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मंदिर में भगवान राम को न लगे गर्मी, लगाए गए कूलर

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अयोध्या स्थित इस मंदिर के पुजारी का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण भगवान के लिए कूलरों की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित सीताराम मंदिर में भगवान के लिए बाकायदा एयर कूलर लगवाए गए हैं।

मंदिर के पुजारी रामप्रिय शरण दास महाराज ने कहा, ‘तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए हमने मंदिर में कूलर लगवाए हैं।’ इतना ही नहीं, भगवान की प्रतिमाओं को रोज गुलाब जल से स्नान भी कराया जाता है।

मोदी ‘कहर’ में बदल गई है मोदी लहरः शत्रुघ्न सिन्हा

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कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि देश में मोदी लहर मोदी कहर में बदल गई है।

इस दौरान उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर भी निशाना साधा और कहा कि बिहार की जनता आने वाले चुनाव में उन्हें उनकी औकात बताएगी। उन्होंने अमित शाह के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही। बता दें कि सिन्हा महागठबंधन के अनेक नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसारपूर्व बीजेपी नेता और पटना साहिब से कांग्रेस उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में मोदी लहर मोदी कहर में बदल गई है और बार-बार ‘गली-गली में शोर है, चौकीदार चोर है’ के नारे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के डीएनए पर सवाल उठाया है, राज्य की जनता उन्हें आने वाले विधानसभा चुनाव में जवाब देगी। उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष पर हमलावर होते हुए कहा कि अमित शाह ने एक रैली में कहा कि वह बिहारी बाबू को उनकी औकात दिखाएंगे। आने वाले चुनाव में जनता उन्हें उनकी औकात दिखाएगी।

सिन्हा ने कहा, ‘बीजेपी में रहते हुए मैंने आडवाणीजी का साथ दिया जो पार्टी में साइडलाइन कर दिए गए थे। मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ी।’ उन्होंने कहा कि वह आम जनता की आवाज को हमेशा उठाते रहेंगे और मोदीनीत एनडीए सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलते रहेंगे।

सिन्हा ने आगे कहा, ‘मैनें कुछ ऐसा नहीं किया कि मुझे स्वार्थी कहा जाए। मैंने कोई भी लड़ाई अपने लिए नहीं लड़ी। मैं नोटबंदी के खिलाफ बोला। लोगों ने कहा कि मैं पार्टी से विद्रोह कर रहा हूं लेकिन मैं अब भी पार्टी के कई सदस्यों की इज्जत करता हूं।’

चुनाव आयोग ने दी है हरी झंडी, मोदी आज पहुंचेंगे केदारनाथ

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प्रधानमंत्री मोदी आज से उत्तराखंड की दो दिन की यात्रा पर होंगे. वे आज केदारनाथ में दर्शन करने पहुंचेंगे. चुनाव आयोग ने उन्हें शनिवार और रविवार को केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा करने की मंजूरी दे दी है. लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय को याद दिलाया है कि लोकसभा चुनाव के लिए लागू आदर्श आचार संहिता अभी प्रभावी है.

जानकारी के मुताबिक, इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने मोदी की दो दिवसीय उत्तराखंड यात्रा पर निर्वाचन आयोग का रुख पूछा था. शुक्रवार को आयोग ने यात्रा के लिए मंजूरी दे दी. मोदी के दौरे के मद्देनजर वजह से वहां की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गयी है.पूरे मामले से जुड़े सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि चूंकि यह आधिकारिक यात्रा है, इसलिए आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय को सिर्फ यह याद दिलाया है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ 10 मार्च से लागू हुई आदर्श आचार संहिता अभी भी प्रभावी है. शनिवार को वे केदारनाथ और रविवार को बद्रीनाथ में होंगे.

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सातवें और अंतिम चरण का मतदान रविवार 19 मई को होना है. वोटों की गिनती 23 मई को होगी और साथ ही उसी दिन नतीजों की घोषणा भी उसी दिन होगी.

मोदी पिछले साल भी पहुंचे थे केदारनाथ

पिछले साल दीवाली के मौके पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ में दर्शन करने पहुंचे थे. केदारनाथ के शिव मंदिर में दर्शन करने के अलावा मोदी ने इस प्रसिद्ध मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य की भी समीक्षा की थी, जो 2013 में आई विनाशकारी बाढ़ से तबाह हो गया था और हजारों लोग मारे गए थे. इसके पहले भी मोदी ने दो बार मंदिर का दौरा किया था.

क्विक हील का डिजिटल लाइफस्टाइल की सुरक्षा के लिए नया सोल्यूशन

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 उपभोक्ताओं, व्यवसायों और सरकार को आईटी सिक्योरिटी सॉल्यूशन प्रदान करने वाली कंपनी क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने लैपटॉप और डेस्कटॉप के लिए अगली पीढ़ी का सॉल्यूशन’लाइटर स्मार्टर फास्टरके लॉन्च की घोषणा की है। कंपनी ने शुक्रवार को यहां इसको लाँच किया। उसने कहा कि यह नया संस्करण भविष्य के लिए उत्पाद तैयार करने में निरंतर इनोवेशन की 25 साल की विरासत को रेखांकित करता है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को चुनौतियों से सुरक्षित रखना है। इस सोल्यूशन को उपभोक्ताओं की डिजिटल लाइफस्टाइल को सिक्योर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक तरह से टोटल रैंसमवेयर प्रोटेक्शन है जिसमें वेबकैम सिक्योरिटी, पोर्टेबल फाइल वॉल्ट, सेफ बैंङ्क्षकग, पैरेंटल कंट्रोल, वेब सिक्योरिटी जैसी कई अन्य फीचर भी उपलब्ध होंगे। कंपनी ने कहा कि लाइटर स्मार्टर फास्टर रेंज का लॉन्च अत्याधुनिक तकनीक के साथ साइबर स्पेस में नयी चुनौतियों से उपभोक्ताओं को बचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी अत्याधुनिक सिक्योरिटी ऑफरिंग्स से डिजिटल सॉल्यूशंस के जरिये सबसे सुरक्षित डिजिटल अनुभव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

त्वचा की देखभाल के 7 कारगर उपाय

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इन आसान नुस्खों को अपनाएं तो आप अब भी बेहतरीन लुक पा सकती हैं।

1. आइसआइस बेबी!

त्वचा को गुलाबी निखार देने का सबसे आसान तरीका है- आइस यानि बर्फ। बर्फ के पानी में अपना चेहरा डुबोएं या एक मिनट तक चेहरे पर आइस क्यूब रगड़ें। इससे त्वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं, जो धूल और बैक्टीरिया को अंदर जाने से रोकते हैं। आइस बाथ त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर गर्माहट देता है, जिससे चेहरे पर तुरंत निखार आता है।

2. मास्क से बढ़ाएं चमक

स्वस्थ और चमकती त्वचा के लिए घरेलू मास्क सबसे कारगर उपाय हैं। चाहें तो सबसे भरोसेमंद बेसन, हल्दी और दही का मास्क लगाएं या फिर ओटमील का मास्क भी अच्छा रहेगा। सादा ओटमील बना लें। ठंडा करके चेहरे पर लगा लें और कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें।

बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें। तुरंत निखार मिलेगा।

3. क्रीम है फायदेमंद

आप मेकअप लगाएं या न लगाएं, लेकिन घर से बाहर निकलने से पहले चेहरे औऱ गर्दन पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल ज़रूर करें। विटामिन ए, सी, ई और के युक्त नाइट क्रीम का इस्तेमाल झुर्रियों और डार्क सर्कल से बचाता है। सबसे अच्छी बात है कि ये सोते वक्त अपना काम करती रहती है! शहरी प्रदूषण से बचाव के लिए डे क्रीम भी बेहद ज़रूरी हैं। ऐलोवेरा जैसे प्राकृतिक तत्वों से बनी क्रीम त्वचा का गहराई से पोषण करके उसे प्रदूषण से बचाती है।

4. चाय के फायदे!

नहीं, आपको असीमित मात्रा में चाय पीने की ज़रूरत नहीं है। ठंडे पानी में भिगोकर रखी गई टी बैग आंखों के नीचे की सूजन से तुरंत आराम दिलाती हैं। साथ ही ठंडी टी बैग डार्क सर्कल्स से भी निजात दिलाती हैं। मुहासों के ज़ख्म पर ठंडी टी बैग जलन में राहत देते हैं और उनके जल्दी भरने में मदद करते हैं।

5. मसाज से दूर भगाएं चिंता

आंखों के नीचे सूजन, त्वचा पर महीन रेखाएं और ढलती रंगत रोज़मर्रा के तनाव की निशानी है, जिसे हल्के मसाज से दूर किया जा सकता है। अपनी रिंग फिंगर से आंखों के चारों ओर गोलाई में मसाज करें. इससे आंखों के इर्द गिर्द ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है और महीन रेखाएं कम होती हैं। चेहरे पर तुरंत मसाज से कोलैजेन को बढ़ावा मिलता है और जो स्किन प्रोडक्ट आप इस्तेमाल करती हैं उनका असर बेहतर होने में मदद मिलती है।

6. सफाई का रखें ध्यान

आखिरी बार आपने अपने स्किन केयर को कब बदला या साफ किया था? मेकअप ब्रश, हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स, रेज़र, ट्रिमर की सफाई रखना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि ये आपकी संवेदनशील त्वचा के संपर्क में आते हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि इन सभी चीज़ों की अंतिम तारीख और इस्तेमाल से पहुंचने वाले नुकसान का ध्यान रखें। इन्हें समय-समय पर बदलते रहें, ताकि इन पर जमा होने वाले बैक्टीरिया को त्वचा के संपर्क में आने से रोका जा सके।

7. अच्छी नींद लें

इसका त्वचा की देखभाल से कोई सीधा संबंध भले न हो, लेकिन अपनी तकिया का कवर बदलते रहें। क्योंकि इससे आपकी त्वचा, 24 में से करीब 8 घंटे के लिए रोज़ाना संपर्क में आती है। पीठ के बल सोना भी एक अच्छा उपाय है, क्योंकि इससे झुर्रियां बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। जबकि तकिया में अपना चेहरा छुपाकर अपनी बगल पर सोने से झुर्रियां बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

पत्रकार बाहर खड़े रहे, दरवाजा बंद कर नरेंद्र मोदी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस: राहुल गांधी

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 कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elelctions 2019) के लिए कैंपेन खत्म करने के बाद कहा कि वो अभी नतीजों पर कोई दावा नहीं करेंगे। ये तो जनता 23 मई के बाद ही तय करेगी। शुक्रवार को ही पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मोदी और शाह की प्रेस वार्ता पर राहुल ने कहा कि पीएम चुनाव खत्म होने के दो दिन पहले प्रेस से बात करने आएं हैं, शाह को साथ लाए हैं। ये तो अभूतपूर्व है और उसमें भी वो दरवाजा बंद करके पत्रकारों को भीतर जाने ही नहीं दे रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मौजूदा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका साफ नहीं रही। इस तरह से चुनाव कराए गए, जिससे भाजपा को फायदा मिले। राहुल ने कहा कि मोदी जी के पास असीमित धनबल, मार्केटिंग, टीवी प्रचार है, हमारे पास सिर्फ सच्चाई थी। हमने मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाई, मोदी के भ्रष्टाचार की पोल खोली और जनता के मुद्दे उठाए। राहुल ने कहा कि जनता 23 मई को निर्णय लेगी और उनका जो भी निर्णय होगा, उस आधार पर ही हम काम करेंगे। हम जनता के निर्णय का आदर करते हैं।

