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बाबा रामदेव की पतंजलि के लिए टेंशन बना सिंगापुर का ये बैंक, पहुंचा कोर्ट

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बाबा रामदेव की पतंजलि पर मुश्किलों में फंस सकती है, क्योंकि सिंगापुर के DBS बैंक ने रुचि सोया को खरीदने के पतंजलि के प्रस्ताव के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है. DBS का दावा है कि उसे एसेट्स की उचित कीमत नहीं मिली है. बता दें कि पतंजलि 4350 करोड़ रुपये में रुचि सोया का अधिग्रहण करने वाली है. DBS रुचि सोया के 27 वित्तीय लेनदारों में से एक है.

इसने दो बार कंपनी को एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग के जरिये पैसा जुटाने की सुविधा दी है. इसके एवज में रुचि सोया की कांडला (गुजरात ) की मैन्युफैक्चरिंग रिफाइनरी यूनिट्स और गुना, दालोदा और गदरवाड़ा (मध्य प्रदेश) व बारन (राजस्थान) की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के मौजूदा और फ्यूचर फिक्स्ड एसेट्स पर पहला दावा DBS का है.

ये तीन बैंक कर सकते हैं पतंजलि की मदद

12 हजार करोड़ के क़र्ज़ में डुबी हुई है Ruchi Soya 
रुचि सोया पर करीब 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. कंपनी के कई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और उसके पास न्यूट्रेला, महाकोश, सनरिच , रुचि स्टार और रुचि गोल्ड जैसे ब्रांड हैं. NCLT ने दिसंबर 2017 में कर्जदाता स्टैण्डर्ड चार्टर्ड और DBS बैंक के आवेदन पर रुचि सोया को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता प्रक्रिया के लिए भेजा था. दिवाला प्रक्रिया और कंपनी के कामकाज के प्रबंधन के लिए शैलेंद्र अमरेजा को समाधान पेशवर नियुक्त किया गया था.

इन ख़ास तरीकों से पाएं बेहतरीन गोरापन

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चेहरे पर उपयोग करने के लिये आप एक बड़े चम्मच भर दही लें और इसे चेहरे पर लगाते हुये अच्छी तरह से मसाज करें। इसके बाद 15-20 मिनट के लिए इसे लगे रहने दें। जब ये अच्छी तरह से सूख जाये तब फेस को साबुन रहित क्लींजर का उपयोग कर गुनगुने पानी से धो लें। इसका उपयोग करने से आपके चेहरे पर निखार आयेगा और त्वचा की मृत कोशिकायें भी दूर हो जाती हैं।

त्वचा की रंगत में निखार लाने का यह सबसे अच्छा घरेलू उपचार माना जाता है। नींबू में पाये जाने वाले विटामिन सी और साइट्रिक एसिड त्वचा में निखार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। नींबू में पाये जाने वाले तत्व इतने फायदेमंद होते हैं कि चेहरे पर इसका उपयोग करते समय किसी अन्य सामग्री को मिलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

आधा नींबू का रस ही आपकी त्वचा पर काफी असरदार साबित हो सकता है।एक चम्मच नींबू के रस में पानी की थोड़ी सी मात्रा में मिलाकर इसे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाकर 10 मिनट के लिए लगा रहने दें। जब यह त्वचा पर सूख जाये तो ठंडे पानी से अपने चेहरे व गर्दन को अच्छी तरह से धो लें।

इसके बाद चेहरे पर किसी मॉइस्चराइजर लोशन को लगा लें। जिससे त्वचा को ड्राई होने से बचाया जा सके। बेसन त्वचा की गंदगी को साफ कर निखार लाने के लिये सबसे अच्छा उपाय बताया जाता है। बेसन त्वचा में स्क्रब का काम करता है, जिससे त्वचा की मृत कोशिकायें दूर होती है। चेहरे पर निकलने वाले अनचाहे बालों की भी सफाई हो जाती है। इससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार देखने को मिलता है।

चेहरे पर बेसन का उपयोग करने के लिये आप किसी बर्तन में बेसन को लेकर उसमें पानी मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और इसे अपने चेहरे पर लगायें। 5 से 10 मिनट तक लगे रहने के बाद चेहरे को धो लें। थोड़ी ही देर बाद आपको अपने चेहरे पर अद्भुत चमक देखने को मिलेगी।त्वचा में निखार लाने के लिये कच्चे आलू का प्रयोग जादुई असर से कम नहीं है।

इसमें पाये जाने वाला स्टार्च चेहरे की गंदगी को साफ कर त्वचा में अद्भुत निखार लाने का काम करता है। इसका उपयोग करने से त्वचा में होने वाले दाग धब्बों से भी छुटकारा मिलता है।चेहरे पर आलू का उपयोग करने के लिये आप आलू के कटे हुये स्लाइस या फिर इसका रस भी सीधे त्वचा पर लगा सकते हैं।

15 से 20 मिनट तक लगा रहने के बाद आप इसे ठंडे पानी से धो लें। ये आपके चेहरे पर निखार लाने के सबसे अच्छा और सबसे सरल उपाय साबित होता है।टमाटर में पाये जाने वाले प्राकृतिक तत्व कील मुहांसों को साफ कर अंदर की गंदगी को बाहर निकालने का काम करते हैं। इससे चेहरे के दाग धब्बों से मुक्ति मिलती है।

चेहरा साफ सुंदर होकर दमकने लगता है।टमाटर का उपयोग चेहरे पर करने के लिये इसके अंदर के गूदे को बाहर निकाल कर उसे फेस और गर्दन पर लगायें। इसके बाद इसे 15 मिनट के लिये त्वचा पर लगे रहने दें। सूख जाने के बाद सादे पानी से धो लें।

सरकार ने दी मंजूरी, 1 अक्टूबर से बदलेगा आपका ड्राइविंग लाइसेंस

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सरकार ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने के नियमों को आसान कर रही है. अगले पांच महीने यानी 1 अक्टूबर 2019 से पूरे देश में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) एक जैसे होंगे. मतलब साफ है कि अब हर राज्य में अब डीएल और आरसी का कलर एक जैसा ही होगा और उनमें जानकारियां समान जगह पर ही होंगी. इसको लेकर केंद्र सरकार नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है. देश में रोजाना करीब 32,000 डीएल या तो इशू होते हैं या रीन्यू किए जाते हैं. इसी तरह रोजाना करीब 43,000 गाड़ियां रजिस्टर या री-रजिस्टर होती हैं. इस नए डीएल या आरसी में 15-20 रुपये से अधिक का खर्च नहीं होगा. ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस बदलाव से ट्रैफिक का जिम्मा संभालने के जिम्मेदारों को भी सहूलियत होगी.

(1) बदल जाएगा आपका DL- इस फैसले से डीएल और आरसी में जानकारियों को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी. अब तक हर राज्य अपनी सुविधा के अनुसार ही डीएल और आरसी का फॉर्मेट तैयार करता है. जिसकी वजह से किसी राज्य में कुछ जानकारियां अगर डीएल के फ्रंट पर हैं तो कुछ राज्यों में वहीं जानकारियां पीछे की ओर होती हैं. लेकिन अब सभी राज्यों में जो भी डीएल या आरसी बनेंगे, उनमें एक जैसी जगह पर ही जानकारी दी जाएगी. 

(2) अब स्मार्ट होगा DL-  इन स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस डीएल और आरसी में माइक्रोचिप और क्यूआर कोड होंगे जिसके चलते अतीत में किए गए नियम उल्लंघनों को छिपाना लगभग असंभव होगा.

>> इस क्यूआर कोड के जरिए केंद्रीय ऑनलाइन डेटाबेस से ड्राइवर या वाहन के पिछले रिकॉर्ड को एक डिवाइस के जरिए पढ़ा जा सकेगा.

