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पीएम मोदी की तर्ज पर सोशल मीडिया राजस्थान के इन नेताओं की भी है बड़ी ताकत

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राजस्थान से पीएम नरेन्द्र मोदी कैबिनेट में जगह बनाने वाले प्रदेश के तीनों मंत्री और हाल ही में लोकसभा स्पीकर चुने गए ओम बिरला उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जो खुद सोशल होने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय रहते हैं. सोशल मीडिया के जरिए लोकसभा स्पीकर और तीनों मंत्री लगातार लोगों से संवाद बनाए रखते हैं. पीएम मोदी अपनी पार्टी के नेताओं में जिन खूबियों को तलाशते हैं उनमें एक खूबी नेता की सोशल मीडिया में सक्रियता और उसमें उसकी पकड़ भी शामिल हैं.

फेसबुक पर शेखावत और ट्वीटर पर मेघवाल आगे

जोधपुर से सांसद केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, बीकानेर से सांसद केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद केन्द्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी और कोटा-बूंदी से सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला फेसबुक और ट्वीटर पर लगातार सक्रिय रहते हैं. ये अपनी प्रत्येक गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने फॉलोवर्स के साथ साझा करते हैं. यही कारण है कि इनके फॉलोवर्स इनकी प्रत्येक गतिविधियों से वाकिफ रहते हैं. लोकसभा चुनाव के समय इन नेताओं के सोशल मीडिया एकाउंट लगातार अपडेट रहे. 21, जून, 2019 तक इनके सोशल मीडिया एकाउंट के अनुसार ट्वीटर पर जहां मेघवाल चारों में सबसे आगे हैं, वहीं फेसबुक पर शेखावत अव्वल हैं.

Leaders' activism on social media-नेताओं की सोशल मीडिया पर सक्रियता।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत। फाइल फोटो

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ट्वीटर पर @gssjodhpur एकाउंट के जरिए मार्च 2014 से सक्रिय हैं. ट्वीटर पर शेखावत के 101K फॉलोवर्स हैं. उनके ट्वीट्स की संख्या 9000 से ऊपर हो चुकी है. वे खुद ट्वीटर 414 लोगों को फॉलो करते हैं. वहीं फेसबुक पर @mpjodhpur के नाम से सक्रिय हैं. इस फ्रंट पर शेखावत को 4,43,213 लोग फॉलो करते हैं.

Leaders' activism on social media-नेताओं की सोशल मीडिया पर सक्रियता।
केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल। फाइल फोटो।

केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल अपने ट्वीटर एकाउंट @arjunrammeghwal के माध्यम से मार्च, 2011 से सक्रिय हैं. ट्वीटर पर मेघवाल को 136K लोग फॉलो करते हैं. वे अब तक अपने ट्वीटर हैंडल से 17,500 से ज्यादा ट्वीट कर चुके हैं. मेघवाल खुद 723 लोगों को फॉलो करते हैं. मेघवाल फेसबुक पर @arjunrammeghwalBJP के नाम से सक्रिय हैं. फेसबुक पर उनके 2,97,886 फॉलोवर्स हैं.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला। फाइल फोटो

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला अपने ट्वीटर हैंडल @ombirlakota के नाम से सितंबर, 2010 से सक्रिय हैं. ट्वीटर पर उनके फॉलोवर्स की तादाद 70.3K है. वहीं वे खुद 275 लोगों को फॉलो करते हैं. वे अपने हैंडल से अब तक 8,904 ट्वीट कर चुके हैं. वहीं फेसबुक पर बिरला @OmBirlaBJPKota के नाम से सक्रिय हैं. फेसबुक पर बिरला को फॉलो करने वालों की तादाद 1,49,868 है.

Leaders' activism on social media-नेताओं की सोशल मीडिया पर सक्रियता।
केन्द्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी।

केन्द्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी
केन्द्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी भी इस मामले में पीछे नहीं हैं. चौधरी भी जुलाई, 2011 से ट्वीटर पर अपने @KailashBaytu एकाउंट के जरिए सक्रिय हैं. ट्वीटर पर चौधरी के फॉलोवर्स थोड़े कम हैं. ट्वीटर पर उन्हें 17K लोग फॉलो करते हैं, जबकि वे खुद भी 102 लोगों को ही फॉलो करते हैं. वे अपने ट्वीटर हैंडल से अब 2,219 ट्वीट कर चुके हैं. लेकिन चौधरी फेसबुक पर अपने प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. फेसबुक पर भी चौधरी का एकाउंट @KailashBaytu के नाम से ही है. इस पर उन्हें 2,99,339 लोग फॉलो करते हैं.

