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Lok Sabha Election 2019 : मध्यप्रदेश में भाजपा से आधा दर्जन उम्रदराज नेता दावेदार

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भोपाल

लोकसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा होते ही मध्य प्रदेश में अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि राजनीतिक दल लोकसभा सीटों पर किसे अपना उम्मीदवार बनाते हैं। भारतीय जनता पार्टी में उम्रदराज नेताओं की उम्मीदवारी को लेकर स्थिति साफ नहीं है। पार्टी की चुनाव समिति ने फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। इस बीच भाजपा से करीब आधा दर्जन उम्रदराज नेता अलग-अलग सीटों पर अपनी उम्मीदवारी के लिए दावा ठोंक रहे हैं। मप्र में चार चरणों में चुनाव होना है। इन नेताओं की मंशा पूरी होगी या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन एक बात तय है कि विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी उम्रदराज नेता पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे।

विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज पूर्व मंत्री सरताज सिंह ने भाजपा छोड़ कांग्रेस के टिकट पर व पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और दो सीटों पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ाई थीं। कांग्रेस सरकार बनने के बाद कुसमरिया उनके साथ हो गए। इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने पिछले दिनों कहा था कि वे पार्टी के सामने टिकट के लिए याचना नहीं करेंगे। पिछले चुनाव में मुझसे भी तैयारी के लिए कहा गया था पर बाद में मेरे साथ कपट किया गया था।

सुमित्रा महाजन

इंदौर से लगातार आठ बार की सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन नौंवी बार भी चुनाव लड़ने के मूड में हैं। पिछले महीने उन्होंने यह कहकर अपनी मंशा साफ कर दी थी कि इंदौर की चाबी अभी मैं ही संभालूंगी। इंदौर भाजपा में सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच अनबन जगजाहिर है। माना जा रहा है कि बेटे आकाश विजयवर्गीय को विधानसभा में भेजने के बाद वे खुद इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त 75 साल की सुमित्रा ताई ने संकेत दिए थे कि 2014 का चुनाव उनका आखिरी चुनाव होगा।

बाबूलाल गौर

अपने बयानों से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विधानसभा में अपनी बहू कृष्णा गौर को टिकट देने से संतुष्ट हुए बाबूलाल गौर अब पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। 88 साल के गौर कह चुके हैं कि कांग्रेस ने उन्हें भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे अटकलें लगाई जा रही थी कि गौर कांग्रेस में शामिल होंगे। हालांकि पार्टी के मनाने के बाद उन्होंने इस विषय पर बोलना तो बंद कर दिया, लेकिन पार्टी पर टिकट के लिए वे दबाव बना रहे हैं।

कुसुम महदेले

विधानसभा चुनाव में टिकट कटने से नाराज कुसुम महदेले अब खजुराहो लोकसभा चुनाव से टिकट मांग रही हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में उम्र के आधार पर ही पन्ना विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया था। इसके बाद उन्होंने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जताई। हालांकि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। 75 साल की महदेले ने पार्टी से कहा है कि उन्हें दमोह या खजुराहो से लोकसभा का टिकट दिया जाए।

जयंत मलैया

विधानसभा चुनाव हारे पूर्व वित्त मंत्री 71 वर्षीय जयंत मलैया भी दमोह लोकसभा सीट से दावेदारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है। हालांकि पार्टी ने यह तय नहीं किया है कि हारे हुए पूर्व मंत्रियों को लोकसभा का टिकट दिया जाएगा या नहीं। मलैया विधानसभा चुनाव में 798 वोट से हार गए थे। दमोह के मौजूदा सांसद प्रहलाद पटेल होशंगाबाद से चुनाव लड़ना चाहते हैं।

अंतर सिंह आर्य

विधानसभा चुनाव हारने के बाद पूर्व मंत्री अंतर सिंह आर्य खरगोन लोकसभा सीट से दावेदारी कर रहे हैं। 60 साल के आर्य को विधानसभा चुनाव में करीब 16 हजार वोट से हार मिली थी। पिछले लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपने बेटे को उम्मीदवार बनाने की पुरजोर कोशिश की थी। विधायक पद छूटने के बाद अब वे लोकसभा में जाना चाहते हैं। आर्य अपने मंत्री काल में विवादित बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं।

