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MP : ओम्कारेश्वर बांध विस्थापितों को खेती योग्य जमीन देने के निर्देश

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भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में ओम्कारेश्वर बांध विस्थापितों के सम्बन्ध में नर्मदा बचाओ आन्दोलन की याचिका पर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है कि राज्य सरकार 3 महीने के अन्दर विस्थापितों को पुनर्वास के लिए खेती योग्य जमीन उपलब्ध कराए। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि विस्थापित मुआवजा व विशेष पैकेज का विकल्प लेता है तो सरकार को मुआवजे व पैकेज पर अतिरिक्त 90 ब्याज देना होगा। नर्मदा बचाओ आन्दोलन के कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है और सरकार से मांग की है कि जमीन के साथ पुनर्वास की अन्य सभी मागों को तत्काल पूरा किया जाए। इन सभी मांगों के साथ विस्थापित सैकड़ों की संख्या में 28 मार्च को राजधानी भोपाल में प्रदर्शन करेंगे।

खंडवा में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए नर्मदा आन्दोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता व आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने बताया कि ओम्कारेश्वर बांध विस्थापित गत 12 साल से नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में उन्होंने अपने अधिकारों के लिये तमाम धरने, प्रदर्शन, सत्याग्रह व जल सत्याग्रह किए और न्यायालय में भी लड़ाई लड़ी। सन 2008 में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने विस्थापितों को जमीन देने का आदेश दिया। परन्तु सरकार उसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील में चली गई। सन 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: जमीन देने का आदेश दिया और इस हेतु शिकायत निवारण प्राधिकरण के समक्ष जाने को कहा।

ओम्कारेश्वर बांध प्रभावित ग्राम घोघलगांव में सैकड़ों प्रभावितों ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे नर्मदा आन्दोलन की बड़ी जीत बताया है। साथ ही तय किया है कि जमीन के साथ पुनर्वास से जुड़े अन्य मुद्दे जैसे घर प्लाट, अनुदान आदि सभी को लेकर तत्काल सरकार से बात की जाएगी। सरकार यदि बात नहीं करती है तो 28 मार्च को राजधानी भोपाल में सैकड़ों विस्थापित प्रदर्शन करेंगे।

छत्तीसगढ़ : बसपा ने किया सरगुजा, रायगढ़ और दुर्ग सीट पर प्रत्याशियों का ऐलान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस लोकसभा चुनाव के लिए बसपा ने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी है। पहली सूची में जांजगीर-चांपा, बस्तर और कांकेर लोकसभा सीट की थी। दूसरी सूची में सरगुजा, रायगढ़ और दुर्ग सीट है।

बता दें की बहुजन समाज पार्टी के सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर आज बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने दूसरी सूची जारी की है। जिसमें सरगुजा अजजा माया भगत, रायगढ़ से अजजा इन्नोसेंट कुजूर और दुर्ग से गीतांजलि सिंह को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

LS Election 2019: RLD ने जारी किए तीन उम्मीदवारों के नाम, मुजफ्फरनगर से लड़ेंगे अजित सिंह

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के नाम तय होने और उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होना का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार को उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे राष्ट्रीय लोकदल ने अपने तीन उम्मीदवारों के नाम जारी किए हैं।

इस लिस्ट में पार्टी प्रमुख अजित सिंह के अलावा जयंत चौधरी और कुंवर नरेंद्र सिंह के नाम हैं। अजित सिंह जहां मुजफ्फरनगर से चुनावी मैदान में होंगे वहीं जयंत चौधरी बागपत से चुनाव लड़ेंगे। इनके अलावा रालोद के खाते में आई तीसरी सीट मथुरा से नरेंद्र चौधरी चुनाव लड़ेंगे।

बता दें कि राज्य में लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के गठबंधन के बाद इन दोनों दलों ने कांग्रेस को दरकिनार करते हुए रालोद को अपने गठबंधन का हिस्सा बनाया है। हाल ही में अखिलेश यादव और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने गठबंधन की घोषणा की थी।

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कमलनाथ सरकार को झटका, मप्र हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण पर लगाई रोक

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जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगा दी है। जस्टिस आरएस झा व संजय द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि 25 मार्च से होने वाली एमबीबीएस की काउंसिलिंग ओबीसी के 14 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर की जाएगी। जबलपुर निवासी असिता दुबे, भोपाल निवासी ऋचा पांडे और सुमन सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 16 में प्रावधान है कि एससीएसटी-ओबीसी को मिलाकर आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

वर्तमान में एससी को 16 प्रतिशत, एसटी को 20 और ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने 8 मार्च को अध्यादेश जारी कर ओबीसी का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढाकर 27 कर दिया, जो कि असंवैधानिक है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और डीएमई को भी नोटिस जारी किया है।

कांग्रेस के ओबीसी नेता लोकसभा चुनाव में अपनी प्रदेश सरकार के ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहे थे। वे अब लोकसभा चुनाव में भी आबादी के आधार पर अपने जीतने वाले नेताओं के लिए टिकट की दावेदारी में भी जुटे थे। हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक से उन्हें बड़ा झटका लगा है।

अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को कई लोग पहले ही गैरकानूनी बता चुके थे। इनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार 50 फीसदी से ज्यादा किसी भी सूरत में नहीं हो सकता है। प्रदेश में पहले से अनुसूचित जाति और जनजातियों को 36 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर कमलनाथ सरकार ने 27 प्रतिशत कर दिया गया।

छत्तीसगढ़ की तीन और संसदीय सीटों पर आज से नामांकन शुरू

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रायपुर। लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण के लिए मंगलवार को अधिसूचना जारी होने के साथ ही तीन संसदीय सीटों कांकेर, महासमुंद तथा राजनांदगांव के लिए मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के साथ ही दूसरे चरण में कांकेर, महासमुंद और राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।इस चरण के लिए नामांकन पत्र 26 मार्च तक जमा किये जा सकेंगे, नामांकन पत्रों की जाँच 27 मार्च को होगी वहीं 29 मार्च तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।

उन्होने बताया कि इस चरण के मतदान के लिए व्यापक तैयारियाँ की गई हैं। तीनों लोकसभा क्षेत्रों के 48 लाख 95 हजार 719 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। कुल मतदाताओं में 24 लाख 63 हजार 102 महिलाएं, 24 लाख 32 हजार 554 पुरुष तथा 63 तृतीय लिंग के मतदाता हैं। शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए 6484 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं।

छत्तीसगढ़ :हेल्थ स्कीम पर सियासत

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रायपुर । एम्स, मेडिकल कॉलेज और सैकडों पीएचसी, सीएचसी की बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, फिर भी स्वास्थ्य सेवाएं अगर वेंटीलेटर पर हैं तो आम जनता की चिंता बढ़ना लाजिमी है। राज्य की बड़ी आबादी के पास इतनी आर्थिक कूबत नहीं कि निजी अस्पतालों में इलाज का बोझ उठा सके।

गंभीर बीमारियों में सरकारी मदद के बिना उबर पाना गरीबों के लिए आसान कहां। योजनाएं बनती हैं लेकिन लाभ कितना हो पाता है, इसकी पोल जमीनी रिपोर्ट में खुलती रही है। स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाएं राहत तो लेकर आईं लेकिन कंपनियों पर लूट के आरोप भी चस्पा होते रहे।

अब भारत सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की है लेकिन यह योजना भी छत्तीसगढ़ में धरातल पर उतरने से पहले ही विवादों में आ गई। निजी चिकित्सकों और चिकित्सालयों ने योजना को खारिज कर दिया। राज्य में नवगठित कांग्रेस सरकार भी इस योजना के बदले दूसरी महत्वाकांक्षी योजना लाने का ताना-बाना बुन रही हैं।

पिछले दिनों राज्य के दौरे पर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्यों में कांग्रेस सरकार की नई स्वास्थ्य नीति की पुरजोर वकालत के साथ ही महत्वपूर्ण बात यह भी कही कि हेल्थ सेक्टर में बजट पर्याप्त होना चाहिए।

विसंगति यह भी कि छत्तीसगढ़ सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य का बजट घटा दिया है। स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। बड़ा मुद्दा यह कि अब सेहत पर सियासत में आम लोगों का क्या होगा….।।।

छह मेडिकल कॉलेजों को जरुरत पूरी करने में लगेंगे 22 साल

राज्य में अभी छह सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। हर वर्ष वहां से करीब 11 सौ डॉक्टर बन रहे हैं। ऐसे में डब्ल्यूएचओ के मापदंड के अनुसार डॉक्टरों की जरूरत पूरी करने में 22 वर्ष लग जाएंगे, लेकिन यह भी सच्चाई है कि यहां से पढ़ने के बाद ज्यादातर डॉक्टर निजी सेक्टर या दूसरे राज्यों में चले जाते हैं।

हर साल औसतन 50 लाख मरीज हर साल औसतन 50 लाख मरीज प्रदेश के अस्पतालों में पंजीकृत (ओपोडी रजिस्ट्रेशन) होते हैं। इनमें लगभग 41 लाख और करीब 12 लाख पुराने मरीज होते हैं। यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रह है।

भवन और उपकरण लेकिन चलाने वाले नहीं

राज्य में अस्पताल के नाम पर बड़े पैमाने पर भवन बना दिए गए हैं। वहां उपकरण भी उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन डॉक्टर और तकनीकी स्टॉफ नहीं है। इसका सबसे ज्यादा बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। आदिवासी क्षेत्रों से आज भी लोग बैगा गुनिया के पास जाते हैं।

बस्तर व सरगुजा संभाग में स्थिति दयनीय

बस्तर और सरगुजा संभाग की स्थिति सबसे खराब है। यहां पर डॉक्टरों के सेटअप के ही पद नहीं भरे जा सके हैं। डब्लूएचओ के मानक के अनुसार डॉक्टरों की उपलब्धता तो दूर की बात है। बस्तर संभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों के जहां 95 फीसदी पद खाली हैं, वहीं चिकित्सा अधिकारियों के 56 फीसदी पद रिक्त हैं। वहीं इन दोनों संभागों में दंत चिकित्सकों के कुल स्वीकृत 25 में से 24 पद यानी 96 फीसदी पद खाली हैं।

डेंटल में तो सबसे बुरा हाल

प्रदेश में डेंटल डॉक्टरों की भी भारी कमी है। यहां डेंटल की 91 फीसदी डॉक्टरों के पद खाली हैं। राज्य में डेंटल के कुल 112 पद स्वीकृत हैं, इनमें से केवल 10 पर ही दंत चिकित्सक पदस्थ हैं। शेष 102 पद खाली हैं। सबसे बुरा हाल बस्तर का है। यहां डेंटल के एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। बस्तर संभाग के 14 में से 14 पद और सरगुजा में 11 में से 10 पद खाली पड़े हैं, जबकि रायपुर संभाग में 69 में से 63 पद और बिलासपुर संभाग में 18 में से 15 पद खाली हैं।

छत्तीसगढ़ : कांग्रेस का पलटवार, केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा के बयान पर

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आरएसएस भाजपा है महिला विरोधी, तभी लागू नही हो सका महिला आरक्षण विधेयक बिल
रायपुर/18 मार्च 2019। केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि चोर को बचाने भाजपाई और किसका-किसका अपमान करेंगे? केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा जैसे छोटी सोच वाले दुर्योधन ने सिंहासन के लोलुप्ता में महाभारत काल में द्रोपती को अपमानित किया, रामायण काल में सीता माता का अपमान हुआ था। प्रियंका गांधी के साथ खड़ी हो रही जनसैलाब को देखकर भाजपा भयभीत है। आरएसएस ने भाजपा को महिलाओं का सम्मान करना नहीं सिखाया यही कारण है कि मोदी सरकार में महिला विधेयक बिल लागू नहीं हो सका।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा की केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा का बयान असंस्कृत स्तरहीन महिलाओं का अपमान करने वाला और महिला सशक्तिकरण के खिलाफ है। भाजपा सिर्फ महिलाओं के वोट बटोरने के लिए महिला सशक्तिकरण की बात करती है। जब महिलाएं घर से बाहर निकल कर नेतृत्व करने लगती है, तब भाजपा के नेता महिला नेतृत्व के सामने खुद को बौना महसूस करते हैं और भाजपा नेताओं को पुरुष होने के गुमान होने लगता है, अहंकार से ग्रसित भाजपा नेता महिलाओं के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी कर महिला नेतृत्व को अपमानित कर उसका उपहास उड़ाते हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि आरएसएस और भाजपा ने अपने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अब तक किसी महिला को नेतृत्व करने का अधिकार नहीं दिया है ना ही महिला के नेतृत्व को स्वीकार किया है। पुरुष प्रधान आरएसएस और भाजपा महिलाओं को लेकर हमेशा से निम्नस्तर की सोच रखा है। महिलाओं को लेकर कई बार भाजपा के नेता उटपटांग बयानबाजी किए हैं। बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले भाजपा के नेता उन्नाव और कटुआ में दुष्कर्म के आरोपी को बचाने तिरंगा लेकर निकलते है। हरियाणा के भाजपा अध्यक्ष का बेटा आईएएस अधिकारी के बेटी का पीछा करते हुये गिरफ्तार होता है। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान जांजगीर-चांपा में मोदी एवं चरोदा के महिला सम्मेलन में आए भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में महिलाओं के साथ जो दुर्व्यवहार की घटना हुई है महिलाओं के अंतःवस्त्रों को सुरक्षा के नाम पर चेक किया गया है। इसे छत्तीसगढ़ की महिलाये भूली नही है। भाजपा आरएसएस महिला सशक्तिकरण के विरोधी है। मोदी सरकार की विफलताओं को छिपाने के लिये निरंतर विपक्षी दल के महिला नेतृत्व में पर अशोभनीय टीका टिप्पणी कर रही है।

छत्तीसगढ़ : रमन सिंह के सांसद बेटे ने गोद लिया था ये गांव, अब ये है हकीकत

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राजनांदगांव। ग्राम भोथीपार खुर्द आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है। राजनांदगांव के सांसद अभिषेक सिंह ने जब इस गांव को गोद लिया तो गांववासियों ने कई सपने संजोए थे। उन्हें लगा कि अब उनके गांव की तस्वीर और तकदीर बदल जाएगी। जब गांव को गोद लिया गया तो घोषणा की गई थी कि भोथीपार जलाशय का गहरीकरण होगा, स्टेडियम और मंगल भवन निर्माण जैसी कई घोषणाएं भी हुईं, लेकिन इनमें से एक भी काम का श्रीगणेश नहीं हो पाया है। इसके चलते ग्रामीणों की आस टूट गई है।

पेयजल में भी कटौती

ग्रामीण हेमलाल साहू ने बताया कि पहले गांव में नल-जल योजना के तहत बनी पानी टंकी नहीं थी। इसके बाद भी गांव में सुबह-शाम चार-चार घंटे पानी मिलता था, लेकिन नल-जल योजना में पेयजल आपूर्ति तक में एक-डेढ़ घंटे ही पानी मिलता है। इससे ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

छह दशक से जलाशय की मांग अधूरी

1400 की आबादी वाले भोथीपार खुर्द में एक जलाशय है, जहां से आधा दर्जन से ज्यादा गांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। पिछले छह दशक से जलाशय का गहरीकरण नहीं हुआ है। सांसद ने इसके लिए दस लाख रुपए की घोषणा भी कर दी है, लेकिन घोषणा धरातल पर नजर नहीं आ रही है।

तालाब के पानी से हो रहा चर्मरोग

गांव में एक बड़ा तालाब है, जहां गांव के लोग निस्तारी करते हैं। पिछले डेढ़-दो साल से तालाब का पानी मटमैला हो गया है। हरे रंग के बदबूदार इस पानी में ही ग्रामीण निस्तारी को मजबूर हैं। गंदे पानी में निस्तारी से चर्मरोग की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

शौचालय अधूरे उज्ज्वला का भी लाभ नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव ओडीएफ हो चुका है, लेकिन आज भी कई घरों में शौचालय का काम अधूरा है। कई घरों में शौचालय के दरवाजे तक नहीं हैं। सांसद कार्यालय के साथ प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी बीपीएल परिवार के लोगों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन नहीं मिला है।

झाड़ियों में पट गया स्टेडियम

स्टेडियम के लिए गांव में एक बड़ा मैदान है, जिसे स्टेडियम के रूप में जीर्णोद्धार करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। खिलाड़ियों ने सांसद सिंह को भी इस मांग से अवगत कराया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। खेल आयोजन से पहले गांव के युवकों को ही झाड़ियों की सफाई करनी पड़ती है।

दो हिस्से में बंटी सड़क

गांव में सालभर पहले सीसी रोड का काम हुआ है, लेकिन सड़क दो टुकड़ों में बंट गई है। गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क भी जर्जर है। लंबे समय से सड़क मरम्मत की मांग करने के बाद भी ग्रामीणों की मांगें अधूरी ही हैं।

छत्तीसगढ़ : महिला नक्सली ढेर, हथियार बरामद

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राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में मप्र पुलिस, आईटीबीपी और बीएसएफ के ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत नक्सलियों के साथ चली मुठभेड़ में एक महिला नक्सली मारी गई है। मिली जानकारी के मुताबिक गातापार थाना क्षेत्र के घने जंगल में मुठभेड़ के बाद पुलिस ने एक वर्दीधारी महिला नक्सली का शव बरामद किया है। मृत महिला नक्सली के पास से हथियार व वायरलेस सेट भी बरामद हुआ है।

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जंगल में कुछ महिला नक्सली सक्रिय हैं। इसके बाद जब सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्चिंग अभियान शुरू किया तो महिला नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इस मुठभेड़ में एक महिला नक्सली मारी गई, जिसके बारे में फिलहाल विस्तृत जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।

छत्तीसगढ़ : भिलाई में स्थापित होगा रेलवे का सौर ऊर्जा आधारित पावर प्लांट

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बिलासपुर

आने वाले दिनों में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख कार्यालयों से लेकर रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा से जगमगाएगा। इसके लिए रेलवे प्रशासन ने भिलाई में सौर ऊर्जा आधारित पावर प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। राज्य शासन ने इस पर अपनी सहमति दे दी है । शासन से मिली मंजूरी के बाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का सोलर पावर प्लांट भिलाई में स्थापित होगा। रेल एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड दिल्ली और एसईसीआर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद अब कंपनी बहुत जल्द काम चालू करने वाली है।

कोयला आधारित बिजली घरों से महंगी बिजली खरीदने की एवज में हर माह भारी-भरकम बिजली बिल की राशि अदा करने के बाद हर महीने खर्च से बचने और अपना राजस्व बढ़ाने की कवायद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने शुरू कर दी है। तेजी से आधुनिकीकरण की पटरी पर दौड़ने की तैयारी कर रही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नई कवायद के रूप में अब सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में उतरने की तैयारी कर चुका है। भारतीय रेलवे की सहयोगी संस्था रेल एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड दिल्ली के साथ उसने एक करार पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उत्पादन के लिए सोलर पावर प्लांट लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। एसईसीआर के जोन मुख्यालय को प-ा भरोसा है कि यहां से बिजली उत्पादन के बाद अपने राजस्व में और वृद्घि कर सकेगा। करार के मुताबिक एसईसीआर ने रेल एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को भिलाई में सोलर पावर प्लांट स्थापना का प्रस्ताव दिया था, जिसे उसने मंजूर कर लिया है। एमओयू साइन किए जाने के बाद कंपनी बहुत जल्द पावर प्लांट स्थापना की तैयारी शुरू करने जा रही है।

प्रतिदिन होगा 50 मेगावाट बिजली का उत्पादन

एमओयू के मुताबिक रेल एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड अपने इस प्रस्तावित सोलर पावर प्लांट से रोज 50 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी। यह पूरी बिजली दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को दी जाएगी। अपने उपयोग के बाद बचने वाली बिजली एसईसीआर बाहर बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र होगी। करार के अनुसार पीपीपी मोड पर तैयार होने वाले इस सोलर पावर प्लांट की स्थापना और बिजली उत्पादन के पहले दिन से लेकर अगले 20 साल तक इस पावर प्लांट के प्रबंधन की जिम्मेदारी मूल कंपनी रेल एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की होगी। 20 साल बाद यह पावर प्लांट दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को सौंप दिया जाएगा।

इसलिए अपना पावर प्लांट

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे हर माह बिजली बिल के रूप में एक अच्छी खासी रकम बिजली कंपनी को बिजली बिल के रूप में अदा करता रहा है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर उसे बाहर से भी बिजली खरीदनी पड़ती है। सोलर पावर प्लांट की स्थापना के बाद जो बिजली उसे मिलेगी, उससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा जरूरत के बाद बची बिजली बाजार में बेची जा सकेगी।

वर्जन

एसईसीआर को सौर ऊर्जा आधारित पावर प्लांट स्थापना की मंजूरी मिल चुकी है। शासन स्तर पर मिली सहमति के बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

डॉ.संजय अलंग-कलेक्टर