राहुल गांधा ने कहा कि प्रेस से भी उनको शिकायत है। मीडिया के लोग मुझसे पूछते हैं कि न्याय योजना के लिए पैसा कहां से आएगा और मोदी से पूछते हैं कि आम कैसे काटते हैं, कुर्ते का स्टाइल कहां से आया। राहुल ने इस दौरान नरेंद्र मोदी के ‘रडार से बचने के लिए बादलों के इस्तेमाल’ वाले बयान का भी मजाक उड़ाया। राहुल ने एक बार फिर मोदी को राफेल को लेकर डिबेट करने की भी चुनौती दी।

राहुल गांधी ने एक बार उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के साथ समझौता ना होने पर कहा किस वहां वो लोग अच्छा लड़े हैं और मैं उनका सम्मान करता हूं। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि मायावती, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी या चंद्रबाबू नायडू अगर कोई मौका आया भी तो एनडीए की तरफ नहीं जाएंगे, येउनका विश्वास है।

एक आईडिया ने बदल दी इस लड़की की दुनिया, अब है 6 हज़ार करोड़ की मालकिन

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साउथ ईस्ट एशिया का फैशन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जीलिंगो नई ऊंचाईयों को छू रहा है। सिर्फ 4 सालों में इस स्टार्टअप ने अपना एक नया मुकाम बना लिया है। इस स्टार्टअप को ऊंचाइयों तक लाने के पीछे अंकिती बोस हैं।

एक अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाले फैशन प्लेटफॉर्म जिलिंगो का रास्ता दिसंबर 2014 में शुरू हुआ था। उस वक्त अंकिती बोस सिक्योई इंडिया में एनालिस्ट का काम करती थीं। अंकिती मुंबई की रहने वाली हैं।

ध्रुव कपूर से उनकी मुलाकात बंगलूरू में एक फैमिली पार्टी में हुई, जो गेमिंट स्टूडियो किवी इन्क में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम करते थे। थोड़े समय बाद ध्रुव और अंकिती दोनों को यह अहसास हुआ कि दोनों ही स्टार्टअपशुरू करना चाहते हैं। इसके चार महीने बाद दोनों ने नौकरी छोड़ दी। दोनों ने जिलिंगो की स्थापना के लिए अपनी सेविंग्स से 30-30 हजार डॉलर लगाए। जिलिंगो एक ऑनलाइन प्लैटफॉर्म है जो दक्षिण पूर्व एशिया में छोटे व्यापारियों को अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाती है।

गोडसे को फांसी, जानें गांधी के बाकी हत्यारोपियों के साथ क्या हुआ

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में गोली मारकर कर दी गई थी. वे हर दिन शाम को प्रार्थना करते थे. 30 जनवरी 1948 की शाम को जब वे प्रार्थना के लिए जा रहे थे तभी नाथूराम गोडसे ने पहले उनके पैर छुए. फिर महात्मा गांधी पर बैरेटा पिस्टल से तीन गोलियां दाग दीं.

नाथूराम गोडसे हत्या करने के बाद बिड़ला भवन की प्रार्थना से भागा नहीं. पकड़ा गया, मुकदमा चला. इस मुकदमे में नाथूराम गोडसे सहित आठ लोगों को हत्या की साजिश में आरोपी बनाया गया था. इनमें से दिगम्बर बड़गे को सरकारी गवाह बनने के कारण बरी कर दिया गया. शंकर किस्तैया को उच्च न्यायालय में अपील करने पर माफी मिल गई.

हत्या के मामले में वीर सावरकर का भी नाम था. लेकिन उनके खिलाफ़ सबूत नहीं मिलने के कारण अदालत ने उन्हें बरी कर दिया. फिर बचे हुए 5 अभियुक्तों में से तीन – गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा और विष्णु रामकृष्ण करकरे को उम्रकैद की सजा हुई. नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे को फाँसी दे दी गई.

क्या हुआ था 30 जनवरी 1948 को

बिड़ला भवन में शाम 5 बजे प्रार्थना होती थी. लेकिन गांधीजी सरदार पटेल के साथ मीटिंग में व्‍यस्‍त थे. तभी सवा 5 बजे उन्‍हें याद आया कि प्रार्थना के लिए देर हो रही है. 30 जनवरी 1948 की जब बापू आभा और मनु के कंधों पर हाथ रखकर मंच की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे तभी उनके सामने नाथूराम गोडसे आ गया. हाथ जोड़कर कहा – “नमस्‍ते बापू!” तभी मनु ने कहा कि भैया सामने से हट जाओ, बापू को जाने दो. बापू को पहले ही देर हो चुकी है. लेकिन गोडसे ने मनु को धक्‍का देकर बैरेटा पिस्टल से गांधी जी के सीने पर एक के बाद एक तीन गोलियां मार दीं. दो गोली बापू के शरीर से होती हुई निकल गईं, जबकि एक उनके शरीर में ही फंसी रह गई.

अदालत में गोडसे ने बताया पिस्टल कहां से लीअदालत में नाथूराम गोडसे ने अपने बयान में बताया था कि जिस पिस्टल से गांधी जी को मारा था, वह उसने दिल्ली में एक शरणार्थी से खरीदी थी. इस मुकदमे में शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा, दिगम्बर बड़गे, नारायण आप्टे, वीर सावरकर, नाथूराम गोडसे और विष्णु रामकृष्ण करकरे को हत्या की साजिश में आरोपी बनाया गया था. इनमें से दिगम्बर बड़गे सरकारी गवाह बनने के कारण बरी कर दिया गया.

सावरकर के खिलाफ़ कोई सबूत नहीं मिला इसलिए उन्हें भी जुर्म से मुक्त कर दिया. शंकर किश्तैया को निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिली थी, लेकिन बड़ी अदालत ने अपील करने पर उसकी सजा माफ कर दी. अंत में बचे 5 अभियुक्तों में से गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा और विष्णु रामकृष्ण करकरे को उम्रकैद तथा नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे को फांसी की सजा दी गई.

राजनीतिक बयानबाजी से चर्चा में गोडसे

नाथूराम गोडसे पर बीजेपी नेताओं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कटील के बयानों पर सियासी बवाल के बाद बीजेपी ने सफाई जारी की है. बीजेपी नेताओं के बयानों से भड़के पार्टी चीफ अमित शाह ने कहा कि इन नेताओं के ये बयान उनके निजी बयान हैं और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है. शाह ने तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने की बात कही है. शाह ने कहा कि अनुशासन कमिटी सभी नेताओं से जवाब मांगेगी और 10 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी.

यहाँ के लोगो को 15 अगस्त से नही मिल पाएगी कोका कोला व पेप्सी, जानिये कारण

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तमिलनाडु के लोगों को 15 अगस्त से कोका कोला व पेप्सी नहीं मिलेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि तमिलनाडु के व्यापारी संगठन के ऑफिसर ने घोषणा की है कि 15 अगस्त से वो कोका कोला व पेप्सी नहीं बेचेंगे यानी वो प्रदेश में इन दोनों कंपनियों के प्रोडक्ट्स की बिक्री को बैन कर रहे हैं. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु में ये दोनों कंपनियां बैन हो रही हों. इससे पहले मार्च 2017 में भी इस प्रदेश में इन्हें बैन किया गया था.

इस संदर्भ में चेन्नई के बड़े एफएमसीजी रिटेल चेन के प्रबंधक ने बोला कि व्यापारियों द्वारा लगाया जा रहा बैन कितने दिनों तक जारी रहेगा, इस बात पर अभी कुछ नहीं बोला जाता है.

2017 में इसलिए बैन हई थी ये कंपनियांसाल 2017 में तमिलनाडु वानीगर संगम व तमिलनाडु ट्रेडर्स फेडरेशन ने बोला था कि दोनों कंपनियां प्रदेश में उपस्थित जल निकायों का दोहन कर रही हैं व सूखे के बावजूद इन दोनों कंपनियों ने इसको जारी रखा है . हालांकि छह से सात महीने बाद ही तमिलनाडु में फिर से पेप्सी व कोका कोला की बिक्री प्रारम्भ हो गई थी .

बता दें कि इन दोनों संगठनों से करीब 15 लाख व्यापारी जुड़े हुए हैं . यह 15 लाख व्यापारी प्रदेश में फैले छोटे-छोटे 6 हजार से अधिक संगठनों से जुड़े हैं .

कंपनियों ने जताई थी कड़ी आपत्ति

इंडियन ब्रीवरेज एसोसिएशन ने दोनों कंपनियों की तरफ से व्यापारी संगठनों द्वारा लिए गए इस निर्णय पर कड़ी असहमति जताई गई थी . एसोसिएशन ने बोला कि बिक्री बैन करना या नहीं करने का निर्णय केवल प्रदेश सरकार ले सकती है . इस निर्णय से देश की छवि व इकनॉमी दोनों पर प्रभाव पड़ेगा .

मद्रास उच्च न्यायालय ने हटाई थी रोक

इन कंपनियों के थामिराबरानी नदी के पानी का मनमाने ढंग से दोहन करने के मुद्दे की मद्रास उच्च न्यायालय में अपील की गई थी जिसके बाद कंपनियों के लिए एक अच्छी खबर आई थी . मद्रास उच्च न्यायालय ने विदेशी ब्रांड कोक व पेप्सी प्लांट पर से थामिराबरानी नदी से पानी के प्रयोग पर लगी रोक को हटा दी थी . इससे दोनों कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी .

मोदी-शाह मुक्त बीजेपी के लिए संघ ने गडकरी के साथ बनाया ‘प्लान बी’, लेकिन चुनावी नतीजे इसकी भी निकाल सकते हैं हवा

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लोकसभा चुनावों का आखिरी दौर अभी बाकी है, लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स आ रहे संकेतों ने सत्तारुढ़ गठबंधन की नींद उड़ा दी है। ऐसे में एक नेता ऐसा है जो न सिर्फ आश्वस्त नजर आता है, बल्कि कुछ उत्साहित भी है। इस नेता का नाम है नितिन गडकरी, जो आरएसएस के प्लान बी के तहत अगली सरकार का मुखिया हो सकता है।

लोकसभा चुनाव संपन्न होने से पहले ही महाराष्ट्र बीजेपी में अंदरूनी गुटबाजी सामने आने लगी है। सूत्र बताते हैं कि इस गुटबाज़ी और भितरघात के चलते बीजेपी की सहयोगी शिवसेना को कई सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ सकता है। इतना ही नहीं बीजेपी के कुछ अहम उम्मीदवारों के भी चेहरे उतर सकते हैं। इन चेहरों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक नितिन गडकरी आरएसएस के प्लान बी के तहत काम कर रहे हैं, और अंदरूनी तौर पर मेल-मुलाकातों और रणनीति बनाने में लगे हैं। यह बात आम है कि नितिन गडकरी संघ प्रमुख मोहन भागवत के प्रिय हैं। बताया जाता है कि आरएसएस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकल्प के रूप में नितिन गडकरी पर दांव लगा रखा है। हालांकि गडकरी इस बात से लगातार इनकार करते रहे हैं।

दरअसल संघ ने प्लान बी के तहत नितिन गडकरी को मोदी-शाह गुट के मुकाबले सामने खड़ा कर दिया है। भले ही गडकरी इससे इनकार करें, लेकिन बीजेपी के राम माधव और शिवसेना के संजय राऊत ने तो साफ कह दिया है कि बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने वाला है, ऐसे में प्रधानमंत्री पद एनडीए का होगा।

इन्हीं बयानों के चलते गडकरी के मन में लड्डू फूट रहे हैं। बताया जाता है कि गडकरी को संघ का साथ तो मिला ही हुआ है, उन्हें शिवसेना और नीतीश कुमार की जेडीयू का भी समर्थन मिल सकता है। ध्यान रहे कि गडकरी पिछले दरवाज़े से मिल रही इसी शह की वजह से मोदी-शाह समर्थक योगी आदित्यनाथ के विरोध में भी मुखर देखे गए हैं।

