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भारत में बैठकर बन जाएंगे एपल, टेस्ला जैसी कंपनियों के मालिक! NSE IX ने खोला दुनिया के 30 से ज्यादा बाजारों का रास्ता…

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अगर आपका अब घरेलू शेयर बाजारों के साथ इंटरनेशनल शेयर मार्केट की ओर रुख करना चाहते हैं. अगर आप भारत में अपने घर में बैठे-बैठे, एपल, टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट आदि कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, तो ये खबर आपके लिए ही है.

जल्द ही भारत के शेयर बाजार निवेशक दुनिया के 30 से ज्यादा शेयर बाजारों में भारत में बैठकर खुद निवेश कर सकेंगे. पहले फेज की शुरुआत अमेरिकी शेयर बाजार से हो भी चुकी है. इस बात की जानकारी खुद NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSE IX) के मैनेजिंग डायरेक्टर ने दी है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर उन्होंने किस तरह की जानकारी दी है.

30 से ज्यादा शेयर बाजारों का मिलेगा एक्सेस

NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSE IX) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वी बालासुब्रमण्यम ने मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि भारतीय इन्वेस्टर्स को आने वाले छह महीनों में अपने ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म के जरिए 30 से ज्यादा इंटरनेशनल मार्केट में ट्रेड करने की इजाजत देगा, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स पहले फेज में रोलआउट हो चुका है. बालासुब्रमण्यम ने इस पहल को घरेलू शेयर बाजार से आगे इन्वेस्टर एक्सेस का एक स्ट्रक्चरल एक्स्टेंशन बताया. उन्होंने कहा कि शुरुआत में, हम तुरंत US मार्केट के लिए लाइव हो गए हैं, जो कि इंटरेस्ट का बड़ा मार्केट है. लेकिन मुझे लगता है कि कुछ समय बाद, अगले तीन से छह महीनों में, हमारे पास लोगों के एक्सेस के लिए 30 से ज़्यादा मार्केट अवेलेबल होने चाहिए.

LRS फ्रेमवर्क के तहत आउटबाउंड इन्वेस्टमेंट

ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत आउटबाउंड इन्वेस्टमेंट को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसके तहत निवासी लोगों को हर फाइनेंशियल ईयर में 250,000 अमेरिकी डॉलर तक रेमिट करने की इजाजत है, जिसमें विदेशी इन्वेस्टमेंट भी शामिल हैं. बालासुब्रमण्यम ने मीडिया रिपोर्ट में जोर दिया कि पूरे ट्रांज़ैक्शन साइकिल ऑनबोर्डिंग से लेकर ट्रेडिंग तक को मौजूदा नियमों के हिसाब से बनाया गया है. उन्होंने कहा कि यह पूरा इन्वेस्टमेंट लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत होगा, जिसकी RBI इजाजत देता है. हर एक इन्वेस्टर, एक साल में, 250,000 डॉलर तक रेमिट कर सकता है.

रिटेल पार्टिसिपेंट्स के लिए फ्रैक्शनल इन्वेस्टमेंट

ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म की एक खास बात फ्रैक्शनल ट्रेड करने की क्षमता है, जिससे इन्वेस्टर पूरे शेयर के बजाय ज्यादा कीमत वाले ग्लोबल स्टॉक के कुछ हिस्से खरीद सकते हैं. बालासुब्रमण्यम एमसी की रिपोर्ट में कहा कि यह फंक्शनैलिटी उन रिटेल इन्वेस्टर के लिए खास तौर पर काम की होगी जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी मेजर में एक्सपोजर चाहते हैं. उन्होंने कहा कि रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए, वे वैल्यू-बेस्ड बाइंग या फ्रैक्शनलाइज़्ड बाइंग भी कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, Apple 272 डॉलर का है. अगर हमारे इस अकाउंट में 31 डॉलर हैं, तो हम इसे फ्रैक्शनलाइज़ कर सकते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि तो, आप कह सकते हैं, मैं पांच डॉलर का Apple खरीदना चाहता हूं. आप पांच डॉलर का Apple ले सकते हैं. आप एक फ्रैक्शनलाइज़्ड पार्ट ले सकते हैं, और यह आपके पोर्टफोलियो में उपलब्ध होगा. फ्रैक्शनलाइज़ेशन सुविधा विदेशी ब्रोकर पार्टनर्स के साथ अरेंजमेंट के जरिए चालू की जाती है, जिससे बड़े टिकट साइज की जरूरत के बिना वैल्यू-बेस्ड एग्ज़िक्यूशन की सुविधा मिलती है.

