक का व्यास 3.6 मीटर होगा। प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के पांच जिलों यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार से होकर गुजरेगी।

अधिकारियों ने कहा कि समझौते को औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद, पाइपलाइन कॉरिडोर के साथ जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होगा। टेंडर जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

“PMRC स्कीम क्या है?? सरकार देगी 14 करोड़ रुपये तक सहायता, जानें पूरी डिटेल…” 

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भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने ‘प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर’ (PMRC) स्कीम 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का मकसद उन भारतीयों को देश लौटने और यहीं अपना रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित करना है जो अभी दुनिया की बड़ी यूनिवर्सिटीज़ और रिसर्च सेंटर्स में काम कर रहे हैं।

अगर आप किसी रिसर्च सेंटर में काम कर रहे हैं और सरकारी फेलोशिप के ज़रिए अपना रिसर्च करना चाहते हैं, तो PMRC स्कीम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आप PMRC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 1 जून से शुरू हो गई है और आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 15 जुलाई, 2026 है।

PMRC स्कीम क्या है?

PMRC स्कीम शिक्षा मंत्रालय की एक बड़ी पहल है, जिसे खास तौर पर विदेशों में काम कर रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स और विशेषज्ञों को भारत के शिक्षा और रिसर्च इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए बनाया गया है। इस स्कीम के लिए चुने गए लोगों को भारत के प्रमुख संस्थानों में रिसर्च करने का मौका मिलेगा और सरकार उन्हें ₹14 करोड़ तक की आर्थिक मदद देगी।

कौन आवेदन कर सकता है?

भारतीय मूल के रिसर्चर्स, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स ‘प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर’ (PMRC) स्कीम के तहत आवेदन करने के पात्र हैं।

विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिक

OCI कार्डधारक

भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO)

आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले, PMRC के आधिकारिक पोर्टल pmrc.education.gov.in पर जाएं।

होमपेज पर, अपना प्रपोज़ल जमा करने या “Apply Now” (अभी आवेदन करें) का विकल्प चुनें। अकाउंट बनाने और अपनी ईमेल का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन पूरा करने के लिए “Fellows” सेक्शन में जाएं। फॉर्म में अपनी एकेडमिक, प्रोफेशनल और रिसर्च बैकग्राउंड से जुड़ी ज़रूरी जानकारी भरें और उसे अपलोड करें।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवा उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर…

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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवा उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। ISRO के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) ने कई पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।

योग्य उम्मीदवारों को टेक्निकल, साइंटिफिक और अन्य सपोर्ट स्टाफ़ जैसे पदों के लिए चुना जाएगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 जून, 2026 को शुरू हुई और उम्मीदवार 20 जुलाई, 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। चुने गए उम्मीदवारों को संगठन की ज़रूरतों के आधार पर देश भर के विभिन्न ISRO केंद्रों पर तैनात किया जाएगा।

भर्ती अभियान

इस ISRO ISTRAC भर्ती अभियान के तहत कई अलग-अलग भूमिकाओं के लिए नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट-A, टेक्नीशियन-B, ड्राफ्ट्समैन-B और कुक-A शामिल हैं। चुने गए उम्मीदवारों को संगठन की ज़रूरतों के अनुसार देश भर के विभिन्न ISRO केंद्रों पर तैनात किया जा सकता है।

अंतिम तिथि

इस भर्ती अभियान के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 जून, 2026 को सुबह 10:00 बजे शुरू हुए। उम्मीदवार 20 जुलाई, 2026 को रात 11:55 बजे तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन शुल्क क्या है?

आवेदन शुल्क पद के आधार पर अलग-अलग है। टेक्निकल असिस्टेंट और साइंटिफिक असिस्टेंट पदों के लिए कुल शुल्क ₹750 है; इस राशि में आवेदन शुल्क और प्रोसेसिंग शुल्क दोनों शामिल हैं। टेक्नीशियन-B, ड्राफ्ट्समैन-B और कुक-A पदों के लिए कुल शुल्क ₹500 तय किया गया है। ISRO ने कहा है कि नियमों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को प्रोसेसिंग शुल्क वापस कर दिया जाएगा।

भर्ती आवेदन

इस भर्ती के लिए पात्र होने के लिए, उम्मीदवारों की आयु 20 जुलाई, 2026 को 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी। शैक्षणिक योग्यता हर पद के लिए अलग-अलग है। ज़रूरतों में ITI सर्टिफिकेट, इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, B.Sc. जैसी योग्यताएं शामिल हैं। लाइब्रेरी साइंस में डिग्री या मास्टर डिग्री और कुक के पद के लिए संबंधित अनुभव।

चरण प्रक्रिया

कैंडिडेट्स का सिलेक्शन कई चरणों वाली प्रक्रिया से किया जाएगा। सबसे पहले, लिखित परीक्षा या कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) होगा। इसके बाद, ज़रूरी पदों के लिए स्किल टेस्ट होगा। आखिरी चरण में, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल जांच के बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन

  • कैंडिडेट्स सबसे पहले ISRO की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं।
  • ‘Careers’ सेक्शन में जाएं और ‘ISTRAC Recruitment 2026’ लिंक खोलें।
  • रजिस्टर करें, लॉग इन करें और एप्लीकेशन फॉर्म भरें।
  • ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें, एप्लीकेशन फीस भरें और फॉर्म सबमिट करें।
  • एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद, एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंटआउट या PDF सेव कर लें और रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षित रखें।

मध्य पूर्व तनाव से निपटने की भारत की प्रक्रिया कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर…

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मध्य पूर्व तनाव से निपटने की भारत की प्रक्रिया कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर थी। इसकी वजह देश में पिछले एक दशक में बनाया गया इन्फ्रास्ट्रक्चर था, जिससे हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भी पेट्रोल पंप और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही।

यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई।

पेट्रोलियम मंत्रालय के कहा, भारत कच्चे तेल की अपनी स्थिति को सिर्फ स्टॉक के भरोसे नहीं, बल्कि अलग-अलग स्रोतों से तेल मंगाकर सुरक्षित रखता है। देश को तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है; इसमें लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देश शामिल हुए हैं, साथ ही अमेरिका और रूस से भी तेल की आपूर्ति बढ़ाई गई है।

मंत्रालय ने बताया कि इसके साथ ही रूटिंग भी बदल गई है, जिससे अब भारत का बहुत कम कच्चा तेल होर्मुज से होकर गुजरता है। आईएसपीआरएल के तहत स्ट्रैटेजिक रिजर्व में लगभग 5.33 मिलियन टन तेल है, जो लगभग तीन हफ्ते की जरूरत को पूरी कर सकता है।

भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल था जो इस हॉर्मुज स्ट्रेट से अपने कार्गो की आवाजाही जारी रख पाए और किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं हुई।

इसके अलावा, एथेनॉल ब्लेंडिंग का 20 प्रतिशत तक पहुंचना एक और संरचनात्मक राहत देता है, जिससे हर साल कच्चे तेल के आयात की भारी मात्रा की बचत होती है।

कच्चे तेल की कीमत गिरकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जो मध्य पूर्व संकट के पहले के स्तर के करीब है। स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने के साथ कीमतें और कम हो रही हैं।

मंत्रालय ने कहा कि आवाजाही के पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा, क्योंकि अभी भी बारूदी सुरंगों को हटाने और बड़े जहाजों के जमावड़े को निपटाने का काम बाकी है, लेकिन आपूर्ति में रुकावट का सबसे बुरा दौर अब बीत चुका है।

पेट्रोल और डीजल के मामले में, झटके का असर ग्राहकों पर नहीं डाला गया, बल्कि उसे खुद संभाला गया। केंद्र सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की। इसके तहत पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज को 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए और डीजल पर 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दिया गया। इस कदम से सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।

इसके बाद मार्केटिंग कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाईं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से भी ऊपर चली गई थीं और उन्हें रोजाना लगभग एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा था।

जब कीमतों में बदलाव करना जरूरी हो गया, तो 15 मई को प्रति लीटर 3 रुपए की एक ही बार बढ़ोतरी की गई, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम थी।

संकट शुरू होने के समय से तुलना करें तो, भारत में पेट्रोल पंप की कीमतों में हुई बढ़ोतरी किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम रही है। भारत में पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई।

एलपीजी का मामला सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी कामयाबी थी। भारतीय रसोई तक पहुंचने वाली आधी से अधिक कुकिंग गैस खाड़ी देशों से आती थी, और आपूर्ति में रुकावट के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा लगभग रातों-रात बंद हो गया।

आपूर्ति में रुकावट के आठ दिनों के भीतर ही एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया गया। इसमें सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटीन स्ट्रीम्स का इस्तेमाल करके अधिक से अधिक प्रोडक्शन करने का निर्देश दिया गया।

मंत्रालय ने बताया, “सात दिनों के भीतर, घरेलू प्रोडक्शन 35,000 टन से बढ़कर 54,000 टन प्रतिदिन हो गया। यह मात्रा लगभग 30,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की बची हुई आयात की जरूरत से कहीं अधिक थी, जिससे कमी को काफी हद तक घरेलू प्रोडक्शन से ही पूरा कर लिया गया। जिन रिफाइनरियों में पहले कभी एलपीजी का प्रोडक्शन नहीं होता था, उन्हें इसके प्रोडक्शन के लिए तैयार किया गया।”

कीमत के मामले में भी ग्राहकों का ध्यान रखा गया। 14.2 किलो वाले सिलेंडर की इंपोर्ट-लिंक्ड लागत 1,600 रुपए से अधिक होने के बावजूद, किसी भी घर के लिए तय कीमत 942 रुपए ही रखी गई। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए रिफिल पर 300 रुपए का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलने के बाद प्रभावी कीमत 642 रुपए रही। इस योजना के तहत 10.58 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं और यह एक आम घर की सालाना जरूरत को पूरा करती है।

7 जून को घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की कीमतों में प्रति सिलेंडर सिर्फ 29 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।

आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने पर, सरकार ने 25 जून को कमर्शियल और बल्क एलपीजी पर लगी पाबंदियां हटा लीं और नॉन-डोमेस्टिक सप्लाई को संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया।