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“बिहार की अर्थव्यवस्था किस मोड़ पर? विधानसभा नतीजों से पहले ऐसे हैं रोजगार और उद्योगों के हालात”

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बिहार आज चुनावी नतीजों का इंतजार कर रहा है, लेकिन इसी बीच एक और बड़ा सवाल है कि क्या नया नेतृत्व राज्य की औद्योगिक हालत और रोजगार के हालात में कोई ठोस बदलाव ला पाएगा? बिहार की अर्थव्यवस्था, पुरानी चुनौतियों, धीमी सुधार और नई उम्मीदों का एक मिला-जुला चित्र पेश करती है.

बिहार को लंबे समय तक ‘बीमारू’ राज्यों में गिना गया, और इसकी वजहें आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. राज्य की प्रति व्यक्ति आय अभी भी लगभग 60,000 रुपये ही है, जो देश के औसत का लगभग एक-तिहाई है. शहरीकरण भी केवल 12% है, जबकि देश में यह लगभग 36% है. इसका मतलब है कि आर्थिक अवसर कुछ चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित हैं, और ज्यादातर लोग ग्रामीण, कम आय वाले ढांचे में फंसे हुए हैं.

पुरानी औद्योगिक विरासत का बिखराव

कभी औद्योगिक जीवन से गुलजार इलाकों की हालत अब वीरान दिखती है. सारण जिले का मरहौरा इसका बड़ा उदाहरण है. यहां की प्रसिद्ध मॉर्टन टॉफी फैक्टरी, इंजीनियरिंग यूनिटें और चीनी मिलें अब बंद पड़ी हैं. स्थानीय लोग अब भी रोजगार की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं.

भागलपुर, जिसे कभी ‘भारत की रेशम राजधानी’ कहा जाता था, अब अपनी पुरानी चमक वापस पाने की जद्दोजहद में है. करीब 60,000 बुनकर आज भी काम कर रहे हैं, लेकिन व्यापार का आकार बढ़ नहीं पा रहा है. हालांकि नई एरी-सिल्क परियोजनाएं शुरू जरूर हुई हैं, लेकिन परिणाम धीमे हैं.

नए निवेश: उम्मीदें लेकिन सावधानी भी

हाल के वर्षों में सरकार ने कुछ महत्त्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाएं शुरू की हैं. पटना के बिहटा में खाद्य प्रसंस्करण और छोटे विनिर्माण यूनिटें खुल रही हैं, जिनसे कुछ सौ लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. वहीं गया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. 1,670 एकड़ में बन रही बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी में हजारों लोगों को रोजगार का अनुमान है. इसी तरह खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नई परियोजनाओं में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश प्रस्तावित है.

ऊर्जा और भारी उद्योगों में भी बड़े निवेश हो रहे हैं, जैसे भागलपुर में 2,400 मेगावाट का पावर प्लांट और नवादा में सीमेंट यूनिट जो आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर ला सकते हैं.

रोजगार तेजी से क्यों नहीं बढ़ पा रहा?

संख्या बताती है कि बिहार में बेरोजगारी कम हुई है, लेकिन असली समस्या ‘रोजगार की गुणवत्ता’ है. नियमित वेतन वाली नौकरियां बेहद कम हैं. अधिकतर लोग ऐसे कामों में लगे हैं जिनमें वेतन और सुरक्षा दोनों ही बेहद कम हैं. इसका सीधा मतलब है कि लोग काम तो कर रहे हैं, लेकिन बेहतर जीवन का सपना अभी भी दूर है. बिहार की युवा आबादी का बड़ा हिस्सा अपनी ही जगह पर बेहतर अवसरों का इंतजार करता रह गया है.

चुनावी नतीजों के बीच बड़ा सवाल

जैसे ही चुनावी नतीजों के बक्से खुलेंगे और नया नेतृत्व सामने आएगा, जनता की नजर सिर्फ विजेताओं पर नहीं होगी बल्कि इस बात पर होगी कि क्या वे बिहार के उद्योगों को नई रफ्तार दे पाएंगे. क्या पुरानी फैक्ट्रियां फिर से शुरू हो होंगी? और क्या युवा बिहार में ही रोजगार पाएंगे या पलायन जारी रहेगा?