>> ट्रैफिक पुलिस को उनके पास मौजूद डिवाइस में कार्ड को डालते ही या क्यूआर कोड को स्कैन करते ही गाड़ी और ड्राइवर की सारी डिटेल मिल जाएंगी.

>> इस नोटिफिकेशन के मुताबिक सभी राज्यों को एक अक्टूबर से ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पीवीसी आधारित बनाने होंगे या फिर पोलिकार्बोनेट होंगे.

>> इनमें चिप भी लगी होगी और जानकारी भी उसी फॉर्मेट में होगी, जिसमें केंद्र सरकार ने नोटिफाई किया है.

अगले महीने बाज़ार में दस्तक देगी सात सीटर WagonR, जानिए किन खूबियों के साथ आएगी कार

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Maruti Suzuki भारतीय बाजार में सात सीटों वाली Wagon R को अगले महीने लॉन्च कर सकती है. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक कम्पनी अपनी इस सात सीटर Wagon R को नेक्सा प्रीमियम डीलरशिप्स के जरिए सेल करेगी. मारूति अपनी Nexa डीलरशिप्स के जरिए प्रीमियम कारों की बिक्री करती है. वहीं, रिपोर्ट्स की मानें तो 7-सीटर Wagon R की लॉन्च में हो रही देरी का एक बड़ा कारण इसके तीसरे जेनरेशन की कम बिक्री था.

नई Wagon R 7-सीटर MPV की बिक्री भारत में जून के महीने में शुरू की जा सकती है. कंपनी नई मारुति Wagon R 7-सीटर MPV को बेहतरीन फीचर्स के साथ प्रीमियम कार के तौर पर मार्किट में उतारेगी. इसी वजह से कंपनी ने एरिना शोरूम की जगह Nexa को सेलेक्ट किया है. WagonR सात सीट के हाइब्रिड वैरियंट को भी लॉन्च किया जा सकता है. सात सीटर WagonR कार 1.2 लीटर, फोर सिलेंडर पेट्रोल इंजन वैरियंट के साथ आएगी.

जो 82bhp की पावर और 113 न्यूटन मीटर का टॉर्क प्रोड्यूस करेगी. इसमें 5 स्पीड मैनुअल और 5 स्पीड ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन का ऑप्शन मिलेगा. नई वैगनआर को बड़े व्हील बेस के साथ लॉन्च किया जा सकता है. कम्पनी भारत में अपनी सात सीटर WagonR का दाम 5 से 6 लाख रुपए के बीच हो सकती है. इस रेंज में इसका मुकाबला Renault की Triber MPV से होगा. जिसे जल्द ही भारत में लॉन्च किया जाएगा.

अनोखा स्कूल जहां फीस के लिए पैसे नहीं बल्कि बच्चे देते हैं प्लास्टिक का कचरा

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प्लास्टिक प्रदूषण आज दुनिया के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है जिसकी ओर गंभीरता से सोचने और कदम उठाने की जरूरत है। इसी दिशा में गुवाहाटी के अक्षर स्कूल ने एक बेहतर प्रयास शुरू किया है। इस स्कूल में बच्चों से फीस की जगह प्लास्टिक कचरा लिया जाता है।

स्कूल में बच्चों को शपथ दिलाई जाती है कि वे प्लास्टिक को जलाएंगे नहीं और उनसे इन्हें इकट्ठा करके फीस के रूप में ले लिया जाता है। हर बच्चे को सप्ताह में 10 से 20 प्लास्टिक की चीजें जमा करनी होती हैं। फिर इन्हें रिसाइकिल कर दूसरी चीजें बनाईं जाती हैं। इस स्कूल को बनाने में प्लास्टिक से ही बनीं ईको ब्रिक्स का इस्तेमाल किया गया है।

गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए परमिता शर्मा और माजिन मुख्तर ने 2016 में इस स्कूल की शुरुआत की थी। यहां बच्चों को गणित, विज्ञान जैसे मूलभूत विषयों के अलावा पर्यावरण के लिए जागरूक किया जाता है।

