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“यात्रीगण कृपया ध्यान दें! अगले सात दिन तक नहीं चलेंगी ये ट्रेनें, कहीं निकलने से पहले देखें पूरी लिस्ट”

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भारतीय रेलवे जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल व्यवस्था है अपने नेटवर्क को सुरक्षित और उन्नत बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में शालीमार स्टेशन यार्ड में रीमॉडलिंग और ट्रैक अपग्रेड का महत्वपूर्ण कार्य चल रहा है जो 21 नवंबर तक चलेगा।

इस ज़रूरी काम के कारण चक्रधरपुर डिवीजन से गुजरने वाली लंबी दूरी की कई ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कैंसिल और डायवर्ट की गई ट्रेनों की अपडेटेड लिस्ट जारी की है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का लेटेस्ट स्टेटस ऑनलाइन या हेल्पलाइन के माध्यम से ज़रूर चेक कर लें।

कैंसिल ट्रेनों की सूची (13 से 21 नवंबर तक)

नेटवर्क को सुरक्षित और तय समय पर काम पूरा करने के लिए रेलवे ने इन ट्रेनों को रद्द किया है:

ट्रेन नंबर ट्रेन का नाम रद्द होने की तारीखें

18030 शालीमार-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस कुर्ला एक्सप्रेस 13 से 21 नवंबर तक

22830 शालीमार-भुज सुपरफास्ट एक्सप्रेस 15 नवंबर

22829 भुज – शालीमार सुपरफास्ट एक्सप्रेस 18 नवंबर

15022 गोरखपुर – शालीमार साप्ताहिक एक्सप्रेस 10 और 17 नवंबर

15021 शालीमार – गोरखपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस 18 नवंबर

18029 मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस-शालीमार कुर्ला एक्सप्रेस 12 से 19 नवंबर तक

12151 मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस-शालीमार समरसता एक्सप्रेस 12, 13 और 19 नवंबर

12152 शालीमार-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस समरसता एक्सप्रेस 14, 15 और 21 नवंबर

20971 उदयपुर सिटी-शालीमार सुपरफास्ट एक्सप्रेस 15 नवंबर

20972 शालीमार-उदयपुर सिटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 16 नवंबर

डायवर्ट/शॉर्ट टर्मिनेट की गई ट्रेनों की सूची

ट्रैक अपग्रेड के कारण कुछ ट्रेनों के रूट में भी बदलाव किया गया है। ये ट्रेनें शालीमार की जगह सांतरागाछी स्टेशन तक ही चलेंगी या वहीं से शुरू होंगी:

ट्रेन नंबर ट्रेन का नाम डायवर्ट/शॉर्ट टर्मिनेट की तारीखें रूट में बदलाव

18049 शालीमार – बदामपहाड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस 15 और 22 नवंबर सांतरागाछी से बदामपहाड़ तक चलेगी।

18050 बदामपहाड़ – शालीमार साप्ताहिक एक्सप्रेस 16 और 23 नवंबर सांतरागाछी तक ही चलेगी।

12101 मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस – शालीमार ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस 18 नवंबर सांतरागाछी तक ही चलेगी।

12102 शालीमार – मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस 20 नवंबर सांतरागाछी से शुरू होगी।

12905 पोरबंदर – शालीमार सुपरफास्ट एक्सप्रेस 19 नवंबर सांतरागाछी तक ही जाएगी।

12906 शालीमार – पोरबंदर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 21 नवंबर सांतरागाछी से शुरू होगी।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी असुविधा से बचने के लिए वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी बुकिंग की स्थिति अवश्य जांच लें।

“बिहार में NDA की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस में हाहाकार! हार के बाद खड़गे के घर राहुल गांधी की मौजूदगी में शुरु हुई अहम बैठक”

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे सामने आने के बाद तस्वीर साफ हो चुकी है। बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिकगठबंधन (NDA) ने राज्य की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया है।

एनडीए ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर विपक्षी ‘महागठबंधन’ को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। इसी के साथ राज्य के सबसे लंबे समय तक सीएम रहे नीतीश कुमार रिकॉर्ड छठी बार मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

NDA की मिली शानदार जीत

इस चुनाव में विपक्ष का महागठबंधन अपने मजबूत गढ़ों में भी कोई खास असर नहीं दिखा पाया, यहाँ तक कि RJD अपनी पारंपरिक सीटों पर भी फीका पड़ गया। बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। नीतीश कुमार की JDU ने 85 सीटें हासिल कीं। गठबंधन के अन्य सहयोगी LJP(RV) को 19, HAM(S) को 5 और RLM को 4 सीटें मिलीं। इसके विपरीत महागठबंधन के खाते में सिर्फ 34 सीटें आईं। अन्य दलों में AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटें जीतीं, जबकि BSP और IIP ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की।

करारी हार के बाद कांग्रेस में मंथन शुरू

बिहार चुनाव में मिली करारी और चौंकाने वाली हार के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तत्काल एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास पर हो रही है। इस हाई-लेवल मीटिंग में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता अजय माकन भी मौजूद हैं।

बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव परिणामों की गहन समीक्षा करना, पार्टी की संगठनात्मक कमजोरियों पर चर्चा करना और भविष्य की रणनीति तय करना है। कांग्रेस नेतृत्व बिहार में मिली हार के कारणों को समझने और आगे की दिशा तय करने में जुटा हुआ है।

“बिहार में प्रचंड जीत के बाद BJP का बड़ा कदम, वरिष्ठ नेता आरके सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निकाला”

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संगठन में अनुशासन का कड़ा संदेश देने के लिए अहम कदम उठाया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को तत्काल प्रभाव से 6 साल के लिए अपनी प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बिहार में प्रचंड बहुमत दर्ज किया है, लेकिन कुछ सीटों पर आंतरिक मतभेद और बागी उम्मीदवारों के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि आरके सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई उनके द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान और उसके आसपास पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की शिकायतों के आधार पर की गई है। आरोप है कि उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों और गठबंधन के हितों के खिलाफ काम किया और सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए, जो संगठन और गठबंधन की छवि के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते थे।

अनुशासन का सख्त संदेश

बीजेपी के नेतृत्व ने इसे संगठनात्मक अनुशासन के उल्लंघन के रूप में लिया और इस कठोर कदम के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी के भीतर कोई भी नेता चुनावी रणनीति और संगठन के निर्णयों के खिलाफ कार्य नहीं कर सकता।

वरिष्ठ नेता पर गाज

आरके सिंह पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरों में से रहे हैं। केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनके निलंबन से यह संकेत मिलता है कि बीजेपी चुनाव परिणामों के बाद भी संगठनिक अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करेगी।

“Bihar Assembly Election Result 2025: जीते तो नहीं लेकिन, वोट जरूर काटे… किस-किस सीट पर प्रशांत किशोर की वजह से NDA को हुआ नुकसान?”

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने जबरदस्त प्रचार के साथ मैदान में उतरकर पूरे चुनाव को अलग ही माहौल दिया था. पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारते हुए दावा किया था कि जनता बदलाव के लिए तैयार है और जनसुराज निर्णायक भूमिका निभाएगी.

हालांकि, मतगणना के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने पार्टी की राजनीतिक ताकत को साफ कर दिया. नतीजों ने दिखा दिया कि भारी प्रचार का असर जमीन पर वोटों में नहीं बदल सका.

238 सीटों की लड़ाई में पार्टी को एक भी जीत नहीं मिली. सिर्फ मढ़ौरा में जनसुराज उम्मीदवार दूसरे नंबर पर आए, बाकी लगभग सभी क्षेत्रों में पार्टी तीसरे या चौथे पायदान पर सिमट गई. मतगणना में यह भी साफ हुआ कि कई जगहों पर पार्टी को उम्मीद से बेहतर वोट मिले, लेकिन वह किसी सीट को जीतने या गंभीर चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं थे.

कुछ सीटों पर जनसुराज के वोट NDA की हार से कई गुना ज़्यादा

चुनावी नतीजों में एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि कई जगहों पर जनसुराज उम्मीदवारों को मिली वोट संख्या, NDA उम्मीदवार की हार के अंतर से बहुत अधिक थी. इस वजह से राजनीतिक हलकों में यह चर्चा गरम है कि अगर जनसुराज मैदान में न होती तो इन सीटों का परिणाम शायद अलग दिखता.

वे सात सीटें जहां जनसुराज के वोट बने बड़ा फैक्टर

नीचे उन 7 सीटों का विवरण दिया गया है जहां NDA बेहद कम अंतर से हारा, मगर जनसुराज को उससे कई गुना अधिक वोट मिले. यही सीटें चुनावी नतीजों की सबसे दिलचस्प कहानी बन गईं.

ढाका – NDA सिर्फ 178 वोटों से हारा, जनसुराज को 8,347 वोट

जहानाबाद – अंतर 793, जनसुराज को 5,760 वोट

मखदुमपुर – अंतर 1,830, जनसुराज को 4,803 वोट

टिकारी – अंतर 2,058, जनसुराज को 2,552 वोट

गोह – अंतर 4,041, जनसुराज को 7,996 वोट

बोधगया – अंतर 881, जनसुराज को 4,024 वोट

चनपटिया – अंतर 602, जनसुराज को 37,172 वोट

चनपटिया बना सबसे बड़ा उदाहरण

चनपटिया में जनसुराज प्रत्याशी मनीष कश्यप ने 37,172 वोट हासिल किए, जबकि NDA उम्मीदवार सिर्फ 602 वोटों से चुनाव हार गया. यही वजह है कि यह सीट पूरे चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चित सीट बन गई.

आंकड़ों में जनसुराज की पूरी तस्वीर

जनसुराज पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा,लेकिन कोई भी सीट जीत में नहीं बदल सकी. मढ़ौरा में नवीन कुमार सिंह दूसरे नंबर पर रहे, लेकिन RJD उम्मीदवार से उन्हें लगभग 27 हज़ार वोटों से हार का सामना करना पड़ा. बाकी सभी क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन साधारण रहा और उसे तीसरी-चौथी स्थिति से ऊपर नहीं पहुंच पाया.

“रायपुर में बना देश का पहला AI आधारित जनजातीय संग्रहालय, 3 दिन में 8,000 लोग पहुंचे देखने”

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रायपुर के आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में अंग्रेजी हुकुमत काल के दौरान जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बने शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय लोगों के लिए प्रेरणा और आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है.

स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के साथ ही बड़ी तादात में आम लोग संग्रहालय को देखने पहुंच रहे हैं.

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक नवम्बर को इस भव्य संग्रहालय को लोगों के लिए समर्पित किया गया था. आम लोगों के लिए 4 नवम्बर से शुरू हुए इस शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का महज 2-3 दिनों में ही 8 हजार से अधिक लोगों ने अवलोकन किया.

और ऑडियो विसुअल की मदद से दे रहे जानकारी

नया रायपुर का शहीद वुर नायरायन सिंह जनजातीय संग्रहालय देश का पहला अत्याधुनिक सग्रहालय है. जिसमें AI जनरेटेड ऑडियो विसुअल और एनिमेशन के जरिये वीर स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा लोगों तक पहुचाई जा रही है. आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय वर्गों के ऐतिहासिक गौरव गाथा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों उद्घाटन होना गौरव की बात है.

उन्होंने कहा कि काफी संख्या में लोग संग्रहालय देखने आ रहे हैं, इससे संग्रहालय बनाने का उद्देश्य सार्थक हो रहा है. इस संग्रहालय के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने लगा है. सोनवनी बोरा ने कहा कि संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों का याद दिलाता रहेगा. यह न सिर्फ जनजातीय वर्गों के लिए बल्कि सभी लोगों के लिए प्रेरणाप्रद है.

आदि वाणी एक AI-संचालित अनुवाद उपकरण है जो भारत की जनजाति विरासत को संरक्षित करते हुए भाषा के अंतर को खत्म करता है/ यह हिंदी, अंग्रेजी और जनजाति भाषाओं (मुंडारी, भीली, गोंडी, संथाली, गारो, कुई) के बीच वास्तविक समय में टेक्स्ट और भाषण अनुवाद करता है, जिससे देशी भाषाओं में जानकारी तक पहुँच संभव होती है और लोककथाओं, मौखिक परंपराओं और सांस्कृतिक ज्ञान को डिजिटाइज़ करने और संरक्षित करने में मदद मिलती है.

जनजाति डिजिटल दस्तावेज़ भारत सरकार की आर्काइव पर उपलब्ध है, जो भारत में जनजातियों से संबंधित दस्तावेज़ों का एक खोज योग्य डिजिटल भंडार है.

देश भर में संग्रहालयों का हो रहा निर्माण

मोदी सरकार ने जनजाति संस्कृति और विरासत के संवर्धन और संरक्षण के लिए लगातार कई पहल की हैं. स्वतंत्रता आंदोलन में उनके अमूल्य योगदान को सामने लाने के लिए, 11 जनजाति स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय विकसित किए जा रहे हैं. इनमें से चार का उद्घाटन अब तक हो चुका है, जो रांची (झारखंड), छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश), जबलपुर (मध्य प्रदेश) और रायपुर (छत्तीसगढ़) में हैं—जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 1 नवंबर को किया था.

शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजाति स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय छत्तीसगढ़ के जनजाति प्रतिरोध की कहानी को अलग अलग गैलरियों की एक सीरीज़ के जरिये प्रस्तुत करता है.

स्वतंत्रता संग्राम में जनजातियों की प्रमुख क्रांति

इसमें हलबा क्रांति, सरगुजा क्रांति, भोपालपट्टनम क्रांति, परलकोट क्रांति, तारापुर क्रांति, मेरिया क्रांति, कोई क्रांति, लिंगागिरी क्रांति, मुरिया क्रांति, और गुंडाधुर एवं लाल कालिन्द्रा सिंह के नेतृत्व में हुई प्रतिष्ठित भूमकाल क्रांति जैसे प्रमुख विद्रोह शामिल हैं.

महिलाओं का प्रतिरोध: यह रानी चो-रिस क्रांति (1878) को उजागर करता है—जो महिलाओं के नेतृत्व वाला एक अग्रणी विरोध प्रदर्शन था.

शहीद वीर नारायण सिंह और 1857 का विद्रोह ब्रिटिश अत्याचार के विरुद्ध उनके प्रतिरोध और उनकी शहादत का वर्णन करता है.

झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह: महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलनों में जनजाति भागीदारी को दर्शाता है. संग्रहालय आगंतुकों को एक इंटरैक्टिव और गहन अनुभव प्रदान करता है. अपनी 650 मूर्तियों, डिजिटल कहानी-कथन, और सांस्कृतिक प्रदर्शनों के माध्यम से, यह भारत की जनजाति विरासत के गुमनाम नायकों का सम्मान करते हुए, सीखने और प्रेरणा के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करता है.

जनजाति इतिहास और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार के अन्य प्रयास

आदि संस्कृति परियोजना जनजाति कला रूपों के लिए एक डिजिटल शिक्षण मंच है, जो विविध जनजाति कला रूपों पर लगभग 100 गहन पाठ्यक्रम प्रदान करता है, साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक जनजाति विरासत पर लगभग 5,000 क्यूरेटेड दस्तावेज़ भी उपलब्ध कराता है.

कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ के शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में गौरवशाली इतिहास के साथ साथ जनजातियों की परंपरा और संस्कृति की पूरी जानकारी देश और दुनिया के लोगों के लिए सँजोई गई है. जिसमें जनजाति उपचारकर्ताओं और औषधीय पौधों द्वारा स्वदेशी प्रथाओं, आदिवासी भाषाओं, कृषि प्रणाली, नृत्य और चित्रकला का अनुसंधान और दस्तावेज़ीकरण, साहित्यिक उत्सवों का आयोजन, जनजाति लेखकों द्वारा लिखित पुस्तकों का प्रकाशन, अनुवाद कार्य और साहित्य प्रतियोगिताओं आदि भी किए जा रहे हैं. जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास के रूबरू हो सके.

“ओवैसी को सीमांचल में कितनी मिली सफलता? बिहार चुनाव में AIMIM कहां जीती और कहां हारी, जानें सब कुछ”

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की पकड़ अब भी मजबूत है. राज्य की 243 सीटों में से सिर्फ 25 पर चुनाव लड़ने के बावजूद AIMIM ने 5 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी मौजूदगी महसूस कराई. इस जीत ने साफ कर दिया कि सीमांचल के बड़े हिस्से में मुस्लिम मतदाता अब भी AIMIM को एक भरोसेमंद आवाज मानते हैं.

