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राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार, अमेरिकी ट्रेड डील पर प्रधानमंत्री से पूछे पांच सवाल…

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लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका से हुए अंतरिम ट्रेड डील के खिलाफ अपने तेवरों में किसी तरह की नरमी नहीं लाने का इरादे साफ करते हुए रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पांच सवाल पूछे।

साथ ही कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस ट्रेड डील के नाम पर देश के किसानों के साथ विश्वासघात होते हुए दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट पर कहा कि ”मैं प्रधानमंत्री से कुछ आसान सवाल पूछना चाहता हूं।

राहुल गांधी के पीएम से पांच सवाल

पहला डीडीजी इंपोर्ट करने का वास्तव में क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को जीएम अमेरिकी मक्का से बने डिस्टीलर्स ग्रेन खिलाए जाएंगे? क्या इससे हमारे दूध उत्पाद प्रभावी रूप से अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएंगे?”

दूसरा सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम जीएम सोया तेल के आयात की अनुमति देते हैं तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और देशभर के हमारे सोया किसानों का क्या होगा? वे एक और कीमतों का झटका कैसे झेल पाएंगे?

कांग्रेस नेता ने पीएम से तीसरा सवाल किया कि जब आप “अतिरिक्त उत्पाद” कहते हैं तो उसमें क्या-क्या शामिल है? क्या यह समय के साथ दाल और अन्य फसलों को अमेरिकी आयात के लिए खोलने के दबाव का संकेत है?

क्या है नान-ट्रेड-बैरियर्स हटाने का मतलब?

राहुल गांधी ने चौथा प्रश्न उठाते हुए कहा कि ” नान-ट्रेड-बैरियर्स” हटाने का क्या मतलब है? क्या भविष्य में भारत पर जीएम फसलों पर अपने रुख को ढीला करने, खरीद को कमजोर करने या एमएसपी और बोनस को कम करने का दबाव डाला जाएगा?

पांचवा सवाल उठाया कि एक बार यह दरवाजा खुल गया, तो हर साल इसे और ज्यादा खुलने से हम कैसे रोकेंगे?

क्या इसकी रोकथाम होगी, या हर बार सौदे में धीरे-धीरे और भी फसलों को में पर रख दिया जाएगा?

नेता विपक्ष ने कहा कि किसानों को इन सब पर सफाई तो मिलनी ही चाहिए। यह सिर्फ आज की बात नहीं है। ये भविष्य की भी बात है और क्या हम किसी दूसरे देश को भारत की कृषि उद्योग पर लंबे समय की पकड़ बनाने दे रहे हैं।

अगले दशक के लिए क्या होंगी भारत की 3 रिफॉर्म प्राथमिकताएं? पीएम मोदी ने बताया…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर दशक के लिए अपनी3 सुधार प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इन प्राथमिकताओं में गवर्नेंस को आसान बनाना, स्ट्रक्चरल सुधार, गहरा इनोवेशन शामिल है।

पीएम ने कहा कि हमारा देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है।

पीएम मोदी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि ‘सुधार हमारी सरकार का कमिटमेंट है, जिसे हमने पूरी तरह से दिखाया है। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हम छोटे-मोटे बदलावों से सिस्टम में बदलाव की ओर बढ़ गए हैं।’

पीएम ने गिनाई प्राथमिकताएं;पीएम ने कहा, ‘हमारी दिशा साफ है।

पहला, हम ऐसे स्ट्रक्चरल सुधार जारी रखेंगे जो कॉम्पिटिटिवनेस और प्रोडक्टिविटी में सुधार करेंगे। दूसरा, हम टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में इनोवेशन को और गहरा करेंगे। तीसरा, हम शासन को और सरल बनाएंगे ताकि नागरिक और व्यवसाय अधिक आसानी और विश्वास के साथ काम कर सकें’

पीएम ने कहा कि भारत दुनिया में एक डिजिटल लीडर है जो यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों के लेन-देन के तरीके में बुनियादी सुधारों से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत अपने इतिहास में सबसे व्यापक बुनियादी ढांचा विकास देख रहा है, जिसे भविष्य की तत्परता को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रेड एग्रीमेंट पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हमारे FTA टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल, हैंडीक्राफ्ट, जेम्स और दूसरे सेक्टर में MSMEs के लिए मार्केट एक्सेस बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए हैं। उन्होंने भारत की डेवलपमेंट जर्नी में महिलाओं की भूमिका पर भी जोर दिया।

‘रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत…’, अमेरिकी विदेश मंत्री ने कर दिया दावा; क्या बोले जयशंकर?

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दावा किया है कि भारत ने अतिरिक्त रूसी कच्चा तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध और मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े सवाल पर रूबियो ने कहा, “भारत के साथ हमारी बातचीत में हमें अतिरिक्त रूसी तेल न खरीदने का आश्वासन मिला है।”

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि नई दिल्ली रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगी। समझौते के बाद ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को वापस लेने की बात भी कही थी। हालांकि, इसी सम्मेलन में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोहराया है कि अंतिम फैसला राष्ट्रीय हित और बाजार परिस्थितियों के आधार पर होगा।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत से बंधा है और ऊर्जा से जुड़े निर्णय उपलब्धता, लागत और जोखिम को देखकर लिए जाते हैं। जब जयशंकर से सीधे पूछा गया कि क्या व्यापार समझौते की शर्तों के तहत भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा, तो विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ तौर पर कहा, “अगर आपके सवाल का मतलब यह है कि क्या मैं स्वतंत्र सोच रखते हुए अपने फैसले खुद लूंगा और ऐसे विकल्प चुन सकता हूं जो आपकी सोच से मेल न खाएं- तो हां, ऐसा हो सकता है।”

जयशंकर ने हालांकि स्पष्ट किया कि भारत की विदेश और ऊर्जा नीति स्वतंत्र निर्णय-प्रक्रिया पर आधारित रहेगी। उनके मुताबिक वैश्विक तेल बाजार जटिल है और भारतीय तेल कंपनियां भी अन्य देशों की तरह उपलब्धता, कीमत और संभावित जोखिम को तौलकर खरीद का फैसला करती हैं। भारत ने अब तक औपचारिक रूप से न तो अमेरिकी दावों की पुष्टि की है और न ही खंडन किया है।

म्यूनिख सम्मेलन के दूसरे दिन जयशंकर की कई अहम द्विपक्षीय बैठकें

म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन के दूसरे दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने सम्मेलन अध्यक्ष वोल्फगैंग इ¨शगर से बातचीत को उपयोगी बताया। जर्मनी के सीडीयू/सीएसयू नेता जेन्स स्पान के साथ भारत-जर्मनी संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। रोमानिया की विदेश मंत्री ओआना-सिल्विया तोइउ से मुलाकात में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं की समीक्षा की गई।

जयशंकर ने जी7 देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात कर संयुक्त राष्ट्र सुधार एजेंडा के प्रति भारत का समर्थन दोहराया और समुद्री सुरक्षा, बंदरगाह सुरक्षा व वैश्विक संचार लाइनों की सुरक्षा में भारत की भूमिका पर जोर दिया। सम्मेलन के इतर उन्होंने कनाडा, जापान और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी भेंट की।

AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत एकदम सही स्थान’; UN प्रमुख ने की अर्थव्यवस्था की तारीफ…

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा है कि भारत एक बहुत सफल उभरती अर्थव्यवस्था है। उसका न केवल ग्लोबल इकोनामी बल्कि वैश्विक मामलों में भी अहम रोल है। यह एआइ शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए एकदम उपयुक्त स्थान है।

गुटेरस ने एक साक्षात्कार में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का लाभ पूरी दुनिया को मिलना चाहिए न कि केवल विकसित देशों या दो सुपरपावरों यानी महाशक्तियों को। उनका इशारा अमेरिका और चीन की ओर था। उन्होंने भारत को इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि यह आवश्यक है कि एआइ का विकास सभी के लाभ के लिए हो।

20 फरवरी तक आयोजित होगा एआइ शिखर सम्मेलन

ग्लोबल साउथ के देश भी इसका हिस्सा बनें। 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला यह उच्चस्तरीय कार्यक्रम वैश्विक दक्षिण में पहला एआइ शिखर सम्मेलन है जो ‘लोगों, ग्रहों और प्रगति’ के तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है।

सार्वभौमिक उपकरण बनाना आवश्यक

गुटेरस ने कहा कि एआइ को मानवता के लाभ के लिए एक सार्वभौमिक उपकरण बनाना आवश्यक है। उन्होंने भारत की भूमिका को उजागर करते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन एआइ की सभी संभावनाओं और जोखिमों पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करेगा।

पीएम मोदी से बातचीत के लिए उत्सुक

गुटेरस ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हालिया व्यापार समझौता अच्छा उदाहरण है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मजबूत करता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भारत आने को लेकर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि दुनिया में भारत के योगदान अहम है और वह नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत करने के लिए बहुत उत्सुक हूं।

दिल्ली में आज से सबसे बड़ी AI समिट, पीएम मोदी बोले-‘दुनिया को हमारे सामर्थ्य का पता चलेगा’

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भारत में आज से इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट शुरू होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 फरवरी, 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी में तेजी से तरक्की कर रहा है।

उन्होंने एक्स पर कहा, “यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि India AI Impact Summit के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है। दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये। विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।”

दिल्ली में होगा एआई का राष्ट्रीय प्रदर्शन

इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ होगा और यह राष्ट्रीय प्रदर्शन होगा। इसमें 600 से ज्यादा हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप और 13 कंट्री पवेलियन होंगे जो AI इकोसिस्टम में इंटरनेशनल कोलेबोरेशन दिखाएंगे। यह एक्सपो ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म, स्टार्टअप, एकेडेमिया, रिसर्च इंस्टीट्यूशन, सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट और इंटरनेशनल पार्टनर को एक साथ लाएगा।

आज समिट का पहला दिन

समिट का पहला दिन 16 फरवरी से शुरू होगा और इसमें रोड सेफ्टी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस किया जाएगा, जिसमें भारत में रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के लिए डेटा-ड्रिवन सॉल्यूशन शामिल होंगे। पहले सेशन में यह पता लगाया जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने में कैसे असर डाल सकता है।

इस सेशन में क्रैश पैटर्न को समझने, रिस्क का अनुमान लगाने और प्रोएक्टिव इंटरवेंशन को मुमकिन बनाने के लिए डेटा-ड्रिवन तरीकों पर ज़ोर दिया जाएगा। इसमें सुरक्षित मोबिलिटी, ड्राइवर ट्रेनिंग और डेटा-ड्रिवन हाइपरलोकल मॉडल के डेवलपमेंट में मदद के लिए स्केलेबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एप्लिकेशन पर भी चर्चा की जाएगी।

प्रियंक खरगे ने आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए, धन शोधन का लगाया आरोप…

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कर्नाटक मंत्री का आरएसएस पर हमला

कर्नाटक सरकार के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के प्रमुख नेता प्रियंक खरगे ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी कार्यप्रणाली, देशभक्ति और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाए।

खरगे ने आरएसएस पर ‘धन शोधन’ में संलिप्त होने का आरोप लगाया और इसके आय के स्रोतों पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि देश में लागू कानून और संविधान आरएसएस पर भी लागू होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा, ‘आरएसएस ने 52 वर्षों तक अपने कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया और हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हैं।’

एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘आरएसएस के पास 2,500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है, जो अमेरिका और इंग्लैंड से जुड़े हैं। ये उनसे पैसे लेते हैं और मैं स्पष्ट कर रहा हूं कि ये लोग धन शोधन में शामिल हैं।’

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि आरएसएस को पैसे कहां से मिलते हैं और कैसे मिलते हैं, इस पर सवाल उठाना आवश्यक है। ‘वे चाहते हैं कि हम अच्छे नागरिक बनें, आयकर दें, लेकिन वे खुद स्वतंत्र रहना चाहते हैं। यह कैसे संभव है?’