ये है ‘मल्लिका- ए-आम’, 1200 रुपये सिर्फ एक का दाम

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“आमों की मलिका” के रूप में मशहूर किस्म “नूरजहां” के फलों का औसत वजन इस बार मौसम की मेहरबानी से बढ़कर 2.75 किलोग्राम पर पहुंच गया है। यही वजह है कि आम की इस दुर्लभ किस्म के मुरीद इसके केवल एक फल के लिये 1,200 रुपये तक चुका रहे हैं।

अफगानिस्तानी मूल की मानी जाने वाली आम प्रजाति नूरजहां के गिने-चुने पेड़ मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाये जाते हैं। यह इलाका गुजरात से सटा है।

इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर कट्ठीवाड़ा में इस प्रजाति की खेती के विशेषज्ञ इशाक मंसूरी ने रविवार को “पीटीआई-भाषा” को बताया, “इस बार अनुकूल मौसमी हालात के चलते नूरजहां के पेड़ों पर खूब बौर (आम के फूल) आये और फसल भी अच्छी हुई।”

उन्होंने बताया कि मौजूदा सत्र में नूरजहां के फलों का वजन औसतन 2.75 किलोग्राम के आस-पास रहा, जबकि गुजरे तीन सालों में इनका औसत वजन तकरीबन 2.5 किलोग्राम रहा था।

मंसूरी ने बताया कि पिछले साल इल्लियों के भीषण प्रकोप के चलते नूरजहां की फसल लगभग बर्बाद हो जाने से इसके मुरीदों को मायूस रहना पड़ा था।

बहरहाल, इस बार अच्छी फसल के चलते जहां नूरजहां के स्वाद के शौकीन खुश हैं, वहीं इसके विक्रेताओं की भी पौ बारह हो गयी है।

मंसूरी ने बताया, “इन दिनों नूरजहां का केवल एक फल 700 से 800 रुपये में बिक रहा है। ज्यादा वजन वाले फल के लिये 1,200 रुपये तक भी चुकाये जा रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि पड़ोसी गुजरात के अहमदाबाद, वापी, नवसारी और बड़ौदा के कुछ शौकीनों ने नूरजहां के फलों की सीमित संख्या के कारण इनकी अग्रिम बुकिंग तब ही करा ली, जब ये फल छोटे थे और डाल पर लटककर पक रहे थे।

मंसूरी ने बताया कि कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में कई लोगों को आमों के बाग में नूरजहां के भारी-भरकम फलों से लदे पेड़ के साथ फोटो और सेल्फी खींचते भी देखा जा सकता है।

नूरजहां के पेड़ों पर जनवरी से बौर आने शुरू होते हैं और इसके फल जून के आखिर तक पककर तैयार होते हैं। नूरजहां के फल तकरीबन एक फुट तक लम्बे हो सकते हैं। इनकी गुठली का वजन 150 से 200 ग्राम के बीच होता है।

बहरहाल, यह बात चौंकाने वाली है कि किसी जमाने में नूरजहां के फल का औसत वजन 3.5 से 3.75 किलोग्राम के बीच होता था।

जानकारों के मुताबिक, पिछले एक दशक के दौरान मॉनसूनी बारिश में देरी, अल्पवर्षा, अतिवर्षा और आबो-हवा के अन्य उतार-चढ़ावों के कारण नूरजहां के फलों का वजन पहले के मुकाबले घट गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण आम की इस दुर्लभ किस्म के वजूद पर संकट भी मंडरा रहा है।

उड़ते विमान में महिला यात्री ने क्रू मेंबर पर कर दिया हमला, जानिए फिर हुआ क्या

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आसमान में उड़ान भरते विमान में एक महिला यात्री ने क्रू मेंबर पर हमला कर दिया.