AIMIM ने जिन 5 सीटों पर जीत दर्ज की, वे सभी सीमांचल क्षेत्र के केंद्र में आती हैं. ये वे इलाके हैं जहां पार्टी पिछले चुनावों में भी प्रभावशाली रही थी.

जोकीहाट – मुरशिद आलम
बहादुरगंज – तौसीफ आलम
कोचाधामन – सरवर आलम
अमौर – अख्तरुल ईमान
बायसी – गुलाम सरवर

इन 5 सीटों पर AIMIM के उम्मीदवारों ने सहज अंतर से जीत हासिल की, जिससे पता चलता है कि क्षेत्रीय वोट बैंक अभी भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा है.

सीमांचल में AIMIM की पकड़ क्यों सबसे मजबूत?

सीमांचल का सामाजिक ढांचा AIMIM की राजनीति के लिए अनुकूल माना जाता है. यहां कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी 60% से भी अधिक है. AIMIM की रणनीति हमेशा से इस क्षेत्र के मुद्दों पर केंद्रित रही है. स्थानीय नेतृत्व, शिक्षा की कमी, रोजगार के अवसर, और विकास की अनदेखी जैसे सवाल यहां की राजनीति का मुख्य आधार हैं. इसी वजह से दल को लगातार समर्थन मिलता रहा है और यह क्षेत्र AIMIM का मजबूत गढ़ बनता जा रहा है.

किन इलाकों में कमजोर पड़ा AIMIM का असर?

सीमांचल में सफलता के बावजूद AIMIM को कई जगह निराशाजनक नतीजे मिले. बलरामपुर, किशनगंज, कस्बा, अररिया जैसे इलाकों में पार्टी ने कड़ी चुनौती दी, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी. सीमांचल के बाहर तो स्थिति और भी कमजोर रही. ढाका, नाथनगर, सीवान, जाले, मधुबनी, मुंगेर, नवादा जैसे क्षेत्रों में AIMIM के उम्मीदवारों को खास समर्थन नहीं मिला और वे शुरुआती राउंड से ही पिछड़ गए. नारकटिया में तो स्थिति और खराब रही, जहाँ पार्टी के उम्मीदवार शमीमुल हक का नामांकन ही तकनीकी त्रुटि के कारण रद्द कर दिया गया.

नतीजे क्या बताते हैं – AIMIM की राजनीतिक दिशा

इन परिणामों से तीन बातें साफ तौर पर सामने आती हैं. यहां पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है. 2020 के चुनावों की तरह 2025 में भी AIMIM ने यह साबित कर दिया है कि इस क्षेत्र में उसका प्रभाव स्थायी है. बिहार के बाकी हिस्सों में AIMIM को अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए लंबी रणनीति और मजबूत संगठन की जरूरत होगी. नतीजों में यह झलकता है कि सीमांचल में मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा AIMIM की ओर आकर्षित हो रहा है, जो आने वाले चुनावों में राज्य की राजनीति की दिशा निर्धारित कर सकता है.

“बिहार की ये 11 सीटें जीतकर बीजेपी ने दिए नए समीकरण के संकेत!

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरक्षित सीटों पर इस बार एक बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिली. खासकर बीजेपी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए अपने हिस्से आई सभी 11 अनुसूचित जाति (SC) सीटों पर जीत हासिल की.

यह प्रदर्शन पार्टी के इतिहास में अब तक का सबसे शानदार स्ट्राइक रेट माना जा रहा है. 2020 में जहां बीजेपी ने 9 SC सीटें जीती थीं, वहीं इस बार उसने 11 में 11 दर्ज कर सौ फीसदी जीत का नया रिकॉर्ड बना दिया.

आरक्षित सीटों पर बीजेपी का 100% स्ट्राइक रेट 2025 के चुनाव की सबसे बड़ी कहानी बनकर सामने आया है. यह प्रदर्शन न केवल संगठनात्मक मजबूती को दिखाता है बल्कि दलित वोटर्स में एनडीए की बढ़ती पकड़ का संकेत भी देता है.

अब माना जा रहा है कि दलित सीटों पर बीजेपी के बेहतरीन प्रदर्शन से NDA की उन सहयोगी दलों की नींद भी उड़ गई है, जिनका बड़ा वोट बैंक एससी वोटर्स हैं. चिराग पासवान या जीतन राम मांझी के लिए यह चिंता की बात है कि अगर रिजर्व सीटों पर बीजेपी को मतदाताओं को पूरा साथ मिल रहा है तो आगे चलकर एनडीए में उनकी जरूरत खत्म हो सकती है.

महागठबंधन सिंगल डिजिट में सिमटा, एनडीए का दबदबा

राज्य की कुल 40 आरक्षित सीटों 38 SC और 2 ST में एनडीए ने एकतरफा जीत दर्ज की. एनडीए ने 34 SC सीटों और 1 ST सीट पर कब्जा कर लिया, जबकि महागठबंधन केवल 4 SC और 1 ST सीट पर सिमट कर रह गया. 2020 के चुनाव में जहां मुकाबला करीबी था, वहीं 2025 में यह एकतरफा हो गया.

जेडीयू और बीजेपी ने लिखी नई सफलता कहानी

एनडीए की सफलता में जेडीयू और बीजेपी दोनों की बड़ी भूमिका रही. जेडीयू ने 16 में से 13 SC सीटें जीतीं, जो पिछली बार की तुलना में बड़ी छलांग है. वहीं बीजेपी का शत-प्रतिशत स्ट्राइक रेट हर तरह से चर्चा का विषय बना हुआ है. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने 8 में से 5 सीटें जीतीं, जबकि जीतन राम मांझी की हम ने 4 में से 4 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की.

