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जानिये कौन मांसाहारी, कौन शाकाहारी, इन लोकप्रिय नेताओ के बारे में…

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इसमें सबसे पहले नंबर हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आते है, दोस्तों आपको बता दे की इन्होने आज तक मासाहारी भोजन नहीं किया है ये शुद्ध शाकाहारी खाने वाले व्यक्ति है! इनको गुजरती खाना ज्यादा पसंद है पर उसमें से इनका प्रिये खाना खिचड़ी है।

एपीजे अब्दुल कलाम

दोस्तों आपको यह जानकर आपको ताज़्ज़ुब होगा की कलाम साहब मुस्लिम होने के बावजूद शुद्ध शाकाहारी व्यक्ति थे, इन्होने कभी मासाहारी भोजन को नहीं खाया लेकिन ये बात शायद ही किसी को पता होगी की जब वो कॉलेज में थे तो वो मासाहारी खाना खरीदने में सक्षम नहीं हुआ करते थे तो उन्होंने शाकाहारी खाने से प्यार किया और जिंदगी भर शाकाहारी भोजन ही खाया।

लालू प्रसाद यादव

लालू यादव जी को चिकन बहोत पसंद है और इसे ये चाव से खाते है पर फ़िलहाल की रिपोर्ट के अनुसार लालू जी के ज्योतिषी ने उनको नॉन वेज खाने से मना किया है अतः वो अभी शाकाहारी भोजन कर रहे है।

योगी आदित्यनाथ

दोस्तों योगी आदित्यनाथ शुद्ध शाकाहारी भोजन पर जोर देने वाले व्यक्ति है और तो और जब ये अपने कार्यकाल में गए तो वहां भी इन्होने सभी का नॉन वेज खाना बंद करवा दिया।

राहुल गाँधी

जैसा की हम सब जानते है राहुल ने अपना ज्यादा समय दूसरे देश में काटा है तो इस बात में कोई दो राय नहीं है की ये नॉन वेज खाते है, इनका प्रिय खाना तंदूरी चिकन है वैसे ये शाकाहारी खाने के भी शौकीन व्यक्ति है।

अमित शाह

दोस्तों आपको बता दूँ की अमित शाह एक सख्त शाकाहारी, गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति है, इनको चाय पीने का भी नशा नहीं है और इन्हें पोहा खाना सबसे अच्छा लगता है।

जानिए जल्द ही कम हो सकता है आपके DTH, केबल TV का बिल, TRAI करेगा रिव्यू…

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अगर आप भी अपने केबल और डीटीएच के ज्यादा बिल से परेशान हैं तो हो सकता है कि जल्दी ही इसका बिल काफी कम हो जाए. DTH और केबल की सेवाएं महंगी होने की शिकायतों के बाद TRAI ने ब्रॉडकास्टिंग और केबल इंडस्ट्री के टैरिफ की दोबारा समीक्षा करने का फैसला किया है.

इसके लिए ट्राई ने नया कन्सल्टेशन पेपर जारी किया है ताकि ब्रॉडकास्टिंग और टैरिफ संबंधी परेशानियों का कोई हल निकाला जा सके. बता दें कि ट्राई ने मार्च 2017 में नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया था, जो 29 दिसंबर 2018 से लागू हुआ. इसका विश्लेषण करने पर पता चला कि नए नियमों के बाद चैनल की कीमतों में पारदर्शिता आई और स्टेकहोल्डर्स के बीच मौजूद विवाद को कम किया जा सका. बावजूद इसके कंज्यूमर्स को टीवी चैनल चुनने के पर्याप्त आजादी नहीं मिली. अथॉरिटी ने कहा कि ऐसा पाया गया है कि किसी बुके पर 70 फीसदी तक का भी डिस्काउंट दिया जाता है जिसकी वजह से ग्राहक अपने पसंद का चैनल नहीं चुन पाते हैं.

