मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के चंद धनाढ्य राजनेताओं में शुमार एमपी के कटनी जिले के विजयराघवगढ़ के बीजेपी विधायक संजय पाठक के परिवार पर बड़ी कार्रवाई हुई है. जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील स्थित दो आयरन ओर खदानों को शनिवार की देर शाम जबलपुर कलेक्टर के आदेश पर सीज कर दिया गया है. यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की गई है.
उल्लेखनीय है कि संजय पाठक शिवराज सिंह चौहान के सरकार में मंत्री रहे हैं. अब संजय पाठक की खनन कंपनी पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. जबलपुर स्थित मेसर्स निर्मला मिनरल्स को सील कर दिया गया है. जबलपुर कलेक्टर ने इसके संबंध में आदेश जारी कर दिया है. इस फर्म की जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिहोरा, अनुविभागीय अधिकारी (वन) सिहोरा, प्रभारी अधिकारी (खनिज शाखा) जबलपुर, तहसीलदार सिहोरा, नयाब तहसीलदार मझगवां और राजस्व निरीक्षक मझगवां एवं संबंधित हल्का पटवारी को शमिल किया गया है. उनकी कंपनी पर अवैध खनन के आरोप हैं.
यह है जबलपुर के कलेक्टर का आदेश
जबलपुर कलेक्टर के द्वारा जारी पत्र में लिखा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पारित आदेश के परिप्रेक्ष्य में मेसर्स निर्मला मिनरल्स को सील कर तत्काल आवश्यक जांच के लिए टीम गठित की गई है. जबलपुर के सिहोरा में चल रही ग्राम दुबियारा की आयरन खनिज पट्टा को तत्काल बंद करवा दिया गया है. विधायक संजय पाठक की कंपनी पर वनभूमि के जमीनों पर अवैध खनन करने का आरोप लगा है. दरअसल विधायक संजय पाठक मध्यप्रदेश में खनन का काम करते हैं. उनके ऊपर अवैध खनन के आरोप लगते रहे हैं. वे शिवराज सिंह के शासन काल में राज्य मंत्री थे. संजय पाठक विजयराघवगढ़ से विधायक हैं.
2500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैें संजय
संजय पाठक के पास अकूत संपत्ति भी है. वह मध्यप्रदेश से बीजेपी के सबसे अमीर विधायक हैं. उनके पास करीब दो सौ पच्चीस करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. चुनावों के दौरान उनकी संपत्ति की चर्चा भी खूब हुई थी, क्योंकि 2013 में उनकी संपत्ति 121.32 करोड़ रुपये की थी. वहीं 2018 में 222.54 करोड़ रुपये की हो गई. यानी पांच साल में संजय पाठक की संपत्ति 104.2 करोड़ रुपये बढ़ी.
करीब 49 वर्षों के अंतराल के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजम्मा को गले लगाया। राजम्मा कोई और नहीं, बल्कि राहुल गांधी की डिलिवरी नर्स हैं, जिनके हाथों 1970 में दिल्ली के एक अस्पताल में राहुल गांधी इस दुनिया में आए थे।
राजम्मा ने राहुल को बताया कि, राजीव गांधी या सोनिया गांधी ने नहीं, बल्कि उन्होंने राहुल को जन्म के बाद सबसे पहले गले लगाया था। यह सुनने के बाद राहुल ने दोबारा राजम्मा को गले से लगा लिया।
रविवार को वायनाड में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जहां रात्रि विश्राम के लिए रुके थे, राजम्मा उनसे मिलने वहीं पहुंच गई। इस खास पल को विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कैमरे में कैद कर लिया और तस्वीर को फेसबुक पर पोस्ट कर दिया।
राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में रोड शो के दौरान चेन्निथला उनके साथ मौजूद रहे। रविवार को राहुल का तीसरा रोड शो था।
फेसबुक पोस्ट के अनुसार, दिल्ली के जिस हॉली क्रॉस अस्पताल में राहुल का जन्म हुआ था, राजम्मा वहां नर्स के तौर पर कार्यरत थीं।
सेवानिवृत्ति के बाद राजम्मा राहुल के संसदीय क्षेत्र में ही बस गईं। उन्होंने कई कांग्रेसी नेताओं से मिलकर राहुल से मिलने की ईच्छा व्यक्त की थी। उनकी यह ईच्छा रविवार को पूरी हो गई।
छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जे. के सुप्रीमो अजित जोगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल को ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है मुझे और हज़ारों आदिवासियों को नंदी राज पर्वत के ऊपर हमारी आराध्य देवी पिथोर मेटा की पूजा करने जाने से क्यों रोका जा रहा है? केवल इसलिए कि आप दोनों की सरकारों ने मिलकर अडानी को नंदीराज पर्वत को कोयला खनन के लीज पर दे दिया है। वहा लगे 25 हजार पेड़ भी चुपचाप काट डाले ? अजीत जोगी ने कहा कि हम आज पिथोर मेटा का आशीर्वाद लेने जाएंगे। आपकी पुलिस हमें वहां जाने की अनुमति देने से मना कर रही है। ऐसे में आप हमें या तो जाने दीजिए या फिर हम सबको गिरफ़्तार कर लीजिए।
अलीगढ़ में ढाई साल की मासूम के साथ हुई हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। वही दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक अकेला व्यक्ति 45 डिग्री की धूप में ट्विंकल शर्मा के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है और अपने आसपास के लोगों से भी मदद मांग रहा है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इस बात पर उस व्यक्ति का कोई भी साथ नहीं दे रहा है।
चिलचिलाती धूप में की परवाह कि बैगर अमित भौमिक लोगों को घटना की भयावता से अवगत रहा है। अमित का कहना है कि इतनी धूप में उससे जब तक हो पाएगा वो मासूम ट्विंकल के लिए इस भीषण गर्मी में खड़ा रहेगा। अमित की मांग है कि ट्विंकल शर्मा के हत्यारे को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। ये घटना बड़ी दुखद है और इसके लिए सोशल मीडिया में सांत्वना देने से कुछ नहीं होगा अगर ट्विंकल के लिए कुछ करना है तो उसके लिए लोगों को सामने आना पड़ेगा।
केरल में आठ दिनों की देरी से मानसून पहुंच गया है। मानसून के पहुंचते ही यहां के लगभग सभी इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून के केरल देरी से पहुंचने की वजह से देश के अन्य हिस्सों में मानसून की बारिश में देरी हो सकती है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि मानसून में देरी का बारिश पर कोई असर नहीं पड़ता है। विभाग ने बताया कि बारिश अनुमान के मुताबिक होगी। बता दें कि दक्षिण पश्चिम मानसून की गति की वजह से देश में लगभग चार महीने तक बारिश होती है। इस दौरान पूरे साल में होने वाली बारिश का लगभग 75 फीसदी पानी बरसता है। दक्षिण के राज्य में मानसून की दस्तक के बावजूद उत्तर भारतीय राज्य भीषण गर्मी की चपेट में हैं। अनेक इलाकों के लोग चिलचिलाती गर्मी से बेहाल हैं।
राजस्थान में तेज गर्मी का सितम जारी है। शनिवार को चुरू में पारा 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि बीकनेर में तापमान 47.1 डिग्री, बाड़मेर में 47.0 डिग्री, कोटा में 46.7 डिग्री और जोधपुर में तापमान 46.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में सबसे गर्म इलाका झांसी रहा है। यहां का तापमान शनिवार को 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मध्यप्रदेश के देवास जिले की पुंजापुरा रेंज के जोशी बाबा के जंगल में काले मुंह के 15 बंदरों की लू लगने से मौत हो गई है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक हुई। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महामंत्री और मध्यप्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया, सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्रीदिग्विजय सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, सांसद विवेक तन्खा, सांसद राजमणि पटेल, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी सचिव संजय कपूर एवं सुधांशु त्रिपाठी, मप्र कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं गृहमंत्री बाला बच्चन, कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी, कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्वमंत्री रामनिवास रावत, कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह चौधरी,कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष संगठन चन्द्रप्रभाष शेखर एवं महामंत्री प्रशासन राजीव सिंह उपस्थित थे।
केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है। प्रदेश के मौसम विभाग ने संभावना व्यक्त की है कि छत्तीसगढ़ में मानसून 15 से 20 जून तक प्रवेश करेगा। इधर स्थानीय कारकों के चलते प्रदेश में दिन में तपिश से राहत मिली है। हालांकि शाम को हल्की बारिश के बाद होने वाली उमस ने लोगों बैचेनी बढ़ा दी है। उमस के कारण लोगों के तबियत हो रही है। इससे जिला अस्पताल में लोगों का आना जाना बढ़ गया है। इसमें पेट की जनित रोग के मरीज ज्यादा है।
डॉक्टर अभिषेक तिवारी का कहना है कि इस मौसम में बाहर का खाना उचित नहीं है। उन्होंने हल्का भोजन करने की सलाह दी है। वैसे शनिवार को शाम को मौसम साफ रहा। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश की राजधानी सहित तीन प्रमुख शहरों में पारा 40 से 42 डिग्री के आसपास घूम रहा है। इसमें बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव में तेज गर्मी पड़ रही है।
छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के पुरोधा और लोक संगीत के भीष्म कहे जाने वाले संगीत नाटक अकादमी से पुरस्कृत वयोवृद्ध संगीतकार खुमान साव का आज सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे छत्तीसगढ़ी कला जगत में शोक का माहौल है।
बीती देर रात कुछ कलाकारों ने उनकी गंभीर अस्वस्थता की सूचना सोशल मीडिया में पोस्ट की थी, लेकिन इधर तड़के सुबह छत्तीसगढ़ी फिल्मों के सुप्रसिद्ध डायरेक्टर मनोज वर्मा तथा अभिनेता और गायक सुनील तिवारी ने लगभग 6 बजे सोशल मीडिया में उनके निधन की पुष्टि कर दी है। इस सूचना के अनुसार, श्री साव का अंतिम संस्कार उनके गृहग्राम ठेकुआ राजनांदगांव में होगा।
इस सूचना के फैलते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ मंच से जुड़े हर विधा के कलाकारों के बीच शोक का माहौल है। आज सुबह 11 बजे उनका अंतिम संस्कार होना है, जिसमें राजधानी रायपुर समेत कई जिलों के कलाकार और कलाप्रेमी शामिल होंगे और उनके परिजनों के साथ दुख की इस घड़ी में खड़ा होंगे।
छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के बेजोड़ शिल्पी थे खुमान साव
छत्तीसगढ़ की समृद्धशाली लोक सांस्कृतिक परंपरा में रचे बसे गीतों और विलुप्त होती लोक धुनों को परिमार्जित कर तथा आधुनिक कवियों की छत्तीसगढ़ी रचनाओं को स्वरबद्ध कर उसे लोकप्रियता की दृष्टि से फिल्मी गीतों के समकक्ष खड़ा देने वाले संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित स्वनाम धन्य लोक संगीतकार खुमान लाल साव सही अर्थों में छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दूत थे, जिन्होंने अपनी विलक्षण संगीत साधना और पांच हजार मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ महतारी का यश चहुंओर फैलाया है।
लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत एवं सुगम संगीत के साधक श्री साव का जन्म 5 सिंतबर 1929 को डोंगरगांव के समीप खुर्सीटिकुल नामक गांव में एक संपन्न मालगुजार परिवार में हुआ। बचपन से संगीत के प्रति रूचि रखने वाले श्री साव ने योग्य गुरूओं के संरक्षण में संगीत की बारीकियों को समझा।
14 वर्ष की कच्ची उम्र में उन्होंने नाचा के युग पुरूष मंदराजी दाऊ की रवेली नाचा पार्टी में शामिल होकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विभिन्न नाचा पार्टियों में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए श्री साव ने बाद में राजनांदगांव में आर्केस्ट्रा की शुरूआत की। खुमान एंड पार्टी, सरस्वती संगीत समिति, शारदा संगीत समिति और सरस संगीत समिति का संचालन करते हुए उन्होंने अंत में राज भारती संगीत समिति तक का सफर तय किया, लेकिन आर्केस्ट्रा पार्टियों में फिल्मी गीत संगीत के अनुशरण से वे कतई संतुष्ट नहीं थे। उनके भीतर का संगीतकार उन्हें बार बार मौलिक संगीत रचना के लिए प्रेरित कर रहा था।
सन 1970 में उनकी मुलाकात लोक कला मर्मज्ञ बघेरा निवासी दाऊ रामचंद देखमुख से हुई जो छत्तीसगढ़ की प्रथम लोक सांस्कृतिक संस्था ‘चंदैनी गोंदा’ के निर्माण की योजना बनाकर योग्य कलाकारों की तलाश में घूम रहे थे। उन्हें एक ऐसे संगीत निर्देशक की तलाश थी, जो छत्तीसगढ़ी आंचलिक गीतों में नया प्राण फूंक सके। श्री साव स्वयं अपनी मौलिक संगीत रचना की प्रस्तुति के लिए बेचैन थे। श्री देशमुख के आग्रह को स्वीकार कर श्री साव ‘चंदैनी गोंदा’ में संगीत निर्देशक के रूप में शामिल हुए।
संगीतकार श्री साव और गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया ने दिन-रात मेहनत कर ‘चंदैनी गोंदा’ के रूप में श्री देशमुख के सपने को साकार किया। 7 नवंबर 1970 से दुर्ग जिले के बघेरा से जारी ‘चंदैनी गोंदा’ की अविराम यात्रा चार दशक बाद भी जारी रहा और श्री साव आज भी ‘चंदैनी गोंदा’ रूपी रथ के सारथी बने हुए थे।
‘चंदैनी गोंदा’ के उद्भव के पूर्व छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का पारंपारिक स्वरूप ज्यों का त्यों गांवों, खेतों, खलिहानों में उत्सव के राग रंगों और नाचा गम्मत की टोलियों तक ही सीमित था। ‘चंदैनी गोंदा’ के माध्यम से श्री साव ने यत्र तत्र बिखरे हुए बहुप्रचलित पारंपारिक लोक गीतों कर्मा, ददरिया, नचौरी, सुआ, गौरा, विवाह गीत, बसदेवा गीत, सोहर, भोजली, पंथी तथा देवी जसगीतों को उनकी मौलिकता बरकरार रखते हुए परिष्कृत और परिमार्जित कर अपने कर्णप्रिय संगीत के द्वारा लोकप्रिय बना दिया।
छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोक गीतों के अलावा श्री साव ने छत्तीसगढ़ के स्वनाम धन्य कवियों द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’, स्व. प्यारे लाल गुप्त, स्व. हरि ठाकुर, स्व. हेमनाथ यदु, पं. रविशंकर शुक्ल, लक्ष्मण मस्तुरिया, पवन दीवान एवं मुकुंद कौशल के गीतों को संगीतबद्ध कर उसे जन जन का कंठहार बना दिया।
तोर धरती-तोर माटी रे भैय्या, मोर संग चलव रे, धरती मैय्या जय होवय तोर, काबर तैं मारे नैना बान, मन डोले रे माघ फगुनुवा, मोर खेती खार रूनझुन, धनी बिना जग लागे सुन्ना, मंगनी मा मांगे मया नई मिलै, मोर गंवई गंगा ए, बखरी के तुमा नार बरोबर, पता दे जा रहे गाड़ी वाला जैसे विविध भाव-भरे गीतों की संगीत सर्जना कर श्री साव ने इन गीतों को अमर कर दिया।
श्री साव के संगीतबद्ध इन गीतों को जहां लोगों ने आकाशवाणी रायपुर के सुर सिंगार कार्यक्रम में सुना। वहीं ‘चंदैनी गोंदा’ की मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से अब तक लाखों श्रोताओं ने इन गीतों के भावों को पूरी तरह महसूस किया है। ‘चंदैनी गोंदा’ की प्रस्तुति के दौरान लोग श्री साव की अद्भुत सर्जना जन्य माधुर्य की अनुगूंज से सराबोर हो उठते थे। हजारों का जनसैलाब ‘चंदैनी गोंदा’ की विहंगम प्रस्तुति को देखने उमड़ पड़ता था। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक गीतों को परिष्कृत, परिमार्जित और कर्णप्रिय संगीत देकर फिल्मी गीतों के समानांतर लाकर खड़ा किया।
श्री साव का मन कभी कभी आज के बदले परिवेश में गीतों के स्तर, द्विअर्थी भावों और संगीत की मूलभूत लोक संरचना में आई विकृतियों से आहत हो जाता था। वे चाहते थे कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की धरोहर सुरक्षित और संरक्षित रहे। 87 वर्ष की उम्र के बावजूद श्री साव की लगन, समर्पण, आत्मनिष्ठा और छत्तीसगढ़ की माटी के प्रति मोह का वही स्वरूप ‘चंदैनी गोंदा’ मंच पर देखने को मिलता था। 87 वर्ष की आयु में भी पूरी रात ‘चंदैनी गोंदा’ के मंच पर हारमोनियम की रीड पर ऊंगलियां चलाते श्री साव को देखना अद्भुत अनुभव रहा।