लक्ष्मीनारायण यादव

74 साल के सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव फिर चुनाव लड़ना चाहते हैं। हालांकि पार्टी ने उनके बेटे को सागर जिले की सुरखी विधानसभा से चुनाव लड़वाया था, लेकिन वे हार गए। उसके बाद से ही माना जा रहा था कि यादव अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन वे चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। इसके अलावा मंदसौर से 72 साल के रघुनंदन शर्मा भी लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।

प्रत्याशी तय करना केंद्रीय चुनाव समिति के अधिकार का विषय

लोकसभा सीट पर प्रत्याशी तय करना केंद्रीय चुनाव समिति के अधिकार का विषय है। समिति जीतने योग्य प्रत्याशी का ही चयन करती है और सारे मापदंड भी पार्टी की केंद्रीय समिति ही तय करेगी। – रजनीश अग्रवाल, प्रवक्ता, प्रदेश भाजपा

AAP ने किया भाजपा के घोषणा पत्र को जलाने का ऐलान

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लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है। बुधवार को जहां आम आदमी पार्टी (आप) बीजेपी का 2014 का घोषणा पत्र जलाने जा रही है, तो वहीं बोजेपी अरविंद केजरीवाल के वादों की होली जलाएगी।

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद विजय गोयल ने कहा है कि बीजेपी दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा चाहती है, लेकिन केजरीवाल जैसे अराजकतावादी सीएम होने के कारण ये संभव नहीं है।

दरअसल, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप काफी समय से दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग कर रही है। इसके लिए पार्टी ने हाल ही में कांग्रेस और बीजेपी दफ्तर का घेराव भी किया था। इसके चलते सियासत काफी गरम है।

इस बीच केजरीवाल की पार्टी आज बीजेपी के घोषणा पत्र को डीडीयू मार्ग पर जलाने जा रही है और इसके जवाब में बीजेपी जंतर-मंतर पर ‘आप’ के वादों की होली जलाएगी।

Ysms ऐप के जरिए लगातार संपर्क में थे पुलवामा हमले में शामिल आतंकी

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श्रीनगर। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला करने वाले आतंकी आदिल डार और इस साजिश में शामिल अन्य दहशतगर्द हमले से पूर्व आपस में वाईएसएमएस ऐप के जरिए लगातार संपर्क में थे। इस हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में स्थित बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के जिस कैंप को उड़ाया है। वहीं पर अल्फा-थ्री कंट्रोल रूम था।

अल्फा-थ्री में बैठे आतंकी सरगना ही पुलवामा हमले की साजिश को तैयार करने से लेकर उसे अमली जामा पहनाने तक कश्मीर में सक्रिय अपने कैडर को लगातार दिशा-निर्देश दे रहे थे। बताया जा रहा है कि एनआइए ने एक विदेशी जांच एजेंसी की मदद से वाईएसएमएस मैसेज डिकोड किए हैं। इसके बाद ही यह खुलासा हुआ है।

सूत्रों ने बताया कि आदिल डार और रविवार शाम को पिगलिश (त्राल) में मारा गया आतंकी मुदस्सर खान भी आपस में वाईएसएमएस के जरिए ही संपर्क में थे। हमले के चंद दिन बाद मारा गया पाकिस्तानी जैश कमांडर कामरान और गाजी रशीद भी इसी एप का इस्तेमाल कर रहे थे। एनआइए से जुड़े सूत्रों की मानें तो मुदस्सर और कामरान गाजी के ठिकानों से मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों से भी पता चला है कि सभी आतंकी वाईएसएमएस का ही इस्तेमाल कर रहे थे।