लेकिन, अगर ऐसी स्थिति बनी कि एनडीए सरकार ही न बना पाए, तो संघ का यह प्लान बी फेल हो जाएगा। गडकरी को भी इसका अंदाज़ा है, इसीलिए वे महाराष्ट्र बीजेपी में हलचल पैदा कर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकते हैं।

लेकिन संघ के प्लान बी की समय से पहले ही हवा वसंतराव नाइक शेती स्वावलंबन मिशन के चेयरमैन किशोर तिवारी ने हवा निकाल दी है। यूं तो तिवारी नितिन गडकरी का नाम काफी समय से उछाल रहे हैं, लेकिन अब वे कहते हैं कि बीजेपी 2014 के मुकाबले आधी सीटें हार जाएगी तो किसी के भी पीएम बनने का सवाल कहां से आएगा। वे कहते हैं, “बीजेपी को 140 सीटें कम आने वाली हैं, ऐसे में नहीं लगता कि गडकरी पीएम बन पाएंगे।”

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की करारी हार के बाद तिवारी ने आरएसएस प्रमुख भागवत और महासचिव भैय्याजी सुरेश जोशी को पत्र लिखकर मोदी की जगह गडकरी को लाने की बात कही थी। तिवारी का कहना है कि अगर गडकरी के नेतृत्व में लोकसभा के चुनाव लड़े जाते तो बीजेपी की स्थिति बेहतर होती। लेकिन मोदी और शाह ने बीजेपी को अपनी पार्टी बना लिया है और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करके चुनाव लड़े जा रहे हैं।

वे बताते हैं कि, “राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज नेता भी लाचार हो गए हैं। पार्टी चापलूसी के दौर से गुजर रही है। आरएसएस की विचारधारा और मोदी-शाह की दबंग विचारधारा में तालमेल नहीं है। पार्टी के लिए मोदी-शाह के जोर से चिल्लाने का प्रयोग भी घातक सिद्ध हो रहा है। ग्रामीण भारत में मोदी का जनाधार कम हुआ है। मोदी-शाह ब्रांड बीजेपी को ले डूबेगा। फिलहाल जो स्थिति दिख रही है उसमें महागठबंधन की सरकार बन सकती है।”

उधर आरएसएस के सूत्रों का कहना है कि बीजेपी को मोदी-शाह के चंगुल से बाहर लाना है और इसके लिए जो विकल्प सोचे गए हैं उसके लिए काम किया जा रहा है। बीजेपी में गडकरी ही इकलौते नेता हैं जिनका नाम मोदी के विकल्प के तौर पर सामने आया है। और वो जिस तरह से मोदी और उनकी टीम पर कटाक्ष करते हैं और कांग्रेस की भी तारीफ कर देते हैं उससे उनके बारे में कहा जा रहा है कि गडकरी आरएसएस की ही स्क्रिप्ट पढ़ते हैं।

इस दौरान नागपुर संघ मुख्यालय गडकरी के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी हाजिरी लगाते देखा गया है। फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि वो मोदी गुट के हैं। बावजूद इसके जब महाराष्ट्र लॉबी की बात होती है तो उनका झुकाव अपने प्रदेश की तरफ होता है। शायद उन्हें पता है कि सत्ता सुख लेना है तो प्रदेश और प्रदेश के नेताओं के अलावा आरएसएस के साथ भी रहना ही होगा।

इसके अलावा बीजेपी की सहयोगी शिवसेना भी नितिन गडकरी के लिए जोर लगा सकती है, क्योंकि इससे न सिर्फ शिवसेना का मराठी गौरव का हित सधता है, बल्कि मोदी-शाह के दौर में गुजराती टीम के हाथों हुए अपमान का बदला लेने का भी मौका उसे मिल जाएगा।