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मुख्यमंत्री श्री बघेल ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ल को उनकी पुण्यतिथि पर दी विनम्र श्रद्धांजलि

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ल को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री बघेल आज सवेरे यहाँ लाभांडी स्थित राधेश्याम भवन पहुंचे और वहां स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ल की समाधि पर तथा उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय श्री शुक्ल को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री शुक्ल अनेक वर्षों तक केंद्र में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते रहे, छत्तीसगढ़ के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि झीरम घाटी के हमले में कांग्रेस के अनेक नेता शहीद हुए, स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ला ने 85 वर्ष की उम्र में चार गोलियां झेलीं और 25 मई से 11 जून 2013 तक वे जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष करते रहे, 11 जून 2013 को उनका निधन हो गया। श्रद्धांजलि सभा में राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल, विधायक सर्वश्री सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, विकास उपाध्याय, श्रीमती अनिता शर्मा, रायपुर नगर निगम के महापौर श्री प्रमोद दुबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ : सीएम भूपेश बघेल और बस्तर के सांसद,विधायकों में हुई चर्चा, 4 मांगें हुई स्वीकार

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एनएमडीसी बैलाडीला लौह अयस्क खान परियोजना दंतेवाड़ा के डिपाजिट 13 के संबंध में मंगलवार को मंत्रालय में बस्तर के सांसद दीपक बैज और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के नेतृत्व  प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में बस्तर के अन्य विधायक भी उपस्थित रहे। सीएम भूपेश बघेल ने इस आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल की मांगों को स्वीकार किया है। इसमें वनों की कटाई पर तुरंत रोक, वर्ष 2014 के फर्जी ग्रामसभा के आरोप की जांच कराई जाएगी, क्षेत्र में संचालित कार्यो पर तत्काल रोक लगाई जाएगी और राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को पत्र लिखकर जन भावनाओं की जानकारी दी जाएगी। बैठक में वनमंत्री मो.अकबर भी मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ : माशिमं ने दी छात्रों को सुविधा, अब ऑनलाइन मिलेगा माइग्रेशन सर्टिफिकेट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से माइग्रेशन सर्टिफिकेट अब जबरन नहीं थमाया जाएगा। जिस छात्र को जरूरत होगी, वह ऑनलाइन आवेदन करके इसे आसानी से घर बैठे प्राप्त कर सकता है। इसके लिए अब माशिमं के दफ्तरों में चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। दरअसल माशिमं ने अपने पुराने नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो अब लागू किया गया है। छात्र अब अपना माइग्रेशन सर्टिफिकेट ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। 

प्राचार्य करेंगे सत्यापन
माशिमं के सचिव डॉ. वीके गोयल ने छात्रों के हित में फैसला लेते हुए माइग्रेशन सर्टिफिकेट छापने के बजाय इसे माशिमं की वेबसाइट पर सॉफ्टकॉपी के रूप में अपलोड करा दिया है। जिस विद्यार्थी को जरूरत पड़ेगी वह माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए 110 रुपए ऑनलाइन आवेदन के साथ भुगतान करके अपने संबंधित स्कूल के प्राचार्य के लॉगिन के माध्यम से सर्टिफिकेट निकलवा सकेगा। इसके बाद प्राचार्य ही इस माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर सील और मुहर लगाकर सत्यापित कर सकेंगे। लिहाजा माशिमं के दफ्तर भी जाने की जरूरत नहीं होगी। वहीं पं. रविशंकर शुक्ल विवि समेत प्रदेश के अन्य विवि ने भी यह फैसला लिया है कि प्रदेश के बच्चों को पात्रता प्रमाणपत्र बनवाने की भी जरूरत नहीं है।

J&J बेबी शैंपू की जांच में नहीं मिला फॉर्मलडिहाइड, कंपनी ने कहा- ग्राहकों से ज्यादा जरूर कुछ नहीं

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कोलकाता की सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी में जॉनसन एंड जॉनसन बेबी शैंपू की दोबारा हुई जांच से स्पष्ट हो गया है कि उसमें फॉर्मल्डिहाइड मौजूद नहीं है। राजस्थान एफडीए ने इसकी पुष्टि की है। बीते 5 मार्च को राजस्थान ड्रग्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैंपू की जांच में दो बैच के नमूनों में फॉर्मल्डिहाइड होने की बात कही थी।