ऐसे काम करता है वाईएसएमएस

वाईएसएमएस पर कोई आडियो संदेश नहीं होता। इसके जरिए सिर्फ लिखा हुआ संदेश ही भेजा जा सकता है और यह पकड़ा नहीं जा सकता। यह सिर्फ उसी व्यक्ति तक पहुंचता है जिसके लिए यह हो। इसके लिए एक स्मार्ट फोन चाहिए, जिस पर यह एप डाउनलोड किया जाता है। इसके बाद एक वाईफाई की सुविधा वाला रेडियो सेट चाहिए, जो स्मार्ट फोन के साथ जुड़े।

फोन में सिमकार्ड के बिना ही रेडियो फ्रीक्वेंरी का इस्तेमाल करते हुए संदेश भेजा जा सकता है। इसके जरिए भेजा गया संदेश अगर किसी के हाथ लग भी जाए तो उसे डिकोड नहीं किया जा सकता।

अलकायदा करता रहा है इस्तेमाल

पुलवामा मामले की जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि वाईएसएमएस जैसे एप और संबंधित तकनीक 2012 से डार्क वेब पर उपलब्ध है। अलकायदा इसका इस्तेमाल 2007 से कर रहा है। जम्मू कश्मीर में पहली बार इसका खुलासा 2015 में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी सज्जाद अहमद से मिले मोबाइल फोन से हुआ था। लेकिन उसके कोड को डिकोड नहीं किया जा सका था।

अधिकारियों ने बताया कि पुलवामा हमले की जांच के दौरान वाईएसएमएस पर जैश आतंकियों द्वारा भेजे गए संदेश पकड़े गए हैं। उनमें से अधिकांश को डिकोड किया जा चुका है। इन संदेशों को डिकोड करने में किसी विदेशी एजेंसी के सहयोग पर चुप्पी साधते हुए सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि जो कुछ संदेश डिकोड किए गए हैं, उनमें से एक में जैश के आतंकियों के जनाजे का जिक्र है और एक अन्य में पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए लिखा गया है बड़ी संख्या में भारतीय फौजी मारे गए हैं। उनकी कई गाड़ियां तबाह हुई हैं।

इसके अलावा इन संदेशों के आधार पर यह भी पता चला है कि पुलवामा हमले की साजिश को बालाकोट स्थित जैश के अल्फा थ्री कंट्रोल रूम से ही संचालित किया जा रहा था। वहां बैठे कुछ आतंकी सरगनाओं को भी कश्मीर में पुलवामा हमले की साजिश से जुड़े आतंकियों ने इसी तकनीक के जरिए संदेश भेजे हैं।

Lok Sabha Election 2019 : ‘मसूद अजहर जी’ मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR

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मुजफ्फरपुर (बिहार)। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आतंकवादी मसूद अजहर को ‘मसूद अजहर जी’ पुकारना महंगा पड़ सकता है। बिहार के मुजफ्फरपुर में राहुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी की शिकायत पर देशद्रोह समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत यह केस दर्ज किया गया है।

मालूम हो, 12 मार्च को राहुल ने एक रैली में पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को ‘मसूद अजहर जी’ बोला था। राहुल गांधी के इस बयान पर सियासी घमासान मचा है।

राहुल गांधी सोमवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करते हुए वे भाजपा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान उन्होंने जैश-ए-मुहम्मद के सरगना को मसूद अजहर जी बोल दिया।

भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर राहुल के इस बयान को शेयर भी किया गया। भाजपा के ट्विटर लिखा गया है, ‘ देश के 44 वीर जवानों की शहादत के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना के लिए राहुल गांधी के मन में इतना सम्मान’!

छत्तीसगढ़ : एसपी ने और दूर फेंका, MLA के रिश्तेदार का ट्रांसफर कराना चाहते थे मंत्री लखमा

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रायपुर। बस्तर के बीजापुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेसी विधायक राजेंद्र पामभोई के चचेरे भाई सुरेंद्र पामभोई के ट्रांसफर के लिए मंत्री कवासी लखमा ने एसपी जितेंद्र शुक्ला को पत्र लिखा था। एसपी ने मंत्री के आदेश को मानने से इंकार ही नहीं किया, मंत्री की सिफारिश से बिफर कर पामभोई को और दूर घनघोर नक्सल थाने मरईगुड़ा भेज दिया।

यहीं से बस्तर के एकमात्र आदिवासी मंत्री लखमा और सुकमा के तत्कालीन एसपी जितेंद्र शुक्ला में ठन गई और आखिरकार शुक्ला को हटना पड़ा। मामला तब और गरमा गया जब शुक्ला ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर अपने स्थानांतरण को अप्रत्याशित बताया और देशभक्ति, नक्सल आदि के नाम पर भावनात्मक संदेश जनता को प्रसारित किया। उनके इस पोस्ट को सरकार की अवहेलना के तौर पर देखा जा रहा है।

मैं पांच बार का विधायक, मंत्री…मैं बाहरी हो गया

सुकमा एसपी शुक्ला के स्थानांतरण के बाद मचे विवाद के बीच ‘नईदुनिया” से बातचीत में मंत्री लखमा ने कहा मैंने पत्र लिखा क्योंकि पामभोई के रिश्तेदार की बात थी। वह सालों से फूलबगड़ी जैसे धुर नक्सल प्रभावित जंगल में पदस्थ था। अब हमारी सरकार है तो क्या हम उसे सड़क के किनारे के किसी थाने में नहीं ला सकते।

मैं उससे कभी नहीं मिला लेकिन जब पामभोई की बात आई तो पत्र लिखा। एसपी चाहते तो करते या न करते। कह देते कि अभी संभव नहीं है। लेकिन उन्होंने पत्र लिखा और उनकी भाषा देखिए। लिखते हैं कि बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप उचित नहीं है। मैं वहां से पांच बार का विधायक हूं। अभी राज्य सरकार में मंत्री हूं। मैं बाहरी हो गया। एसपी ने पामभोई को फूलबगड़ी से और दूर मरईगुड़ा भेज दिया।

गोडेलगुड़ा फर्जी मुठभेड़ के समय भी हुआ था टकराव

मंत्री लखमा ने बताया कि सुकमा जिले के गोडेलगुड़ा गांव में फोर्स ने 2 फरवरी को जंगल में लकड़ी लेने गई दो महिलाओं पर फायरिंग कर दी। एक महिला की मौत हो गई और दूसरी घायल। गांव वालों ने बताया कि जिस महिला की मौत हुई है उसके चार बच्चे हैं जिनमें एक तो आठ माह का ही है।

फर्जी मुठभेड़ में लीपापोती करने का प्रयास एसपी करते रहे। मैं पीड़ित परिवारों को सहायता देना चाहता था तो एसपी बोले-ऐसे तो फोर्स बदनाम हो जाएगी। मंत्री बनने के बाद भोजराजपदर गांव के लोग मेरे पास शिकायत लेकर आए थे कि उनके गांव के चार लोगों को पुलिस ने महीने भर से अवैध हिरासत मेें रखा है। उन्हें छोड़ने को कहा था लेकिन नहीं छोड़ा।

तो क्या अफसरशाही चलने दें

लखमा बोले देश में लोकतंत्र है। कोई राष्ट्रपति शासन नहीं लगा है। अफसर मनमानी नहीं कर सकते। आदिवासियों के अधिकारों का हनन यह सरकार नहीं होने देगी।

कौन हैं पामभोई

राजेंद्र पामभोई बीजापुर सीट से दो बार विधायक रहे। वे छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार के समय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रहे।

सोशल मीडिया पर लेटरवार

मंत्री लखमा और एसपी शुक्ला के बीच चला लेटरवार अब सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। मंत्री लखमा ने एसपी को दो लाइन का पत्र लिखा था। इसमें आदेश दिया गया था कि सुरेंद्र पामभोई को थाना छिंदगढ़ या तोकापाल का थाना प्रभारी बनाकर, कार्रवाई से अवगत कराएं।

इसके जवाब में एसपी शुक्ला ने लिखा-कानून व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपी की होती है, जो अपने अधीनस्थ थाना प्रभारियों के माध्यम से करता है। यह पुलिस अधीक्षक का विशेषाधिकार है कि किसे थाना प्रभारी नियुक्त करे या हटाए। एसपी के कार्य में किसी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप करना या प्रभाव डालना उचित नहीं है। इसलिए सुरेंद्र पामभोई को थाना प्रभारी बनाना उचित नहीं है।

शुक्ला के समर्थन में आए जोगी

उधर, सुकमा के पूर्व एसपी शुक्ला के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी खड़े हो गये हैं। जोगी ने राज्य सरकार की निंदा करते हुए ट्रांसफर उद्योग को बंद करने की मांग की है। जोगी ने कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर तबादले अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को व्यापक स्थानांतरण करके अनावश्यक मुसीबतों में डाला जा रही है। सोच समझकर जितने स्थानांतरण विभाग में आवश्यक होते हैं, उन्हें हरसंभव एक ही आदेश के द्वारा कार्यान्वित किया जाना चाहिये।

बदले की भावना से हो रहे तबादले : भाजपा

सुकमा के तत्कालीन एसपी शुक्ला को हटाने का मामला गरमाता जा रहा है। अब राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को घेरने की कोशिश की है। एक मंत्री को पत्र लिखने पर सुकमा के एसपी का तबादला किए जाने पर भाजपा ने दोहराया है कि प्रदेश सरकार प्रशासन को आतंकित कर अपनी मनमानी करना चाहती है।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि प्रदेश सरकार जिस तरह पुलिस प्रशासन को प्रताड़ित कर रही है, उससे यह साबित हो रहा है कि प्रदेश सरकार बदलापुर की राजनीति के अपने एजेंडे पर काम कर रही है। रोज-रोज पुलिस अधिकारियों का इस तरह तबादला करके प्रदेश के मुख्यमंत्री यह जाहिर कर रहे हैं कि सरकार चलाने कि उनमें समझ नहीं है।

कौशिक ने कहा कि थोक के भाव किए जा रहे तबादले पर भाजपा के विरोध को मानसिक दीवालियापन बताकर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा था कि किए जा रहे तबादले कोई दंड नहीं है। लेकिन सुकमा एसपी को स्थानांतरित करते हुए सीएम बघेल ने स्वीकार किया है कि मंत्री को पत्र लिखने के कारण दंडस्वरूप सुकमा के एसपी को हटाया गया है।

कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति इस बात की परिचायक है कि पुलिस प्रशासन के साथ-साथ अन्य विभागों में तबादले दंडस्वरूप ही किए गए हैं। घरघोड़ा के थाना प्रभारी का इस्तीफा प्रदेश सरकार के इसी अपमानजनक रवैए को रेखांकित करता है, जिसे सीएम बघेल के सिपहसालार झुठलाकर भ्रम फैला रहे हैं।

छत्तीसगढ़ : आज किसान कांग्रेस बनाएगी रणनीति

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रायपुर। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के ‘मिशन-11″ को पूरा करने के लिए पार्टी के सभी मोर्चा-संगठन अपनी कमर कस रहे हैं। सभी को अपने-अपने वर्ग के वोट बैंक को फोकस करने के लिए कहा गया है। किसान बड़ा वोट बैंक है, जिस पर सभी राजनीतिक दलों की नजर है।

इस कारण किसान कांग्रेस पर बड़ी चुनौती है कि वह किसानों के वोट को कांग्रेस की झोली में कैसे लाए? इसकी रणनीति बनाने के लिए बुधवार को किसान कांग्रेस की बैठक रखी गई है, जिसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे और किसान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी एक कोद्दना रेड्डी भी शामिल होंगे।

विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने किसानों से वादा किया था कि सरकार बनते ही 10 दिन के भीतर किसानों का कर्जमाफ कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ लेने के बाद दो घंटे के भीतर मंत्रिमंडल की बैठक में कर्जमाफ का प्रस्ताव पास कर दिया था। अब सरकार और कांग्रेस का दावा है कि 19 लाख किसानों को 11 हजार 270 करोड़ कर्जमाफ किया है। इसमें पांच हजार करोड़ व्यवसायिक बैंकों का कर्ज है।

कर्जमाफी की घोषणा तो हो गई है, लेकिन अभी शत-प्रतिशत किसानों तक कर्जमाफी का प्रमाणपत्र नहीं पहुंचा है। भाजपा इसे ही मुद्दा बनाकर कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ने की कोशिश करेगी। किसान कांग्रेस ने तय किया है कि प्रमाणपत्र के वितरण की निगरानी की जाए, ताकि भाजपा अपने मिशन में सफल न हो पाए।

बुधवार को दोपहर तीन बजे राजीव भवन में होने वाली बैठक में इस पर भी बात होगी। किसान कांग्रेस किसान वोट बैंक को साधने के लिए किसानों के बीच जाएगी और प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र में अब तक जो भी काम किए हैं, उनका प्रचार-प्रसार भी करेगी। बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर शुक्ला के साथ सभी प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष भी उपस्थित रहेंगे।

एक्शन प्लान और जिम्मेदारी पर होगी बात

बैठक में लोकसभा चुनाव के लिए किसान कांग्रेस के एक्शन प्लान की समीक्षा होगी। बूथ, ब्लॉक, जिला और प्रदेश कमेटी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। अब तक चुनाव को लेकर जिला और ब्लॉक कमेटी ने जो काम किए, उसकी समीक्षा की जाएगी। शक्ति प्रोजेक्ट से किसानों को जोड़ा जा रहा है, उसकी जानकारी ली जाएगी। संकल्प शिविर में किसान कांग्रेस की भागीदारी की समीक्षा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ : मासूम को घर में घुसकर जिंदा जलाया, भाजयुमो प्रदेशभर में करेगी आंदोलन

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रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विजय शर्मा ने बेमेतरा जिले के बेरला थाना क्षेत्र के ग्राम सांकरा में 6 मार्च को 10 साल की मासूम बच्ची प्राची साहू पर मिट्टी तेल डालकर जलाने पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। शर्मा ने कांग्रेस सरकार में बदतर हुई कानून व्यवस्था का नमूना करार देते हुए कहा कि जहां एक ओर अपराधी सत्ताधारी दल के संरक्षण में कानून के रक्षकों पर गुंडागर्दी कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर जंगल राज जैसी नौबत आ गई है। सांकरा की घटना इसी अराजकता की बानगी है। अपराधी तत्वों को किसी प्रकार का भय नहीं रह गया है। कांग्रेस की सरकार ने कानून व्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतार कर रख दी है।

मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के गृह जिले में अपराधों की झड़ी लगने के साथ ही बेमेतरा जिले में हाल ही हुई आग लगाकर जिंदा जलाने की कोशिश बता रही है कि कांग्रेस की सरकार छत्तीसगढ़ को किस दिशा में ले जा रही है।

शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके तमाम मंत्रियों का ध्यान सिर्फ इस पर है कि उनके हिसाब से कठपुतली की तरह नाचने वाले अफसर प्रोत्साहित किए जायें। जो अफसर अपने कर्तव्य को प्रधानता दें, उन्हें प्रताड़ित किया जाये।

आबकारी मंत्री कवासी लखमा के इशारे पर नाचने से इंकार करने पर सुकमा के पुलिस अधीक्षक को हटाया जाना, यह साबित कर रहा है कि भूपेश सरकार प्रदेश की कानून व्यवस्था से किस तरह अपने हित में खिलवाड़ कर रही है। कांग्रेस की सरकार आते ही दो माह में छत्तीसगढ़ में कानून का राज दम तोड़ता नजर आ रहा है।

अपराधी तत्वों के हौसले यहां तक बढ़ गए है कि एक निर्वाचित ग्रामीण जनप्रतिनिधि के सूने घर में घुसकर उसकी नन्ही बधाी को जिंदा जलाने का जघन्य कृत्य किया गया। शर्मा ने कहा कि इस मामले में लीपापोती नहीं करने दी जाएगी।

अगर वास्तविक अपराधी की पतासाजी, गिरफ्तारी और अपराध के पीछे की मंशा का जल्द ही पर्दाफाश नहीं किया गया तो भाजयुमो पूरे प्रदेश में तीव्र आंदोलन करेगा और गुंडाराज के खिलाफ सड़क पर संघर्ष किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ : सात बार के सांसद रमेश बैस, ट्वीटर पर फालोअर सिर्फ पांच

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा की चुनावी जंग सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही है, लेकिन भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और सांसद विक्रम उसेंडी को ट्वीटर पर सिर्फ 340 लोग ही फालो करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सभी सांसदों को सोशल मीडिया में एक्टिव रहने का निर्देश दिया था। उसके बाद भी प्रदेश के सांसद ट्वीटर पर न तो रिट्वीट करते हैं, न ही उनके फालोअर की संख्या है। चौंकाने वाली बात यह है कि सात बार के रायपुर लोकसभा से सांसद रमेश बैस को ट्वीटर पर सिर्फ पांच लोग फालो करते हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रियता में अभिषेक सबसे आगे

पिछले लोकसभा चुनाव में करीब दो लाख वोट से जीत दर्ज करने वाले बिलासपुर सांसद लखनलाल साहू को 2352 लोग फालो करते हैं। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री विष्णुदेव साय को पांच हजार 105 लोग फालो कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रियता के मामले में राजनांदगांव सांसद अभिषेक सिंह सबसे आगे हैं।

अभिषेक न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के ट्वीट को रिट्वीट करते हैं, बल्कि उनके फालोअर भी 46 हजार से ज्यादा हैं। बस्तर और सरगुजा के आदिवासी सांसद सोशल मीडिया की दौड़ में काफी पीछे हैं। बस्तर सांसद दिनेश कश्यप का कोई आधिकारिक ट्वीटर अकाउंट नजर नहीं आ रहा है।

सरगुजा सांसद कमलभान सिंह को सिर्फ 723 लोग फालो कर रहे हैं। मैदानी इलाके के सांसद भी सक्रियता के मामले में काफी पीछे हैं। महासमुंद लोकसभा सांसद चंदूलाल साहू के दो हजार 18 फालोअर हैं। प्रदेश की एकमात्र महिला सांसद कमला पाटले भी सोशल मीडिया में लोकप्रियता की दौड़ में काफी पीछे हैं। कमला को 1212 लोग फालो करते हैं।

राज्यसभा सांसदों में सरोज सबसे लोकप्रिय

राज्यसभा सांसदों में सरोज पांडेय सबसे लोकप्रिय हैं। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव सरोज को ट्वीटर पर 56 हजार लोग फालो करते हैं। वहीं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविचार नेताम को आठ हजार 667 लोग फालो करते हैं। वहीं, दिग्गज भाजपा नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के भतीजे रणविजय सिंह जूदेव को सिर्फ 538 लोग फालो करते हैं।

कांग्रेस सांसद ताम्रध्वज के 1235 फालोअर

प्रदेश में कांग्रेस के एकलौते सांसद और प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट करते हैं, लेकिन उनके फालोअर की संख्या काफी कम है। मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल रहे ताम्रध्वज के सिर्फ 1235 फालोअर हैं। ताम्रध्वज के पास पीडब्ल्यूडी, पर्यटन और संस्कृति विभाग का जिम्मा है।

छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की खुशियों पर लोकसभा चुनाव 2019 के लिए लगी आदर्श आचार संहिता ने ग्रहण लगा दिया है.

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छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों की खुशियों पर लोकसभा चुनाव 2019 के लिए लगी आदर्श आचार संहिता ने ग्रहण लगा दिया है. आचार संहिता की वजह से अब मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत मई तक विवाह नहीं होगा. अब शादी का सपना संजोने वाले वर वधुओं व परिजन निराश हैं. प्रशासन इसे नियमों की मजबूरी बता रहा है और आचार संहिता के बाद शादी के आयोजन की बात कह रहा है.

छत्तीसगढ़़ में 15 वर्षों बाद सत्ता परिवर्तन हुआ. मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना की राशि 11 हजार रुपये से बढ़ा कर अब 25 हजार रुपये कर दी गई है. कांग्रेस सरकार बनने के बाद शासकीय योजना के तहत राज्य में 4500 जोड़े विवाह बंधन में बंध चुके हैं. हालांकि, विभाग ने टारगेट पूरा कर लिया है, मगर कई निर्धन ऐसे हैं, जिनके सपनों पर पानी फिर गया वजह है आदर्श आचार संहिता. अब लोग इसे नियमों से परे रखने की मांग कर रहे हैं. रामकृष्ण कश्यप का कहना है कि इस तरह की योजनाएं गरीबों को राहत देने के लिए हैं. इन्हें चुनाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए और चुनाव का प्रभाव इन योजनाओं पर नहीं पड़ना चाहिए.

जिलेवार राज्य के महिला एव बाल विकास विभाग को 125 विवाह कराए जाने का लक्ष्य दिया गया था. राजधानी रायपुर में लक्ष्य से तीन गुना अधिक विवाह हुआ. वर्ष 2018 में 324 शादियां शासकीय योजना के तहत हुईं. वहीं नए सरकार बनने के बाद 417 विवाह हुए हैं. 11 हजार की राशि को बढ़ा कर 25 हजार रुपये कर दिया गया है. मगर अब तक बढ़े हुए दर नहीं मिल रहा है.

भारतीय जनता पार्टी आदर्श आचार संहिता और योजना के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगा रही है. भाजपा नेता सत्यम दुआ का कहना है कि छत्तीसगढ़ की जनता को कांग्रेस ने छला है. कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग के प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि आम जनता और गरीबों की चिंता है तो निर्वाचन आयोग को पत्र लिख कर योजना की राशि जारी करने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया जाना चाहिए. बहरहाल कई ऐसी योजना है जिस पर आदर्श आचार संहिता की वजह से ग्रहण लग गया है. अब जरुरतमंदो को मई तक का इंतजार करन पड़ेगा.

आचार संहिता लागू, PMO समेत कई सरकारी वेबसाइटों ने PM और मंत्रियों की हटाई तस्वीरें

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संहिता में कहा गया है कि केंद्र या राज्यों में सत्ताधारी दल को सुनिश्चत करना चाहिए कि वह प्रचार के लिए अपने आधिकारिक पदों का इस्तेमाल नहीं करे.

नई दिल्ली: आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कई सरकारी वेबसाइटों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की तस्वीरें हटा दी है लेकिन कुछ मंत्रालयों में अभी इसका पालन नहीं किया है. लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से शुरू होगा और चुनाव की तारीखों की घोषणा का मतलब है कि तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है. प्रक्रिया पूरी होने तक यह जारी रहेगी. संहिता में कहा गया है कि केंद्र या राज्यों में सत्ताधारी दल को सुनिश्चत करना चाहिए कि वह प्रचार के लिए अपने आधिकारिक पदों का इस्तेमाल नहीं करे.

मंत्री और अन्य सरकारी प्राधिकार किसी भी रूप में वित्तीय आवंटन की घोषणा नहीं कर सकते. पार्टी के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी भी परियोजना या कार्यक्रम की घोषणा नहीं की जा सकती और मंत्री चुनाव प्रचार के मकसद से सरकारी तंत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकते. कैबिनेट सचिव और राज्यों के मुख्य सचिवों को एक पत्र में चुनाव आयोग ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा था कि सरकारी बेबसाइटों पर राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरें तत्काल हटा लिए जाएं.

पीएमओ बेबसाइट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटा दी है और पत्र सूचना कार्यालय ने भी ऐसा ही किया है. लेकिन, कानून मंत्रालय की वेबसाइट पर विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद, राज्य मंत्री पी पी चौधरी की तस्वीरें और प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ का भी लिंक बना हुआ है.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट का भी यही हाल है. इस पर मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और राज्य मंत्री वीरेंद्र कुमार की तस्वीरें दिख रही है.