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“IND vs SA: गुवाहाटी टेस्ट ड्रॉ कराने के लिए भारत को बदलना होगा इतिहास, आंकड़े दे रहे गवाही”

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भारत और साउथ अफ्रीका के बीच गुवाहाटी में चल रहा दूसरा टेस्ट मैच अब अपने अंतिम दिन (26 नवंबर 2025) में पहुंच चुका है. टीम इंडिया के सामने करो या मरो का सवाल है कि क्या वो इस मैच को ड्रॉ भी कर पाएगी?

इस सीरीज का पहला मैच कोलकाता में 30 रन से हारने के बाद अब सीरीज में 0-1 से पीछे चल रही भारतीय टीम को सीरीज बराबर करने के लिए यह मैच बचाना ही होगा. हालांकि, जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वो बिल्कुल भी भारत के हक में नहीं बोल रहे.

चौथे दिन भारत ने गंवाए 2 विकेट

मंगलवार को यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल आउट हो गए. अब पांचवें दिन नाइटवॉचमैन कुलदीप यादव और साई सुदर्शन क्रीज पर हैं. भारत के पास 8 विकेट बाकी हैं और पूरे 90 ओवर खेलने हैं. यानी कुल मिलाकर 106 ओवर तक टिकना होगा.

25 साल में भारत ने चौथी पारी में कितने ओवर खेले?

2008, चेन्नई बनाम इंग्लैंड- 98.3 ओवर (जीत)

2001, अहमदाबाद बनाम इंग्लैंड- 97 ओवर (ड्रॉ)

2005, बेंगलुरु बनाम पाकिस्तान- 90 ओवर (हार)

2004, बेंगलुरु बनाम ऑस्ट्रेलिया- 87.4 ओवर (हार)

2011, दिल्ली बनाम वेस्टइंडीज- 80.4 ओवर (जीत)

यानी पिछले 25 साल में भारत ने चौथी पारी में कभी 100 ओवर से ज्यादा नहीं खेले हैं. 98.3 ओवर ही सबसे ज्यादा हैं. अब गुवाहाटी में 106 ओवर तक टिकने की जरूरत है यह अपने आप में एक नया इतिहास होगा.

549 रन का लक्ष्य क्या यह नामुमकिन है?

टेस्ट क्रिकेट के पूरे इतिहास में अभी तक कोई भी टीम 549 रन का लक्ष्य चौथी पारी में नहीं चेज कर पाई है. सबसे बड़ा सफल चेज वेस्टइंडीज ने 2003 में एंटीगा में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 418 रन बनाकर किया था. भारत का सबसे बड़ा सफल चेज 2008 में चेन्नई में ही इंग्लैंड के खिलाफ 387 रन रहा था. ऐसे में जीत तो दूर, सिर्फ ड्रॉ करना भी बेहद मुश्किल लग रहा है.

भारतीय बल्लेबाजों की असली परीक्षा

साई सुदर्शन अपना पहला टेस्ट खेल रहे हैं. कुलदीप यादव नाइटवॉचमैन के तौर पर आए हैं. अब ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ियों को लंबी-लंबी पारियां खेलनी होंगी. गुवाहाटी की पिच अभी भी स्पिन और उछाल ले रही है. मार्को जैंसन और केशव महाराज जैसे गेंदबाज खतरनाक हैं.

“26/11 मुंबई हमले की 17वीं बरसी आज, 150 जिंदगियों को निगल गई वो काली रात, जानिए उस दिन क्या-क्या हुआ”

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26/11 का जख्म आज भी भारत की यादों में ताजा है. 17वीं बरसी पर देश उन निर्दोष लोगों और बहादुर जवानों को याद कर रहा है, जिन्होंने मुंबई को आतंक के चंगुल से मुक्त कराने के लिए अपनी जान तक न्यौछावर कर दी.

इस हमले को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था. 60 घंटे तक चली इस भीषण जंग में कई आम नागरिकों, विदेशी मेहमानों और देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने जान गंवाई. ये हमला भारतीय सुरक्षा इतिहास का बड़ा मोड़ साबित हुआ.

दस आतंकवादियों ने मुंबई के कई इलाकों में समन्वित हमले किए, जिनमें 150 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें हेमंत करकरे, विजय सालस्कर, अशोक काम्टे और तुकाराम ओम्बाले जैसे मुंबई के शीर्ष पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. ये हमले ताज महल होटल, ट्राइडेंट होटल, ओबेरॉय होटल, नरीमन हाउस, कोलाबा कॉज़वे और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर किए गए.

26 नवंबर के दिन क्या-क्या हुआ?

रात 9:20 बजे: कोलाबा कॉज़वे पर लियोपोल्ड कैफ़े में दो आतंकवादियों ने गोलीबारी की जिसमें 10 लोग मारे गए. यह कैफे स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों के बीच भी घूमने की पसंदीदा जगह है. रात 11 बजे तक चार आतंकवादी प्रतिष्ठित ताज महल होटल में घुस गए, दो ट्राइडेंट होटल में, दो आतंकवादी नरीमन हाउस में घुस गए, और अजमल कसाब समेत दो आतंकवादी छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) की ओर बढ़ गए.

कसाब और उसके साथ आए आतंकवादी ने व्यस्त रेलवे स्टेशन पर यात्रियों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें एक ही झटके में 58 लोग मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हो गए. सुबह 9:45 बजे दो आतंकवादी नरीमन हाउस में घुस गए और केंद्र पर हमला कर दिया.

रात 10:30 बजे: दो आतंकवादी सीएसटी के पास कामा अस्पताल की ओर बढ़े और हमला कर दिया. जैसे ही अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें देखा, उन्होंने तुरंत दरवाज़े बंद कर दिए. आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. तीन शीर्ष पुलिस अधिकारियों: कामटे, करकरे और सालस्कर ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन आतंकवादियों के पास मौजूद बेहतर हथियारों की वजह से वे मारे गए.

आतंकवादियों ने तीन पुलिस अधिकारियों की जीप छीन ली और भाग गए. लेकिन पुलिस ने जीप को रोक लिया, एक आतंकवादी को मार गिराया और कसाब को गिरफ्तार कर लिया.

रात 11 बजे ताज महल होटल में

चार आतंकवादी होटल में घुस गए और होटल के अंदर जो भी दिखाई दिया, उसे गोलियों से भून दिया. मुंबई पुलिस ने विशेष बलों के आने तक आतंकवादियों को अंदर ही रोकने के प्रयास में होटल को घेर लिया, जबकि नौसेना के कमांडो तैनात किए गए. 26/11 के दौरान हमला झेलने वाला दूसरा स्थल ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल था, जहाँ दो आतंकवादियों का एक और समूह लगभग उसी समय घुसा, जब अन्य आतंकवादी ताज में घुसे थे. ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल में हुए इस भीषण हमले में 30 से अधिक लोग मारे गए थे.

27 नवंबर को प्रातः 2:30 बजे: भारतीय सेना के जवान पहुंचे और होटल की लॉबी में प्रवेश किया.

27 नवंबर को सुबह 4:00 बजे: पहले चरण के बचाव अभियान में 200 लोगों को रिहा कर दिया गया, लेकिन 100 से ज़्यादा मेहमान अभी भी बंधक बने हुए थे. ताज और ओबेरॉय ट्राइडेंट में भीषण मुठभेड़ जारी रही क्योंकि एनएसजी कमांडो आतंकवादियों से भिड़ गए. इन दोनों होटलों में विस्फोट की भी घटना हुई.

27 नवंबर-29 नवंबर: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) जैसे और भी विशेष बल पहुँच गए. एनएसजी, नौसेना कमांडो और भारतीय सेना के बीच समन्वय से एक संयुक्त अभियान चलाया गया और आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया. सेना और नौसेना ने स्थिति का जायजा लिया. दिन में और शाम तक, विशेष बल और जाट रेजिमेंट पहुँच गए.