बच्चों को यहां सिंगिंग, डांसिग, सोलर पैनेलिंग, गार्डनिंग, ऑर्गेनिक फार्मिंग, कारपेंटर, कॉस्मेटोलॉजी, इलेक्ट्रोनिक्स और रिसाइक्लिंग जैसे व्यावसायिक कौशल की ट्रेनिंग भी दी जाती है ताकि वे आगे चलकर अपनी आजीविका कमा सकें।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से खोला गया ‘अक्षर’ स्कूल का ये प्रयास अपने आप में अनोखा है। इस पहल की जितनी सराहना की जाए कम है।

धीरे-धीरे आपको नपुंसक बना सकती है कोल्ड ड्रिंक की ये चीज, इन 13 बीमारियों का भी खतरा

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डाइट सोडा, शुगर-फ्री आइसक्रीम, कम कैलोरी वाले फ्रूट जूस, चुइंगम, दही और कुछ कैंडी में आर्टिफीसियल स्वीटनर होता है जिसका नाम एस्पार्टेम (Aspartame) है। कई रिसर्च और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह तत्व कई समस्याओं सहित कैंसर, सिरदर्द, डिप्रेशन, सिर चकराना, वजन बढ़ना, जन्म दोष, अल्जाइमर रोग और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी खतरनाक समस्याओं का कारण बन सकता है।

1) नपुंसकता का खतरा 
रोजाना कोल्ड ड्रिंक पीने से आपकी सेक्स लाइफ बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये तत्व सीधे रूप से आपके सेरोटोनिन लेवल को प्रभावित करता है। सेरोटोनिन एक ऐसा हार्मोन है जो आपके मूड को फ्रेश करता है और आपकी कामोत्तेजना बढ़ाता है। कई अधययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि सेरोटोनिन का लेवल कम होने से पुरुष और महिलाओं दोनों में कामेच्छा कम हो सकती है।

इस तत्व को पुरुषों में नपुंसकता के लिए जिम्मेदार माना जाता है। दरअसल तत्व पुरुषों के हारमोंस को कुछ इस प्रकार से प्रभावित करता है, जिससे पुरुषों में टेस्टिकल्स से संबंधित परेशानियां बढ़ने लगती हैं। सॉफ्ट ड्रिंक्स के अधिक सेवन से नपुंसकता का खतरा बढ़ जाता है।

2) डायबिटीज और मोटापे का खतरा
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, यह तत्व डायबिटीज और मोटापे से जुड़ा है। हालांकि कुछ अध्ययन आर्टिफीसियल स्वीटनर को डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहतर मानते हैं लेकिन इस बारे में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, एस्पार्टेम चीनी की तुलना में लगभग 200 गुना अधिक मीठा होता है। तो भोजन और पेय पदार्थों को एक मीठा स्वाद देने के लिए केवल बहुत कम राशि की आवश्यकता होती है।

हालांकि, जो लोग फिनाइलकेटोनूरिया (पीकेयू) नामक एक बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें एस्पार्टेम का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जो लोग सिज़ोफ्रेनिया के लिए दवाएं ले रहे हैं, उन्हें भी एस्पार्टेम से बचना चाहिए।

लालू के आदेश पर आडवाणी को गिरफ्तार करने वाला ये अफसर अब है बीजेपी सरकार में मंत्री

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कई बार बीजेपी की राजनीतिक सफलताओं का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी से ज्यादा लालकृष्ण आडवाणी को दिया जाता है. उसमें भी उनकी रथयात्रा को बीजेपी के कार्यकर्ता बड़े फख्र से याद करते हैं. लेकिन उतना ही याद किए जाते हैं उन्हें गिरफ्तार करने वाले लालू प्रसाद यादव. फिलहाल लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा ‘गोपालगंज टू रायसीना: माइ पॉलिटिकल जर्नी’ चर्चा में है. इसमें लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि उन्होंने आडवाणी की गिरफ्तारी में बाधा डालने वाले को गोली मारने का आदेश दिया था.

बिहार में आडवाणी को 23 अक्टूबर की सुबह ही गिरफ्तार कर लिया था. लालू अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि आडवाणी जी ने कहा था, ‘देखता हूं, कौन माई का दूध पिया है, जो मेरी रथयात्रा रोकेगा’. मैंने नहले पर दहला मारा, ‘मैंने मां और भैंस, दोनों का दूध पिया है… आइए बिहार में, बताता हूं’

ऐसा बिहार में सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बनाए रखने के लिए किया गया था. लालू लिखते हैं कि पिछली सरकारों की नाकामी से बिहार एक दंगाग्रस्त राज्य बन चुका था. आरएसएस-भाजपा के रामशिला पूजन के जुलूस की वजह से अक्तूबर, 1989 में भागलपुर में हुए दंगे में लगभग 1,500 लोगों की मौत हुई थी. हालांकि हम आपको आडवाणी की अयोध्या में राममंदिर बनाने के लिए की जा रही इस रथयात्रा के अलग-अलग पहलुओं से रूबरू करा रहे हैं-

जिस अफसर ने किया गिरफ्तार, वह अब है बीजेपी नेता

शहाबुद्दीन उन दिनों बाबरी मस्जिद आंदोलन संयोजन समिति के संयोजक थे. अमानुल्लाह उन दिनों धनबाद के डी.सी थे. वहीं आडवाणी का ‘रथ चालक’ यानी ड्राइवर एक मुस्लिम था. रथयात्रा के लिए एक मिनी बस को रथ का रूप दिया गया था.

आरके सिंह और आडवाणी
मंडल आरक्षण लागू होने के चलते हुआ मंदिर आंदोलन

आडवाणी की गिरफ्तारी के कारण ही तब बीजेपी ने वी. पी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. जिससे वीपी सिंह की सरकार गिर गई थी. वी.पी सरकार के मंडल अस्त्र के खिलाफ वह बीजेपी मंदिर ब्रहमास्त्र था. उस घटना ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी. वी.पी सरकार के पतन के बाद कांग्रेस के सहयोग से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे.

बाद में एक बार आडवाणी ने एक भेंटवार्ता में कहा भी था कि यदि मंडल आरक्षण नहीं लागू हुआ होता तो हमारा मंदिर आंदोलन भी नहीं होता. यदि उन्हें पता होता कि बाबरी मस्जिद ध्वस्त कर दी जाएगी तो वे सन् 1992 में अयोध्या जाते ही नहीं.

रथयात्रा से पहले रोकने के भी हुए प्रयास
हालांकि मंदिर आंदोलन को गरमाने के लिए ही आडवाणी ने 25 सितंबर, 1990 को सोमनाथ से राम रथयात्रा शुरू की थी. रथयात्रा का पहला चरण 14 अक्टूबर को पूरा हुआ था. आडवाणी दिल्ली पहुंचे. प्रधानमंत्री वी.पी सिंह ने 18 अक्टूबर को ज्योति बसु को दिल्ली बुलाया. बसु ने आडवाणी से बातचीत की और रथयात्रा स्थगित कर देने का आग्रह किया. पर आडवाणी ने बसु की सलाह ठुकरा दी. वे 19 अक्टूबर को धनबाद के लिए रवाना हो गए जहां से उन्होंने दूसरे चरण की शुरुआत कर दी. वे अयोध्या पहुंचकर राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का काम 30 अक्टूबर को शुरू करना चाहते थे.

बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त अफजल अमानुल्लाह को निर्देश दिया कि वे आडवाणी को वहीं गिरफ्तार कर लें. प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी का वारंट तैयार करके संबंधित अधिकारियों को दे दिया था लेकिन अमानुल्लाह ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

बाबरी विध्वंस के मामले में बीजेपी के कई नेताओं पर चला था मुकदमा

अमानुल्लाह बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक सैयद शहाबुद्दीन के दामाद हैं. उन्हें लगा कि उनके इस कदम से गलत संदेश जा सकता है, समाज में तनाव बढ़ेगा. लेकिन उधर लालू प्रसाद भी यह प्रदर्शित करना चाहते थे कि उन्होंने ‘सांप्रदायिक आडवाणी’ के रथ को बिहार में घुसने भी नहीं दिया.
बीजेपी ने दी थी वीपी सिंह सरकार को धमकी
86 सदस्यों वाली बीजेपी ने 17 अक्टूबर को ही यह धमकी दे दी थी कि आडवाणी की गिरफ्तारी के तत्काल बाद वी.पी सिंह सरकार से बीजेपी समर्थन वापस ले लेगी. वी.पी सिंह की सरकार बीजेपी के अलावा जनता दल के 140, सी.पी.आई के 12 और सी.पी.एम के 33 और कुछ अन्य लोकसभा सदस्यों के बल पर चल रही थी.

आडवाणी की रथयात्रा के दौरान लालू प्रसाद उनके खिलाफ अभियान में लग गए थे. आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद तो लालू प्रसाद अल्पसंख्यकों के चहेते बन कर उभरे. उससे पहले लालू प्रसाद ने एक और दांव खेला था. लालू प्रसाद ने 21 अक्टूबर को पटना के गांधी मैदान में सांप्रदायिकता विरोधी रैली में कहा कि ‘कृष्ण के इतिहास को दबाने के लिए ही आडवाणी राम को सामने ला रहे हैं.’

इस तरह आडवाणी की राम रथयात्रा के विरोध के बहाने लालू प्रसाद अल्पसंख्यक के साथ-साथ अपने यादव वोट बैंक को भी मजबूत बना रहे थे. खैर जो हो, आडवाणी 22 अक्टूबर की शाम पटना पहुंचे. पटना के बाद वे समस्तीपुर चले गए. पर उनके साथ चल रहा मीडियाकर्मियों का दल पटना के होटल में ही विश्राम करता रहा. और उधर 23 अक्टूबर की सुबह ही समस्तीपुर में आडवाणी गिरफ्तार कर लिए गए.

लालू प्रसाद यादव के साथ लालकृष्ण आडवाणी (फाइल फोटो)

क्या पीएम और मुलायम सिंह के बीच मतभेद के कारण गिरफ्तार हुए आडवाणी?
समस्तीपुर में गिरफ्तार करने के लिए अफसरों के जिस दल को पटना से भेजा गया था, उसका नेतृत्व आई.ए.एस अधिकारी आर.के सिंह कर रहे थे जो कडे़ तेवर के अफसर माने जाते रहे. बाद में सिंह केंद्र के गृह सचिव भी बने. अब वह बिहार के आरा से बीजेपी सांसद हैं.

आडवाणी के साथ कुछ अन्य नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया था. एल.के आडवाणी को तो राज्य सरकार के हेलिकॉप्टर से प्रमोद महाजन के साथ मसान जोर स्थित मयूराक्षी सिंचाई परियोजना के निरीक्षण भवन में भेज दिया गया. बंगाल के सीमावर्ती दुमका जिले के मसानजोर में स्थित इस निरीक्षण भवन के कमरा नंबर तीन में आडवाणी और कमरा नंबर चार में महाजन को रखा गया.

इस निरीक्षण भवन के आसपास के 15 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को सील कर दिया गया था. किसी को इन बंदियों से मिलने की इजाजत नहीं थी. पर एक स्थानीय संवाददाता ने आडवाणी से बात करने में सफलता प्राप्त कर ली. आडवाणी ने उससे कहा कि शांतिपूर्ण रथयात्रा को रेाककर सरकार ने अच्छा काम नहीं किया है. सरकार लगातार अपने वायदे से हट रही है और तुष्टिकरण की नीति अपना रही है.

लालकृष्ण आडवाणी (फाइल फोटो)

दुमका के उपायुक्त सुधीर कुमार ने कहा था कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार कड़ी सुरक्षा में एल.के आडवाणी को ससम्मान यहां रखा गया है. उनसे किसी को मिलने की इजाजत नहीं है. दूसरी ओर मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने 23 अक्टूबर को बताया कि सांप्रदायिक सदभाव बनाए रखने के लिए उनकी रथयात्रा पर रोक लगाने के सिवा हमारे पास कोई चारा ही नहीं था. इतना ही नहीं बिहार में हमने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित किसी भी तरह के जुलूस पर रोक लगाने का भी आदेश दे दिया है.

बाद में अटल बिहारी वाजपेयी ने 26 अक्टूबर 1990 को एक रहस्योद्घाटन किया. उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी और वी.पी सरकार के बीच यह गुप्त सहमति बनी थी कि लाल कृष्ण आडवाणी अपनी रथयात्रा पूरी करने के साथ -साथ अयोध्या में कार सेवा भी करेंगे. यह सहमति 20 अक्टूबर को बनी थी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को भी इस बात की जानकारी थी. अटल जी ने कहा कि ‘मुझे पता नहीं कि इस सहमति से वापस जाने की वजह कोई दबाव था या जनता दल के आंतरिक संघर्ष और कलह इसके लिए जिम्मेदार थे. एक सवाल के जवाब में वाजपेयी ने कहा कि हो सकता है कि प्रधानमंत्री और मुलायम सिंह यादव के बीच मतभेद के कारण आडवाणी गिरफ्तार किए गये हों.

आडवाणी का सारथी भी हुआ गिरफ्तार
उस रथयात्रा को लेकर एक और अजूबी बात थी. आडवाणी जिस रथ पर सवार होकर बिहार पहुंचे थे, उसके सारथी का नाम था सलीम मक्कानी. आडवाणी को तो गिरफ्तार करके रमणीक व आरामदायक जगह मसान जोर के निरीक्षण भवन में भेज दिया गया, पर उनके सारथी यानी चालक सलीम को दफा 144 के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार करके समस्तीपुर परिसदन में रखा गया था.

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और मुलायम के साथ लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)

मुंबई के मूल निवासी 26 वर्षीय सलीम ने अपनी गिरफ्तारी के बाद कहा कि रिहा होने के बाद मैं सीधे अयोध्या जाऊंगा. याद रहे कि प्रशासन ने आडवाणी के रथ को भी जब्त कर लिया था. इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी सिंह ने 22 अक्टूबर को राष्ट्र के नाम संदेश में कहा था कि ‘हम सब विश्वासों का आदर करते हैं. पर दो धर्मों के विश्वासों में कहीं टकराव आ जाए तो रास्ता क्या है?

रास्ते दो ही हैं. या तो उसका समन्वय किया जाए और आपस में किसी तरह के समझौते का रास्ता निकाला जाए और अगर वह नहीं निकलता है तो फिर कानून और इजलास का रास्ता है. जोर जबरदस्ती का रास्ता कोई हल का रास्ता नहीं.’

भारत की इतनी खुबसूरत रानी जो कभी अपने किले से बाहर नहीं निकली, नाम कर देगा हैरान

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आज हम आपको एक ऐसी रानी के बारे में बता रहे है. जो इतिहास की सबसे खुबसूरत मानी जाने वाली रानी है. और इनके बारे में सुनकर एक बार आप भी हैरान रह जायेंगे.

भारतीय इतिहास में कई राजाओं और रानियों ने जन्म लिया है लेकिन आज हम आपको जोधपुर की रानी राज कुंवर के बारे में बताने जा रहे हैं। यह रानी इतनी खूबसूरत थी कि है अपने पूरे जीवन काल में कभी भी जोधपुर के किले मेहरानगढ़ से बाहर नहीं निकली थी। राज कुंवर का जन्म जामनगर के राजा जामविभा के घर हुआ था। रानी बचपन से ही बहुत खूबसूरत और धार्मिक प्रवृत्ति की नारी थी।

उनकी सुंदरता के चर्चे पूरे जामनगर में प्रसिद्ध थे। इसलिए मात्र 9 साल की आयु में राज कुंवर का विवाह जोधपुर के राजकुमार जसवंत सिंह के साथ हुआ था। रानी बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की नारी थी इसलिए उसने भगवान से कोई विशेष मनोकामना मांग रखी थी।

इसलिए वह आजीवन अपने दुर्ग से बाहर नहीं निकली थी। राज कुंवर भगवान श्री कृष्ण को हर साल डेढ़ लाख तुलसी पत्रों का अभिषेक वृन्दावन में करवाया करती थी। जब रानी की उम्र अधिक हो गई थी तो राज कुंवर में मेहरानगढ़ के किले के पीछे एक भगवान श्री कृष्ण का भव्य मंदिर बनवाया था।

यह मंदिर आज भी जोधपुर में मौजूद है। इस मंदिर का निर्माण जमीन से लगभग 25 फुट पर करवाया गया है जिसका मुख्य कारण यह है की रानी किले से ही भगवान के दर्शन कर सकें। यह मंदिर आज जोधपुर मे राजरणछोड़ के नाम से मौजूद है।

प्रधानमंत्री विज्ञापनों के नायक हैं और विकास के खलनायक, यही सच्चाई है: कांग्रेस

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कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “पीएम मोदी असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं, मगर जनता के दरबार में मोदी जी की योजनाओं के झूठ बेनकाब हो रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मोदी जी के भाषणों से विकास, अच्छे दिन, सबका साथ सबका विकास जैसे शब्द गायब हो गए हैं। वो अपने 5 सालों की कोई चर्चा नहीं करते, क्योंकि उनकी विफल नीतियों ने जनता को त्रस्त कर दिया है। मोदी जी अपने भाषणों में सिर्फ पाकिस्तान का नाम ले रहे हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि उन्होंने हिंदुस्तान के लिए कुछ नहीं किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री की उज्ज्वला योजना का सच प्रोपेगेंडा से कहीं अलग है। लाभार्थी आज फिर प्राकृतिक चूल्हे का उपयोग करने के लिए मजबूर हैं।” उन्होंने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि प्रधानमंत्री विज्ञापनों के नायक हैं और विकास के खलनायक। यही सच्चाई है।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री के वादे छल, कपट, झूठ से लदे हुए हैं। अगर उनको वास्तविकता के चश्मे से देखा जाए, तो वो सिर्फ धुंआ है। 2015 में आई कैग की रिपोर्ट के अनुसार पहले एलपीजी का उपभोग 6.7 फीसद था, आज यह 5.6 फीसद रह गया है। उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत सबसे ज्यादा सिलेंडर दिए गए। सीतापुर में मात्र 10% लोग ही सिलेंडर दुबारा भराने आए।”

जो अपनी पत्नी की देखभाल नहीं कर सकता, वह भारतीयों की देखभाल करेगा?: ममता

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ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा हमला बोला है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जो अपनी पत्नी की देखभाल नहीं कर सकता वह भारतीयों को क्या संभालेगा? इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को लोगों से खून से सना हुआ करार दिया है। बिष्‍णुपुर में सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘अगर मैं टोल कलेक्टर हूं तो आप क्या हैं? सिर से पैर तक आप लोगों के खून से सने हुए हैं. जब उनसे पूछा गया कि उनकी (पीएम) पत्नी क्या करती है और वह कहां रहती हैं, तो उन्होंने (पीएम) कहा कि वह नहीं जानते. जो अपनी पत्नी की देखभाल नहीं कर सकता, वह भारतीयों की देखभाल करेगा?’