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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महावीर जयंती के अवसर पर गुजरात में ‘सम्राट संप्रति म्यूजियम’ का उद्घाटन किया…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महावीर जयंती के अवसर पर गुजरात में गांधीनगर के कोबा गांव में नवनिर्मित ‘सम्राट संप्रति म्यूजियम’ का उद्घाटन किया. श्री महावीर जैन आराधना केंद्र में स्थित इस म्यूजियम का नाम सम्राट संप्रति महाराज (224-215 ईसा पूर्व) के नाम पर रखा गया है. इस दौरान प्रणानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “महावीर जयंती के पावन पर्व पर मुझे इस पवित्र जैन तीर्थ आने का सौभाग्य मिला है. मैं कोबा तीर्थ से सभी को महावीर जयंती की शुभकामनाएं देता हूं.

पीएम मोदी ने कहा मुझे खुशी है कि हजारों वर्ष की भारतीय विरासत, जैन धर्म का समयातीत ज्ञान, हमारी धरोहरें और उनसे मिलने वाली प्रेरणाएं. उन्हें आने वाली सदियों तक अमर बनाने के लिए, उन्हें नए और आधुनिक रूप में अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हमारे संतों ने इस जैन हेरिटेज म्यूजियम की संकल्पना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह संकल्पना एक भव्य रूप में साकार हो रही है. यह सम्राट संप्रति संग्रहालय, जैन दर्शन, भारतीय संस्कृति और हमारी प्राचीन धरोहर का एक पवित्र केंद्र बना है. मैं इस अद्वितीय प्रयास के लिए हमारे सभी जैन संतों का अभिनंदन करता हूं. इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी मौजूद रहे.

कुछ शासकों ने हिंसा को हथियार बनाकर किया शासन

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि उस दौर में जहां एक ओर कुछ शासकों ने हिंसा को हथियार बनाकर शासन किया, वहीं सम्राट संप्रति ने सिंहासन पर बैठकर अहिंसा का विस्तार किया. उन्होंने सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह का प्रचार-प्रसार किया. इतने निस्वार्थ भाव से शासन को सेवा का माध्यम मानकर जीवन जीना, यह सीख हमें भारत के अतीत से ही मिलती है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत में ज्ञान हमेशा से एक मुक्त प्रवाह रहा है. हर युग में तीर्थंकरों और ऋषियों-मनीषियों का अवतार हुआ। ज्ञान का संकलन बढ़ता चला गया. समय के साथ बहुत कुछ नया जुड़ता गया.

संदेश पूरी मानवता के लिए बहुत अहम

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया में जिस तरह के हालात हैं. जिस तरह विश्व अस्थिरता और अशांति की आग में झुलस रहा है, इस म्यूजियम की विरासत, इसका संदेश केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए बहुत अहम है. जो लोग यहां पर आएं, वे भारत की जैन धर्म की शिक्षाओं को विश्व के कोने-कोने में पहुंचाएं. भारत में ज्ञान हमेशा से एक मुक्त प्रवाह रहा है.

गांधीनगर, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज दुनिया में जिस तरह के हालात हैं। जिस तरह विश्व अस्थिरता और अशांति की आग में झुलस रहा है, इस म्यूजियम की विरासत, इसका संदेश केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए बहुत अहम है…जो लोग यहां पर आएं, वे भारत की…

पीएम मोदी बोले- 10 संकल्प दोहराने का अवसर

  1. पहला संकल्प: पानी बचाने का
  2. दूसरा संकल्प: एक पेड़ मां के नाम
  3. तीसरा संकल्प: स्वच्छता का मिशन
  4. चौथा संकल्प: वोकल फॉर लोकल
  5. पांचवां संकल्प: देश दर्शन
  6. छठा संकल्प: प्राकृतिक खेती को अपनाना
  7. सातवां संकल्प: स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना
  8. आठवां संकल्प: योग और खेल को जीवन में लाना
  9. नौवां संकल्प: गरीबों की सहायता का संकल्प
  10. दसवां संकल्प: भारत की विरासत का संकल्प – जो आप सभी ने स्वयं से जोड़ लिया है.

सदियों पुरानी 2,000 से अधिक वस्तुएं रखी

एक सरकारी बयान में कहा गया है कि म्यूजियम में सदियों पुरानी दुर्लभ जैन कलाकृतियां और पारंपरिक विरासत वस्तुएं हैं. इनमें जटिल रूप से गढ़ी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, लघु चित्र, चांदी के रथ, सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं. विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस म्यूजियम में कई विशाल हॉल हैं जिनमें 2,000 से अधिक वस्तुएं रखी गई हैं. यह म्यूजियम विजिटर्स को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव के बारे में कालानुक्रम आधारित समझ प्रदान करता है.

Iran Hormuz Plan: होर्मूज से गुजरने पर ईरान को देना होगा टोल! US-इजरायली शिप पूरी तरह से बैन, भारत का क्या होग…

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Iran Hormuz Plan: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच ने Strait of Hormuz के लिए एक नई मैनेजमेंट योजना को हरी झंडी दे दी है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का गुजरता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की संसद ने इस प्लान को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद अब ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल लगाने की तैयारी कर रहा है।

जहाजों पर टोल और बैन की तैयारी

इस नई योजना के तहत अब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाया जाएगा। इसके अलावा, US और Israel के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोकने की भी तैयारी है। यानी जो देश ईरान के खिलाफ हैं, उनके लिए यह रास्ता और मुश्किल हो सकता है।

और भी देशों पर लगेंगे प्रतिबंध?

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के एक सदस्य ने बताया कि यह प्लान सिर्फ अमेरिका और इजरायल तक सीमित नहीं है। जो देश ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं, उनके जहाजों पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस योजना का एक बड़ा मकसद ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना भी है।

जहाजों की सुरक्षा का भी लेगा ठेका

इस नई मैनेजमेंट योजना में सिर्फ टोल या बैन ही नहीं, बल्कि कई और चीजें भी शामिल हैं। इसमें जहाजों की सुरक्षा के लिए नए नियम, एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम और पर्यावरण की सुरक्षा के समाधानों को भी शामिल किया गया है। कुल मिलाकर, ईरान इस पूरे रास्ते को अपने हिसाब से रेगुलेट करना चाहता है।

पहले भी लगा चुका है पाबंदी

इससे पहले भी, अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई के कुछ दिनों बाद Islamic Revolutionary Guard Corps के एक सीनियर अधिकारी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आंशिक रूप से बंद करने की घोषणा की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे दुनिया भर में बड़ा एनर्जी क्राइसिस पैदा हो गया था, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल और LNG (गैस) इसी रास्ते से गुजरता है। जब यह रास्ता प्रभावित हुआ, तो कई देशों में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। इसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।

भारत पर क्या असर?

इस समुद्री रुकावट का असर India पर भी पड़ा। भारत अपनी कुल LPG का करीब 90% इसी रास्ते से आयात करता है, इसलिए सप्लाई में भारी कमी आ गई थी। इसका असर छोटे स्ट्रीट वेंडर्स से लेकर बड़े रेस्टोरेंट मालिकों तक देखने को मिला। हालांकि भारत उन 6 देशों में शामिल है जिनके जहाज युद्ध के बीच बिना रोक-टोक के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं। जिससे यह कहा जा सकता है कि इस टोल सिस्टम और बैन से फिलहाल भारत को राहत है।

नंदा देवी और शिवालिक से मिली राहत

हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ, जब नंदा देवी और शिवालिक जैसे जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिल गई। ये जहाज LPG लेकर भारत पहुंचे और इससे सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।

कुल मिलाकर क्या है मतलब?

सीधे शब्दों में समझें तो ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कंट्रोल और मजबूत करना चाहता है। अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।

Thalapathy Vijay Net Worth: कई लग्जरी कारें, बैंक अकाउंट में 213 करोड़. थलपति विजय की नेटवर्थ उड़ा देगी होश…

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Thalapathy Vijay Net Worth 2026: विजय कई सालों से तमिल सिनेमा के सबसे पॉपुलर सितारों में से एक रहे हैं. लेकिन अब उन्होंने एक अलग राह चुन ली है. विजय ने फिल्मी सफर को छोड़ते हुए राजनीति की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया है.

विजय ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, चुनाव लड़ने के लिओ हर उम्मीदवार को एक हलफनामा (affidavit) जमा करना होता है, जिसमें उनकी संपत्ति, जमीन-जायदाद और बाकी चीजों का पूरा ब्योरा दिया जाता है. इसके लिए बीते दिन विजय ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया, जो खूब सुर्खियां बटोर रहा है.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में आए

थलपति विजय ने सोमवार को अपनी पार्टी तमिलगा वेट्ट्रि कझगम (TVK) के प्रत्याशी के तौर पर नॉमिनेशन किया, जिसमें उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति का ब्योरा दिया है, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. ‘सिनेमा विकटन’ के मुताबिक हलफनामे से पता चला कि विजय के पास लगभग 404.58 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है.

404 करोड़ के मालिक हैं विजय

इस नॉमिनेशन के बाद थलपति विजय की संपत्ति को लेकर काफी चर्चा हो रही है. विजय की दौलत के बारे में जानकर हर कोई हैरान है. थलपति विजय के पास 404 करोड़ की चल संपत्ति है. वहीं, उनकी पत्नी संगीता सोरनालिंगम के पास लगभग 15.51 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है. दस्तावेजों से ये भी पता चलता है कि विजय के बैंक खातों में काफी रकम जमा है. खबरों के मुताबिक, सालिग्रामम स्थित ‘इंडियन ओवरसीज बैंक’ की एक ब्रांच में उनके बचत खाते में लगभग 213.36 करोड़ रुपये जमा हैं. इसके अलावा, ‘एक्सिस बैंक’ की इंदिरा नगर शाखा में उनकी लगभग 5.79 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट भी है.

विजय की लग्जरी कारें

हलफनामे से विजय की लग्जरी लाइफ के बारे में भी पता चलता है. विजय के पास कई लग्ज़री कारें हैं, जैसे BMW 530, Toyota Vellfire, और दूसरी कारें शामिल हैं. इन कारों की कुल कीमत लगभग 6 करोड़ रुपये है. कारों के अलावा, विजय ने लगभग 883 ग्राम वजन के सोने के गहनों का भी खुलासा किया है, जिनकी कीमत 1.20 करोड़ रुपये है. उनकी पत्नी, संगीता के पास सोने के गहनों का कहीं ज्यादा कलेक्शन है, जिसमें लगभग 391 सॉवरेन सोने के गहने शामिल हैं, जिनकी कीमत 4.07 करोड़ रुपये है. परिवार के पास लगभग 1 करोड़ रुपये के हीरे भी हैं.

विजय की इन्वेस्टमेंट और बैंक बैलेंस

अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी और बैंक खातों के अलावा, विजय ने कंपनियों, ट्रस्टों और व्यावसायिक संस्थाओं में भी बड़ी रकम इन्वेस्ट की है. हलफनामे में बताया गया है कि उन्होंने दुनिया भर में कंपनियों और व्यक्तियों में 56 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. ये निवेश एजुकेशनल और सोशल इंस्टीट्यूट और कंपनियों में किए गए हैं.

Cicada COVID Variant: कितना घातक है कोविड-19 का नया वेरिएंट BA.3.2? भारत में क्या है स्थिति? 23 देशों में कहर!

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Cicada COVID Variant: अगर आपको लग रहा था कि कोविड अब पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो ये खबर थोड़ा ध्यान खींचने वाली है। कोविड-19 का नया वेरिएंट BA.3.2, जिसे ‘Cicada’ नाम दिया गया है, अब धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों में फैलने लगा है।

खासकर अमेरिका में इसके केस तेजी से बढ़ रहे हैं और यही वजह है कि लोग फिर से सतर्क हो रहे हैं।

इस वेरिएंट की शुरुआत 2024 के आखिर में चुपचाप हुई थी, लेकिन अब 2026 तक यह 20 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है। ऐसे में आपके मन में भी सवाल होगा कि क्या ये पहले से ज्यादा खतरनाक है या सिर्फ एक और नया वेरिएंट है? मौजूदा वैक्सीन इसे कंट्रोल कर पाएगी या नहीं? और भारत में स्थिति क्या है? आइए ऐसे ही 6 सवालों के जवाब विस्तार से समझते हैं…

Cicada BA.3.2 COVID-19 Variant: BA.3.2 कहां से आया और क्या है इसमें खास?

BA.3.2 ओमिक्रॉन वेरिएंट की शाखा है, जो दिसंबर 2021 में पहली बार सामने आया था। SARS-CoV-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन में इसमें 70 से 75 आनुवंशिक बदलाव पाए गए हैं। स्पाइक प्रोटीन वही हिस्सा है जो वायरस को हमारे शरीर की कोशिकाओं में घुसने में मदद करता है और वैक्सीन भी इसी प्रोटीन को टारगेट करके काम करती हैं।

शोधकर्ताओं ने इसे सबसे पहले नवंबर 2024 में अफ्रीका में पहचाना। 2025 में यह वैश्विक स्तर पर फैलना शुरू हुआ और फरवरी 2026 तक 23 देशों में पहुंच चुका था। अमेरिका में पहला मामला जून 2025 में एक विदेशी यात्री में मिला। उसके बाद से यह 29 राज्यों के मरीजों और अपशिष्ट जल (wastewater) सैंपल्स में पाया जा रहा है। अपशिष्ट जल निगरानी अभी भी वायरस के फैलाव का सबसे तेज़ शुरुआती संकेत देने वाला तरीका है।

BA.3.2 को अलग बनाने वाली सबसे बड़ी बात क्या है?

सभी वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन SARS-CoV-2 बहुत तेजी से म्यूटेट करता है। हर बार जब यह कोशिका के अंदर अपनी कॉपी बनाता है, तो उसके जीन में छोटे-छोटे बदलाव होते हैं। ज्यादातर बदलाव गायब हो जाते हैं, लेकिन कुछ वायरस को फायदा देते हैं – जैसे प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने की क्षमता।

समझिए सरल उदाहरण से: आप अपने हाईस्कूल के 25वें रीयूनियन में पहुंचते हैं। पुराने दोस्तों को देखकर लगता है कि वजन बढ़ गया, बाल रंगवा लिए, कॉन्टैक्ट लेंस लगा लिए। आप उन्हें पहचान तो लेंगे, लेकिन थोड़ा समय लगेगा। अगर आप उन्हें हर महीने मिलते रहते तो तुरंत पहचान लेते।

BA.3.2 के साथ भी यही हो रहा है। यह JN.1 लाइनेज (जिस पर मौजूदा 2024-25 वैक्सीन बनी थी) से इतना अलग है कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली इसे ‘नया चेहरा’ मानकर देर से पहचानती है। नतीजा – संक्रमण ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है।

Coronavirus New Variant BA.3.2 Risk Rate: BA.3.2 से क्या खतरे हैं?

संक्रमण की रफ्तार बढ़ सकती है: क्योंकि प्रतिरक्षा प्रणाली इसे जल्दी नहीं पहचान पाती, इसलिए यह तेजी से फैल सकता है और कोविड केस में अचानक उछाल आ सकता है।

गंभीरता: अभी कोई सबूत नहीं कि यह पुराने वेरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक या ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा कर रहा है।

लॉन्ग कोविड: महामारी शुरू होने के बाद वायरस में बदलावों की वजह से लॉन्ग कोविड के मामले कम हुए हैं, लेकिन अभी भी हर 100 में से लगभग 3 मामलों में यह देखा जा रहा है।

सबसे बड़ा खतरा: कोविड के मामलों में बढ़ोतरी से भी ज्यादा गलत सूचना का खतरा है।

वैक्सीन की भूमिका – अभी भी जरूरी

मौजूदा कोविड वैक्सीन JN.1 आधारित हैं, इसलिए BA.3.2 के खिलाफ उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि वैक्सीन बेकार है। कई अध्ययनों से साफ है कि वैक्सीनेशन से अस्पताल में भर्ती और मौत की दर काफी कम होती है। अगर आप हाई-रिस्क ग्रुप में हैं तो डॉक्टर से बात करके बूस्टर डोज की सलाह जरूर लें।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्जीनिया विश्वविद्यालय के मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर काइल बी. एनफील्ड के मुताबिक, फेफड़ों और गहन चिकित्सा देखभाल के डॉक्टर के रूप में मैं रोज ऐसे मरीजों से मिलता हूं जिन्हें पुरानी फेफड़ों की बीमारी या लंबे कोविड (Long COVID) के कारण गंभीर संक्रमण का खतरा रहता है। ये मरीज मुझसे पूछते हैं – नए वेरिएंट के बारे में हमें कितना चिंतित होना चाहिए?

अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि BA.3.2 (Cicada) 2025-26 की सर्दियों में फैल रहे अन्य वेरिएंट्स की तुलना में अधिक घातक या अधिक गंभीर बीमारी पैदा कर रहा है। फिर भी यह चिंता का विषय है क्योंकि यह मौजूदा वैक्सीनों से काफी अलग है। नतीजतन, वैक्सीन से मिली प्रतिरक्षा इस वेरिएंट को उतनी तेजी से पहचान नहीं पा रही।

BA.3.2 Coronavirus Variant India Status: भारत में क्या स्थिति है?

भारत में अभी BA.3.2 के बड़े पैमाने पर मामले रिपोर्ट नहीं हुए हैं। लेकिन INSACOG के अनुसार, कोविड-19 का नया वेरिएंट XFG के 163 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय और INSACOG लगातार निगरानी रख रहे हैं। अपशिष्ट जल और जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए किसी भी नए वेरिएंट का जल्दी पता लगाया जा रहा है।

अपनी और समाज की सुरक्षा कैसे करें?

BA.3.2 या किसी भी श्वसन वायरस से बचाव के लिए ये साधारण लेकिन प्रभावी कदम अभी भी सबसे मजबूत हथियार हैं:

हाथ नियमित धोएं – बाथरूम के बाद, खाना बनाने-खाने से पहले और बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद। इससे श्वसन संक्रमण का खतरा 16-21% तक कम हो जाता है।

बीमार महसूस करें तो घर पर रहें – न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की सुरक्षा के लिए।

भीड़भाड़ वाले बंद स्थानों में कम समय बिताएं।

अगर आप पुरानी बीमारी (फेफड़े, दिल, डायबिटीज आदि) से ग्रस्त हैं तो अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह जरूर लें।

Cicada (BA.3.2) अभी तक गंभीरता के लिहाज से पुराने वेरिएंट्स से अलग नहीं है, लेकिन इसकी प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता इसे तेज़ी से फैलाने वाली बना रही है। घबराने की जरूरत नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है। वैक्सीन अपडेट, मास्क, हाथ धोना और बीमार होने पर घर रहना – ये पुराने लेकिन अभी भी सबसे कारगर हथियार हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO की नवीनतम अपडेट पर नजर रखें। सूचना सही स्रोतों से लें, अफवाहों से बचें।

Raj Panchak 2026: अप्रैल में इस दिन लगेगा राज पंचक, जानें इसकी तारीख और क्या है इसका प्रभाव…

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What is Raj Panchak: पंचांग के अनुसार, पंचक का विशेष महत्व माना जाता है. जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है, तब पंचक काल बनता है. आमतौर पर लोग पंचक का नाम सुनते ही डर जाते हैं और इसे अशुभ मानने लगते हैं, लेकिन सभी पंचक बुरे नहीं होते.

अप्रैल 2026 में लगने वाला पंचक राज पंचक है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में काफी सकारात्मक माना गया है. आइए जानते हैं अप्रैल में राज पंचक की सटीक तारीख, समय और इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

राज पंचक 2026, तिथि और समय पंचांग गणना के अनुसार, अप्रैल के महीने में पंचक की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को हो रही है. पंचक प्रारंभ: 16 मार्च 2026, सोमवार, शाम 06:14 बजे होगा. पंचक समाप्त: 21 मार्च 2026, शनिवार, दोपहर 02:27 बजे होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब पंचक की शुरुआत सोमवार से होती है, तो उसे राज पंचक कहा जाता है.

क्या होता है राज पंचक?

शास्त्रों में पांच प्रकार के पंचक बताए गए हैं, जैसे- रोग पंचक, अग्नि पंचक, मृत्यु पंचक, चोर पंचक और राज पंचक. सोमवार को शुरू होने वाला पंचक ‘राज पंचक’ कहलाता है. राज शब्द का अर्थ ही है, सुख, समृद्धि और वैभव देने वाला. माना जाता है कि राज पंचक के दौरान किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है. यह अन्य पंचकों की तरह डरावना या अशुभ नहीं होता.

राज पंचक का प्रभाव’

सरकारी और संपत्ति से जुड़े काम

राज पंचक को सरकारी कामकाज, संपत्ति की खरीद-बिक्री और जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दौरान किए गए निवेश भविष्य में उत्तम फल प्रदान करते हैं.

करियर और व्यापार में उन्नति

चूंकि यह राज सुख देने वाला है, इसलिए नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए यह समय प्रगति के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है. नए प्रोजेक्ट्स की योजना बनाने के लिए यह अच्छा समय है.

धार्मिक और मांगलिक कार्य

बाकी पंचक में कुछ काम जैसे लकड़ी इकट्ठा करना या घर की छत डालन की मनाही होती है, लेकिन राज पंचक में किए गए धार्मिक अनुष्ठान मानसिक शांति और यश दिलाते हैं.

Maulana Abdullah Salim Chaturvedi कौन है? CM Yogi की मां पर अभद्र टिप्पणी पर 900KM दूर से UP STF ने दबोचा…

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Maulana Abdullah Salim Chaturvedi Arrested: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करने वाले बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी को यूपी एसटीएफ (Special Task Force) ने करीब 900 किलोमीटर दूर से उठा लाई है।

अमौर थाना क्षेत्र के दलमालपुर गांव से की गई इस कार्रवाई के बाद मौलाना को उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपी पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया है। एसटीएफ का कहना है कि अभी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना क्यों इतनी चर्चा में है? एक वायरल वीडियो ने पूरे उत्तर प्रदेश में आग की तरह फैल गई।

आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं…

Who Is Maulana Abdullah Salim Chaturvedi: मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी कौन हैं?

मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी (जिन्हें अब्दुल्ला सलीम कासमी या सलीम चतुर्वेदी के नाम से भी जाना जाता है) बिहार के अररिया जिले के जोकीहाट थाना क्षेत्र के महलगांव निवासी है। वे एक इस्लामिक स्कॉलर और धार्मिक वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। अपनी तकरीरों के लिए मशहूर मौलाना राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। नाम के अंत में ‘चतुर्वेदी’ जोड़ने को लेकर भी विवाद रहा, क्योंकि यह पारंपरिक रूप से ब्राह्मण उपनाम माना जाता है।

Maulana Abdullah Salim Chaturvedi Controversial Statement: क्या था विवादित बयान?

कुछ दिनों पहले (रमजान के दौरान) बिहार में एक धार्मिक सभा के दौरान मौलाना ने सीएम योगी आदित्यनाथ की मां और ‘गौ माता’ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें कथित तौर पर ‘250 ग्राम गोश्त’ और अन्य अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया। इस बयान ने तुरंत आग भड़का दी।

यूपी में क्या-क्या हुआ?

FIR की बाढ़: बालरामपुर (7 मार्च 2026), बहराइच (सोमवार को नई FIR) समेत गोरखपुर और यूपी के कई जिलों में 80 से ज्यादा FIR दर्ज हुईं। भाजपा कार्यकर्ता, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और हिंदू संगठनों ने शिकायत की।

धारा: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) (शत्रुता फैलाना), 299 (धार्मिक भावनाएं भड़काना) और 353(1) जैसी धाराएं लगाई गईं।

प्रदर्शन: लखनऊ समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। मौलाना के पुतले फूंके गए। लोग लगातार गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यूपी सरकार ने STF को जिम्मेदारी सौंपी। टीम लंबे समय से मौलाना की तलाश में थी।

“मौलाना ने पहले CM योगी की मां को दी गाली, गिरफ्तार हुआ तो बोला- मेरे मुंह से निकल गई…माफ कर देयो.

STF की 900 किमी दूर की कार्रवाई

30 मार्च 2026 की देर शाम STF की टीम बिहार पहुंची। पूर्णिया के अमौर थाना क्षेत्र के दलमालपुर में छापेमारी कर मौलाना को हिरासत में लिया गया। AIMIM अमौर विधायक अख्तरुल ईमान ने पहले मौलाना की ‘गुमशुदगी’ की आशंका जताई थी, लेकिन बाद में STF द्वारा हिरासत की पुष्टि की। एसटीएफ प्रभारी का स्पष्ट बयान कि पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अपराधिक सबूत मिलने पर कानूनी कार्रवाई होगी।

क्यों मायने रखती है यह घटना?

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की टिप्पणी तक सीमित नहीं है। यह सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले विवादित बयानों, धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था के संतुलन का उदाहरण है। यूपी पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि CM या उनके परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे आरोपी कितनी दूर क्यों न हो। मौलाना पर पहले भी इंटरनेट माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के आरोप लग चुके हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा बताया गया था।

मौलाना को यूपी लाकर सख्त पूछताछ शुरू कर दी गई है। आगे की जांच चल रही है। AIMIM नेताओं ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है, लेकिन फिलहाल कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है। मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक भाषण कितने शक्तिशाली लेकिन जिम्मेदारी भरे हो सकते हैं। यूपी STF की इस कार्रवाई ने दिखा दिया कि 900 किलोमीटर दूर होने पर भी कानून की पहुंच से कोई बच नहीं सकता।

Uttar Pradesh IPS Transfer List: 27 IPS अफसरों का तबादला, 13 जिलों के SP-SSP बदले, Lucknow-Meerut में कौन आया?

West Bengal Polls 2026: ‘स्टूडेंट बनना चाहता हूं’, क्यों भाजपा में शामिल हुए  Leander Paes?

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Leander Paes: पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस मंगलवार को केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।

कोलकाता में जन्मे लिएंडर पेस को इस खेल के अब तक के सबसे बेहतरीन डबल्स खिलाड़ियों में से एक माना जाता है।

इससे पहले वो साल 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे और 2022 में गोवा चुनावों के दौरान उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार किया था। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन आज वो बीजेपी का हिस्सा बन गए हैं, ये ममता बनर्जी की पार्टी के लिए तगड़ा झटका है।

पार्टी में शामिल होने के बाद लिएंडर पेस ने किरण रिजिजू और पीएम मोदी की खुलकर तारीफ की और कहा कि ‘कभी-कभी मैं किरण रिजिजू को सुनकर हैरान हो जाता हूं कि इस व्यक्ति को स्पोर्टस के बारे में कितना ज्यादा ज्ञान है, मैं इनसे बहुत ज्यादा प्रभावित हूं और इनका स्टूडेंट बनना चाहता हूं।’

Leander Paes Joins Bjp:’बीजेपी से जुड़कर खुद को धन्य मान रहा हूं, मैं खुश हूं’

‘मैं इनको धन्यवाद देता हूं क्योंकि इन्होंने राजनीति में आने के लिए मुझे मोटिवेट किया तो वहीं पीएम मोदी की भी तारीफ करना चाहता हूं क्योंकि उनके नेतृत्व में देश विकासपथ पर आगे बढ़ रहा है। मैं भी देशवासियों और खेल के लिए कुछ योगदान करना चाहता हूं इसलिए मैंने राजनीति में आने का फैसला किया और बीजेपी से जुड़कर खुद को धन्य मान रहा हूं, मैं खुश हूं।’

‘अब युवाओं की सेवा करने का समय है’

पूर्व दिग्गज टेनिस स्टार लिएंडर पेस ने कहा, ‘यह मेरी ज़िंदगी का एक बड़ा दिन है। मैं PM मोदी, अमित शाह जी और नितिन नवीन जी का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा। यह मेरे लिए खेल और युवाओं की सेवा करने का एक बड़ा मौका है… मैंने 40 साल तक देश के लिए खेला, अब युवाओं की सेवा करने का समय है। ‘खेलो इंडिया’ आंदोलन और TOPS योजना सचमुच बहुत बढ़िया हैं। मैं जानता हूं कि किरण रिजिजू जी ने टोक्यो ओलंपिक में हमारे दल के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कितने जुनून से काम किया है।’

आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है-लिएंडर पेस

‘उन्होंने PM द्वारा सौंपी गई अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया। आज, भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमें अगले 20-25 सालों में खेल शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में, पश्चिम बंगाल में खेल का ज़्यादा बुनियादी ढांचा नहीं था। आज भी, देश में कोई इनडोर टेनिस कोर्ट नहीं है। बंगाल, तमिलनाडु, बिहार और बेहतर कर सकते हैं, लेकिन हमें खेल शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सशक्त बनाने पर ध्यान देने की ज़रूरत है… मेरा सपना भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए समान अवसर वाली छात्रवृत्ति का एक कार्यक्रम शुरू करना है।.’

Leander Paes के माता-पिता दोनों थे खिलाड़ी

गौरतलब है कि Leander Paes भारत के सबसे महान टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने शानदार करियर से देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। उनका जन्म 17 जून 1973 को Kolkata में हुआ था। उनके पिता Vece Paes भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे और ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके थे, जबकि उनकी मां Jennifer Paes राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं।

अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता

लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता था। वह लगातार 7 ओलंपिक (1992-2016) में भाग लेने वाले एकमात्र टेनिस खिलाड़ी हैं। अटलांटा में, उन्होंने ब्राजील के फर्नांडो मेलिगेनी को हराकर 44 साल बाद व्यक्तिगत ओलंपिक पदक का सूखा खत्म किया था।

Indian Express के नाम से मशहूर थी पेस-भूपति की जोड़ी

उन्होंने मुख्य रूप से डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में शानदार प्रदर्शन किया। पेस ने अपने करियर में 18 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं, जिनमें पुरुष युगल और मिश्रित युगल दोनों शामिल हैं। उन्होंने Mahesh Bhupathi के साथ मिलकर कई ऐतिहासिक जीत दर्ज कीं। यह जोड़ी “Indian Express” के नाम से प्रसिद्ध हुई। पेस ने Davis Cup में भी भारत के लिए कई यादगार जीत दिलाई। उन्हें “डेविस कप का हीरो” भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने कई बार मुश्किल परिस्थितियों में टीम को जीत दिलाई।

पुरस्कार और सम्मान

लिएंडर पेस को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें Padma Shri (2001) और Padma Bhushan (2014) से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भी मिला है।

CG: एशियाई खेलों के चयन पर नजर, तीरंदाज कोमालिका बारी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में दमदार प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त…

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कोमालिका विश्व कैडेट और विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज हैं’

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  ने बेटी को तीरंदाजी अपनाने के लिए किया प्रेरित’

कोमालिका का मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से जनजातीय क्षेत्रों से कई प्रतिभाएं सकती हैं सामने’

साल 2021 में जब कोमालिका बारी ने अपनी राज्य की साथी दीपिका कुमारी की बराबरी करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनने का गौरव हासिल किया, तब जमशेदपुर की इस खिलाड़ी से काफी सारी उम्मीदें जुड़ गई थीं।

हालांकि, जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर सर्किट में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। कोमालिका एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक वह पूरी तरह अपनी जगह पक्की नहीं कर पाई हैं।

अब 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में चयन की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, ऐसे में कोमालिका ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक को निखारने के साथ-साथ मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।

कोमालिका ने साई मीडिया को कहा कि, “मैं फिलहाल टॉप-16 में हूं और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हूं। एशियाई खेलों के चयन को लेकर मैं गंभीरता से तैयारी कर रही हूं। साथ ही, मैं ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अनुभव हासिल करना चाहती हूं, जबकि अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी बनाए रख रही हूं।”

झारखंड की यह प्रतिभाशाली तीरंदाज यहां जारी पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी प्रतियोगिता की प्रमुख आकर्षण हैं। कोमालिका ने आगे कहा कि, “मेरा अंतिम लक्ष्य (2028) ओलंपिक है। इस समय मेरा प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है और मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मानसिक रूप से मजबूत रहने पर है, क्योंकि प्रदर्शन में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।” वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं, “मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उतार- चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर आगे बढ़ा जा सकता है।”

उन्होंने यह भी बताया कि मैच अनुभव हासिल करने के अलावा वह अधिक से अधिक जनजातीय बच्चों को इस खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।

कोमालिका ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया। उन्हें उनकी मां, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का पूरा समर्थन मिला। उनकी मां ही उन्हें बिरसानगर में स्थानीय तीरंदाजी कोच के पास लेकर गईं, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। साल 2012 में कोमालिका ने अपने शुरुआती संघर्षों का सामना करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अभ्यास के लिए धनुष खरीद सकें, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बांस से बने अस्थायी धनुष का सहारा लिया।

प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद कोमालिका ने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी तथा पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। लेकिन देश की इस प्रतिष्ठित अकादमी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर वहां पहुंचना पड़ता था।

वह कहती हैं, “जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरे कई सीनियर खिलाड़ी थे जिन्हें मैं रोल मॉडल मानती थी। हमें उन्हें आमतौर पर सिर्फ प्रतियोगिताओं के दौरान देखने का मौका मिलता था और इससे हमें काफी प्रेरणा मिलती थी।”

उन्होंने आगे कहा कि , “यही एक बड़ा कारण है कि मैं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में हिस्सा ले रही हूं। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे खेलते हुए देखें और आगे आकर भाग लेने के लिए प्रेरित हों। अभी भी कई लोग भाग नहीं ले रहे हैं, लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक बहुत अच्छा मंच है, जो प्रेरणा और अवसर दोनों प्रदान करता है।”

24 वर्षीय कोमालिका रायपुर में जारी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में व्यक्तिगत रजत पदक जीत चुकी कोमालिका इस मंच के महत्व को भली-भांति समझती हैं और मानती हैं कि ट्राइबल गेम्स जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के विकास को नई गति दे सकते हैं। वे कहती हैं कि, “ट्राइबल गेम्स पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने की क्षमता रखते हैं, खासकर जनजातीय खिलाड़ियों के लिए। खेलो इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम और इन खेलों का आयोजन बेहद प्रभावशाली है। आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहां कई खेल एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, ठीक राष्ट्रीय खेलों की तरह।”

CG: तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही से छत्तीसगढ़ बना आवास निर्माण का मॉडल…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए हैं, जो इस वर्ष देश में सर्वाधिक है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सशक्त एवं समन्वित क्रियान्वयन से यह उपलब्धि संभव हो पाई है, जिससे प्रदेश आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर कहा कि छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण में एक नया इतिहास रचते हुए “सबको आवास” के संकल्प को तेजी से साकार किया है। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रथम कैबिनेट निर्णय में 18 लाख आवास स्वीकृत कर इस दिशा में ठोस शुरुआत की गई और वर्तमान में सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को कवर कर लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 5.87 लाख, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 13 हजार तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं।योजनाओं के प्रभावी समन्वय से 6 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य पार किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास पूर्ण होने का रिकॉर्ड है, जो तेज क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है। “डीलर दीदी” मॉडल के तहत 9 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्य आवास निर्माण सामग्री की आपूर्ति कर “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इसके साथ ही हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, समावेशी विकास और सुशासन की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि 6 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 1200 से अधिक “रानी मिस्त्री” शामिल हैं। साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18002331290 संचालित है। पिछले 10 महीनों में इस पर 1500 से अधिक शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त हुए, जिनका त्वरित निराकरण किया गया है। हर माह की 7 तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में “आवास दिवस” के माध्यम से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली से जानकारी सहज उपलब्ध हो रही है।

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहकर महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, समावेशी विकास और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है, जो राज्य के सतत एवं संतुलित विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगा।

CG: बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों का वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्स्थापन: दो चरणों में 34 हिरणों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया सुरक्षित…

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बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों को प्राकृतिक आवास में स्वछन्द विचरण हेतु छोड़ा गया। अभयारण्य स्थित ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर से  कुल 34 काले हिरणों को  वैज्ञानिक पद्धति से दो चरणों में सफलतापूर्वक उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया गया। इस वर्ष 60 ब्लैकबक पुनर्स्थापना का लक्ष्य है।

ब्लैकबक स्थानांतरण प्रक्रिया  पूरी तरह से वैज्ञानिक तकनीकों का पालन करते हुए निष्पादित किया गया, जिससे बिना किसी व्यवधान के ही हिरणों को वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। छोड़े गए हिरण  रामपुर ग्रासलैंड में निवासरत काले हिरणों से जाकर मिल गए। अधिकारियों ने बताया कि काले हिरणों के इस नए समूह से क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा और वन विभाग आने वाले दिनों में इनकी निरंतर निगरानी करेगा। काले हिरण जो एक समय छत्तीसगढ़ की धरती से विलुप्त हो गए थे, इस पुनर्स्थापन के प्रयास से अब अपने प्राकृतिक आवास में कुलांचे भरेंगे।

उल्लेखनीय है कि बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों का संरक्षण  प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण पांडे के मार्गदर्शन, मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी सतोविशा समझदार के कुशल नेतृत्व में तथा वनमण्डलाधिकारी  धम्मशील गणवीर के द्वारा सक्रिय प्रयास किया जा रहा है।

इस महत्वपूर्ण संरक्षण अभियान के दौरान अधीक्षक बारनवापारा कृषाणु चंद्राकर, परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री कविता ठाकुर, श्री सूर्यप्रकाश जाधव, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी गीतेश बंजारे, फील्ड बायोलॉजिस्ट ,सौरव मेहरा, पशु चिकित्सक  जयकिशोर जड़िया सहित  बारनवापारा अभयारण्य के समस्त स्टाफ मौजूद थे।