कंपनी ने उसके इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि उसके उत्पाद में न तो फॉर्मल्डिहाइड, न ही ऐसा कोई तत्व है जिससे फॉर्मल्डिहाइड का स्राव होता हो। कंपनी ने राजस्थान ड्रग कंट्रोलर के दावों पर सवाल उठाते हुए जांच के तरीकों को भी संदेह के घेरे में रखा था।

कंपनी की तरफ से दावों को चुनौती देने के बाद जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैंपू को सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की लेबोरेटरी में दोबारा जांच के लिए भेजा गया। सेंट्रल कमेटी की रिपोर्ट कई हफ्तों की जांच के बाद आई है।

कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हमें राजस्थान एफडीए के इस निर्णय पर प्रसन्नता है जिससे स्पष्ट होता है कि जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैंपू में फॉर्मल्डिहाइड नहीं पाया जाता।’ कंपनी का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह नतीजा मजिस्ट्रेट की तरफ से दोबारा जांच के आदेश के बाद शीर्ष लेबोरेटरी की जांच से निकला है। कंपनी ने कहा है कि उसके उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से अहम उसके लिए कोई नहीं है। यही वजह है कि उत्पादों की गुणवत्ता का स्तर बनाए रखने के लिए कंपनी कोई कसर नहीं छोड़ती है।

मेट्रो, बस में मुफ्त सफर पर दिल्ली सरकार को सात दिन में 3700 सुझाव

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मेट्रो, बस में मुफ्त सफर पर दिल्ली सरकार को बीते 7 दिनों में 3700 सुझाव मिले हैं। यह सुझाव सरकार की ओर से की गई अपील के बाद जनता की ओर से ई-मेल पर भेजे गए है।

जनता के इस प्रतिक्रिया को देखते हुए अब सुझाव देने की अंतिम तारीख में 15 दिन की बढ़ोतरी कर दी है। अब कोई भी दिल्ली सरकार को मुफ्त सफर की योजना को लागू करने के लिए अपना सुझाव 15 जून के बजाएं 30 जून तक भेज सकता है। दरअसल मुख्यमंत्री अर्रंवद केजरीवाल ने बीते 3 जून को मुफ्त सफर की योजना की घोषणा के साथ उसे लागू करने के लिए जनता से सुझाव मांगे थे। उसके लिए ई-मेल आईडी भी जारी किया गया था। घोषणा के बाद से दिल्ली सरकार को लगातार सुझाव आने का सिलसिला जारी है।दिल्ली डायलाग एंड डेवलपमेंट कमीशन सभी सुझावों का अध्ययन कर रहा है। उसके बाद पूरी रिपोर्ट सरकार को सौपेंगे।सूत्रों की मानें तो मंगलवार को मनीष सिसोदिया डीएमआरसी, परिवहन अधिकारियों के साथ अब तक तैयार प्रस्तावों की समीक्षा के साथ चर्चा करेंगे।

प्रवेश निकास दिल्ली में तभी महिलाओं को फायदा

एनसीआर की महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा की नहीं इसे लेकर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मगर सूत्र बताते हंै कि सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है कि मेट्रो में सफर करने वाली महिला का प्रवेश या निकास कोई एक दिल्ली में होना चाहिए। तभी फायदा मिलेगा। हालांकि परिवहन मंत्री कैलाश गहलौत का कहना है कि डीएमआरसी के मुताबिक एनसीआर के शहरों से सफर करने वाली महिलाओं की संख्या मेट्रो के कुल यात्रियों की संख्या का 4 से 5 फीसदी होता है। इसलिए अगर जरूरत पड़ी तो सरकार उन्हें मुफ्त सफर का फायदा देगी। हालांकि हम दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

कड़ी धूप से अपने चेहरे को बचाइए इस घरेलू उपाय से

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शरीर की सुंदरता कौन नहीं चाहता , हर कोई अपने शरीर को सबसे अच्छा चाहता है । खासतौर से महिलाएं ही ऐसी होती है जो अपने चेहरे को हमेशा गोरा – गोरा चाहती है इसके लिए विभिन्न प्रकार के तरीके अपनाती है कभी दवाइयां तो कभी घरेलू नुस्खे इत्यादि फिर भी कभी – कभी चेहरा वैसा – वैसा का बना रहता है ।

भारत में गर्मियों का मौसम शुरू हुआ है इस कड़ी धूप का हमारे चेहरे के ऊपर बहुत बुरा असर करता है । कड़ी धूप के कारण चेहरा सांवला पड़ जाता है और चेहरे की मुलायम है वह भी कम हो जाती है तो इस से बचने के लिए मैं घरेलू उपाय बताने वाला हूं तो चलो फिर सीखते हैं वह घरेलू उपाय।

बदलते मौसम में कैसे रखें त्वचा को स्वस्थ?

दो चम्मच खीरा का रस और एक चम्मच गुलाब जल और दो बूंदे नींबू का रस का मिश्रण होने के बाद अपने चेहरे के ऊपर लगा दीजिए। जब आप कड़ी धूप में जाने वाले हो तो यह मिश्रण अपने चेहरे के ऊपर लगा दीजिए तो कड़ी धूप का आपके चेहरे के ऊपर असर नहीं होगा तो यह रहा कड़ी धूप से हमारे चेहरे को बचाने के लिए एक घरेलू आसान उपाय ये तीनों चीजे आपको आपके घर पर आसानी से मिल जाएगी।

इंडियन क्रिकेट टीम को झटका,शिखर धवन वर्ल्ड कप से हुए बाहर,नए ओपनर की तलाश जारी…

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आज वर्ल्ड कप खेलने गयी टीम इंडिया के लिए एक बुरी खबर आई है,टीम इंडिया के गब्बर कहलाये जाने वाले शिखर धवन वर्ल्ड कप से बाहर हो गए है |

रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप मैच में भारत की जीत के हीरो धवन को तेज गेंदबाज नाथन कुल्टर नाइल की उछाल लेती गेंद लगी थी लेकिन वह दर्द के बावजूद खेले थे। काफी दर्द होने के बावजूद धवन ने 109 गेंद में 117 रन की पारी खेली थी,आज उनकी दोबारा जांच की गयी जिसमे उन्हें वर्ल्ड कप से बाहर रखने का फैसला किया गया ,जिसे टीम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है |

शिखर के स्थान पर कौन नए ओपनर होंगे इस पर टीम में विचार जारी है,ऋषब पंत,अजिंक्य रहाने के नाम पर विचार किया जा रहा है 

पंजाब: 109 घंटे के रेस्क्यू अभियान के बाद बोरवेल से निकाला गया दो साल का फतेहवीर, नहीं बच सकी जान

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पंजाब के संगरूर में 109 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार मंगलवार सुबह दो साल के फतेहवीर सिंह को बोरवेल से निकाल लिया गया। इसके बाद फतेहवीर को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, कुछ घंटे बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। यह घटना पिछले हफ्ते गुरुवार शाम की है जब फतेहवीर खेलते-खेलते 150 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था। फतेहवीर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।

दरअसल, संगरूर जिले के भगवानपुर गांव में एक सूखे पड़े बोरवेल को कपड़े डालकर छोड़ दिया गया था। फतेहवीर खेलते-खेलते इसी बोरवेल के करीब पहुंचा और गिर गया। शुरुआत में परिवार और गांव वालों ने बहुत देर तक फतेहरवीर को बोरवेल से बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद बचावदल को इस काम में लगाया गया। फतेहवीर को निकालने के मिशन में एनडीआरएफ सहित स्थानीय पुलिस, ग्रामीणों और स्वयं सेवी संस्थान के लोग शामिल रहे।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के कर्मियों ने सुबह करीब साढ़े पांच बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला। फतेहवीर को चिकित्सीय सुविधा प्रदान करने के लिए डॉक्टरों की एक टीम मौके पर ही मौजूद थी। वेंटिलेटर की सुविधा से युक्त एक एंबुलेंस भी वहां मौजूद थी।

बच्चे को बचाने के लिए बोरवेल के बराबर एक दूसर बोरवेल खोदा गया और उसमें कंक्रीट के बने 36 इंच व्यास के पाइप डाले गए। इस घटना ने कुरूक्षेत्र में 2006 में गिरे बच्चे प्रिंस को बचाने की याद ताजा कर दी। प्रिंस को करीब 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया था।

