नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका हमारे चैनल पर, भारत को दुनिया का एक शक्तिशाली देश माना जाता है भारत की संस्कृति दुनिया से काफी अलग है, भारत में लगभग हर धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं भारत में हुई संस्कृति पाई जाती है जिसके कारण भारत दुनिया का एक अलग ही देश है। आज हम आप लोगों को भारत के बारे में साथ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिसे शायद ही आप लोगों को मालूम होगा।
भारत के बारे में 7 रोचक तथ्य-
1. आपको जानकर गर्व होगा कि भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसने अपने पिछले 10000 साल के इतिहास में किसी भी देश पर हमला नहीं किया है।
2. आप लोगों को शायद ही मालूम होगा कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ किसी भी चीज पर उसका M.R.P लिखा होता है।
3. आपको शायद ही मालूम होगा कि भारतीय रेल, कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से संसार की सबसे बड़ी संस्था है जिसमें लगभग 16 लाख से भी अधिक कर्मचारी काम करते है, जो कई देशों की जनसंख्या से भी ज्यादा है।
4. आपको जानकर गर्व होगा कि भारत में 100 शादियों में से सिर्फ 1 का ही तलाक होता है, जो दुनिया में सबसे कम है।
5. आपको जानकर हैरानी होगी कि 1896 तक केवल भारत ही हीरे का एकमात्र स्त्रोत था और आज भी दुनिया में बिकने वाले हर 12 में से 11 हीरे भारत में काटे और पॉलिश किए जाते है।
6. दुनिया का सबसे बड़ा परिवार जो इकट्ठा रहता है, वह भारत के मिजोरम में है। इस परिवार में 34 पत्नियाँ, 94 बच्चे, 14 बहुएँ, 33 पोतो समेत 180 लोग रहते है।
7. दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भारत के यूपी के लखनऊ में है। इस स्कूल का नाम है ‘सिटी मोंटेसरी स्कूल’ इस स्कूल में हर साल 40 से 50 हजार बच्चे एडमिशन लेते है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में अभी तक 6.8 लाख से ज्यादा कंपनियां बंद हो चुकी हैं. ये जानकारी लोकसभा में दी गई है.लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने ऐसी रजिस्टर्ड कंपनियों की पहचान करने और उन्हें बंद करने के लिए स्पेशल ड्राइव शुरू की है जिन्होंने पिछले दो वित्त वर्षों से अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स या सालाना रिटर्न फाइल नहीं किए हैं.फर्जी कंपनियों के रजिस्ट्रेशन कैंसल करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, ‘कंपनीज ऐक्ट के तहत फर्जी कंपनी टर्म को परिभाषित नहीं किया गया है.आपको बता दें कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के तहत रजिस्टर्ड कुल 18,94,146 कंपनियों में से 36.07 फीसदी कंपनियां बंद हो चुकी हैं.
इन राज्यों में हुई हैं सबसे ज्यादा कंपनियां बंद-आंकड़ों से पता चलता है कि कुल बंद हुईं 6,83,317 कंपनियों में से 1.42 लाख से ज्यादा महाराष्ट्र में थीं. जबकि 1.25 लाख से ज्यादा कंपनियां दिल्ली और 67,000 से ज्यादा पश्चिम बंगाल की थीं. वहीं सिक्किम में कोई भी कंपनी बंद नहीं हुई. सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2016-19 के बीच उत्तर पूर्वी राज्यों में कुल 2,448 कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं.
इन सरकारी कंपनियों को बंद करने का भी दिया आदेश- केंद्र की मोदी सरकार ने घाटे में चल रही 19 बड़ी सरकारी कंपनियों को बंद करने का आदेश दे दिया है. मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इन कंपनियों तुंगभद्रा स्टील प्रोडक्ट्स लिमिटेड, HMT वॉचेज लिमिटेड, HMT चिनार वॉचेज लिमिटेड, HMT बियरिंग्स लिमिटेड, हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड, HMT लिमिटेड की ट्रैक्टर यूनिट और इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड की कोटा यूनिट, केंद्रीय अंतर्देशीय जल परिवहन निगम लिमिटेड, इंडियन ड्रग्स और राजस्थान ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, IOCL-क्रेडा
बायोफ्यूल्स लिमिटेड, क्रेडा HPCL बायोफ्यूल्स लिमिटेड, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह वन और वृक्षारोपण विकास निगम लिमिटेड, भारत वैगन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड, बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड, सीएनए/एन2 ओ 4 प्लांट को छोड़कर हिंदुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड की रसायनी ईकाई में सभी संयंत्रों के संचालन को बंद करना, नेशनल जूट मैन्युफैक्चरर्स कॉर्पो. लिमिटेड, बर्ड्स जूट एंड एक्सपोर्ट लिमिटेड और एसटीसीएल लिमिटेड को बंद करने की मंजूरी दे दी गई है.
हिमाचल प्रदेश को देवभूमि यूं ही नहीं कहते, यहां हर गांव में किसी न किसी घटना से जुड़ा कोई न कोई किस्सा आपको मिल जाएगा। रहस्यमयी प्रदेश हिमाचल में देवी-देवताओं से जुड़े कई ऐसे किस्से-किवदंतियां हैं, जिन्हें सुलझाने में बड़े-बड़े वैज्ञानिक और तीस मार खां खुद उलझ कर रह गए। एक ऐसी ही हैरत में डालने वाली कहानी जुड़ी है जिला बिलासपुर से, जहां इलाके में सूखा पड़ने से यहां के राजा ने कुल देवी के आदेश पर अपनी बहू को दीवार में चिनवा दिया था। माना ये जाता है कि बिलासपुर का ये इलाका आज भी उसी बहु की बलि के कारण पानी पी रहा है।
देवी मां ने दी थी बेटे की बलि देने सलाह दरअसल ये कहानी उस वक्त की है जब हिमाचल में छोटे-छोटे रजवाड़ों का राज हुआ करता था। एक बार औहर इलाके में पानी की कमी हो गई, हर तरफ सूखा ही सूखा पड़ गया। पशु, जानवर और फिर धीरे-धीरे इंसान प्यास से मरने लग गए। राजा को यह देखकर चिंता होने लगी। फिर एक रात राजा के सपने में उनकी कुल देवी ने दर्शन दिए और समस्या का समाधान बताते हुए कहा कि ‘अगर तुम अपने बड़े बेटे की बलि देते हो तो पानी की समस्या दूर हो जाएगी’ इतना कहकर देवी मां सपने से चली गई।
राजा ने बेटे नहीं बहू की दी थी बलि देवी मां के सपने में आने के बाद राजा चिंता में रहने लगा। उस वक्त राजा की बहू रुक्मणी अपने दुधमुहे बेटे के साथ माइके (तरेड़ गांव) में गई हुई थी। उधर पानी की किल्लत बढ़ती जा रही थी। नदियां-नालें सूख रहे थे और इधर बेटे के बलि के बारे में सोचकर राजा की चिंता सातवें आसमान पर थी। राजा को जब कोई उपाय नहीं सूझा तो उसने अपने पंडित के साथ सलाह की। कहा जाता है कि पंडित ने पहले राजा को बिल्ली की बलि देने को कहा लेकिन राजा ने ये कहकर मना कर दिया कि वो अगले सात जन्मों के लिए पाप का भागी हो जाएगा गया। लेकिन इसके बाद पंडित ने बहु की बलि देने कहा तो राजा मान गया। राजा ने जरा सी भी देर न करते हुए रुक्मणी को मायके से बुलावा भेजा। रुक्मणी जैसे ही ससुराल पहुंची तो राजा ने सारी बात उसके सामने साफ कर दी। रुक्मणी आदर्श बहु थी वह ना तो अपने ससुर का कहा मोड़ना चाहती थी और ना ही पति की बलि होते देख सकती थी। लिहाजा उसने अपना बलिदान देने का फैसला ले लिया।
दिन निश्चित हुआ और रुक्मणी को ज़िंदा चिनवा दिया गया रुकमणी ने अपने ससुर की बात मान ली। इसके बाद दिन और जगह निश्चित हुई और राजा ने मिस्त्रियों को बुलाकर बरसंड में बहु की बलि दे दी। कहा जाता है जब रुक्मणी की चिनाई हो रही थी तो उसने मिस्त्रियों से कहा कि ‘कृपया मेरी छाती (स्तनों) को चिनाई से बाहर रखें, क्योंकि मेरा बच्चा छोटा है वह दूध पीने आया करेगा, और अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो उसके जिगर का टुकड़ा मर जाएगा’ । राजा ने बहु की बात मान ली और उसकी छाती (स्तनों) को चिनाई से बाहर रख दिया गया।
रुक्मणी के स्तनों की जगह से पहले निकला था दूध और आज निकलता है पानी बताया जाता है कि जैसे ही रुक्मणी की चिनाई पूरी की गई तो उसकी छाती (स्तनों) से दूध की धारा बहने लगी। लेकिन बाद में यहां से पानी निकलने लगा। धीरे-धीरे रुक्मणी की छाती से निकलने वाले पानी की जगह पर एक कुंड बन गया जिसे आज रुक्मणी कुंड कहा जाता है। आज भी उस स्थान पर वो पत्थर साफ देखे जा सकते हैं। जिनमें रुक्मणी की चिनाई की गई थी।
रुकमणी की बलि के बाद बेटा बन गया था सांप इसके बाद सवाल ये उठता है कि आखिर रुक्मणी के बेटे का क्या हुआ होगा? दरअसल इसके पीछे भी एक मान्यता है कि रुक्मणी का बेटा हर रोज उसके पास दूध पीने जाता था। लेकिन मां को देखने के वियोग में वो भी मर गया। कहा जाता है कि मौत के बाद रुक्मणी का बेटा सांप बन गया जो आज भी कुंड में घूमता है और किसी भाग्यशाली को ही नजर आता है।
कई गावों की प्यास बुझाता है रुक्मणी कुंड, लेकिन रुक्मणी के मायके वाले ये पानी नहीं पीते उस दौर से लेकर इस दौर तक रुक्मणी कुंड में पानी की धारा एक जैसी ही बहती है। रुक्मणी के बलिदान से निकला पानी आज दर्जनों गावों की प्यास बुझा रहा है। इतना ही नहीं इस कुंड से IPH विभाग भी पानी उठा रहा है। लेकिन बताया जाता है कि इस पानी को रुक्मणी के मायके (तरेड़ गांव) वाले नहीं पीते। क्योंकि उनका मानना है कि ये पानी उनकी बेटी की छाती से निकला है। तरेड़ गांव के लिए IPH विभाग अलग से सप्लाई करता है।
कुंड के पास बना हुआ है रुक्मणी का मंदिर, कुंड की गहराई के बारे में कोई नहीं जानता रुक्मणी को याद रखने के लिए आज रुक्मणी कुंड के पास उनका मंदिर बना हुआ है। रुक्मणी कुंड में आने वाला हर शख्स रुक्मणी का आशीर्वाद लेता है और कुंड के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाता है। महिलाओं और पुरुषों के नहाने के लिए स्नानागार बने हुए हैं। कई लोग इस कुंड में तैराकी का भी आनंद लेते हैं। कहा जाता है यहां नहाने से चर्म रोगों में लाभ मिलता है। बता दें कि इस कुंड की गहराई कितनी है ये आज तक कोई नहीं माप पाया है। इस कुंड में कई तैराक भी नहाते हैं लेकिन कुंड की गहराई तक पहुंचने में वो भी नाकाम रहे।
हर साल बैशाखी पर लगता है मेला बैसाखी पर हर साल यहां मेला लगता है और छिंज का आयोजन भी होता है। लोग यहां बैसाखी या अन्य त्यौहारों के समय नहाने आते हैं। यहां रूकमणी देवी की पूजा के लिए एक छोटा सा मंदिर बना हुआ है। वहीं सामने ही एक गुफा है कहा जाता है कि यह गुफा पहाड़ी की दूसरी तरफ गेहड़वीं से कुछ ही दूरी पर स्थित गुगाजी मंदिर तक जाती है।
दुर्गम इलाके में पहाड़ियों के बीच है रुक्मणी कुंड रक्मणी कुंड दुर्गम इलाके में पहाड़ियों के बीच स्थित है। जो हिमाचल के बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को जरूर मनमोहक लगेगा। यहां के पहाड़, जंगल से गुजरता रास्ता और हरे भरे पेड़ किसी का भी मन मोह लेते हैं।
रुक्मणी कुंड तक कैसे पहुंचा जा सकता है ? रुक्मणी कुंड बिलासपुर जिले के सलासी गांव में है। यहां तक पहुंचने के लिए कोई सीधी बस नहीं है। यहां आप अपने वाहन या टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं। यहां पहुंचने के लिए बिलासपुर बस स्टैंड से भगेड़ आना होगा और यहां से आप औहर या कल्लर जो कि भगेड़-ऋषिकेश रोड पर है, उतरकर पैदल चढ़ाई करके पहुंच सकते हैं। इसके अलावा दूसरा रास्ता औहर-गेहड़वी संपर्क सड़क पर 2 किलोमीटर आकर एक कच्ची सड़क है जहां से आप पैदल या अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं।
पंजाबी गानों की हो चुकी है शूटिंग बता दें कि रुक्मणी कुंड भले ही छोटा सा नजारा है लेकिन यह आज प्रदेश स्तर तक अपनी पहचान बना चुका है। रुक्मणी के बलिदान को देखने दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। यहां पंजाबी गाने ‘Red Rose’ की भी शूटिंग हो चुकी है।
नोट- आपको यह जानकारी पुरानी मान्यताओं और बुजुर्गों के कहे अनुसार उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए किसी को भी भ्रमित करना या अंधविश्वास फैलाना हमारा मकसद नहीं है।
भविष्य में क्या होगा? इसके प्रति जिज्ञासा बेहद आम है. लेकिन दुनिया में जितनी जिज्ञासा नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों ने जगाई है उतनी शायद ही किसी और भविष्यवेत्ता की भविष्यवाणियों ने पैदा की हो.
नास्त्रेदमस की मौत 453 साल पहले 2 जुलाई 1566 को हुई थी. लेकिन उनकी भविष्यवाणियों पर आज भी शोध होते हैं और चर्चा होती है. आज भी 450 साल पहले पहेलियों में लिखी गई उनकी भविष्यवाणियों को लोग मौजूदा घटनाओं से जोड़कर देखते हैं. फिर चाहे वह नरेंद्र मोदी का दोबारा प्रधानमंत्री बनना हो या फिर दूसरे भविष्यवेत्ताओं की तरह 2019 में विनाश के संकेत की भविष्यवाणी.
कौन थे नास्त्रेदमस?
सैकड़ों साल बाद की भविष्यवाणी करने के लिए मशहूर नास्त्रेदमस का जन्म 14 दिसम्बर 1503 को फ्रांस के एक छोटे से गांव सेंट रेमी में हुआ था. उनका नाम मिशेल दि नास्त्रेदमस था. बचपन से ही उनकी अध्ययन में खास दिलचस्पी रही. उन्होंने लैटिन, यूनानी और हीब्रू भाषाओं के अलावा गणित, शरीर विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र जैसे गूढ़ विषयों पर विशेष महारत हासिल कर ली थी.
नास्त्रेदमस ने किशोरावस्था से ही भविष्यवाणियां करना शुरू कर दी थीं. ज्योतिष में उनकी बढ़ती दिलचस्पी ने माता-पिता को चिंता में डाल दिया क्योंकि उस समय कट्टरपंथी ईसाई ज्योतिष विद्या को अच्छी नजर से नहीं देखते थे. ज्योतिष से उनका ध्यान हटाने के लिए उन्हें मेडिकल साइंस पढ़ने मांट पेलियर भेज दिया गया.
कहते हैं कि डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान उनके शहर में प्लेग की बीमारी फैली, जिसकी वजह से उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी और बीमारों की देखभाल करने लगे. बाद में उन्होंने अधूरी पढ़ाई पूरी कर डिग्री हासिल की. कुछ साल बाद एक बार फिर प्लेग की महामारी फैली, जिसमें उनकी पत्नी और बच्चे की मौत हो गई. नास्त्रेदमस को इस झटके से उबरने में लगभग 10 साल लग गए. इस दौरान वह फ्रांस, इटली और स्पेन में शहर दर शहर भटकते रहे.ऐसा कहा जाता है कि- एक बार नास्त्रेदमस अपने मित्र के साथ इटली की सड़कों पर टहल रहे थे, उन्होनें भीड़ में एक युवक को देखा और जब वह युवक पास आया तो उन्होंने उस युवक को आदर से सिर झुकाकर नमस्कार किया. मित्र ने हैरान होते हुए इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति आगे जाकर पोप का आसन ग्रहण करेगा. वास्तव में वह व्यक्ति फेलिस पेरेती था, जिन्हें 1585 में पोप चुना गया.
नास्त्रेदमस के बारे में ऐसी कई कहानियां हैं, लेकिन इनमें से किसी के लिए कोई सबूत नहीं है.
पहेलियों में करते थे भविष्यवाणी
ऐसा कहा जाता है कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों के बारे में जब फ्रांस की महारानी कैथरीन को पता चला, तो उन्होंने अपने बच्चों का भविष्य जानने के लिए नास्त्रेदमस को बुलाया. लेकिन नास्त्रेदमस ज्योतिष शास्त्र से यह जान चुके थे कि महारानी के दोनों बच्चे अल्पायु में ही गुजर जाएंगे. ऐसी स्थिति में वह सच कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. तब उन्होंने अपनी बात को पहेलियों के जरिए पेश किया. इस तरह वह अपनी बात भी कह गए और महारानी के मन को कोई चोट भी नहीं पहुंची. तभी से नास्त्रेदमस ने यह तय कर लिया कि वे अपनी भविष्यवाणियां इसी तरह पहेलियों में ही जाहिर करेंगें.
1550 के बाद नास्त्रेदमस ने डॉक्टरी के पेशे को छोड़ अपना पूरा ध्यान ज्योतिष विद्या की साधना में लगा दिया. उसी साल से अन्होंने अपना वार्षिक पंचांग भी निकालना शुरू कर दिया. उसमें ग्रहों की स्थिति, मौसम और फसलों आदि के बारे में पूर्वानुमान होते थे. कहा जाता है कि उनमें से ज्यादातर भविष्यवाणियां सही साबित हुईं.
नास्त्रेदमस ने 1555 में अपने पहेलियों के जरिए साल 2019 में किसी बड़े वैश्विक संघर्ष का इशारा कर दिया था. नास्त्रेदमस ने लिखा था-
“In the city of God, there will be a great thunder Two brothers torn apart by Chaos while the fortress endures The great leader will succumb The third big war will begin when the big city is burning”
नास्त्रेदमस ने 1555 में भविष्यवाणियों से संबंधित अपने पहले ग्रंथ ‘सेंचुरी’ का पहला भाग पूरा किया, जो सबसे पहले फ्रेंच और बाद में अंग्रेजी, जर्मन, इटालवी, रोमन, ग्रीक भाषाओं में प्रकाशित हुआ.नास्त्रेदमस की ‘सेंचुरीज’ किताब ने उन्हें यूरोप के साथ-साथ पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया. उसके बाद उन्होंने आने वाले सैकड़ों सालों के पंचांग बनाए. ‘सेंचुरीज’ में कुल मिलाकर दस सेंचुरी हैं. यहां सेंचुरी का मतलब शताब्दी नहीं है, बल्कि 100 पहेलियों के संकलन को एक सेंचुरी कहा गया है. किसी एक सेंचुरी में पूरी 100 पहेलियां न होने के कारण कुल पहेलियों की संख्या 943 है.
इस किताब के कुछ व्याख्याकारों का मानना है कि इस किताब के कई पहेलियों में प्रथम विश्व युद्ध, नेपोलियन, हिटलर और कैनेडी आदि से संबंधित घटनाएं स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं. व्याख्याकारों ने नास्त्रेदमस के कई पहेलियों में तीसरे विश्वयुद्ध का पूर्वानुमान और दुनिया के विनाश के संकेत को भी समझ लेने का दावा किया है.हालांकि, ज्यादातर शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़े लोगों का कहना है कि ये व्याख्याएं गलत अनुवाद या गलतफहमी का परिणाम हैं और कुछ गलतियां तो जानबूझकर भी की गईं हैं.
वो भविष्यवाणियां जो ‘सच’ हुईं
बता दें, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को मानने वालों ने ‘सेंचुरीज’ में दर्ज भविष्यवाणियों का भावार्थ किसी घटना के होने के बाद उससे जोड़कर देखने की कोशिश की है.
मिसाल के तौर पर एक पहेली है- ‘इटली के नजदीक एक राजा पैदा होगा, जिससे राज्य को काफी नुकसान होगा, वो किसी के साथ रिश्ते (राजनीतिक) बनाएगा, तो वो राजा कम और कसाई ज्यादा नजर आएगा.’ नास्त्रेदमस ने उसका नाम पोउ-ने-लोरोन बताया है. अक्षरों का क्रम बदलकर देखने में यह नेपोलियन जैसा बनता हुआ दिखता है.
उसने आगे लिखा, ‘छोटे बालों वाला सत्ता हथिया लेगा, उस समुद्री शहर में जिस पर दुश्मनों का कब्जा होगा, वो अपने दुश्मनों को निकाल बाहर करेगा, 14 सालों तक शासन करेगा.’ आश्चर्यजनक रूप से ये बातें नेपोलियन की जिंदगी से मिलती हैं.
इसी प्रकार, कुछ पहेलियों को हिटलर और सत्रहवीं सदी में लगी लंदन की आग से जोड़कर देखा गया है. उसने कहा था कि दुनिया 3 एंटी-क्राइस्ट यानी ईसाइयत विरोधी लोगों से आतंकित रहेगी. पहले दो तो नेपोलियन और हिटलर माने गए हैं जबकि तीसरे के बारे में अब भी कयास ही लगाए जा रहे हैं. कुछ उसे मध्य एशिया में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन या सद्दाम हुसैन मानते हैं, कुछ कहते हैं कि वह चीन या मंगोलिया से आएगा.
भारत के बारे में क्या भविष्यवाणियां कीं?
10वीं सेंचुरी की 75वीं एक पहेली है – ‘काफी इंतजार के बाद भी वो यूरोप नहीं आएगा, वो एशिया में अवतरित होगा, ईश्वर का अवतार होगा, पूर्व के सभी राजा उसकी सत्ता स्वीकारेंगे’. नास्त्रेदमस के पहेलियों की व्याख्या करने वाले इसे भारत से जोड़कर देखते हैं.
सेंचुरी 10 की 96वीं पहेली में कहा गया है – ‘सागर के नाम वाले धर्म की जीत होगी, अदुलउनकातिफ जाति के लड़के से, जिद्दी और रोने वाली जाति डरेगी, दोनों ही अलेफ और अलेफ के हाथों घायल होंगे.’
सागर के नामवाला धर्म तो हिंदू ही है, तो क्या इस पहेली में नास्त्रेदमस ने हिंदू और ईसाई धर्म के आपस में लड़ने की बात कही है या किसी अन्य धर्म के हाथों हिंदू धर्म का प्रताड़ित होना बताया है और आखिर में भारत की जीत बताई है?
पहली सेंचुरी की 50वीं पहेली में जिक्र है- ‘वो जमीन जहां तीन समुद्रों के पानी मिलते हैं वहां एक शख्स पैदा होगा, बृहस्पतिवार (गुरुवार) जिसकी पूजा का दिन होगा, जमीन और समुद्र में उसकी ख्याति, शासन और ताकत बढ़ेगी. वो दुनिया को मुश्किल में डालेगा.’
कइयों ने इसे दक्षिण भारत से जोड़कर देखा है. इसके समर्थन में वे यह भी कहते हैं कि सिर्फ हिंदू धर्म में ही गुरुवार पूजा जाता है. तो क्या यह मान लिया जाए कि दुनिया का अगला शासक दक्षिण भारत में पैदा होगा?
नास्त्रेदमस ने की थी अपनी मौत की भविष्यवाणी
ऐसा कहा जाता है कि नास्त्रेदमस को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था. इसीलिए उन्होंने 17 जून 1566 को अपनी वसीयत तैयार करवाई. एक जुलाई को पादरी को बुलाकर उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के निर्देश दिए. इसके बाद 2 जुलाई 1566 को इस मशहूर भविष्यवक्ता का निधन हो गया.
एक व्याख्या के अनुसार, “नास्त्रेदमस ने अपने संबंध मे जो कुछ गिनी-चुनी भविष्यवाणियां की थी, उनमें से एक यह भी थी कि उनकी मौत के 225 साल बाद कुछ समाजविरोधी तत्व उनकी कब्र खोदेंगे और उनके अवशेषों को निकालने की कोशिश करेंगे, लेकिन तुरंत ही उनकी मौत हो जाएगी. वास्तव मे ऐसी ही हुआ. फ्रांसिसी क्रांति के बाद 1791 में तीन लोगों ने नास्त्रेदमस की कब्र को खोदा, जिनकी तुरंत मौत हो गयी.”
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश की वजह से बेहाल है। मुंबई और आसपास के इलाकों में बारिश आफत बनकर टूटा है। भारी बारिश की वजह से ऐसा लग रहा है कि मायानगरी में जिंदगी ठहर सी गई है। रेल ट्रैक हो या सड़क या फिर एयरपोर्ट रनवे हर जगह पानी भर गया है और लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोकल ट्रेनों को कैंसिल किया गया है। मुंबई के किंग सर्किल इलाके में भरा पानी। लोगों के घुटनों तक पानी भर गया है। सड़कों पर पानी भरने की वजह से कई लोगों की बाइकों में भी दिक्कत आई। भारी बारिश की वजह से कई जगहों पर यातायात रोक दिया गया है। सड़कों पर वाहनों की लंबी लंबी लाइनें लगी हुई हैं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ है।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र में देरी से पहुंचने के बावजूद मानसून ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से भारी बारिश जारी है। BMC कमिश्नर के मुताबिक बीते दो दिनों में ही 540 मिलीमीटर बारिश हुई है जो पिछले 10 सालों में सबसे ज़्यादा है। बारिश का पानी सड़कों पर भर गया है, जिससे मुंबई की रफ़्तार थम सी गई है। कई जगह रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया है, जिससे ट्रेनें धीरे चल रही हैं और कई रद्द कर दी गईं हैं। भारी बारिश का असर उड़ानों पर भी पड़ा है। मौसम विभाग ने अभी 5 जुलाई तक ऐसे ही बारिश होने की संभावना जताई है। बारिश से बिगड़ते हालातों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने आज सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है।
पुणे और मुंबई में दो अलग-अलग जगह बरसात की वजह से दीवारें गिरने का मामला सामने आया है। दोनों की जगह से अबतक कुल 22 लोगों की मौत हो चुकी है। बीती रात मूसलाधार बारिश मुंबई पर मौत बनकर बरसी। बारिश की वजह से मुंबई के मलाड और कल्याण में दीवार गिर गई। मलाड में दीवार गिरने से 14 और कल्याण में एक मासूम सहित तीन लोगों की मौत हो गई। कल्याण में एक स्कूल की दीवार दो घरों पर गिरी है। वहीं दूसरी ओर पुणे में सिंहगढ़ कॉलेज की दीवार गिरने से कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल बताए जा रहे हैं। मलाड इलाके में रातभर मूसलाधार बारिश के कारण एक परिसर की दीवार ढहने से 14 लोगों की मौत हो गई और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए। एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि घटना देर रात करीब दो बजे हुई, जब पूर्वी मलाड इलाके के पिम्परीपाड़ा स्थित एक परिसर की दीवार ढह गई और पास की झुग्गियों में रहने वाले लोग उसकी चपेट में आ गए। दीवार गिरने से हुए लोगों की मौत पर महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने गहरा शोक व्यक्त किया है। साथ ही सीएम ने मरने वालों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपए के मुआवजे का भी एलान किया है। इसके अलावा सीएम फड़णवीस ने लोगों से एक अपील भी की है जिसमें उन्होंने कहा है कि लोग इस बारिश के मौसम में घर में ही रहें। जरुरी काम हो तभी घर से बाहर निकले।
धमतरी के नगरी से 30 किमी दूर रतावा गांव में वन विभाग की टीम ने छापा मारकर ग्रामीण के घर से कई जंगली जानवर बरामद किए. इनमें हिरण के 2 बच्चे कोटरी, 2 सियार, 2 अजगर और 6 तोते हैं.
हंसराज देव नामक इस व्यक्ति ने अपने बाड़े में बड़े-बड़े पिंजरे बनवाकर इन्हें रखा था. पूछताछ में हंसराज ने दावा किया कि वह निजी चिड़ियाघर संचालित करता है. उसने वन्य जीव संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति ग्राम रतावा के नाम से संचालित चिड़ियाघर के दस्तावेज भी दिखाए. साथ ही बीमार पशुओं के इलाज की भी बात कही. वन विभाग की टीम ने पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया है. कुछ दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिसकी जांच चल रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. बिरगुडी रेंजर सोनेसिंह सोरी ने बताया कि 2 साल पहले भी उसके पास से बड़ी संख्या में वन्य प्राणी जब्त हुए थे.
वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी वन्य प्राणी को कैद में रखने या उन्हें मार डालने पर दो से सात साल तक की सजा हो सकती है. वाइल्ड लाइफ एक्ट 1991 के अनुसार शेर, चीता, भालू, हिरण, कोटरी और सांप को शेड्यूल-1 में रखा गया है. यानी सबसे महत्वपूर्ण वन्य प्राणियों की सूची में इनका नाम है. ऐसे वन्य प्राणियों को कोई भी संस्था या व्यक्ति अपने कब्जे में नहीं रख सकता. ऐसा करते पकड़े जाने पर सीधे गिरफ्तार कर कोर्ट में केस फाइल करने का नियम है.
वन विभाग के अफसरों के मुताबिक कोई भी प्राइवेट व्यक्ति या संस्था निजी जू नहीं बना सकता है. राज्य सरकारों को भी सेंट्रल जू अथॉरिटी से जू खोलने की अनुमति लेनी पड़ती है. सेंट्रल जू अथॉरिटी ने कई कड़े नियम बनाए हैं. उन नियमों को पूरा करने के बाद ही सरकारों को जू खोलने की अनुमति दी जाती है.
डीएफओ अमिताभ वाजपेयी ने बताया कि को मुखबिर से सूचना मिली कि रतावा के हंसराज देव ने पिंजरे में कैद कर वन्य प्राणियों को रखा है. सुबह 7 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. यहां अहाते में रखे पिंजरे में सियार, कोटरी और तोते कैद मिले. एक बोरी में अजगर भी रखा था.
छत्तीसगढ़ में बेरोजगार युवाओं के लिए अच्छी खबर है. छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में अब नौकरी के बड़े अवसर मिलेंगे. विश्वविद्यालयों में दिसंबर तक यहां कई पदों पर भर्ती की तैयारी सरकार रही है. बीते सोमवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कुलपतियों के साथ बैठक की. बैठक में कुलपतियों ने शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी का हवाला दिया, जिसके बाद अब भर्ती का निर्णय लिया गया है. विश्वविद्यालयों में भर्ती के पिटारे की इस खबर को मंगलवार को छत्तीसगढ़ के मुख्य अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है.
छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में नौकरी का पिटारा खुलेगा. उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने मंत्रालय में सोमवार को सभी विश्वविद्यालय के कुलपति, कुल सचिवों की बैठक ली. इसमें मंत्री ने कुलपतियों से सबसे बड़ी समस्या पूछा, तो सभी कुलपतियों ने प्राध्यापकों की कमी बताई. इस पर मंत्री ने तीन दिन में रिक्त पदों की सूची भेजने का निर्देश दिया. मंत्री ने कहा कि वित्त विभाग से अनुमति लेकर दिसंबर तक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस बार प्राध्यापकों की भर्ती व्यापमं के माध्यम से होगी.
एक जैसी होगी एडमिशन फीस बैठक में निर्णय लिया गया कि अगले शिक्षा सत्र से सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में एक जैसा प्रवेश शुल्क होगा. इसमें ऑनलाईन प्रवेश प्रक्रिया में सुधार के लिए अध्ययन समिति बनाने का निर्णय लिया गया. करीब छह घंटे चली बैठक में पटेल ने कहा कि अगले शिक्षा सत्र से विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणाम 15 जून तक घोषित किए जाए. उन्होंने कहा कि आकादमिक कैलेण्डर का अनिवार्य रूप से पालन होना चाहिए. उन्होंने कुलपतियों को परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए. अगले शिक्षा सत्र से सभी विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा के लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा. विश्वविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों में एक तिहाई पद के लिए वित्त विभाग से अनुमति ली जाएगी.
केन्द्र सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालते ही मोहन मरकाम ने मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान कर दिया है. उन्होंने मोदी सरकार पर छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है. मरकाम के नेतृत्व में कांग्रेस का पहला आंदोलन केरोसिन की कटौती के विरोध में होगा। सात जुलाई के बाद कांग्रेस हर जिला मुख्यालय में मोदी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेगी. सोमवार को मरकाम ने राजीव भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि मोदी सरकार ने पहले दाल-भात केंद्रों का चावल आवंटन बंद किया. शक्कर कारखानों से शक्कर का उठान बंद किया. अब करोसिन आवंटन में छत्तीसगढ़ का कोटा कम करके गरीबों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है. इस खबर को नईदुनिया, दैनिक भास्कर, पत्रिका सहित अन्य अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित की है.
जूडा की हड़ताल खत्म
रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार रात 8.30 बजे हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी. डेढ़ घंटे के भीतर रात 10 बजे जूडो ने अपने-अपने शेड्यूल के अनुसार ड्यूटी ज्वाइन कर ली. उन्होंने मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. आभा सिंह को बाकायदा लिखित में हड़ताल समाप्त करने की सूचना दी. जूडा की मांगें तो पूरी नहीं हुई लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अफसरों के माध्यम से संदेश भेजकर उनकी सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया. उसके बाद ही हड़ताल समाप्ति का फैसला लिया गया. इस खबर को भी सभी मुख्य अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
दुनिया में आज भी कई ऐसी रहस्यमयी चीजें मौजूद हैं, जिनकी सच्चाई शायद ही किसी को पता हों। आज हम कुछ ऐसी ही रहस्यमयी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका राज आज तक नहीं खुला। इन रहस्यमयी चीजों के बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
केन्या के रुडोल्फ लेक के पास बने इस आइलैंड को ‘नो रिटर्न’ आइलैंड कहते हैं। अब इस आइलैंड पर कोई नहीं रहता। कहा जाता है कि कई सालों पहले यहां लोग रहा करते थे, लेकिन एक दिन वो सब अचानक गायब हो गए। उनका पता आज तक नहीं चल पाया। कहते हैं कि आज भी जो इस आइलैंड पर जाता है, वह कभी लौटकर नहीं आता।
इस व्यक्ति का नाम ली चिंग युएन, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह 256 साल की उम्र तक जिंदा था। चीन के रहने वाले ली चिंग दवाइयों के विद्वान थे और इसके लिए उन्हें 100 साल की उम्र में सरकार की तरफ से इनाम भी मिला था। कहते हैं कि 200 साल की उम्र में भी वह विश्वविद्यालय में लेक्चर देने जाया करते थे। उन्होंने 24 शादियां की थीं, लेकिन उनकी उम्र आज भी रहस्य बनी हुई है।
इन पत्थरों की खोज लगभग 1930 के दशक में की गई थी। 16 टन वजनी इन पत्थरों को हाथ से बनाया गया है। सबसे छोटे पत्थर की आकृति किसी टेनिस बॉल जैसी है। घने जंगलों में इस तरह की आकृति बनाना लगभग असंभव है। इन पत्थरों को किसने बनाया, क्यों बनाया, यह आज तक रहस्य ही है।
इस तरह की आकृति दुनियाभर में कई अलग-अलग जगहों पर पायी गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह एलियंस का काम हो सकता है, तो किसी को लगता है कि यह चक्रवात जैसे किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से बने हैं। लेकिन इतनी सुंदर आकृति को आखिर किसने बनाया, यह रहस्य बरकरार है।
स्कॉटलैंड में एक 200 मीटर गहराई वाली झील में यह रहस्यमयी जीव दिखा था। साल 1934 में लंदन के एक डॉक्टर ने इस अजीबोगरीब जीव की तस्वीर अपने कैमरे में कैद की थी। यह जीव इस तरह का दिख रहा था, जो आज से लाखों साल पहले धरती से विलुप्त हो चुके हैं।
दूसरी बार जनादेश पानेवाली नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय कानून मंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि उनका मंत्रालय एक ‘डाकघर’ नहीं होगा.
संभवतः वे सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा उच्च न्यायापालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में सिफारिशों के मिलने के बाद मंत्रालय द्वारा एक महत्वपूर्ण हिस्सेदार के तौर पर निभाई जानेवाली भूमिका की ओर इशारा कर रहे थे.
प्रसाद के बयान का एक अर्थ यह लगाया जा सकता है कि उनका मंत्रालय कॉलेजियम की पहली पसंद को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं करेगा और हर नाम की जांच करेगा. लेकिन इसे इस दावे के तौर पर भी लिया जा सकता है कि उनका मंत्रालय पसंद न आनेवाली सिफारिशों के लिए कूड़ेदान का काम करेगा.
बॉम्बे हाइकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीश जस्टिस अकील अब्दुलहमीद कुरैशी की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति करने की कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार जिस तरह से कुंडली मार कर बैठी है, वह इस बात का खतरनाक संकेत बनकर सामने आया है कि अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार कॉलेजियम के साथ कैसा सुलूक करनेवाली है.
मालूम हो कि 2010 में जस्टिस कुरैशी ने वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था.
10 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमन्ना की सदस्यता वाले सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस कुरैशी को मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति देने की सिफारिश की.
वर्तमान में वे तबादले के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में काम कर रहे हैं. कॉलेजियम कुरैशी को पदोन्नति देने का इच्छुक था, क्योंकि मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश एसके सेठ 9 जून को सेवानिवृत्त होनेवाले थे. कॉलेजियम ने जस्टिस कुरैशी को हर तरह से जस्टिस एसके सेठ के बाद उनकी कुर्सी पर बैठने के योग्य पाया.
जस्टिस कुरैशी के साथ, कॉलेजियम ने पदोन्नति के लिए तीन और नामों की सिफारिश की. जस्टिस रामासुब्रमण्यम और आरएस चौहान को क्रमशः हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना हाइकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
मद्रास हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश रामासुब्रमण्यम तबादला होकर बाद तेलंगाना उच्च न्यायालय में सेवाएं दे रहे थे. उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद उनकी जगह खाली होने पर पदोन्नति देकर वहां का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था.
राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस चौहान पहले ही तेलंगाना उच्च न्यायायल के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे थे.
तीसरे न्यायाधीश जस्टिस डीएन पटेल, जो गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठ जूनियर जज थे और तबादला होकर होकर झारखंड उच्च न्यायालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे, उन्हें जस्टिस राजेंद्र मेनन की सेवानिवृत्ति के बाद 22 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
कॉलेजियम की सिफारिश मानने से इनकार
लेकिन, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मामले में केंद्र सरकार ने जस्टिस कुरैशी को पदोन्नति देने की सिफारिश को मानने से इनकार कर दिया और 10 जून से जस्टिस रविशंकर झा की नियुक्ति कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर करने की अधिसूचना जारी कर दी.
केंद्र द्वारा 9 जून को जस्टिस सेठ की सेवानिवृत्ति से पहले जस्टिस कुरैशी की नियुक्ति नहीं किए जाने से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जूनियर जज जस्टिस झा इस तरह से पदोन्नति पाने के हकदार हो गए.
हालांकि, जस्टिस कुरैशी मार्च, 2022 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद एक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनकी पदोन्नति नहीं किए जाने से उनके करिअर को गलत तरीके से नुकसान पहुंचेगा.
मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) जिसमें नेशनल जुडिशल अपॉइंटमेंट कमीशन मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद अब तक संशोधन नहीं किया गया है- में यह व्यवस्था दी गई है कि अगर कॉलेजियम के फैसले को केंद्र द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाए जाने के बाद अगर दोहराया जाता है, तो यह केंद्र के लिए बाध्यकारी होगा.
लेकिन क्या केंद्र के पास सिफारिशों को, अगर वे उसके मनमुताबिक नहीं हैं, कॉलेजियम के पास पुनर्विचार के लिए लौटाए बगैर, उस पर कुंडली मारकर बैठने का विकल्प है?
एमओपी में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया समय रहते शुरू की जानी चाहिए ताकि यह होनेवाली रिक्ति के कम से कम एक महीने पहले पूरी हो सके.
एमओपी में कहा गया है कि भारत का मुख्य न्यायाधीश यह सुनिश्चित करेगा कि जब एक मुख्य न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में तबादला किया जाता है, तब उस कुर्सी पर उसके उत्तराधिकारी की नियुक्ति भी साथ-साथ की जानी चाहिए और सामान्य स्थिति में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति एक महीने से ज्यादा के समय के लिए नहीं की जानी चाहिए.
संविधान का अनुच्छेद 223, जो कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से संबंधित है, कहता है कि जब किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी खाली है या जब कोई ऐसा मुख्य न्यायाधीश, अनुपस्थिति के कारण या किसी अन्य कारण से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने की स्थिति में नहीं है, तब उसकी जिम्मेदारियों का निर्वाह न्यायालय के किसी ऐसे न्यायाधीश द्वारा किया जाएगा, जिसे राष्ट्रपति द्वारा इस उद्देश्य से नियुक्त किया जाएगा.
जैसा कि समझ में आता है केंद्र ने इस अनुच्छेद के तहत ही जस्टिस झा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) के तौर पर नियुक्त किया है.
लेकिन इस नियुक्ति पर निश्चित तौर पर सवाल उठाया जा सकता है, क्योंकि जस्टिस कुरैशी को मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति देने की सिफारिश 10 मई को ही कर दी गई थी और 10 जून को रिक्ति की स्थिति सिर्फ इसलिए पैदा हुई क्योंकि केंद्र उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं की.
दिलचस्प है कि एमओपी में अनुच्छेद 223 के तहत एसीजे की नियुक्ति की कल्पना सिर्फ उस स्थिति में की गई है जब पदासीन मुख्य न्यायाधीश द्वारा उसके छुट्टी पर जाने या मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह न कर पाने की स्थिति की सूचना दी जाए.
एमओपी का कहना है कि यह सूचना सभी संबंधित पदाधिकारियों को समय रहते की जानी चाहिए ताकि एसीजे की नियुक्ति की व्यवस्था की जा सके.
अमित शाह कनेक्शन
जस्टिस कुरैशी के मामले में सिर्फ केंद्र द्वारा एमओपी में तय की गई समयसीमा का केंद्र द्वारा पालन न किया जाना ही चिंता का विषय नहीं है. गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (जीएचएए) ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को ‘कार्यपालिका का गैरज़रूरी हस्तक्षेप करार दिया है.’
एक असाधारण जनरल मीटिंग में जीएचएए ने मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस कुरैशी की नियुक्ति की अधिसूचना जारी करने के लिए केंद्रीय कानून मंत्री से ‘मिलकर दरख्वास्त करने’ का प्रस्ताव पारित किया.
जस्टिस कुरैशी ने 14 नवंबर, 2018 को बॉम्बे हाईकोर्ट में कार्यभार संभाला था, जब केंद्र ने गुजरात उच्च न्यायाल का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने के उनके दावे को उनकी वरिष्ठता के बावजूद नजरअंदाज कर दिया था.
गुजरात उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुभाष रेड्डी को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति दिए जाने के बाद यह उम्मीद थी कि उनके बाद गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस कुरैशी को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति दी जाएगी. लेकिन इसकी जगह उनका तबादला बॉम्बे हाईकोर्ट में कर दिया गया और जस्टिस कुरैशी के बाद वरिष्ठतम जज एएस दवे को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया गया.
केंद्र के इस कदम पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा नाराजगी प्रकट किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने आनन-फानन में इस अधिसूचना को रद्द कर दिया और जस्टिस कुरैशी को गुजरात उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त कर दिया. मगर दो सप्ताह के भीतर ही उनका तबादला बॉम्बे हाईकोर्ट में कर दिया गया.
जीएचसीएए के अध्यक्ष यतीन ओज़ा ने एक लेख में यह याद दिलाया कि जस्टिस कुरैशी ने एक बार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भूमिका के कारण अमित शाह को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था.
2011 में जस्टिस कुरैशी ने जस्टिर आरए मेहता को गुजरात का लोकायुक्त नियुक्त करने के तत्कालीन राज्यपाल के फैसले को सही ठहराया था, जिसे राज्य की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा चुनौती दी गई थी. ओज़ा 2010 में शाह के वकील थे और उन्हें कुरैशी द्वारा शाह को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजने के फैसले में कुछ भी गलत नहीं लगा था.
ओज़ा का आरोप है कि केंद्र द्वारा जस्टिस कुरैशी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पदोन्नति देने के मामले में फैसले को लटकाना बदले की भावना से की गई कार्रवाई जैसा है.
इसलिए अहम सवाल यह है कि अगर केंद्र सरकार कॉलेजयम की सिफारिश को पुनर्विचार के लिए वापस नहीं लौटाती है, तो क्या कॉलेजियम अपनी शक्ति दिखाते हुए अपनी सिफारिशों पर केंद्र की निष्क्रियता पर सवाल उठा सकता है?
रूस के सोची में शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन के मुख्य न्यायाधीशों की बैठक में दिए गए अपने हालिया भाषण में, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने एक संस्था के रूप में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए मजबूत और स्वतंत्र न्यायाधीशों के महत्व को रेखांकित किया. क्या संस्था के प्रमुख के तौर पर अपनी बातों पर अमल करेंगे?
छत्तीसगढ़ में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है. बंगाल की खाड़ी में बने एक सिस्टम के कारण सूबे के कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है. रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में देर रात से ही बारिश हो रही है. जानकारी के मुताबिक अगले दो दिनों में मानसून पूरे छत्तीसगढ़ को तरबतर कर सकता है. मौसम विभाग ने भी प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी तो कहीं अतिभारी बारिश की चेतावनी दी है.
12 घंटों से लगातार हो रही बारिश, अलर्ट जारी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है. जानकारी के मुताबिक पिछले 12 घंटे से कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है. गर्मी और उसम से परेशान लोगों को बारिश से कुछ राहत जरूर मिली है. वहीं बारिश को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी भी जारी कर दी है. छत्तीसगढ़ में भारी बारिश को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है. पिछले 12 घंटे से प्रदेश के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश हो रही है. राजधानी रायपुर में भी सोमवार रात से बारिश हो रही है. सुबह से आसमान में काले बादल छाए हुए है और लगातार बारिश हो रही है.
आंकड़ों पर एक नजर
रायगढ़ जिले के पुसौर में 94.1 मिमी. कोंडागांव जिले में 99.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है. वहीं राजधानी रायपुर के आरंग में 60 मिमी बारिश, बलौदाबाजार के कसडोल में 74 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. महासमुन्द के बसना में 89 मिमी, सराईपाली में 66.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. वहीं कबीरधाम में 37.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है.