धुन के पक्के श्री साव में गजब की सांगठनिक क्षमता थी। ‘चंदैनी गोंदा’ की साढ़े चार दशकों की यात्रा के दौरान अनेक कलाकार ‘चंदैनी गोंदा’ से जुड़े और श्री साव के कुशल निर्देशन में अपनी प्रतिभा को तराशा। बाद में कई कलाकारों ने धीरे धीरे अपना अगल आशियाना भी बना लिया, लेकिन श्री साव कभी भी विचलित नहीं हुए। नैसर्गिक कलाकारों को तलाश कर उन्हें तराशना, मंच, नाम, दाम और सम्मान देना तथा उनके सुख-दुख में सहभागी बनना श्री साव की खास विशेषता रही।
अत्यंत स्वाभिमानी श्री साव ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। अनुशासन के प्रबल पक्षधर श्री साव जुबान से कड़े जरूर थे, लेकिन उनका हृदय बच्चों की तरह कोमल था। उनकी डांट में भी हमेशा एक अभिभावक की समझाईश होती थी।
‘न यश की लिप्सा और न सम्मान की आकांक्षा’ रखने वाले श्री साव अपने धुन के पक्के थे। युवावस्था के दौरान खेतों में काम करती हुई एक ग्राम्य बाला के मुंह से एक फिल्मी गीत सुनकर उनका मन वितृष्णा से भर उठा था। माटी का आत्म गौरव जागा, उसी दिन से उन्होंने अपने आप को छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के लिए समर्पित कर दिया था। हारमोनियम की रीड पर चली उनकी ऊंगलियों ने अनेक कालजयी संगीत की रचना की। उनके सुर ताल, लय और धुन को सुनकर समूचा छत्तीसगढ़ अचंभित रहा।
श्री साव को 4 अक्टूबर 2016 को छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2015 से सम्मानित किया गया था। तात्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में उन्हें सम्मानित किया था। सम्मान समारोह के दूसरे दिन श्री साव ने मेघदूत थियेटर नई दिल्ली में अपनी 31 सदस्यीय टीम के साथ मात्र 55 मिनट की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोकगीत, नृत्य एवं कर्णप्रिय संगीत की सरिता बहाकर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के बौद्धिक वर्ग को न केवल छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की लोकप्रियता से परिचित कराया था, अपितु प्रभावी प्रस्तुति की धाक भी जमाई थी।
बहरहाल अपने समय की किवदंती बन चुके श्री साव छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के जिंदा इतिहास थे। उनके द्वारा संगीतबद्ध लोक गीत चिरस्थायी हैं और रहेंगे। उनकी संगीत साधना से अमर कालजयी गीत रचनाएं छत्तीसगढ़ की धरोहर हैं। उनकी अनवरत संगीत साधना को छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल पाएगा।
राहुल गांधी केरल के कोझीकोड में रोड शो कर रहे हैं. राहुल गांधी की तीन दिन की वायनाड यात्रा का आज तीसरा और आखिरी दिन है.
तीसरे दिन उन्होंने रिटायर्ड नर्स राजम्मा से भी मुलाकात की. राजम्मा राहुल गांधी के जन्म के वक्त उनके पास मौजूद थीं. पिछले दिनों जब राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाए जा रहे थे, तब राजम्मा सामने आईं थीं. उन्होंने कहा था कि वे राहुल के जन्म के वक्त मौजूद थीं.
शनिवार को राहुल गांधी ने उन्हें सांसद चुने जाने पर आभार जताते हुए वायनाड सीट के कल्पेट्टा, पनामारम, पुलपल्ली समेत कमबालक्कड़ में रोड शो किया था. इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे.
राहुल ने कल्पेट्टा में दिए अपने भाषण में वायनाड के लोगों का आभार भी जताया. उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र के लोगों के साथ हैं और उनके मुद्दों पर लड़ने के लिए भी तैयार हैं.
बता दें राहुल गांधी ने उत्तरप्रदेश की अमेठी और केरल की वायनाड सीट से नामांकन भरा था. अमेठी सीट पर राहुल गांधी को स्मृति ईरानी के सामने हार का सामना करना पड़ा. वहीं वायनाड से राहुल गांधी बड़े अंतर से जीतने में कामयाब रहे.