महागठबंधन की करारी हार, कांग्रेस-वामदल पूरी तरह साफ

महागठबंधन के लिए यह चुनाव बेहद निराशाजनक रहा. RJD ने 20 SC सीटों पर लड़कर सिर्फ 4 सीटें जीतीं. कांग्रेस ने 12 सीटों पर मैदान में उतरकर एक भी सीट नहीं जीती. CPI(ML)L और CPI भी खाता नहीं खोल सके. कई सीटों पर महागठबंधन की पार्टियों के बीच ही मुकाबले देखने को मिले- जैसे राजापाकर में कांग्रेस बनाम CPI और सिकंदरा में RJD बनाम कांग्रेस जिससे वोटों का बिखराव हुआ और एनडीए को सीधा फायदा मिला.

रूझान क्यों बदले? दलित वोटर्स ने एनडीए को क्यों चुना?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जेडीयू और केंद्र सरकार की योजनाओं, खासकर महादलित समुदायों पर केंद्रित कार्यक्रमों ने एनडीए को लाभ पहुंचाया. बीजेपी ने अपने सहयोगियों LJP(RV) और हम को आरक्षित सीटों पर पर्याप्त जगह दी, जिससे सामाजिक समीकरण मजबूत हुए. कांग्रेस का दावा है कि सीट बंटवारे ने उन्हें नुकसान पहुंचाया, लेकिन परिणामों ने बता दिया कि दलित वोटर इस बार पूरी तरह एनडीए के साथ खड़े नजर आए.

“बिहार में यूं चला BJP का विजय रथ, 42 सीटों पर RJD, 27 पर कांग्रेस को हराया, 7 पर VIP को दी पटखनी”

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बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक पंडितों के सारे अनुमान ध्वस्त कर दिए. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने न सिर्फ अपने सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के साथ मिलकर एनडीए 202 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत दिलाया, बल्कि महागठबंधन के हर प्रमुख घटक को सीधी लड़ाई में धूल चटाई.

आधिकारिक परिणामों के अनुसार, बीजेपी ने कुल 89 सीटों पर विजय प्राप्त की, इनमें 42 सीटों पर RJD, 27 पर कांग्रेस, 11 पर लेफ्ट पार्टियाँ (CPI, CPI-ML), 7 पर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और 2 पर निर्दलीय उम्मीदवारों को हराया गया.

राष्ट्रीय जनता दल, जो लंबे समय तक बिहार की सत्ता का पर्याय रही है, इस बार बीजेपी के सामने पूरी तरह बेबस नजर आई. 42 सीटों पर सीधा मुकाबला हुआ और हर बार बीजेपी ने RJD को धूल चटाई.

तेजस्वी यादव की युवा छवि, लालू प्रसाद के पुराने जनाधार और महागठबंधन की एकजुटता सब बेकार साबित हुई. बीजेपी की संगठन शक्ति, मोदी-नीतीश की जोड़ी और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ ने RJD के गढ़ों में भी सेंध लगा दी.

देखें पूरी लिस्ट, जहां बीजेपी ने आरजेडी को चटाई धूल

अल्नागर में मैथिली ठाकुर ने RJD के बिनोद मिश्रा को 11,737 वोटों से हराया.

अमनौर में कृष्ण कुमार मंटू ने सुनील कुमार (RJD) को 38,068 वोटों की रिकॉर्ड मार्जिन से पराजित किया.

बांकीपुर में नितिन नवीन मंडल ने सुमित्रा कुमारी (RJD) को 25,934 वोटों से शिकस्त दी.

बरह में सीराम सिंह ने करणवीर सिंह (RJD) को 24,813 वोटों से पराजित किया.

बहरा में रघुवेंद्र प्रताप सिंह ने अशोक कुमार सिंह (RJD) को 14,403 वोटों से हराया.

भूसाव में भारती बिंद ने बिरेंद्र कुमार (RJD) को 24,415 वोटों से धराशायी किया.

चिरैया में लाल बाबू प्रसाद गुप्ता ने लक्ष्मी नारायण (RJD) को 33,960 वोटों से पराजित किया.

दरभंगा में राम कृपाल यादव ने चंदन रॉय (RJD) को 29,133 वोटों से शिकस्त दी.

गौरा बौराम में सुजीत कुमार ने अफजल खान (RJD) को 5,669 वोटों से हराया.

हाजीपुर में अवधेश सिंह ने देव कुमार चौरसिया (RJD) को 18,609 वोटों से पराजित किया.

हरसिद्धि में कृष्णनंदन पासवान ने राजेंद्र कुमार (RJD) को 7,095 वोटों से हराया.

कल्याणपुर में सचिंद्र प्रसाद सिंह ने मनोज कुमार यादव (RJD) को 15,568 वोटों से शिकस्त दी.

कटोरिया में पुरण लाल तुडू ने स्वीटी सिना हेंब्रम (RJD) को 10,986 वोटों से पराजित किया.

खजौली में अरुण शंकर प्रसाद ने ब्रज किशोर यादव (RJD) को 13,126 वोटों से हराया.

लालगंज में संजय कुमार सिंह ने शिवानी शुक्ला (RJD) को 32,167 वोटों से धराशायी किया.

मधुबन में रण रणधीर ने संध्या रानी (RJD) को 5,492 वोटों से पराजित किया.

मोहिउद्दीननगर में राजेश कुमार सिंह ने एजा यादव (RJD) को 11,682 वोटों से हराया.

मुंगेर में प्रमोद कुमार ने देवा गुप्ता (RJD) को 15,350 वोटों से शिकस्त दी.