फिर क्या था विमान में सफर कर रहे अन्य यात्रियों ने महिला को दबोच लिया. ये फ्लाइट लंदन से तुर्की जा रही. जेट-2 एयरलाइंस की इंटरनेशनल फ्लाइट ने शनिवार को लंदन के एसेक्स एयरपोर्ट से तुर्की के लिए उड़ान भरी थी. उड़ान के दौरान ही एक महिला ने कॉकपिट में मौजूद एक केबिन क्रू पर अटैक करने की कोशिश की.

कैबिन क्रू पर अटैक करने की सूचना मिलते ही एयरफोर्स के 2 फाइटर जेट को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया. हालांकि इससे पहले ही साथी यात्रियों ने महिला पर काबू पा लिया. लेकिन विमान को मजबूरन वापस लौटना पड़ा. बताया जा रहा है कि 25 साल की एक महिला ने कॉकपिट में अटैक की कोशिश की थी. जिससे यात्रियों के साथ ही क्रू मेंबर्स में भी विमान के हाईजैक होने का डर फैल गया. इसके बाद अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया.

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें ऐसा मालूम चल रहा है कि महिला नशे में है. हालांकि जैसे ही फ्लाइट ने एयरपोर्ट पर लैंड किया पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया. एक यात्री ने द सन को बताया कि महिला प्लेन का दरवाजा खोलने के लिए भी बढ़ी और चिल्ला रही थी. जब केबिन क्रू ने उसे रोकने की कोशिश की तो महिला ने उन पर हमला कर दिया. इसके बाद महिला अन्य यात्रियों और और स्टाफ को धमकी देने लगी.

बताया जा रहा है कि इस दौरान आरोपी महिला गाना भी गा रही थी. साथ ही लोगों को मारने की बात भी कर रही थी. जिसके चलते विमान में सफर कर रहे यात्री बुरी तरह से डर गए. जेट 2 विमान के प्रवक्ता ने बताया कि घटना के बाद फ्लाइट सुरक्षित लौट आई. हम अधिकारियों को जांच में मदद कर रहे हैं.

देश के सेक्स रेश्यो में सुधार, केरल-छत्तीसगढ़ टॉप पर बरकरार

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भारत का महिला-पुरूष सेक्स रेश्यो 2018-19 में 2015-16 की तुलना में 8 अंक बढ़कर 931 हो गया है. 2015-16 में यह रेश्यो 923 था. मतलब प्रति एक हजार लड़कों पर 923 लड़कियां (जन्म के वक्त).

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा रेश्यो केरल और छत्तीसगढ़ में है. इन राज्यों में यह आंकड़ा 959 है. इसके बाद मिजोरम (958) और गोवा (954) हैं. लिस्ट में सबसे नीचे दमन-दीव (889), लक्ष्यद्वीप (891) और पंजाब (900) हैं.

2015-16 में यह आंकड़ा 923 था, वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 926 पहुंच गया. 2017-18 में महिला-पुरूष रेश्यो में और बढ़त दर्ज हुई और आंकड़ा 929 पहुंच गया.बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम हरियाणा से लॉन्च की गई थी. यहां रेश्यो में 27 अंकों का सुधार हुआ है. 2015-16 में राज्य में यह आंकड़ा 887 था, जो अब बढ़कर 914 पहुंच गया है.

2015-16 और 2018-19 के आंकड़ों में तुलना करने पर पता चलता है कि 25 राज्यों (केंद्रशासित राज्य भी शामिल) में रेश्यो बढ़ा है. सबसे ज्यादा उछाल लक्ष्यद्वीप (832 ले 891), अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह (890 से 948), गोवा (918 से 954) और नागालैंड (904 से 936) में आया है.

वहीं 11 राज्यों में सेक्स रेश्यो कम भी हुआ है. सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा कमी आई है. यह आंकड़े लोकसभा में एक सवाल के जवाब में महिला और बाल विकास मंत्रालय ने दिए. सवाल सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम से संबंधित था.

पिछले एक साल में 12 राज्यों में कम हुआ सेक्स रेश्यो

21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2017-18 के मुकाबले सेक्स रेश्यो में बढ़त दर्ज की गई है. इनमें सबसे ज्यादा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 51 अंकों का उछाल आया है.2017-18 में अंडमान में सेक्स रेश्यो 897 था, जो बढ़कर अब 948 हो गया है. इसके अलावा सिक्किम (928 से बढ़कर 948), तेलंगाना (925 से बढ़कर 943) में बड़ी बढ़त दर्ज की गई है.

वहीं 12 राज्य ऐसे हैं, जहां 2017-18 की तुलना में सेक्स रेश्यो में कमी आई है. इनमें अरुणाचल प्रदेश में 42 अंकों की कमी (956 से 914) सबसे ज्यादा है. अरुणाचल के बाद जम्मू-कश्मीर (958 से 943) और तमिलनाडु (947 से 936) का नंबर है.

आखिर चमकी बुखार की कितनी कीमत चुका रही है लीची?

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एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार कहे जानी वाली महामारी का प्रमुख कारण बता दी गई लीची भारी नुकसान का सामना कर रही है. बिहार के मुज़फ्फरपुर और आसपास के ज़िलों में सवा सौ से ज़्यादा बच्चों की मौत इस बीमारी से हो चुकी है. वहीं, उत्तर प्रदेश में भी कुछ मौतें होने का आंकड़ा सामने आया है और AES के कारणों को लेकर लगातार आई शुरूआती खबरों में लीची के सेवन को इसका प्रमुख कारण बता दिए जाने से देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में लीची के कारोबार को तगड़ा झटका लग गया.

चीन के बाद भारत ही लीची का सबसे बड़ा निर्यातक है और सबसे बड़ा उत्पादक भी. भारत में लीची का सबसे ज़्यादा यानी 45 फीसदी से ज़्यादा उत्पादन सिर्फ बिहार में ही होता है और मुजफ्फरपुर व उसके आस-पास का इलाका इस उत्पादन के लिए मशहूर है. इसी इलाके में AES यानी चमकी बुखार से करीब 138 बच्चों की मौत हो जाने की खबरों के बीच एक खबर ये है कि लीची के कारोबार को 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हो रहा है.

शाही लीची किस्म के इस फल के दाम बुरी तरह गिर चुके हैं और ये 70 रुपये किलोग्राम भी बिक रहा है, जबकि पूरे सीज़न में इसकी कीमत 150 रुपये प्रति किलोग्राम से भी ज़्यादा रह चुकी है. वहीं, बीमारी से जुड़ी खबरों के बाद लीची के प्रति एक डर बैठ जाने से रिटेल तक ये फल पहुंच ही नहीं पा रहा है और बताया जा रहा है कि फल मंडियों से भी इसकी खरीदारी नहीं हो पा रही है.

बंदरगाहों पर ज्यों का त्यों पड़ा है माल
बिहार में इंसेफलाइटिस से हो रही मौतों की खबरों को कवरेज मिलने के बाद ये खबर आई कि अमेरिका, आस्ट्रेलिया, यूएई, न्यूज़ीलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भेजे गए लीची के कंसाइनमेंट्स बंदरगाहों पर पड़े हुए हैं और खरीदारों ने इन्हें उठाने से मना कर दिया है. निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं, ये भी खबरें हैं कि बाज़ार में पहुंच रहे पैक्ड लीची जूस को लेकर भी ग्राहकों में डर बैठ गया है और पिछले करीब एक पखवाड़े के दौरान इनकी बिक्री भी घट चुकी है.

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लीची उत्पादक राज्यों का नक्शा. तस्वीर : मैप्सॉफइंडिया

दूसरी ओर, लीची के निर्यातक उद्योग इस बात का शुक्र मना रहे हैं कि बिहार में इस महामारी के भयानक नतीजों की खबरें सीज़न के आखिर में आईं, वरना लीची का इस साल का पूरा कारोबार ही ठप हो सकता था.

10 लाख लोगों ने झेली नुकसान की मार
कृषि मंत्रालय के आंकड़े कहते हैं कि 2018 में बिहार में 32 हज़ार हेक्टेयर के क्षेत्र में ढाई से तीन लाख मेट्रिक टन लीची का उत्पादन हुआ. इन आंकड़ों के आधार पर मंत्रालय ने कहा था कि इस साल यानी 2019 में लीची का उत्पादन 7 लाख मेट्रिक टन तक होने का अनुमान है.

बिहार के लीची उत्पादन एसोसिएशन के प्रमुख बच्चा प्रसाद सिंह ने पायोनियर को बताया कि AES का कनेक्शन लीची के साथ जुड़ने के बाद पिछले एक डेढ़ हफ्ते में लीची उत्पादकों ने 50 से 60 फीसदी तक नुकसान झेला. सिंह के मुताबिक ‘मुजफ्फरपुर में इस बीमारी की खबरों के बाद विदेशों में लीची के कंसाइनमेंट नहीं उठाए जा रहे. कई मंडियों ने कह दिया ​है कि अगले आदेश तक लीची के कंसाइनमेंट्स को रोक दिया जाए. इस साल लीची के कारोबार ने बड़ा घाटा झेला है’. सिंह की मानें तो 8 से 10 लाख लोग इस कारोबार से जुड़े हैं और नुकसान से सीधे तौर पर प्रभावित हैं.

बिहार की लीची को हासिल है जीआई टैग
इस बारे में यह भी गौरतलब है कि बिहार में होने वाले लीची उत्पादन को जीआई यानी जॉगराफिकल इंडिकेशन टैग मिला हुआ है. इस टैग का मतलब होता है कि यह इस क्षेत्र का एक ऐसा खास उत्पाद है, जिसमें विशि​ष्ट गुण और प्रतिष्ठा होती है. इसके बावजूद यहां लीची के कारोबार में बेहद नुकसान चिंता का विषय बन गया है. एक्सपोर्ट से लेकर स्थानीय स्तर तक लीची के कारोबारी घाटे से जूझ रहे हैं.

दिल्ली में लीची उत्पादों के एक कारोबारी का कहना है कि एक रिटेलर लीची जूस की जहां 40 से 50 बोतलें हर दिन बेच रहा था, पिछले कुछ दिनों में एक हफ्ते में सिर्फ आधा दर्जन बोतलें बिकी हैं.

सरकारी कर्मचारियों के लिए नया आदेश, हफ्ते में 1 बार पहननी होगी ऐसी ड्रेस

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मिजोरम सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों के लिए उनकी ड्रेस को लेकर एक सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि सभी सरकारी कर्मचारी हफ्ते में कम से कम एक बार ट्रेडिशनल ड्रेस यानी वहां की पारंपरिक पोषाक पहनकर कार्यालय आएं। यह फरमान मिजो नेशनल फ्रंट पार्टी की राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया है।

मुख्यमंत्री की स्वीकृति से जारी हुआ सर्कुलर

मिजोरम में सरकारी कर्मचारियों द्वारा हफ्ते में एकबार ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर कार्यालय आने के सर्कुलर को मुख्यमंत्री जोरामथंगा द्वारा मंजूरी दी गई है। इस सर्कुलर को मिजोरम सरकार के कमिश्नर और जनरल सेक्रेटरी पी बैकतलुंगा द्वारा जारी किया गया है।

यहां भी जारी हो चुका है ऐसा आदेश

आपको बता दें कि ऐसा ही आदेश 2 साल पहले असम की भाजपा सरकार द्वारा भी जारी किया गया गया था जिसमें वहां के सरकारी कर्मचारियों को ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर आना होता था। इसमें महीने के प्रत्येक पहले और तीसरे शनिवार को पुरूषों को धोती—कुर्ता तथा महिलाओं को मेखेला चादोर पहनकर कार्यालय आना होता था। यह विचार असम के मुख्य सचिव वीके पिपेरसेनिया द्वारा निकाला गया था तथा वो खुद ऐसी ही पोषाक पहनकर आते ​थे।

विराट ने कहा, अफगानिस्तान के खिलाफ मैच जीतना बहुत जरूरी था

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भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ विश्व कप मैच में जीत दर्ज करना बहुत जरूरी था क्योंकि इससे दो बार की चैंपियन टीम को अपना जज्बा दिखाने और हार के मुंह से जीत हासिल करने में मदद मिली।

मोहम्मद शमी के अंतिम ओवर में बनी हैट्रिक से भारत शनिवार को विश्व कप सेमीफाइनल में अफगानिस्तान को 11 रन हराने के बाद सेमीफाइनल के करीब पहुंच गया।

विश्व कप में अपना पहला मैच खेल रहे शमी (9.5-1-40-4) ने अंतिम ओवर में 16 रन बनने से बचाने के अलावा लगातार गेंदों में खतरनाक दिख रहे मोहम्मद नबी (55 गेंद में 52 रन), आफताब आलम (0) और मुजीब रहमान (0) को आउट कर अपनी हैट्रिक पूरी की।

कोहली ने मैच के बाद कहा, “यह मैच हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण था क्योंकि चीजें रणनीति के अनुसार नहीं हुईं। और ऐसे ही समय में आपको अपना जज्बा दिखाते हुए वापसी करनी होती है। “

कोहली ने शमी के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा, ”हर कोई मौके का इंतजार कर रहा है। शमी ने आज अच्छा प्रदर्शन किया। वह किसी अन्य गेंदबाज से कहीं ज्यादा गेंद को मूव करवा पा रहा था। हम जानते हैं कि खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ दिखाने के भूखे हैं। ”

अफगानिस्तान के खिलाफ मिली जीत के बारे में कोहली ने कहा, ”यह जीत काफी अहम रही। आप टास जीतकर बल्लेबाजी करते हो और विकेट को धीमा होता हुए देखते हो जिससे आपको लगता है कि 260 या 270 रन का लक्ष्य अच्छा होगा। ”

उन्होंने कहा, ”फिर जब खेलने उतरे तो हमें इस बारे में थोड़ा संशय भी हुआ लेकिन साथ ही हमारे अंदर आत्मविश्वास भी था। ”

कोहली ने मैन आफ द मै रहे जसप्रीत बुमराह के प्रदर्शन की भी प्रशंसा की जिनकी गेंदबाजी ने भारत को मैच में वापसी करायी।

उन्होंने कहा, ”हम बुमराह को चालाकी से इस्तेमाल करना चाहते थे। जब वह एक या दो विकेट झटक लेता है तो वह फिर बेहतर करता जाता है। वर्ना हम प्रतिद्वंद्वी को दबाव में भी लाने की कोशिश करते हैं कि उसके अभी सात या इतने ओवर बचे हैं। ”

महाराष्ट्र के इस गांव को गूगल पर ढूंढ रहे लोग, वजह है बेहद खास

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महाराष्ट्र के लातूर का गांव निलंगा लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में लोग गूगल मैप पर महाराष्ट्र के लातूर को सर्च कर रहे हैं तो वहां उन्हें छत्रपति शिवाजी की तस्वीर नजर आ रही है। विज्ञापन

महाराष्ट्र के किसान मंगेश निपाणीकर ने गांव निलंगा के एक खेत में घास से शिवाजी की पेटिंग बनाई गई है। ये पेटिंग लोगों को काफी पसंद आ रही है। यह देश की पहली ग्रास पेंटिंग है। किसान ने घास उगाकर उसे शिवाजी की तस्वीर का आकार दिया गया है। 

मंगेश निपाणीकर ने 6 एकड़ खेत में घास उगाई। इसके बाद इसे शिवाजी का आकार दिया। इसमें 3डी इफेक्ट लाने के लिए इसमें ग्राफ्टिंग भी की गई है। आम लोगों को यह आसानी से दिख सके इसके लिए खेत के चारों ओर चार बड़ी स्क्रीन भी लगाई गई हैं। लोग ट्विटर पर किसान की इस अनोखी कलाकृति को काफी सराह रहे हैं। 

बिजली कंपनियों ने कहा, इस वजह से मध्यप्रदेश में हुई बिजली कटौती

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मध्यप्रदेश में अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है और बिजली कंपनियों के अधिकारी इस समस्या से इस कदर परेशान हैं कि एक समीक्षा बैठक के दौरान एक अधिकारी ने इस समस्या के लिए चमगादड़ों को दोषी ठहरा दिया। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य है। ऐसे में गर्मी के मौसम में अघोषित बिजली कटौती से प्रदेश में राजनीतिक पारा चढ़ रहा है। प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने बिजली आपूर्ति में बाधा के लिये पूर्ववर्ती भाजपा शासन के दौरान खरीदे गए ट्रांसफार्मर की खराब गुणवत्ता को दोषी ठहराया था।

ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने इस संबंध में पीटीआई भाषा से कहा कि 14 जून को भोपाल जिले की समीक्षा बैठक के दौरान पॉवर कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि भोपाल के बड़े तालाब से लगे इलाकों की लाइनों पर चमगादड़ों के लटकने के कारण फाल्ट हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि अधिकारियों की बात पर उन्हें भरोसा नहीं हुआ और उन्होंने उन्हें आपूर्ति लाइनों को इंसुलेशन कर दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

मंत्री ने बताया कि उन्होंने चमगादड़ों को बिजली फाल्ट के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अधिकारी को डांट लगाई। उन्होंने कहा कि यह फाल्ट के बहुत से कारणों में से एक हो सकता है, लेकिन यह मुख्य कारण नहीं हो सकता। उन्होंने ओवर लोड ट्रांसफारमर्स और लाइनों के ठीक से रखरखाव न होने को अघोषित बिजली कटौती की मुख्य वजह बताई। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति लाइनों के रखरखाव को कई सालों से नजरअंदाज किया गया है और अब इनका रखरखाव ठीक करने के निर्देश दिये गए हैं।

मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी मनोज द्विवेदी ने कहा कि चमगादड़ों के कारण पुराने भोपाल के बड़े तालाब के आसपास के इलाकों में बिजली के फाल्ट होते हैं क्योंकि तालाब के किनारे पुराने पेड़ों पर बड़ी संख्या में चमगादड़ रहते हैं। इन चमगादड़ों के तारों पर लटकने से लाइन में शॉर्ट सर्किट होता है और बिजली गुल हो जाती है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने इस अजीबोगरीब वजह पर कटाक्ष करते हुए कहा, ”भोपाल में चमगादड़ इसी साल पैदा नहीं हुए हैं। चमगादड़ तो बरसों से हैं, पर पहले तो बिजली कटौती नहीं होती थी। बेहतर होगा कि बहाने बनाने की बजाय बिजली विभाग काम करे और सरकार अपने उत्तरदायित्व की भावना समझे। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस की सरकार आने के बाद ही चमगादड़ पैदा हुए हैं।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा ”मानसून पूर्व रखरखाव बिजली विभाग का एक नियमित कार्य है । तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है और यह पॉवर सरप्लस राज्य है। विपक्षी भाजपा इस मामले में झूठ फैला रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा में गुटबाजी के कारण उसके नेता एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में प्रदेश सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

वो पानी जो भारत के खेतों को सींचता, बह रहा है पाकिस्तान की ओर

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देश में पानी को लेकर हाहाकार मचा है और दूसरी तरफ हालत यह है कि राजस्थान और पंजाब में खेतों की सिंचाई करने में काम आ सकने वाला हजारों क्यूसेक पानी सिर्फ इसलिए पाकिस्तान की तरफ बह रहा है क्योंकि हमारी नहरें कमजोर होने के कारण अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप पानी लेकर उसे खेतों तक नहीं पहुंचा पा रही हैं। ऐसा कमोबेश हर साल होता चला आ रहा है। राजस्थान सरकार ने इस बारे में स्थिति रिपोर्ट मांगी है और पंजाब सरकार से नहरों की मरम्मत करवाने की मांग की है।

किसान नेताओं के अनुसार, एक महीने से हर दिन औसतन पांच से छह हजार क्यूसेक पानी पाकिस्तान जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे यहां से बिना वजह पाकिस्तान को जाने वाले पानी को भले ही पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता लेकिन नहरों की स्थिति सुधारकर इसकी कम से कम आधे से अधिक मात्रा का देश में उपयोग किया जा सकता है।

पाकिस्तान जाने वाला पानी दरअसल पंजाब में ब्यास और सतलज नदी पर बने हरिके बैराज की अधिशेष मात्रा से छोड़ा जाता है। यह पानी हुसैनी वाला हैड से होता हुआ पाकिस्तान चला जाता है। अधिकारियों का कहना है पंजाब में धान की रोपाई शुरू होने के बाद हालात सामान्य हैं।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता (हनुमानगढ़) विनोद मित्तल ने भाषा से कहा, ”सरकार ने हमसे स्थिति रिपोर्ट मांगी थी जो हमने भेज दी। उस समय पंजाब अपने हिस्सा का पानी नहीं ले रहा था। लेकिन अब हालात सामान्य है।” पंजाब में धान की रोपाई इसी दूसरे पखवाड़े में शुरू हुई है।

गंगानगर के विधायक राजकुमार गौड़ ने कहा, ”पानी पाकिस्तान जा रहा है यह बात तो वहां पंजाब के सिंचाई अधिकारी भी कह रहे हैं और इस बारे में रपटें भी यहां प्रकाशित हुई हैं। हमारी नहरें क्षमता अनुसार पानी ले नहीं रही हैं। अगर बांध से पानी की निकासी नहीं होगी तो कई इलाकों में बाढ़ या ऐसी परेशानी हो सकती है। इसलिए पानी छोड़ना मजबूरी है।”

किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल के अनुसार, ”पानी लगातार उधर छोड़ा जा रहा है। इसी शुक्रवार को 2065 क्यूसेक पानी हरिकेपत्तन से पाकिस्तान छोड़ा गया। आप मान कर चलिए कि 20 मई के बाद से लगभग एक महीने में हर दिन औसतन 5000 से 6000 क्यूसेक पानी यूं ही बर्बाद होता है जो पाकिस्तान चला जाता है।”

गंगानगर किसान समिति के संयोजक रणजीत सिंह राजू ने कहा, ”पानी इसलिए यूँ ही छोड़ना पड़ रहा है क्योंकि हमारी नहरें, चाहे वह गंगनहर हो, या राजकैनाल (इंदिरा गांधी नहर) हो, इस हालत में है ही नहीं कि पूरा पानी ले सके। गंगनहर को पानी देने वाले फिरोजपुर फीडर की क्षमता 6000 क्यूसेक की है उसमें पानी चलता है मुश्किल से 4500 क्यूसेक। इसी तरह राजकैनाल की क्षमता 3200 क्यूसेक की है लेकिन 1800 क्यूसके पानी छोड़ते ही वह हांफने लगती है।”

समाधान पूछे जाने पर विधायक गौड़ कहते हैं ”नहरों, विशेष रूप से फिरोजपुर फीडर की मरम्मत हो तथा पुरानी बीकानेर कैनाल के जरिए भी पानी छोड़ा जाए।”

रणजीत सिंह राजू ने कहा, ”सबसे बड़ा समाधान यही है कि फिरोजपुर फीडर का पुननिर्माण हो। इसके अलावा पुरानी बीकानेर कैनाल की साफ सफाई करवाकर 1000 क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी गंगनहर को दिया जा सकता है, इस पर 25-30 लाख रुपये का ही खर्च आएगा।”

हालांकि राजू भी मानते हैं कि पर्याप्त बारिश होने पर पाकिस्तान को जाने वाले पानी को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता लेकिन अपनी नहरों की स्थिति सुधाकर इसमें आधे तक कमी लाई जा सकती है और इसका सीधा फायदा पंजाब के साथ साथ हनुमानगढ़ गंगानगर जिलों को होगा जिन्हें राजस्थान का धान का कटोरा कहा जाता है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गंगनहर और भाखड़ा नहर को पानी देने वाली फिरोजपुर फीडर की मरम्मत के लिए हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने इस फीडर की रिलाइनिंग का काम जल्द से जल्द करवाने की मांग की है ताकि राजस्थान में गंगनहर और भाखड़ा नहरों के किसानों को पूरा पानी मिल सके।

फिरोजपुर फीडर को पंजाब और राजस्थान के किसानों की ‘लाईफ लाइन’ माना जाता है। इसकी क्षमता 11,192 क्यूसेक की है, लेकिन नहर में 7500 क्यूसेक से ज्यादा पानी नहीं छोड़ा जाता क्योंकि उस स्थिति में यह कहीं से भी टूट सकती है। कमोबेश यही हालत इंदिरा गांधी नहर की है। इसकी मूल क्षमता 18500 क्यूसेक थी लेकिन इसमें अब पानी मुश्किल से 11000 क्यूसेक ही चल पाता है। हालांकि इस नहर की रिलाइनिंग यानी पुननिर्माण का काम चल रहा है। इसी तरह गंगनहर की क्षमता 3000 क्यूसेक की है लेकिन यह 2400 -2500 क्यूसेक से ज्यादा पानी नहीं ले पाती।

सहगल कहते हैं, ”पानी इसलिए ही पाकिस्तान जा रहा है। अगर हमारे सिस्टम की तीनों नहरें ठीक हों तो हमारा पानी यहीं काम आ जाए। उधर छोड़ने की जरूरत नहीं पड़े।”

उन्होंने कहा, ”हमारे पास पानी है, पैसा भी है। केवल नहर सही नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं। हमारी सिंचित घोषित 60 प्रतिशत जमीन खाली पड़ी है और पानी पाकिस्तान बह जाता है।”