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छत्तीसगढ़ : अफवाह निकली SI व शिक्षक की हत्या, नक्सलियों ने किया रिहा, ये थी साजिश

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दंतेवाड़ा। अरनपुर थाना इलाके से सब इंस्पेक्टर ललित कश्यप और अतिथि शिक्षक जयसिंह कुरेटी अपहरण के बाद एक हत्या की खबर अफवाह साबित हुई। एएसपी सूरज परिहार ने बताया कि नक्सलियों ने आज सुबह 5ः00 बजे सुरक्षित छोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि लगभग 40 से 50 ग्रामीणों की मदद से सब इंस्पेक्टर ललित कश्यप और अतिथि शिक्षक जयसिंह कुरेटी को छुड़ाया गया। फिलहाल सब इंस्पेक्टर और शिक्षक कहां है। इसकी जानकारी अधिकारी नहीं दे रहे हैं।

इतना जरूर कहा जा रहा है कि दोनों सुरक्षित हैं और शाम तक सब क्लियर हो जाएगा। कहा जा रहा है कि हत्या की अफवाह नक्सलियों ने फैलाई थी, ताकि पुलिस की टीम पहुंचे और नक्सलियों के एम्बुश में फंस जाए, जिससे नक्सली बड़ी घटना को अंजाम दे सकें।

छत्तीसगढ़ : शिक्षक ने किया स्कूली छात्रा से छेड़छाड़

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राजनांदगांव । जिले में एक स्कूली छात्रा के साथ फिर छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव जिले के ही बिरेझर गांव में एक स्कूल शिक्षक द्वारा स्कूली छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की शिकायत लगातार मिल रही थी।

मंगलवार को भी जब ऐसा ही एक मामला सामने आया तो स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। ग्राम बिरेझर के प्रायमरी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा से सहायक शिक्षक नवीन कुमार मलिआर्य ने छेड़छाड़ की।

जब इस बात की जानकारी ग्रामीणों को मिली तो उन्होंने स्कूल को घेर लिया और जमकर हंगामा किया। सोमनी पुलिस ने पीड़ित बच्ची का भी बयान दर्ज कर लिया है और आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।

 

Shajapur: टक्कर से लोडिंग जीप के हो गए ये हाल

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शाजापुर। एबी रोड पर डिपो के सामने मंगलवार सुबह 9 बजे जेसीबी लेकर जा रहे एक ट्राले ने लोडिंग जीप को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जीप के परखच्चे उड़ गए। जीप में सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के बाद एबी रोड पर जाम लग गया। यातायात पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम को खुलवाया। घटना में दो बाइक भी ट्राले की चपेट में आ गई थी।

छत्तीसगढ़ : बदल रही है कांग्रेस, जिसे नहीं देख पाए राजनीतिक विश्लेषक

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कांग्रेस सोशल जस्टिस और ओबीसी की ओर करवट ले रही है. अगर आप कांग्रेस को गौर से देख रहे हैं तो ये आपको आसानी ने नजर आ जाएगा. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों को ये बदलाव नजर नहीं आया, क्योंकि ये बेहद चुपचाप हुआ है. सबसे पहले इन बिंदुओं पर विचार करें.

1- कांग्रेस ने अपने इतिहास में पहली बार ओबीसी डिपार्टमेंट बनाया है, इसका उद्घाटन स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किया. इस डिपार्टमेंट के अध्यक्ष कांग्रेस के सांसद रहे ताम्रध्वज साहू हैं, जो अब छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री भी हैं.

2- कांग्रेस की इस समय जिन राज्यों में सरकार है उनमें से पुद्दुचेरी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ओबीसी के मुख्यमंत्री हैं. पंजाब में जाट मुख्यमंत्री हैं. मध्य प्रदेश में खत्री मुख्यमंत्री हैं, लेकिन मध्य प्रदेश कैबिनेट में 10 मंत्री ओबीसी हैं. जबकि सिर्फ दो मंत्री ब्राह्मण हैं. कर्नाटक में भी इससे पहले ओबीसी के सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे. कर्नाटक के कांग्रेस समर्थित मुख्यमंत्री भी ओबीसी हैं.

3- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घोषणा की है कि राज्य में जो ओबीसी आरक्षण अब तक 14 परसेंट था, उसे बढ़ाकर 27 परसेंट किया जाएगा और इसे अध्यादेश लाकर लागू भी कर दिया.

4- कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले दिनों ये बयान दिया कि वे कुर्मी जाति के हैं. कांग्रेस में इसकी होड़ लगी हुई है.

5- कांग्रेस का 2019 का घोषणा पत्र बनाने के क्रम में जिन मसलों पर अलग अलग उपसमितियां विचार कर रही हैं, उनमें से एक उपसमिति ओबीसी मामलों की भी है.

6- जब कोर्ट ने यूनिवर्सिटी में टीचर पदों पर नियुक्ति के लिए अब तक लागू रोस्टर को निरस्त करने का फैसला किया तो राहुल गांधी ने ट्वीट करके लिखा कि कांग्रेस एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण के पक्ष में है और पुराना रोस्टर बहाल होना चाहिए.

7- रोस्टर मुद्दे पर 5 मार्च को हुए भारत बंद का कांग्रेस एससी सेल, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने समर्थन किया.

8- कांग्रेस ने एक ओबीसी केशव चंद यादव को यूथ कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है.

9- राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ओबीसी जातियों के तीन दलों- महान दल, निषाद पार्टी और अपना दल के किसी एक हिस्से के साथ तालमेल करने जा रही है.

कांग्रेस का बेशक अब तक क्लेम रहा है कि देश के हर तबके की पार्टी है, लेकिन व्यवहार में इसका नेतृत्व हमेशा से सामाजिक इलीट के हाथ में रहा है. प्रतीक के तौर पर बेशक इसका अध्यक्ष किसी भी जाति से हो लेकिन इसकी अपनी सत्ता संरचना हमेशा से सवर्ण हिंदू पुरुषों की तरफ झुकी रही है. इस संरचना के साथ कांग्रेस अलग अलग सामाजिक-धार्मिक-जातीय समूहों को जोड़कर सत्ता का समीकरण बनाती रही है.

आजादी के समय तो तमाम समूह इससे जुड़े थे, लेकिन जब प्रतियोगी राजनीति शुरू हुई तो किसान और पिछड़ी जातियां तथा राजा-महाराजाओं का एक समूह इससे अलग हो गया. पिछड़ों का बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय दलों और समाजवादी विचारधारा वाली पार्टियों के साथ चला गया. उसी समय कांग्रेस ने ब्राह्मणों के नेतृत्व में दलितों और मुसलमानों को जोड़कर एक समीकरण बनाया, जो लंबे समय तक असरदार था. कांशीराम के बहुजन आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश में दलितों ने अपना नया ठिकाना खोज लिया, तो बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुसलमानों का कांग्रेस पर से भरोसा टूटा और वे तमाम तरह के विकल्प आजमाने लगे. लेकिन इस दौर में भी कांग्रेस का ब्राह्मण और सवर्ण कोर बचा रहा.

इसमें सबसे बड़ी दरार बीजेपी ने डाली है. राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व के सवाल पर अक्रामक राजनीति करके बीजेपी ने कांग्रेस के इस सवर्ण ब्राह्मण केंद्रित कोर को तोड़ लिया है. इन वोटों की सबसे बड़ी दावेदार अब बीजेपी है. कांग्रेस ने इसी बीच 1993 में मंडल कमीशन की सिफारिश को मानते हुए केंद्र सरकार की नौकरियों में 27 परसेंट ओबीसी आरक्षण लागू कर दिया. 2006 में ओबीसी आरक्षण केंद्र सरकार के शिक्षा संस्थानों में लग गया. इससे कांग्रेस से जुड़े सवर्ण छिटक गए.

कांग्रेस की समस्या यह है कि सवर्ण और उसमें भी मुख्य रूप से ब्राह्मण उसे वोट नहीं देते लेकिन पार्टी वही चला रहे हैं. अब अगर कांग्रेस चाहे कि ब्राह्मण उसके पास लौट आए, तो ये आसान नहीं है. बीजेपी ने 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण देकर सवर्णों को और मजबूती से जोड़ लिया है. वह एससी-एसटी-ओबीसी हितों के खिलाफ जितना काम करती है, उसका सवर्ण वोट और मजबूत होता है. भाजपा ये इसलिए कर पा रही है क्योंकि हिंदुत्व या सीमा पर तनाव का मुद्दा उठाकर वो एससी-एसटी-ओबीसी के एक हिस्से को जाति से ऊपर लाकर अपने साथ जोड़ लेती है.

इसके अलावा बीजेपी ने 90 के दशक में सोशल इंजीनियरिंग करके राज्यों की कमान ज्यादातर ओबीसी नेताओं को सौंप दी. हालांकि पार्टी संगठन पर आरएसएस और ब्राह्मण नेताओं का कंट्रोल वहां बना हुआ है. अब तो उसने एक ऐसे आदमी को प्रधानमंत्री बना दिया है, जो बार-बार ये दावा करते हैं कि वो पिछड़ी जाति के हैं.

कांग्रेस का रास्ता कठिन है. वह बीजेपी जितनी अक्रामक सांप्रदायिक राजनीति अब कर नहीं पा रही है. लेकिन सामाजिक न्याय की ओर उसका आना भी आसान नहीं है. अगर वो इन वंचित जातियों के लिए काम करती भी है तो उसके पास वो पार्टी ढांचा नहीं है, जो इन जातियों को कांग्रेस से जोड़े. वे इन जातियों का भला तो फिर भी कर पाएगी, लेकिन उनकी पार्टी नहीं बन पाएगी. कांग्रेस के पास इन जातियों से पर्याप्त और कद्दावर नेता नहीं हैं. कांग्रेस अगर अपने मौजूदा नेताओं से कहती है कि ऐसा नेताओं को पार्टी में लेकर आएं, तो वे ऐसा होने नहीं देंगे.

सूत्र : छत्तीसगढ़ के दो मंत्रियों के लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना, चर्चाओं का बाज़ार गर्म

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रायपुर. चर्चा ज़ोरों पर है. संभावना काफी ज़्यादा है. छत्तीसगढ़ के दो मंत्री लोकसभा चुनाव में ताल ठोंक सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक पार्टी लोकसभा में सभी 11 सीटों की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है. जिसके तहत दो मंत्रियों को उतारने की कवायद हो रही है.

सूत्रों के मुताबिक ये मंत्री फिलहाल चुनाव लड़ने के मूड में नहीं हैं. दोनों मंत्री अपनी जगह अपने नातेदारों को टिकट देने की मांग कर रहे हैं. लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इन दोनों को समझाने का ज़िम्मा दिया गया है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कई बार कहा है कि पार्टी सभी 11 सीटों को जिताने की कोशिश करेगी. दो सीटों पर सबसे मज़बूत दावेदार इन्हीं मंत्रियों को माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी इस बार कोई भी कसर नहीं छोड़ेगी. इसी लिहाज़ से पार्टी ने हर सीट पर जीत की सबसे ज़्यादा संभावनाओं वाले नेताओं को टिकट देने का फैसला किया है.

रायपुर में महंत, देवांगन आगे

रायपुर के समीकरणों के उलटफेर की ख़बर है. ख़बर है कि रेस में अब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गिरीश देवांगन और महंत रामसुंदर दास आगे हो गए हैं. पार्टी के राष्ट्रीय नेता महंत रामसुंदर दास के पक्ष में है. उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिल पाई थी. चूंकि महंत काफी प्रभावशाली है इसलिए उनके नाम की चर्चा ज़ोरों पर है. प्रमोद दुबे और किरणमयी नायक भी रेस में बने हुए हैं.

बिलासपुर में अटल का ज़ोर

बिलासपुर से अटल श्रीवास्तव को चुनाव लड़ाने की संभावना है. विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल चाहते हुए भी टिकट नहीं दिला पाए थे. चूंकि अटल भूपेश बघेल के बेहद करीबी हैं. इसलिए उनके नाम को फाइनल माना जा रहा है. हालांकि वाणी राव भी टिकट की कवायद में जुटी हुई हैं.

झारखंड के सीएम की बहू बनेगी छत्तीसगढ़ की बेटी पूर्णिमा आज

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रायपुर। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का छत्तीसगढ़ से तो वैसे तो पुराना गहरा नाता है। बताया जाता है कि, वह मूलत: छग की राजधानी रायपुर के वाशिंदे हैं और इसी वजह से उनके परिवार के कई लोग आज भी रायपुर में रहते हैं। अब वह अपने इकलौते बेटे ललित का विवाह भी रायपुर के एक मध्यम परिवार की बेटी पूर्णिमा से करने जा रहे हैं। पूर्णिमा के पिता भागीरथ साहू, साहूकार हैं जबकि मां कौशल्या शिक्षक। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को पूर्णिमा व ललित परिणय सूत्र में बंध जाएंगे।

विवाह समारोह की यहां जोर-शोर से तैयारी चल रही है। वीआईपी चौक स्थित होटल में करीब दो हजार लोगों के रुकने की व्यवस्था की गई है। हवाई अड्डे के करीब होटल में सात फेरों की तैयारी की जा रही है। शादी में प्रदेश के तमाम भाजपा नेता शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह भी शामिल होंगे।सीएम की होने वाली बहू पूर्णिमा ने बताया कि जब इतने बड़े परिवार का रिश्ता आया तो मैं काफी घबरा गई थी। मन में कई सवाल आ रहे थे कि आखिर मुझे ही क्यों पसंद किया गया? इसी बीच जब ससुरजी से वीडियो कॉल पर बात हुई तो मन को शांति मिली।

शादी की तैयारी साधारण परिवार की तरह की जा रही है। वीआईपी रोड स्थित होटल की तैयारी कर रहे राजेश तुल्सीयन ने बताया कि शादी सामान्य परिवार की तरह की जा रही है। विवाह में बस अतिथियों के स्वागत पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। बाकी सब सामान्य ही होगा।

छत्तीसगढ़ : बदल गया इन परीक्षाओं का टाइम टेबल चुनाव के चलते

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रायपुर। लोकसभा चुनाव का असर छात्रों की परीक्षाओं पर भी पड़ा है। सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव कर दिया है। राज्य ओपन स्कूल बोर्ड परीक्षा में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के कई प्रश्न पत्रों का शेड्यूल बदल दिया गया है। नौ से 16 अप्रैल तक की सभी परीक्षाओं का रद कर दिया गया है। नौ अप्रैल को प्रस्तावित 10वीं हिन्दी की परीक्षा अब 27 अप्रैल को होगी।

10 अप्रैल को प्रस्तावित 12वीं भूगोल की परीक्षा अब 29 अप्रैल को होगी। 11 अप्रैल को प्रस्तावित 10वीं की अंग्रेजी की परीक्षा 30 अप्रैल को होगी। 12 अप्रैल को प्रस्तावित 12वीं की अंग्रेजी की परीक्षा अब एक मई को होगी। 15 अप्रैल को 10वीं की अर्थशास्त्र की प्रस्तावित परीक्षा अब पांच मई को होगी और 16 अप्रैल को प्रस्तावित बारहवीं हिन्दी की परीक्षा अब तीन मई को होगी।

बीए, बीएससी और बीकॉम की परीक्षाएं भी टकराईं

राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान 11 अप्रैल, 18 अप्रैल और 23 अप्रैल को होना है। इन तीनों तारीखों पर पंडित रविशंकर शुक्ल विवि की बीए, बीएससी, बीकॉम और अन्य स्नातक एवं स्नातकोत्तर की परीक्षाएं टकरा रही हैं।

मतदान के दो दिन पहले और दो दिन बाद तक की लगभग सभी परीक्षाओं को स्थगित करने के लिए तैयारी चल रही है। रविवि के कुलपति डॉ. केशरीलाल वर्मा का कहना है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर परीक्षाओं के शेड्यूल में बदलाव किया जाएगा। रविवि के अलावा बस्तर विवि, सरगुजा विवि, दुर्ग विवि समेत अन्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

रविवि की एक दिन में तीन पाली की परीक्षाएं होंगी प्रभावित

रविवि में सत्र 2017-18 में विवि की परीक्षा में एक लाख 38 हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे। इस साल एक लाख 45 हजार विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा हर दिन तीन पालियों में आयोजित की जा रही है। पहली पाली सुबह सात से 10 बजे तक बीएससी, बीसीए, बी लिब, स्नातकोत्तर स्तर पर एमए पूर्व व अंतिम की परीक्षाओं में इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान की परीक्षा हो रही है।

इसी समय एमए, एमएससी, पीजी डिप्लोमा आदि की परीक्षा ली जा रही है। दूसरी पाली में सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक बीकॉम, एमए अंग्रेजी, दर्शनशास्त्र, भाषा विज्ञान, क्लासिक्स, हिन्दी, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृत एवं पुरातत्व , एमए पूर्व अंतिम संस्कृत, एमए अंतिम भूगोल , मनोविज्ञान, एमए पूर्व व अंतिम समाजशास्त्र, लोक प्रशासन और तीसरी पाली में दोपहर तीन से शाम छह बजे तक बीए और बीए क्लासिक्स की परीक्षाएं ली जा रही है। एक दिन में तीन से अधिक कक्षाओं की परीक्षाएं होने के कारण ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ : 18000 कर्मचारियों के हाथ रहेगी लोकसभा चुनाव की कमान

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रायपुर। रायपुर लोकसभा चुनाव को सकुशल संपन्ना कराने के लिए 18 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की तैयारी कर ली गई है। इनके ट्रेनिंग का भी दौर शुरू हो चुका है। मतदान अधिकारी और कर्मियों की ट्रेनिंग का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। करीब 85 फीसद कर्मचारी वहीं हैं जिनकी ड्यूटी पिछले विधानसभा चुनाव में लगाई गई थी। इसमें कुछ लोगों का स्थानांतरण आदि होने के कारण सूची में सिर्फ मामूली संशोधन हुआ है।

इसके लिए भी सरकारी विभागाध्यक्षों से कर्मचारियों की एक बार फिर अपडेट सूची मांगी गई है। लेकिन निर्वाचन अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के साथ ही उन्हें आचार संहिता लागू होते ही जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है।

निर्वाचन प्रक्रिया पर नजर रखने को दल गठित

निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण के तहत सभी प्रकार के दलों के गठन के कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं। इसमें 147 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 69 उड़नदस्ता, 25 स्थैतिक निगरानी दल बनाए गए हैं। एक दल में तीन सदस्य होंगे। इन्हें मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई हैं। ये दल चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों की हर गतिविधियों पर नजर रखेंगी।

नियंत्रण और शिकायत सेल भी क्रियाशील

आचार संहिता लागू होने के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय में नियंत्रण कक्ष और शिकायत सेल, मीडिया अनुवीक्षण सेल क्रियाशील कर दिए गए हैं। यहां भी पूर्व की भांति पार्टियों की शिकायतों के परीक्षण करने के लिए संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को दिए जाएंगे।

24 घंटे रखेंगे निर्वाचन पर नजर

गठित दल और नियंत्रण कक्ष 24 घंटे निर्वाचन की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। इसमें शिफ्टवार भी ड्यूटी लगाई जाएगी। जहां इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के राजनीतिक विज्ञापन और खबरों पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही प्रिंट मीडिया में पेड न्यूज की समीक्षा होगी। नियंत्रण कक्ष से ही विज्ञापन के प्रकाशन और प्रसारण की अनुमति भी दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ : पर्यटन विभाग की दो परियोजनाओं पर आचार संहिता का ब्रेक

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा सामान्य निर्वाचन के लिए तिथियों के एलान के साथ ही प्रभावी आदर्श आचार संहिता ने पर्यटन विभाग की दो परियोजनाओं पर ब्रेक लग गया है। प्रसाद योजना में स्वीकृत 50 करोड़ की डोंगरगढ़ परियोजना व राज्य के 15 होटलों को निजी क्षेत्र में सौंपे जाने का एग्रीमेंट अब लोकसभा चुनाव के बाद ही हो पाएगा। दोनों के प्रोजेक्ट शासन स्तर पर लापरवाही व लेट-लतीफी के कारण अटके हैं।

भारत सरकार के पर्यटन मंत्री जे अल्फांस ने छत्तीसगढ़ को अपनी प्रसाद योजना के तहत 50 करोड़ की एक सौगात दी थी। वे सौ करोड़ की ट्रायबल टूरिज्म सर्किट के उद्घाटन में धमतरी के गंगरैल में आए थे। मंत्री की स्वीकृति के बाद इस पैसे के लिए दंतेश्वरी मंदिर परिसर का चयन किया गया, जिसे बाद में परिवर्तित कर डोंगरगढ़ कर दिया गया।

सारी कवायद कर प्रर्यटन मंडल ने पत्रावली शासन को प्रेषित की, जिसे भारत सरकार को भेजा जाना था। इसी तरह पर्यटन मंडल ने अपने 55 होटलों को निजी क्षेत्रों को देने के लिए टेंडर निकाला। 20 होटलों में निजी क्षेत्र के लोगों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई। पर्यटन विभाग ने उसमें से भी सात लोगों के आवेदन को खारिज कर 13 लोगों के आवेदन को हरी झंडी देकर उसकी पत्रावली राज्य शासन को प्रेषित कर दी।

इसी बीच विधानसभा चुनाव के कारण उन कार्यों को संपादित नहीं किया जा सका। विधानसभा चुनाव संपन्न होने व नई सरकार के कार्यकाल भार संभाले दो महीने हो जाने के बाद भी शासन ने न तो डोंगरगढ़ का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा न ही होटल-मोटल को निजी क्षेत्र में देने का एग्रीमेंट ही किया।

दो महीने बाद लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो गई और एक बार फिर यह दोनों प्रोजेक्ट आचार संहिता की चपेट में आ गए। दोनों ही परियोजनाओं के ब्रेक लगने से विभाग का नुकसान है। यदि पर्यटन विभाग के होटल संचालित हो जाते तो इससे विभाग का आय होती और भारत सरकार के पैसे आ गए होते तो उससे डोंगरगढ़ का विकास।

नियमित कार्य हैं, चुनाव बाद हो जाएंगे संपादित

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध निदेशक एमटी नंदी का कहना है कि दोनों कार्य नियमित हैं, चुनाव बाद संपादित होंगे। कहा दोनों ही कार्यों की फाइल सचिव पर्यटन विभाग कार्यालय को काफी पहले प्रेषित कर दी गई थी।

सचिव बदलने से जगी थी उम्मीद

पर्यटन विभाग में सचिव निहारिका बारिक सिंह के स्थानांतरण के बाद उम्मीद जगी थी कि नई सचिव इस कार्य को प्राथमिकता पर संपादित करेंगी तभी आचार संहिता प्रभावित हो गई। अब विभाग को लोकसभा चुनाव होने का इंतजार करना होगा।

छत्तीसगढ़ : आचार संहिता लगते ही दो दिन में पकड़े गए 50 वारंटी

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बिलासपुर

लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होते ही पुलिस ने सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। एसपी अभिषेक मीणा ने सभी थानेदारों को वारंटियों की धरपकड़ करने का फरमान जारी किया था। उनके निर्देश पर बीते दो दिन में पुलिस ने 50 से अधिक वारंटियों को पकड़ लिया है।

आचार संहिता को देखते हुए जुआ-सट्टा के साथ ही अवैध शराब बेचने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। आयोग को दिखाने के लिए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की जा रही है। वहीं पुलिस ने अब वारंटियों की तलाश भी शुरू कर दी है। इसी तरह अपराधियों और आसामाजिक तत्वों के युवकों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। विभिन्न मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे वारंटियों को पकड़ा जा रहा है। एसपी मीणा के निर्देश पर प्रत्येक थाने में टीम बनाकर वारंटियों को पकड़ने के काम में लगाया गया है। एएसपी सिटी ओपी शर्मा ने बताया कि एसपी के निर्देश पर वारंटियों की तलाश की जा रही है। दो दिन के भीतर पुलिस ने जिले में 50 से अधिक वारंटियों को पकड़ने में सफलता पाई है।

जिले में हैं छह हजार वारंटी

पुलिस अफसरों ने बताया कि जिले में वारंटियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अभी करीब पांच हजार से स्थाई वारंटी हैं। इसी तरह तीन सौ से अधिक जमानती और करीब तीन सौ गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं। विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस बार ज्यादा से ज्यादा वारंटियों की धरपकड़ की जाएगी। इसके लिए सभी थानेदारों को टास्क दिया गया है।