खरीफ की खेती शुरू होने वाली है पर किसानों को कर्ज नहीं मिल पर रहा है। जिले में 21 राष्ट्रीयकृत, 9 प्राइवेट और ग्रामीण बैंक हैं जहां 26616 किसानों के लोन अटके हुए हैं। इन्होंने बैंकों से 339.65 करोड़ रुपए कर्ज लिया था। सरकार कर्जमाफी की घोषणा की लेकिन अब तक इन बैंकों को पैसा नहीं दिया। बैंकों ने कर्ज देना तो दूर इन किसानों को डिफाल्टर सूची में डाल दिया है। ऐसे में अब भविष्य में भी किसानों को लोन लेने के रास्ते बंद हो गए हैं।
सरकार ने सहकारी बैंक को 436 करोड़, ग्रामीण बैंक को 20 फीसदी रकम ही दी, राष्ट्रीयकृत बैंकों को कुछ नहीं मिला
पिछले खरीफ सीजन से पहले जिले के 1 लाख 74 हजार 616 किसानों ने खेती करने के लिए सभी तरह के बैंकों से 820.68 करोड़ रुपए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज लिया। इसमें 1 लाख 48 हजार किसानों ने जिला सहकारी एवं केंद्रीय बैंक से 481 करोड़ 3 लाख रुपए, 16 हजार 114 किसानों ने 21 राष्ट्रीयकृत बैंकों से 225 करोड़ 99 लाख रुपए तो 6 हजार 678 किसानों ने ग्रामीण बैंक से 43 करोड़, 15 लाख रुपए कर्ज लिया था।
वहीं प्राइवेट बैंकों से भी 3,824 किसानों ने 70 करोड़ 51 लाख रुपए कर्ज लिया। कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया और घोषणा पत्र में इसे शामिल करते हुए इसका खूब प्रचार किया। इसी के दम पर चुनाव भी जीत लिया लेकिन 6 माह बाद भी सभी बैंकों को पूरी रकम सरकार ने नहीं दी है। यही वजह है कि बैंक किसानों को कर्ज देने की बजाय डिफाल्टर घोषित कर रहे हैं।
अभी तक सरकार द्वारा सहकारी बैंक को 436 करोड़ रुपए दिया है। ग्रामीण बैंक को लोन का 20 प्रतिशत रुपया ही मिला है। राष्ट्रीयकृत बैंकों को अभी तक सरकार ने रकम नहीं दी है। खरीफ की फसल के लिए 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक और रबी की फसल के लिए एक अक्टूबर से 31 मार्च तक किसानों के केसीसी के तहत लोन दिया जाता है। धान की खेती के लिए प्रति एकड़ 18 हजार रुपए किसानों लोन मिलता है।
जानिए किस बैंक से कितने किसानों ने लिया था कर्ज बैंककिसानों की संख्याकर्ज (लाख में)इलाहाबाद बैंक6381148.35 आंध्रा बैंक379351.20 बैंक ऑफ बड़ोदा8401123.25 बैंक ऑफ इंडिया558988.30 बैंक ऑफ महाराष्ट्र50139केनरा बैंक445745.65सीबीआई22911659कॉरपोरेशन बैंक2423देना बैंक119298इंडियन बैंक1223.26इंडियन ओवरसीज 190350ओबीसी356654पीएसएस बैंक122188पीएनबी23402135एसबीआई48017670सिंडीकेट बैंक4069यूकाे बैंक430783यूनियन बैंक9771450विजया बैंक120345आईडीबीआई15822456
जिला कांग्रेस को मिला पत्र जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बताया कि पीसीसी महामंत्री गिरीश देवांगन ने जिला, शहर, ब्लॉक अध्यक्षों को पत्र लिखकर कहा है कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि वे सभी अपने क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को खाद, बीज और ऋण संबंधी समस्याओं का पता लगाएं। इसकी जानकारी अधिकारियों को दें और निराकरण के लिए पहल करें। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर खाद-बीज की कमी है तो इसकी जानकारी प्रदेश कार्यालय का तत्काल दें। किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए कार्यवाही करें और की जा रही रही कार्यवाही से पीसीसी को भी अवगत कराएं।
पैसे नहीं मिले, कर्ज देने प्रक्रिया शुरू अभी तक किसानों के कर्ज माफी का पैसा बैंक को नहीं मिला है। माना जा रहा है कि जल्द ही मिल जाएगा। किसानों को बताया जा रहा है कि अगर वे रुपए जमा कर देंगे तो डिफाल्टर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे। उनकी लिमिट भी बढ़ जाएगी। जिन किसानों की लिमिट है, उन्हें लोन देने की प्रक्रिया चल रही है।एमएन परिदा, क्षेत्रीय प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक