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Russia Ukraine War: यूक्रेन शांति योजना पर पुतिन का बयान: बोले, बिना शर्त सीजफायर नामुमकिन

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यूक्रेन में शांति स्थापित करने की कवायदों के बीच रूस ने फिर से अपनी कुछ शर्तें दोहरा दी हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने हालिया बयान में कहा कि यूक्रेन के साथ सीजफायर समझौता तभी हो सकता है, जब वह अपने सैनिकों को हटा दे।

रूसी मीडिया के अनुसार राष्ट्रपति पुतिन कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (सीएसटीओ) के समिट के लिए किर्गिज पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने इस बात को फिर से दोहराया कि बिना किसी शर्त के सीजफायर संभव ही नहीं है। सीएसटीओ एक रीजनल अलायंस है, जो सोवियत के बाद के कुछ देशों को एक साथ लाता है।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “सीजफायर तभी हो सकता है, जब यूक्रेन रूस के उन इलाकों से अपने सैनिक हटा ले जिन पर वह अपना दावा करता है। हमें अभी भी यहां-वहां से युद्ध खत्म करने के लिए फोन आ रहे हैं। यूक्रेनी सैनिक उन इलाकों से हट जाएंगे जिन पर उनका कब्जा है और फिर लड़ाई खत्म हो जाएगी। अगर वे नहीं हटते हैं, तो हम मिलिट्री तरीकों से ऐसा करेंगे।” न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार रूसी राष्ट्रपति ने गुरुवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अभी किसी भी आखिरी विकल्प के बारे में बात करना मेरे लिए अशिष्टता होगी, क्योंकि कोई विकल्प नहीं है, लेकिन कुछ चीजें बेसिक हैं।”

बता दें, रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलने के लिए ट्रंप के आदेश पर उनके खास दूत स्टीव विटकॉक को मॉस्को भेजा था। पुतिन के साथ विटकॉक की मुलाकात के बाद रूसी राष्ट्रपति का ये बयान सामने आया है। शुरुआत से ही ये दावे किए जा रहे थे कि ट्रंप का ये पीस प्लान रूस के पक्ष में ज्यादा है। इस पर पहले भी रूस ने अपने बयानों से संदेह को साफ कर दिया था। पुतिन ने कहा, “अमेरिकी पक्ष ने कुछ हद तक रूस को ध्यान में रखा है। कहीं न कहीं हमें बैठकर कुछ खास चीजों पर गंभीरता से चर्चा करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “हमें हर चीज को कूटनीति की भाषा में कहने की जरूरत है क्योंकि रूस यूरोप पर हमला करने का प्लान नहीं बना रहा है। सच कहूं तो यह अजीब लगता है। हमारा ऐसा करने का कभी कोई इरादा नहीं था।” पुतिन ने कहा कि अमेरिका ने जो 28-प्वाइंट का पीस प्लान का प्रस्ताव दिया है, उसके बारे में सही माध्यम से रूसी पक्ष को बताया गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए 28 सूत्रीय पीस प्लान का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अमेरिका, यूक्रेन और कई यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि रविवार को जिनेवा में इकट्ठा हुए। सभी देशों के साथ हुई चर्चा के बाद ट्रंप द्वारा प्रस्तावित पीस प्लान को 28 से घटाकर 19 प्वाइंट में कर दिया गया। हालांकि, इस प्लान को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

“क्या है ‘थर्ड वर्ल्ड देश’? जिनपर पर बौखलाए ट्रंप ने कर दिया बड़ा ऐलान, भारत पर क्या होगा असर”

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अमेरिका की राजनीति में हमेशा चर्चा का केंद्र बने रहने वाले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा विस्फोटक बयान दिया है, जिसने न केवल अमेरिकी राजनीति, बल्कि दुनिया भर के ‘थर्ड वर्ल्ड देशों’ में हलचल मचा दी है।

गुरुवार को, ट्रंप ने खुले तौर पर घोषणा की कि यदि वह दोबारा सत्ता में आते हैं, तो उनका पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा – सभी ‘थर्ड वर्ल्ड देशों’ के लोगों का अमेरिका में स्थायी रूप से माइग्रेट करना रोक देना।

यह घोषणा एक ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी धरती पर सुरक्षा और अवैध आव्रजन (Illegal Immigration) का मुद्दा सबसे गर्म है। ट्रंप का कहना है कि यह कदम इसलिए ज़रूरी है ताकि अमेरिकी नागरिक पूरी तरह से रिकवर कर सकें और बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका में घुस आए सभी अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकाला जा सके। इस बयान ने, एक बार फिर, अमेरिका-फर्स्ट (America-First) की उनकी नीति को ज़ोरदार तरीके से सबके सामने रखा है।

क्यों हुआ यह बड़ा फैसला?

ट्रंप का यह कठोर रुख व्हाइट हाउस के पास हुई एक दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना के तुरंत बाद सामने आया है। हाल ही में, व्हाइट हाउस के नज़दीक हुई गोलीबारी की एक घटना में नेशनल गार्ड के दो सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें से एक की इलाज के दौरान मौत हो गई। जांचकर्ताओं ने खुलासा किया है कि इस हमले का संदिग्ध एक अफगान नागरिक है, जो बाइडेन प्रशासन के दौरान अपने परिवार के साथ अमेरिका में आ गया था।

इस घटना ने, ज़ाहिर तौर पर, ट्रंप की आव्रजन-विरोधी भावनाओं को और मज़बूत किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट लिखकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी। उन्होंने लिखा कि इस योजना का उद्देश्य ‘गैर-नागरिकों को दिए जाने वाले सभी संघीय लाभ और सब्सिडी को समाप्त करना’, ‘घरेलू शांति में बाधा डालने वाले प्रवासियों की नागरिकता खत्म करना’ और ‘जो विदेशी नागरिक देश पर बोझ की तरह हैं, जिनसे सुरक्षा को खतरा है या फिर जो पश्चिमी सभ्यता के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें निर्वासित करना’ है। यह बयान दिखाता है कि ट्रंप की अगली आव्रजन नीति कितनी व्यापक और कठोर होने वाली है।

‘थर्ड वर्ल्ड’ का मतलब क्या है?

ट्रंप के इस बयान में सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद शब्द है – ‘थर्ड वर्ल्ड देश’। यह शब्द अपने आप में ही बहुत भ्रम पैदा करता है क्योंकि यह एक पुराना और आउटडेटेड शब्द है जिसका इस्तेमाल शीत युद्ध के दौरान होता था। तब, ‘फर्स्ट वर्ल्ड’ अमेरिका के सहयोगी देशों को, ‘सेकंड वर्ल्ड’ सोवियत संघ के समर्थक देशों को और ‘थर्ड वर्ल्ड’ उन देशों को कहा जाता था जो किसी भी गुट में शामिल नहीं थे (गुटनिरपेक्ष)। भारत, ऐतिहासिक रूप से, गुटनिरपेक्ष होने के कारण ‘थर्ड वर्ल्ड’ देश माना जाता था।

हालांकि, 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद, इस शब्द का मूल राजनीतिक अर्थ समाप्त हो गया। आधुनिक समय में, इसका इस्तेमाल अक्सर उन देशों के लिए किया जाता है जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, जिनमें गरीबी का उच्च स्तर, राजनीतिक अस्थिरता और विकास की धीमी गति है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण पेच है: ‘थर्ड वर्ल्ड देशों’ की कोई आधिकारिक सूची मौजूद नहीं है। संयुक्त राष्ट्र (UN) अपनी तरफ से आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमज़ोर देशों को ‘Least Developed Countries’ (LDCs) के रूप में वर्गीकृत करता है, जिनकी संख्या वर्तमान में 44 है और अफगानिस्तान इसी सूची में शामिल है।

भारत पर क्या होगा असर? नीतिगत स्पष्टता का अभाव

जहां तक भारत का सवाल है, ऐतिहासिक रूप से इसे ‘थर्ड वर्ल्ड’ कहा जाता था, लेकिन आधुनिक आर्थिक व्याख्या के अनुसार, भारत को अब एक विकासशील देश (Developing Country) माना जाता है, LDCs देश नहीं। संयुक्त राष्ट्र की 44 सबसे कम विकसित देशों की सूची में भारत शामिल नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ ट्रंप का बयान सबसे अधिक अस्पष्ट हो जाता है। चूँकि ट्रंप ने अपनी ‘आव्रजन रोकथाम’ (Immigration Halt) नीति के लिए ‘थर्ड वर्ल्ड’ शब्द की कोई स्पष्ट आधिकारिक परिभाषा या मापदंड नहीं दिया है, इसलिए यह अभी तय नहीं है कि आव्रजन रोकने की उनकी योजना में भारत जैसे तेज़ी से विकास करते देश शामिल होंगे या उन्हें बाहर रखा जाएगा। ट्रंप के इस अनिश्चित बयान ने दुनिया भर के लाखों प्रवासियों और उनके परिवारों के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: तकनीक से बढ़ी ईर्ष्या और तनाव, मेडिटेशन बना संतुलन का सबसे बड़ा उपाय

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लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन में शुक्रवार को ब्रह्मकुमारीज संस्थान की ओर से राज्यस्तरीय ध्यान योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं।

उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहे। मंच पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। किसी को भी बिना पास और जांच के प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

रंगोली, स्वागत और विशेष कक्ष

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत समारोह से हुई। बच्चों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ने दीदियों को कलश और भाइयों को ध्वजा देकर सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ के रंगोली कलाकार हितेश ने गुलजार दादी और राष्ट्रपति के स्वागत में खूबसूरत रंगोली बनाई। ब्रह्मकुमारीज के अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने बताया कि राष्ट्रपति के लिए एक विशेष कक्ष तैयार किया गया था, जहां वह कुछ समय ध्यान करेंगी।

मुख्यमंत्री का संदेश: ध्यान योग अभियान का महत्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि यह उनके लिए गौरव का क्षण है कि राज्य में ध्यान योग को लेकर इतना बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति की उपस्थिति इस पहल को और महत्व देती है। मुख्यमंत्री ने ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को इस अभियान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि राजयोग के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का प्रचार समाज को जोड़ने और उसके विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

मेडिटेशन और आत्मिक चेतना

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ब्रह्मकुमारीज की स्थापना चुनौतीपूर्ण समय में हुई थी और यह संस्था राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को सद्गुण और सकारात्मक जीवन शैली की ओर अग्रसर करता है। मेडिटेशन से सुख, शांति और पवित्रता का अनुभव होता है। यह आत्मा की अमरता और जीवन के चक्र का बोध कराता है। राज्यपाल ने आगे कहा कि आत्मिक अनुभव से मृत्यु का डर भी पीछे छूट जाता है और स्व परिवर्तन से ही समाज और विश्व में बदलाव संभव है।

राष्ट्रपति का संबोधन: नारी सशक्तिकरण और योग का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओम शांति कहकर अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने ब्रह्मकुमारीज बहनों को धन्यवाद दिया और कहा कि आधुनिक तकनीकी उन्नति के बावजूद समाज में एकाकीपन, ईर्ष्या और अविश्वास बढ़ा है। इसके समाधान के लिए मेडिटेशन प्रभावी साधन हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमें केवल आगे बढ़ने के लिए नहीं बल्कि अपने भीतर झांकने की आदत डालनी चाहिए। आत्मिक चेतना जागृत होने पर प्रेम, विश्वास और भाईचारा भी विकसित होता है। राष्ट्रपति ने नारी सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में ब्रह्मकुमारीज द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

“आज कर्नाटक-गोवा के दौरे पर PM मोदी, मठ में भगवान राम की 77 फुट ऊंची मूर्ति का करेंगे अनावरण”

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PM Modi Karnataka-Goa Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को कर्नाटक और गोवा का दौरा करेंगे जहां वह श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगालि जीवोत्तम मठ के 550 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में हिस्सा लेंगे और भगवान राम की 77 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

कर्नाटक में वह उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ जाएंगे और लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह एक भक्ति सभा है जिसमें 1,00,000 प्रतिभागी शामिल होंगे और विद्यार्थी, साधु-संत, विद्वान आदि एक साथ मिलकर भगवद् गीता का पाठ करेंगे। प्रधानमंत्री सुवर्ण तीर्थ मंडप का भी उद्घाटन करेंगे, जो कृष्ण मंदिर के गर्भगृह के सामने स्थित है।

श्री मध्वाचार्य ने स्थापित किया श्री कृष्ण मठ

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि वह पवित्र कनाकना किंडि को कनक कवच (स्वर्ण आवरण) भी समर्पित करेंगे। माना जाता है कि यह वही पवित्र झरोखा है, जिसके माध्यम से संत कनकदास ने भगवान कृष्ण के दिव्य दर्शन किए थे। उडुपी का श्री कृष्ण मठ करीब 800 वर्ष पहले द्वैत वेदांत दर्शन के प्रवर्तक श्री मध्वाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था।

मठ परिसर में बनाया गया विशेष हेलीपैड

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को दक्षिण गोवा जिले में श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान राम की 77 फुट ऊंची कांस्य की मूर्ति का अनावरण करेंगे। मठ के एक प्रतिनिधि ने यह जानकारी दी। मठ की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष श्रीनिवास डेम्पो ने बताया कि प्रधानमंत्री अपराह्न 3.45 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। मठ परिसर में एक विशेष हेलीपैड बनाया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की 77 फुट ऊंची मूर्ति का अनावरण प्रधानमंत्री करेंगे।

राम सुतार ने ही भगवान राम की मूर्ति बनाई

गोवा लोक निर्माण विभाग के मंत्री दिगंबर कामत ने कहा कि गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का डिजाइन तैयार करने वाले मूर्तिकार राम सुतार ने ही भगवान राम की मूर्ति बनाई है। मंत्री ने कहा कि यह दुनिया में श्री राम की सबसे ऊंची मूर्ति होगी। डेम्पो ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी एक जनसभा को संबोधित करने से पहले मठ में बने मंदिर भी जाएंगे। उन्होंने बताया कि गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक तथा राज्य के कैबिनेट मंत्री इस समारोह में शामिल होंगे।

विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे

मठ परंपरा के 550 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 27 नवंबर से सात दिसंबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डेम्पो ने बताया कि गोवा में मठ परिसर का निर्माण 370 साल पहले कैनाकोना (दक्षिण गोवा जिला) के पार्टागल गांव में किया गया था। उन्होंने बताया कि इन दिनों में कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है और प्रतिदिन 7,000 से 10,000 लोगों के मठ परिसर में आने की उम्मीद है। कामत ने कहा कि सदियों से आध्यात्मिक केंद्र के रूप में सेवारत मठ के परिसर का पूरी तरह से नवीनीकरण किया गया है और इसे आधुनिक रूप दिया गया है।

“दिल्ली ब्लास्ट में जांच कहां तक पहुंची? NIA लेडी आतंकी डॉ शाहीन को ले गई अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जानें- क्या निकलकर आया सामने”

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दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल में शामिल लेडी आतंकी डॉ शाहीन सईद को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) वीरवार की रात को फरीदाबाद लेकर पहुंची। जहां उसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी ले जाया गया।

एजेंसी ने यहां पर उसकी निशानदेही कराई। इससे पहले NIA डॉ. मुजम्मिल शकील को निशानदेही के लेकर आई थी।

रूम नंबर 22 में रहती थी शाहीन

NIA की टीम सबसे पहले डॉक्टर शाहीन सईद को धौज गांव स्थित अल-फला मेडिकल कॉलेज यूनिवर्सिटी लेकर पहुंची। टीम ने उसे उसी हॉस्टल बिल्डिंग में ले जाकर कमरे नंबर 22 में प्रवेश कराया, जहां वह रहती थी। शाहीन से जांच एजेंसी ने सभी प्रकार की जानकारी ली, जैसे कि वह वहां दिनभर क्या करती थी, कौन-कौन उससे मिलने आता था और किन लोगों से उसका नियमित संपर्क था। टीम ने कमरे के हर हिस्से की जांच की और उसके रूटीन से जुड़े कई सवाल पूछे।

इसके बाद NIA ने उसे मेडिकल वार्ड, क्लासरूम और उसके डॉक्टर कैबिन में ले जाकर वहां मौजूद गतिविधियों और उसके संपर्कों की पहचान करवाई। शाहीन सईद किन स्टाफ सदस्यों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों के संपर्क में थी और उनका व्यवहार कैसा था। टीम इन सभी लोगों की सूची तैयार कर आगे की जांच में शामिल कर रही है।

इसके बाद NIA की टीम शाहीन को खोरी जमालपुर लेकर पहुंची, जहां उसका और डॉक्टर मुजाम्मिल का निकाह हुआ था। सूत्र बताते हैं कि मुजाम्मिल ने सिर्फ निकाह के लिए एक 3BHK का कमरा किराए पर लिया था। निकाह समारोह में डॉक्टर उमर सहित लगभग 10-12 लोग मौजूद थे, जिनकी पहचान भी शाहीन ने NIA को बताई है। टीम अब निकाह में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच में साफ हुई ये बात

NIA की टीम करीब चार घंटे की तफ्तीश, पूछताछ और कई स्थानों की निशानदेही कराने के बाद उसे दिल्ली ले जाया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि शाहीन अल-फला मेडिकल यूनिवर्सिटी में रहते हुए आतंकी गतिविधियों में सक्रिय थी और यहां लोगों को जोड़कर एक नेटवर्क तैयार कर रही थी।

इसके बाद NIA की टीम शाहीन को खोरी जमालपुर लेकर पहुंची, जहां उसका और डॉक्टर मुजाम्मिल का निकाह हुआ था।

मुजम्मिल ने कराई निशानदेही, कहां से खरीदा अमोनियम नाइट्रेट?

मुजम्मिल शकील को NIA स्थानीय पुलिस के साथ 24 नवंबर को निशानदेही के लिए फरीदाबाद लेकर पहुंची। टीम ने फरीदाबाद, गुरुग्राम के सोहना और फतेहपुर तगा में करीब 4 घंटे तक अलग-अलग लोकेशन पर उसकी गतिविधियों की पड़ताल की।

“दो दिन की यात्रा पर भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन, 23वें India-Russia समिट में लेंगे हिस्सा, हो सकता है अहम रक्षा समझौता”

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की पुष्टि हो गई है। पुतिन दो दिन के दौरे (चार-पांच दिसंबर) पर भारत आएंगे। उनकी भारत यात्रा चार दिसंबर को शुरू होगी।

रूसी राष्ट्रपति का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है। वह 23वें भारत-रूस समिट में हिस्सा लेंगे। पुतिन की भारत यात्रा की चर्चा कई दिनों से चल रही थी लेकिन अब इस पर मुहर लग गई है। पुतिन की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अहम रक्षा समझौते हो सकते हैं। इसके अलावा आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों में मजबूती के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। पुतिन राष्ट्रपति द्रौपदी से भी मुलाकात करेंगे।

S-400 डिफेंस डील समेत कई मुद्दों पर बातचीत हो सकती है

भारत के दो दिवसीय दौरे के दौरान पुतिन पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान S-400 डिफेंस डील समेत कई मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। हालांकि किन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बात होगी, इसकी जानकारी नहीं शेयर की गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नीतियों से किसानों का बढ़ा भरोसा और आत्मसम्मान

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रायपुर: राज्य सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी, सरल और किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था ने गांव-गांव के किसानों के जीवन में स्थिरता और भरोसा स्थापित किया है। इसी व्यवस्था से लाभान्वित हुए हैं. इस वर्ष कुल 34.40 क्विंटल धान का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में धान खरीदी की प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित और भरोसेमंद हो गई है कि हर वर्ष धान बेचने का इंतजार उत्सव की तरह होने लगा है।

प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा और 3100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य ने खेती को न सिर्फ सुरक्षित बल्कि लाभकारी बना दिया है। वे कहते हैं कि धान विक्रय से मिली आय से परिवार का सालभर का खर्च, खेत की लागत, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक जिम्मेदारियाँ सभी आसानी से पूरी हो जाती हैं। सबसे बड़ी सुविधा यह है कि धान की राशि सीधे बैंक खाते में पहुँच जाती है, जिससे बीज, खाद, जुताई और अन्य कृषि कार्यों में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आती। खेती समय पर और सुचारू रूप से पूरी हो जाती है। वे बताते हैं कि खेती अब केवल गुजारा चलाने का साधन नहीं रही, बल्कि आर्थिक उन्नति मजबूत आधार बन गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के बेहतर नीतियों ने किसानों का जीवन संवार दिया है। हम जैसे छोटे किसानों के लिए धान खरीदी ही सबसे बड़ा सहारा व उत्सव है।

ऑनलाइन टोकन प्रणाली से धान खरीदी हुई सुगम…

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रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अभियान 15 नवंबर से प्रारंभ किया गया है। सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था ने प्रदेशभर के किसानों को नई आर्थिक मजबूती प्रदान की है। इसी क्रम में ग्राम जाजंग के किसान श्री परथ राम गबेल का अनुभव शासन की किसान हितैषी नीतियों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

प्रशासन की खरीदी व्यवस्था की सराहना

श्री परथ राम गबेल ने धान उपार्जन केंद्र डोडकी में 165.60 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर विक्रय किया। धान विक्रय के बाद उन्होंने सरकार एवं जिला प्रशासन की खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए गहरी संतुष्टि व्यक्त की।

समय, श्रम और अनावश्यक भीड़तीनों से मिला छुटकारा 

श्री गबेल ने बताया कि पहले टोकन प्राप्त करने में पूरे दिन लंबी लाइन में इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब मोबाइल के माध्यम से घर बैठे ही ऑनलाइन टोकन प्राप्त हो जाता है। श्री गबेल ने भी इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठाते हुए अपने घर से ही टोकन लिया और केंद्र पहुँचते ही तुरंत तौलाई करवाई। इससे समय, श्रम और अनावश्यक भीड़—तीनों से छुटकारा मिला है।

धान खरीदी व्यवस्था पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय

किसान ने विशेष रूप से माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा लागू की गई ऑनलाइन टोकन प्रणाली को किसान हित में अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय है। समय पर तौलाई, समय पर भुगतान और व्यवस्थित प्रबंधन ने किसानों में नए उत्साह और भरोसे का माहौल बनाया है।

सरकार की किसानकेंद्रित सोच है मजबूत

सक्ति जिले में धान खरीदी व्यवस्था की इस सुचारू कार्यप्रणाली ने सरकार की किसान-केंद्रित सोच को मजबूती दी है। बेहतर व्यवस्थाओं के कारण किसान आत्मविश्वास के साथ धान विक्रय कर रहे हैं और शासन की सुविधाओं का पूर्ण लाभ उठा रहे हैं।

धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में खुशी का माहौल

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बस्तर के मूली धान खरीदी केंद्र में किसानों को मिल रही हर सुविधा

रायपुर: राज्य शासन की पारदर्शी और किसान हितैषी धान खरीदी व्यवस्था का सकारात्मक असर अब गांव-गांव में साफ दिख रहा है। खरीदी केंद्रों में समयबद्ध तौल, टोकन प्रणाली की सुगमता और बेहतर सुविधाओं ने किसानों को राहत दी है। बस्तर जिले के बकावण्ड विकासखण्ड के मूली धान खरीदी केंद्र में आज पहुंचे किसानों ने कहा कि इस साल की व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद है।

साफसुथरी एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था से बच रहा समयकिसान लखीराम

कुम्हरावण्ड निवासी किसान लखीराम ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खरीदी की स्पष्ट व्यवस्था और टोकन प्रक्रिया के बेहतर संचालन ने उन्हें काफी सुविधा दी है। केंद्र में पर्याप्त स्टाफ की मौजूदगी से तौल में किसी तरह की देरी नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि आज 60 क्विंटल धान विक्रय के लिए टोकन कटवाया है और बिना किसी परेशानी के प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जिससे हमारा समय बचा है।

हमाल, बारदाना और पेयजल सब उपलब्ध, कोई दिक्कत नहींदलपति कश्यप

कुम्हरावण्ड के ही किसान दलपति कश्यप ने कहा कि 27 नवम्बर का टोकन लेकर सुबह केंद्र पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार तौल के लिए हमाल और बारदाना उपलब्ध हैं, किसानों के लिए पेयजल और बैठने की व्यवस्था भी की गई है। इस बार खरीदी केंद्र में आने पर ऐसा लगता है कि किसानों की सुविधाओं का सचमुच ध्यान रखा गया है।

इस बार पैदावार भी अच्छी और व्यवस्था भी पर्याप्तमहिला कृषक मंगली कश्यप

कुम्हरावण्ड निवासी महिला कृषक श्रीमती मंगली कश्यप ने बताया कि उनके पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिनमें इस वर्ष अच्छी पैदावार हुई है। वे 116 क्विंटल धान बिक्री के लिए लायी थीं। खेत में नलकूप होने से अब रबी सीजन में ढाई एकड़ में मक्का की फसल लेने की तैयारी कर रहीं हैं।

बारदाना, परिवहन और ऑनलाइन सुविधा सब है बहुत व्यवस्थितकेंद्र प्रभारी

मूली धान खरीदी केंद्र के प्रभारी श्री एमआर भद्रे ने बताया कि इस वर्ष खरीदी सीजन के लिए पर्याप्त बारदाना, सुचारू परिवहन व्यवस्था और आवश्यक सुविधाएं पहले से सुनिश्चित कर दी गई हैं। किसानों को उनके धान की तौल और भुगतान से संबंधित हर जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध हो रही है, जिससे पारदर्शिता और भी बढ़ी है। इस बार बोरीगांव, बारदा, कुम्हरावण्ड, किंजोली, चापापदर, मूली, चिखल करमरी और करंजी के  कुल मिलाकर 865 किसानों में केंद्र में धान विक्रय के लिए पंजीयन कराया है।

छत्तीसगढ़ पवेलियन को 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में मिला ‘स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल’

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रायपुर: छत्तीसगढ़ ने 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़  के पवेलियन को उत्कृष्ट थीमैटिक प्रस्तुति और डिस्प्ले के लिए प्रतिष्ठित “स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल” प्रदान किया गया। यह पुरस्कार नई दिल्ली के भारत मंडपम में दिया गया, जहाँ आईआईटीएफ 14 से 27 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ।

छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूरे होने पर मिला यह सम्मान

यह उपलब्धि ऐसे समय मिली है जब छत्तीसगढ़ वर्ष 2025 में अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। पवेलियन में छत्तीसगढ़ की यात्रा को बेहद रोचक और अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया—जिसमें सांस्कृतिक परंपराएँ, जनजातीय विरासत, आजीविका आधारित पहल, सुशासन, औद्योगिक विकास, पर्यटन और सतत विकास जैसे सभी पहलुओं को प्रदर्शित किया  गया।

छत्तीसगढ़ का पवेलियन क्यों रहा खास

* पवेलियन ने राज्य की 25 वर्ष की यात्रा, उसकी उपलब्धियों, आगामी लक्ष्य और “नवा छत्तीसगढ़” की अवधारणा को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया। इसमें बस्तर में हो रहे परिवर्तन को भी प्रमुखता से रखा गया—जहाँ हाल के वर्षों में बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटन विकास, जनजातीय आजीविका में वृद्धि और शांति आधारित विकास ने नए अवसर खोले हैं।

* पारंपरिक कारीगरी, जनजातीय कला, स्थानीय उत्पाद, व्यंजन और पर्यटन ने छत्तीसगढ़ की आत्मा को आधुनिक अंदाज़ और प्रामाणिकता के साथ पेश किया।

* पवेलियन में छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024–30 को प्रमुखता के साथ दर्शाया गया, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और उच्च स्तरीय निवेश आकर्षित करना है।

प्रदर्शनी में दो बड़े आगामी प्रोजेक्ट्स भारत का पहला AI डेटा सेंटर पार्क और छत्तीसगढ़ का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट को भी  प्रदर्शित किया गया। ये दोनों परियोजनाएँ राज्य के युवाओं के लिए हजारों उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार अवसर तैयार करेंगी और छत्तीसगढ़ को तकनीकी रूप से उन्नत, निवेश-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार राज्य के रूप में वैश्विक मानचित्र पर प्रमुख स्थान देंगी।

मेले के दौरान पवेलियन में उल्लेखनीय संख्या में दर्शक पहुंचे। इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और जीआई-टैग्ड ढोकरा कला, आकर्षक कोसा सिल्क और अन्य पारंपरिक उत्पादों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। संस्कृति, कारीगरी और कहानी कहने के प्रभावी मिश्रण ने इसे IITF 2025 के सबसे यादगार अनुभवों में शामिल किया।

“स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल” राज्य के बढ़ते आत्मविश्वास, नवाचार-आधारित विकास और मज़बूत आर्थिक भविष्य की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, जिसे हर साल इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) आयोजित करती है, देश के सबसे बड़े और विविधतम आयोजनों में से एक है। इसमें राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, पीएसयू, एमएसएमई, शिल्पकारों, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की भागीदारी रहती है, जिससे भारत मंडपम भारत की संस्कृति, व्यापार, नवाचार और उद्यमिता का जीवंत मंच बन जाता है।

स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल
सम्मान ने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत किया है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास मॉडल—दोनों के साथ आगे बढ़ रहा है। पवेलियन की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की प्रगति, उसके उद्योगों और उसके युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रेरक कदम के रूप में देखी जा रही है। यह सम्मान राज्य को और बेहतर प्रदर्शन, नवाचार और जनहितकारी विकास के लिए प्रोत्साहित करता है तथा आने वाले समय में ऐसे और भी गौरवपूर्ण अध्याय लिखे जाने की उम्मीद जगाता है।