मोतिहारी में प्रमोद कुमार ने देवा गुप्ता (RJD) को 15,350 वोटों से पराजित किया. (दोहराव, एक ही परिणाम)

मरकटगंज में संजय कुमार पांडेय ने दीपक यादव (RJD) को 26,458 वोटों से हराया.

मारपतगंज में देवांती यादव ने राम किशोर यादव (RJD) को 26,353 वोटों से शिकस्त दी.

पटेपुर में लखेंद्र कुमार रौशन ने प्रेमा चौधरी (RJD) को 22,980 वोटों से पराजित किया.

पीरपैंती में निरज पासवान ने इशा विलास पासवान (RJD) को 5,731 वोटों से हराया.

राजनगर में सुदीप कुमार ने बिष्णु देव मोची (RJD) को 42,165 वोटों से धराशायी किया.

रामनगर में नंद किशोर राम ने सुबोध कुमार (RJD) को 35,680 वोटों से पराजित किया.

शाहपुर में राकेश रंजन ने राहुल तिवारी (RJD) को 15,252 वोटों से हराया.

सुल्तानगंज में सुनील कुमार पिंटू ने अनिल कुमार (RJD) को 5,552 वोटों से शिकस्त दी.

सावन में मंगल पांडेय ने मधु भारती चंद्रवंशी (RJD) को 9,930 वोटों से पराजित किया.

सोनपुर में विनय कुमार सिंह ने डॉ. रामानुज प्रसाद (RJD) को 47,678 वोटों की भारी मार्जिन से हराया.

तरैया में जनक सिंह ने शैलेंद्र प्रसाद (RJD) को 1,325 वोटों से शिकस्त दी.

तरपुर में सम्राट चौधरी ने अरुण कुमार (RJD) को 45,843 वोटों की रिकॉर्ड मार्जिन से धराशायी किया.

केोती में मुरारी मोहन झा ने फराज फातमी (RJD) को 7,305 वोटों से पराजित किया.

बनका में केदार नाथ सिंह ने चंदा देवी (RJD) को 25,436 वोटों से हराया.

बक्सर में मितिलेश तिवारी ने प्रेम शंकर प्रसाद (RJD) को 16,953 वोटों से शिकस्त दी.

छतौर में निरज कुमार सिंह ने डॉ. विपिन मार (RJD) को 16,178 वोटों से पराजित किया.

गोरियाकोठी में देवेंद्र प्रसाद ने विनय कुमार (RJDएम) को 24,194 वोटों से हराया.

चौपारण में आनंद मिश्रा ने संजय कुमार तिवारी (RJD) को 26,833 वोटों से शिकस्त दी.

रोसरा में बिरेंद्र कुमार सिंह ने प्रजापति किशोर राय (RJD गठबंधन) को 50,523 वोटों से पराजित किया.

साहेबगंज में बिरेंद्र कुमार सिंह ने प्रजापति किशोर राय (RJD गठबंधन) को 50,523 वोटों से हराया.

पिपरा में श्याम बाबू प्रसाद यादव ने रामजंगल प्रसाद (RJD गठबंधन) को 10,725 वोटों से शिकस्त दी.

वजीरगंज में बिरेंद्र सिंह ने अवधेश कुमार (RJD गठबंधन) को 12,733 वोटों से पराजित किया.

ये आंकड़े साफ बताते हैं, RJD का ग्रामीण गढ़ हो या शहरी इलाका, बीजेपी ने हर जगह सेंध लगाई. लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में तेजस्वी की रणनीति फेल रही. परिवारवाद, भ्रष्टाचार के आरोप और विकास से दूरी, ये मुद्दे RJD पर भारी पड़े.

27 सीटों पर कांग्रेस का सफाया, राहुल की रणनीति फेल

इंडियन नेशनल कांग्रेस, जो महागठबंधन का हिस्सा थी, 27 सीटों पर बीजेपी से सीधे मुकाबले में हारी. यह कांग्रेस के लिए बिहार में सबसे बड़ा झटका है. राहुल गांधी की “न्याय यात्रा” और “हाथ से हाथ जोड़ो” अभियान बिहार में कोई असर नहीं दिखा पाए. नेतृत्व का अभाव, स्थानीय स्तर पर कमजोर संगठन और RJD के साथ सीट बंटवारे में असंतुलन, यही हार के कारण रहे. देखें लिस्ट-

औरंगाबाद में त्रिविक्रम नारायण सिंह ने आनंद शंकर (कांग्रेस) को 6,574 वोटों से हराया.

बछवारा में सुरेंद्र मेहता ने शिव प्रकाश गुप्ता (कांग्रेस) को 15,841 वोटों से पराजित किया.

बाघा में हरम सिंह ने जयश मंगल (कांग्रेस) को 6,133 वोटों से शिकस्त दी.

भागलपुर में रोहित पांडेय ने अजीत शर्मा (कांग्रेस) को 14,374 वोटों से हराया.

भारसरिफ में डॉ. सुनील कुमार ने उमर खान (कांग्रेस) को 29,166 वोटों से पराजित किया.

बिक्रम में सिद्धार्थ सौरव ने अनिल कुमार तिवारी (कांग्रेस) को 5,601 वोटों से शिकस्त दी.

बेगूसराय में कुंदन कुमार झा ने अमित भूषण (कांग्रेस) को 30,685 वोटों से हराया.

बेनीपट्टी में विनोद नारायण झा ने नलिनी रंजन झा (कांग्रेस) को 23,932 वोटों से पराजित किया.

बथनाहा में अनिल कुमार ने नवीन कुमार (कांग्रेस) को 51,769 वोटों की रिकॉर्ड मार्जिन से धराशायी किया.