डॉलर-डिनॉमिनेटेड इन्वेस्टमेंट स्ट्रक्चर

बालासुब्रमण्यम मनी कंट्रोल ​को दिए इंटरव्यू में कहा कि प्लेटफॉर्म के जरिए किए गए इन्वेस्टमेंट US डॉलर में होंगे. उन्होंने कहा कि ये सभी इन्वेस्टमेंट डॉलर में होंगे. तो, पहली बात यह है कि भारत से रुपया पैसा विदेशी रेमिटेंस में जाएगा और यह डॉलर में आएगा. प्लेटफ़ॉर्म वेब और मोबाइल इंटरफ़ेस के ज़रिए एक्सेस किया जा सकता है. बालासुब्रमण्यम के अनुसार, ऑनबोर्डिंग प्रोसेस भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम के आस-पास बनाया गया है.

उन्होंने कहा, एक बार जब आप अपना अकाउंट बना लेते हैं, तो आप ऑनलाइन डिजिटल KYC कर सकते हैं. उस KYC को पूरी तरह से करने में सिर्फ़ 30 से 45 सेकंड लगते हैं. यह आपके आधार ऑथेंटिकेशन और पैन कार्ड के जरिए होगा. यह आपके डिजिलॉकर के जरिए भी किया जा सकता है.

वेरिफिकेशन पूरा करने के बाद, इन्वेस्टर ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक तय GIFT City बैंक अकाउंट में पैसे भेज सकते हैं. बालासुब्रमण्यम ने बताया कि जैसे ही आप पैसे भेजेंगे, आपके ऐप पर आपको लिमिट मिल जाएगी. आपको पता चल जाएगा कि आपकी ट्रेडिंग पावर क्या है, लिमिट क्या है. उसके बाद, आप बाय ऑर्डर और सेल ऑर्डर देना शुरू कर सकते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि यह प्लेटफॉर्म इन्वेस्टर को कस्टमाइज्ड वॉचलिस्ट बनाने और ग्लोबल सिक्योरिटीज़ को ट्रैक करने की सुविधा देता है. उन्होंने कहा कि आप कई मार्केट वॉच बना सकते हैं. असल में, आप अपनी पसंद की कोई भी ग्लोबल कंपनी बना सकते हैं.

ग्लोबल इक्विटीज और ETF में इन्वेस्टमेंट

बालासुब्रमण्यम एमसी रिपोर्ट के हवाले से कहा कि प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट यूनिवर्स LRS नियमों के तहत इजाजत वाले एसेट क्लास तक ही सीमित रहेगा. उन्होंने कहा कि LRS में कुछ पाबंदियां हैं. हम इक्विटी की इजाज़त दे रहे हैं. हम आपको ETF की भी इजाजत देंगे. ये सभी प्रोडक्ट इस खास प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. उन्होंने आगे कहा कि डेरिवेटिव और डिजिटल एसेट प्रोडक्ट चालू नहीं किए गए हैं. हम किसी भी तरह के क्रिप्टो या डिजिटल एसेट प्रोडक्ट की इजाजत नहीं देंगे.

बाद के फेज में इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन

हालांकि अभी के फेज में रेजिडेंट इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स को शामिल किया गया है, NSE IX ने इशारा किया कि बाद के फेज में इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन को शामिल किया जा सकता है. बालासुब्रमण्यम ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि तीसरे फेज में, हम इसे इंडिया में अपने इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए भी इनेबल करेंगे. आज आप बहुत सारे बड़े म्यूचुअल फंड देख रहे हैं जो आउटबाउंड इन्वेस्टमेंट स्कीम्स ला रहे हैं. वे स्कीम्स भी हमारे कस्टमर बन सकती हैं.

“रूह अफज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने माना फ्रूट ड्रिंक, इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला रद्द, लगेगा सिर्फ 4 फीसदी वैट”

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार ( 25 फरवरी) हमदर्द (वक्फ) लैबोरेटरीज के मशहूर शरबत ‘रूह अफ़ज़ा’को लेकर बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने अफज़ा फ्रूट ड्रिंक मानते हुए कहा कि रूह अफ़ज़ा को फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट की कैटेगरी में रखा जाएगा और इस पर 12.5% के बजाय सिर्फ 4% वैट (VAT) लगेगा.

यह फैसला उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2008 (यूपी VAT एक्ट) के तहत कर निर्धारण से जुड़ा है.

जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने कहा कि कई राज्यों में रूह अफज़ा को पहले से ही रियायती दर पर टैक्स के दायरे में रखा गया है, जिससे हमदर्द की दलील मजबूत होती है. बेंच ने माना कि उत्पाद को फ्रूड ड्रिंक मानने की व्याख्या ‘न तो बनावटी थी और न ही गलत थी, बल्कि व्यावसायिक रूप से मान्य और वास्तविक’ थी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला रद्द

कोर्ट ने कहा कि रूह अफज़ा को अधिनियम की अनुसूची-II की प्रविष्टि 103 के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट के रूप में क्लासिफाई किया जा सकता है. इसलिए संबंधित आकलन वर्ष के दौरान यह उत्पाद 4 प्रतिशत की रियायती वैट दर पर कर योग्य होगा. इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हमदर्द (वक्फ) लैबोरेटरीज की अपील स्वीकार कर ली और इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें रूह अफ़ज़ा को नॉन-फ्रूट और कृत्रिम तत्वों से तैयार ड्रिंक मानते हुए अधिक वैट लगाने की बात कही गई थी.

क्या है मामला

दरअसल यह विवाद हमदर्द (वक्फ) लैबोरेटरीज के पॉपुलर ड्रिंक कॉन्संट्रेट शरबत रूह अफजा के उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2008 के तहत टैक्स क्लासिफिकेशन से पैदा हुआ था. यह विवाद इस बात से जुड़ा था कि क्या प्रोडक्ट को UP VAT एक्ट के शेड्यूल II के पार्ट A की एंट्री 103 के तहत 4 परसेंट टैक्सेबल फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट माना जाए या शेड्यूल V में रेसिड्यूरी एंट्री के तहत 12.5 परसेंट टैक्सेबल अनक्लासिफाइड कमोडिटी माना जाए.

असेसमेंट ईयर 200708 और 200809 के लिए, हमदर्द ने रूह अफजा की बिक्री पर 4 परसेंट की कम दर से VAT दिया, यह दावा करते हुए कि यह प्रोसेस्ड या प्रिजर्व्ड फल, फ्रूट स्क्वैश, फ्रूट ड्रिंक और फ्रूट जूस की श्रेणी में आता है. टैक्स अधिकारी इससे सहमत नहीं थे और उन्होंने प्रोडक्ट को ज़्यादा VAT के लिए लायबल अनक्लासिफाइड आइटम माना. फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी और कमर्शियल टैक्स ट्रिब्यूनल के सामने हमदर्द की अपील खारिज हो गई, ट्रिब्यूनल ने कहा कि आम और कमर्शियल भाषा में, प्रोडक्ट को फ्रूट ड्रिंक के बजाय शरबत समझा जाता है.

हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया.

जुलाई 2018 में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमदर्द द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन याचिकाओं को खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया. हाईकोर्ट ने आम बोलचाल के टेस्ट पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया और कहा कि फ्रूट जूस या फ्रूट ड्रिंक मांगने वाले कंज्यूमर्स को रूह अफ़ज़ा नहीं दिया जाएगा और इसका उल्टा भी होगा.

हमदर्द ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स अधिकारियों और हाईकोर्ट के तर्क को खारिज कर दिया और फैसला हमदर्द के पक्ष में सुनाया. कोर्ट ने कहा कि एक साथ दिए गए नतीजे अपील की जांच से सुरक्षित नहीं हैं.इसने पाया कि वे नतीजे कानून में साफ तौर पर गलत जानकारी की वजह से गलत थे और फिस्कल क्लासिफिकेशन को कंट्रोल करने वाले तय सिद्धांतों के गलत इस्तेमाल पर आधारित थे.

“Rangbhari Ekadashi 2026: 26 या 27 फरवरी कब है रंगभरी एकादशी? जानें सही डेट, पूजा विधि और महत्व”

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सनातन धर्म में रंगभरी एकादशी का बहुत विशेष महत्व माना जाता है. हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन आमलकी एकदाशी मनाई जाती है. इसे ही रंगभरी एकादशी कहा जाता है.

इस दिन का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से बताया जाता है. खासतौर पर वाराणसी (काशी) में रंगभरी एकादशी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है.

इस दिन से ही काशी में होली के त्योहार की शुरुआत हो जाती है. रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. हालांकि, इस साल लोगों के मन में रंगभरी एकादशी को लेकर संशय है कि ये पर्व 26 को मनाया जाएगा या 27 फरवरी को. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल रंगभरी एकादशी की सही तारीख. साथ ही जानते हैं इसकी पूजा विधि और महत्व.