प्रियंक खरगे के इस बयान ने कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति में एक नया विवाद उत्पन्न करने की संभावना को जन्म दिया है। कांग्रेस ने हमेशा आरएसएस की विचारधारा पर हमला किया है, लेकिन ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ जैसे सीधे वित्तीय आरोप इस टकराव को एक नए स्तर पर ले गए हैं। अब यह देखना होगा कि भाजपा और आरएसएस इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग का कड़ा कदम…

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निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। आयोग ने चुनाव से संबंधित कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए सात अधिकारियों को गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप में तुरंत निलंबित कर दिया है।

ये सभी अधिकारी सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

निलंबन के कारण

निलंबित अधिकारियों ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं की हैं। इनमें शामिल हैं: गंभीर कदाचार: विधिक प्रावधानों का उल्लंघन; >कर्तव्य में लापरवाही: मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को गंभीरता से न लेना; अधिकारों का दुरुपयोग: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारों का गलत इस्तेमाल।

आयोग और राज्य सरकार के बीच टकराव

यह कार्रवाई उस समय की गई है जब निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। आयोग का यह कड़ा रुख यह दर्शाता है कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का भारत दौरा: AI, रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा”

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार रात को तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचेंगे। इस दौरान वे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करना है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के “आपसी विश्वास और गहराई” को दर्शाता है।

बाइलेटरल सहयोग पर चर्चा

विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा, “इस यात्रा के दौरान, दोनों नेता होराइजन 2047 रोडमैप के तहत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।” इसके अतिरिक्त, वे आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सहयोग शामिल है। दोनों नेता मुंबई में इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन भी करेंगे, जो 2026 में मनाया जाएगा।

रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते

डिफेंस सेक्टर: ₹3.25 लाख करोड़ की ‘राफेल’ डील पर नज़र

फ्रांस वर्तमान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। इस दौरे का मुख्य आकर्षण 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद का समझौता हो सकता है।

मेक इन इंडिया पर जोर: इस डील के तहत 18 जेट ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में फ्रांस से आएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

नौसेना की मजबूती: भारतीय नौसेना पहले ही 26 राफेल-M का ऑर्डर दे चुकी है, और इस नई डील से वायुसेना की मारक क्षमता में वृद्धि होगी।

इंडो-पैसिफिक में सहयोग

इंडो-पैसिफिक: चीन की चुनौती का मिलकर सामना

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया की कुल GDP का लगभग 60% हिस्सा है। इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत और फ्रांस का सहयोग रणनीतिक रूप से आवश्यक हो गया है।

फ्रांस की मौजूदगी: रीयूनियन और न्यू कैलेडोनिया जैसे फ्रांसीसी द्वीपों के कारण फ्रांस इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

सप्लाई चेन और स्थिरता: दोनों देश मिलकर सप्लाई चेन में विविधता लाने और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा करेंगे।

AI और इनोवेशन पर ध्यान

AI और इनोवेशन: 2026 ‘ईयर ऑफ इनोवेशन’

मैक्रों की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ है।

तकनीकी सहयोग: प्रधानमंत्री मोदी के साथ मैक्रों इस समिट में भाग लेंगे, जो जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।

ईयर ऑफ इनोवेशन: दोनों नेता मुंबई में ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जिसका उद्देश्य पूरे वर्ष तकनीकी, अनुसंधान और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।

दीर्घकालिक रणनीति

‘होराइजन 2047’ रोडमैप

यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 में फ्रांस यात्रा के एक वर्ष बाद हो रहा है। बातचीत का मुख्य आधार ‘होराइजन 2047’ रोडमैप होगा, जो भारत और फ्रांस के बीच कूटनीतिक संबंधों के 100 वर्ष पूरे होने (2047 में) तक के लिए एक दीर्घकालिक खाका तैयार करता है।

