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गौरव दिवस 15 नवंबर के लिए जिला स्तरीय कार्यक्रम हेतु मुख्य अतिथि का नाम नामांकित…

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रायपुर: धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में पूरे देश में 15 नवम्बर को गौरव दिवस के रूप में मनाया जाना है। गौरव दिवस का कार्यक्रम स्तरीय सभी जिलों में आयेाजित किया जाना है, जिसके लिए मुख्य अतिथि का नाम नामांकित किया है। प्रस्तावित मुख्य अतिथियों में बस्तर जिला के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप एवं विधायक जगदलपुर श्री किरण देव का नाम प्रस्तावित किया गया है।

इसी प्रकार गौरव दिवस 15 नवंबर के लिए प्रस्तावित मुख्य अतिथि में रायपुर जिला के लिए केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन लाल साहू, बिलासपुर जिला के लिए उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, दुर्ग जिला के लिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, राजनांदगांव जिला के लिए अध्यक्ष, छ.ग. विधानसभा डॉ. रमन सिंह,  बलरामपुर-रामानुजगंज जिला के लिए आदिम जाति विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम के नाम श्शमिल हैं। बेमेतरा जिला के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री दयाल दास बघेल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के लिए स्वस्थ्यमंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कोरबा वाणिज्य उद्योग  मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई के लिए सांसद श्री विजय बघेल, कबीरधाम जिला के लिए सांसद श्री संतोष पाण्डेय,  बालोद जिला के लिए सांसद श्री भोजराज नाग, गरियाबंद जिला के लिए सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, जशपुर जिला के लिए सांसद श्री राधेश्याम राठिया का नाम गौरव दिवस 15 नवंबर को जिला स्तरीय कार्यक्रम के लिए प्रस्तावित मुख्य अतिथि के रूप में नामांकित किया गया है।

सक्ति जिला के लिए सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बीजापुर के लिए सांसद श्री महेश कश्यप, सारंगढ-बिलाईगढ जिला के लिए राज्य सभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह, मोहला-मानपुर-चौकी के लिए विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, धमतरी जिला के लिए विधायक श्री अजय चन्द्राकर, कोण्डागांव जिला के लिए  विधायक सुश्री लता उसेंडी, मुंगेली जिला के लिए विधायक श्री पुन्नलाल मोहले, नारायणपुर जिला के लिए विधायक श्री विक्रम उसेंडी, सुकमा जिला के लिए विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, दन्तेवाड़ा विधायक श्री चैतराम अटामी और गौरला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला में धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में गौरव दिवस 15 नवंबर के लिए विधायक श्री प्रणव कुमार मरपच्ची को जिला स्तरीय कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि के रूप में नामांकित किया गया है।

15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन करने और लघु फिल्म दिखाने निर्देश…

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रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में पूरे देश में जनजातीय गौरव वर्ष जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा। भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रतिवर्ष 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाना है। इस वर्ष 2025 को धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में पूरे देश में 01 नवम्बर से 15 नवम्बर तक जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा मनाये जाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। राज्य शासन द्वारा 15 नवम्बर जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग श्री सोनमणि बोरा ने जिला स्तर पर कार्यक्रम के आयोजन करने हेतु महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

लोक कला महोत्सव नृत्य प्रतियोगिताओं का आयेाजन

प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग श्री बोरा ने जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम आयोजित करने हेतु कलेक्टरेां को जारी महत्वपूर्ण निर्देश में कहा है कि सभी जिले के प्रभारी मंत्री, मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के आतिथ्य एवं जिले के प्रभारी सचिव की उपस्थिति में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना सुनिश्चित करें। इस कार्यक्रम हेतु सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मुख्य अतिथि आदि का निर्धारण पृथक से किया जा रहा है। शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव नृत्य प्रतियोगिता का जिला स्तरीय आयोजन कराया जाना सुनिश्चित करें।

 अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार होंगे सम्मानित

श्री बोरा ने निर्देश दिए हैं कि उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव जिला स्तरीय आयोजन (संबंधित जिलों में) कराना जाए। सभी जिलों के शासकीय कार्यालयों में/शासकीय संस्थानों में/ आश्रम-छात्रावास में/ आवासीय विद्यालयों में नजातीय गौरव दिवस का कार्यक्रम आयेाजन कराना सुनिश्चित करें। इसी प्रकार जिले के अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार के सदस्यों, जनजातीय समुदाय के प्रमुखों आदि का सम्मान कराया जाए।

केन्द्र और राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रदर्शनी लगाई जाए

प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग ने कहा है कि जिला स्तरीय कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, कला, व्यंजन, हस्तशिल्प एवं विकास प्रदर्शनी तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये भारत सरकार एवं राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रदर्शनी लगाई जाए। सभी जिलों में जनजातीय ग्रामों/विकासखण्डों में विशेष कैम्प (लाभार्थी संतृप्ति शिविर) का आयोजन करें, जिसमें आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री जनधन खाता, जाति प्रमाण-पत्र, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड के संतृप्तिकरण के लिए सेवा प्रदाय एवं वितरण, सिकल सेल जांच एवं स्वास्थ्य परीक्षण कैम्प का आयोजन भी किया जा सकता है।

जनजागरूकता यात्रा एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन कराएं

जिले के सभी आदि सेवा केन्द्र में गौरव दिवस का आयोजन एवं जनजातीय महापुरुष स्वतंत्रता संग्राम के नायक-नायिकाओं के चित्र पर माल्यार्पण कराया जाए। अन्य गतिविधियाँ प्रभात फेरी जन-जागरूकता यात्रा, विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिताओं का आयोजन जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, आश्रम-छात्रावास की साफ-सफाई, वृक्षारोपण एवं जनजातीय नायक-नायिकाओं के विषय पर संगोष्ठी, वाद-विवाद, चित्रकला, निबंध लेखन एवं भाषण आदि का आयोजन किया जाए। जिला स्तरीय कार्यक्रम में सफलता की कहानी एवं बेस्ट प्रैक्टिसेस आदि का प्रदर्शन साथ ही अतिथियों से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों का संवाद कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

लघु फिल्म का प्रदर्शन करना

जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर 2025 के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम में प्रतिभावान बच्चो का सम्मानित किया जाए। अनुसूचित जनजाति के विकास से जुड़े पी.एम. जनमन, आदि कर्मयोगी, धरती आबा आदि योजना से जुड़े लघु फिल्म का प्रदर्शन करना सुनिश्चित करें। इस कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी की पाती का वाचन भी किया जाना है, जिसे पृथक से प्रेषित् किया जाएगा।

प्रतिवेदन आदिम जाति विकास विभाग को 20 नवम्बर, 2025 तक उपलब्ध कराएं

भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन ग्राम स्तर/विकासखण्ड स्तर/जिला स्तर पर किया जा रहा है । प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग श्री बोरा ने कहा है कि इसी कम में आगामी 15 नवंबर 2025 को जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजन सुनिश्चित करते हुए, प्रति दिवस की कार्यवाही को भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं राज्य शासन के पोर्टल पर अपलोड किया जानासुनिचित करें। उक्त कार्यक्रम के दौरान की गई कार्यवाही के संबंध में सफलता की कहानी, वीडियो एवं फोटोग्राफ्स सहित प्रतिवेदन आदिम जाति विकास विभाग को 20 नवम्बर, 2025 तक उपलब्ध कराया जाना सुनिचित करें।

“भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला आसिम मुनीर होगा PAK का CDF, अब परमाणु हथियार पर भी कंट्रोल”

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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने गुरुवार (13 नवंबर 2025) को सैन्य कानून में संशोधन किया, जिससे सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स नियुक्त करने का रास्ता साफ हो गया.

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने विवादास्पद 27वें संविधान संशोधन को मंजूरी दे दी, जिससे यह संविधान का हिस्सा बन गया. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि सैन्य अधिनियम में बदलावों का उद्देश्य सशस्त्र बल कानूनों को नवीनतम संविधान संशोधन के अनुरूप बनाना है.

तीनों सेनाओं की कमान होगी मुनीर के हाथ

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से सेना अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश करने के बाद नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए, कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने कहा कि ये बदलाव नए कानून नहीं हैं, बल्कि मौजूदा कानूनों में संशोधन हैं. उन्होंने कहा, ”सैन्य अधिनियम में बदलाव यह है कि वर्तमान सेनाध्यक्ष, एक साथ ही चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स (सीडीएफ) भी होंगे. सीडीएफ का कार्यकाल उनकी नियुक्ति की तारीख से पांच वर्ष का होगा. नौसेना और वायु सेना अधिनियमों से कुछ प्रावधान हटा दिए गए हैं, जबकि अन्य शामिल किए गए हैं.”