रंगभरी एकादशी कब है? Rangbhari Ekadashi 2026 Kab Hai)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को रात 12 बजकर 33 मिनट पर हो रही है. ये तिथि इसी दिन रात में 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, इसी साल 27 फरवरी, शुक्रवार को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इसी दिन रंगभरी एकादशी भी मनाई जाएगी. रंगभरी एकादशी का पारण 28 फरवरी को सुबह 6 बजकर 47 से लेकर 9 बजकर 6 मिनट के बीच किया जा सकता है.

रंगभरी एकादशी पूजा विधि (Rangbhari Ekadashi Puja Vidhi)

रंगभरी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. एक लोटे में जल, चंदन, बेलपत्र और अबीर-गुलाल लेकर शिव मंदिर जाएं. शिवलिंग पर पहले चंदन लगाएं. फिर बेलपत्र और जल अर्पित करें. अंत में अबीर-गुलाल चढ़ाएं. अंत में भगवान शिव से जीवन की परेशानियों को दूर कर देने की प्रार्थना करें.

रंगभरी एकादशी का महत्व (Rangbhari Ekadashi Significance)

धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ही विवाह के बाद महादेव मां पार्वती के साथ पहली बार काशी आए थे. उस समय देवताओं और गणों ने उनका स्वागत में दीप जालकर किया था. साथ ही फूल, गुलाल और अबीर उड़ाया था. तभी से रंगभरी एकादशी मनाई जाने लगी.

देश में 1 अप्रैल से बिकेगा E20 पेट्रोल, गाड़ियों के माइलेज पर होगा इतना असर…

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सरकार ने आदेश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में बिकने वाला पेट्रोल E20 होगा और उसमें कम से कम RON 95 (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) होना जरूरी होगा. इसका मतलब है कि पेट्रोल में अधिकतम 20% एथेनॉल मिलाया जाएगा.

यह फैसला तेल आयात कम करने, प्रदूषण घटाने और गन्ना व मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ाने के लिए लिया गया है, क्योंकि एथेनॉल इन्हीं फसलों से बनाया जाता है.

इस पहल से ईंधन ज्यादा साफ जलेगा और प्रदूषण कम होगा. उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 2023-25 के बाद भारत में बनने वाली ज्यादातर गाड़ियों को E20 पेट्रोल पर चलने के हिसाब से ही बनाया गया है. इसलिए नई गाड़ियों में किसी बड़ी दिक्कत की संभावना नहीं है. लेकिन पुरानी गाड़ियों में माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

RON 95 की शर्त क्यों?

सरकार ने यह फैसला पहले की सफलता को देखते हुए लिया है, जब 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया गया था. RON 95 की शर्त इसलिए रखी गई है ताकि इंजन में प्री-इग्निशन जैसी समस्या से बचा जा सके और इंजन की परफॉर्मेंस सुरक्षित रहे. बता दें कि RON एक माप है, जो बताता है कि पेट्रोल इंजन में समय से पहले जलने (नॉकिंग) से कितना बचाव करता है. नॉकिंग तब होती है जब ईंधन सही समय से पहले या असमान रूप से जल जाता है. इससे इंजन में पिंग जैसी आवाज आती है और लंबे समय में इंजन को नुकसान हो सकता है. RON जितना ज्यादा होगा, पेट्रोल उतना ही बेहतर तरीके से नॉकिंग से बचाएगा और इंजन की सुरक्षा करेगा.

सभी जगह मिलेगा एथनॉल मिक्स पेट्रोल

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी की एक अधिसूचना में कहा, केंद्र सरकार निर्देश देती है कि पेट्रोलियम कंपनियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारतीय मानक ब्यूरो के विनिर्देशों के अनुसार 20 प्रतिशत तक एथनॉल के साथ मिश्रित मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) की बिक्री करेंगी, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (रॉन) 95 होगा. केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में कुछ क्षेत्रों में सीमित समय के लिए छूट दे सकती है.

मुंबई के बजट ने बड़े-बड़े राज्यों को छोड़ा पीछे! क्या 81,000 करोड़ से बदलेगी मायानगरी की सूरत?

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बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) यानी मुंबई का इलाका, जहां दुनिया के टॉप अमीरों में शुमार कुछ लोगों की रिहाइश है. जहां पर दुनिया के सबसे अमीर फिल्म स्टार्स में से एक रहते हैं. जिस शहर को भारत की इकोनॉमिक कैपिटल कहा जाता है.

उसी शहर के म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन का बजट पेश किया. खास बात तो ये है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीएमसी का बजट 80 हजार करोड़ रुपए के पार यानी करीब 9 बिलियन डॉलर पहुंच गया है.

मुंबई का इतना बजट होना भी कोई बड़ी बात इसलिए नहीं है, क्योंकि दुनिया के मानचित्र में इस इलाके का काफी महत्व है. खास बात तो ये है कि अकेले बीएमसी का बजट देश के 5 राज्यों से काफी ज्यादा है. कुछ राज्यों के मुकाबले में ये 4 से 5 गुना के करीब पहुंच गया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर बीएमसी ने कितना बजट पेश किया है, साथ ही देश के वो कौन से 5 राज्य है, जिनका बजट बीएमसी के मुकाबले में काफी कम है.

कितना है बीएमसी का बजट

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 80,952.56 करोड़ रुपए के बजट का ऐलान कर दिया है. जोकि वित्त वर्ष 2025-26 के मुकाबले 8.77 प्रतिशत अधिक है. बीएमसी के आयुक्त भूषण गगरानी ने बजट पेश किया, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 48,164.28 करोड़ रुपए तय किए गए हैं. यह राशि 2025-26 के मुकाबले 11.59 प्रतिशत अधिक है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू एक्सपेंडिचर 32,698.44 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के 28,257.91 करोड़ रुपए के संशोधित अनुमान से लगभग 15.71 प्रतिशत अधिक है. बजट में अनुमानित कमाई 51,510.94 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 19.35 प्रतिशत अधिक है. प्रॉपर्टी टैक्स रेवेन्यू , जो बीएमसी की आय के प्रमुख स्रोतों में एक है, 2026-27 के लिए 7,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 में 6,200 करोड़ रुपए था.

इन राज्यों का बजट है छोटा?

BMC का करीब 81 हजार करोड़ रुपए का बजट देश के कई राज्यों के मुकाबले में काफी बड़ा है. खास बात तो ये है कि बीएमसी एशिया की सबसे बड़ी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन है. वैसे जिन राज्यों का जिक्र हम करने जा रहे हैं, उनका अगले वित्त वर्ष का बजट सामने नहीं आया है. जब भी उन राज्यों का बजट आएगा, वो बीएमसी के बजट से छोटा ही रहेगा, ये बात तय है.

पहले बात गोवा की करें तो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल बजट 28,162 करोड़ रुपए था. जो अगले वित्त वर्ष में अधिक से अधिक 32 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है. वहीं अरुणाचल प्रदेश का वित्त वर्ष 26 के लिए बजट 39,842 करोड़ रुपए था जो नए वित्त वर्ष के लिए 42 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है.

हिमाचल प्रदेश बड़ा राज्य है, उसके बाद भी उसका बजट मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 58,514 करोड़ रुपए रखा गया था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए 62 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं होगा. वहीं सिक्किम का कुल बजट अनुमान 16,196 करोड़ रुपए था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए 19 से 20 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है. वहीं दूसरी ओर त्रिपुरा बजट वित्त वर्ष 2026 के लिए 31,412 करोड़ रुपए था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए 33 हजार करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है.

कहां कहां पैसा खर्च करेगा बीएमसी?

अगले फिस्कल ईयर के लिए कैपिटल खर्च का एक बड़ा हिस्सा कोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखा गया है. A, B, E, G और T.A. हेड्स के तहत कैपिटल खर्च, जिसमें इम्प्रूवमेंट स्कीम, एजुकेशन फंड, वॉटर सप्लाई और सीवरेज और ट्री अथॉरिटी शामिल हैं, Rs 30,069.89 करोड़ तय किया गया है.

इसमें से 13,990 करोड़ रुपए कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR), सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दिए गए हैं. स्पेशल प्रोजेक्ट्स के लिए 4,104.39 करोड़ रुपए का कैपिटल खर्च प्रपोज किया गया है. आने वाले फिस्कल ईयर में इंटरनल टेम्पररी ट्रांसफर 13,765.74 करोड़ रुपए तय किए गए हैं.

कहां और कैसे होगी कमाई

रेवेन्यू की बात करें तो, BMC को 2026-27 में कुल 51,510.94 करोड़ रुपए की रेवेन्यू इनकम की उम्मीद है, जो 2025-26 के 43,159.40 करोड़ रुपए के बजट अनुमान से 19.35 प्रतिशत ज़्यादा है और 46,778.12 करोड़ रुपए के रिवाइज़्ड अनुमान से भी ज़्यादा है.

ऑक्ट्रोई खत्म करने के बदले मुआवजा सबसे बड़ा रेवेन्यू सोर्स बना हुआ है, और 2026-27 के लिए इसके 15,550.02 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह 14,398.16 करोड़ रुपए था.

31 जनवरी, 2026 तक इस मद में असल रसीदें 11,981.84 करोड़ रुपए थीं. डेवलपमेंट प्लान (DP) फीस और प्रीमियम 2026-27 में 12,050 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के 11,153.75 करोड़ रुपए के रिवाइज्ड अनुमान से ज़्यादा है.

प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन का बजट 2026-27 के लिए 7,000 करोड़ रुपए है, जबकि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए रिवाइज्ड अनुमान 6,200 करोड़ रुपए है.

दूसरे मुख्य योगदान देने वालों में पानी और सीवेज चार्ज, 2,393.46 करोड़ रुपए, इन्वेस्टमेंट पर ब्याज 2,572.23 करोड़ रुपए, सुपरविज़न चार्ज 3,298.45 करोड़ रुपए, और राज्य सरकार से 1,461.57 करोड़ रुपए का ग्रांट-इन-एड शामिल है.

बजट पेपर्स के मुताबिक, फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट से 827 करोड़ रुपए, सड़कों और पुलों से 575.66 करोड़ रुपए, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से 505.51 करोड़ रुपए, लाइसेंस डिपार्टमेंट से 381.55 करोड़ रुपए और “अन्य” से 4,895.49 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है.

बजट में 2026-27 के लिए 89.84 करोड़ रुपए का सरप्लस बताया गया है, जबकि 2025-26 के अनुमान में यह 60.65 करोड़ रुपए और मौजूदा फिस्कल ईयर के रिवाइज्ड अनुमान में 97.98 करोड़ रुपए था.

2026 में सिर्फ FD नहीं, ऐसे बनाएं बेहतर और संतुलित फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो…

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भारत में जब भी सुरक्षित निवेश की बात होती है, तो सबसे पहले बैंक एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) का नाम आता है। एफडी को आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता है. लेकिन बदलते ब्याज दर चक्र, बढ़ती महंगाई और टैक्स नियमों में बदलाव के कारण अब सिर्फ एफडी पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं माना जा रहा.

सिर्फ FD क्यों काफी नहीं?

एफडी में आपका पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न तय होता है. लेकिन असली सवाल यह है कि टैक्स काटने और महंगाई को जोड़ने के बाद आपके हाथ में क्या बचता है? अगर आप 30% या उससे ज्यादा टैक्स स्लैब में हैं, तो कई बार एफडी का रिटर्न टैक्स के बाद महंगाई से भी कम रह जाता है. यानी पैसा सुरक्षित दिखता है, लेकिन उसकी असली कीमत धीरे-धीरे घटती रहती है.

अगर आपका निवेश समय कम से कम 2 साल या उससे ज्यादा का है, तो एक विविध (डाइवर्सिफाइड) फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो बनाना समझदारी हो सकता है, जिसमें स्थिरता, लिक्विडिटी और टैक्स बचत का संतुलन हो.

फिक्स्ड इनकम में और क्या-क्या विकल्प हैं?

अब निवेशकों के पास एफडी के अलावा कई विकल्प हैं, जैसे:

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट

सरकारी बॉन्ड (G-Secs)

डेट म्यूचुअल फंड

इनकम + आर्बिट्राज फंड

आर्बिट्राज फंड

इक्विटी सेविंग्स फंड

G-Secs और डेट म्यूचुअल फंड

सरकारी बॉन्ड सुरक्षित माने जाते हैं और अच्छे ब्याज दर चक्र में दर लॉक करने का मौका देते हैं. वहीं, डेट म्यूचुअल फंड ब्याज दर और क्रेडिट जोखिम को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज करते हैं.

इनकम + आर्बिट्राज फंड

इन फंड्स में लगभग 50-60% हिस्सा डेट में और बाकी आर्बिट्राज रणनीति में लगाया जाता है. 2 साल से ज्यादा निवेश पर इन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (12.5%) लगता है, जो कई बार एफडी से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

आर्बिट्राज या इक्विटी सेविंग्स फंड

थोड़ा-सा जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए ये फंड कम उतार-चढ़ाव के साथ एफडी से बेहतर पोस्ट-टैक्स रिटर्न देने की कोशिश करते हैं.

कितना और कहां निवेश करें?