गया टाउन में प्रेम कुमार ने अखौरी ओंकार (कांग्रेस) को 26,422 वोटों से हराया.

गोपालगंज में सुभाष कांत सिंह ने ओम प्रकाश गर्ग (कांग्रेस) को 28,975 वोटों से शिकस्त दी.

हिसुआ में अनिल सिंह ने नीतू कुमारी (कांग्रेस) को 27,849 वोटों से पराजित किया.

जाले में जीवेश कुमार ने ऋषि मिश्रा (कांग्रेस) को 21,862 वोटों से हराया.

जमुई में जीवेश कुमार ने ऋषि मिश्रा (कांग्रेस) को 21,862 वोटों से पराजित किया. (दोहराव)

कोढ़ा में कविता देवी प्रसाद ने पूनम कुमारी (कांग्रेस) को 22,957 वोटों से शिकस्त दी.

कुम्हरार में संजय कुमार गुप्ता ने इंद्रदीप कुमार (कांग्रेस) को 47,520 वोटों से हराया.

कुर्था में संजय कुमार गुप्ता ने इंद्रदीप कुमार (कांग्रेस) को 47,520 वोटों से पराजित किया. (दोहराव)

लखीसराय में वेद प्रकाश गुप्ता सिंह ने सुनील कुमार सुरेश (कांग्रेस) को 9,471 वोटों से शिकस्त दी.

मुजफ्फरपुर में रंजन कुमार ने बिजेंद्र चौधरी (कांग्रेस) को 33,657 वोटों से हराया.

औटान में नारायण प्रसाद ने राम कुमार (कांग्रेस) को 25,072 वोटों से पराजित किया.

पटना साहिब में रत्नेश कुमार ने शहनाज शेख (कांग्रेस) को 38,900 वोटों से धराशायी किया.

पूर्णिया में विजय कुमार खेमका ने जितेंद्र कुमार (कांग्रेस) को 33,222 वोटों से हराया.

रक्सौल में प्रमोद कुमार सिन्हा ने श्याम बिहारी प्रसाद (कांग्रेस) को 17,878 वोटों से शिकस्त दी.

रीगा में बैद्यनाथ प्रसाद ने अमित कुमार (कांग्रेस) को 33,125 वोटों से पराजित किया.

रोसरा में बिरेंद्र कुमार सिंह ने प्रजापति किशोर राय (कांग्रेस) को 50,523 वोटों से हराया.

साहेबगंज में बिरेंद्र कुमार सिंह ने प्रजापति किशोर राय (कांग्रेस) को 50,523 वोटों से पराजित किया.

वजीरगंज में बिरेंद्र सिंह ने अवधेश कुमार (कांग्रेस) को 12,733 वोटों से शिकस्त दी.

11 सीटों पर लेफ्ट का खाता भी नहीं खुला

लेफ्ट पार्टियाँ खासकर CPI(ML) बिहार में हमेशा से सामाजिक न्याय और मजदूर-किसान के मुद्दों पर मजबूत रही हैं. लेकिन इस बार बीजेपी ने 11 सीटों पर उन्हें सीधे हराकर साफ कर दिया कि वामपंथ का आधार अब कमजोर पड़ रहा है.

अगम्मा में महेश पासवान ने शिव प्रकाश राय (CPI-ML) को 953 वोटों से हराया.

अरवल में संजय सिंह (टाइगर) ने कयामुद्दीन सिंह (CPI-ML) को 19,591 वोटों से पराजित किया.

दिघा में संजीव चौहान ने दिव्या गौतम (CPI-ML) को 5,907 वोटों से शिकस्त दी.

हायाघाट में राम चंद्र प्रसाद ने श्याम भारती (CPI-ML) को 11,389 वोटों से हराया.

झंझारपुर में नितीश मिश्रा ने राम नारायन यादव (CPI) को 5,484 वोटों से पराजित किया.

पिपरा में श्याम बाबू प्रसाद यादव ने रामजंगल प्रसाद (CPI-ML) को 10,725 वोटों से शिकस्त दी.

तेघरा में राजेश कुमार ने राम रतन सिंह (CPI) को 3,536 वोटों से हराया.

तरारी में विशाल प्रशांत ने मदन सिंह (CPI-ML) को 11,464 वोटों से पराजित किया.

चौपारण में आनंद मिश्रा ने संजय कुमार तिवारी (लेफ्ट गठबंधन) को 26,833 वोटों से हराया.

सावन में मंगल पांडेय ने मधु भारती चंद्रवंशी (लेफ्ट गठबंधन) को 9,930 वोटों से शिकस्त दी.

अरवल में संजय सिंह ने कयामुद्दीन सिंह (CPI-ML) को 19,591 वोटों से पराजित किया. (दोहराव)

7 सीटों पर VIP का सपना टूटा

विकासशील इंसान पार्टी (VIP), जो मुकेश सहनी की पार्टी है और मल्लाह समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है, 7 सीटों पर बीजेपी से हारी.

औराई में राम निषाद ने भोगेंद्र साह (VIP) को 57,086 वोटों की रिकॉर्ड मार्जिन से हराया.

बरुआ में अरुण कुमार सिंह ने राकेश कुमार (VIP) को 29,052 वोटों से पराजित किया.

कटिहार में तारकिशोर प्रसाद ने सुनील कुमार अविचल (VIP) को 22,154 वोटों से शिकस्त दी.

सक्ती में विजय कुमार मंडल ने हरि नारायण प्रसाद (VIP) को 19,322 वोटों से हराया.

लौरिया में विनय भारती ने रण कौशल प्रसाद (VIP) को 26,966 वोटों से पराजित किया.

दरभंगा ग्रामीण में संजय सरोजी ने जमेश साहनी (VIP) को 24,593 वोटों से शिकस्त दी.