नरीमन हाउस में, एनएसजी कमांडो छत पर उतरे, जबकि पास की इमारतों में स्नाइपर्स सुरक्षा के लिए तैनात थे. नरीमन हाउस में दो आतंकवादी मारे गए.

ओबेरॉय ट्राइडेंट की घेराबंदी 28 नवंबर को बंधकों को छुड़ाने और दो आतंकवादियों को मार गिराने के बाद समाप्त हुई. ताज महल पैलेस होटल में अभियान अगली सुबह तक जारी रहा और 29 नवंबर को सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच कमांडो ने शेष आतंकवादियों को मार गिराया और घेराबंदी समाप्त हो गई.

“दिल्ली आतंकी हमले में NIA को मिली बड़ी कामयाबी, फरीदाबाद से सातवां आरोपी सोयब गिरफ्तार”

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दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट ने देश को दहलाकर रख दिया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी कार बम विस्फोट मामले में सोयब को गिरफ्तार किया है.

एजेंसी का कहना है कि सोयब ने आतंकवादी उमर उन नबी की मदद की थी. यह गिरफ्तारी इस मामले की सातवीं है. एनआईए इस हमले के पीछे छिपी पूरी साजिश का पता लगाने के लिए देशभर में लगातार जांच और छापेमारी कर रही है. इस हमले ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है.

एनआईए ने अब तक छह अन्य प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार किया है और आत्मघाती बम हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. विभिन्न राज्यों में पुलिस के साथ समन्वय में अभियान जारी है ताकि आतंकवादियों के नेटवर्क को पूरी तरह उजागर किया जा सके.

कहां से हुई गिरफ्तारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सोयब को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है. उस पर आतंकवादी उमर उन नबी को पनाह देने का आरोप है. सोयब ने कार बम विस्फोट से पहले उन नबी को रसद सहायता भी प्रदान की थी. इस मामले में यह सातवीं गिरफ्तारी है. एनआईए हमले के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है.

छापेमारी जारी

एनआईए ने इससे पहले आरसी-21/2025/एनआईएडीएलआई मामले की जांच के दौरान कार बम हमलावर उमर के छह अन्य प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार किया था. एजेंसी आत्मघाती बम विस्फोट से जुड़े विभिन्न सुरागों की तलाश में जुटी है और इस भीषण हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और पता लगाने के लिए संबंधित पुलिस बलों के साथ समन्वय में विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही है. इस घातक आतंकी हमले के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के प्रयास जारी हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

इस हमले और गिरफ्तारी ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एनआईए की कार्रवाई से आतंकवाद के खिलाफ सरकार की सतर्कता और तेज हुई है. जांच से मिलने वाले सबूतों के आधार पर भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने की तैयारी की जा रही है.

आगे की कार्रवाई

एनआईए का कहना है कि सोयब की गिरफ्तारी हमले के पीछे की पूरी साजिश उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. एजेंसी आगे भी छापेमारी और पूछताछ जारी रखेगी ताकि दिल्ली आतंकी हमला मामले के सभी पहलुओं का खुलासा किया जा सके.

“सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार? किस पर मेहरबान होगा हाईकमान; जानें कब तक आएगा कांग्रेस का कर्नाटक सरकार पर फैसला”

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कांग्रेस हाईकमान जल्द ही कर्नाटक की राजनीति पर बड़ा फैसला लेने जा रहा है. पार्टी सूत्रों के अनुसार यह निर्णय संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले यानी 1 दिसंबर से पहले आ सकता है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जल्द ही राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे. यह बैठक आज या कल हो सकती है. इसी के बाद कर्नाटक की सत्ता संतुलन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को 28 या 29 नवंबर को दिल्ली बुलाया जा सकता है. पिछले कई हफ्तों से दोनों खेमों के बीच पावर-शेयरिंग को लेकर जारी अटकलों से पार्टी नेतृत्व चिंतित है. पार्लियामेंट सेशन शुरू होने से पहले स्थिति साफ होने की उम्मीद है, क्योंकि हाईकमान पार्टी के एकमात्र बड़े दक्षिणी गढ़ में अस्थिरता की किसी भी तरह की धारणा से बचना चाहता है.

किसका होगा अंतिम निर्णय?

सिद्धारमैया गुट वर्तमान व्यवस्था को कम से कम मार्च तक जारी रखने और कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की मांग कर रहा है. वहीं शिवकुमार समर्थक 2023 में सरकार गठन के समय हुए अनौपचारिक समझौते के अनुसार पद हस्तांतरण की समयसीमा तय करने की मांग कर रहे हैं. अंतिम निर्णय राहुल गांधी और शीर्ष नेतृत्व पर निर्भर करेगा.

हाईकमान का क्या होगा फैसला?

कर्नाटक इकाई में बढ़ते दबाव के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि हाईकमान ‘कर्नाटक फैसले’ पर क्या रुख अपनाता है. सिद्धारमैया खेमे का दावा है कि राहुल गांधी मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं और अधिकांश विधायकों का समर्थन भी उन्हीं को है. दूसरी ओर शिवकुमार कैंप के नेताओं, जैसे रमनगरा के विधायक इकबाल हुसैन, ने खुलेआम कहा है कि डीके शिवकुमार ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे.

कर्नाटक में सत्ता संतुलन को लेकर चल रही इस खींचतान का समाधान अब संसद सत्र शुरू होने से पहले होने की पूरी संभावना है. फैसला जो भी हो, यह स्पष्ट है कि कांग्रेस अपने दक्षिणी गढ़ में किसी भी तरह की अस्थिरता की छवि नहीं बनने देना चाहती. सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी चिंतित है और संसद सत्र से पहले स्पष्टता लाना चाहती है.

“4 नए लेबर कोड लागू होने के बाद हड़ताल नहीं कर पाएंगे कर्मचारी? यहां जानें पूरी सच्चाई?”

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केंद्र सरकार ने देश में 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं. ये कोड अब पहले के 29 अलग-अलग श्रम कानूनों की जगह लेंगे. नए नियमों के आने से ग्रेच्युटी, छंटनी, नौकरी की शर्तें और हड़ताल से जुड़े कई प्रावधान बदल गए हैं.

कई कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि इन कानूनों के बाद कर्मचारियों से हड़ताल का अधिकार छीन लिया गया है यानी अब कर्मचारी हड़ताल नहीं कर पाएंगे. क्या यह सच है? आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं.

सरकार ने क्या कहा

21 नवंबर 2025 से लागू किए गए इन चार कोड में वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता (2020) शामिल हैं. हाल ही में लागू किए गए 4 नए लेबर कोड को लेकर सरकार का कहना है कि इन कोड्स से मजदूरों के अधिकार पहले से अधिक सुरक्षित होंगे. अब हर कर्मचारी को लिखित नियुक्ति पत्र मिलेगा, जिससे नौकरी की शर्तें और वेतन स्पष्ट हो जाएंगे. ओवरटाइम, बीमा, पेंशन और सुरक्षा से संबंधित नियम भी नए तरीके से तय किए गए हैं.

हड़ताल क्या होती है?

हड़ताल वह स्थिति है, जब किसी विभाग या संगठन के कर्मचारी विरोध जताने के लिए एक साथ काम बंद कर देते हैं. इसमें सिर्फ वही कर्मचारी शामिल होते हैं, जो प्रदर्शन कर रहे होते हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर बैंक कर्मचारी हड़ताल करते हैं, तो केवल बैंक का काम रुकेगा, बाकी क्षेत्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

क्या अब हड़ताल करना मना है?

सरकार ने साफ किया है कि हड़ताल करने का अधिकार अभी भी सुरक्षित है. किसी भी कर्मचारी से हड़ताल का हक नहीं छीना गया है. बदलाव केवल यह है कि अब हड़ताल करने से 14 दिन पहले कर्मचारियों को नोटिस देना अनिवार्य होगा.