कोई एक फॉर्मूला सब पर लागू नहीं होता. निवेश का फैसला आपकी उम्र, टैक्स स्लैब, जोखिम लेने की क्षमता और जरूरत पर निर्भर करता है. रिटायरमेंट के करीब लोग ज्यादा सुरक्षित विकल्प चुन सकते हैं, जबकि युवा निवेशक थोड़ा संतुलित जोखिम ले सकते हैं. एफडी को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन सिर्फ उसी पर निर्भर रहना सही नहीं. समझदारी इसी में है कि संतुलित और सोच-समझकर बना हुआ फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो तैयार किया जाए, जो पूंजी सुरक्षित रखे और महंगाई को भी मात दे सके.

सीमांचल सुरक्षा, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय समीक्षा. गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे की खास बातें…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से बिहार के सीमांचल क्षेत्र का तीन दिवसीय दौरा शुरू कर रहे हैं. इस दौरान वो भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे.

इसमें एसएसबी, ईडी, आईबी सहित कई केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. सीमा पर वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में भी अमित शाह शामिल होंगे.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार पहुंच गए हैं. वो बिहार के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करेंगे. सीमा पर घुसपैठ और कथित अवैध धार्मिक ढांचों के कारण राज्य के सीमांचल क्षेत्र में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे. अमित शाह तीनों दिन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहेंगे.

कानून-व्यवस्था की स्थिति और सीमा प्रबंधन का जायजा लेंगे

इस दौरान वह सात सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे. साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति और सीमा प्रबंधन का जायजा भी लेंगे. अधिकारियों के मुताबिक, बैठक के दौरान गृह मंत्री सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्मित अवैध धार्मिक ढांचों और स्थानीय अधिकारियों की ओर से उन घुसपैठियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट तलब कर सकते हैं, जो कथित तौर पर क्षेत्र की जनसांख्यिकी बदल रहे हैं.

भूमि पत्तन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक करेंगे

इसके साथ ही वो किशनगंज समाहरणालय में भूमि पत्तन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक भी करेंगे. अधिकारियों ने बताया कि अगले दिन वह लेट्टी और इंदरवा में सीमा चौकियों का उद्घाटन करने के साथ-साथ एसएसबी की विभिन्न परियोजनाओं का वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शिलान्यास भी करेंगे.

शाह के दौरे पर क्या बोले अशोक चौधरी?

गृह मंत्री अमित शाह के दौरे पर जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने कहा, हमारा बॉर्डर नेपाल से लगता है. हमारा बॉर्डर बांग्लादेश से लगता है, जिस पर अमित शाह आ रहे हैं. नेपाल से हमारे यहां ड्रग्स, नकली करेंसी, इन सबकी शिकायतें मिलती हैं क्योंकि वो ओपन बॉर्डर है. अमित शाह इस पर समीक्षा करेंगे. बांग्लादेश से बहुत से घुसपैठिए हमारे सीमांचल में आए हैं. अगर आप वोटर लिस्ट और आधार कार्ड का मिलान करेंगे तो सिर्फ किशनगंज में बड़ा अंतर दिखेगा.

“बुधवार विशेष: गणेश पूजा से मजबूत होगा बुध, बिजनेस में मिलेगी बड़ी सफलता”

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सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है. इस खास मौके पर भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुध की श्रद्धापूर्वक करने से लाभ मिलता है.

बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

बुध की कृपा दृष्टि से बिजनेस में मनचाही सफलता मिलती है.

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कुंडली में बुध की मजबूत स्थिति से क्या होता है?

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, व्यापार में तरक्की और समृद्धि पाने के लिए कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होना जरूरी है. भगवान गणेश की पूजा से बुध को प्रसन्न किया जाता है. बुध की कृपा होने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानें.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बुध की प्रबल स्थिति व्यक्ति को मधुर वाणी और कमाल का संचार करने वाला बनाता है, जो व्यापार में निपुण बनाती है. वहीं बुध की दुर्लभ स्थिति आमतौर पर फैसले लेने में विफलता का कारण भी बनती है, और कभी-कभी तो व्यक्ति गलत निर्णय तक ले लेता है.

ग्रहों के राजकुमार बुध दो राशियों के स्वामी

ग्रहों के राजकुमार बुध, मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं. भगवान गणेश दोनों ही राशियों के देवता भी हैं. ग्रहों के राजकुमार बुध कन्या राशि में उच्च होते हैं, इसलिए कन्या राशि के जातकों को सदैव शुभ फल प्राप्त होता है.

बुध ग्रह के आशीर्वाद से कन्या राशि के जातक सफल बिजनेसमैन बनते हैं. मिथुन राशि के जातक नौकरी और व्यापार दोनों ही क्षेत्रों में काफी तरक्की करते हैं.

मिथुन और कन्या राशि के जातकों को हर बुधवार भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास और मोदक अर्पित करें. इसके अलावा हरे रंग की वस्तुएं दान करना भी सही है.

पीएम किसान योजना में लाखों किसानों के नाम हटाए गए, चेक कर लें कहीं आपका भी तो नहीं शामिल…

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पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में 2000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. अब तक इस योजना की 21 किस्तें जारी हो चुकी है. देश भर के करोड़ों किसान 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं.

किसानों के लिए 22वीं किस्त से पहले बड़ा अपडेट सामने आया है.

योजना में लाभ ले रहे लाभार्थियों की दोबारा जांच में लाखों नाम लिस्ट से हटाए गए हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप भी अपना स्टेटस समय रहते चेक कर लें. और जान लें किस वजह से हटाए जा रहे हैं किसानों के नाम और कहीं आपका नाम भी तो नहीं इस लिस्ट में शामिल.

क्यों हटाए जा रहे हैं नाम?

सरकार इस बात को लगातार सुनिश्चिच कर रही है कि योजना में सिर्फ पात्र किसानों को ही लाभ मिले. इसके लिए वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू की है. और जांच में दो बड़ी वजहें सामने आई हैं. पहला, जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव. जिन किसानों के नाम पर 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन दर्ज हुई है. नउनके दस्तावेजों की दोबारा जांच हो रही है. अगर तय तारीख से पहले मालिकाना हक साफ नहीं होता है. तो पात्रता पर सवाल उठ सकता है.

दूसरी वजह है परिवार से जुड़े नियम हैं. योजना के मुताबिक एक परिवार में सिर्फ एक सदस्य को ही लाभ मिल सकता है. कुछ मामलों में पति और पत्नी दोनों किस्त ले रहे थे. ऐसे केस में भुगतान रोक दिया गया है. अगर जांच में आप सही पाए जाते हैं तो रकम जारी हो सकती है. वरना रिकवरी भी हो सकती है.

कैसे चेक करें आपका नाम लिस्ट में है या नहीं?

पीएम किसान योजना स्टेटस जानने के लिए आप घर बैठे ऑनलाइन जांच कर सकते हैं. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन चुनें. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करें, कैप्चा भरें और Get Data पर क्लिक करें.

स्क्रीन पर आपकी पूरी डिटेल दिखाई देगी. यहां e-KYC और Land Seeding जरूर देखें. अगर इनमें से कोई चीड पेंडिंग है. तो किस्त अटक सकती है. जरूरत हो तो नजदीकी CSC सेंटर या मोबाइल ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन से प्रोसेस पूरी करें.

22वीं किस्त कब आ सकती है?

सरकार ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक किस्त जल्द जारी हो सकती है. अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च 2026 के पहले हफ्ते या होली से पहले 2000 रुपये खातों में ट्रांसफर किए जा सकते हैं. इसलिए अपनी जानकारी अपडेट रखें. आधार लिंक, बैंक डिटेल और e-KYC पूरी करें.

खाड़ी देशों से गहरे संबंधों के बीच क्यों हो रहा पीएम मोदी का इजरायल दौरा, जानिए इसके मायने…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में इजरायल पहुंचने वाले हैं, जहां वे भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे. साल 2017 के बाद यह उनका पहला इजरायल दौरा है और कुल मिलाकर दूसरा दौरा.

इस यात्रा को पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका और मजबूत होती कूटनीतिक पकड़ के रूप में देखा जा रहा है.

पश्चिम एशिया में बढ़ती भारत की साख

पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत देश के रूप में पेश किया है. भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा दी है.

इजरायल के साथ नई ऊंचाई पर साझेदारी

साल 2017 में पीएम मोदी इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे. उसी दौरे से दोनों देशों के रिश्तों की नई शुरुआत हुई थी. अब भारत-इजरायल साझेदारी अपने अब तक के सबसे बेहतर स्तर पर पहुंच चुकी है.

खाड़ी और अरब देशों से मजबूत संबंध

पीएम मोदी हाल ही में जॉर्डन और ओमान की यात्रा कर चुके हैं. पिछले साल उन्होंने सऊदी अरब का दौरा किया था. जनवरी में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में आयोजित हुई थी. हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति भी भारत दौरे पर आए, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना गया.

निष्पक्ष नीति और दो-राष्ट्र समाधान पर कायम रुख

भारत पश्चिम एशिया में संतुलित और निष्पक्ष भूमिका निभाता है. 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए आतंकी हमले की प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत निंदा की थी. वहीं, भारत इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान के अपने रुख पर कायम है और गाज़ा में मानवीय सहायता भी भेज चुका है.