राजधानी में एक्सप्रेस-वे का सोमवार को उद्घाटन करने पहुचे भाजपाइयों और पुलिस के बीच झड़प हो गई है। भाजपा सरकार के समय से ही राजधानी के बीचो-बीच बन रहे एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने रायपुर उत्तर के पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी भाजपा कार्यकर्ताओ के साथ पहुंचे थे। लेकिन राजधानी पुलिस ने भाजपाइयों को एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में ही रोक लिया। इसकी वजह से कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। बता दें की भाजपा के पूर्व विधायक पिछले कई दिनों से प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर एक्सप्रेस-वे बन जाने के बाद भी उद्घाटन नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है की कांग्रेस सरकार पहले ही स्काई वाक का काम रूकवा कर आधे अधूरे स्थिति में रोक लगा दी है। लेकिन एक्सप्रेस वे तो पूरी तरह से बन चुका है तो फिर क्या कारण है की भूपेश सरकार एक्सप्रेस वे का उद्घाटन नहीं कर रही है। लेकिन हकीकत तो ये है की पिछले कई महीनों से रेलवे स्टेशन की जमीन अधिग्रहण की वजह से काम बंद पड़ा था,जिसका काम अब जाकर शुरू हुआ है। वहीं दूसरी तरफ एक्सप्रेस-वे में अभी लाइटिंग का काम पूरा नहीं होने की वजह से रात को एक्सप्रेस-वे अंधेरे में डूबा रहता है। ऐसे में अगर आधे-अधूरे एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया जाता है तो आने वाले दिनों में दुर्घटनाओं को निमंत्रण देने जैसा होगा।
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने श्री नायडू के अच्छे स्वास्थ्य, सफलता और सुदीर्घ जीवन की कामना की है।
आबकारी एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा 2 जुलाई को दोपहर 12 बजे से राजीव भवन में बैठेंगे। इस दौरान मंत्री कवासी लखमा अपने विभाग से संबधित समस्याओं का निराकरण करने के लिए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पदाधिकारियो से आवेदन प्राप्त कर विभाग से संबधित शिकायत एवं सुझाव पर कार्यवाही करने के साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे
प्रदेश के उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा ने महासमुंद प्रवास के दौरान जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 11 में लगभग 32 लाख रूपए से अधिक की लागत से बने सर्वसुविधा युक्त नव निर्मित वृद्धाश्रम भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर महासमुंद के विधायक श्री विनोद चन्द्राकर, बसना विधायक श्री देवेन्द्र बहादुर सिंह, खल्लारी विधायक श्री द्वारिकाधीश यादव, महासमुंद नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्री पवन पटेल, नगर पालिका परिषद उपाध्यक्ष श्रीमती कौशिल्या बंसल, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, कलेक्टर श्री सुनील कुमार जैन, पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह, मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती प्रीति सिंह सहित जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। वृद्धाश्रम के लोकार्पण अवसर पर उद्योग मंत्री श्री लखमा ने अपने उद्बोधन में कहा कि वृद्धाश्रम किसी भी समाज के मंदिर से बढ़कर है, जिन वृद्ध लोगों का देख-रेख करने वाले कोई नहीं है, उनके लिए यह व्यवस्था की गई है, वृद्ध माता-पिता की सेवा करना हम सब की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए होते है, जो अपने परिवारों के साथ नहीं रहते अथवा निराश्रित होते है। जिन वृद्ध लोगों का कोई आश्रय नहीं होता और कोई सहारा देने वाला नहीं होता, उन्हें वृद्धाश्रम के माध्यम से सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा। महासमुंद विधायक श्री विनोद चन्द्राकर ने संबोधित करते हुए कहा कि वृद्धाश्रम में वरिष्ठ नागरिक अपना सुख-दुख आपस में बांट सकेंगे। राज्य शासन द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को उच्च जीवन-यापन उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएं बनाई गई है। महासमुंद नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्री पवन पटेल ने कहा कि वृद्ध माता-पिता जिनके कोई आशियाना नहीं है, उनके लिए सर्व सुसज्जित 10 कमरें सहित हाल, किचन, डायनिंग हाल सहित बाथरूम बनाए गए है। इसके अलावा यहां वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के उपरांत वृद्धाश्रम प्रांगण में अतिथियों द्वारा पौधरोपण किया गया। इस अवसर पर श्री आलोक चन्द्राकर, श्री राजेन्द्र चन्द्राकर, श्री दाऊलाल चन्द्राकर सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
सेल्फी लेना सब लोगों की हैबिट बन गई है। उसको लेने के लिए सिर्फ लोग अलग अलग तरीके ही नहीं अपनाते बल्कि नई नई जगह भी एक्स्प्लोर करते है ताकि उनकी फोटो में बैकग्राउंड भी अच्छा दिखे। जैसे जैसे टेक्नोलॉजी एडवांस होती जा रही वैसे वैसे स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां भी मोबाइल कैमरे की क्वॉलिटी को सेल्फी के लिए अच्छा बनाती जा रही है। सेल्फी का क्रेज लोगो में बढ़ चढ़ कर देखने को मिल रहा है।
आज के समय में सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि बडे बूढ़े लोग भी सेल्फी के दिन पे दिन दीवाने होते जा रहे हैं। उन लोगों के लिए सेल्फी का क्रेज अच्छा है जो खुद को एकाकी महसूस करते है। सेल्फी लेने के कुछ फायदे है तो कुछ नुकसान भी है। इससे लोगो का वजन बढ़ता जा रहा है। आज हम आपके सामने ऐसे फैक्ट्स बताएँगे जिससे आप हैरान हो जायेंगे और मानने लगेंगे कि हाँ जरूर ऐसा होता है।
सेल्फी का क्रेज लोगो में ऐसा बढ़ गया है कि लोग सुबह उठकर अपने काम करना भूल जाते हैं लेकिन सेल्फी लेना नहीं भूलते। रीसर्च के मुताबिक, मॉनिंग वॉक या योगा करने वाला मनुष्य वॉक को तरह-तरह की सेल्फी लेने में खत्म कर देते हैं। इससे उनका सारा समय सेल्फी लेने में बेकार हो जाता है और वॉक पूरी तरह से नही हो पाती। सेल्फी लेने के चक्कर में हमारे शरीर का मास कम नहीं हो पाता।
आजकल की औरते भी किचन में सेल्फी लेना नही छोड़ती। अगर वो किचन में कोई नई डिश बनाती है तो पहले उस डिश के साथ अपनी सेल्फी लेती है और दूसरो को बाद में सर्व करती है। आजकल के लोगों के दिमाग में सेल्फी लेकर, उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने का भूत सवार हो गया है। सेल्फी की वजह से किसी को अपने बढ़ते मोटापे की परवाह नहीं है। लोग इस बात से जागरुक नहीं है कि यह हमारे मोटापे को आमंत्रण दे रहा है।
स्मार्ट फोन में नए नए फोटो एडिटिंग टूल्स यूज़र्स के लिए आ गए है जो चेहरे को पतला करने में बहुत हेल्पफुल होते है। लोग व्यायाम को नहीं बल्कि सेल्फी को ही अपना फिटनेस मंत्र समझने लगे हैं। सेल्फी सिर्फ एक दिखावा है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे. इसके लिए सीएम बघेल सोमवार को नियमित विमान से रायपुर से दिल्ली रवाना हुए. दिल्ली में आज शाम तक सीएम बघेल की राहुल गांधी से मुलाकात हो सकती है. इस मुलाकात में केन्द्र सरकार की योजनाओं और प्रदेश की योजनाओं पर चर्चा के साथ ही संगठन स्तर पर भी बदलाव को लेकर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि सीएम बघेल बैठक के एंजेंडे के संबंध कुछ भी साफतौर पर कहने से बचते रहे.
दिल्ली रवाना होने से पहले आज रायपुर एयरपोर्ट पर सीएम भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा की. सीएम बघेल ने कहा- ‘कांग्रेस के 5 मुख्यमंत्रियों की राहुल गांधी से मुलाकात है, फिलहाल प्रदेश का कोई एजेंडा लेकर नहीं जा रहा हूं’, लेकिन मुलाकात हुई तो कई विषयों पर बातचीत हो सकती है’. सीएम बघेल ने कहा कि बैठक के बाद ही कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है.
निगम-मंडलों की सूची पर हो सकती है चर्चा सीएम भूपेश बघेल की राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. चर्चा है कि राहुल गांधी के साथ बैठक में प्रदेश के निगम और मंडलों में पदाधिकारियों की सूची पर भी मुहर लग सकती है. हालांकि दिल्ली रवाना हो ने से पहले सीएम बघेल ने मीडिया से कहा- अभी कोई भी सूची ले कर नहीं जा रहा हूं, लेकिन निगम मंडलों में नियुक्ति को लेकर इंतजार जल्द खत्म हो जाएगा.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आदिवासी नेता मोहन मरकाम को प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष की कमान दी है. पीसीसी चीफ बनने के बाद सोमवार को मोहन मरकाम ने राजधानी रायपुर के कांग्रेस भवन में एक पत्रकारवार्ता ली. नव नियुक्त पीसीसी चीफ मोहन मरकाम की ये पहली पीसी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा. इसके साथ ही मरकाम ने केंद्र के खिलाफ आंदोलन को लेकर एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है.
बस्तर में होगी बैठक
विधानसभा चुनाव के बाद अब कांग्रेस का फोकस बस्तर में होने वाले उपचुनाव पर है. पार्टी इसकी तैयारी भी कर रही है. उपचुनाव को लेकर पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने प्रेसवार्ता में कहा कि अध्यक्ष बनने के बाद ये मेरी पहली प्रेसवार्ता है. उन्होने कहा कि वे मंगलवार से पांच दिवसीय बस्तर दौरे पर रहेंगे. बस्तर में होने वाले उपचुनाव की तैयारियों के संबंध में बैठक लूंगा. उनका कहना है कि बस्तर के दोनों उपचुनाव जीताना मेरी पहली परीक्षा है.
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस भवन में प्रेसवार्ता लेते हुए पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. मरकाम ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार राज्य के साथ भेदभाव कर रही है. उनका कहना है कि पहले चावल के कोटे में कटौती की गई. अब मिट्टी तेल में कटौती की जा रही है. केंद्र की कटौती का सीधा खामयाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा. उनका कहना है कि मोदी सरकार छत्तीसगढ़ को अंधेरे में रखना चाहती है.
किया ये बड़ा ऐलान
पीसी में नए पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान कर दिया है. उनका कहना है कि केंद्र के भेदभाव के खिलाफ 7 जुलाई से सड़कों पर कांग्रेस उतरेगी. 7 जुलाई से जिला स्तर पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन होगा. साथ ही निगम मंडलों में नियुक्ति पर पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने कहा कि निकाय चुनाव से पहले निगम मंडलों में नियुक्ति होगी. उन्होने दावा किया कि जिन्हें निगम मंडल में स्थान नहीं मिलेगा. उन्होने कहा कि वरिष्ठों से सलाह लेकर पीसीसी कार्यकारिणी तैयार की जाएगी.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में संचालित सेल (स्टील एथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) की भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) यूनिट में सोमवार को बड़ा धमाका हुआ. बीएसपी के स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस)-3 यूनिट में आज सुबह करीब साढ़े दस बजे धमाका हुआ है. धमाका इतना तेज था कि आस पास के भवन भी हिल गए. वहां काम कर रहे कर्मचारी भूकंप समझकर वहां से भागने लगे, कुछ देर के लिए उस इलाके में अफरा तफरी का माहौल भी हो गया था. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है.
भिलाई स्टील प्लांट के जनसंपर्क विभाग के डीजीएम सुबीर दरिपा ने बताया- ‘एसएमएस-3 के पीछे के हिस्से में धमाका हुआ है. स्लैग का एक हिस्सा मॉच्स्यर के संपर्क में आने से धमाका हो गया. धमाके की अवाज तेज होती है, इसलिए कर्मचारी आशंकित हो गए होंगे, लेकिन घटना में किसी तरह का जान माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है.’
सप्ताहभर के भीतर दूसरा हादसा भिलाई स्टील प्लांट के पॉवर सिस्टम डिपार्टमेंट-2 में बीते 26 जून 2019 की सुबह इलेक्ट्रिक फ्लैश हुआ था, जिससे यहां काम कर रहे एक अधिकारी, एक कर्मचारी व एक ट्रेनी झुलस गए. इनको पहले मेन मेडिकल पोस्ट लेकर गए, इसके बाद सेक्टर-9 हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां बर्न यूनिट में दाखिल कर इलाज किया जा रहा है. जहां उनका उपचार चल रहा है. इसके बाद आज ये बड़ा धमाका हो गया है.
भारत में पानी जानलेवा ज़हर बनने की ओर है. देश के नीति निर्माताओं ने पानी के साथ इतनी बदसलूकी की और दुरुपयोग की इजाज़त दी कि कई इलाकों में पीने का पानी खत्म हो चुका है. ये हालात और खराब हो सकते हैं अगर समय रहते ज़रूरी कदम न उठाए गए. कृषि के साथ ही नदियों और जलस्रोतों को लगातार प्रदूषित कर रहे उद्योगों से जुड़े सख़्त कदम उठाने होंगे. आइए ज़रा पड़ताल करें कि कहां क्या और कितना ग़लत हुआ.
आज के ज़माने में पानी से जुड़ी लड़ाइयों की पुराने समय की बातें बेमानी ज़रूर हैं, लेकिन देश में हकीकत डरावनी हो चुकी है. अब हालात ये हैं कि इस जंग में समाज के तमाम धड़े शामिल हो गए हैं – उद्योग, कृषि, आम आदमी और सत्ता से जुड़े लोग तक.
इस विषय के केंद्र में एक विडंबना है और वो ये कि भारत को अपने पड़ोसी देशों की तुलना में भरपूर पानी का वरदान मिला. इसके बावजूद भारत में पानी के साथ इस कदर बदसलूकी हुई कि अब स्थिति गंभीर हो चुकी है. क्लाइमेट चेंज को भी मद्देनज़र रखा जाए, तो एक दशक के भीतर पानी की समस्या भारत को पंगु बना सकती है.
भ्रष्टाचार से निपटना चुनौती है जलस्रोतों को साफ रखने के कामों के मद्देनज़र पानी से जुड़ा भ्रष्टाचार बहुत बड़े स्तर का है. पश्चिमी घाटों के पर्यावरणीय नुकसान के मुद्दे पर गाडगिल कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि उद्योगों ने कुछ इलाकों में कैसे और किस स्तर तक भूमिगत जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाया. स्पष्ट तौर पर, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों ने कायदों और पैमानों का अध्ययन नहीं किया. नतीजा ये है कि देश में भूमिगत जलस्रोत भी प्रदूषित हो चुके हैं.
भारत के कई इलाकों में जलसंकट से लोग नाराज़ हैं. चेन्नई में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. (फाइल फोटो)
महाराष्ट्र के राजनीतिज्ञों ने अपने गन्ना खेती के साम्राज्यों को खड़ा करने के लिए पानी का अंधाधुंध अपहरण तक किया. नतीजतन, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कृषि संकट मुंह बाए खड़ा है. भविष्य को ध्यान में रखते हुए पानी से जुड़ी योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन करने में भी देश के नीति निर्माता नाकाम रहे. ये इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि पानी के लंबे समय तक इस्तेमाल के तरीकों पर फोकस नहीं रहा.
बनी हुई है पानी के लिए स्पष्ट नीतियों की ज़रूरत ये भी ध्यान देने लायक है कि अगर क्लाइमेट चेंज पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा, तो भारत कैसे बच सकता है? इस सवाल से इतर भारत में तेज़ी से उद्योगों का विकास हो रहा है. मतलब कि उद्योग ज़्यादा पानी चूस रहे हैं. जलसंकट का कारण बन रहे हैं. ऐसे में, औद्योगिक विकास के मद्देनज़र देश में पानी से जुड़ी स्पष्ट योजनाएं होना ज़रूरी है. जिस तरह प्राथमिक शिक्षा या स्वास्थ्य के मुद्दे अहमियत रखते हैं, उसी तरह पानी का भी लेकिन असलियत ये है कि देश तीनों ही मुद्दों पर बुरी तरह पिछड़ रहा है.
औद्योगिकीकरण के साथ इस बात का ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि कृषि पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े. कृषि संकट के लिए भारत में ज़मीन के विखंडन को दोष दिया जाना ठीक नहीं है. चीन ने ये साबित करके दिखाया है कि कम पानी के बावजूद ज़्यादा उत्पाद कैसे पैदा किए जाते हैं. इस सबका मतलब यही है कि भारत ने ये समझा ही नहीं कि औद्योगिकीकरण से पहले यही शर्त होती है कि खपत, वॉटर हार्वेस्टिंग, रीसाइकिलिंग और ट्रीटमेंट से जुड़ा बेहतर जल प्रबंधन हो.
इस चार्ट के ज़रिये समझें. तुलनात्मक रूप से कम विकसित इलाकों में ज़्यादा पानी कृषि के लिए इस्तेमाल होता है. कृषि का पानी पर दावा सबसे बड़ा है. लोग पानी के सबसे बड़े उपभोक्ता नहीं होते. वो सिर्फ 10 फीसदी तक पानी का इस्तेमाल करते हैं.
किसी को न बख़्शने का इरादा ज़रूरी समस्या तब शुरू होती है जब इलाकों में उद्योग आते हैं. उद्योग ज़्यादा पानी की मांग करते हैं, 50 फीसदी से भी ज़्यादा. उद्योगों के लिए ज़रूरी है कि उन्हें पानी मिले लेकिन साथ ही, उनके ज़रिये पानी का संरक्षण और संवर्धन भी होता रहे, ऐसी नीतियां हों. ऐसी नीतियां होतीं तो नमामि गंगे जैसी योजनाओं की ज़रूरत ही नहीं थी. क्या सरकारों ने अपना काम ठीक से किया? भारत की नदियों में जितना जीवनदायी पानी था, क्या उनके साथ बदसलूकी पर लगाम कसी गई?
जल प्रबंधन के लिए ज़रूरी है बेहतर निरीक्षण बना रहे, कठोर जुर्माने हों, भले ही बात ब्यूरोक्रेट्स की हो, जजों की या राजनीतितज्ञों की. जो भी जल नीतियों का उल्लंघन करे उसके लिए सख़्त नियम हों. इसके अलावा, जलस्रोतों की धाराओं का प्रबंधन भूमिगत जलस्तर के लिए होना चाहिए. साथ ही, फसल के पैटर्न के लिए नीतियां, इलाकों के हिसाब से होनी ज़रूरी हैं. देश में कृषि और जल से संबंधित नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन ही कारगर हो सकता है.
इन कदमों के लिए पहले से कहीं ज़्यादा राजनीतिक इच्छा का होना ज़रूरी है. अलग-अलग बहानों से पानी बर्बाद करने वाले नेताओं पर लगाम लगाना ज़रूरी है. कठोर नियमों का होना और उनका सख़्ती से पालन होना ज़रूरी है. नियम तोड़ने पर अगर प्रशासन पर कार्रवाई नहीं होगी तो आम लोगों में भी पानी के साथ बदसलूकी करने की प्रवृत्ति पर भी काबू नहीं पाया जा सकेगा. हो सकता है कि ये सब राजनीतिकों के लिए बहुत मुश्किल हो, लेकिन जब तक ऐसा होगा नहीं, भारत का भविष्य खतरे में रहेगा.
प्रियंका चोपड़ा और उनके ससुराल वाले पिछले कुछ दिनों से लगातार खबरों में बने हुए हैं। प्रियंका के जेेठ यानी निक के भाई जो जोनस ने पत्नी सोफी टर्नर के साथ दोबारा शादी की। इस दौरान पूरे परिवार ने फ्रांस के पेरिस शहर में शादी की सेरेमनी को एंजॉय किया।
शादी के दौरान परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त शामिल हुए। शादी से कुछ दिन पहले ही जो जोनस और सोफी टर्नर पेरिस पहुंचे थे और कई रस्में निभाईं। शादी भले ही जो जोनस की हो लेकिन भारत में सभी की निगाहें प्रियंका चोपड़ा पर टिकी रहीं। प्रियंका ने भी अटेंशन पाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पेरिस से जो भी तस्वीरें सामने आई थीं प्रियंका हर बार नए लुक में दिखीं। यही नहीं उन्होंने एक्सपेरिमेंट करने से भी गुरेज नहीं किया। ऐसे में जब शादी का मौका था तो ‘देसी गर्ल’ बिल्कुल देसी अंदाज में दिखीं। अभी तक वेस्टर्न ड्रेस में नजर आईं प्रियंका चोपड़ा ने शादी के दिन साड़ी पहनीं।
विदेश में हो रही शादी में प्रियंका चोपडा़ ने साड़ी पहन अपने फैंस का दिल जीत लिया। गुलाबी रंग की नेट की साड़ी के साथ प्रियंका ने बैकलेस ब्लाउज पहना। साथ ही उन्होंने मैचिंग गुलाब के फूल अपने बालों में लगा रखा था। अपने देसी अटायर में प्रियंका बेहद खूबसूरत दिख रही थीं। वहीं ब्लैक कलर के सूट में निक भी खूब जंच रहे थे।
जो जोनस और सोफी टर्नर की शाही शादी पेरिस के Chateau नाम के एक महल में हुई। 18वीं शताब्दी में बने इस महल में रुकने का एक रात का खर्च करीब 3.21 लाख रुपये है। इससे पहले कपल ने इसी साल 1 मई को लॉस वेगास में शादी की थी। ये एक प्राइवेट सेरेमनी थी। इसमें दोनों के करीबी रिश्तेदार और परिवारवाले ही शामिल हुए थे।