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प्लास्टिक वेस्ट फैलाने वाली 10 बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई करेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नोटिस जल्द

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पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखण्ड में प्लास्टिक वेस्ट को रोकने के लिए राज्य का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब बड़ा कदम उठाने जा रहा है. बोर्ड ने 10 बड़ी कम्पनियों को चिन्हित किया है जिनके उत्पाद राज्य में प्रदूषण फैलाने के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार पाए गए हैं. बोर्ड अब इन कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछने जा रहा है कि वह अपने उत्पादों से होने वाले प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि एक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण चिंताजनक स्तिथि में पहुंच गया है.

 नोटिस की तैयारी 

उत्तराखण्ड के लिए वेस्ट मैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. देहरादून से ही हर रोज़ 269 टन कूड़ा निकलता है तो हरिद्वार से 255 टन कूड़ा. इसमें प्लास्टिक वेस्ट में सबसे ज्यादा ब्रांडेड कम्पनियों के उत्पादों का होता है. उत्तराखंड सरकार ने पॉलिथीन की थैलियों पर तो प्रतिबंध लगाया दिया है लेकिन इन उत्पादों से पैदा होने वाले प्लास्टिक कूड़े का कोई हल नहीं है.

दरअसल ठोस प्रबंधन नियम 2016 के अन्तर्गत मिली 2018-2019 की रिपोर्ट को लेकर अब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के भी हाथ पांव फूल गए हैं. प्लास्टिक एंव म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट बोर्ड के नोडल अधिकारी प्रदीप कुमार जोशी ने बताया कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अब 10 बड़ी कम्पनियों को नोटिस भेजने जा रहा है. इन कंपनियों से यह पूछा जाएगा कि उनके उत्पादों के प्लास्टिक वेस्ट को इकट्ठा करने और उसके डिस्पोज़ल के लिए वह क्या करने जा रहे हैं? 

जनवरी में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने राज्य सरकारों को पर्यावरणीय प्रदूषण से लड़ने की योजनाओं पर काम करने के निर्देश दिए थे. अप्रैल तक मांगी गई रिपोर्ट में प्लास्टिक के सिस्टमेटिक डिस्पोज़ल के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश थे लेकिन 25 राज्यों ने यह रिपोर्ट नहीं दी थी.

उत्तराखण्ड में प्लास्टिक वेस्ट डिस्पोज़ल को लेकर काम कर रही एनजीओ गति फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल कहते हैं कि सवा करोड़ से भी कम की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 6-7 करोड़ पर्यटक आते हैं और वह उसी अनुपात में प्लास्टिक वेस्ट भी छोड़ जाते हैं. वह कहते हैं कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का यह कदम देर से ही उठाया जा रहा लेकिन ज़रूरी कदम है. उत्तराखंड को प्लास्टिक वेस्ट को मना करना ही होगा. 

एक तथ्य है कि प्रदेश में पॉलिथीन को बैन करने का सरकार का आदेश एक साल भी ज़मीन पर नहीं उतर पाया है और देहरादून समेत पूरे राज्य में धड़ल्ले से पॉलिथीन की पन्नियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि जब छोटे दुकानदारों के प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सरकार प्रतिबंध नहीं लगवा पा रही तो बड़ी कंपनियों पर शिकंजा कैसे कसेगी?

बड़ी ख़बर : दुबई पोर्ट से भारतीय बासमती चावल के 250 कंटेनर गायब, मचा हड़कंप, कीमत 35 करोड़

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मेरठ से सऊदी अरब निर्यात किए गए भारतीय बासमती चावल के 250 कंटेनर दुबई पोर्ट से गायब हो गए हैं। उनमें 30 से 35 करोड़ रुपये की कीमत का बासमती चावल था। कंटेनर गायब होने से निर्यातकों में हड़कंप मचा है। घटना के करीब 15 दिन बाद भी कंटेनर्स का पता नहीं चल पाया है। इस प्रकरण को भारतीय दूतावास में भी रखा गया है।

