Home Blog Page 3099

छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयन्त्र में विस्फोट, सात कर्मी घायल

0

भिलाई | भिलाई इस्पात संयन्त्र में शुक्रवार को दोपहर में पिघले लोहे से भरे लेडल में विस्फोट हो गया जिसमें सात कर्मी घायल हो गए |घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जाती है |

नक्सलियों पर कार्रवाई नहीं, वार्ता के पक्ष में हैं मुख्यमंत्री बघेल

0

छत्तीसगढ़ में एक तरफ देश की रक्षा करने वाले वीर सपूत नक्सलियों के हमले में शहीद हो रहे हैं तो दूसरी ओर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सलियों के प्रति नरम रवैया अपनाने की बात कही है। शुक्रवार सुबह राजीव भवन में केंद्र की मोदी सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि गोली का जवाब हम बातचीत से देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”पिछले कुछ सालों में नक्सलियों की गोली का जवाब गोली से देने के कारण नक्सली पूरे देश में फैल गये। लेकिन अब हम नक्सलियों की गोली का जवाब वार्ता से करेंगे।” उन्होंने कहा कि सरकार नक्सल प्रभावित लोगों से वार्ता करेगी, लेकिन सबसे हास्यास्पद बात यह है कि जब मुख्यमंत्री नक्सलियों से वार्ता की बात प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे, तो उसी वक्त धमतरी जिले के खल्लारी और बोराई थाना क्षेत्र के मध्य चमेदा गांव के जंगल में सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के एक हवलदार हरीश चन्द्र पाल शहीद हो गये।

पिछले 48 घंटे में यह दूसरी सबसे बड़ी नक्सल घटना है। इससे पहले कांकेर जिले के पखांजुर में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में बीएसएफ के चार जवान शहीद हो गए थे और दो अन्य जवान घायल हो गए। ऐसे में छत्तीसगढ़ के कांग्रेस मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नक्सलियों के प्रति विरोधाभासी बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक की चर्चा चुनावी मु्द्दा बन चुकी है।

छत्तीसगढ़ के CM का गिफ्ट किया आईना PM मोदी ने रिसीव किया, बघेल बोले-थैंक यू

0

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो आईना गिफ्ट के तौर पर भेजा था, वह शुक्रवार को डिलीवर्ड हो गया है. पीएम द्वारा आईना स्वीकार करने के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने उनका शुक्रिया अदा किया है.

बता दें कि सीएम भूपेश बघेल ने पीएम मोदी को तोहफे में एक आईना भेजा था. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक ट्वीट के जरिए आईना भेजने की बात कही थी. इसके साथ ही सीएम बघेल ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक खत भी लिखा था. खत में सीएम बघेल ने पीएम मोदी से अपने असली चेहरे को पहचानने की बात कही थी. शनिवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केरोसिन आवंटन और उज्ज्वला योजना को लेकर भी केंद्र को एक पत्र लिखा था.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पत्र में लिखा था, ‘मैं आपको आईना तोहफा स्वरूप भेज रहा हूं. इस आईने को आप लोक कल्याण मार्ग के अपने आवास में किसी ऐसी जगह लगाएं, जहां से आप सबसे अधिक बार गुजरते हों, ताकि इस आईने में अपनी शक्ल बार बार देख आप अपनी असली चेहरे को पहचानने की कोशिश कर सकें.’

सीएम ने आगे लिखा था, ‘हो सकता है कि आप इस आईने का इस्तेमाल ही न करें. पीएम निवास के किसी कूड़ेदान में फेंक दें, लेकिन आईना देखने से आप फिर भी नहीं बच पाएंगे. इस देश की 125 करोड़ की आबादी इस चुनाव में आपको आईना दिखाने वाली है.तैयार हैं ना मोदी जी?’

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक ट्वीट के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी को आईना भेजने की बात कही थी. अपने ट्वीट में सीएम बघेल ने पीएम मोदी को अपने असली चेहरे को पहचानने की कोशिश करने की बात कही थी.

छत्तीसगढ़ में RTE के तहत निजी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया हुई शुरू

0

आरटीई कानून के तहत इस बार निजी स्कूलों में दाखिले के लिए शिक्षा विभाग के पास 80 हजार से अधिक आवेदन अब तक आ चुके है. राजधानी के 6040 निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं का दाखिला होना है. लोग अभी भी ऑनलाइन आवेदन कर रहे है. आवेदन की अंतिम तिथि 15 अप्रैल तक है. आरटीई के लिए इस बार ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम के माध्यम से स्कूल सीटे आवंटित होगी.

पुनीत गुप्ता जल्द हो सकते हैं गिरफ्तार, डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी

0

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ रायपुर पुलिस ने शुक्रवार को बड़ा एक्शन किया है. पुलिस ने डॉ. गुप्ता के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है. डीकेएस अस्पताल में 50 करोड़ रुपये से अधिक के गड़बड़झाला मामले में डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ राजधानी रायपुर के गोलबाजार थाने में एफआईआर दर्ज है. इस मामले में पुलिस को पुनीत गुप्ता की तलाश है.

रायपुर पुलिस ने डीकेएस अस्पताल में भ्रष्टाचार के मामले में शुक्रवार को टेक्नीशियन को लेकर जांच के लिए पहुंची थी. यहां जांच के बाद पुलिस ने डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है. डीकेएस अस्पताल में अधीक्षक रह​ते डॉ. पुनीत गुप्ता पर मशीनों की खरीददारी और अन्य कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है. इस मामले में पुलिस जांच कर रही है.

डॉ. पुनीत गुप्ता को मामले में बयान दर्ज कराने के लिए 27 मार्च को गोलबाजार थाने में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे. इसके बाद पुलिस ने पुनीत गुप्ता के पिता डॉ. जीबी गुप्ता के अस्पताल और निवास पर दबिश देकर दस्तावेज जब्त किए थे. आशंका जताई जा रही है कि पुनीत गुप्ता फरार हो गया है. इसको ध्यान में रखकर ही पुलिस ने आज लुकआउट सर्कुलर जारी किया है. रायपुर एसएसपी आरिफ शेख पहले ही कह चुके हैं कि डॉ. पुनीत गुप्ता की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी.

लोकसभा चुनाव 2019: दुर्ग सीट पर होगी ‘रिश्तों’ में जंग, इस वजह से होगा दिलचस्प मुकाबला

0

छत्तीसगढ़ में होने वाले लोकसभा चुनाव में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में भाई-बहन ही आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस-भाजपा दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने रिश्ते में भाई-बहन प्रतिमा चंद्राकर और विजय बघेल को टिकट देकर इस चुनाव को और भी खास बना दिया है. अब इस चुनाव में एक ओर भाई विजय बघेल देश निमार्ण के लिए वोट मांग रहे है तो दूसरी ओर प्रतिमा चंद्राकर जिले की बेटी होने के नाते पिता की विरासत आगे बढ़ाने के लिए अपना हक मांग रही हैं.

बता दें, दुर्ग लोकसभा सीट पर चुनाव इन दिनों काफी रोचक होता जा रहा है. भाजपा-कांग्रेस के लोग अपने-अपने मुद्दों के अलावा कुछ निजी और रिश्तों का हवाला देते हुए मतदाताओं से वोट मांग रहे है. इसी कडी में एक ओर भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल गीत गाकर लोगों को अपने साथ जोड़ रहे है तो दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर जिले की बेटी होने का हवाला देते हुए लोगों से वोट मांग रही हैं.

दरअसल भाजपा और कांग्रेस ने रिश्ते में भाई-बहन को एक दूसरे को चुनावी मैदान में उतार दिया है. बता दें कि कांग्रेस की प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर भाजपा के प्रत्याशी विजय बघेल को अपना भाई मानती है. दोनों ही वर्षों से ये रिश्ता प्रतिद्वंदी पार्टी का होने के बावजूद निभाते आ रहे है. जब दोनों प्रत्याशी बने और आमने-सामने आए तो भाई ने बहन से आशीर्वाद लिया तो दूसरी ओर बहन ने अपनी जीत के लिए भाई से शुभकामनाएं मांगी.

कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर का कहना है कि ये तो बड़ी बहन का अधिकारी है आशीर्वाद देना. वहीं मैने किया. कहा जाता है पिता की संपत्ति पर बेटे का अधिकार होता है लेकिन विरासत तो बेटी ही आगे ले जाती है. मैं तो पूरे जिले की बेटी हूं. इसलिए विरासत आगे बढ़ाने का जिम्मा मुझे ही मिलना चाहिए. छत्तीसगढ़ में सभी जाति और वर्ग के लोग साथ चुनाव लड़ते है. कोई जाति समीकरण नहीं है.

तो वहीं भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल का कहना है कि प्रतिमा चंद्राकर मेरी बहन है. मेरा उनसे 25 सालों से बहन का रिश्ता है. पार्टी अपनी जगह से और मेरा मेरी बहन से जो रिश्ता है वो अपनी जगह है. चुनाव कांग्रेस और भाजपा लड़ रही है. हम खुद को एक प्रत्याशी मानकर चुनाव लड़ रहे है.

भाजपा-कांग्रेस के दोनों ही प्रत्याशी रिश्ते में सगे तो है ही साथ ही इनकी कहानी भी एक जैसी ही है. दोनों ही प्रत्याशियों की टिकट विधानसभा चुनाव में कट गई थी और दोनों एक ही समाज से आते है. इतनी समानताएं होने के कारण ही दुर्ग का चुनाव रोचक बन गया है. इसके अलावा एक और रिश्ता मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से भी है, जो भाजपा के प्रत्याशी विजय बघेल के चाचा भी है. लेकिन मुख्यमंत्री इससे इत्तेफाक नहीं रखते. सीएम भूपेश बघेल का कहना है कि लोगों को भाजपा के भ्रामक प्रचार से सावधान रहना चाहिए.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

बहरहाल प्रतिमा चंद्राकर बेटी होने के नाते पिता की विरासत आगे बढाने मतदाताओं से उनका आशीर्वाद मांग रही है, तो दूसरी ओर भाई विजय बघेल अपने विजय के लिए स्वच्छ और सुंदर देश निमार्ण का हवाला देकर लोगों के बीच पहुंच रहे है. ऐसे में भाई-बहन के इस चुनाव में लोग रिश्तों को निभाते है या फिर एक बेहतर जनप्रतिनिधि पर अपनी मुहर लगाते है यह परिणाम ही स्पष्ट करेगा.

राहुल के कार्यक्रम में मोदी-मोदी के नारे, बोले- ‘मैं तो प्यार करता हूं, वही नफरत करते हैं’

0

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को पुणे में छात्रों से रू-ब-रू हुए. इस दौरान उनके कार्यक्रम में ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगे. राहुल गांधी से जब पीएम मोदी को लेकर एक सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि वो पीएम मोदी को पसंद करते हैं. इतना सुनते ही हॉल में ‘मोदी-मोदी’ की गूंज होने लगी.

प्रधानमंत्री मोदी को लेकर पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने कहा, “मैं मिस्टर नरेंद्र मोदी को पसंद करता हूं. मेरे मन में उनके प्रति नफरत और गुस्सा नहीं है, लेकिन उन्हें मुझसे नफरत है.”

राहुल गांधी जब ये कह रहे थे उसी वक्त हॉल में ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगने लगे. हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष इससे प्रभावित नहीं हुए. उन्होंने स्थिति को तुरंत संभाला और कहा,  ‘इट्स फाइन…इट्स फाइन. नो प्रॉब्लम.’

एक छात्र ने राहुल गांधी से पूछा कि न्याय योजना का फंड कहां से आएगा. उन्होंने कहा कि हम नीरव मोदी, अनिल अंबानी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या से पैसे लेकर गरीबों को देंगे.

राहुल गांधी ने कहा, ‘हमने पूरा हिसाब लगा लिया है, पैसा कहां से आना है और कैसे बांटा जाना है. पहले पायलट प्रोजेक्ट होगा और उसके बाद पूरे देश में लागू किया जाएगा.’

एयर स्ट्राइक को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वायु सेना को एयर स्ट्राइक का क्रेडिट लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझ में आना चाहिए कि भारत से भिड़ने की कीमत चुकानी पड़ेगी. उन्होंने एयर स्ट्राइक पर राजनीति को गलत बताया.

तलाक देकर दुनिया की तीसरी सबसे अमीर औरत बनीं मैकेंजी बेजोस, पढ़िए उनकी लव स्टोरी

0

ये हैं मैकेंजी बेजोस. साथ में हैं अमेजन के मालिक जैफ बेजोस. दोनों का शादी के 25 सालों बाद तलाक हो गया है. इस तलाक के बाद जैफ बेजोस की संपत्ति का एक चौथाई हिस्सा मैकेंजी बेजोस को देना होगा. इसके तहत जैफ अपनी पत्नी को 35 बिलियन यूएस डॉलर देंगे. भारतीय रुपये मापें तो यह आकड़ा 24 खरब से ज्यादा रुपये होते हैं. इस पैसे से वो दुनिया की सबसे धनी महिलाओं की सूची में शुमार हो जाएंगी. मैकेंजी फिलहाल 48 साल की हैं. माना जाता है कि अमेजन के विशाल अंपायर के पीछे जेफ की पत्नी मैकेंजी की भी काफी भूमिका रही है. शुरुआती सालों में ना केवल उन्होंने जैफ के साथ अमेजन की प्लानिंग और मार्केटिंग की योजना बनाने में साथ दिया बल्कि हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं.

 मैंकेंजी और जैफ की पहली मुलाकात एक इंटरव्यू के दौरान न्यूयॉर्क में हुई थी. उस मुलाकात में जैफ उनका इंटरव्यू ले रहे थे और वो एक रिसर्चर के तौर पर नौकरी के लिए उनके सवालों का जवाब दे रही थीं. तब न्यूयॉर्क की एक फंड कंपनी डीई शॉ में जैफ वाइस प्रेसीडेंट थे. जब उन्हें नौकरी मिल गई तो उनके बैठने की जगह जैफ के केबिन के बगल में ही थी. उनका कहना है कि जैफ जितने जोरदार तरीके से हंसते थे, वो आवाज उन्हें भा गई. जल्दी ही दोनों ने लंच में साथ जाना शुरू कर दिया. तीन महीने बाद ही दोनों ने सगाई कर ली और इसके तीन महीने बाद शादी. विवाह 1993 में हुआ. तब जैफ 29 के थे और मैकेंजी 23 की.

मैंकेंजी और जैफ की पहली मुलाकात एक इंटरव्यू के दौरान न्यूयॉर्क में हुई थी. उस मुलाकात में जैफ उनका इंटरव्यू ले रहे थे और वो एक रिसर्चर के तौर पर नौकरी के लिए उनके सवालों का जवाब दे रही थीं. तब न्यूयॉर्क की एक फंड कंपनी डीई शॉ में जैफ वाइस प्रेसीडेंट थे. जब उन्हें नौकरी मिल गई तो उनके बैठने की जगह जैफ के केबिन के बगल में ही थी. उनका कहना है कि जैफ जितने जोरदार तरीके से हंसते थे, वो आवाज उन्हें भा गई. जल्दी ही दोनों ने लंच में साथ जाना शुरू कर दिया. तीन महीने बाद ही दोनों ने सगाई कर ली और इसके तीन महीने बाद शादी. विवाह 1993 में हुआ. तब जैफ 29 के थे और मैकेंजी 23 की.

 शादी के एक साल बाद ही जैफ ने अपनी शानदार नौकरी छोड़ दी और मैकेंजी को बताया कि वो अमेजन डॉट कॉम के नाम से ईशॉपिंग कंपनी शुरू करना चाहते हैं. मैकेंजी ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहा. फिर दोनों अपने नए वैंचर का प्लान बनाने के लिए पूरे देश में घूमते रहे. जब अमेजन कंपनी की शुरुआत हुई तो मैकेंजी भी इसमें जैफ का हाथ बंटाने लगीं. धीरे धीरे अमेजन बड़ी होती गई. लेकिन इन सारे बरसों में लोग जैफ और मैकेंजी के कपल को एक मिसाल की तरह देखते थे.

शादी के एक साल बाद ही जैफ ने अपनी शानदार नौकरी छोड़ दी और मैकेंजी को बताया कि वो अमेजन डॉट कॉम के नाम से ईशॉपिंग कंपनी शुरू करना चाहते हैं. मैकेंजी ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहा. फिर दोनों अपने नए वैंचर का प्लान बनाने के लिए पूरे देश में घूमते रहे. जब अमेजन कंपनी की शुरुआत हुई तो मैकेंजी भी इसमें जैफ का हाथ बंटाने लगीं. धीरे धीरे अमेजन बड़ी होती गई. लेकिन इन सारे बरसों में लोग जैफ और मैकेंजी के कपल को एक मिसाल की तरह देखते थे.

 मैकेंजी का जन्म अमेरिका के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. मां घर संभालती थीं और पिता फाइनेंशियल प्लानर थे. उन्होंने अंग्रेजी में अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन किया. हाल के सालों में उन्होंने दो नॉवेल लिखकर एक लेखिका के तौर पर नाम कमाया है. यूनिवर्सिटी के दिनों में उनकी क्रिएटिव राइटिंग टीचर और नोबल पुरस्कार अवार्ड टॉनी मॉरिसन कहती हैं कि वो उनकी बेस्ट स्टूडेंट थीं. इन दिनों मैकेंजी बाइस्टैंडर नाम से एक संस्था चलाती हैं, जिसमें वो एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं.

मैकेंजी का जन्म अमेरिका के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. मां घर संभालती थीं और पिता फाइनेंशियल प्लानर थे. उन्होंने अंग्रेजी में अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन किया. हाल के सालों में उन्होंने दो नॉवेल लिखकर एक लेखिका के तौर पर नाम कमाया है. यूनिवर्सिटी के दिनों में उनकी क्रिएटिव राइटिंग टीचर और नोबल पुरस्कार अवार्ड टॉनी मॉरिसन कहती हैं कि वो उनकी बेस्ट स्टूडेंट थीं. इन दिनों मैकेंजी बाइस्टैंडर नाम से एक संस्था चलाती हैं, जिसमें वो एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं.

 ये उन दिनों की तस्वीर है, जब दोनों ने शादी करने के बाद अमेजन को शुरू किया था. जैफ हमेशा से मीडिया में अपनी पत्नी को स्मार्ट, रिसोर्सफुल, ब्रेनी और हॉट बताते रहे हैं. वो कहते हैं कि मेरी बीवी इतनी स्मार्ट है कि कई बार मैं उसको देखता ही रह जाता हूं. वैसे मैकेंजी की पसंदीदा पोशाक जींस और टीशर्ट है, जिसमें वो ज्यादातर नजर आती हैं.

ये उन दिनों की तस्वीर है, जब दोनों ने शादी करने के बाद अमेजन को शुरू किया था. जैफ हमेशा से मीडिया में अपनी पत्नी को स्मार्ट, रिसोर्सफुल, ब्रेनी और हॉट बताते रहे हैं. वो कहते हैं कि मेरी बीवी इतनी स्मार्ट है कि कई बार मैं उसको देखता ही रह जाता हूं. वैसे मैकेंजी की पसंदीदा पोशाक जींस और टीशर्ट है, जिसमें वो ज्यादातर नजर आती हैं.

 मैकेंजी और जैफ के चार बच्चे हैं. ट्विटर पर तलाक के बारे में उन्होंने लिखा है कि वो अलग हो रहे हैं लेकिन परिवार के रूप में बने रहेंगे. ब्लूमबर्ग का कहना है कि दुनिया के सबसे धनी शख्स जैफ बेजोस की संपत्ति को फिलहाल 137 बिलियन डॉलर आंका गया है. तलाक के बाद अगर दोनों का अलगाव हुआ तो दोनों में रकम आधी बंटेगी. इस हिसाब से मैकेंजी 69 बिलियन डॉलर की संपत्ति की मालकिन बन जाएंगी. यानि तब वो दुनिया की सबसे धनी महिला होंगी. फिलहाल दुनिया की सबसे धनी महिला लॉरेल ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मालिक फ्रांकोइस बेटेनकोर्ट मेयर्स हैं. उनके पास 45.6 बिलियन डॉलर की व्यक्तिगत संपत्ति है.

मैकेंजी और जैफ के चार बच्चे हैं. ट्विटर पर तलाक के बारे में उन्होंने लिखा है कि वो अलग हो रहे हैं लेकिन परिवार के रूप में बने रहेंगे. ब्लूमबर्ग का कहना है कि दुनिया के सबसे धनी शख्स जैफ बेजोस की संपत्ति को फिलहाल 137 बिलियन डॉलर आंका गया है. तलाक के बाद अगर दोनों का अलगाव हुआ तो दोनों में रकम आधी बंटेगी. इस हिसाब से मैकेंजी 69 बिलियन डॉलर की संपत्ति की मालकिन बन जाएंगी. यानि तब वो दुनिया की सबसे धनी महिला होंगी. फिलहाल दुनिया की सबसे धनी महिला लॉरेल ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मालिक फ्रांकोइस बेटेनकोर्ट मेयर्स हैं. उनके पास 45.6 बिलियन डॉलर की व्यक्तिगत संपत्ति है.

पार्टी जिसे चाहे बना दे प्रत्याशी, टिकट में देरी पर सुमित्रा महाजन का ऐलान- अब नहीं लड़ना चुनाव

0

इंदौर लोकसभा सीट के लिए पिछले कई दिनों से जारी सस्पेंस औऱ उठापटक को सुमित्रा महाजन ने अपनी ओर से खत्‍म कर दिया है. ताई ने ऐलान कर दिया है कि वह अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. मीडिया में उन्होंने एक खुला पत्र जारी किया है. उसमें लिखा है कि पार्टी अब जो चाहे फैसला कर सकती है.

लोकसभा स्पीकर और इंदौर से लगातार 8 बार से सांसद सुमित्रा महाजन ने आख़िरकार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. शुक्रवार (5 अप्रैल) को इंदौर में उन्होंने मीडिया को एक पत्र भेजा है. इसमें उन्‍होंने कहा है कि मेरे टिकट को लेकर पार्टी असमंजस में है, इसलिए मैं चुनाव न लड़ने की घोषणा कर रही हूं. अब मैं चुनाव नहीं लड़ूंगी, पार्टी जिसे चाहे इंदौर से टिकट दे सकती है.

इंदौर सीट को लेकर बीजेपी में खींचतान मची हुई थी. ताई 80 बरस की हैं, इस लिहाज़ से वह पार्टी के 75 पार की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही थीं. ताई भी अब तक चुनाव लड़ने के इरादे पर कायम थीं. राजनीति और इंदौर में सुमित्रा महाजन का कद इतना बड़ा है कि पार्टी भी उनका टिकट काटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. ताई की इंदौर में लोकप्रियता भी इतनी है कि पार्टी ये तय नहीं कर पा रही थी कि उनका टिकट काटकर किसे दिया जाए. हालांकि, पिछले चुनाव में उनकी जीत का मार्जिन काफी कम रह गया था.

राज्य में तापमान बढ़ने के साथ बढ़ी मटके की मांग

0

धूप की तपिश बढ़ने के साथ अब बाजार में देशी फ्रिज अर्थात मटके की मांग बढ़ने लगी है। साधन संपन्न व धनाढ्य वर्ग आधुनिकता की चाह में फ्रिज जैसे संसाधन अपना रहे हैं। वहीं मध्यम और गरीब तबके के लिए आज भी गर्मी के दिनों में उपयोग में आने वाले मटके यानि देशी फ्रिज शीतल जल से कलेजे को ठंडक पहुंचा रहा है। गर्मी के आगमन के साथ ही मिट्टी के पात्र बनाने वाले कुंभकारों ने अब सुलगते हुए भट्ठों से ईंट खप्पर के साथ-साथ मटका निकालना शुरू कर दिया है। पीढ़ी दर पीढ़ी मिट्टी के बर्तन का व्यवसाय करने वाले कुंभकारों के चाक से इस बार ज्यादा तादाद में मटके निकल रहे हैं और बाजार में मिट्टी से बने तरह-तरह के आकार के मटकों की मांग भी बढ़ने लगी है। गर्मी के सीजन में घरों में मटकों का पानी पीना शुरू हो गया है। नगर से तकरीबन 6 किमी सरायपाली-सारंगढ मार्ग पर स्थित ग्राम बोंदानवापाली ऐसे अनेक घर हैं, जिनका काम मिट्टी से बर्तन बनाना है और इसे यह अपना पुश्तैनी धंधा मानते हैं। यहां के कुंभकार परिवार वर्षों से मिट्टी से निर्मित एक से बढ़कर एक पात्र तैयार कर अपनी जीविका उर्पाजन करते आ रहे हैं। इनका मुख्य व्यवसाय त्योहार में उपयोग में आने वाले मिट्टी के बर्तनों का निर्माण करना है। इसमें गर्मी के सीजन में मटका सुराही, इत्यादि व दीपावली के मौके पर दिया और अन्य मिट्टी निर्मित पात्र जो मांगलिक अवसर पर पूजा इत्यादि कार्यों में उपयोग में लाए जाते हैं। उन्हें सीजन में मांग के अनुसार बनाकर बेचते हैं। हालांकि मटकों की बिक्री ने अभी जोर नहीं पकड़ा है फिर भी 15 से 20 व 30 रुपए तक मटके का मोल रखा गया है।

पीढ़ी दर पीढ़ी मिट्टी के बर्तनों का व्यवसाय करने वाले ललित का परिवार बोंदानवापाली में रहता है। उन्होंने बताया कि मिट्टी निर्मित मटके अब चलन में नहीं रहे। फिर भी आम आदमी जरूर इसे अपने घर में रखना चाहता है। वैसे आम हो या खास दोनों वर्ग के लोग अब भी मटके का पानी बड़े स्वाद से पीते हैं। गर्मी के दिनों मे उपयोग में आने वाले मटके यानी देशी फ्रिज का दाम सस्ता है। लेकिन इन्हें बनाने वाले कुंभकारों की आर्थिक हालत खस्ताहाल है। गर्मी में राहत पहुंचाने वाले मटका ही इनकी आय का मुख्य स्त्रोत है। आसपास के हाट-बाजारों में पसरा लगाकर अथवा गांव के गलियों में घुम-घुमकर मटका बेचने में बहुत कम लाभ मिल पाता है। जबकि शहरी क्षेत्र में मटकों की मांग और दाम दोनों ही ज्यादा है। कड़ी मेहनत करने के बावजूद उन्हें मेहनत के अनुरूप मेहनताना नहीं मिल रहा है। कुंभकारों को सरकारी सुविधा मिलने की दरकार है। पीढ़ी दर पीढ़ी मिट्टी के बर्तनों व ईट खप्पर आदि का व्यवसाय करने वाले कुंभकारों की माली हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। कुंभकार ललित की माने तो इस पैतृक धंधे में अब कोई खास कमाई नहीं रह गई है। लागत राशि  भी बमुश्किल मिल पाती है।

वहीं इस धंधे में अपेक्षानुरूप फायदा नहीं मिलने के बावजूद उन्हें इसी व्यवसाय से जुड़े रहने की मजबूरी है। क्योंकि वे अपने पैतृक कार्य के अलावा और कोई काम नहीं जानते। मजबूरी और पुश्तैनी धंधा होने के कारण भी इस व्यवसाय से इनका मोह भंग नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण आर्थिक संकट झेलने के लिए मजबूर हैं। आगे उन्होंने बताया कि बस्तर आर्ट के नाम पर बस्तर में उत्पादित वस्तुओं व हस्तनिर्मित काष्ट शिल्प को जिस तरह सरकारी संरक्षण मिलता है। उसी तरह कुंभकारों को भी संरक्षण मिलना चाहिए। शासन द्वारा  इलेक्ट्रानिक चाक देने का वादा किया गया था, लेकिन नहीं मिला।  गरीबों के देशी फ्रिज पर आधुनिकता की मार पड़ती नजर आ रही है। मिट्टी से बने मटकों की मांग दिनों-दिन कम होती जा रही है, जिसके चलते इस व्यवसाय से जुड़े अधिकांश लोग अपना पुश्तैनी धंधा छोड़कर अन्य कार्यों से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। देशी फ्रिज की जगह आधुनिक फ्रिज ने ले ली है। जब से  फ्रिज का चलन शुरू हुआ लोगों ने मटके का पानी पीना कम कर दिया है। इन अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों की वजह से मेहनतकश मजदूरों की मजदूरी भी छिन रही है। ज्यादातर लोग अपने पुश्तैनी धंधे को छोड़ चुके हैं। वहीं अब कुछ ही परिवार इस काम में लगे हैं।