ट्राई ने शुक्रवार को कहा कि टीवी चैनल्स के बुके पर काफी डिस्काउंट होने के कारण ग्राहकों के आजादी के साथ चैनल चुनने पर रोक लग रही है. हालांकि, इसी साल ट्राई ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें मांग की गई थी कि टीवी चैनल के बुके पर चैनलों के अलग अलग कीमत के 85 फीसदी से कम नहीं होगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था.
ट्राई ने इस मौके पर स्टेकहोल्डर्स कंज्यूमर्स और कंज्यूमर्स संस्थाओं, विभिन्न फोर्स, विभिन्न क्षेत्रों के लिए एनसीएफ में बदलाव, मल्टी टीवी होम के लिए एनसीएफ, लंबे प्लान पर डिस्काउंट, सौ चैनल की लिस्ट में डीडी चैनल पर बातचीत की.

अटल जी के 17 साल पुराने सपने को मोदी करेंगे साकार…

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भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज पहली पुण्य तिथि है। आज के ही दिन 16 अगस्त, 2018 को प्रखर वक्ता और अपनी हाजिर जवाबी के लिए प्रसिद्ध अटल जी का निधन हो गया था। प्रधानमंत्री रहते अटली जी ने कई साहसिक फैसले लिए। भले ही वह 24 पार्टियों के समर्थन से गठबंधन सरकार चला रहे थे। लेकिन देशहित में उनके फैसलों को कोई डिगा न सका। पोखरण परीक्षण से लेकर पोटा कानून, जातिवार जनगणना पर रोक, सर्व शिक्षा अभियान, लाहौर-आगरा समिट और कारगिल-कंधार की नाकामी तक उन्होंने कई कठिन निर्णय लिए। ऐसे ही निर्णयों में से एक था देश की नदी जोड़ो योजना। वर्ष 2002 में अटल जी के देखे इस सपने को पूरा करने की दिशा में मोदी सरकार ने कदम बढ़ा दिया है।

सुखे और बाढ़ से निजात दिलाना है मकसद 

वर्ष 2003 में अटल जी ने सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया था। उस समय इस परियोजना में लगभग 5.6 लाख करोड़ रुपयों की लागत का अनुमान था। इस परियजोजना का मकसद देश को सुखे और बाढ़ से निजात दिलाना था। इस योजना के अंतर्गत गंगा समेत देश की 60 नदियों को जोड़ने की योजना है।

अटल जी की योजना पर होता अमल तो बच जाती 290 की जान 

मौजूदा समय में भारत के 9 राज्यों में इन दिनों बाढ़ का कहर जारी है। इनमें गुजरात, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र बाढ़ से सबसे अधिक त्रस्त हैं। बाढ़ से अब तक करीब 290 लोगों की जान चली गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 12 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। सरकार भी हर संभव तरीके से प्रभावितों की मदद में जुटी हुई है। लेकिन इन 290 लोगों की संभवतः जान बचाई जा सकती थी। यदि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वाकाक्षी योजना पर वर्ष 2004 में अमल शुरू किया होता।

मोदी ने नदी जोड़ो परियोजना पर शुरू किया काम 

2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से ही इस परियोजना का खाका बनना शुरू हो गया था। सरकार ने इसे पूरा करने के लिए चरणबंद्ध तरीके से योजना बनाई है। शुरूआती चरण में 30 नदियों को जोड़ने की योजना है जिस पर 5.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 14 हिमालय़ की और 16 प्रायद्वपीय नदियां शामिल हैं। शुरुआती चरण में केन-बेतवा, पंचेश्वर, नॉर्थ कोएल, पार-तापी-नर्मदा और दमन गंगा- पिंजल शामिल है।

2012 में शीर्ष कोर्ट ने दिया था केंद्र को निर्देश 

2012 में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से केंद्र सरकार को निर्देश दिया की इस महत्वकांशी परियोजना को समयबद्द तरीके से शुरू किया जाए ताकि समय बढ़ने की वजह से इसकी लागत और न बढ़ जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर, 2002 में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को इस योजना को 2017 तक पूरा करने पर जोर दिया था। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते यह योजना अधर में लटकी रही।

लखमा : मुख्यमंत्री ने जनघोषणा के अनुरूप किसानों का ऋण माफ किया..

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धमतरी, 15 अगस्त (ह‍ि.स.) । छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने गुरुवार को कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में सात माह में ही किसानों के लिए अनेक कार्य किए। जनघोषणा पत्र में किए गए वायदे के अनुरूप कर्ज में डूबे प्रदेश भर के किसानों के अल्पकालीन ऋण माफ किए गए। इतना नहीं, 2500 रुपये में मेहनतकश किसानों के धान के एक-एक दाने को खरीदकर खून-पसीने की कमाई का मोल चुकाया जाएगा।

स्थानीय पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में लखमा ने उपस्थित जनसमुदाय को स्वतंत्रता दिवस की 72वीं वर्षगांठ की बधाई दी। उन्होंने कहा कि नरवा, गरवा घुरवा, बाड़ी योजना लाकर प्रदेश की मौजूदा सरकार ने नई क्रांति पैदा कर दी है। नदी-नाले आदि के वर्षा जल को संचित करने, गोठान तैयार कर मवेशियों का ठौर सुनिश्चित करने, जैविक खाद को बढ़ावा देकर किसानों को श्रेष्ठ तरीके से खेती किसानी करने पर शासन जोर दे रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसी ही अनेक सौगातों का लाभ हर वर्ग को मिलेगा।

जुगाड़ के मामले में भारतीयों से आगे कोई नही सोच सकता, देखिये तस्वीरें

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1. गाड़ी में ac नही है तो स्प्लिट ac लगा लो

6. महँगी कॉफी मशीन नही है तो कोई बात नही कुकर से कॉफी बना लीजिए

7. लाखोँ का ट्रैकटर खरीदने की ज़रूरत नही है

8. छोटी सी जगह पर बहुत बड़ा घर खड़ा करना कोई इनसे सीखे

12. धुप से बचने का शानदार जुगाड़

सरकार ने दुकानदारों के खिलाफ उठाया यह सख्त कदम, अब ग्राहक इस जगह कर सकेंगे शिकायत..

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सर्विस चार्ज की आड़ में ग्राहक को लूटने केमुद्देमें सरकार ने सख्ती दिखाई है।कंज्यूमर मिनिस्टर रामविलास पासवान नेबोलाहै कि उपभोक्ता बिल एक्ट का रूप ले चुका है।कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2019 में CCPA का गठन किया गया है।इसकी मदद से सभी कंज्यूमर न्यायालय व फोरम का नाम बदल कर कंज्यूमर कमीशन हो जाएगा।पहलेन्यायालयया फोरम उसी केस को देखेगा जो उसके पास जाकर शिकायत करेगा।इसकेअतिरिक्तCCPA के पास Suo moto जारी करने का भी अधिकार होगा।

कर सकते हैं शिकायत
पहले CCPA का प्रोविजन नहीं था।CCPA ग्राहक को यह ताकत देता है कि अगर आपने समान नहीं खरीदा है या खरीदने से पहले भी आप शिकायत कर सकते हैं।मसलन आपको पता है कि किसी प्रोडक्ट में कुछ गड़बड़ी है तो आप खरीदने से पहले भी उसकी शिकायत कर सकते हैं।प्रोडक्ट की क्वालिटी चेक करने के लिए अलग से इन्वेस्टिगेशन विंग भी होगा, जिसमें CCPA के भीऑफिसरहोंगे, साथ ही सभी सेक्टर के प्रतिनिधि होंगे।

ग्राहक का अधिकार बढ़ा
ज्यादातर उपभोक्ता के पास जानकारी का अभाव रहता है।उनको यह नहीं मालूम होता है कि कोई शिकायत कहां करे।इस समस्या को भी CCPA की मदद से दूर किया जाएगा।साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को भीआसानबनाया जाएगा।पहले सामान जहां से खरीदते थे वहीं शिकायत करनी होती थी।अब उपभोक्ता कहीं से भी शिकायत कर सकते हैं।उन्हें इसके लिएएडवोकेटकरने की भीआवश्यकतानहीं है।

लाखों केस पेंडिंग
कंज्यूमरन्यायालयमें लाखों केस पेंडिंग हैं।मसलन डिस्ट्रिक्ट लेवल पर 3 लाख 50 हजार केस लंबित है।इसकी एक बड़ी वजह है कि कई पद खाली पड़े हैं।जोमेम्बरया चेयरमैन हैं, उनसे लगातार आग्रह है कि खाली पदों को जल्द भर जाए।जज को नए बिल के तहत नहीं रखा गया है।उपभोक्ता नियमों का मकसद ग्राहकों को न्याय दिलाना है ना किन्यायालयकचहरी के चक्कर लगवाना।

सख्त प्रावधान
कानून में मीडिया (प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक) को लेकर भी कई प्रोविजन किए गए हैं।मीडिया सेबोलागया है कि जितना लिखित दिया गया है सिर्फ उतना ही प्रचारित करना या दिखाना है।सेलिब्रिटी जो ब्रांड का प्रचार करते हैं, उनके लिएबोलागया है कि जितना लिखा दिया गया है सिर्फ उतना ही बोले।इसके अलग कुछ नहीं करना है।बता दें, सेलिब्रिटी के लिएकारागारका प्रोविजन नहीं है।मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर आजीवनजेलका भी प्रोविजन है।

मैन्युफैक्चरिंग डेट
हालांकि, सेलिब्रिटी जो ब्रांड का प्रचार करते हैं उनपर जुर्माना का प्रोविजन है।सेलिब्रिटी केविरूद्ध10 लाख रुपये तक जुर्मानाव1वर्षतक प्रचार करने पर रोक के भी प्रोविजन शामिल किए गए हैं।पासवान नेबोलाकि यह सब कुछ अभी सिर्फ एक्ट में है, रूल जल्द बनेंगे।3 महीने में सारे रूल बन कर तैयार हो जाएंगे।हर सामान पर मैन्युफैक्चरिंग डेट होनामहत्वपूर्णहै।

यदि आपको भी कारोबार में हो रहा है नुकसान तो अपने कारोबार स्थान रखीये यह तीन चीजें…

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घर में या फिर किसी भी बिजनेस स्थान पर जरूर रखेंगे तीन चीजें गरीबी कभी नहीं आएगी आपके पास।

आज इस आर्टिकल में हम आपको वास्तु के कुछ नियम बताने वाले हैं आपके घर में या फिर आपके बिजनेस में काफी लोग चल रहा है और काफी करीबी है तो आप वास्तु के द्वारा बताए गए कुछ नियमों का पालन करें।

सबसे पहले तो आप घर की या फिर अपने बिजनेस स्थान की अच्छी तरह से साफ सफाई रखें सुबह उठकर आप मंदिर में पूजा करें।

1 धातु का कछुवा आप धातु से बना हुआ कछुआ अपने घर में या फिर अपने बिजनेस के स्थान पर या ऑफिस में जरूर रखें धातु से बना हुआ कछुआ आपकी जिंदगी में खुशहाली और सुख-समृद्धि लाएगा और यह बहुत ही कमाल का असर दिखाता है कि आपको भी बिजनेस में नुकसान हो रहा है तो एक बार जरूर ट्राई करें।

2 पिरामिड – पिरामिड आपके घर की एनर्जी को सकारात्मक बनाकर उसे बैलेंस करता है, जिससे घर की ऊर्जा आपको सकारात्मक परिणाम देने लगती है। आप जो चाहते हैं आपको वही मिलेगा।

3 सफेद पत्थर इसके अलावा यदि आप अपने घर में सफेद पत्थर पर रखोगे तो यह सफेद पत्थर आपके घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करें सकारात्मक ऊर्जा आपके घर में प्रदान करेगा और आपके सोचने समझने की शक्ति भी बढ़ जाएगी सफेद पत्थर लक्ष्मी का रूप माना जाता है और सभी व्रत रखने से आपके घर में कभी भी पैसे की कमी नहीं होगी।

ये 28 रोग होम्योपैथी की इन दवाओ से दूर होते है , जानिए ऐसे…

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होम्योपैथी पद्धति की एक अन्य शाखा है बायोकैमिक दवाएं.इनमें प्रमुख 12 दवाएं होती हैं जिनके कुल 28 कॉम्बिनेशन तैयार किए जाते हैं.इन कॉम्बिनेशन दवाओं को प्रमुख 28 रोगों में लक्षणानुसार दिया जाता है.इस पद्धति में खट्टी चीजें खाने की मनाही नहीं होती लेकिन रोग कैसा है इसके आधार पर इन चीजों से परहेज कराया जाता है.

होम्योपैथी में किसी भी रोग केइलाजके बाद भी यदि मरीजअच्छानहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भीहोने कि सम्भावनाहै.इसकेअतिरिक्तमरीज द्वारा रोग के बारे मेंठीकजानकारी न देना उचित दवा के चयन में बाधा पैदा करती है जिससे समस्या कानिवारणपूर्ण रूप से नहीं हो पाता.

ऐसे में मरीज को उस दवा से कुछ समय तक के लिए तो राहत मिल जाती है लेकिन बाद में यह दवा शरीर पर दुष्प्रभाव छोड़ने लगती है.इस लापरवाही से आमतौर पर होने वाले रोगों काउपचारशुरुआती अवस्था में नहीं हो पाताववे क्रॉनिक रूप ले लेते हैंऔरअसाध्य रोग बन जाते हैं.

मरीज को चाहिए कि वहचिकित्सकको रोग की हिस्ट्री, अपना स्वभाववआदतों के बारे में पूर्ण रूप से बताए ताकि एक्यूट (अचानक होने वाले रोग जैसे खांसी, बुखार) रोग क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाले रोग जैसे अस्थमा, टीबी) न बने.

चिकित्सकों के अनुसार,अधिकांशमामलों में एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ कोसमाप्तकरती है.आमतौर पर होने वाली परेशानियों को छोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें क्यों कि एक रोग दूसरी बीमारी का कारण बन सकता है.जानते हैं इनके बारे में.

इंडियनऔरजर्मन दवा दोनों ही देतीं राहत –
जर्मन दवाओं को बनाने से लेकर पैकेजिंग तक काकार्यमशीन से होता है जबकिहिंदुस्तानमें मशीन के साथ-साथ दवा को मैन्युअली भी बनाते हैं.मरीज को राहत दोनों ही तरह की दवाइयों से मिलती है.मरीज इनकी पहचान दवा के पैकेट पर लिखे नाम से कर सकते हैं.

बुखार –
यह शरीर का नेचुरल प्यूरिफायर है जिससे शरीर मेंउपस्थितविषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं.102 डिग्री तक के बुखार को ठंडी पट्टी रखकर, आराम करके या खाने में परहेज करअच्छाकर सकते हैं लेकिन उचित दवा न लेने सेकठिनाईबढ़कर असाध्य रोगों को जन्म देती हैं.जैसे बच्चों में इसके लिएठीकदवा न दी जाए तो निमोनिया, सांस संबंधी परेशानियों हो सकती हैं.इसकेअतिरिक्तकई बार दिमाग में बुखार के पहुंचने से बच्चे कोभ्रमणभी आ सकते हैं.
इलाज-
डॉक्टर को सभी लक्षण पूर्ण रूप से बताएं ताकि वे उसी आधार परठीकदवा का चयन कर रोग को शुरुआती स्टेज में ही दूर कर सके.आर्सेनिक (हल्के बुखार के साथ पानी की प्यास ज्यादाऔरपसीना आने पर), एकोनाइट (तेज बुखार के साथ पानी की प्यास, शरीर में सूखापन), बेलाडोना (तेज बुखार के कारण चेहरा लालऔरसिरदर्द), चाइना (गैस बननेऔरपेटबेकारहोकर बुखार) आदि दवा सेउपचारकरते हैं.

एसिडिटी –
समस्या के लंबे समय तक बने रहने से शरीर में एसिड इकट्ठा होता जाता है जो पेट या किडनी में पथरी, हृदयाघात,दिलकी धमनियों में ब्लॉकेज, कोलेस्ट्रॉल, कमरदर्द, पाइल्सऔरफिशर जैसी परेशानियों को जन्म देता है.जोड़ों के गैप में एसिड के जाने से अर्थराइटिस भीहोने कि सम्भावनाहै.दिमाग में एसिड के जाने से बढऩे वाला बीपी पैरालिसिस की वजह बनता है.

इलाज :शुरुआती स्टेज में मरीज को कार्बोवेज (खट्टी डकारें आना), कालीकार्ब, फॉस्फोरस (कुछ भी खाते ही उल्टी), अर्सेनिक (पेट में जलन के बाद बार-बार पानी पीने की इच्छा) आदि दवाएं देते हैं.

जुकाम –
अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस, एलोपेसिया (बाल झडऩा), कमआयुमें बाल सफेद होना, आंखेंनिर्बलहोना, मानसिक विकार जैसे तनाव, डिप्रेशन, स्वभाव में बदलाव, गुस्सा आना, क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस केअतिरिक्तकार्डियक अस्थमा की मूल वजह जुकामहोने कि सम्भावनाहै.सर्वाइकल स्पोंडिलाइसिस भी जुकाम से होता है क्योंकि इस दौरान बलगम दिमाग की नसों में जमता रहता है जिससे गर्दनऔरदिमाग के आसपास के भाग पर दबाव बढ़ता जाता है.

इलाज – :जुकाम शरीर से गंदगी बाहर निकालता हैवयह कुछ समय में खुद हीठीकहो जाता है.लेकिन आराम न हो या समस्या कुछ समय के अंतराल में बार-बार प्रभावित करे तो आर्सेनिक (पानी की प्यास के साथ जुकाम), एकोनाइट, बेलाडोना, यूफे्रशिया (जुकाम के साथ आंखें लाल रहना), एलियम सेपा (जुकाम में जलन के साथ नाक बहना), ट्यूबरकुलिनम (जुकाम के साथ गर्मी लगना या भूख ज्यादा) दवाएं देते हैं.

सिरदर्द –
यह आम रोग है जिसमें मरीज कई बार मनमर्जी से दवा ले लेता है.ऐसे में दवा लंबे समय तक राहत नहीं देतीवपेट कीकठिनाईऔरमाइग्रेन कीसंभावनाको बढ़ाती है.यदि इसकाउपचारउचित दवा से न हो तो दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है जिससे हार्मोन्स के स्त्रावण में गड़बड़ी आती है जिससे थायरॉइड, महिला संबंधी समस्याएं जन्म लेती हैं.
इलाज: बेलाडोना, सेंग्युनेरिया (माइग्रेन), नेट्रम म्यूर (विशेषकरस्त्रियोंमें सिरदर्द), ग्लोनाइन (धूप के कारण सिरदर्द) आदि इस बीमारी कोअच्छाकरते हैं.

कब्ज :

आमतौर पर इस समस्या में हम घरेलूतरीकाअपनाते हैं जो लिवरऔरपेन्क्रियाज की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं.यह डायबिटीजवआंतों, लिवरऔरपेट के कैंसर का कारण बनता है.लंबे समय तक कब्ज से पेन्क्रियाजऔरलिवर पर दबाव बढ़ने से इंसुलिन बनने की क्षमतानिर्बलहो जाती है.

इलाज: फॉस्फोरस (कुछ भी खाते ही उल्टी), चिलिडोनियम (लिवर के पीछे के भाग में दर्द)देते हैं.

बल्लेबाज ने अंपायर के सिर पर मारा झन्नाटेदार शॉट, हो गई मौत…

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डॉक्टरों की काफी कोशिशों के बाद भी जॉन विलियम्स (Umpire John Williams) को बचाया नहीं जा सका. वाकया डिविजन-2 (Division two) के मैच के दौरान का है, जो पेमब्रोक व नारबर्थ Pembroke vs Narborth के बीच हुआ था.

लगातार नई तकनीक और बदलावों के बावजूद क्रिकेट के मैदान पर अनहोनी होने का खतरा बना रहता है. न केवल क्रिकेट (Cricket) बल्कि कई खेलों में इस तरह के हादसे होते रहते हैं, जिसमें किसी खिलाड़ी तक की मौत हो जाती है. भारतीय क्रिकेट रमन लांबा (Raman Lamba) हों या फिर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिल ह्यूज (Phillip Huge), ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब खेल के मैदान पर लगी चोट इतनी खतरनाक हो जाती है कि किसी की जान भी चली जाती है. क्रिकेट के मैदान पर एक बार फिर ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया हुआ है. दरअसल, मैच के दौरान एक बल्लेबाज ने झन्नाटेदार शॉट लगाया और गेंद सीधी अंपायर के सिर पर जाकर लगी. डॉक्टरों की काफी जद्दोजहद के बाद भी अंपायर को बचाया नहीं जा सका. वाकया डिविजन-2 के मुकाबले के दौरान का है. यह मैच वेल्स में पेमब्रोक और नारबर्थ के बीच खेला गया था.

पेमब्रोक और नारबर्थ के बीच खेले गए इस मुकाबले में 80 साल के जॉन विलियम्स (John Williams) भी मैदानी अंपायरिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. यह मैच 13 जुलाई को आयोजित हुआ था. इस दौरान अंपायरिंग कर रहे जॉन विलियम्स के सिर पर बल्लेबाज का शॉट आकर लगा और वह वहीं बेहोश हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कई दिनों तक उनका इलाज चला, लेकिन आखिरकार गुरुवार 15 अगस्त को उन्होंने दम तोड़ दिया. डॉक्टरों की काफी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.

पेमब्रोकशायर क्रिकेट ने इस दुखद सूचना को साझा करते हुए बताया कि गुरुवार सुबह अंपायर जॉन विलियम्स से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई है. उनका आज अस्पताल में निधन हो गया है. निधन के वक्त परिवार के लोग उनके साथ ही थे. दुख की इस घड़ी में पेमब्रोकशायर क्रिकेट जॉन के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है.

रिपोर्ट के अनुसार, जॉन विलियम्स के सिर पर गेंद लगते ही मैच को तुरंत रोक दिया गया और उन्हें एंबुलेंस के जरिये कार्डिफ स्थित यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ वेल्स ले जाया गया. अस्पताल ले जाते वक्त वे कोमा में चले गए थे. 2 अगस्त को उन्हें कार्डिफ से विथीबुश अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया था.

ये मामूली सी चीज बबासीर का चुटकियों में सर्वनाश कर देती है , दर्द में खाते ही आराम

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बवासीर के लक्षण 
शौच करते समय दर्द होना।
भूख ना लगना और चिड़चिड़ापन होना।
शौच करते समय खून का गिरना।
गुदा में हमेशा जलन के साथ – साथ खुजली होना।
बैठने पर गुदे में दर्द होना। ठीक प्रकार से बैठ ना पाना।
दिन प्रतिदिन कमजोर होना अथवा स्वास्थ्य में गिरावट आना।
बवासीर हो जाने पर मल त्याग वाले स्थान पर लगातार खुजली होना।
बवासीर का रामवण बाण इलाज
हम बवासीर को अनेक नामों से जानते हैं। पाइल्स, बवासीर और महेशी के नामों से भी जाना जाता है। यह बीमारी हमारे पेट में माल इकट्ठा होने से और गैस बनने के कारण से होता है। यदि आप इस बीमारी से बहुत परेशान हैं और आपके घर परिवार पड़ोस में कोई इस बीमारी से परेशान है तो इसका इलाज आप उन्हें जरूर बताएं और दो तीन खुराक लेने पर ही इस बीमारी से आपको आराम मिल जाता है। आप बहुत इलाज और बहुत घरेलू नुस्खे का प्रयोग करने कर चुके हैं तो भी आराम नहीं मिला है एक बार इस नुस्खे का प्रयोग करके देखें। इसका हमारे शरीर में कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।
बंसारी की दुकान ,किराने की दुकान या जनरल स्टोर पर से 50 ग्राम मंगरैल(कलोंजी) खरीद के ले आते हैं। और उसको साफ कर लेते हैं। उसको सुबह-शाम खाली पेट 1 ग्राम लेते रहते हैं।

मंगरेल को हम चीनी के साथ मिला कर के भी ले सकते हैं।यदि से लेने में कोई दिक्कत होती है तो इसे चीनी के साथ पीस के भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मंगरैल(कलौंजी) का लगातार सेवन करने से हम देखेंगे दो-तीन दिनों के अंदर ही हमारी बवासीर की समस्या जड़ से दूर हो जाती है। एक बार इस तरीके का इस्तेमाल आप जरूर करें। और दूसरों को बताया भी लंबी सी लंबी बीमारी दूर हो जाती है।किसी भी प्रकार के बवासीर में लाभ पहुंचाता है।