परमाणु हथियारों पर भी मुनीर का कंट्रोल

इस संशोधन के तहत पाकिस्तान में नेशनल स्ट्रैटजिक कमांड (NSC) का गठन होगा. यह कमांड पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और मिसाइल सिस्टम की निगरानी और नियंत्रण करेगी. अभी तक शहबाज शरीफ की अध्यक्षता वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) के पास थी, लेकिन अब ये पावर NSC के पास चली जाएगी. NSC का कमांडर भले ही पीएम की मंजूरी ने ही नियु्क्त होगा, लेकिन CDF की सिफारिश पर ही होगी.

27वां संविधान संशोधन विधेयक पारित

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संसद के दोनों सदनों की ओर से पारित 27वें संविधान संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ, 27वां संविधान संशोधन विधेयक अब संविधान का हिस्सा बन गया है. विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बीच सीनेट ने विवादास्पद 27वें संविधान संशोधन विधेयक को दूसरी बार पारित कर दिया. इससे पहले नेशनल असेंबली ने 27वें संविधान संशोधन को दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया था. कुल 234 सदस्यों ने इसके पक्ष में और चार ने इसके विरुद्ध मतदान किया, जबकि विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार किया.

बढ़ा जाएगा मुनीर का कार्यकाल

इस संशोधन के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति सेना प्रमुख और रक्षा बल प्रमुख की नियुक्ति करेंगे. इसका एक प्रस्ताव काफी चर्चा में था जिसके मुताबिक ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद 27 नवंबर, 2025 को समाप्त कर दिया जाएगा. संशोधन के तहत, पाकिस्तान के वर्तमान चीफ जस्टिस अपने कार्यकाल की समाप्ति तक इस पद पर बने रहेंगे. उसके बाद, यह पद सुप्रीम कोर्ट या संघीय संवैधानिक कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जस्टिस को सौंप दिया जाएगा.

संशोधन विधेयक के खिलाफ दो जजों का इस्तीफा

पाकिस्तान के सबसे विवादित संशोधन विधेयक के पारित होते ही वहां के सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने विरोध स्वरूप अपना इस्तीफा सौंप दिया. वरिष्ठ जस्टिस मंसूर अली शाह और अतहर मिनल्लाह ने 27वें संविधान संशोधन पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हस्ताक्षर के बाद इस्तीफा दे दिया. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक अपने 13 पृष्ठों के इस्तीफे में मंसूर अली शाह ने कहा कि 27वां संविधान संशोधन पाकिस्तान के संविधान पर एक गंभीर हमला है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका विभाजित हो गई है, जिससे देश दशकों पीछे चला गया है.

उन्होंने कहा, “27वें संविधान संशोधन ने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट को खंडित कर दिया है. इसने न्यायपालिका को सरकार के नियंत्रण में ला दिया है. यह संशोधन पाकिस्तान के संवैधानिक लोकतंत्र की भावना को लगा एक गंभीर झटका है.”

जस्टिस अतहर मिनल्लाह ने लिखा कि 27वें संविधान संशोधन के पारित होने से पहले, उन्होंने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर देश की संवैधानिक व्यवस्था पर प्रस्तावित बदलावों के प्रभाव के बारे में चिंता जताई थी.

उन्होंने आगे कहा, “मुझे उस पत्र की विस्तृत सामग्री को दोहराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इतना कहना ही काफी है कि चुनिंदा चुप्पी और निष्क्रियता की पृष्ठभूमि में, वे आशंकाएं अब सच हो गई हैं.” उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि जिस संविधान की रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली थी, वह अब नहीं रहा. उन्होंने चेतावनी दी कि संशोधन के तहत रखी गई नई नींव उसकी कब्र पर टिकी है.

“दुबई में भारतीय गैंगस्टरों के बीच पहली गैंगवॉर! लॉरेंस बिश्नोई के करीबी की हत्या का दावा”

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दुबई में भारतीय गैंगस्टरों के बीच कथित रूप से पहली बार गैंगवॉर की खबरें सोशल मीडिया पर फैल रही हैं. ये दावा एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किया गया है, जो कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा से जुड़े अकाउंट से शेयर हुआ है.

इस पोस्ट के जरिए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी जोरा सिद्धू उर्फ सिप्पा की हत्या की जिम्मेदारी ली गई है.