कांग्रेस के इस नेता को मिल सकती है सिद्धू-अमरिंदर की खटपट दूर करने की जिम्मेदारी

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पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके कैबिनेट में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की खटपट अब राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। कांग्रेस आलाकमान भी अबतक इनके बीच के झगड़े को खत्म कराने में नाकाम रहा है। इस सिलसिले में सिद्धू सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से भी मिल चुके हैं। लेकिन, अब लगता है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई बड़ी पहल करने वाला है।

कांग्रेस सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी नेतृत्व अब पंजाब कांग्रेस के विवाद को जल्दी सुलझाना चाहता है। क्योंकि, इसके चलते पार्टी की भारी किरकिरी हो रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह और पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जारी विवाद को खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कांग्रेस में गांधी परिवार के बाद सबसे ज्यादा किसी नेता की चलती है, तो वह राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ही हैं, जो राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव भी हैं। बड़ी बात ये है कि सिद्धू जब अमरिंदर के खिलाफ अपनी शिकायत लेकर राहुल के दरबार में पहुंचे थे, तो उनके साथ अहमद पटेल भी वहां मौजूद थे।

सिद्धू और अमरिंदर के बीच की तल्खी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब मुख्यमंत्री ने पिछले हफ्ते उनका विभाग बदला, तो वे नए विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बजाय, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने दिल्ली पहुंच गए। इस मुलाकात के बाद सिद्धू ने एक ट्वीट किया जिसमें लिखा है,”कांग्रेस अध्यक्ष से मिला, उनको अपना पत्र सौंपा, उन्हें स्थिति से अवगत कराया?” जाहिर है कि सिद्धू उसी स्थिति की बात कर रहे हैं,जो उनके और अमरिंदर के बीच बनी हुई है। इस ट्वीट के साथ सिद्धू ने जो तस्वीर डाली है, उसमें राहुल के अलावा उनकी बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और अहमद पटेल भी दिख रहे हैं। शायद इसी वजह से अहमद पटले को सुलह कराने की जिम्मेदारी मिलने की बात कही जा रही है।

सिद्धू और अमरिंदर में ताजा तनातनी इसलिए शुरू हुई है क्योंकि, पंजाब सरकार ने अपने प्रमुख कार्यक्रमों एवं योजनाओं की समीक्षा के लिए बनी महत्वपूर्ण परामर्श समितियों से उन्हें बाहर रख दिया है। इससे पहले वो अपना विभाग बदले जाने से खफा चल ही रहे थे। दरअसल, अमरिंदर सिंह पंजाब में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरे हैं, जबकि सिद्धू का इस्तेमाल पार्टी पूरे देश में स्टार प्रचारक के तौर पर करती है। दोनों नेताओं के बीच लोकसभा चुनाव में तनाव अमृतसर सीट को लेकर शुरू हुई। उस सीट से सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद चुनाव में कांग्रेस की हार का ठीकरा अमरिंदर ने सिद्धू पर यह कहकर फोड़ दिया कि वो पाकिस्तानी जनरल से गले मिले थे, जिसके चलते जनता ने कांग्रेस को नकार दिया।

लखनऊ में बड़े मंगल की धूम, प्रियंका गांधी ने दी बधाई

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले सभी मंगलवार को बड़ा मंगल के रूप में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इसे सभी धर्म के लोग आपसी सौहार्द के साथ मनाते हैं।

इस मौके पर कांग्रेस महासचिव व पूर्वी उप्र की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को ट्वीट किया, ‘समस्त जन-जन को आखिरी बड़े मंगल के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।’

प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया के साथ एक दिवसीय रायबरेली दौरे पर भी आने वाली हैं।

गौरतलब है कि बड़े मंगल के आयोजन में प्रशासन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करता है। इसमें जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं, जिसमें हषरेल्लास के साथ लोग भाग लेते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस परंपरा की शुरुआत लगभग 400 वर्ष पूर्व मुगल शासक ने की थी। उसने ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार को पूरे नगर में गुड़-धनिया, भूने हुए गेहूं में गुड़ मिलाकर बनाया जाने वाला प्रसाद बंटवाया था और प्याऊ लगवाए थे। तभी से इस बड़े मंगल त्यौहार की परंपरा की नींव पड़ी।