ईरान के बाद सऊदी अरब दूसरा ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा भारतीय बासमती का निर्यात होता है। दोनों देशों में भारतीय बासमती को बहुत पसंद किया जाता है। ज्यादा बासमती निर्यात के मामले में दो साल पहले सऊदी अरब नंबर वन था। फिलहाल ईरान आगे है। हाल ही में सऊदी अरब निर्यात के लिए गए बासमती के 250 कंटेनर दुबई पोर्ट से गायब होने से निर्यातक परेशान हैं। निर्यातक गायब माल को बरामद कराने के लिए लगे हुए हैं। मामले में हरियाणा में एक एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। साथ ही ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने प्रकरण को भारतीय दूतावास में भी रखा है। 

सऊदी अरब में चार साल में निर्यात बासमती
वर्ष निर्यात आमदनी 
2015-16 948847.51 5493.85 
2016-17 809342.72 4494.53 
2017-18 792480.9 5343.17 
2018-19 867740.85 6549.07 
नोट: निर्यात मीट्रिक टन और आमदनी करोड़ में है।

परेशान है भारतीय निर्यातक 
 बासमती बड़ी मात्रा में विदेशों में निर्यात होता है। हाल ही में निर्यातकों को दूसरी बार बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा है। एक ओर ईरान में निर्यात किए बासमती का 1500 करोड़ रुपये फंसा है। वहीं अब सऊदी अरब निर्यात किए गए बासमती के कंटेनर गायब हो गए हैं। इन दोनों मामलों को लेकर निर्यातक परेशान हैं। 

वर्जन—
दूतावास से ही मिलेगी मदद 

 बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार, भारतीय दूतावास से ही इस मामले में मदद मिलेगी। उन्हें पूरी जानकारी दे दी गई है। उम्मीद है जल्द सभी कंटेनर का पता चला जाएगा। हरियाणा में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। 250 कंटेनर में करीब 30 से 35 करोड़ रुपये का माल था। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है।

राजस्थान की सरोज सिसोदिया पहुंची KBC की हॉट सीट पर, करोड़पति बनने से एक कदम दूर

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 बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) के 11वें सीजन से राजस्थान के लिए खुशखबरी आई है। राजस्थान के उदयपुर की बहू और भीलवाड़ा की बेटी सरोज सि​सोदिया केबीसी की हॉट सीट पर पहुंच गई है। मंगलवार को प्रसासित हुए कौन बनेगा करोड़पति के एपिसोड में सरोज ने यह उपलब्धि हासिल की है। इसके टॉप-10 प्रतिभागियों में सरोज सिसोदिया भी दिखाई दीं। अब आगे के एपिसोड में वह अमिताभ बच्चन के सवालों के जवाब देती नजर आएंगी।

किस्मत ने साथ ​दिया तो सरोज करोड़पति बनकर भी लौट सकती है। अगर ऐसा होता है तो वर्ष 2013 के बाद राजस्थान की लेकसिटी उदयपुर के लिए यह दूसरा मौका होगा जब यहां का कोई शख्स केबीसी में करोड़पति बना हो। वर्ष 2013 में केबीसी के सातवें संस्करण में उदयपुर के शिक्षक ताज मोहम्मद रंगरेज एक करोड़ रुपए जीते थे।

शिक्षिका हैं केबीसी में पहुंचने वाली सरोज

बता दें कि केबीसी में पहुंचने वाली सरोज सिसोदिया उदयपुर के सेक्टर 14 की रहने वाली हैं। सेंट एंथोनी सीनियर सेकंडरी स्कूल बलीचा जीवनतारा में करीब पांच साल से शिक्षिका हैं। स्कूल प्रिंसिपल विलियम डिसूजा की मानें तो कौन बनेगा करोड़पति टीवी शो में सरोज का पहुंचना गौरव की बात है।केबीसी के इस सीजन के लिए 3.25 करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए थे, जिनमें से 130 लोगों को चुना गया है। हिंदी में एमए, एमएड सरोज का चयन केबीसी के चार पड़ाव पार करने के बाद हुआ है।

सरोज सिसोदिया का परिवार

केबीसी की हॉट सीट पर पहुंची उदयपुर के सरोज सिसोदिया के पति महेन्द्र सिंह भाटी बिजनेसमैन हैं। छोटा बेटा आदित्य 11 साल का है। बेटी आहना 16 साल की है। सरोज को केबीसी में देखते ही परिवार, रिश्तेदार और उनके मिलने वालों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। फिलहाल सरोज ने केबीसी के प्रोटोकॉल के कारण कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

बिहारी युवक ने डॉक्टर से कहा-किडनी बेचनी है, कोई खरीददार है? 9 हजार की पगार में नहीं चल रहा घर…

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सूरत के अस्पताल में बिहारी युवक ने डॉक्टर से कहा-साहब! किडनी बेचनी है, कोई खरीददार है? 9 हजार की पगार में नहीं चल पा रहा घर
 : आर्थिक तंगी से परेशान आरा के वीरेंद्र सिंह की व्यथा सुनकर सन्न रह गए डॉक्टर

आर्थिक तंगी किसी को भी मजबूर बना देती है। नई सिविल अस्पताल में मंगलवार सुबह को ऐसा ही वाक्या सामने आया। ट्रॉमा सेंटर में ऑन ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर को बिहार के आरा जिले के बेल्लाउर निवासी 35 वर्षीय वीरेंद्र सिंह ने अपनी किडनी बेचने का ऑफर किया। युवक ने कहा-साहेब मुझे किडनी बेचनी है। यहां कोई खरीददार है? यह सुनते ही डाॅक्टर स्तब्ध रह गए। एक डाइंग मिल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाला वीरेंद्र ने बताया कि 9000 रुपए की नौकरी में परिवार के भरण-पोषण में मुश्किल हो रही है।परिवार बिहार में है। घर पैसे भेजने हैं। परिवार के भरण-पोषण के लिए किडनी बेचने का निर्णय लिया है।

युवक ने डॉक्टर को बताया कि वह 13 साल से पांडेसरा में रहता है और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। महीने का वेतन 9000 रुपए है। बिहार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटियों को भरण-पोषण के लिए हर माह 5000 रु. भेजता है और 4000रु. में खुद का गुजारा चलाता है। सुना था कि किडनी बेचने से पैसे मिल सकते हैं। इसलिए मन में अचानक विचार आया और डॉक्टर के कैबिन में आ गया।

मेरे समझाने पर युवक का विचार बदला | युवक को सुनने के बाद मैंने उसे समझाया कि इस तरह से किडनी नहीं बेच सकते हैं। इसके नियम होते हैं। समझाने पर वह किडनी बेचने का विचार छोड़ दिया। मैंने उसे कड़ी मेहनत का रास्ता अपनाने को कहा।

जानिए मंदी की गिरफ्त में आई Parle-G, 10 हजार लोगों की नौकरी पर संकट..

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देश की सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी पारले-जी में भी मंदी का माहौल दिखने लगा है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि वो बिक्री न होने से करीब 10 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है। कंपनी का कहना है लागत के बदले कंपनी की बिक्री काफी कम हो गई है, और जीएसटी के चलते उसको काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

10 हजार करोड़ की सेलकंपनी हर साल 10 हजार करोड़ रुपये के बिस्किट की बिक्री करती है। पारले प्रोडक्ट के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने कहा कि हम सरकार से जीएसटी कम करने की मांग कर रहे हैं। 100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बिस्किट पर सबसे ज्यादा जीएसटी लग रहा है। यह बिस्किट पांच रुपये के पैकेट में बेचा जाता है। इससे कंपनी की लागत भी नहीं निकल रही है, जिससे अब लोगों को निकालने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचा है। हालांकि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ेगा।

इन बिस्किट का करती है उत्पादन

कंपनी हर साल पारले-जी, मोनेको और मेरी गोल्ड बिस्किट का उत्पादन करती है। हाल ही में कंपनी ने प्रीमियम सेगमेंट के लिए भी कूकीज का उत्पादन शुरू किया था। पारले-जी पूरे देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट है। कंपनी की पूरे देश में 10 फैक्ट्रियां हैं, जहां पर एक लाख लोग काम करते हैं। इसके अलावा 125 थर्ड पार्टी प्लांट भी हैं, जहां बिस्किट का उत्पादन किया जाता है। कंपनी के उत्पादों की सबसे ज्यादा बिक्री ग्रामीण भारत में होती है।

टैक्स की पड़ी बड़ी मार

जीएसटी से पहले कंपनी को 12 फीसदी टैक्स देना होता था। हालांकि कंपनी को उम्मीद थी कि प्रीमियम कैटेगिरी के लिए 12 फीसदी और सस्ते बिस्किट पर पांच फीसदी टैक्स लगेगा। लेकिन अब सभी तरह के बिस्किट पर 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। इसके चलते कंपनियों को इनके दाम बढ़ाने पड़े, जिसका असर सेल्स पर पड़ा। शाह ने बताया कि पारले को भी 5 पर्सेंट दाम बढ़ाना पड़ा, जिससे सेल्स में गिरावट आई है।

ब्रिटानिया भी आई लपेटे में

देश की दूसरी सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी ब्रिटानियां का कहना है कि लोग अब पांच रुपये वाले बिस्किट का पैकेट भी खरीदने के लिए दो बार सोचते हैं। इससे हिसाब लगाया जा सकता है कि लोगों के पास पांच रुपये भी खर्च करना कितना महंगा लग रहा है। ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने कहा कि ‘हमारी ग्रोथ सिर्फ छह फीसदी हुई है। मार्केट ग्रोथ हमसे भी सुस्त है।’ नुस्ली वाडिया की कंपनी ब्रिटानिया का साल-दर-साल का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 3.5 पर्सेंट घटकर 249 करोड़ रुपये रहा। 

बिस्किट पर अधिक GST लागू होने से कन्ज्यूमर डिमांड घटी है। सरकार इसके लिए कोई कदम नहीं उठा रही, जिससे हालात बदतर हो गए हैं। हमारे कई ऐसे बिस्किट हैं जिन्हें मिड और लो-इनकम ग्रुप के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वे हमारे जैसे ब्रांड्स के कोर ग्राहक हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार मांग को पटरी पर वापस लाने के लिए टैक्स स्लैब घटाएगी।’ कम कीमत वाले बिस्किट कम मार्जिन पर बेचे जाते हैं। 

जानें- कब, कैसे और क्यों हुई थी भगवान कृष्ण की मौत ?

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मान्यता के मुताबिक कृष्ण भगवान थे और द्वापरयुग में अधर्मियों के नाश के लिए उन्होंने भगवान विष्णु के 8वें अवतार में जन्म लिया था। श्री कृष्ण के पिता का नाम वासुदेव और माता का नाम देवकी था। श्री कृष्ण ने जेल में जन्म लिया था। भगवान श्री कृष्ण ने अपने मामा कंश का वध कर शांति की स्थापना की! महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के सारथि बनकर दुनिया को गीता का पाठ पढ़ाया। युधिष्ठिर को राजा बनाकर धर्म की स्थापना की !

महाभारत युद्ध में जब दुर्योधन मारा गया तब उसकी माता गांधारी ने भगवान श्री कृष्ण को श्राप देते हुए कहा, यदि तुम चाहते तो इस युद्ध को रोक सकते थे। लेकिन तुमने भाइयों को एक-दुसरे से युद्ध करने दिया। गांधारी ने क्रोध में आकर श्री कृष्ण को कहा कि तुम्हारी मृत्यु आज से 36 वर्ष बाद एकांत में होगी और पूरा यदुवंश का नाश हो जाएगा। भगवान कृष्ण ने मुस्कुराते हुए अपने ऊपर लगा श्राप स्वीकार कर लिया। इसके ठीक 36 साल बाद श्री कृष्ण वन में बैठे थे। तब एक शिकारी ने उन्हें अपने तीर से मार दिया। भगवान श्री कृष्ण का पूरा यदुवंश धीरे-धीरे समाप्त हो गया, और द्वारिका समुंद्र में डूब गयी। आज भी द्वारिका नगरी अरबसागर के नीचे है।

मान्यता के मुताबिक एक दिन जब भगवान श्री कृष्ण वन में आराम कर रहे थे। तभी एक शिकारी ने उन्हें जानवर समझकर तीर चला दिया। जो कृष्ण सीधा जाकर भगवान कृष्ण को लगा। शिकारी को गलती का अहसास हुआ और सीधा भगवान कृष्ण के पास गया। भगवान ने उसे कहा यह निति के अनुसार ही हुआ है। भगवान कृष्ण ने इस संसार को छोड़ दिया और द्वापरयुग समाप्त हो गया।

भगवान विष्णु के अवतार राम भगवान ने जब वन में छुपकर वानर राज बाली को मार दिया था। तब बाली की मौत से उसकी पत्नी तारा बहुत दुखी हुई थी। और उसने क्रोध में आकर राम भगवान को श्राप देते हुए कहा था की जिस प्रकार तुमने मेरे पति को छिपकर मारा है, उसी प्रकार अगले जन्म में मेरा पति तुम्हे छिपकर मारेगा। कहा जाता है की बाली की पत्नी तारा के श्राप के कारण ही बाली ने द्वापरयुग में एक बहेलिये के घर में जन्म लिया था। उस जन्म में उसका नाम जरा था। जरा रात के समय अपने धनुष बाण से पेड़ो पर बैठे पशु-पक्षियों का शिकार करता था। जन्म से ही भगवान श्री कृष्ण के पैरों में कमल का एक निशान था जो रात में बहुत चमकता रहता था। एक रात भगवान श्री कृष्ण नदी के तट पर एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे। तब उनके पैर के निचे चमकते हुए निशान को देख बहेलिये जरा को लगा वह कोई जानवर या पक्षी है, और उसने अपना बाण चला दिया और इस कारण भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु हो गयी।

कोल्ड ड्रिंक खरीदने आई दो सगी बहनों को नकली नोटों के साथ दबोचा, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर भेजा जेल…

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मुजफ्फरनगर जनपद में कंप्यूटर प्रिंटर से तैयार की गई 200 रुपये के नोट की कलर फोटोकॉपी से सामान खरीदने की कोशिश कर रही दो बहनों को ढाबा मालिक ने पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। दोनों के पास से एक ही सीरियल नंबर के 23 फोटोकॉपी किए गए नकली नोट बरामद हुए। ढाबा मालिक की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने दोनों बहनों को जेल भेज दिया है। साथ ही उनके एक भाई समेत चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है। शहर कोतवाली के रोहाना क्षेत्र स्थित चमकीला ढाबा पर सोमवार की रात करीब 8.50 बजे एक्टिवा सवार दो युवतियां पहुंचीं और ढाबा मालिक से एक कोल्ड ड्रिंक खरीदते हुए उसे दो सौ का नोट दिया। नोट संदिग्ध लगने पर ढाबा मालिक राजू ने उनसे दूसरा नोट देने को कहा। इस पर युवतियों ने नोटों की एक गड्डी से दूसरा नोट निकालकर दे दिया। राजू ने दोनों नोट चेक किए तो उनका सीरियल नंबर एक ही मिला। इस पर उसने शोर मचा दिया। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दोनों युवतियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि दोनों युवतियां कविता (21) और ज्योति (19) सगी बहनें हैं, जो एकता विहार की रहने वाली हैं। उनके पास से दो सौ रुपये के कलर फोटोकॉपी किए हुए एक ही सीरियल नंबर के 23 नोट बरामद हुए है। पूछताछ में दोनों बहनों ने बताया कि उन्होंने अपने घर पर ही कंप्यूटर प्रिंटर से दो सौ रुपये के नोट को स्कैन करने के बाद ए-फोर साइज के कागज पर उसकी कलर फोटोकॉपी की थी। इसके बाद दोनों इन नोटों को चलाने के लिए रात में शहर से दूर ढाबे पर पहुंची थी। 

इंस्पेक्टर ने बताया कि ढाबा मालिक राजू की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर दोनों बहनों को जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच शुरू करते हुए युवतियों के एक भाई सहित चार लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। इनसे इन नकली नोटों की बाबत पूछताछ की जा रही है।

रेलवे ने चालू की यह सेवा, अब जनरल डिब्बे में भी मिलेगी सीट…

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रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि अब जनरल डिब्बों में सीट के लिए नई बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू हो गई है। अब पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सीटें प्रदान की जाएगी। यात्रियों को इससे फायदा मिलेगा। मुंबई से लखनऊ के बीच चलने वाले पुष्पक एक्सप्रेस में इसकी शुरुआत की गई है।दरअसल, जनरल कोच में होने वाली भारी भीड़ के कारण अक्सर यात्रियों के बीच लड़ाई-झगड़े और मार-पीट के मामले सामने आते हैं। इस व्यवस्था से यात्रियों को ऐसी अमानवीय स्थितियों से छुटकारा मिलेगा और लोग सम्मानजनक यात्रा कर सकेंगे। पहले पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमेट्रिक की सफलता का आंकलन किया जाएगा, जिसके बाद जल्द ही ये व्यवस्था बाकी सभी रेलगाड़ियों के जनरल डिब्बों में भी लगाई जाएगी।

जनरल डिब्बों के लिए टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बायोमेट्रिक मशीन से अपनी उंगलियों के निशान स्कैन करवाने होंगे, जिसके बाद एक टोकन जनरेट होगा। जनरेट हुए टोकन की कुल संख्या एक विशेष जनरल डिब्बों में उपलब्ध सीटों की संख्या के अनुरूप होगी। प्लेटफॉर्म पर रेक लगाने से कुछ मिनट पहले यात्रियों को टोकन पर अपने सीरियल नंबर के अनुसार एक कतार में इकट्ठा होना होगा। जनरल डिब्बों के प्रवेश बिंदु पर आरपीएफ स्टाफ टोकन क्रमांक की पुष्टि करेगा और यात्रियों को क्रमबद्ध तरीके से कोच में चढ़ने की अनुमति देगा।

इस व्यवस्था में देर से आए यात्रियों को भी बैठने दिया जाएगा। लेकिन उन्हें बैठने के लिए सीट नहीं मिल पाएगी। उन्हें खड़े रहकर या जमीन पर बैठकर यात्रा करनी पड़ेगी। जनरल डिब्बों में होने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था की शुरुआत की गई है। बायोमेट्रिक के जरिए ट्रेन यात्रा को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। सवाल यात्रियों की सुरक्षा के साथ उनकी निजता का भी है। लोगों को संदेह है कि जैसे ही ट्रेन में उनका दाखिला बायोमेट्रिक के जरिए होगा, उनका सारा निजी डेटा सरकार के पास पहुंच जाएगा। लोगों का सवाल है कि क्या उनके डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है?

राजनीति में इन 5 अभिनेत्रियों ने कमाया खूब नाम, एक तो 6 बार बनी मुख्यमंत्री…

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1. किरण खेर

देवदास, वीर-ज़ारा, रंग दे बसंती और मैं हूं ना जैसी शानदार फिल्मों में शानदार एक्टिंग कर चुकी इस अभिनेत्री को आज पहचान की जरूरत नहीं। उन्होंने कई ऐसी शानदार फिल्मों में काम किया है जिससे उनका बॉलीवुड में काफी नाम चला। लेकिन आपको बता दें किरण खेर ने इस साल की लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से चुनाव लड़ी थी और बीजेपी के लिए 50.64% सीट से जीत हासिल की थी।

2. स्मृति ईरानी

टेलीविजन की दुनिया में अपना पहचान बनाने वाली ये अभिनेत्री आज राजनीति में खूब नाम कमा चुकी है। स्मृति ईरानी कई सालों से राजनीति में चुनाव लड़ रही है। इस साल बीजेपी की तरफ से स्मृति ईरानी ने चुनाव लड़ी और अमेठी सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराया था। स्मृति ईरानी ने टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी का शानदार किरदार निभाकर फिल्मों में अपना नाम बनाया।

3. रेखा

करीब 45 सालों से बॉलीवुड में अभिनय कर रही रेखा भी राजनीति में अपना सिक्का जमा चुकी है। रेखा ने अपने करियर में 180 से अधिक फिल्मों में काम किया है, उन्होंने 1970 की फिल्म ‘सावन भादो’ से बॉलीवुड में कदम रखी थी। रेखा ने 2012 में राजनीति में कदम रखी और कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ी और राज्यसभा की सदस्य भी बनी थी।

4. हेमा मालिनी

बॉलीवुड में ‘ड्रीम गर्ल’ से जानी जाती इस अभिनेत्री को पूरी दुनिया में कौन नहीं जानता होगा। हेमा मालिनी कई सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्मों में अभिनय कर चुकी है। वहीं हेमा मालिनी ने साल 2004 में ही बीजेपी पार्टी को ज्वाइन किया था और उसके बाद साल 2014 में बीजेपी के लिए चुनाव लड़ जीत हासिल की, वहीं इस साल भी लोकसभा चुनाव में हेमा मालिनी बीजेपी की ओर से जीत हासिल की थी और आज हेमा मालिनी केवल अभिनेत्री ही नहीं बल्कि मथुरा की सांसद भी बन चुकी है।

5. जयललिता

जयललिता साउथ की सबसे पॉपुलर अभिनेत्री में से एक है। उन्होंने 1961 से 1980 के बीच करीब 140 फिल्मों में काम किया है। जयललिता की कई सालों से राजनीति से गहरा रिश्ता है। भारत की सभी अभिनेत्रियों में केवल जयललिता एक ऐसी अभिनेत्री हैं जो तमिलनाडु में चुनाव लड़ 6 बार मुख्यमंत्री बनी है।

चिदंबरम : मोबाइल ऑफ कर रास्ते में ड्राइवर-क्लर्क को उतार गायब हो गए…

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 पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम को सीबीआई और ईडी की टीम तलाश रही है. इस बीच एक बड़ा खुलासा हुआ. सूत्रों के मुताबिक, कल शाम से चिदंबरम गायब हैं. गायब होने से पहले उन्होंने अपने ड्राइवर और क्लर्क को बीच रास्ते में उतार दिया था. इसके बाद अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया, जो अभी तक चालू नहीं हुआ है.

मंगलवार से अब तक पी. चिदंबरम को तलाश रही जांच एजेंसियों ने सभी करीबियों के घर की तलाशी ली. दिल्ली-एनसीआर के एक दर्जन से अधिक जगहों पर छापेमारी की गई, लेकिन अभी तक चिदंबरम को जांच एजेंसियां तलाश नहीं पाई हैं.

चिंदबरम के वकील अर्शदीप सिंह खुराना ने सीबीआई को लिखा ‘मेरे मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न करें और सुबह 10:30 बजे सुनवाई का इंतजार करें.’ इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व वित्तमंत्री की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद जांच एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार करने उनके घर पहुंचीं लेकिन वे घर पर नहीं मिले.

सीबीआई की टीम मंगलवार शाम 6.30 बजे चिदंबरम के आवास पहुंची और उनके घर पर नहीं मिलने के बाद 10 मिनट के बाद चली गई. इसके बाद ईडी की टीम 7.30 बजे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के घर पहुंची थी. इस दौरान एक नोटिस भी चिपाया गया कि चिदंबरम दो घंटे में पेश हों.

सूत्रों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट में पी. चिदंबरम की तरफ से जो याचिका दायर की गई है, उसमें कुछ खामी है. ऐसे में गलत याचिका को CJI के सामने लिस्ट नहीं किया जा सकता है. अब पी. चिदंबरम के वकील इस खामी को दूर करने में लगे हैं, ताकि सुनवाई में किसी तरह की बाधा ना आ पाए.

देश के सभी एयरपोर्ट को पी. चिदंबरम पर जारी लुकआउट सर्कुलर की जानकारी दी गई है. अगर पी. चिदंबरम देश से बाहर जाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें इजाजत नहीं दी जाएगी. बता दें कि पी. चिदंबरम पर INX मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड से गैरकानूनी रूप से स्वीकृति दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है.

इस केस में अभी तक चिदंबरम को कोर्ट से करीब दो दर्जन बार अंतरिम प्रोटेक्शन यानी गिरफ्तारी पर रोक की राहत मिली हुई है. ये मामला 2007 का है, जब चिदंबरम देश के वित्त मंत्री के पद पर थे.

इस पूरे मामले में पी. चिदंबरम के करीबियों की मानें तो 2017 तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं हुई थी. पी. चिदंबरम के अलावा कार्ति चिदंबरम ने भी एजेंसियों का जांच में सहयोग किया है. कार्ति के ठिकानों पर 4 बार छापेमारी की गई, 25 बार वह एजेंसियों के सामने पेश भी हुए.