नए नियमों के अनुसार:

  1. हड़ताल या तालाबंदी करने से 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य होगा.
  2. अगर 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी एक साथ आकस्मिक अवकाश लेते हैं, तो इसे भी हड़ताल के दायरे में शामिल किया जाएगा. ताकि बिना सूचना अचानक काम रुकने की स्थिति न बने.
  3. जब सुलह या न्यायाधिकरण में कोई मामला चल रहा होगा, उस दौरान हड़ताल नहीं की जा सकेगी.

सरकार का कहना है कि नोटिस देने की शर्त से अचानक होने वाली हड़तालें रुकेंगी और कामकाज बाधित नहीं होगा. इससे दोनों पक्षों मजदूर और मालिक को विवाद सुलझाने का समय मिलेगा और आर्थिक नुकसान भी कम होगा.

विरोध क्यों हो रहा है?

वहीं, मजदूर संगठनों का कहना है कि ये नियम मालिकों के हित में हैं. अगर हड़ताल बिना नोटिस या नियमों के खिलाफ की गई तो उसे गैर-कानूनी मान लिया जाएगा और मजदूर संगठन की मान्यता भी रद्द हो सकती है.

पहले क्या नियम थे?

औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 22 के तहत पब्लिक यूटिलिटी सर्विस( बिजली, पानी व बैंक) के कर्मचारियों को पहले से ही 14 दिन का नोटिस देना पड़ता था. अब यह नियम सभी क्षेत्रों पर लागू कर दिया गया है.

“नेतन्याहू के भारत दौरे की नई तारीख का जल्द होगा ऐलान, इजरायली PMO ने भारत की सुरक्षा पर जताया भरोसा, PM मोदी को लेकर कही ये बात”

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से उनके भारत दौरे के को लेकर बयान जारी किया गया है। इजरायली PMO ने सोशल मीडिया के उन सभी अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दिल्ली के लाल किले के पास हाल ही में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा चिंताओं के चलते नेतन्याहू ने अपना भारत दौरा स्थगित कर दिया है।

वहीं, बयान में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भी बड़ी बात कही है।

इजरायल पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का भारत दौरा फिलहाल टल गया है। वो दिसंबर में इंडिया आने वाले थे, लेकिन उनकी इस यात्रा को फिलहाल पोस्टपोन कर दिया गया है।नेतन्याहू की भारत यात्रा टलने का दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन जोड़ा जा रहा था और ये भी कहा जा रहा था कि सुरक्षा कारणों से इसे दौरे को टाला गया है। मगर इन सारी अफवाहों को इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने खारिज कर दिया है।

इजरायली PMO ने क्या कहा?

बेंजामिन नेतन्याहू के भारत दौरे को लेकर इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा, भारत और प्रधानमंत्री के साथ इजराइल का रिश्ता बहुत मजबूत है। नेतन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी के बीच भी मजबूत रिश्ता है।PM मोदी के अंडर भारत की सुरक्षा पर PM नेतन्याहू को पूरा भरोसा है और टीमें पहले से ही नई विजिट डेट को कोऑर्डिनेट कर रही हैं।

कब आने वाले थे नेतन्याहू भारत

बता दें कि नेतन्याहू 7 साल के बाद भारत के दौरे पर आने वाले थे। इससे पहले उन्होंने 2018 में देश की यात्रा की थी। उन्होंने 14 से 19 जनवरी 2018 तक की 6 दिवसीय यात्रा की थी। वहीं, पीएम मोदी 2017 में इजरायल गए थे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा फिलहाल टाल है। वैसे इससे पहले भी नेतन्याहू के भारत दौरे को रद्द किया जा चुका है। हालांकि, इजरायली PMO ने स्पष्ट किया कि दोनों देश दौरे की नई तारीख तय करने में लगे हैं और नेतन्याहू को भारत की सुरक्षा पर पूरा भरोसा है।

“साल 2014 का वो पल याद है…संविधान दिवस पर PM मोदी का देश के नाम खत, शेयर किया अनुभव”

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर भारत के नागरिकों को पत्र लिखकर 1949 में संविधान को ऐतिहासिक रूप से अपनाए जाने का स्मरण करते हुए राष्ट्र की प्रगति में इसकी स्थायी भूमिका का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में सरकार ने इस पवित्र दस्तावेज के सम्मान में 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया था। पीएम मोदी ने इस बात का उल्लेख किया कि कैसे संविधान ने साधारण पृष्ठभूमि के व्यक्तियों को उच्चतम स्तर पर राष्ट्र की सेवा करने के लिए सशक्त बनाया है और संसद तथा संविधान के प्रति अपने सम्मान के अनुभव साझा किए।

उन्होंने वर्ष 2014 में संसद की सीढ़ियों पर झुकने और 2019 में सम्मान के प्रतीक के रूप में संविधान को अपने माथे पर धारण करने का स्मरण किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान ने असंख्य नागरिकों को सपने देखने और उन सपनों को साकार करने की शक्ति प्रदान की है। प्रधानमंत्री ने संविधान सभा के सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर और कई प्रतिष्ठित महिला सदस्यों को याद किया, जिनकी दूरदर्शिता ने संविधान को समृद्ध बनाया।

उन्होंने संविधान की 60वीं वर्षगांठ के दौरान गुजरात में आयोजित संविधान गौरव यात्रा तथा इसकी 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित संसद के विशेष सत्र और राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिनमें रिकॉर्ड जन भागीदारी देखी गई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस वर्ष का संविधान दिवस विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत की वर्षगांठ के साथ मेल खाता है।

महात्मा गांधी को याद कर पीएम ने कही ये बात

पीएम मोदी ने कहा कि ये व्यक्तित्व और मील के पत्थर हमें अपने कर्तव्यों की प्रधानता की याद दिलाते हैं, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 51ए में निहित है। उन्होंने महात्मा गांधी के इस विश्वास को याद किया कि अधिकार कर्तव्यों के पालन से निकलते हैं। पीएम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कर्तव्यों को पूरा करना सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार है।

पीएम मोदी ने भविष्य की ओर देखते हुए कहा कि इस सदी की शुरुआत के 25 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, और केवल दो दशकों में भारत औपनिवेशिक शासन से आजादी के 100 वर्ष पूरे कर लेगा। वर्ष 2049 में, संविधान को अपनाए हुए एक सदी हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज लिए गए निर्णय और नीतियां आने वाली पीढ़ियों के जीवन को आकार देंगे। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखें, क्योंकि भारत विकसित भारत की परिकल्पना की ओर अग्रसर है।

प्रधानमंत्री ने मतदान के अधिकार का प्रयोग करके लोकतंत्र को मज़बूत करने के दायित्व पर भी ज़ोर दिया और सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज, 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले पहली बार मतदाता बनने वालों का सम्मान करते हुए संविधान दिवस मनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं में दायित्व और गर्व की भावना जगाने से लोकतांत्रिक मूल्य और देश का भविष्य मज़बूत होगा।

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र के समापन पर नागरिकों से इस महान राष्ट्र के नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करने की अपनी प्रतिज्ञा की पुष्टि करने का आह्वान किया, जिससे एक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण में सार्थक योगदान मिल सके।

जांजगीर-चांपा में SUV और ट्रक की आमने-सामने जोरदार टक्कर, 5 की मौत 3 घायल…

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले भयानक सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई। जिले के सुकली गांव में एक SUV और ट्रक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि SUV के परखच्चे उड़ गए।

हादसे में मौके पर ही 5 लोगों ने दम तोड़ दिया। घायलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जांजगीर-चांपा जिले के सुकली गांव में मंगलवार देर रात एक भयानक सड़क हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। नेशनल हाईवे-49 पर बारात से लौट रही स्कॉर्पियो और तेज रफ्तार ट्रक की आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। इस भीषण हादसे में स्कॉर्पियो (SUV) सवार 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

SUV और ट्रक की आमने-सामने टक्कर

ASP उमेश कश्यप ने घटना के संबंध में बताया कि यह हादसा एक SUV और ट्रक की आमने-सामने टक्कर के कारण हुआ। आगे की जांच जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रक की रफ्तार इतनी तेज थी कि स्कॉर्पियो को बचने का मौका ही नहीं मिला। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कॉर्पियो का आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।

बारात से लौट रहे समय हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक और घायल सभी नवागढ़ क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ये लोग पंतोरा गांव में एक शादी समारोह में शामिल होकर खुशी-खुशी लौट रहे थे। बारात से लौटते समय देर रात करीब 1:30 बजे के आसपास सुकली के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को घटना की सूचना दी गई।

हादसे की सूचना मिलते ही जांजगीर पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि अन्य 5 घायलों को तत्काल जिला अस्पताल जांजगीर लाया गया। वहां डॉक्टरों की भरसक कोशिश के बावजूद दो और लोगों की सांसें थम गईं।

“‘सम्मान, समानता, स्वतंत्रता को महत्व…’, PM मोदी ने याद दिलाई संविधान की ताकत”

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हर साल 26 नवंबर को देश में संविधान दिवस मनाया जाता है। आज संविधान दिवस के खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान बनाने वालों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही बताया कि हमारा संविधान इंसानी इज्जत, बराबरी और आजादी को सबसे ज़्यादा अहमियत देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1949 में संविधान के ऐतिहासिक अंगीकरण को याद करते हुए इसकी राष्ट्र की प्रगति में मार्गदर्शक भूमिका को भी रेखांकित किया।

‘संविधान इज्जत, बराबरी और आजादी को अहमियत…’

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘संविधान दिवस पर हम अपने संविधान बनाने वालों को श्रद्धांजलि देते हैं। उनकी दूर की सोच हमें एक विकसित भारत बनाने की हमारी कोशिश में मोटिवेट करती रहती है। हमारा संविधान मानव सम्मान, समानता और स्वतंत्रता को सबसे ज्यादा महत्व देता है।’

‘नागरिकों का कर्तव्य एक मजबूत लोकतंत्र की नींव’

उन्होंने आगे लिखा, ‘यह हमें अधिकार तो देता है, साथ ही हमें नागरिक के तौर पर हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है, जिन्हें हमें हमेशा पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। ये कर्तव्य एक मजबूत लोकतंत्र की नींव हैं। आइए हम अपने कामों से कॉन्स्टिट्यूशनल वैल्यूज को मजबूत करने का अपना कमिटमेंट दोहराएं।’

देशवासियों के नाम पीएम मोदी की चिट्ठी

इससे पहले पीएम मोदी ने देशवासियों के नाम चिट्ठी लिखी। जिसमें उन्होंने संविधान के प्रति श्रद्धा को लेकर अपना अनुभव साझा किया। पीएम मोदी ने बताया कि 1949 में इसी दिन (26 नवंबर) संविधान सभा ने भारत का संविधान अपनाया था, जो कि देश की तरक्की को रास्ता दिखाता रहा है। लगभग एक दशक पहले साल 2015 में एनडीए सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया।

संविधान ने सपने देखने की ताकत दी- पीएम

प्रधानमंत्री ने संसद और संविधान के प्रति श्रद्धा के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 2014 में संसद की सीढ़ियों पर नमन करना और 2019 में संविधान को अपने माथे पर रखना, यह सब उनकी श्रद्धा का प्रतीक रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान ने मुझे और अनगिनत नागरिकों को सपने देखने और उन्हें साकार करने की शक्ति दी है।

‘2049 में संविधान अंगीकरण के 100 साल होंगे पूरे’

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि इस सदी के 25 साल बीत चुके हैं और दो दशक बाद भारत औपनिवेशिक शासन से 100 वर्ष की आजादी का गौरव मनाएगा। 2049 में संविधान को अंगीकार किए हुए 100 साल हो जाएंगे। पीएम ने कहा कि आज लिए जा रहे निर्णय आने वाली पीढ़ियों के जीवन को आकार देंगे। विकासशील भारत की दिशा में अपने कर्तव्यों को सबसे आगे रखना सभी नागरिकों का दायित्व है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि युवाओं में जिम्मेदारी और गर्व की भावना से लोकतांत्रिक मूल्यों और देश का भविष्य मजबूत होगा।

“अंत की ओर ‘लाल आतंक’! छत्तीसगढ़ में एक साथ 19 महिलाओं समेत 28 नक्सलियों का सरेंडर, 90 लाख का था इनाम”

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देश में ‘लाल आतंक’ के खिलाफ लड़ाई अब निर्णाय मोड में है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। कई खूंखार नक्सलियों को ढेर किया जा रहा है, तो वहीं बड़ी संख्या में नक्सली खुद सरेंडर कर रहे हैं।

अब छत्तीसगढ़ में 19 महिलाओं समेत 28 एक्टिव नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम था।

जानकारी के अनुसार यह सभी नक्सली लंबे समय से अबूझमाड़ डिवीजन में सक्रिय थे। तीन लोगों ने हथियार समेत सरेंडर किया है, जिसमें एसएलआर, इंसास, और थ्री नॉट 3 गन शामिल रहे।

28 नक्सलियों ने डाले हथियार

छत्तीसगढ़ में जिन 28 नक्सलियों ने सरेंडर किया, उसमें 19 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल थे। नक्सल लीडर और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) कुतुल एरिया कमेटी के डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVC) दिनेश पांडे ने भी हथियार डाल दिए। नक्सलियों के सरेंडर के दौरान बस्तर IG सुंदरराज पी, BSF-ITBP के ऑफिसर, नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस रॉबिन्सन गुड़िया मौजूद रहे।

नक्सलियों के बड़े पैमाने पर सरेंडर भी हो रहे हैं- कलेक्टर

इस पर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा, “पुलिस लगातार कैंप लगा रही है। नक्सलियों के बड़े पैमाने पर सरेंडर भी हो रहे हैं। इसका सीधा असर कई ऐसे गांवों पर पड़ रहा है, जो दशकों से दुर्गम थे, जहां पहुंचना नामुमकिन था।”

उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर करीब 67 गांव अब हमारे कंट्रोल में आ गए हैं। हम 10 किलोमीटर के दायरे को देखते हैं और वहां डेवलपमेंट का काम शुरू करते हैं और यहां हम सबसे पहले सभी लोगों का सर्वे करते हैं। उन्हें आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और दूसरी सभी स्कीमों से जोड़ने के लिए एक एक्शन प्लान बनाया जाता है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना को भी बड़े पैमाने पर मंजूरी दी गई है। हम गांव की बेसिक सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली और पानी पर भी काम शुरू करते हैं। हमने इस एकेडमिक साल में ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने की भी कोशिश की है। हेल्थ टीम भी रेगुलर कैंप लगाती है, कार्ड बनाती है और लोगों की स्क्रीनिंग करती है, साथ ही आयुष्मान कार्ड भी जारी करती है।”

IG ने क्या-क्या कहा?

IG बस्तर पी सुंदरराज ने कहा, “28 माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्य धारा में शामिल होने के इरादे से नारायणपुर जिला हेडक्वार्टर में आगे आए। उन्होंने सरकार की मंजूरी भी मान ली है। समुदाय ने उनका स्वागत किया और उनके पुनर्वास के लिए सभी तरह के प्रोग्राम तुरंत शुरू किए जाएंगे।”

उन्होंने बताया कि इसमें एक कमेटी मेंबर, छह एरिया कमेटी मेंबर, और 14 पार्टी मेंबर शामिल हैं। उन्होंने अपने हथियार भी सरेंडर कर दिए। हम सरकार से बार-बार उन सभी बचे हुए माओवादियों से अपील करना चाहते हैं जो अभी भी जंगल में बंदूकें और हिंसा का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह मुख्यधारा में शामिल होने का सही समय है।