इंडो-पैसिफिक में सहयोग का महत्व

इंडो-पैसिफिक की उलझन

मैक्रों के भारत दौरे से नई दिल्ली और पेरिस को इंडो-पैसिफिक में अपने सहयोग को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जो एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहाँ चीन अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। फ्रांस के समर्थन से, भारत इस क्षेत्र में चीनी प्रभाव का मुकाबला करना चाहता है।

यह ध्यान देने योग्य है कि इंडो-पैसिफिक दुनिया के कुल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का लगभग 60 प्रतिशत है, और भारत और फ्रांस इस क्षेत्र को सुरक्षित करने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सप्लाई चेन में विविधता लाने का प्रयास कर रहे हैं।

राजपाल यादव की जमानत याचिका खारिज, तिहाड़ जेल में बने हुए हैं अभिनेता…

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बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव अभी भी तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेक बाउंस के मामलों में लगभग 9 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के लिए उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।

12 फरवरी को उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान, अदालत ने शिकायतकर्ता को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अगली सुनवाई आज, 16 फरवरी, 2026 को निर्धारित की गई है।

ऋण देने वाली कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि उन्होंने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन यह अभी तक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ है। इसके बाद, अदालत जल्द ही राजपाल की जमानत याचिका पर विचार करेगी।

फिल्म उद्योग के सहयोगी आगे आए

इस मामले से अनजान लोगों के लिए जानकारी है कि हिंदी फिल्म उद्योग के कई प्रमुख सदस्य, जैसे सोनू सूद, वरुण धवन, और मीका सिंह, ने राजपाल यादव को आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। आज, 16 फरवरी, 2026 को, दिल्ली उच्च न्यायालय अभिनेता राजपाल यादव की 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। पिछली सुनवाई में, अदालत ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था और शिकायतकर्ता से जवाब मांगा था।

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: आज के ताजा रेट्स पर नजर…

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16 फरवरी 2026 को, यदि आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो वर्तमान कीमतों पर ध्यान देना आवश्यक है। सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर कमी आई है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत ₹1.55 लाख से नीचे गिर गई है, जबकि चांदी की कीमत ₹7,000 से अधिक घटकर ₹2,36,908 प्रति किलो हो गई है।

निवेशक फिर से मुनाफा बुकिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पिछले दिन, मार्च एक्सपायरी वाली चांदी ₹7,280 (3.08%) की वृद्धि के साथ ₹2,43,715 प्रति किलो पर पहुंच गई थी। वहीं, अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना ₹2,819 (1.84%) महंगा होकर ₹1,55,655 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। सोने और चांदी की कीमतों में अचानक आई इस तेजी और गिरावट ने खरीदारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या दाम फिर से अपने पुराने रिकॉर्ड को पार करेंगे या मुनाफा बुकिंग के कारण फिर से नीचे आएंगे।

इस लाइव ब्लॉग में हम आपको दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के रेट्स के बारे में पल-पल की जानकारी देंगे। आपके शहर में 22K और 24K का भाव क्या है? क्या आज खरीदारी करना सही रहेगा या थोड़ा इंतजार करना चाहिए? विशेषज्ञों की राय, निवेश के लिए सही सलाह और कमोडिटी मार्केट के ताजा अपडेट्स।

सोने और चांदी की कीमतों में आज आई गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। यदि हम आज की कीमतों की तुलना इनके ‘ऑल-टाइम हाई’ से करें, तो दाम काफी कम हो गए हैं।

सोने का अब तक का रिकॉर्ड हाई ₹1,83,000 प्रति 10 ग्राम रहा है। आज MCX पर सोना ₹1,54,248 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इस हिसाब से सोना अपने ऑल-टाइम हाई से लगभग ₹28,752 प्रति 10 ग्राम सस्ता मिल रहा है।

चांदी ने ₹4,20,000 प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ था। आज के ₹2,35,624 के भाव के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से लगभग ₹1,84,376 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है.