“जम्मू-कश्मीर: पुलिस ने आतंकी उमर का घर किया ध्वस्त, दिल्ली ब्लास्ट के बाद एक्शन”

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देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार शाम करीब 7 बजे एक धमाका हुआ था. इस धमाके में कुल 13 लोगों की जान गई थी. पूरे मामले में जम्मू-कश्मीर के रहने वाले डॉ. उमर का हाथ सामने आया था. इस धमाके में वह खुद मारा गया है.

जांच एजेंसियों ने पाया है कि यह बहुत लंबे समय से इस धमाके की योजना बना रहे थे. धमाके के बाद जांच एजेंसियों ने कई एक्शन लिए हैं. इसी कड़ी में आतंकी उमर का घर भी गिरा दिया गया है.

लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने देशभर में छापेमारी की थी. इसमें सामने आया था कि आतंकी उमर ने ही पूरे धमाके को अंजाम दिया था. इसके साथ ही उनका ग्रुप पिछले 2 सालों से इस ब्लास्ट की योजना बना रहा था. पुलिस ने उमर के भाई और मां दोनों को हिरासत में भी लिया था.

उमर की मां ने पुलिस पूछताछ के दौरान बताया था कि उनको पता था कि उनका बेटा कट्टरपंथी बन चुका है. उनकी कई-कई दिनों तक उससे बात नहीं होती थी. धमाके से पहले भी उमर ने परिवार को कॉल न करने के लिए कहा था. हालांकि परिवार की तरफ से उमर की इन गतिविधियों की पुलिस को जानकारी पहले नहीं दी गई थी.

पुलवामा का रहने वाला था उमर

दिल्ली धमाके में पुलवामा के रहने वाले उमर मोहम्मद का नाम सामने आया था. जांच में ये भी पाया गया कि इस धमाके में उसकी भी मौत हो चुकी है. उमर मोहम्मद पेशे से एक डॉक्टर था. उमर जैश ए मोहम्मद के उस मॉड्यूल से जुड़ा था, धमाके से पहले ही पुलिस की तरफ से उमर की गैंग के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था. उनके पास से 2900 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था.

पुलिस फिलहाल उमर के सभी साथियों से पूछताछ करने में लगी हुई है. पता लगाया जा रहा है कि आखिर इनका कितना बड़ा प्लान था. इसके साथ ही ये भी पता करने की कोशिश की जा रही है कि ये लोग कहां-कहां धमाका करने की योजना बना रहे थे.

Bihar Chunav Party Wise Result 2025 Live Updates: रुझानों में बिहार चुनाव में BJP सबसे बड़ी पार्टी, NDA 180 पार, जनसुराज के खाते में एक भी नहीं”

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Bihar Vidhan Sabha Chunav Party Wise Result 2025: बिहार में कड़ी सुरक्षा के बीच 243 विधानसभा सीट के लिए मतगणना शुरू हो गई है. दो चरणों में हुए चुनाव के लिए 46 केंद्रों पर मतों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू हो चुकी है.

अभी तक की गिनती में एनडीए 193 सीटों पर और महागठबंधन 47 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इसके अलावा प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज सभी सीटों पर पीछे है.

चिराग पासवान 22 सीटों पर आगे हैं वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम 2 सीट से आगे चल रही है. बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में हुए वोटिंग हुई थी. इसमें 67.13 प्रतिशत वोटिंग हुई जो कि ऐतिहासिक है. इसमें कुल 7.45 करोड़ मतदाताओं ने 2,616 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला करने के लिए वोट डाला.

एक्जिट पोल में एनडीए सरकार!

अधिकांश एग्जिट पोल में जनता दल (यूनाइटेड) और बीजेपी गठबंधन (एनडीए) की बड़ी जीत का अनुमान लगाया है. तेजस्वी यादव ने इन अनुमानों को खारिज करते हुए कहा है कि महागठबंधन बड़ी बहुमत से सरकार बनाएगा.

कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर लड़ रही चुनाव?

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन इस बार पांच दलों के साथ मैदान में है. 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए बीजेपी और जेडीयू दोनों ही पार्टियों ने 101-101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 29 सीटों पर, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) 6-6 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं.

दूसरी ओर, महागठबंधन की ओर से आरजेडी 143 सीटों, कांग्रेस 61 सीटों, सीपीआईएमएल 20 सीटों, वीआईपी 13 सीटों, जबकि सीपीआई (एम) 4 और सीपीआई 9 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

वर्तमान बिहार विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक?

बिहार विधानसभा की वर्तमान संरचना पर नजर डालें तो बीजेपी 80 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. इसके बाद आरजेडी के पास 77 विधायक, जेडीयू के 45 विधायक और कांग्रेस के 19 विधायक हैं. वाम दलों में, सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के 11, सीपीआई (एम) के 2 और सीपीआई के भी 2 विधायक मौजूद हैं. इसके अलावा, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 4, एआईएमआईएम के 1 विधायक और 2 निर्दलीय सदस्य विधानसभा में शामिल हैं.

2020 में किसे कितनी सीटें मिली थीं?

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक मुकाबला काफी रोचक रहा था. उस चुनाव में बीजेपी ने 74 सीटें हासिल कर मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी, जबकि सहयोगी दल जेडीयू को 43 सीटें मिली थीं. दूसरी ओर, आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस के खाते में 19 सीटें आई थीं, जबकि बाकी दलों और निर्दलीयों ने मिलकर 32 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इन नतीजों ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरण खड़े कर दिए थे, जिनकी तुलना मौजूदा चुनाव से की जा रही है.

“Bihar Chunav Result, results.eci.gov.in LIVE Updates: BJP छोड़िए, अकेले JDU महागठबंधन पर पड़ रही है भारी”

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बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आज घोषित हो रहे हैं. पूरे राज्य में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रिकॉर्ड पांचवां कार्यकाल हासिल कर पाएंगे.

निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य के 38 जिलों में बनाए गए कुल 46 काउंटिंग सेंटरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में हुए चुनाव में 7.45 करोड़ मतदाताओं ने 2,616 उम्मीदवारों का भाग्य तय किया था.

लगभग सभी एग्जिट पोल ने जनता दल (यूनाइटेड) और बीजेपी के गठबंधन एनडीए की बड़ी जीत का अनुमान लगाया है. तेजस्वी यादव ने इन अनुमानों को खारिज करते हुए कहा कि महागठबंधन बड़ी बहुमत से सरकार बनाएगा. एनडीए में जनता दल-यूनाइटेड, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं.

वहीं, महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) शामिल हैं. दोनों गठबंधनों की ओर से मैदान में उतरे प्रमुख उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, आरजेडी के तेजस्वी यादव और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार शामिल हैं.

आज उपचुनाव के नतीजे भी घोषित हो रहे हैं. 8 सीटों पर वोट डाले गए थे.

“देश को मिलेगी 100 सैनिक स्कूलों की सौगात, गुजरात में अमित शाह का बड़ा ऐलान”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत देशभर में 100 सैनिक स्कूल स्थापित करने का फैसला किया है. श्री मोतीभाई आर चौधरी सागर सैनिक स्कूल (एमआरसीएसएसएस) और सागर ऑर्गेनिक प्लांट के उद्घाटन समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि ये स्कूल गुजरात के कई जिलों के बच्चों के लिए सशस्त्र बलों में सेवा करने का मार्ग खोलेंगे.

एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि श्री मोतीभाई आर चौधरी सागर सैनिक स्कूल (एमआरसीएसएसएस) का निर्माण 50 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है और यह स्मार्ट कक्षाओं, छात्रावासों, पुस्तकालय और कैंटीन जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है.

100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का निर्णय

विज्ञप्ति में अमित शाह के हवाले से कहा गया, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र ने पीपीपी मॉडल के तहत देशभर में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया है. इनमें से मोतीभाई चौधरी सैनिक स्कूल निश्चित रूप से मेहसाणा के लिए गौरव का प्रतीक बनेगा.

उन्होंने कहा कि अमूल ब्रांड के तहत विश्वसनीय जैविक उत्पादों की देश और दुनियाभर में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सागर ऑर्गेनिक प्लांट बहुत महत्वपूर्ण है और जैविक खेती में लगे सभी किसानों को उचित लाभ मिलता है. अमित शाह ने कहा कि लगभग 30 मीट्रिक टन की दैनिक क्षमता वाला यह संयंत्र राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) के तहत प्रमाणित है.

प्राकृतिक खेती में लगे किसानों को लाभ

एपीईडीए प्रमाणन के कारण, उत्तरी गुजरात में प्राकृतिक खेती में लगे किसानों को बहुत लाभ होगा क्योंकि उनकी उपज वैश्विक बाजारों तक पहुंच सकेगी. केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस जैविक संयंत्र के विस्तार से न केवल देशभर के नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि जैविक खेती से जुड़े किसानों की आय में भी वृद्धि होगी. उन्होंने जैविक खेती में लगे सभी किसानों और उनके परिवारों से स्वस्थ रहने के लिए जैविक उत्पादों का उपयोग करने का आग्रह किया.

अमित शाह ने कहा कि 1960 में दूधसागर डेयरी प्रतिदिन 3,300 लीटर दूध एकत्र करती थी, जो अब बढ़कर 35 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है. यह डेयरी गुजरात के 1,250 गांवों के पशुपालकों और राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के 10 लाख से अधिक दूध उत्पादन समूहों से जुड़ी हुई है.

नयी प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों का गठन

उन्होंने कहा कि इसका कारोबार 8,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. आठ आधुनिक डेयरियों, दो दूध शीतलन केंद्रों, दो पशु चारा संयंत्रों और एक सीमेंट उत्पादन इकाई के साथ, दूधसागर डेयरी आज गुजरात की श्वेत क्रांति में एक प्रमुख भूमिका निभा रही है. शाह ने कहा कि इस डेयरी की चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं, जिनमें देशभर में 75,000 नयी प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों का गठन भी शामिल है.

अमूल का 70 प्रतिशत कारोबार में महिलाओं का योगदान

उन्होंने कहा कि अमूल का 70 प्रतिशत कारोबार महिलाओं के योगदान से आता है. अमित शाह ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कहा कि इस साल गुजरात में बेमौसम भारी बारिश हुई. प्रभावित किसानों की मदद के लिए भूपेंद्र पटेल सरकार ने एक बहुत ही उदार राहत पैकेज की घोषणा की है. गुजरात सरकार ने संकल्प लिया है कि वह किसानों की मदद करने से पीछे नहीं हटेगी.

विधानसभा अध्यक्ष ने जनसमुदाय को दिलाया नशा मुक्त भारत का संकल्प…

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राजनांदगांव। देश के पहले उप प्रधानमंत्री भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर जिला मुख्यालय में यूनिटी मार्च का आयोजन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम अंतर्गत जन समुदाय को नशा मुक्त भारत का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर सांसद श्री संतोष पाण्डेय, महापौर श्री मधुसूदन यादव, अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती किरण वैष्णव, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, जनसमुदाय उपस्थित थे।

खेल गतिविधियों तथा अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में करेंगे बेहतर कार्य : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह…

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– आगामी जनवरी माह में अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन की तैयारी करने के दिए निर्देश

– जिले में 637 लाख रूपए की लागत से 4 लेन 800 मीटर सिथेटिंक एथलेटिक ट्रेक का किया जाएगा निर्माण

– जिले के विभिन्न संघ के प्रतिनिधियों से खेल गतिविधियों के संबंध में की गई चर्चा

– विधानसभा अध्यक्ष ने खेल गतिविधियों की समीक्षा बैठक ली

राजनांदगांव। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में खेल गतिविधियों की समीक्षा बैठक ली। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए विशेष तौर पर कार्य किए जा रहे है। हॉकी एवं झांकी राजनांदगांव का गौरव है। महंत राजा सर्वेश्वरदास स्मृति अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन आगामी जनवरी माह में अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम राजनांदगांव में कराएंगे। उन्होंने अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन के लिए आवश्यक अनुमति एवं सहमति की प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की यह प्रतियोगिता अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम या दिग्विजय स्टेडियम में होगा। इसके संबंध में निर्धारित समय में होने वाली तैयारी के दृष्टिगत निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दिग्विजय स्टेडियम में विद्युतीकरण सहित अन्य प्रस्ताव केन्द्र एवं राज्य स्तर पर विचाराधीन है, उन पर कार्य करते हुए बेहतर कार्य करेंगे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने जिले के विभिन्न संघ के प्रतिनिधियों से खेल गतिविधियों तथा अधोसंरचना को मजबूत करने के संबंध में चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्राप्त अतिरिक्ति सुझाव के संबंध में भी विचार किया जाएगा।

महापौर श्री मधुसूदन यादव ने कहा कि दिग्विजय स्टेडियम में विद्युतीकरण कार्य के लिए 6 करोड़ रूपए का प्रस्ताव लंबित है तथा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम राजनांदगांव में एस्ट्रोटर्फ रिप्लेस्मेंट कार्य के लिए 9 करोड़ 20 लाख रूपए की राशि प्रशासकीय स्वीकृति हेतु लंबित है। की गई चर्चा के अनुरूप इस दिशा में हरसंभव कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि खेल के आयोजन के लिए मैदान की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए दो मैदानों का चयन किया गया है। जिले में खेल विभाग, राजगामी संपदा, स्वेच्छा अनुदान के माध्यम से अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि खेलो इंडिया लघु सेंटर अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम राजनांदगांव में 35 बालक व 35 बालिका हॉकी खिलाड़ी प्रतिदिन प्रशिक्षण प्राप्त करते है। हॉकी नेशनल लेवल टूर्नामेंट 5 से 15 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित किया गया है। स्टेट स्कूल मैदान राजनांदगांव में प्रतिदिन 18 बालक एवं 20 बालिका व्हॉलीबॉल खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम राजनांदगांव में 12 बालक एवं 14 बालिका तीरंदाजी खिलाड़ी प्रतिदिन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। दिग्विजय स्टेडियम में बैंडमिंटन का 3 कोर्ट उपलब्ध है। जिसका नियमित अभ्यास हेतु उपयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में 637 लाख रूपए की लागत से 4 लेन 800 मीटर सिथेटिंक एथलेटिक ट्रेक का निर्माण किया जाना है। उन्होंने दिग्विजय स्टेडियम में मल्टीजीम रिपेरिंग कार्य, डी ब्लॉक में हाल निर्माण, बैडमेंटन कोर्ट में सिंथेटिक फ्लोर निर्माण कार्य सहित अन्य कार्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने जिले में खेल संभावनाओं के अंतर्गत बैडमिंटन एकेडमी, बाक्स क्रिकेट, स्कैटिंग रिंग का निर्माण, नवीन इंडोर स्टेडियम के निर्माण के संबंध में चर्चा की। कलेक्टर ने कहा कि जिले में बॉलीबाल एवं तीरंदाजी खेल की अच्छी संभावना है। इसके लिए विशेषज्ञ खिलाडिय़ों से प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकता है। इस अवसर पर श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री सचिन बघेल, श्री रमेश पटेल, श्री संतोष अग्रवाल, श्री सौरभ कोठारी, श्री रमेश डाकलिया, श्री फिरोज अंसारी, श्री भावेश बैद, पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा, अपर कलेक्टर श्री प्रेमप्रकाश शर्मा, श्री मृणाल चौबे, दिग्विजय स्टेडियम समिति के सदस्यगण, अन्य जनप्रतिनिधि एवं खिलाड़ी, कोच, विभिन्न खेल संघ के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकगण उपस्थित थे।

कृषि उपज मंडी का प्रांगण राजनांदगांव के विकास की पूंजी : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह…

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– विधानसभा अध्यक्ष ने आदर्श कृषि उपज मंडी समिति राजनांदगांव के अनाज एवं फल सब्जी मंडी में 1 करोड़ 33 लाख 36 हजार रूपए की लागत की बीटी रोड डामरीकरण कार्य का किया भूमिपूजन…

राजनांदगांव। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज आदर्श कृषि उपज मंडी समिति राजनांदगांव के अनाज एवं फल सब्जी मंडी में 1 करोड़ 33 लाख 36 हजार रूपए की लागत की बीटी रोड डामरीकरण कार्य का भूमिपूजन किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि आदर्श कृषि उपज मंडी में 6 करोड़ 49 लाख रूपए की लागत से निर्माण कार्य जारी है। इससे जिले के किसान, व्यापारी और नागरिक लाभान्वित होंगे। उन्होंने मंडी प्रांगण में सभी निर्माणाधीन कार्यों को निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने बताया कि आदर्श कृषि उपज मंडी में वर्षभर दोनों सीजन में धान खरीदी की जाती है और यहां सब्जी की भी मंडी है। प्रदेश में सर्वाधिक धान खरीदी में राजनांदगांव आदर्श कृषि मंडी की महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है। यह एक आदर्श कृषि उपज मंडी के रूप में है। इस मंडी में किसानों और व्यापारियों के लिए विश्राम गृह, मॉल, कपड़ा, राशन सहित सभी आवश्यकता वाली वस्तुएं बिक्री के लिए उपलब्ध है। वही मंडी प्रांगण में ट्रेक्टर से लेकर सभी प्रकार के कृषि उपकरण बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अच्छा उदाहरण है। जहां आने के बाद किसानों और व्यापारियों के लिए सभी आवश्यक वस्तुएं एक साथ उपलब्ध हैं। कृषि उपज मंडी का प्रांगण राजनांदगांव के विकास की पूंजी है। यहां आर्थिक रूप में बड़ा कार्य होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राजनांदगांव आदर्श रूप में उदाहरण बनेगा। उन्होंने कृषि उपज मंडी में चल रहे कार्यों को निर्धारित समय में और गुणवत्तापूर्ण तरीके से करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में किसी तरह का समझौता नहीं होनी चाहिए।

सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि कृषि उपज मंडी में आने के बाद किसान लाभान्वित होते हैं। किसानों के उद्देश्य की पूर्ति मंडी के अधिकारी-कर्मचारी करते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लाभ के लिए मंडी में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि सड़क का भूमि पूजन हुआ है, इसे अच्छी गुणवत्ता के साथ निर्माण करने कहा। कार्यक्रम को पूर्व उपाध्यक्ष कृषि उपज मंडी समिति श्री कोमल सिंह राजपूत ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महापौर श्री मधुसूदन यादव, अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती किरण वैष्णव, अध्यक्ष जनपद पंचायत श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री नीलू शर्मा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल श्री योगेशदत्त मिश्रा, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री खूबचंद पारख, श्री विनोद खांडेकर, श्री रामजी भारती, श्री सचिन बघेल, श्री रमेश पटेल, श्री संतोष अग्रवाल, श्रीमती गीता साहू, श्री सुरेश एच लाल, श्री सौरभ कोठारी, श्री भावेश बैद, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, कृषि उपज मंडी के अधिकारी-कर्मचारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, किसान एवं नागरिकगण उपस्थित थे।

छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा: छत्तीसगढ़ को मिलेंगे तीन पुरस्कार

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 छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ जिलासर्वश्रेष्ठ पंचायत और सर्वश्रेष्ठ संस्थान श्रेणी में मिलेगा सम्मान: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

 *राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों से 18 नवंबर 2025 को मिलेगा सम्मान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देने में छत्तीसगढ़ का योगदान महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर: केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने इन पुरस्कारों की घोषणा की। छत्तीसगढ़ को तीन राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए विभिन्न श्रेणियों में विजेता घोषित किया गया है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले को पूर्वी जोन में सर्वश्रेष्ठ जिला, कांकेर जिले की डूमरपानी ग्राम पंचायत को श्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में तीसरा स्थान तथा रायपुर के कृष्णा पब्लिक स्कूल को सर्वश्रेष्ठ स्कूल श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा।प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक प्रशस्ति पत्र, एक ट्रॉफी और कुछ श्रेणियों में नकद पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार, 2024 का पुरस्कार वितरण समारोह 18 नवंबर 2025 को प्रातः 11:30 बजे विज्ञान भवन, नई दिल्ली के प्लेनरी हॉल में आयोजित होगा। इस समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ को मिले तीन राष्ट्रीय जल पुरस्कारों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान राज्य के सतत जल संरक्षण और जनसहभागिता आधारित प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देने में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय कार्य किया है। राजनांदगांव, कांकेर और रायपुर के इन उदाहरणों ने यह सिद्ध किया है कि जब समाज, प्रशासन और संस्थान एक साथ कार्य करते हैं, तब जल संरक्षण एक जन-आंदोलन बन जाता है। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई दी और कहा कि राज्य सरकार हर जिले और पंचायत में जल संवर्धन के इस मॉडल को आगे बढ़ाएगी।

वर्ष 2018 से हुई शुरुआत – अब तक पाँच संस्करण आयोजित

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान प्रारंभ किया।

लोगों में पानी के महत्व के प्रति जागरूकता पैदा करने और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु वर्ष 2018 में राष्ट्रीय जल पुरस्कार की शुरुआत की गई थी। दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवें राष्ट्रीय जल पुरस्कार क्रमशः वर्ष 2019, 2020, 2022 और 2023 के लिए प्रदान किए गए। कोविड महामारी के कारण वर्ष 2021 में ये पुरस्कार नहीं दिए जा सके।

 साढ़े सात सौ आवेदनों में से केवल 46 का चयन

वर्ष 2024 के लिए छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय (एमएचए) के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर की गई थी। इस वर्ष कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए।

निर्णायक समिति द्वारा सभी आवेदनों की जाँच और मूल्यांकन किया गया। चयनित आवेदनों की जमीनी स्तर पर जाँच केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा की गई। जमीनी जाँच रिपोर्टों के आधार पर संयुक्त विजेताओं सहित कुल 46 विजेताओं को वर्ष 2024 के लिए 10 विभिन्न श्रेणियों में चयनित किया गया।

जल संरक्षण और कुशल प्रबंधन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना उद्देश्य

जल शक्ति मंत्रालय देश में जल के विकास, संरक्षण और कुशल प्रबंधन के लिए नीतिगत ढाँचा तैयार करने और कार्यक्रमों को लागू करने वाला केंद्रीय मंत्रालय है।राष्ट्रीय जल पुरस्कार, सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने हेतु व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों पर केंद्रित हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह आयोजन देशभर के नागरिकों और संस्थानों को जल संसाधन संरक्षण व प्रबंधन गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता और साझेदारी को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है।

उपराष्ट्रपति के हाथों मिला “ठाकुर प्यारे लाल सिंह राज्य अलंकरण पुरस्कार 2025” सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने दी बधाई…

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सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित हुई भखारा की प्राथमिक साख सहकारी समिति…

रायपुर: राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के समापन समारोह में उपराष्ट्रपति श्री सी पी राधाकृष्णन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य सहकारिता विभाग का सर्वोच्च सम्मान “ठाकुर प्यारे लाल सिंह पुरस्कार 2025” भखारा शाखा की प्राथमिक साख सहकारी समिति, डोमा को प्रदान किया गया। इस सम्मान को समिति के सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य, किसानों को सस्ती ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के योगदान के लिए दिया गया है।

इस उपलब्धि पर सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने समिति के सभी सदस्यों, संचालक मंडल तथा कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता को ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादन वृद्धि और किसानों की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण माध्यम मानती है। सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरक, बीज, आवश्यक कृषि साधन उपलब्ध कराकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं।

मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री सहकारिता योजनाओं की भावना के अनुरूप “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है। सहकारी समितियों को डिजिटल भुगतान, भंडारण सुविधा, प्रसंस्करण इकाइयों और बहुद्देशीय सेवाओं से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण विकास को गति मिले और किसानों व आमजनों को अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो।

उल्लेखनीय है कि पुरस्कार प्राप्त प्राथमिक साख सहकारी समिति, डोमा द्वारा बेहतर ऋण वितरण, समय पर वसूली और किसान हित में पारदर्शी कार्यप्रणाली को इस सम्मान का प्रमुख आधार माना गया है। इस अवसर पर सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, समिति सदस्य तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।