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” शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 2026″  प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति …”

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शनि प्रदोष व्रत का महत्व

आज शनि व्रत है, इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। शनि प्रदोष व्रत से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। शनिवार को होने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है।

आइए, हम आपको इस व्रत का महत्व और पूजा विधि के बारे में जानकारी देते हैं।

शनि प्रदोष व्रत के बारे में जानें

हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह व्रत इस बार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। शनिवार को त्रयोदशी होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा का महत्व है। संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त के समय भगवान शिव का पूजन किया जाता है।

शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 2026

शास्त्रों के अनुसार, शनि प्रदोष पर पूजा का मुहूर्त महत्वपूर्ण होता है। जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, उनके लिए पूजा का समय शाम 7:23 बजे से शुरू होगा और रात 9:23 बजे समाप्त होगा। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।

शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

पंडितों के अनुसार, इस व्रत में सूर्यास्त के समय का विशेष महत्व होता है। सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी जी का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। शिव पुराण में वर्णित शनि प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। पूरे दिन उपवास रखना सर्वोत्तम है, लेकिन यदि संभव न हो तो फलाहार या साबूदाना और ताजे फलों का सेवन कर सकते हैं।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर महीने दो प्रदोष व्रत होते हैं। एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर। प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है और इसे करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। जब यह व्रत शनिवार को होता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत से भगवान शिव और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

शनि प्रदोष व्रत पर शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय

पंडितों के अनुसार, झूठ, क्रोध और अपशब्दों से बचना शुभ माना जाता है। मेहनत, समय की पाबंदी और बुजुर्गों का सम्मान शनि से जुड़े महत्वपूर्ण आचरण हैं। शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धा से “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें। पीपल के नीचे दीपदान करना भी शुभ है। जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, कंबल या भोजन का दान करें।

शनि प्रदोष से जुड़ी पौराणिक कथा

प्राचीन काल में एक सेठ और सेठानी धन-धान्य से परिपूर्ण थे, लेकिन संतान न होने के कारण दुखी थे। उन्होंने संन्यास लेने का निश्चय किया और तीर्थयात्रा पर निकले। मार्ग में उन्हें ऋषि शांडिल्य मिले, जिन्होंने उन्हें शनि प्रदोष व्रत करने का सुझाव दिया। व्रत के प्रभाव से सेठानी को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। इस प्रकार से शनिदेव की कृपा से संतान सुख और धन-वैभव की प्राप्ति के लिए शनि प्रदोष व्रत की परंपरा शुरू हुई।

शनि प्रदोष के दिन शिवलिंग पर अर्पित करें ये सामग्री

पूजा के दौरान सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद पंचामृत अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें। अंत में दीप और धूप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करें। यह सामग्री भगवान शिव को प्रिय होती है।

शनि प्रदोष पर इन गलतियों से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। व्रत के दिन सात्विकता बनाए रखें और मांस-मदिरा से दूर रहें। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें।

शनि प्रदोष व्रत के दिन विशेष ध्यान देने योग्य बातें

शनि प्रदोष व्रत का दिन खास होता है, इसलिए इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और तुलसी पत्र न चढ़ाएं। बेलपत्र ताजा और साफ होना चाहिए। पूजा के समय क्रोध न करें और प्रदोष काल में पूजा को जल्दबाजी में न करें। इस दिन तामसिक भोजन और शराब से दूर रहें।

” लंबे समय तक बैठने का स्वास्थ्य पर प्रभाव” “यह एक साधारण आदत आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है…”

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यह एक साधारण आदत आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा”

“आजकल के जीवनशैली का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। हम ऑफिस में 8 से 10 घंटे तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं, जिससे कई लोग घंटों एक ही स्थान पर रहते हैं।”

बैठने से होने वाली समस्याएं”

शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर और पीठ में दर्द, सर्वाइकल, मांसपेशियों में ऐंठन, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को भी बढ़ावा दे सकता है।”

घंटों एक जगह बैठे रहना सेहत के लिए खतरनाक”

पैरों की मांसपेशियों का कमजोर होना: लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिसे मसल एट्रॉफी कहा जाता है। इससे सीढ़ियां चढ़ने या भारी सामान उठाने में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए स्क्वैट्स और लंजेस जैसी एक्सरसाइज करें। हर आधे घंटे में 2 से 5 मिनट टहलें।”

वजन बढ़ना: जब आप चलते हैं, तो मांसपेशियां लाइपोप्रोटीन लिपेज नामक एंजाइम का निर्माण करती हैं, जो फैट और शुगर को प्रोसेस करने में मदद करता है। लंबे समय तक बैठे रहने से यह एंजाइम कम बनता है, जिससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है।”

  • एंग्जाइटी और डिप्रेशन: एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित व्यायाम नहीं करते, उनमें एंग्जाइटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।”
  • कंधे और गर्दन में अकड़न: लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से कंधे और गर्दन में अकड़न हो सकती है।”
  • डायबिटीज का खतरा: लंबे समय तक बैठे रहने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 135% तक बढ़ जाता है।”
  • हृदय रोग का खतरा: अधिक देर तक बैठने से दिल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।”
  • कैंसर का खतरा: लंबे समय तक बैठे रहने से अंडाश्य, गर्भाश्य और कोलोन कैंसर का खतरा 25% तक बढ़ सकता है।”

स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें?

  • हर आधे घंटे में 2 से 3 मिनट का ब्रेक लेकर टहलें।
  • डेस्क पर हल्की एक्सरसाइज करें।
  • ब्रेक के दौरान 10 मिनट की वॉक करें।
  • फिटनेस ट्रैकर से रोजाना कदमों की संख्या देखें।

विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त लगभग 300 उपहारों की ई-नीलामी…

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भारत सरकार की अनोखी ई-नीलामी

भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त लगभग 300 उपहारों की ई-नीलामी चल रही है, जिसमें लग्ज़री रोलेक्स यॉट-मास्टर-2 घड़ी और कुवैत के अल अर्बाश ब्रांड के बहुमूल्य आभूषण सेट शामिल हैं।

यह नीलामी विदेश मंत्रालय के तोशाखाना द्वारा आयोजित की जा रही है, जो एक सरकारी भंडार है जहाँ विदेशी स्रोतों से प्राप्त उपहार और स्मृति-चिह्न सुरक्षित रखे जाते हैं।

नीलामी की समयसीमा और वस्तुएं

आधिकारिक ई-नीलामी पोर्टल के अनुसार, यह प्रक्रिया 8 जून से शुरू होकर 30 जून तक चलेगी। नीलामी में विभिन्न श्रेणियों की वस्तुओं जैसे आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन, कांच के बर्तन, और चांदी की वस्तुएं शामिल हैं। प्रमुख वस्तुओं में रोलेक्स यॉट-मास्टर-2 घड़ी, जिसकी शुरुआती कीमत 16,52,360 रुपये है, और कार्टियर की घड़ी, जिसकी प्रारंभिक कीमत 5,02,360 रुपये है, शामिल हैं।

पंजीकरण और बोली प्रक्रिया

इच्छुक भारतीय नागरिक ई-नीलामी पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी पसंद की वस्तुओं के लिए बोली लगा सकते हैं। यह पंजीकरण केवल भारत में निवास करने वाले नागरिकों के लिए खुला है, और नीलाम की गई वस्तुओं की आपूर्ति भी केवल देश के भीतर ही की जाएगी।

तोशाखाना नियम और वस्तुओं का महत्व

विदेश मंत्रालय के अनुसार, तोशाखाना की अभिरक्षा इसलिए है ताकि सरकारी अधिकारियों को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त उपहारों को सुरक्षित रखा जा सके। ई-नीलामी का यह पहला चरण संशोधित तोशाखाना नियम, 2024 के अनुपालन में आयोजित किया जा रहा है। नीलामी में रखी गई अधिकांश वस्तुएं विरासत, स्मृति-चिह्न, और औपचारिक महत्व की हैं, जिनका उद्देश्य व्यावहारिक उपयोग नहीं है।

“खराब मानसून का जीडीपी विकास दर पर प्रभाव”इस वर्ष मानसून में बारिश की कमी”

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“इस साल मानसून सीजन में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने भारत में प्रवेश किए 24 दिन हो चुके हैं, लेकिन बारिश की मात्रा अभी भी अपेक्षाकृत कम है।”

‘इस स्थिति के पीछे अल नीनो का प्रभाव मुख्य कारण माना जा रहा है। इस प्रकार की मानसूनी स्थिति ने नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों को चिंतित कर दिया है, क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी अर्थव्यवस्था का आधार ग्रामीण क्षेत्रों पर निर्भर है।”

“यदि बारिश में सुधार नहीं होता है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कम बारिश से नकारात्मक भावना उत्पन्न होती है, जिसका असर शेयर बाजार और ग्रामीण खर्च पर पड़ता है। त्योहारी सीजन में ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च में कमी देखने को मिल सकती है। उनका कहना है कि मानसून में 10% की कमी से उपभोक्ता महंगाई 1% तक बढ़ सकती है।”

गोल्डमैन सैक्स ने भारत के वित्त वर्ष 2026-27 के विकास दर के अनुमान को 6.1% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि चालू तिमाही की जीडीपी उम्मीद से बेहतर है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ भारत को मिलेगा। वहीं, ईवाई ने चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6% से 6.8% रहने का अनुमान जताया है।”

एजेंसी के अनुसार, मजबूत घरेलू बुनियादी कारक और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र की मजबूती के चलते देश बाहरी अनिश्चितताओं का सामना कर सकेगा। जबकि कुछ एजेंसियां भारत के पेट्रोलियम रिफाइनिंग इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे को लेकर सकारात्मक हैं, कृषि और ग्रामीण ऋण विशेषज्ञों की राय अलग है। भारत की 300 अरब डॉलर की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण मांग पूरी तरह से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है।”

हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में काफी कमी आई है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए थे, जिससे माल-भाड़ा भी महंगा हो गया और इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ा था।”

cg_”एल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह__”

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“कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गुंजन झा ने बताया कि एल-नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य एवं पूर्वी भाग के समुद्री जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।”

“इसके प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, वर्षा में कमी या असमान वितरण हो सकता है तथा सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को अग्रिम तैयारी करने की आवश्यकता है।”

“उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा वर्ष 2026 के खरीफ मौसम में संभावित एल-नीनो प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श एवं आकस्मिक कार्ययोजना जारी की गई है।”

इसमें मानसून के आगमन में विलंब, कम वर्षा तथा लंबे शुष्क अंतराल (ड्राई स्पेल) की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है। कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करें।”

धान की रोपा पद्धति के स्थान पर सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता दें। खेतों में मजबूत मेड़बंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करें। उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाएं।”

फसल विविधीकरण द्वारा जोखिम को कम करें। बुवाई से पूर्व बीजों का कार्बेन्डाजिम एवं थायमेथोक्साम व इमिडाक्लोप्रिड से उपचार करें। धान में एजोस्पिरिलम, अन्य फसलों में एजोटोबैक्टर तथा दलहनी फसलों में राइजोबियम जैव उर्वरकों का उपयोग करें।”

बुवाई के 3 से 5 दिन के भीतर अनुशंसित अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। यदि 15 जुलाई तक पर्याप्त अंकुरण न हो तो पुन: बुवाई करें तथा सामान्य बीज दर से 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग करें।”

जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द तथा अगस्त माह में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि की अरहर की बुवाई करें।”

कतार पद्धति से बुवाई एवं मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की नमी संरक्षित रखें। गांवों में नालों पर अस्थायी बांध बनाकर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें। कम वर्षा की स्थिति में नत्रजन उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।”

2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव तथा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करें। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल का छिड़काव करें।”

तालाब, कुएं एवं अन्य जल संरचनाओं में वर्षा जल संग्रहित करें तथा आवश्यकता पडऩे पर जीवन रक्षक सिंचाई दें। ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाएं।”

मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाएं तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें। किसान समय रहते उचित तैयारी, जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर एल-नीनो के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।”

जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान 28, 29 एवं 30 जून को__

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– जिले के 0-5 वर्ष तक के कुल 111770 बच्चों को पिलाई जाएगी पल्स पोलियो की दवा..”

राजनांदगांव। जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान के संबंध में कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान पल्स पोलियो अभियान के जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

कार्यशाला में बताया गया कि जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान के प्रथम दिवस 28, 29 एवं 30 जून 2026 को जिले के 0-5 वर्ष तक के कुल 111770 बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलायी जाएगी। अभियान के प्रथम दिवस 28 जून को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक बूथ के माध्यम से पल्स पोलियो की खुराक बच्चों को पिलायी जायेगी तथा 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य कार्यकत्ताओं द्वारा घर-घर भ्रमण कर बच्चों को शत-प्रतिशत दवा पिलायी जाएगी।

पोलियो की दवा पिलाने के लिए जिले में कुल 447 बूथ बनाए गए है। 89 सुपरवाईजर की ड्यूटी लगाई गई है। कुल 894 टीम का गठन किया गया है। 1788 बच्चों को वैक्सीनेट किया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्ताओं तथा अन्य समाजिक संस्थाओं का विशेष योगदान हेतु समन्वयक किया गया है। पोलियो की दवा पिलाने से कोई भी बच्चा न छूटे इसके लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ईंट भ_ों, मदरसों और छात्रावासों के लिए ट्रांजिट और मोबाइल टीमें भी गठित की गई हैं।

शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में माईकिंग एवं दीवाल लेखन के माध्यम से पल्स पोलियो अभियान से नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला स्तरीय मॉनिटरिंग टीम एवं कंट्रोल रूम की स्थापना कर ली गयी है। जिसका मोबाइल नंबर 7744356770 है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 0-5 वर्ष के सभी बच्चों के अभिभावकों से बूथ में पहुंचकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने की अपील की गई है।

कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बीएल तुलावी, सर्विलेंस मेंडिकल ऑफिसर डब्लूएचओ डॉ. असिम रियाज खान, खंड चिकित्सा अधिकारी, प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री विकास राठौर, जिला डाटा प्रबंधक एनएचएम श्री अखिलेश चोपड़ा, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री पूजा मेश्राम, जिला सलाहकर आरएमएनसीएचए श्रीमती स्नेहा जैन, श्री अखिलेश नारायण सिंह एवं विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक, विकासखंड डाटा प्रबंधक, बीईटीओ एवं समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी उपस्थित थे।

cg” युवा शक्ति यदि नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल, सेवा और राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाए तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता- रवि सिन्हा…”

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“राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता अभियान का आयोजन, युवाओं ने लिया नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प”

राजनांदगांव। शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में ग्राम रामपुर में नशा मुक्ति जागरूकता अभियान का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत नशा मुक्ति विषय पर दीवारों पर प्रेरक नारों का लेखन, सामूहिक नशा मुक्ति शपथ, जनजागरूकता रैली एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। स्वयंसेवकों ने पूरे ग्राम में रैली निकालकर नशे के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराया तथा नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया।

कार्यक्रम में राजगामी संपदा की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा साहू ,शा. शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय  जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री रवि सिन्हा, समाजसेवी श्रीमती कांति सिन्हा, मोना गोसाईं, संगीता शुक्ला, मीना सोनी, अनिता फ्रांसिस, एन. कुमारी महोबिया, महिला समूह की सदस्याएँ, मितानिन, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस. आर. कन्नौजे, अमितेश झा, दलनायक युगल साहू, उपदलनायक संकेत साहू एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों  की उपस्थिति के साथ ग्राम रामपुर के सरपंच श्री यतीश सिन्हा, उपसरपंच श्री भारत लाल साहू,जनपद सदस्य मनीष साहू पंचगण श्री हरिशचंद नेताम, श्री रूपचंद ठाकुर, श्री सत्यव्रत यादव, श्री गौकरण सिन्हा, श्रीमती पार्वती सिन्हा, श्रीमती गुलाब बाई अरकरा, श्रीमती लता अरकरा, श्रीमती जमुना ठाकुर, श्रीमती पुष्पलता साहू, श्री पूनम तारम, श्रीमती बसंती पनिका, श्रीमती निर्मला सिन्हा, श्री रोशन लाल साहू एवं श्रीमती लक्ष्मी रामटेके की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री रवि सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “नशा किसी भी व्यक्ति की प्रतिभा, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति का सबसे बड़ा शत्रु है। युवा शक्ति यदि नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल, सेवा और राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाए तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। हम सभी का कर्तव्य है कि अपने परिवार, मोहल्ले और गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लें तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।”

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने नशा न करने एवं समाज को नशामुक्त बनाने की शपथ ली। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस. आर. कन्नौजे ने सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त करते हुए ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।

cg” सेवा सेतु : डिजिटल सुशासन की नई पहचान ” जनता के द्वार- डिजिटल सरकार” अब 520 शासकीय सेवाएं घर बैठे एक क्लिक पर…”

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सेवा सेतु : डिजिटल सुशासन की नई पहचान :: जनता के द्वार- डिजिटल सरकार

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रशासनिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और जनसुलभ बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” पोर्टल एक प्रभावी और अभिनव डिजिटल माध्यम के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करते हुए सेवा सेतु के माध्यम से अब नागरिकों को अधिकांश शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

 ई-डिस्ट्रिक्ट से सेवा सेतु तक का सफर:

पूर्व में राज्य में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को केवल 86 शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था का विस्तार कर इसे “सेवा सेतु” के रूप में विकसित किया गया। आज यह पोर्टल 36 विभागों की 520 से अधिक शासकीय सेवाओं का एकीकृत डिजिटल मंच बन चुका है, जहां विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

इससे नागरिकों को अलग-अलग विभागों के कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा आवेदन, ट्रैकिंग और सेवा प्राप्ति की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो गई है।

घर बैठे एक क्लिक में 520 शासकीय सेवाएं:

इस सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर से घर बैठे ही विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस पोर्टल से समय, श्रम और धन की बचत होने के साथ-साथ सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।

सेवा सेतु पोर्टल पर उपलब्ध श्रेणीवार 520 प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं—

  • व्यवसाय, उद्योग एवं वाणिज्यिक सेवाएं -106
  • लाइसेंस, परमिट एवं विनियामक सेवाएं – 85
  • सामाजिक कल्याण, पेंशन एवं वित्तीय सहायता सेवाएं -65
  • शिक्षा, छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक सेवाएं- 58
  • भूमि, संपत्ति एवं राजस्व सेवाएं- 37
  • व्यक्तिगत पहचान एवं प्रमाण पत्र सेवाएं- 35
  • शासकीय अनुमोदन, अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं स्वीकृति सेवाएं 31
  • जन शिकायत, सुरक्षा एवं विधिक सेवाएं- 25
  • रोजगार, कौशल एवं श्रम सेवाएं- 19
  • केंद्र सरकार की सेवा-19
  • भुगतान, कर एवं वित्तीय लेनदेन सेवाएं-18
  • कृषि, ग्रामीण एवं आजीविका सेवाएं-15
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं-7
  • शासकीय प्रमुख सेवाएं-
  • जाति प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • विवाह प्रमाण पत्र
  • राशन कार्ड संबंधी सेवाएं
  • पेंशन योजनाएं
  • नाम परिवर्तन सेवा
  • व्यापार लाइसेंस
  • विभिन्न विभागों की अन्य नागरिक सेवाएं

ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं का विस्तार:

सेवा सेतु को केवल एक ऑनलाइन पोर्टल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसकी पहुंच प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसके प्रभावी संचालन हेतु पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों तथा संबंधित विभागीय कर्मचारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना, नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करना है। पंचायत स्तर पर सेवा सेतु केंद्रों को जनसुविधा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी डिजिटल सेवाओं का समान लाभ मिल सके।

 उल्लेखनीय उपलब्धियां:

सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अब तक प्राप्त उपलब्धियां इसकी सफलता को प्रमाणित करती हैं—

  • 36 विभागों की सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध।
  • 520 से अधिक शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध।
  • 39 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त।
  • 95.9 प्रतिशत आवेदनों का सफल निराकरण।
  • 16,700 से अधिक सेवा केंद्र नागरिकों की सुविधा के लिए संचालित।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सेवा सेतु नागरिकों के बीच एक विश्वसनीय, प्रभावी और पारदर्शी डिजिटल सेवा मंच के रूप में तेजी से स्थापित हो रहा है।

डिजिटल सुशासन की मजबूत पहल:

सेवा सेतु केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की अवधारणा को साकार करने वाला सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम हुई है तथा सरकारी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक बिना किसी अनावश्यक परेशानी के, समयबद्ध तरीके से शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सके। सेवा सेतु इसी दिशा में डिजिटल सुशासन का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम साबित हो रहा है।

cg” ‘नीली क्रांति’ से समृद्धि की ओर: मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया आधार…”

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‘नीली क्रांति’ से समृद्धि की ओर: मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया आधार

सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबल, मत्स्य पालन से खुल रहे आय और स्वरोजगार के नए द्वार

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ सहायक व्यवसायों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन्हीं में मछली पालन आज केवल भोजन का स्रोत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन गया है। कम लागत, कम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में बढ़ती मांग के कारण यह व्यवसाय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसायों को अपनाएं

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से आह्वान किया है कि वे खेती को केवल धान तक सीमित न रखें। दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसायों को अपनाएं। इसी सोच के अनुरूप भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती  

ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन सीमित भूमि और कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है। तालाब, जलाशय, नहर और अन्य जल स्रोतों का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। बढ़ती आबादी और पौष्टिक भोजन की मांग से मछली की खपत लगातार बढ़ रही है। प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर मछली स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

मत्स्य पालन में रोजगार के बड़े अवसर

मत्स्य पालन न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाता है, बल्कि मत्स्य बीज उत्पादन, आहार निर्माण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के बड़े अवसर देता है।

राज्य पोषित योजनाओं से बढ़ रही संभावनाएं, शिक्षण एवं प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य कृषकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता दे रही है। आधुनिक तकनीकों के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण में तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, रोग नियंत्रण और विपणन की जानकारी दी जाती है। तकनीकी उन्नयन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी होते हैं।

मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण

प्रगतिशील मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर सफल मॉडल देखने भेजा जाता है, ताकि वे नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हों।

सहकारी समितियों को अनुदान:

उत्पादन और विपणन व्यवस्था मजबूत करने के लिए मत्स्य सहकारी समितियों को आर्थिक मदद दी जाती है।

नाव-जाल सहायता:

अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को नाव-जाल देकर पारंपरिक मछली पकड़ने को बढ़ावा दिया जा रहा है।

फुटकर विक्रेताओं को मदद:

आइस बॉक्स, तराजू जैसे उपकरण देकर छोटे मछुआरों को बेहतर बाजार और लाभ दिलाया जा रहा है।

स्पॉन संवर्धन व झींगा पालन:

अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग को स्पॉन संवर्धन और झींगा सह मछली पालन के लिए विशेष सहायता मिल रही है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना दे रही नई उड़ान*

केंद्र-राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से चल रही इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, रोजगार सृजन और मछुआरों की आय बढ़ाना है।

आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन:

मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने और नए तालाब निर्माण के लिए आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है। बेहतर वृद्धि के लिए संतुलित आहार, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सजावटी मछली व केज कल्चर:

मत्स्य पालन के क्षेत्र में सजावटी मछली पालन इकाइयों और जलाशयों में केज कल्चर से स्वरोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

विपणन को मजबूती:

मत्स्य पालकों को शीत संयंत्र, प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और लाइव फिश सेंटर से मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखकर बेहतर विपणन सुनिश्चित हो रहा है।

मछुआरों के लिए सामाजिक सुरक्षा का कवच*
बचत सह राहत योजना:

मछली पकड़ने की बंद (15 जून से 15 अगस्त तक) अवधि में आर्थिक मदद के लिए केंद्र-राज्य के सहयोग से यह योजना चल रही है।

निःशुल्क समूह बीमा योजना:

मत्स्य पालकों के दुर्घटना, मृत्यु या अपंगता की स्थिति में मछुआरों और उनके परिवारों को वित्तीय सुरक्षा मिलती है।

आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर कदम*

मछली पालन आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अहम माध्यम बन गया है। सरकार की योजनाएं किसानों, युवाओं, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को स्वरोजगार के नए अवसर दे रही हैं। आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण से मत्स्य क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं बन रही हैं।

मत्स्य पालन आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम

इच्छुक हितग्राही अपने नजदीकी मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क कर योजनाओं की विस्तृत जानकारी ले सकते हैं। मछली पालन न सिर्फ आय बढ़ाने का जरिया है, बल्कि आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

“युद्ध पूर्व स्तर पर लौटे जहाजों की आवाजाही” युद्ध से पहले की स्थिति में लौटे जहाजों का आवागमन”

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होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य, जहाजों की आवाजाही में सुधार

नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का सकारात्मक प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है।

हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अब यहां की स्थिति सामान्य हो गई है और जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच गई है। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने ओमान के तट के पास एक नया सुरक्षित मार्ग स्थापित किया है।

इस निर्णय के बाद जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एक दिन में कुल ट्रैफिक का 40 प्रतिशत, यानी 33 जहाज, इस नए सुरक्षित मार्ग से गुजरे, जिनमें से 25 जहाज बाहर की ओर जा रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि आठ जहाज अपनी पहचान छिपाकर, यानी ‘डार्क’ स्थिति में चल रहे थे। इसके अलावा, कुछ अन्य जहाज ईरान की समुद्री सीमा के निकट से गुजर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, लड़ाई के आरंभ के बाद फंसे जहाज अब बाहर निकल रहे हैं, और कुछ नए जहाज भी आ रहे हैं। यह संकेत देता है कि नेविगेशन की स्वतंत्रता फिर से बहाल हो रही है।

ईरान का ड्रोन हमला

ईरान ने होर्मुज में जहाज पर किया ड्रोन हमला

हालात एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए जब ईरान ने एक पोत पर ड्रोन से हमला किया। इस हमले के तुरंत बाद, संयुक्त राष्ट्र ने वहां चल रहे अभियान को पूरी तरह से रोक दिया। इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग 11,000 नाविकों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है।

यह ध्यान देने योग्य है कि ईरान ने मार्च के पहले सप्ताह में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद कर दिया था, जिसके कारण सैकड़ों जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद, होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बनी थी। इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र ने फंसे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया था।