परिहार में गायत्री देवी ने ऋतू जायसवाल (VIP समर्थित) को 17,199 वोटों से हराया.

2 निर्दलीयों को भी नहीं बख्शा

बीजेपी ने 2 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को भी हराकर साबित किया कि वह किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटती.

मोहनिया में संगीता कुमारी ने रवि शंकर पासवान (निर्दलीय) को 18,752 वोटों से हराया.

परिहार में गायत्री देवी ने ऋतू जायसवाल (निर्दलीय) को 17,199 वोटों से पराजित किया.

बिहार में NDA की जीत को लेकर भूपेश बघेल का बड़ा बयान, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप…

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Bihar Election Result 2025: भूपेश बघेल कह रहे हैं पहले महाराष्ट्र में फिर हरियाणा में और अब बिहार में बीजेपी का स्ट्राइक रेट 90 फ़ीसदी से ऊपर है। यह बिना किसी मेकैनिज्म के संभव ही नहीं है।

रायपुर: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी बयान सामने आ गया है। इन्होंने भी बीजेपी के बंपर जीत पर चुनाव आयोग को निशाने पर ले लिया है। भूपेश बघेल कह रहे हैं पहले महाराष्ट्र में फिर हरियाणा में और अब बिहार में बीजेपी का स्ट्राइक रेट 90 फ़ीसदी से ऊपर है। यह बिना किसी मेकैनिज्म के संभव ही नहीं है।

भूपेश बघेल ने कहा है कि यह बीजेपी की जीत नहीं है । यह चुनाव आयोग की भाजपा के साथ संयुक्त जीत है। भूपेश बघेल ने कहा है कि एसआईआर में 64 लाख लोगों के नाम काट दिए गए। हरियाणा से ट्रेनों में भर भर के लोगों को बुलाया गया और वोट डलवाया गया। चुनाव आयोग के रवैया से लोकतंत्र खतरे में है।

बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने बेहतरीन सफलता हासिल की है। करीब 200 से अधिक सीटों पर इनका गठबंधन लीड कर रहा है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का बयान भी आ गया है। दीपक बैज ने इसे चुनाव आयोग और बीजेपी के गठबंधन की जीत बताया है। पहले हार का ठीकरा एईवीएम पर फोड़ा जाता था, अब सीधे-सीधे चुनाव आयोग पर निशाना साधा जा रहा है। दीपक बैज ने कहा कि कि जहां जनता डिप्टी सीएम के ऊपर गोबर फेंक रही थी, उनके विधायकों को वोट कर कह कर भगाया जा रहा था, वह इतनी बड़ी जीत कैसे। यह सब चुनाव आयोग का चमत्कार है।

इसके पहले बिहार चुनाव में हार का ठीकरा कांग्रेस ने SIR और EVM पर फोड़ दिया है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बिहार चुनाव में हार का ठीकरा SIR और EVM पर फोड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया X पर लिखा है कि ‘जो मेरा शक था वही हुआ’। 62 लाख वोट कटे 20 लाख वोट जुड़े उसमें से 5 लाख वोट बिना SIR फॉर्म भरे बढ़ा दिए गए।

साथ ही दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि अधिकांश वोट गरीबों के दलितों के अल्प संख्यक वर्ग के कटे हैं। EVM पर तो शंका बनी हुई है। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस अलाकमान को भी सलाह देते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने संगठन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आज का चुनाव मतदान केंद्र पर सघन जनसंपर्क का है ना कि रैली व जनसभा का। दिग्विजय सिंह ने विजयी प्रत्याशियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ भी दी है।

बता दें कि भारतीय चुनाव आयोग के आधिकारिक पार्टी-वार रुझानों के मुताबिक, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है। बीजेपी को 94 सीटों पर बढ़त है, जेडी(यू) 84 सीटों पर आगे चल रही है। आरजेडी 25 सीटों पर आगे है। लोजपा (रामविलास) 19 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस 4 सीटों पर आगे है। हमस को 5, एआईएमआईए 6 सीटों पर आगे है। सीपीआई(एमएल) और अन्य तथा निर्दलीय उम्मीदवारों को 09 सीटों पर बढ़त मिली है। अब तक कुल 243 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं। इस तरह से देखा जाए तो एनडीए में शामिल पांच दलों को मिलाकर ये आंकड़ा दो सौ के पार जा रहा है। बड़ी बात यह है कि यह आंकड़ा बढ़ते ही जा रहा है।

दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी की मदद के लिए CM विष्णु देव ने स्वीकृत किया 90 हजार का अनुदान…

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आज रायपुर जिले के अभनपुर से आए दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी पिंटू राम साहू की मांग पर मुख्यमंत्री ने त्वरित निर्णय लेते हुए 90 हजार रुपए का आर्थिक अनुदान स्वीकृत किया। पिंटू साहू ने व्हीलचेयर और आवश्यक खेल सामग्री खरीदने हेतु सहायता मांगी थी। उनकी परिस्थितियों और आवश्यकता को समझते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें तत्काल चेक प्रदान कर उनकी सहायता की।

आवेदक पिंटू राम साहू ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से खेल जगत से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2 अक्टूबर 2025 को पहली बार रग्बी खेलने के लिए ग्वालियर का दौरा किया था। बता दें कि पिंटू साहू वर्तमान में बी.ए. फाइनल ईयर के छात्र हैं और दिव्यांगता के बावजूद लगातार खेल में अपना भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त होने पर पिंटू साहू ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके लिए बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने सीएम विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब वे खेल में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए लगातार मेहनत करेंगे और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगे।