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छत्तीसगढ़: हिन्दू संगठनों का डाटा मंगाने पर घिरी कांग्रेस सरकार, भाजपा ने लगाया मुख्यमंत्री के पिता पर आरोप

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राज्य में जिला स्तर पर सभी हिन्दू संगठनों का डाटा मंगाने पर छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार घिरती नजर आ रही है। प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता पर हमला बोलते हुए इस घटना के पीछे उनका हाथ होने की बात कही है। साथ ही राज्य सरकार के आधिकारिक फैसलों में मुख्ययमंत्री के परिवार के हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए, पूरे मामले की एसआईटी जांच करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर प्रदेशभर में सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ भाजपा ने रविवार को सोशल मीडिया ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए लिखा है, “इस पत्र को देखें भूपेश बघेल जी। अगर शासन के अधिकृत आदेश के बिना हिंदू संगठनों की जानकारी इकट्ठा की जा रही थी, तब तो और गम्भीर मामला है। जिलों में एसपी ने सीएम के पिता के मौखिक आदेश पर तो यह कारवाई नहीं की थी? भाजपा इस मामले पर एसआइटी जांच की मांग करती है।” दूसरे ट्वीट में लिखा है, “यह सवाल इसलिए है क्योंकि सीएम के रिश्तेदारों का दख़ल बढ़ने सम्बंधी ख़बरें मीडिया में आयी हैं और सीनियर बघेल लगातार हिंदू विरोधी कृत्य में सक्रिय रहते हैं। क्या इस पर एसआईटी गठन करेंगे सर?” राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा 15 फरवरी को प्रदेशभर के सभी जिलों के एसपी को दिए गए निर्देश में उनके जिलों में सभी हिन्दूवादी संगठनों के नाम, जिला अध्यक्षों के नाम, राजनीतिक पार्टी से संबंद्धता की जानकारी, समाज में उसका प्रभाव तथा संगठन का उद्देश्य और संगठन की सभी तरह की गतिविधियों की जानकारी मांगी गई है। इस घटना के बाद से ही भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार के खिलाफ हमलावर हो रही है।

राज्य सरकार द्वारा हिंदू संगठनों का डाटा मंगाए जाने की बात पर बीजेपी ने ट्वीटर पर मोर्चा खोलते हुए लिखा है कि राज्य सरकार का यह कदम घोर असंवैधानिक और सांप्रदायिक कदम है। भाजपा ने ट्वीट कर पूछा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हिंदू संगठनों का डाटा आखिर क्यों इकठ्ठा कर रहे हैं। भाजपा ने सीएम से पूछा है कि डाटा क्या नक्सलियों/इस्लामी आतंकियों को बेचना चाहते हैं या सीधे पाकिस्तान को? या मतांतरण वाले समूहों के लिए ऐसा किया जा रहा है।

हालांकि एक दिन पहले ही इसका खुलासा हुआ। जिसके बाद सरकार ने यू टर्न लेते हुए ऐसे किसी आदेश से इंकार कर दिया है। जिसके बाद प्रदेश भाजपा ने आरोप लगाते हुए कांग्रेस सरकार से पूछा है कि अगर मुख्यमंत्री के आदेश से यह जारी नहीं किया गया है तो क्या मुख्यमंत्री के पिता के मौखिक आदेश पर यह किया जा रहा है। भाजपा ने एक दिन पहले इस घटना के खुलासा होने पर सरकार द्वारा हिन्दू संगठनों पर चुनाव से पहले लगाम लगाने की बात कही थी।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार हिन्दू संगठनों की जानकारी इसलिए मंगा रही है ताकि लोकसभा चुनाव से पहले संगठनों पर कार्रवाई कर उन्हें अपने पक्ष में किया जा सके या भाजपा के खिलाफ उनका इस्तेमाल किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ, रायपुर भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने इस मामले में कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद प्रदेश सरकार हिंदू विरोधी आदेश को वापस लेने की कोई पहल नहीं कर रही है। वह अब भी हिंदू संगठनों के आंकड़ा इकट्ठा करने का आपराधिक कृत्य करने पर अड़ी है। ऐसे में पार्टी के पास जबरदस्त आंदोलन छेड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी बोले दुश्मन का फन कुचलने में सक्षम है आज का भारत

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मोदी बिहार में आयोजित राजग की ‘संकल्प रैली’ को संबोधित करने पटना पहुंचे हुए हैं। भाषण शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री ने भारत माता का जयकारा लगाया।

पीएम ने कहा कि बिहार के लिए एनडीए सरकार ने कई लाभकारी योजनाएं चलाई हैं। यहां सरकार बच्चों को पढ़ाई के साथ युवा को कमाई से लेकर बुजुर्गों को दवाई, किसान को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई तक के लिए काम किया जा रहा है।

पीएम मोदी कांग्रेस पर निशाना साधना भी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेना का मनोबल गिरा रही है। उन्होंने कहा कि देश में आज अगर ‘महा मिलावट’ वाली सरकार होती तो न बड़े फैसले लिए जाते और न ही गरीबो के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती। उन्होंने कहा कि चौकीदार को गाली देने की साजिश चल रही है लेकिन आप विश्वास रखिए, आपका चौकीदार हर तरीके से चौकन्ना है।

बालोद: ये है वजह : IHSDP के तहत बने 174 मकानों के अलॉटमेंट पर लटका ताला

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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आईएचएसडीपी (इंटीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम) यानी झुग्गी मुक्त मलिन बस्ती विकास योजना के तहत बने 174 मकानों के अलॉटमेंट को लेकर मामला फिर से लटक गया है. फरवरी के अंतिम सप्ताह में सुनवाई की तारीख तय की गई थी, जिसकी सुनवाई न्यायालय में टल जाने के कारण एक बार यह योजना खटाई में पड़ गई है.

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के व्यवस्थापन को लेकर आईएचएसडीपी योजना के तहत वर्ष 2007 से नगर पालिका द्वारा 174 मकानों का निर्माण किया गया था. वहीं मकान निर्माण होने के बाद करीब 116 मकानों के आवंटन पूरा होने के बाद इस पर आपत्ति दर्ज करा दी गई. इस चलते मामला न्यायालय में लंबित होने से आज तक इन मकानों का आवंटन नहीं किया जा सका. मकानों की स्थिति अब जर्जर होने लगी है. मामले की जानकारी बालोद नगर पालिका के मुख्य अधिकारी रोहित साहू ने दी है.

शासन द्वारा बनाए गए गरीबों के निवास को लेकर मकान निर्माण कार्य पिछले 12 वर्षों से लंबित है, जिसे लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की गंभीरता नहीं दिखाने के चलते मकान गरीबों को मिलने से पहले ही जर्जर होने लगे हैं. यही वजह है कि शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रही है.

SP को नोटिस जारी, पुलिस आधी रात को राह चलते लोगों के खींच रही फोटो

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रात के समय सड़कों पर चलने वाले लोगों को संदिग्ध मानकर पुलिस द्वारा फोटो खींचने के मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एसपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. पुलिस की इस तरह के कृत्य को निजता का हनन करने का मामला माना जा रहा है. यही वजह है कि विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस मामले में एसपी आरिफ शेख को नोटिस जारी किया है. दरअसल, पुलिस द्वारा आधी रात के बाद निकलने वाले लोगों को संदिग्ध मानकर उनसे पहचान पत्र मांगी जा रही है. इसके साथ ही उनकी फोटो भी खींची जा रही है, जिसे लेकर आम लोगों ने भी एतराज जताया है.

छत्तीसगढ़ : ननकीराम कंवर ने CM को निलंबित IPS मुकेश गुप्ता के खिलाफ सौंपी शिकायतों की फेहरिस्त

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छत्तीसगढ़ में निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता के खिलाफ दस्तावेजों की फेहरिस्त बीजेपी विधायक और पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंप दी है. बता दें कि ननकीराम द्वारा सौंपे गए प्रमुख दस्तावेजों में मुकेश गुप्ता की स्टेनो (shorthand) रेखा नायर के परिजनों के नाम से जमीन खरीद-ब्रिकी के दस्तावेज और महिला पुलिस अधिकारी को जान से मारने की धमकी देने वाली दस्तावेज प्रमुख रूप से शामिल है.

आपको बता दें कि पूर्व गृह मंत्री ननकीराम ने करीब 100 करोड़ रुपए के लेनदेन समेत कई शिकायतों के दस्तावेज मुख्यमंत्री को सौंपकर निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही ननकीराम ने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की भी मांग की है. खास बातचीत में बीजेपी विधायक ननकीराम कंवर ने कहा कि आईपीएस मुकेश गुप्ता ने सभी काम नियमों के विरुद्ध जाकर किया है.

ननकीराम कंवर ने निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता निजी जीवन के बारे में भी कटाक्ष करते हुए कहा कि उसने पहली शादी रखते हुए दूसरी शादी की, जो हिंदू मैरिज एक्ट के खिलाफ है. बहरहाल, ऐसी कई शिकायतें उनके खिलाफ सामने आईं हैं. इसके अलावा और भी कई गैरकानूनी मामलों में उनके नाम शामिल हैं. वहीं उन्होंने मुकेश गुप्ता को आपराधिक प्रवृत्ति का बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

Total Dhamaal ने 9 दिन में कमाए 100 करोड़, Box Office पर हुई नोटों की बारिश

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इंद्र कुमार के डायरेक्शन में बनी ‘टोटल धमाल’ ने अपने नाम की ही तरह बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया हुआ है. 22 फरवरी को रिलीज हुई इस फिल्म ने रिलीज के 9 दिन में 100 करोड़ रुपए की कलेक्शन कर ली है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के ट्वीट के मुताबिक फिल्म ने कुल मिलाकर 106.32 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है. इसी के साथ ये डायरेक्टर इंद्र कुमार की 100 करोड़ कमाने वाली दूसरी फिल्म बन गई है.

दिल, बेटा, राजा, इश्क, मस्ती, धमाल जैसी हिट फिल्में दे चुके इंद्र कुमार की पहली 100 करोड़ कमाने वाली फिल्म ‘ग्रैंड मस्ती’ थी. अब ‘टोटल धमाल’ उनकी दूसरी 100 करोड़ क्लब में शामिल फिल्म बन गई है. अब धमाल के ‘धमाल’ से बाहर निकलते हुए लेटेस्ट रिलीज की बात करें तो लुका छिप्पी की शुरुआत ठीक रही.

https://twitter.com/taran_adarsh/status/1102093544494231552

कार्तिक आर्यन और कृति सैनॉन की इस फिल्म ने पहले दिन यानी कि शुक्रवार(1 मार्च) को 8.01 करोड़ रुपए कमाए, शनिवार को 10.08 करोड़ रुपए की कलेक्शन हुई. इस हिसाब ने फिल्म ने दो ही दिन में 18.09 करोड़ रुपए की कमाई कर ली, लेकिन ‘सोनचिरैया’ दर्शकों के लिए तरसती रही. टोटल धमाल और लुका छिप्पी के चक्कर में इस फिल्म की शुरुआत काफी ढीली रही. फिल्म ने पहले दिन महज 1.20 करोड़ रुपए की कलेक्शन की.

पुलवामा हमला: 52 करोड़ की संपत्ति जब्त, गिरफ्त में 15 और लोग, जानें क्या है जमात-ए-इस्लामी?

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पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रही है. पुलवामा हमले से तार जुड़े होने के सबूत मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे संगठन जमात-ए-इस्लामी पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत 5 साल तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. रविवार को इस संगठन के 15 और सदस्यों को गिरफ्त में लिया गया है और इसकी 52 करोड़ की संपत्ति जब्त कर जांच की जा रही है. प्राप्त जानकारी मुताबिक 1 मार्च से अभी तक इस संगठन से जुड़े 370 से ज्यादा लोगों को गिरफ्त में लेकर पूछताछ की जा रही है. रविवार सुबह भी संगठन से जुड़े 15 अहम लोगों को हिरासत में लिया गया है.

किस-किस की हुई गिरफ्तारी?
जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक रविवार को जमात-ए-इस्लामी (जम्मू कश्मीर) से जुड़े सैयदपुरा के पूर्व जिला अध्यक्ष बशीर अहमद लोन के साथ उनके अन्य साथियों अब्दुल हामिद फयाज, जाहिद अली, मुदस्सिर अहमद, गुलाम कादिर, मुदासिर कादिर, फयाज वानी, जहूर हकाक, अफजल मीर, शौकत शाहिद, शेख जाहिद, इमरान अली, मुश्ताक अहमद और अजक्स रसूल को गिरफ्तार किया गया. जांच एजेंसी अब तक इस संगठन की करीब 52 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है. बता दें कि इस संगठन के जिन बड़े नेताओं की गिरफ्तारी हुई है, उनसे फिलहाल पूछताछ की जा रही है.

क्यों लगा बैन?

 

आजादी से पहले साल 1941 में एक संगठन का गठन किया गया, जिसका नाम जमात-ए-इस्लामी था. जमात-ए-इस्लामी का गठन इस्लामी धर्मशास्त्री मौलाना अबुल अला मौदूदी ने किया था और यह इस्लाम की विचारधारा को लेकर काम करता था. हालांकि आजादी के बाद यह कई अलग-अलग संगठनों में बंट गया, जिसमें जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी हिंद शामिल है. हालांकि जमात-ए-इस्लामी से प्रभावित होकर कई और संगठन भी बने, जिसमें जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, कश्मीर, ब्रिटेन और अफगानिस्तान आदि प्रमुख हैं. जमात-ए-इस्लामी पार्टियां अन्य मुस्लिम समूहों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंध बनाए रखती हैं.

जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) की घाटी की राजनीति अहम भूमिका है और साल 1971 से इसने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया. पहले चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं करने के बाद आगे के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अहम जगह बनाई. हालांकि अब इसे जम्मू कश्मीर में अलगाववादी विचारधारा और आतंकवादी मानसिकता के प्रसार के लिए प्रमुख जिम्मेदार संगठन माना जाता है.

माना जाता है कि यह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का दाहिना हाथ है और हिजबुल मुजाहिदीन को जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर ने ही खड़ा किया है. हिज्बुल मुजाहिदीन को इस संगठन ने हर तरह की सहायता की. बता दें कि इससे पहले भी दो बार इस संगठन को बैन किया जा चुका है. पहली बार जम्मू कश्मीर सरकार ने इस संगठन को 1975 में 2 साल के लिए बैन किया था, जबकि दूसरी बार केंद्र सरकार ने 1990 में इसे बैन किया था. वो बैन दिसंबर 1993 तक जारी रहा था.

4500 करोड़ की संपत्ति का मालिक
बता दें कि जमात घाटी के अंदर कई सारे स्कूल, मदरसे और मस्जिद को संचालित करती है. जमात के पास फिलहाल 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. इस संपत्ति में 400 स्कूल, 350 मस्जिद और एक हजार से अधिक मदरसे शामिल हैं. इन सबको चलाने के लिए पाकिस्तान, हुर्रियत कांफ्रेस के अलावा स्थानीय लोग चंदे के जरिए इसकी मदद करते हैं. जमात-ए-इस्लामी काफी लंबे समय से कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की मुहिम भी चला रही है. उसका मानना है कि कश्मीर का विकास भारत के साथ रहकर नहीं हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, घाटी में कार्यरत कई आतंकी संगठन जमात के इन मदरसों व मस्जिदों में पनाह लेते रहे हैं.

महबूबा और उमर ने जताई नाखुशी
पीडीपी नेता और सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार द्वारा जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले की आलोचना की थी. महबूबा ने कहा था कि सरकार जमात पर प्रतिबंध लगाने से पहले हिंदूवादी संगठनों पर बैन लगाए. क्या भाजपा का विरोध करना अब राष्ट्रद्रोह भी हो गया है. उधर नेशनल कान्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को जमात-ए-इस्लामी पर पाबंदी लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि इस कदम से संगठन की गतिविधियां भूमिगत होने के अलावा कोई मकसद हल नहीं होगा.

उमर ने ट्वीट किया, “केंद्र सरकार को अपने हालिया फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. जम्मू कश्मीर में 1996 से 2014/15 के बीच बिना इस तरह के प्रतिबंधों के भी हालात में तेजी से सुधार हुआ है. यह प्रतिबंध जमीनी स्तर पर किसी तरह का सुधार करेगा, इस बात का कोई आधार नहीं दिखता.” जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अशांति फैलने के बाद 1990 में पांच साल से अधिक समय के लिए संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इस तरह की पाबंदी से कोई मकसद हल नहीं हुआ और कुछ हासिल नहीं हुआ.

जमात-ए-इस्लामी हिंद है अलग संगठन
बता दें कि ये जमात-ए-इस्लामी हिंद से बिल्कुल अलग संगठन है. इसका उस संगठन से कोई लेना देना नहीं है. साल 1953 में जमात-ए-इस्लामी ने अपना अलग संविधान भी बना लिया था. जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) घाटी में चुनाव लड़ता है, लेकिन जमात-ए-इस्लामी हिंद ऐसा संगठन है जो वेलफेयर के लिए काम करता है. जमात-ए-इस्लामी हिंद के देश में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े भी कई कार्य करता रहा है.

छत्तीसगढ़ में नहीं बनी बात, कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवारों के नाम तय करने दिल्ली में बैठक 7 को

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राजीव गांधी भवन में लगातार दो दिनों तक चली बैठक में लोकसभा उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन किया गया। इसके बाद भी कोई बात नहीं बनीं। अब चुनाव समिति के लोग छत्तीसगढ़ की लिस्ट लेकर दिल्ली जाएंगे। जहां होने वाली बैठक में इनके नामों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। रविवार को ये जानकारी कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने दी। उन्होंने कहा कि ये बैठक 7 मार्च को एआईसीसी के दिल्ली कार्यालय में होगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष लेंगे आखिरी फैसला :

सुशील आनंद शुक्ला ने आगे कहा कि इस मामले में आखिरी फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी लेंगे। उसके बाद फिर वो लिस्ट प्रदेश अध्यक्ष को भेजी जाएगी। इसके बाद टिकटों का बंटवारा होगा।

छत्तीसगढ़ में बढ़ी ठण्ड, राज्य के कई जिलों में हुई बारिश

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प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर मौसम ने अपनी करवट बदल ली है । प्रदेश के कई इलाकों में सुबह से बारिश हो रही है । राजधानी रायपुर में भी हल्की बारिश हो रही है। दुर्ग जिले में सुबह साढ़े पांच बजे से बारिश हो रही है। इस तरह से अचानक बारिश ने जाते हुए ठण्ड को एक बार फिर वापस लौटा दिया है। मार्च महीने की यह बारिश एक बार फिर सर्द हवाओं को बुलावा दे रही है।

क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक:

मौसम विभाग का अनुमान था कि मार्च महीने से पारा चढ़ने लगेगा और गर्मी बढ़ जाएगी, लेकिन बेमौसम इस बारिश ने प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज ठंडा कर दिया है। मौसम वैज्ञानिक पी एल देवांगन ने बताया कि आज शाम तक तेज हवाओं के साथ बारिश होने के आसार हैं। इस बारिश के कारण आने वाले दो तीन दिन और मौसम ठंडा रहेगा।

रक्षा विशेषज्ञों ने माना मिग-21 बाइसन नहीं है पुराना

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भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के शौर्य ने मिग-21 बाइसन के बारे में विशेषज्ञों की राय बदल कर रख दी। कहां तो लोग मिग- 21को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ कहा जाता था। अब विशेषज्ञों का कहना है कि आईएएफ का विमान भले ही पुराना था, लेकिन इसका नया संस्करण बाइसन निस्संदेह पुराना नहीं है।

पाकिस्तान वायुसेना व भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बीच लड़ाई हुई, जिसमें यह उभरकर आया कि विंग कमांडर अभिनंदन ने अपने मिग-21 से घुसपैठ करने वाले विमान को गिराने में कामयाब रहे।  हालांकि, पाकिस्तान ने हमले में एफ-16 विमान के शामिल होने से इनकार कर दिया, लेकिन भारत ने इसके साक्ष्य होने की बात कही।

बहुत खास है हमारा मिग-21 बाइसन:

मिग-21 व एफ-16 अलग-अलग पीढ़ियों के हैं। पीएएफ ने अमेरिका निर्मित लड़ाकू विमान एफ-16सी/डी के नये संस्करण को उड़ाया था, जबकि मिग-21 बाइसन, 60 साल से सेवा दे रहे एक विमान का उन्नत अवतार है। विशेषज्ञों का कहना है कि एफ-16 लक्ष्य साधने के लिहाज से बहुत ही बेहतर है, लेकिन मिग-21 की अपनी खासियत है।

सिर्फ 2 मिनट में टेक ऑफ:

विशेषज्ञों का कहना है कि मिग-21 साफ तौर पर भारतीय वायुसेना की पसंद है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसके गश्त के लिए तत्परता की वजह से किसी भी आपात स्थिति में हर समय इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार,  इस भूमिका के लिए मिग-21 सबसे तरजीही विमान है, क्योंकि वे अन्य दूसरे सभी लड़ाकू विमानों की तुलना में हवाई यात्रा करने के लिए सबसे कम समय लेते हैं।  मिग-21 केवल दो मिनट में लॉन्च किया जा सकता है।

क्या-क्या रहता है साथ:

मिग-21 बाइसन किसी अन्य आधुनिक लड़ाकू विमान की तरह हथियारों की एक रेंज को ले जा सकता है और इसमें काफी अच्छी सुविधाएं हैं। इसमें आर 073  मिसाइल है, जिसकी रेंज 20-25 किमी है और विजुअल रेंज की मिसाइल से परे फायर कर सकता है। इसमें रडार, जैमर्स व प्रतिरोधी उपाय के तौर डिस्पेंसिंग सिस्टम चफ व फ्लेयर्स शामिल हैं। इन्हीं के दम पर पिछले छह दशकों से ये विमान भारतीय वायु योध्दाओं की पहली पसंद बना हुआ है।