पोस्ट में कहा गया है कि दुबई में जोरा सिद्धू की गला रेतकर हत्या की गई है. आरोप है कि बिश्नोई के निर्देश पर गैंग के लिए सिद्धू हैंडलर का काम कर रहा था और दुबई में बैठकर कनाडा और अमेरिका में कई लोगों को धमकियां दे रहा था. पोस्ट में दावा किया गया है कि सिद्धू ने पहले जर्मनी में गोदारा के एक साथी की हत्या करवाने की कोशिश की थी, जिस कारण यह ‘बदला’ लिया गया.

सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा गया

पोस्ट में कहा गया है कि आज दुबई में लॉरेंस का जोरा सिद्धू (सिप्पा) गला रेतकर मार दिया गया. यह काम हमने करवाया है. दुबई में बैठकर वह कनाडा और अमेरिका में धमकियां दे रहा था. जो दुबई को सुरक्षित समझते हैं, समझ लें अगर हमारे दुश्मन हैं तो कहीं भी सुरक्षित नहीं. इसमें रोहित गोदारा के अलावा गोल्डी बराड़, वीरेंद्र चारण, महेंद्र सरन डेलाना और विक्की पहलवान कोटकपूरा का भी जिक्र किया गया है. ये सभी कथित तौर पर उसी गैंग के सदस्य बताए गए हैं, जिसने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर

पोस्ट में आगे चेतावनी देते हुए कहा गया है कि पुलिस हर जगह नहीं पहुंच सकती, लेकिन हम पहुंचेंगे. जो भी विरोध करेगा, तैयार रहे. हालांकि दुबई पुलिस की ओर से अब तक इस कथित हत्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. कई सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दुबई जैसे अत्यंत निगरानी वाले शहर में इस तरह की वारदात होना असामान्य माना जाता है, इसलिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार महत्वपूर्ण है.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं. हालांकि जब तक दुबई पुलिस द्वारा कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तब तक यह मामला केवल सोशल मीडिया दावों पर आधारित माना जा रहा है.

“पाकिस्तान में 27वां संविधान संशोधन मंजूर, गुस्से में PAK SC के 2 सीनियर जजों ने दिया इस्तीफा”

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पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के 2 सीनियर जजों ने गुरुवार (13 नवंबर) को 27वें संवैधानिक संशोधन के विरोध में इस्तीफा दे दिया. उनका आरोप है कि ये संशोधन पाकिस्तान के संविधान को कमजोर करता है और ज्यूडिशियरी की आजादी को खत्म करने वाला है.

बता दें कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के विवादास्पद 27वें संविधान संशोधन को मंजूरी दिए जाने के महज कुछ ही घंटों बाद जस्टिस मंसूर अली शाह और अतहर मिनल्लाह ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया.

ये संशोधन पाकिस्तानी संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद कानून बनाने की दिशा में अंतिम कदम था. संशोधित कानून के तहत पाकिस्तान में एक संघीय संवैधानिक अदालत (Federal Constitutional Court) का गठन होगा, जो संवैधानिक मामलों की सुनवाई करेगी. मौजूदा सुप्रीम कोर्ट केवल सिविल और आपराधिक मामलों तक सीमित रहेगा.

मंसूर अली शाह ने अपने त्याग पत्र में क्या लिखा

जस्टिस मंसूर अली शाह ने अपने त्याग पत्र में लिखा कि यह संशोधन पाकिस्तान के संविधान पर गंभीर हमला है. यह सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को समाप्त करता है. न्यायपालिका को कार्यपालिका के अधीन लाता है और संवैधानिक लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार करता है. देश के सर्वोच्च न्यायालय की एकता को खंडित करके इस संशोधन ने न्यायिक स्वतंत्रता और अखंडता को पंगु बना दिया है और देश को दशकों पीछे धकेल दिया है.. संवैधानिक व्यवस्था का यह विध्वंस बहुत समय तक ऐसे ही नहीं रहने वाला और समय के साथ इसे उलट दिया जाएगा, लेकिन तब तक यह इस संस्था को गहरे घाव दे जाएगा.

उन्होंने कहा कि अपने पद पर बने रहना न केवल एक संवैधानिक गलती को चुपचाप स्वीकार करने के समान होगा, बल्कि इसका मतलब एक ऐसी अदालत में बैठे रहना भी होगा जिसकी संवैधानिक आवाज को दबा दिया गया है. ऐसे कमजोर न्यायालय में सेवा करते हुए मैं संविधान की रक्षा नहीं कर सकता.

