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फर्जी है छत्तीसगढ़ की इस महिला भाजपा विधायक की जाति? कलेक्टर ने जारी किया नोटिस..

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वाड्रफनगर: प्रतापपुर सीट से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते अपनी जाति को लेकर मुसीबत में घिरती हुई नजर आ रहीं हैं। फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में ​हिला कलेक्टर ने उन्हें प्रमाण पत्र के साथ तलब ​किया है। जिला कलेक्टर की ओर से जारी नोटिस में उन्हें जाति प्रमाण पत्र से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। मामले में 27 नवंबर को छानबीन समिति सुनवाई करेगी। बता दें कि शकुंतला सिंह पोर्ते की जाति के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद छानबीन समिति जांच कर रही है।

फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाया

दरअसल बीते दिनों आदिवासी समाज की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया गया था कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाया है। उनका दावा था कि जाति प्रमाण पत्र पिता पक्ष से बनता है, न कि पति पक्ष से। इस आधार पर आरोप लगाया गया कि विधायक ने फर्जी दस्तावेज़ के माध्यम से आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की।

उच्च न्यायालय में याचिका दायर

 मामले में गोंड समाज की जयश्री सिंह ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को इस मामले में कार्रवाई का आदेश दिया था। कोर्ट ने जिला स्तरीय छानबीन समिति और उच्च स्तरीय छानबीन समिति रायपुर को निर्देशित किया कि वे इस मामले की तुरंत जांच करें। इसके बाद, जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, बलरामपुर ने विधायक को तीन बार नोटिस जारी किया। इनमें जाति प्रमाण पत्र के संबंध में मूल दस्तावेज और अन्य सुसंगत अभिलेख प्रस्तुत करने कहा गया।

पूर्व सीएम अजीत जोगी की जाति की भी हुई थी जांच

बता दें कि जाति को लेकर छत्तीसगढ़ में ये पहला मामला नहीं है जब किसी नेता को कटघरे में खड़ा किया गया हो। इससे पहले पूर्व सीएम अजीत जोगी और उनके परिवार के सदस्यों की जाति को लेकर लंबा मामला चल चुका है। मामले में अजीत जोगी को सुप्रीम कोर्ट तक का चक्कर लगाना पड़ा था।

जिला सहकारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित, 5 दिनों में 64,061 क्विंटल धान खरीदा गया, किसानों में उत्साह बना हुआ है…

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कबीरधाम: जिले में बीते 3 नवंबर से चल रही जिला सहकारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित हो गई है। संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर गोपाल वर्मा से मुलाकात कर हड़ताल स्थगन का पत्र सौंपा। जिला सहकारी संघ की ओर से कहा गया कि शासन द्वारा 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ कर दी गई है। किसानों के हित को देखते हुए जिला सहकारी संघ के समस्त कर्मचारी अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित करते हैं और 21 नवंबर, शुक्रवार से अपने कार्य पर लौट जाएंगे। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, संयुक्त कलेक्टर आर बी देवांगन, उप पंजीयक सहकारिता जी एस शर्मा, खाद्य अधिकारी सचिन मरकाम, डीएमओ अभिषेक मिश्रा, सीसीबी नोडल आर पी मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व जिला सहकारी संघ के सदस्य उपस्थित रहे।

अब तक 64061 क्विंटल धान की खरीदी

 दूसरी ओर कबीरधाम जिले में धान खरीदी अब रफ्तार पकड़ चुकी है। खरीफ वर्ष 2025 के तहत बीते 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी के अंतर्गत 5 दिनों में अब तक जिले में 64 हजार 61 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। 1377 किसानों ने खरीदी केंद्रों में पहुंचकर अपना धान बेचा है। धान खरीदी पर किसानों को 11.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

किसानों में धान खरीदी को लेकर उत्साह

शासन ने किसानों की सुविधा के लिए खरीदी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन टोकन प्रणाली के साथ खरीदी केंद्रों में सभी जरूरी इंतजाम सुनिश्चित किए हैं। जिससे किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। धान बेचने के पश्चात भुगतान जारी करने की प्रक्रिया भी साथ साथ चल रही है। जिससे किसानों में धान खरीदी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सरकार ने धान खरीदी को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखा है। जिसके तहत खरीदी केंद्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

किसानों को किसी प्रकार की समस्या हो: कलेक्टर

कलेक्टर कबीरधाम ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि खरीदी केंद्रों में धान बेचने आए किसानों को किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए लगातार खरीदी केंद्रों का निरीक्षण करें। उन्होंने केंद्रों में टोकन अनुसार खरीदी, धान की व्यवस्थित और त्वरित तौलाई सहित बारदाने, धान के भंडारण जैसे तमाम व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा है। ऑनलाइन टोकन कटाने से लेकर खरीदी केंद्रों में तौलाई और बारदाने के इंतजाम से किसानों को धान बेचने में सहूलियत हो रही है। खाद्य अधिकारी ने बताया कि 19 नवंबर तक जिले के 1377 किसानों से 64 हजार 61 क्विंटल धान का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा लगातार टोकन कटवाया जा रहा है जिससे आने वाले दिनों में खरीदी की यह रफ्तार और बढ़ेगी।

“CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा, पद से हटाने के लिए शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव लाने की तैयारी”

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लोकसभा में नेता विपक्ष अपने कथित साक्ष्यों के साथ केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर मिलकर गलत तरीके से SIR लागू करके वोट चोरी का इल्जाम लगाया. अब बिहार में हार के बाद वो इस मुद्दे पर और हमलावर होने के मूड में है.

इसलिए वो इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों से चर्चा कर रही है, जिसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है.

वैसे आंकड़ों की बात करें तो ऐसे किसी प्रस्ताव को पास करने का आंकड़ा विपक्ष के पास नहीं है. लेकिन अपने आंकड़ों के दम पर वो प्रस्ताव तो ला ही सकता है. इसके जरिए कांग्रेस बिहार में हार के बाद इंडिया ब्लॉक में बिखराव की खबरों और सहयोगी दलों के दबाव को दरकिनार करना चाहती है क्योंकि, SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर ममता, अखिलेश, लेफ्ट, शिवसेना, स्टालिन भी खिलाफ हैं.

विपक्ष को ये मालूम है कि वो ऐसा प्रस्ताव मूव तो कर सकता है, लेकिन पास नहीं करा सकता. लेकिन इस प्रस्ताव के जरिए वो अपने चार अहम बिंदुओं को जनता तक पहुंचाना चाहता है.

पीएम, नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की चयन समिति में कानून लाकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की जगह कैबिनेट मंत्री को रखा गया.

ऐसा भी कानून बनाया गया, जिससे मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्त (2023) अधिनियम के तहत मुख्य और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कामकाज के दौरान किए गए निर्णयों, कार्यों या बयानों के लिए किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा मिलती है. यानी उनके खिलाफ न तो दीवानी और न ही फौजदारी मुकदमेबाजी हो सकती है. इसके अलावा, किसी आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से हटाया नहीं जा सकता.

ऐसे में खुलकर चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के साथ मिलकर SIR प्रकिया हो, वोटर लिस्ट में धांधली, महज 45 दिन बाद सीसीटीवी फुटेज नष्ट करने के काम सत्ता पक्ष के हक में करता है. वहीं विपक्ष के आरोपों को अनसुना कर देता है. ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.

विपक्ष, खासकर कांग्रेस को उम्मीद है कि, इस मुद्दे पर चर्चा और वोटिंग हुई तो उसे अपनी बातें खुलकर कहने का मौका मिलेगा। साथ ही इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक एकजुट दिखेगा, यहां तक कि, आप जैसे दल भी विपक्ष के साथ ही खड़े दिख सकते हैं. इससे वो सत्ता पक्ष और चुनाव आयुक्त को एक पाले में, वहीं पूरे विपक्ष को एक पाले में रखकर अपना नैरेटिव सेट कर पायेगा.

“नीतीश ने रचा इतिहास, 10वीं बार बने CM… जानिए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय क्या पढ़ा जाता है?”

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बिहार में नीतीश कुमार ने आज 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। NDA द्वारा बुधवार को उन्हें अपना नेता चुने जाने के बाद नई सरकार का गठन हुआ। पटना के गांधी मैदान में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और NDA के अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे।

नीतीश कुमार ने सुबह 11.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(3) के तहत होता है, जिसमें मुख्यमंत्री और मंत्रियों को अपने पद और गोपनीयता के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प लेना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पद का दुरुपयोग न हो और सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाए।

शपथ का नियम और पाठ

भारतीय संविधान के अनुसार शपथ लेने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप में शपथ पढ़नी होती है। शपथ दिलाने की जिम्मेदारी राज्यपाल की होती है। यदि कोई शपथ गलत पढ़ता है, तो राज्यपाल उसे सही ढंग से पढ़ने के लिए रोक सकते हैं। शपथ में मुख्यमंत्री यह प्रतिज्ञा करते हैं कि वे अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और ईमानदारी से पालन करेंगे, संविधान की रक्षा करेंगे, और किसी भी प्रकार के पक्षपात या भय के बिना न्याय करेंगे। इसके अलावा, वे अपने पद के दौरान प्राप्त किसी भी गोपनीय जानकारी को साझा नहीं करेंगे।

शपथ के बाद दस्तावेज पर दस्तखत

मुख्यमंत्री और मंत्रियों को शपथ लेने के बाद संवैधानिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होता है। यह दस्तावेज राज्यपाल के पास रखा जाता है और सचिव द्वारा सत्यापित किया जाता है। सत्यापन और अनुमोदन के बाद इसे गजट नोटिफाइड किया जाता है, जिससे शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी मानी जाती है। नीतीश कुमार की नई सरकार की शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार में NDA की प्रचंड जीत के बाद सरकार का नया कार्यकाल भी शुरू हो गया है।

“Crypto Investors Alert: बिटकॉइन में बड़ी गिरावट, निवेशकों को हुआ भारी नुकसान”

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Crypto Investors Alert: बिटकॉइन में बड़ी गिरावट, निवेशकों को हुआ भारी नुकसान…

क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। बिटकॉइन गुरुवार, 20 नवंबर को फिर से लाल निशान में ट्रेड करते हुए 92,000 डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया। अक्टूबर से जारी गिरावट ने निवेशकों को करीब 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान दिलाया है।

गिरावट के पीछे क्या वजहें हैं?

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी सरकार द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने से निवेशक क्रिप्टो में भारी दांव लगाने से बच रहे हैं। इसके अलावा, लगातार बिकवाली और पिछले पांच दिनों से स्पॉट बिटकॉइन ETF से पैसों की निकासी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

18 नवंबर को बिटकॉइन 90,000 डॉलर के नीचे ट्रेडिंग पर पहुंच चुका था, जिससे यह सात महीने का सबसे निचला स्तर बन गया। इस दौरान छोटे निवेशकों की भागीदारी कम हो गई है, लेकिन बड़े निवेशक अभी भी बाजार में भरोसा बनाए हुए हैं।

आज का क्रिप्टो प्राइस

क्रिप्टो कीमतों की जानकारी देने वाली वेबसाइटों के अनुसार, गुरुवार 20 नवंबर को बिटकॉइन 92,577.82 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक महीने में बिटकॉइन में 14.16% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, एथेरियम 3,035.42 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले महीने की तुलना में 21.44% नीचे है। सोलाना की कीमत 143.71 डॉलर रही।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो बाजार की यह स्थिति निवेशकों को सतर्क करती है और जल्द ही आने वाले आर्थिक संकेतों के आधार पर कीमतों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

“Elon Musk का भविष्य को लेकर बड़ा दावा: AI युग में न नौकरी की जरूरत, न पैसों की…”

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दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के दौर में प्रवेश कर रही है। इसी बीच टेस्ला और स्पेसX के CEO एलन मस्क ने भविष्य को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है।

उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसा समय आएगा, जब इंसानों को न नौकरी करने की जरूरत होगी और न ही पैसों की कोई अहमियत रह जाएगी। हर जरूरत AI और रोबोट अपने आप पूरी कर देंगे।

AI के कारण पैसों का महत्व खत्म हो जाएगा

एक अंतरराष्ट्रीय फोरम में बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि जैसे-जैसे AI और रोबोटिक सिस्टम विकसित होते जाएंगे, पैसों की भूमिका धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में मनुष्य को केवल बिजली और संसाधनों की जरूरत होगी, बाकी सब कुछ AI अपने आप संभाल लेगा।

मस्क ने साइंस फिक्शन लेखक Iain Banks की Culture Series का उदाहरण देते हुए कहा कि यह किताबें ऐसे समाज को दिखाती हैं जहाँ तकनीक इंसान की लगभग हर जरूरत बिना किसी मेहनत के पूरी कर देती है।

नौकरी नहीं, केवल ‘शौक’ बन जाएगा काम मस्क के अनुसार आने वाले समय में काम करना इंसानों के लिए मजबूरी नहीं बल्कि एक ऐच्छिक गतिविधि बन जाएगी। उनका कहना है कि ‘लोग नौकरी इसलिए नहीं करेंगे कि उन्हें जरूरत है, बल्कि इसलिए कि उन्हें कोई विशेष काम करना पसंद है। काम एक शौक की तरह होगा जैसे बागवानी, पेंटिंग या वीडियो गेम।’

इस बदलाव से समाज की संरचना और जीवनशैली में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा।

Tesla Optimus और Universal High Income का विजन

मस्क ने बताया कि टेस्ला का ह्यूमनॉइड रोबोट Optimus दुनिया में गरीबी खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि जब मशीनें सभी जरूरी काम संभाल लेंगी, तब सरकारों को लोगों को Universal High Income देनी होगी, जो सामान्य बेसिक इनकम से कहीं अधिक होगी। इस तरह हर व्यक्ति बिना किसी आर्थिक चिंता के जीवन जी सकेगा।

फोरम में Jensen Huang के साथ दिलचस्प बातचीत

U.S.-Saudi Investment Forum में मस्क और Nvidia के CEO Jensen Huang के बीच AI के भविष्य पर चर्चा हुई। मस्क ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा— अगर पैसा ही अप्रासंगिक हो गया, तो कमाई और शेयर मार्केट का क्या मतलब? दोनों ने इस बात पर मुस्कुराते हुए पानी की बोतलें टकराईं, जो इस बात का संकेत थी कि टेक उद्योग के दिग्गज आने वाले समय में AI को कितना निर्णायक मानते हैं।

“भारत की रक्षा शक्ति में जबरदस्त बढ़ोतरीः US ने खोले हाई-टेक हथियारों के भंडार, 90 मिलियन डॉलर की डील को मंजूरी”

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अमेरिका ने भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा रक्षा सौदा मंजूर कर दिया है। वॉशिंगटन ने भारत को एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड प्रोजेक्टाइल और एफजीएम-148 जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम के साथ विभिन्न सहायक उपकरणों की बिक्री को हरी झंडी दे दी है। इस रक्षा पैकेज की कुल अनुमानित कीमत 90 मिलियन डॉलर (750 करोड़ रुपये से अधिक) बताई जा रही है।

DSCA ने कांग्रेस को सौंपी रिपोर्ट

अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने दो अलग-अलग प्रस्तावों को मंजूरी दी है लगभग 47.1 मिलियन डॉलर के 216 M982A1 Excalibur प्रोजेक्टाइल और संबंधित उपकरण, लगभग 45.7 मिलियन डॉलर के 100 Javelin मिसाइलों, 25 कमांड-लॉन्च यूनिट्स, ट्रेनिंग एड्स, सिमुलेशन राउंड्स, स्पेयर पार्ट्स और लाइफसाइकल सपोर्ट, इसके साथ ही तकनीकी सहायता, ‘पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक फायर कंट्रोल सिस्टम’, इम्प्रूव्ड प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन किट, मरम्मत सेवाएं और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है।

अमेरिका बोला-भारत क्षेत्र में ‘स्थिरता की महत्वपूर्ण शक्ति’

DSCA ने कहा कि यह बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है। भारत को हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया में स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति की महत्वपूर्ण शक्ति बताया गया।एजेंसी के मुताबिक, यह हथियार भारत की सटीक हमला क्षमता बढ़ाएंगे और उसे वर्तमान एवं भविष्य के खतरों से निपटने में अधिक सक्षम बनाएंगे। इसके अलावा, यह खरीद भारतीय ब्रिगेड की “फर्स्ट स्ट्राइक एक्यूरेसी” को भी मजबूत करेगी।रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय सशस्त्र बलों को इन हथियारों और उपकरणों को एकीकृत करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि इस संभावित बिक्री से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कौन होंगे प्रमुख ठेकेदार?

RTX Corporation, Arlington (VA) – एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल

RTX/Lockheed Martin Javelin Joint Venture – जेवलिन मिसाइल सिस्टम

अमेरिकी सरकार ने कहा कि इस सौदे से उनकी रक्षा तैयारियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और भारत को उपकरण भेजने में किसी अतिरिक्त सरकारी या ठेकेदार प्रतिनिधि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

“बिहार चुनाव पर नया तूफ़ान: 175 नामचीन हस्तियों का खुला पत्र-जनादेश में गड़बड़, विपक्ष नतीजे ठुकराए”

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बिहार विधानसभा चुनाव के औपचारिक नतीजे सामने आने के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। देश के 175 प्रतिष्ठित नागरिक—जिनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, पूर्व वरिष्ठ प्रशासक, अर्थशास्त्री, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं—ने विपक्षी दलों को संबोधित एक खुला पत्र जारी कर चुनाव परिणामों को ‘अविश्वसनीय और संदिग्ध’ बताया है।

इस पत्र पर सबसे प्रमुख हस्ताक्षर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी के हैं। इनके साथ कई पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने नाम दर्ज किए हैं।

चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल: ‘मतदाता सूची से छेड़छाड़ हुई’

पत्र का मुख्य आरोप यह है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को असमान और पक्षपाती बना दिया। हस्तियों ने दावा किया—लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए,

हर नागरिक पर नए फॉर्म भरने का दबाव बनाकर भ्रम की स्थिति पैदा की गई, और अंतिम मतदाता सूची में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव रहा। इनका आरोप है कि इस बदलाव का परिणाम एक ऐसी मतदाता सूची के रूप में सामने आया जिसने चुनावी संतुलन को बिगाड़ दिया और लोगों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर किया।

लोकतांत्रिक ढांचे पर चोट—हस्तियों ने उठाई आवाज

पत्र में यह भी कहा गया कि मौजूदा परिस्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। हस्तियां लिखती हैं-‘मतदाताओं को हटाना और चुनिंदा इलाकों में नए मतदाता जोड़ना, यह सब एक बड़े राजनीतिक उद्देश्य से किया गया प्रयास प्रतीत होता है।’ ‘देश के नागरिकों के रूप में हम इस चुनाव को निष्पक्ष नहीं मानते और ऐसे जनादेश को वैधता नहीं दे सकते।’ इन नागरिकों ने विपक्ष से स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि वह नतीजों को औपचारिक रूप से खारिज करे और जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होकर आंदोलन करे।

चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार

पत्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी असाधारण रूप से तीखा हमला किया गया है। हस्तियों का दावा है—

आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका निभाने में विफल रहा, उसके निर्णय लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं,और मौजूदा नेतृत्व की कार्यप्रणाली उसे ‘रक्षक’ से ‘भक्षक’ की स्थिति में ले जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह आयोग वर्तमान स्वरूप में भरोसे के योग्य नहीं रह गया है और इसे नए सिरे से, निरपेक्ष और गैर-राजनीतिक ढंग से पुनर्गठित किया जाना चाहिए।

विपक्ष की रणनीतिक कमी’—नागरिकों की नाराज़गी

खुले पत्र में यह भी उल्लेख है कि विपक्षी दलों ने नागरिक समाज और जमीनी अभियानों के साथ बेहतर तालमेल नहीं बनाया जबकि लाखों लोग मतदाता अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतर रहे थे।

हस्तियां कहती हैं—विपक्ष ने बदले हुए चुनाव मॉडल में भाग लेकर अनजाने में पूरी प्रक्रिया को वैधता दे दी।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए दलों और जनता को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। आने वाले 12 राज्यों में भी SIR लागू होने की चेतावनी पत्र में यह भी कहा गया है कि SIR की प्रक्रिया अब 12 और राज्यों में शुरू होने वाली है। हस्तियों ने संकेत दिया— वे इस प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करेंगे, और किसी भी तरह की अनियमितता को चुनौती देंगे।

किन-किन ने किया हस्ताक्षर?

इन 175 प्रमुख हस्तियों में शामिल नाम— बी. सुदर्शन रेड्डी (पूर्व SC जज) देवश्याम एमजी (पूर्व IAS अधिकारी) पराकला प्रभाकर  (राजनीतिक अर्थशास्त्री) शंकर केजी (पूर्व हाईकोर्ट जज, आंध्र प्रदेश) प्रकाश राज (अभिनेता) माधव देशपांडे (तकनीकी व सुरक्षा विशेषज्ञ) राम शरण (जनतंत्र समाज, बिहार) राशिद हुसैन  (सामाजिक कार्यकर्ता) और कई प्रतिष्ठित जन-प्रतिनिधि एवं चिंतक।

सीएम विष्णुदेव साय ने दी नीतीश कुमार को बधाई, कहा.. विकास की गंगा बहेगी सुशासन स्थापित होगा…

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नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि बिहार में फिर से विकास और सुशासन की स्थापना होगी। साय ने बताया कि किसी भी राज्य में स्थिर शासन और विकासोन्मुख नेतृत्व पूरे देश के लिए सकारात्मक संकेत देता है। नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “नीतीश कुमार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। एक बार फिर वह सीएम का दायित्व संभालेंगे। बिहार की जनता को भी बहुत बहुत बधाई, बिहार में फिर विकास की गंगा बहेगी और सुशासन स्थापित होगा।” सीएम ने कहा कि देश के किसी भी राज्य में स्थिर शासन और विकासोन्मुख नेतृत्व पूरे देश के लिए शुभ संकेत होता है।

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में अब बढ़ेगी कनेक्टिविटी, केंद्र सरकार ने एक साथ इतनी सड़कों के निर्माण को दी मंजूरी, सीएम साय ने जताया आभार…

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रायपुर: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान कायम की है। योजना के विभिन्न चरणों में छत्तीसगढ़ को अब तक कुल 9,722 सड़कें (48,594 किमी) और 669 पुल स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 8,753 सड़कें (43,380 किमी) और 470 पुलों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर जानकारी दी कि ग्रामीण सड़क संपर्क को और सुदृढ़ करते हुए PMGSY-IV के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 774 नई सड़कें (कुल लंबाई 2,426.875 किमी) स्वीकृत की गई हैं। यह पहली बार है जब इस चरण में पात्र संपर्क-विहीन बसावटों को ‘बारहमासी सड़क संपर्कता’ प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस स्वीकृति से छत्तीसगढ़ की दूरस्थ और वंचित बसावटों तक सर्व मौसम सड़क सुविधा पहुँचाने का मार्ग खुल गया है।

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्णय की जानकारी देते हुए कहा गया है कि बारहमासी सड़क संपर्कता से इन बसावटों को बाज़ार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पोषण, आपदा प्रबंधन और दैनिक आवागमन में व्यापक सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी, ग्रामीण आजीविका में वृद्धि और जन-कल्याणकारी सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित होगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने लगातार अग्रणी प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों, पीएमजीएसवाई टीम, इंजीनियरों और मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रयास निरन्तर जारी रहेगा और छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की गति में तेजी आएगी

सीएम साय ने इसे लेकर कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को मिली 774 नई सड़कों की स्वीकृति हमारे ग्रामीण विकास अभियान को नई गति देगी। यह निर्णय दूरस्थ और संपर्क-विहीन बसावटों को बारहमासी सड़क सुविधा प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक ग्राम तक सुरक्षित, सुदृढ़ और सर्व मौसम सड़क संपर्क सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और जन-कल्याण को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जाए।