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सेंधा नमक का भाव चार महीने में दोगुना…

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पकिस्तान ने भले ही अब भारत से कारोबार बंद करने का एलान किया है मगर भारत ने चार महीने पहले पुलवामा हमले के बाद ही पाकिस्तान से व्यापारिक संबंध तोड़ लिए थे। अब पूर्वांचल के बाजार में उसका असर भी दिखने हैं। चार महीने पहले तक जो छुहारा 120 रुपये किलो के भाव से बिक रहा था, अब वह 250 रुपये किलो तक पहुंच गया है। जबकि चार महीने में पाकिस्तानी मसाले की बिक्री पूरी तरह से बंद हो गई है।

पाकिस्तान से आने वाले सामानों में पूर्वांचल की मंडी में सबसे अधिक खपत छुहारे की होती है। अप्रैल से पहले इसकी कीमत क्वालिटी के हिसाब से 50 से लेकर 120 रुपये प्रति किलो तक थी। अब यह कीमत 180 से लेकर 250 रुपये किलो तक पहुंच गई है। बाजार के सूत्रों का कहना है कि जब अप्रैल में केन्द्र सरकार ने पाकिस्तान से व्यापार बंद कर दिया तब बाजार में करीब छह महीने का स्टॉक था। माना जा रहा था कि यह स्टॉक समाप्त होने के बाद भाव में असर पड़ेगा मगर अगले महीने से ही भाव तेज होने लगे और अब हाल यह है कि कीमत दोगुने से भी अधिक पहुंच गयी है।

साहबगंज मंडी के थोक कारोबारी अनिल जायसवाल और धर्मशाला बाजार के कारोबारी संतोष शेखर बताते हैं कि बाहर से छुहारा महंगा आ रहा है। पाकिस्तान से जब तक छुहारा कश्मीर होकर आता था, रेट स्थिर था। अब अफगानिस्तान व गल्फ कंट्री होकर भारत में आ रहा है। किराया बढ़ने के नाम पर भाव बढ़ा दिया है। हम लोग सोच रहे थे रेट छह महीने बाद बढ़ेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ। गोरखपुर की मंडी से छुहारा आजमगढ़, मऊ, नेपाल बॉर्डर व बिहार तक जाता है। प्रति दिन यहां की मंडी में करीब 40 टन छुहारा बाहर से आता है। सीएंडएफ वालों ने शहर के थोक कारोबारियों को बताया है कि पहले एक ही देश का बॉर्डर पार कराने का खर्च देना होता था अब दो-दो देश का बॉर्डर पार कराने का खर्च देना पड़ रहा है। यह पहले की अपेक्षा यह दो से तीन गुना तक पड़ रहा है।

30 रुपये किलो पहुंचा गया सेंधा नमक

अपने यहां सेंधा नमक भी पाकिस्तान से आता है। अप्रैल से पहले इसकी कीमत 10 रुपये प्रति किलो था। इसकी मांग त्योहारी सीजन में बढ़ जाती है। त्योहारी सीजन अक्तूबर में आना है मगर सेंधा नमक का भाव अभी तीस रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। मोहद्दीपुर के कारोबारी महेश अग्रवाल बताते हैं कि बड़े स्टॉकिस्टों ने माल रोक लिया है। इसी के चलते यह स्थिति आई है। नया माल आने तक भाव इसी तरह से चढ़ते रहे तो नवरात्र तक प्रति किलो सेंधा नमक का भाव 50 रुपये पार हो सकता है।

खजूर है छुहारे का सस्ता विकल्प

कारोबारियों ने बताया कि छुहारे का सस्ता विकल्प खजूर है। यह ईरान के अलावा अधिकतर खाड़ी देशों से आता है। यह बाजार में 80 से 90 रुपये प्रति किलो के भाव से उपलब्ध है। क्वालिटी भी ठीक है। देहात के कुछ बाजारों में कुछ कारोबारियों ने इसका रेट भी मनमाना वसूलला शुरू कर दिया है। हालांकि मंडी में यह उचित रेट पर उपलब्ध है।

कोहिनूर की चमक ने इन राजाओं को किया तबाह, अब इनके पास है ये हीरा

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प्राचीन भारत की शान कोहिनूर हीरे की खोज वर्तमान में आंध्र प्रदेश राज्य को कहनूर जिले में स्थित गोल गुंड्डा के खद्दानों में हुई थी। जहा से दरियाइ व नूरहुन जैसे प्रसिद्ध हीरे भी निकले थे, पर ये कोहिनूर हीरा खद्दान से कब बाहर आया इसके बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी नहीं है। कोहिनूर का अर्थ होता है रोशनी का पहाड़, लेकिन इस हीरे की चमक से कई राजाओं की सलतनत का सूर्य अस्त हो गया। एेसी मान्यता है कि ये हीरा श्रापित है और ये मान्यता 13वीं शताब्दी से है।

इस हीरे का वर्णन बाबर नामा में मिलता है। जिसके अनुसार 1294 के आस पास ये हीरा ग्वालियर के एक अनाम राजा के पास था लेकिन उस समय इस हीरे का नाम कोहिनूर नहीं था लेकिन 1306 ई. के बाद से ही इस हीरे को पहचान मिली। जब एक इंसान ने लिखा कि इस हीरे को पहनने के बाद वह सारी दुनिया पर राज करेगा, लेकिन इसके साथ ही सका दुर्भाग्य भी शुरू हो जाएगा। लेकिन इस बात को खारिज कर दिया गया, पर यदि हम इतिहास देखे तो कह सकते है कि उसकी बात काफी हद तक सही थी।
कई सम्राज्य ने इसे अपने पास रखा लेकिन जिसने भी रखा वह खुशहाल नहीं रह पाया। 14 वीं शताब्दी में ये हीरा काकतीय वंश के पास गया तो 1083 ई. से शासन कर रहे इस सम्राज्य के बुरे दिन शुरू हो गए और 1323 ई. तुगलक शाह प्रथम से हारने के बाद ये सम्राज्य खत्म हो गया। काकतीय साम्राज्य के पतन के पश्चात यह हीरा 1325 से 1351 ई. तक मोहम्मद बिन तुगलक के पास रहा और सभी का अंत इतना बुरा हुआ जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

शाहजहां ने इस कोहिनूर हीरे को अपने मयूर सिंहासन में जड़वाया लेकिन उनका आलीशान और बहुचर्चित शासन उनके बेटे औरंगजेब के हाथ चला गया। उनकी पसंदीदा पत्नी मुमताज का इंतकाल हो गया और उनके बेटे ने उन्हें उनके अपने महल में ही नजरबंद कर दिया। 1739 में फारसी शासक नादिर शाह भारत आया और उसने मुगल सल्तनत पर आक्रमण कर दिया। इस तरह मुगल सल्तनत का पतन हो गया और सत्ता फारसी शासक नादिर शाह हीरे को परशिया ले गया और उसी ने इस हीरे का नाम कोहिनूर रखा। 1747 में नादिर शाह का भी कत्ल हो गया और कोहिनूर हीरा अहमद शाह दुरानी के पास पहुंच गया।
उनकी मौत के बाद उनके वंशज शाह सुजा दरानी के पास पहुंचा, उस समय मेहम्मद शाह ने शाद सूजा को अवदस्त कर दिया। 1813 में शाह सूजा उस हीरे को साथ लेकर लाहौर पहुंचा। उसने वह हीरा पंजाब के राजा रणजीत सिंह को दे दिया। सके बदले रणजीत सिंह ने शाह सूजा को अफगानिस्तान का शासन वापिस दिलवाया। तो इस प्रकार कोहिनूर हीरा भारत वापिस आया। कोहिनूर भारत आने के बाद महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई पर अंग्रेजों ने सिंह सम्माज्य को अपने अधिन कर लिया।

इसी के साथ ये हीरा ब्रिटिश शासन का हिस्सा बन गया। कोहिनूर को ब्रिटेन लेजाकर महारानी विकटोरिया को सौंप दिया गया। था हीरे के श्रापित होने की बात भी रानी को बताई। महारानी विक्टोरिया बात को समझ गई और उन्होंने 1852 में हीरे को अपने ताज में जड़वा लिया और खुद उस ताज को पहनने लगी और यह सिद्ध कर दिया कि इस ताज को हमेशा महिला ही पहन सकती है। अगर कोई पुरूष ब्रिटिश का राजा बनता है तो ये ताज उसकी पत्नी पहनेगी।
ई इतिहासकारों का माननना है कि महिलाओं को ये धारण करने के बाद भी इसका असर कम नहीं हुआ और ब्रिटेन सम्राज्य के अंत के लिए भी ये जिम्मेदार माना जाता है। ब्रिटेन 1850 तक आधे विश्व पर राज कर रहा था लेकिन उसके दिग्गज एक एक करके स्वतंत्र होते गए। माना जाता है कि 793 कैरेट का था ये कोहिनूर, लेकिन समय के साथ साथ हीरे का काम होता गया और इसकी कटिंग के बाद अब ये हीरा 105.6 कैरेट का रह गया है। ये हीरा अपने पूरे इतिहास में एक भी बार नहीं बिका। ये हीरा एक राजा से दूसरे राजा से छीना गया या तो इसे ईनाम में दे दिया गया। इसलिए इसकी कीमत कभी नहीं लग पाई।

यहां डीएम के घर के लिए कुक ढूंढने में छूट रहे पीआरडी विभाग के पसीने, पढ़ें क्या है पूरा मामला…

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इन दिनों देहरादून में डीएम आवास के लिए साउथ इंडियन कुक की खोज करना पीआरडी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभाग में फिलहाल अभी कोई ऐसा कुक नहीं है जो साउथ इंडियन व्यंजन बनाने में निपुण हो। युवा कल्याण एवं पीआरडी विभाग बमुश्किल कोई स्थानीय कुक खोज भी लाता है तो वह डीएम के परिवार के सदस्यों की भाषा नहीं समझ पाता है। अब तक दो-तीन कुक इसी वजह से काम छोड़ चुके हैं। फिलहाल इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। विभागीय अधिकारी कुक की तलाश में जुटे हैं। दरअसल, डीएम सी रविशंकर मूलरूप से दक्षिण भारत से हैं। उनकी स्थानीय भाषा मलयालम है। उनके परिवार के सदस्य मलयालम ही बोलते हैं। इस वजह से उनके साथ कम्युनिकेशन में यह दिक्कतें आ रही हैं।

जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि डीएम के परिवार के सदस्य मलयालम भाषा में ही बात करते हैं। जो कुक लाते हैं उसकी स्थानीय भाषा परिवार के सदस्य समझ नहीं पाते हैं। मुश्किल से दो-तीन कुक मिले भी, वे दो-तीन दिन से ज्यादा टिक नहीं पा रहे हैं। जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी अधिकारी प्रकाश चंद्र सती ने भी इस बात की पुष्टि की है।

साउथ इंडियन व्यंजनों में आम तौर पर डोसा, इडली, सांभर जैसे आम व्यंजन ही कुकों को बनाने आते हैं, जबकि इसके अलावा भी दर्जनों अन्य व्यंजन भी होते हैं, जिन्हें सिखाना बड़ी चुनौती है।

फिलहाल, पीआरडी विभाग बाहर से साउथ इंडियन कुक की खोज कर रहा है, जिसे मलयालम का ज्ञान हो। साथ ही उसे कुछ अंग्रेजी भी आती हो, ताकि अंग्रेजी को कॉमन भाषा के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सके।

डूडल ने किया सलाम, विक्रम साराभाई ने ऐसे डाली ISRO की नींव

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सर्च इंजन गूगल ने अपना डूडल भारतीय वैज्ञानिक विक्रम भाई साराभाई को समर्पित किया है. विक्रम साराभाई की आज 100वीं जयंती है. भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में इतनी तरक्की करके बड़े-बड़े अभियानों में जो सफलता प्राप्त की है उन सबका श्रेय केवल महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई को जाता है. विक्रम साराभाई का डूडल मुंबई के कलाकार पवन राजुरकर ने बनाया है. आइए जानते हैं उनके बारे में.

विक्रम अंबालाल साराभाई का जन्म अहमदाबाद में 12 अगस्त 1919 को हुआ था. उनके पिता अंबालाल साराभाई एक संपन्न उद्योगपति थे तथा गुजरात में कई मिलों के स्वामी थे.

उन्होंने ‘केम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ के सेंट जॉन कॉलेज से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. आपको बता दें, वह ऐसे वैज्ञानिक थे जो हमेशा युवा वैज्ञानिक को आगे बढ़ने में मदद करते. साराभाई ने 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की स्थापना की थी.

विक्रम साराभाई को 1962 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें 1966 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था.

कैसे हुई इसरो की स्थापना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) की स्थापना विक्रम साराभाई की महान उपलब्धियों में एक थी. रूसी स्पुतनिक के लॉन्च के बाद उन्होंने भारत जैसे विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व के बारे में सरकार को राजी किया और कहा देश को इसकी जरूरत है. डॉ. साराभाई ने अपने उद्धरण में अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया था.

आपको बता दें, इसरो और पीआरएल के अलावा, उन्होंने कई संस्थानों की स्थापना की. ‘परमाणु ऊर्जा आयोग’ के अध्यक्ष पद पर भी विक्रम साराभाई रह चुके थे. उन्होंने अहमदाबाद में स्थित अन्य उद्योगपतियों के साथ मिल कर ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’, अहमदाबाद की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

ये हैं विक्रम साराभाई के द्वारा स्थापित किए हुए संस्थान

– भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद

– इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), अहमदाबाद

– कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद

– दर्पण अकाडेमी फ़ॉर परफार्मिंग आर्ट्स, अहमदाबाद

– विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम

– स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद

– फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), कल्पकम

– वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रॉन प्रॉजेक्ट, कोलकाता

– इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड(ईसीआईएल), हैदराबाद

– यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल), जादूगुडा, बिहार

अंतरिक्ष की दुनिया में भारत को बुलन्दियों पर पहुंचाने वाले और विज्ञान जगत में देश का परचम लहराने वाले इस महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की मृत्यु 30 दिसंबर, 1971 को कोवलम, तिरुवनंतपुरम, केरल में हुई थी.

देश में सबसे ज़्यादा इनकम टैक्स और GST देती है रियालंस इंडस्ट्रीज

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देश में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) देने के मामले में रियालंस इंडस्ट्रीज सबसे आगे है. इस बात का ऐलान रियालंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आज कंपनी की 42वीं एनुअल जनरल मीटिंग (Reliance AGM 2019) में किया. रिलायंस ने पिछले साल 12, 191 करोड़ का रुपये का टैक्स भरा था.

टैक्स देने में सबसे आगे
GST भरने के मामले में भी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ सबसे आगे रही. रिलायंस ने पिछले साल 67,320 करोड़ रुपये GST भरा, ये एक रिकॉर्ड है. मुकेश अंबानी ने ये भी कहा कि जियो के 34 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो चुके हैं.

देश की अर्थव्यवस्था में रिलायंस ने पिछले काफी समय से अहम योगदान दिया है. फाइनेंशियल ईयर 2019 में आरआईएल सबसे ज़्यादा मुनाफे वाली कंपनी रही है. AGM में मुकेश अंबानी ने बताया कि सउदी अरामको रिलायंस में 20% हिस्सा खरीदेगी. सउदी अरामको 75 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी. सउदी अरामको (SAUDI ARAMCO) ऑयल और केमिकल कारोबार में निवेश करेगी.

जियो (JIO) देश की नंबर वन टेलीकॉम कंपनी बन गई है. JIO दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी है. जियो पर बात करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि अब तक जियो के कुल 34 करोड़ ग्राहक हो चुके हैं. उन्होंने जियो पर भरोसा जताने के लिए देश के लोगों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि दुनिया में जियो दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन चुकी है. 

जनिए नकली सामान से हर साल भारत को हो रहा है एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान…

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भारत में कई ऐसे सेक्टर हैं जहां नकली उत्पादों से देश को हर साल एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। लिहाजा ऐसे में इसके बारे में सही जागरुकता फैलाने और इसके खिलाफ समाधान निकालने की जरूरत है। प्रमाणन उद्योग संगठन एएसपीए ने यह बात कही है। आपको बता दें कि इस संगठन के 60 सदस्य हैं।

सालाना 50 हजार करोड़ रुपए की बचत संघ ने ब्रांड, आय और दस्तावेजों की सेफ्टी के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर दिया है। ASPA के अध्यक्ष नकुल पासरिचा ने बताया कि ‘नकली उत्पादों से भारत को हर साल करीब 1.05 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। ऐसे में अगर जागरुकता और निगरानी का सही इस्तेमाल करके नकली उत्पादों पर 50 फीसदी भी रोक लगा दी जाए जो भारत को सालाना 50 हजार करोड़ रुपए की बचत हो सकती है।

नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत में सबसे ज्यादा नकली दवाईयां बनती हैं। और इस बारे में पासरिचा ने कहा कि सरकार को इस संबंध में उचित कदम उठाने की सख्त जरूरत है क्योंकि नकली दवाइयां आम लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। बीते कुछ सालों में दुनियाभर में होने वाले व्यापार में नकली सामानों की हिस्सेदारी काफी बढ़ कर 3.3 फीसदी तक पहुंच गई है। ऐसे में अब समय है नकली उत्पादों पर रोक लगाने के लिए नई टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। जो टेक्नोलॉजी भारत में फ़िलहाल नहीं है उसे जल्द ही भारत में लाना चाहिए।

सेब खाने का सही समय और सेब खाने के बेहतरीन फायदे.

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आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे पास बहुत ही कम समय होता है खुद के लिए। कभी तो हमें अपना ख्याल रखने की भी फुर्सत नहीं मिलती तो कभी हमें खाने-पीने की भी फुर्सत नहीं मिलती। काम करने के लिए केवल भागदौड़ करना ही जरुरी नहीं है बल्कि अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी बहुत जरुरी होता है। ब्रेकफास्ट और डिनर के साथ-साथ कुछ फल भी लेना जरुरी है जिससे कि आपके शरीर में काम करने की क्षमता का विकास होता रहे। सेब हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें पौष्टिक तत्व तथा एंटीआक्सीडेंट की मात्रा काफी अधिक होती है जो कि कई तरह की बीमारियों को होने से बचाता है और हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है। इसलिए सेब खाने से क्या-क्या फायदे होते हैं ये हम आपको बताते हैं।

  • रोज सेब का सेवन करने से मधुमेह का खतरा कम हो जाता है।
  • सेब एंटीआक्सीडेंट से भरपूर होता है जिसे रोजाना खाने से विभिन्न प्रकार के कैंसर से शरीर को बचाया जा सकता है।
  • सेब खाने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है। -हर रोज सेब खाने से अस्थमा और अन्य सांस की बीमारियों के होने का खतरा कम होता है।
  • सेब में पोटैशियम पाया जाता है जो कि हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  • खाना खाने के बाद रोजाना एक सेब खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है और इसके साथ ही कब्ज भी दूर होता है।
  • सेब हमारे दांतों के लिए भी फायदेमंद हैं। इसका सेवन रोजाना करने से दांत स्वस्थ और मजबूत बनते हैं।
  • सेब खाने से हमारे शरीर में खून की कमी होने से बचा जा सकता है। इससे एनीमिया जैसी बीमारी नहीं होती है।
  • त्वचा रोगों से छुटकारा पाने के लिए रोज एक सेब का सेवन करना चाहिए।
  • सेब में विटामिन सी, ए और फ्लेवेनॉयड्स पाया जाता है जो हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
  • सेब कैल्शियम, आयरन और फॉसफोरस का अच्छा स्रोत है जिससे हमारी हड्डियां भी मजबूत होती हैं।
  • गुर्दे की पथरी के गठन को रोकने के लिए सेब खाना चाहिए क्योंकि इसमें साइडर सिरका होता है।

Reliance Jio GigaFiber : मिलेंगी ये 6 बहतरीन सर्विसेज, सिर्फ 700 रुपए में खरीद सकेंगे ये प्लान

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रिलायंस इंडस्ट्रीज की 42वीं एजीएम में जियो सेट टॉप बॉक्स की डिजाइन से पर्दा हट गया है.एजीएम में आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि Jio Fiber की कमर्शियल लॉन्चिंग 5 सितंबर को होगी. खास बात है कि अगले साल से इसके प्रीमियम ग्राहक सिनेमा-हॉल में रीलीज होने के दिन ही इसके जरिए मूवी देख पाएंगे. इसके लिए 700 रुपये से 10 हजार रुपये तक के अलग अलग मंथली प्लान होंगे. फाइबर के लिए अब तक 1.5 करोड़ रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं.मुकेश अंबानी ने एजीएम में कहा कि डिजिटल इंफ्रा पर 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है.

मुकेश अंबानी ने एजीएम में कहा कि Jio GigaFiber के लिए अब तक 5 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुका है. यह अबतक 50 लाख घरों में पहुंच चुका है. 1 साल में Jio GigaFiber पूरे देश में पहुंचेगा. उन्होंने बताया है कि जियो के प्रीमियम ग्राहकों को एक खास सुविधा भी मिलेगी यानी अब वो रीलीज के तुरंत बाद घर बैठे अपनी मनपसंद फिल्म देख पाएंगे.

जियो फाइबर की खास बातें
मुकेश अंबानी ने अपने AGM में बताया कि JIO Fiber का कमर्शियल लॉन्च 5 सितंबर को होगा. JIO Fiber में 100mbps से 1gbps की स्पीड होगी.
>> JIO Fiber प्लान 700 रुपये से प्रति माह से शुरू होगा.
>> JIO प्रीमियम ग्राहक रिलीज पर फिल्म देख सकेंगे. >> JIO Fiber से US, Canada के लिए 500 रुपये के पैक की भी घोषणा की गई.
>> विदेश में कॉल करने वालों को सौगात देते हुए उन्होंने Intl Unlimited Calling पैक 500 रुपये प्रति माह देने का ऐलान
>> JIO Fiber का सालाना पैक लेने पर HD TV मिलेगा.

कैसे कराएं जियो फाइबर के लिए रजिस्ट्रेशन
अगर आप गीगाफाइबर की सर्विस लेना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर कराना होगा. आपको अपने घर या ऑफिस का पता, ईमेल आईडी और फोन नंबर मुहैया कराना होगा. आपके फोन नंबर पर एक OTP आएगा. इसके जरिए रजिस्ट्रेशन वैरिफिकेशन होने के बाद ही आप इसकी सर्विस ले पाएंगे.

मुकेश अंबानी ने कहा है कि 5 सितंबर को सभी टैरिफ और प्लान की जानकारी जियो ऐप और जियो की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी. जियो फायबर ग्राहक जो सालाना प्लान लेंगे उनको एचडी और 4के टीवी और 4के सेट बॉक्स फ्री दिया जाएगा. इसको जियो फायबर वेलकम ऑफर नाम दिया गया है.

मुकेश अंबानी का कहना है कि लोगों के लिए JIO IoT प्लेटफॉर्म 1 जनवरी 2020 से उपलब्ध होगा. कंपनी का 1 अरब घरों को JIO IoT से जोड़ने का लक्ष्य है. इसके अलावा कंपनी सभी केबल ऑपरेटर्स के साथ पार्टनरशिप का लक्ष्य लेकर चल रही है. JIO से 2020 तक सालाना 20,000 करोड़ रुपये का कारोबार.

धीरे-धीरे किडनी को खराब कर देती है ये 4 चीजें, नंबर 4 का इस्तेमाल #कुछ पुरुष करते हैं..

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किडनी हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग होती है। शरीर के अंदर जितने भी टॉक्सिस और वेस्ट प्रोडक्ट बनता है। उन्हें ब्लड के अंदर से फिल्टर करना किडनी का काम होता है। किडनी में किसी भी प्रकार की परेशानी होने से शरीर ठीक से काम नहीं कर पाता है। आपकी कुछ आदतों की वजह से किडनी खराब होने की संभावना रहती है। आज इस आर्टिकल में, मैं आपको ऐसी ही आदतों के बारे में बताने जा रही हूं। तो आइए जानते हैं इन के बारे में |

1. मीठी चीजे- अगर आप बहुत ज्यादा मीठी चीजों का सेवन लगातार करते रहते हैं। तो इससे आपके शरीर में सोडियम और शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। जिसकी वजह से किडनी को इन्हें फिल्टर करने में अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से आपकी किडनी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

2. ज़्यादा मसाले व मांस का सेवन- ज्यादातर मांस मछली और चिकन खाना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। लेकिन हद से ज्यादा इन चीजों का लगातार सेवन करना आपकी किडनी पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके लिए जरूरी है। कि आप ताजा फल और हरी सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें।

3. ज्यादा मात्रा में दर्द निरोधक गोलियां लेना- आपमें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है। कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवाइयों का सेवन करने लग जाते हैं। विशेष रूप से महिलाओं में गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करने से किडनी फेल होने का खतरा मंडराने लगता है। लंबे समय तक नियमित रूप से ऐसी दवाओं का सेवन करने से किडनी में समस्या हो सकती है।

4. स्मोकिंग करना- सिगरेट, बीड़ी का धुआं जैसे जैसे आपके शरीर में प्रवेश करता है। वह आपके शरीर में जहरीले तत्व बढ़ाने लगता है। जब किडनी आपके ब्लड को फिल्टर करती है। तो ऐसे टॉक्सिंस को फिल्टर करने में किडनी को बहुत समस्या होती है। बीड़ी सिगरेट का इस्तेमाल एक धीमा जहर है। जिससे धीरे-धीरे अपकज किडनी खराब होने की संभावना रहती है।

जानिए धरती के जन्नत के बारे में कुछ बेहद खास बातें : Jammu & Kashmir

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आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति का माहौल है, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है तो वहीं आज कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू-कश्मीर में ईद का पर्व मनाया जा रहा है, त्योहार को देखते हुए 300 टेलिफोन बूथ बनाए गए हैं, ताकि आम लोग अपने करीबियों-रिश्तेदारों से बात कर सकें, इस वक्त राज्य में भारी सुरक्षा बल तैनात है, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के हटने के बाद आज राज्य में पहली बार ईद मनाई जा रही है।

विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो गया..

गौरतलब है कि विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर से लद्दाख अलग हो गया है, ये दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश होंगे, जहां जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी लेकिन लद्धाख में विधानसभा नहीं होगी।

चलिए धरती के इस जन्नत कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर के बारे में जानते हैं कुछ बेहद ही रोचक और अनकही बातें…

भारत की दूसरे नंबर की सबसे ऊंची छोटी

माउंट गॉडविन ऑस्टेन (K2) भारत की दूसरे नंबर की सबसे ऊंची छोटी है, जिसकी ऊंचाई 8611 मीटर है, माउंट एवेरेस्ट(8848 मीटर) के बाद यह दुनिया की दूसरे नंबर की ऊंची छोटी है जो पाक अधिकृत कश्मीर में है।

एशिया का सबसे बड़ा तालाब

एशिया का सबसे बड़ा तालाब कश्मीर की घाटी का वुलर तालाब है, भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग भी यहीं पर है जो 11 किलोमीटर लम्बी है। वो सुरंग चेनानी-नासरी सुरंग के नाम से जानी जाती है।

लेह जिला

कश्मीर का लेह जिला राज्य का सबसे बड़ा है, यही नहीं जम्मू कश्मीर ग्लेशियरों का घर है, जिनमे से एक सियाचिन ग्लेशियर 76 किलोमीटर लंबा है जो हिमालय की पर्वतमाला के लंबे ग्लेशियरो में से एक है।

वैष्णो देवी का दरबार

भारत के लोकप्रिय धार्मिक स्थलों में से एक माता वैष्णो देवी का मंदिर कश्मीर के त्रिकुटा पहाड़ो में स्थित है और एक अनुमान मुजब हर साल वहा पर 1 करोड़ तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते है।

‘पश्मीना शॉल’

‘पश्मीना शॉल’ का सबसे ज्यादा उत्पादन कश्मीर में होता है और कश्मीर सबसे ज्यादा निर्यात भी इसी चीज की करता है।

डोगरी और पंजाबी भाषा

जम्मू संभाग में दस जिले हैं- जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, डोडा, पुंछ, राजौरी, रियासी, रामबन और किश्तबाड। जम्मू का कुल क्षेत्रफल 36315 वर्ग किमी है । इसके लगभग 13297 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर पाकिस्तान के कब्जे में है, जम्मू के भिंबर , कोटली, मीरपुर, पुंछ हवेली, बाग, सुधान्ती, मुज्जफराबाद, हट्टियां और हवेली जिले पाकिस्तान के कब्जे में हैं, जहां डोगरी और पंजाबी भाषा बोली जाती है। मुज्जफराबाद में लंहदी पंजाबी व गुज़री बोलते हैं। यहां के मूल निवासियों को डोगरा कहते हैं।

कश्मीर का क्षेत्रफल लगभग 16000 वर्ग किमी

जम्मू संभाग पीर पंचाल की पर्वत श्रंखला में खत्म होता है। इस पहाड़ी के दूसरी ओर कश्मीर शुरु होता है । कश्मीर का क्षेत्रफल लगभग 16000 वर्ग किमी है। इसके दस जिले श्रीनगर, बडगाम, कुलगाम, पुलवामा, अनन्तनाग, कुपबाडा, बारामूला, शोपिया, गन्दरबल, बांडीपुरा हैं। कश्मीर संभाग मुस्लिम बहुसंख्यक है। शिया लोगों की भी एक बड़ी संख्या है, यहां गुज्जरों की आबादी ज्यादा है। गुज्जरों की ही एक शाखा को बक्करबाल कहा जाता है।