जस्टिस मिनल्लाह ने अपने इस्तीफे की क्या वजह बताई

जस्टिस मिनल्लाह ने अपने त्याग पत्र में लिखा कि 27वें संशोधन के पारित होने से पहले मैंने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि इसके प्रस्तावित प्रावधान हमारी संवैधानिक व्यवस्था के लिए क्या मायने रखते हैं. उनकी चुप्पी के बीच अब वे आशंकाएं सच साबित हो गई हैं. जिस संविधान की रक्षा करने की मैंने शपथ ली थी, वह अब नहीं रहा. इसकी स्मृति पर इससे बड़ा कोई हमला नहीं हो सकता कि 27वें संविधान संशोधन की नींव, उस संविधान के कब्र पर टिकी है, जिसे बनाए रखने की मैंने शपथ ली थी. अब वह संविधान नहीं रहा. नई व्यवस्था में मेरे लिए न्यायाधीश की पोशाक को धारण करना अब विश्वासघात का प्रतीक बन गया है इसलिए मैं इस पद पर नहीं बना रह सकता.

27वें संविधान संशोधन से क्या बदलाव होगा

सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करेंगे. चेयरमैन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद 27 नवंबर 2025 को समाप्त हो जाएगा. नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का प्रमुख पाकिस्तान की थल सेना से होगा. फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स, एडमिरल ऑफ द फ्लीट जैसे पद जीवनभर के लिए होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला है.

“बिहार चुनाव के नतीजे के बीच आज सस्ता हुआ सोना, जानें 24 और 22  कैरेट गोल्ड की कितनी कम हुई कीमत?”

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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई तेजी के बीच गुरुवार, 13 नवंबर को भारत में सोने की कीमतें तीन हफ्ते के अपने हाई लेवल पर पहुंच गई. अमेरिका में जारी शटडाउन के चलते इकोनॉमी के मंदी की चपेट में आने का डर बना हुआ है इसलिए सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की डिमांड बढ़ने से कीमतों में तेजी आई है.

घरेलू बाजार में पिछले पांच दिनों में 24 कैरेट सोने की कीमत में लगभग 6,630 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी आई है. इस दौरान चांदी की भी कीमत बढ़ी है.

आज कितनी है सोने की कीमत?

आज बिहार चुनाव के नतीजे के बीच सोने की कीमतें कुछ कम हुई हैं. आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 12785 रुपये है, जो कल के मुकाबले 80 रुपये कम है. वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत आज 11720 रुपये प्रति ग्राम है, जो गुरुवार के मुकाबले 70 रुपये सस्ता है. वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत आज एक दिन पहले के मुकाबले 58 रुपये कम होकर 9589 रुपये प्रति ग्राम है. इस तरह से अगर 10 ग्राम के हिसाब से देखे तो आज 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 800 रुपये की कमी आई है. वहीं, 22 और 18 कैरेट की कीमत क्रमश: 700 रुपये और 580 रुपये कम हुई है.

इन शहरों में आज सोने का भाव

मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर और भुवनेश्वर में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 12785 रुपये है. वहीं, इन शहरों में आज 22 कैरेट सोने का भाव 11720 रुपये प्रति ग्राम है.

दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़ और अयोध्या में आज 24 कैरेट सोना प्रति ग्राम के हिसाब से 12800 रुपये में बिक रहा है. वहीं, यहां आज 22 कैरेट सोने की कीमत 11735 रुपये प्रति ग्राम है.

चेन्नई, मदुरै, सेलम, त्रिची में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 12916 रुपये है और 22 कैरेट सोने की कीमत 11840 रुपये प्रति ग्राम है. वडोदरा, अहमदाबाद, पटना, सूरत और राजकोट में आज 24 और 22 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 12790 रुपये और 11725 रुपये है.

चांदी की कितनी है कीमत?

देश में आज चांदी की कीमत 173.10 रुपये प्रति ग्राम और 1,73,100 रुपये प्रति किलोग्राम है. कल भी चांदी की इतनी ही कीमत थी यानी कि इसमें कोई बदलाव नहीं आया है.

“मोदी के हनुमान ने पलट दिया सारा गेम, नीतीश से तेजस्वी तक सबको किया बेदम, 2100% के जम्प से बना डाला महारिकॉर्ड”

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Bihar Election Results 2025:  बिहार विधानसभा चुनाव के अब तक के मिले रुझानों के मुताबिक एक बार फिर से एनडीए की सरकार तय मानी जा रही है. इसमें महागठबंधन के सभी दलों के प्रदर्शन जबरदस्त देखने को मिला है.

पिछले विधानसभा चुनाव में जहां 110 सीटों पर लड़ने वाली बीजेपी ने 19.46 प्रतिशत वोट हासिल करते हुए 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी तो वहीं सहयोगी नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू तीसरे नंबर पर रही थी. उसने 122 सीटों पर लड़कर 15.39 प्रतिशत वोट हासिल करते हुए 73 सीटें जीती थी.

पिछली बार का कैसा प्रदर्शन

जबकि उस समय चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एनडीए से अलग होकर 135 सीटों पर चुनाव लड़ा था, और उसके खाते में सिर्फ एक सीट आई थी. लेकिन इस बार चिराग पासवान की पार्टी की प्रदर्शन बेहद शानदार है. एलजेपी अब तक के रुझानों के मुताबिक 22 सीटों पर आगे चल रही है. 2025 में एनडीए में हुई सीट शेयरिंग के बीच बीजेपी और जेडीयू ने जहां 101-101 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे तो वहीं जेडीयू ने 29, एचएएम ने 6 और आरएलएम ने 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए.

क्या है अब तक का रुझान?

अब तक के रुझानों के मुताबिक, एनडी में शामिल दलों में बीजेपी 85, जेडीयू-75, एलजेपी (आर)-22 और हिन्दुतानी आवाम मार्चा- 4 और आरएलएम 2 सीटों पर आगे चल रही है. जबकि इसके विपक्ष में उतरे महागठबंधन के दलों में शामिल आरजेडी- 36, कांग्रेस-6, वीआईपी-1, लेफ्ट-8 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

इस बारे के चुनाव में महागठबंधन के दल आरजेडी ने 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. जबकि, कांग्रेस-60, सीपीआई माले-20, वीआईपी-11, सीपीआई-6 और सीपीएम ने 4 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. जाहिर है, इस बार चुनाव वादों के बीच विकास का गारंटी पर जनता ने फिर भरोसा दिखाया है.

“Bihar Politics Prediction: आज का दिन क्यों बिहार और देश की राजनीति को हिला सकता है?”

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हर बार जब आकाश में ग्रह अपनी स्थिति बदलते हैं, तो इसका प्रभाव धरती पर देखने को मिलता है. 14 नवंबर 2025 का दिन भी कुछ वैसा ही है शांत दिखता आसमान, पर भीतर से उथल-पुथल.

ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन केवल पंचांग का एक अध्याय नहीं, बल्कि सत्ता-संतुलन का सूक्ष्म संकेत है.

सिंह राशि में चन्द्रमा की मौजूदगी, तुला राशि में सूर्य का गोचर, और कर्क राशि में वक्री बृहस्पति ये तीन गोचर आज एक ऐसी धुरी बना रहे हैं, जिस पर निर्णय, नेतृत्व और गठबंधन सब झूल रहे हैं.

मंच, नेतृत्व और आत्मविश्वास

सिंह राशि सूर्य की अपनी राशि मानी जाती है, और जब चन्द्रमा यहां आता है तो व्यक्ति या शासन दोनों में अहं और आत्मबल बढ़ता है. पुराणों में इसे ‘राजसी चन्द्र’ कहा गया है. बृहत् जातक के अनुसार सिंहे चन्द्रे प्रख्यातं राज्यं प्राप्नोति भूभृतः अर्थात जब चन्द्रमा सिंह राशि में होता है तो राजा अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष करता है. इससे संकेत मिलता है कि आज के दिन सत्ता-पक्ष में आत्मविश्वास तो रहेगा, पर आंतरिक मतभेद भी मुखर हो सकते हैं. यानी जो दल जीतेगा उसके भीतर सीएम चेहरे को लेकर और महत्वपूर्ण मंत्रालय के लिए भीतर संघर्ष का भाव उभरेगा.

तुला राशि में सूर्य का नीच होना, संतुलन या समझौता?

आज सूर्य तुला राशि में नीच का है. वराहमिहिर के अनुसार ‘नीचस्थे भास्करे नृपाणामनुचितं राज्यं स्थायात्’ यानी जब सूर्य अपनी नीच राशि में हो, तब राजा का राज्य स्थिर नहीं रहता, उसे जनता की प्रतिक्रिया झेलनी पड़ती है. इसका अर्थ है कि आज की राजनीति में शक्ति-प्रदर्शन के साथ-साथ बचाव और सफ़ाई का दौर भी चलेगा. नेताओं के बयान, समझौते और रणनीति सब सार्वजनिक छवि संभालने पर केंद्रित रहेंगे. बिहार की राजनीति तय करने वालों को नए संकट से जूझना पड़ेगा.

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, लोकप्रियता और प्रदर्शन का रंग

आज का नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी है, जो शुक्र से शासित होता है. यह नक्षत्र करिश्मा, जनसमर्थन और ‘मंच पर चमकने’ से जुड़ा होता है. बिहार और दिल्ली दोनों जगह आज वही नेता लाभ पाएंगे जो भीड़ और कैमरे की भाषा जानते हैं. पर इसी नक्षत्र की एक चेतावनी भी है, जब लोकप्रियता अति हो जाए, तो विवेक कम हो जाता है. यही कारण है कि आज किसी भी तीखे बयान या विवादास्पद घोषणा का असर अपेक्षा से बड़ा पड़ सकता है.

वक्री बृहस्पति, पुरानी फाइलों की वापसी

बृहस्पति (गुरु) इस समय वक्री गति में हैं. वैदिक ग्रंथ सिद्धांत शिरोमणि कहता है ‘गुरौ वक्री भवति तदा पुनःस्मरणं कर्मणाम्’ जब गुरु वक्री होते हैं, तो पुराने निर्णय पुनः समीक्षा में आते हैं. राजनीतिक रूप से इसका अर्थ है कि बीते महीनों में लिए गए निर्णय, नियुक्तियां या घोषणाएं फिर से चर्चा में आ सकती हैं. सरकारी तंत्र में ‘रीव्यू नोटिंग्स’ और ‘कमीटमेंट रिवाइज़ल’ बढ़ने की संभावना है.

बिहार का सियासी तापमान

बिहार की राजनीति पर सिंह रशि का चन्द्रमा का सीधा असर दिखाई दे रहा है. राज्य-स्तर पर सत्ता-पक्ष में आत्मविश्वास बढ़ेगा, पर विपक्ष ‘जनता के मूड’ को पकड़ने की कोशिश करेगा. संभावना है कि आज का दिन मीटिंग, मीडिया मैनेजमेंट या सोशल मीडिया कैंपेन के लिए महत्वपूर्ण बन जाए. किसी बड़े नेता का अचानक बयान या संकेत आने वाले हफ़्तों की दिशा तय कर सकता है. यही नहीं, दशमी तिथि संघर्ष और समीक्षा दोनों का प्रतीक है. यह वह तिथि है जो निर्णय से पहले विवेक का आग्रह करती है.

दिल्ली की स्थिति…वार्ता का दौर, पर निर्णय नहीं

राजधानी में तुला सूर्य और वक्री बृहस्पति मिलकर एक अनोखा संयम उत्पन्न करते हैं. यह वह स्थिति है जब निर्णय ‘फाइल पर टिके रहते हैं’ पर हस्ताक्षर देर से होते हैं. आज सरकार या गठबंधन स्तर पर किसी नीतिगत घोषणा की संभावना तो रहेगी, पर क्रियान्वयन आगे खिसक सकता है. यह संयम दिखावे का नहीं, बल्कि समय की मांग है. ग्रहों के अनुसार जो जल्दबाज़ी करेगा, वही आलोचना का शिकार बनेगा.

ग्रह असर डालते हैं?

यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या सच में ग्रह राजनीति बदल सकते हैं? जवाब यह है कि ग्रह परिस्थितियां बनाते हैं, निर्णय मनुष्य लेता है. ज्योतिष के अनुसार ग्रह केवल प्रवृत्तियां जगाते हैं, कर्म का दायित्व मनुष्य पर रहता है. आज की स्थिति में सिंह-चन्द्र आत्मबल देता है, तुला-सूर्य विवेक मांगता है और वक्री-गुरु समीक्षा करवाते हैं. तीनों मिलकर एक ऐसा समीकरण बना रहे हैं जहां शक्ति, समझौता और समीक्षा तीनों एक साथ सक्रिय हैं.

कौन खेल बिगाड़ सकता है?

पूर्वा फाल्गुनी का प्रभाव केवल नेताओं तक सीमित नहीं रहता. यह नक्षत्र जन-मीडिया और जनता के भावनात्मक उभार से जुड़ा है. आज के दिन किसी भी छोटे राजनीतिक वक्तव्य से मीडिया नैरेटिव बदल सकता है. विपक्ष के लिए यह दिन ‘पुराने घाव ताज़ा करने’ का अवसर है, जबकि सत्ता-पक्ष के लिए ‘संवाद बनाम टकराव’ का इम्तिहान.

14 नवंबर 2025 का यह दिन भारत की राजनीति के लिए सिर्फ पंचांग का अंक नहीं, बल्कि एक प्रतीक है आत्मविश्वास और सावधानी के संघर्ष का. सिंह राशि में बैठा चन्द्रमा कहता है ‘बोलो’, तुला राशि में नीच का सूर्य कहता है ‘संतुलित रहो’, और वक्री-गुरु चेतावनी देता है ‘पुराना हिसाब फिर खुलेगा.’ जो नेता इन तीनों संदेशों को समझ लेगा, वही टिकेगा. बाकी सब ग्रहों के खेल में उलझ जाएंगे क्योंकि राजनीति में भी और आकाश में भी, असंतुलन कभी स्थायी नहीं होता.

“By-Election Result Live: विधानसभा उपचुनाव में रोचक मुकाबला, पंजाब में SAD आगे कश्मीर में बीजेपी का जलवा, जानिए हर सीट का हाल”

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के साथ ही देशभर में हुए उपचुनावों पर भी सबकी नजरें टिकी हैं. राज्य की सभी 243 सीटों पर मतगणना जारी है और इसके साथ ही 7 राज्यों की 8 विधानसभा सीटों के नतीजे भी सामने आ रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर की बडगाम और नागरोटा, झारखंड की घाटशिला, मिजोरम की डंपा, ओडिशा की नुआपाड़ा, पंजाब की तरनतारण, राजस्थान की अंता और तेलंगाना की जुबली हिल्स सीट पर वोटों की गिनती जारी है. इन उपचुनावों के नतीजे न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं.

1″सीट आगे पीछे बडगाम नेशनल कॉन्फ्रेंस

पीडीपी नागरोटा बीजेपी नेशनल कॉन्फ्रेंस घाटशिला जेएमएम बीजेपी डंपा मीजो नेशनल फ्रंट जेपीएम नुआपाड़ा बीजेपी बीजेडी तरनतारण एसएडी आप अंता कांग्रेस निर्दलीय जुबली हिल्स कांग्रेस बीआरएस कश्मीर में बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस में मुकाबला जम्मू-कश्मीर की नगरोटा और बडगाम में विधानसभा उपचुनाव की मतगणना जारी है.

शुरुआती रुझानों में सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। इन दोनों सीटों पर 11 नवंबर को वोटिंग हुई थी. जम्मू-कश्मीर की दोनों विधानसभा सीटों पर मतगणना शुक्रवार सुबह 8 बजे शुरू हुई. नगरोटा विधानसभा क्षेत्र (एसी-77) में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त है, जबकि बडगाम विधानसभा क्षेत्र (एसी-27) में नेशनल कॉन्फ्रेंस आगे चल रही है.

“कांग्रेस की कमजोर पारी क्या महागठबंधन पर पड़ी भारी? नहीं चला राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ वाला दांव”

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बिहार विधानसभा चुनाव में बदलाव का दावा कर सत्ता में वापसी की आस लगाए तेजस्वी यादव को तगड़ा झटका लगा है.सीटों के बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने वाली कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर आगे है.

जबकि उसने 60 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसमें कई सीटों पर तो महागठबंधन के अंदर ही फूट पड़ गई और करीब 12 सीटों पर दोस्ताना लड़ाई देखी गई. विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ी थी और 19 सीटें ही जीत पाई थी.

तेजस्वी यादव की पार्टी राजद ने पिछली बार 74 सीटों पर विजय पताका फहराई थी और वो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. लेकिन इस बार वो रुझानों में खुद 36 पर आकर ठिठक गई है, जो पिछली बार के मुकाबले आधा है. डिप्टी सीएम का ख्वाब देखने वाले विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी भी एक सीट पर सिमटते दिख रहे हैं.

ये 5 बड़ी वजहें

जनता ने बीजेपी-जेडीयू सरकार के आखिरी महीनों में मिली सौगातों को हाथोंहाथ लिया. सवा करोड़ महिलाओं को एकमुश्त 10 हजार रुपये मिलना बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ.