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यात्रीगण ध्यान दें! 1 मार्च से बदल जाएगा रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम, फटाफट जान ले अपने काम की खबर…

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अगर आप अपने मोबाइल फ़ोन से जनरल ट्रेन टिकट बुक करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत ज़रूरी है। इंडियन रेलवे 1 मार्च से UTS (अनरिज़र्व्ड टिकटिंग सिस्टम) ऐप बंद कर देगा। अब पैसेंजर्स को जनरल और प्लेटफ़ॉर्म टिकट बुक करने के लिए नए सुपर ऐप, RailOne पर निर्भर रहना होगा।

 रेलवे ने बताया कि यह बदलाव पैसेंजर्स को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर सभी सर्विस देने के लिए किया जा रहा है।

UTS ऐप धीरे-धीरे बंद होगा, RailOne नया प्लेटफ़ॉर्म बनेगा

अभी तक, पैसेंजर्स UTS ऐप के ज़रिए ऑनलाइन जनरल और प्लेटफ़ॉर्म टिकट खरीद सकते थे। लेकिन, 1 मार्च के बाद यह ऐप काम नहीं करेगा। इसकी जगह RailOne ऐप ले लेगा, जिसे पिछले साल लॉन्च किया गया था। RailOne को रेलवे का “वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म” बताया जा रहा है।

RailOne कई तरह की इंटीग्रेटेड सर्विस देगा

RailOne ऐप सिर्फ़ जनरल टिकट बुकिंग तक ही सीमित नहीं है। यह रिज़र्व्ड टिकट बुकिंग, प्लेटफ़ॉर्म टिकट बुकिंग, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, कोच की जगह, प्लेटफ़ॉर्म की जानकारी और PNR स्टेटस जैसी सुविधाएँ एक ही जगह पर देता है। इसके अलावा, IRCTC Rail Connect, NTES, Rail Madad और Food on Track जैसी सर्विसेज़ को भी इस ऐप में इंटीग्रेट किया गया है। इसका मतलब है कि पैसेंजर्स को अब अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं होगी।

UTS R-Wallet का क्या होगा?

रेलवे ने साफ़ किया है कि UTS ऐप के R-Wallet में पैसेंजर्स का बैलेंस बर्बाद नहीं होगा। पैसेंजर्स उसी लॉगिन ID और पासवर्ड से RailOne में साइन इन करके अपने वॉलेट बैलेंस को एक्सेस कर सकते हैं। UPI, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और R-Wallet जैसे डिजिटल पेमेंट ऑप्शन मौजूद रहेंगे।

जनरल टिकट पर 3% डिस्काउंट

RailOne ऐप को प्रमोट करने के लिए, रेलवे अभी जनरल टिकट पर 3% डिस्काउंट दे रहा है। यह डिस्काउंट सिर्फ़ डिजिटल पेमेंट करने पर ही मिलेगा। यह ऑफ़र 14 जुलाई, 2026 तक वैलिड रहेगा।

पैसेंजर्स को क्या करना चाहिए?

रेलवे ने पैसेंजर्स को सलाह दी है कि वे समय पर RailOne ऐप डाउनलोड करें, लॉग इन करें और अपनी प्रोफ़ाइल सेट अप करें। ताकि 1 मार्च के बाद टिकट बुक करने में कोई दिक्कत न हो।

बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, राजनीतिक अस्थिरता से वर्षों की कोशिशों पर विराम तय…

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बांग्लादेश में वोट चोरी और हिंसा की घटनाओं के बीच गुरुवार को आखिरकार चुनाव शुरू हो गया। बांग्लादेशी मीडिया ने चुनाव आयोग के हवाले से जानकारी साझा की है कि दोपहर 12:00 बजे तक पूरे देश में 32.88 फीसदी वोटिंग हुई।

ईसी के सीनियर सेक्रेटरी अख्तर अहमद ने शहर के निर्वचन भवन में दोपहर 1:10 बजे मीडिया को ब्रीफ करते हुए कहा, “हमने 42,651 पोलिंग स्टेशनों में से 32,789 से डेटा इकट्ठा किया है। डेटा के मुताबिक, वोटिंग 32.88 फीसदी है।”

देश भर में 300 पार्लियामेंट्री सीटों में से 299 पर शांतिपूर्ण माहौल में वोटिंग हो रही है।

शेख हसीना की सरकार के गिराए जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी खराब हो गए हैं। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान और चीन की तरफ ज्यादा झुकी हुई है। यूनुस के शासन में पाकिस्तान को बांग्लादेश में एंट्री मिल गई।

जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान बांग्लादेश में हालिया स्थिति पर अपना नियंत्रण बना रहा है। यही कारण है कि हाल के समय में बांग्लादेश में कुछ ऐसी नीतियां बनाई गई हैं, जिनका मकसद भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना था।

भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल होनी चाहिए और जल्द ही चुनाव होने चाहिए। भारत ने बांग्लादेश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए अपना समर्थन भी जताया था।

सर्वे में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सबसे आगे थी। भारतीय पक्ष और बीएनपी दोनों चुनाव के आखिरी नतीजे के आधार पर भारत-बांग्लादेश के बीच संबंधों को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए। भारत भी चुनाव पर करीब से अपनी नजर बनाए हुए है। इस चुनाव में जीत बीएनपी की हो या फिर जमात की, दोनों ही स्थिति में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है। इन सबसे ऊपर भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा सुरक्षा है।

भारत बांग्लादेश के साथ 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। यह भारत की किसी भी पड़ोसी के साथ सबसे लंबी सीमा है। ऐसे में भारत की शांति और सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां कोई बाड़ नहीं है। इन्हीं इलाकों से गैर-कानूनी इमिग्रेशन, जानवरों की तस्करी, नशीली दवाओं का व्यापार और नकली करेंसी का आना-जाना होता है।

एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिरता एक बड़ी चिंता है। एक मजबूत सरकार के साथ एक स्थिर बांग्लादेश का मतलब होगा कि सीमाएं सुरक्षित रहेंगी, क्योंकि दोनों पक्ष बातचीत करेंगे। भारत बांग्लादेश से आतंकवादियों की एंट्री को लेकर भी चिंतित है।

यूनुस के शासन में कई कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को रिहा किया गया है। साथ ही बांग्लादेश में यूनुस के काल में आईएसआई एक्टिव हो चुकी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिसका भविष्य में भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।

शेख हसीना सरकार गिरने से पहले, काउंटर-टेररिज्म दोनों देशों के बीच संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है। दोनों देशों ने पहले जो काउंटर-टेरर ऑपरेशन किए हैं, वे बिना किसी रुकावट के हुए हैं। भारत चाहेगा कि यह संतुलन बना रहे और इसलिए, लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का होना बहुत जरूरी है।

बांग्लादेश और भारत लंबे समय से व्यापारिक साझेदार रहे हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए एक स्थिर बांग्लादेश बहुत जरूरी है। हसीना की सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी अच्छे थे। दोनों देशों ने मिलकर आर्थिक सहयोग बढ़ाया था। इसमें व्यापार से आगे बढ़कर ऊर्जा सहयोग और बिजली का व्यापार भी शामिल था।

ये जरूरी मुद्दे हैं, और दोनों देश चाहेंगे कि ये बने रहें। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता पर निर्भर करेगा। किसी भी तरह की अस्थिरता दोनों देशों के वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देगी। भारत और बांग्लादेश ने 1971 से अब तक साथ मिलकर जिस तरह से हर क्षेत्र में आपसी संबंध स्थापित किए हैं और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है, वह सब बर्बाद हो जाएगा।

भारत को उम्मीद है कि बीएनपी चुनाव जीतेगी, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी की तुलना में इस पार्टी के साथ काम करना आसान होगा। एक अधिकारी ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अगर जमात सत्ता में आई तो संबंध पूरी तरह टूट जाएंगे। भारत ने जमात के साथ तब काम किया है जब वह पहले बीएनपी के साथ गठबंधन में थी। अभी स्थिति अलग है क्योंकि जमात और बीएनपी अब सहयोगी नहीं बल्कि दुश्मन हैं।

भारत लौटे बिना विजय माल्या को नहीं मिलेगी राहत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया अंतिम मौका…

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि जो व्यक्ति जानबूझकर अदालत की प्रक्रिया से बच रहा हो, वह ‘इक्विटेबल रिलीफ’ (न्यायोचित राहत) का लाभ नहीं ले सकता।

हालांकि, अदालत ने निष्पक्षता के आधार पर माल्या को यह स्पष्ट करने के लिए एक अंतिम मौका दिया कि क्या वे भारत लौटने का इरादा रखते हैं या नहीं।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ विजय माल्या की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की संवैधानिक वैधता और खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने की कार्यवाही को चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह यह दर्ज करने के पक्ष में है कि विजय माल्या अदालत के अधिकार क्षेत्र से बच रहे हैं, इसलिए उनकी याचिका में राहत की अपेक्षा नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “आपको वापस आना होगा। यदि आप वापस नहीं आते हैं तो हम आपकी याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। आप अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं, इसलिए आप राहत नहीं मांग सकते। फिर भी निष्पक्षता के तहत हम मामला खारिज नहीं कर रहे हैं और आपको एक और मौका दे रहे हैं।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी है।

इससे पहले विदेश मंत्रालय (एमईए) ने भी दोहराया था कि भारत सरकार आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि कई कानूनी प्रक्रियाएं शामिल हैं, लेकिन सरकार की ओर से विजय माल्या और ललित मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों को भारत लाकर अदालत में पेश करने की कोशिश की जा रही है।

लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी कि 31 अक्टूबर 2025 तक कुल 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है, जिनमें से 9 लोगों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है, जिससे 26,645 करोड़ रुपए का मूल नुकसान हुआ। इन पर 31 अक्टूबर 2025 तक 31,437 करोड़ रुपए का ब्याज भी जुड़ चुका है, जबकि 19,187 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है।

हालांकि, विजय माल्या और ललित मोदी ने अपने खिलाफ लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से इनकार किया है। माल्या ने हाल ही में केंद्र सरकार और सार्वजनिक बैंकों से यह भी सवाल किया था कि उनसे वसूली गई राशि को लेकर अलग-अलग बयान क्यों दिए जा रहे हैं, और इस मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की मांग की थी।

अमेरिका को टैरिफ लागू होने की उम्मीद : व्हाइट हाउस

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व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार समझौते के तहत टैरिफ कम करने के वादे को पूरा करेगा। व्हाइट हाउस ने इस समझौते को अमेरिकी किसानों, मजदूरों और उद्योगों के लिए एक सकारात्मक जीत बताया।

ट्रंप सरकार इस समझौते को एक मील का पत्थर मानती है, लेकिन उसे उम्मीद है कि प्रतिबद्धता को ऐसे एक्शन में बदला जाएगा, जिन्हें मापा जा सके। व्यापार प्रवर्तन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीति का एक अहम हिस्सा रहा है।

व्हाइट हाउस के अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही साबित कर चुके हैं कि हम सभी व्यापार साझेदारों से अपने डील कमिटमेंट्स को बनाए रखने की उम्मीद करते हैं।”

व्हाइट हाउस ने यह नहीं बताया कि किन टैरिफ लाइनों या क्षेत्रों में तुरंत बदलाव होंगे, लेकिन अमेरिकी फार्म समूहों ने बार-बार भारत की ऐतिहासिक रूप से ज्यादा कृषि शुल्क को अमेरिकी एक्सपोर्ट्स में रुकावट बताया है। उद्योग के प्रतिनिधियों ने नॉन-टैरिफ उपायों, जिसमें रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स और सर्टिफिकेशन नियम शामिल हैं, को भी बड़े मार्केट एक्सेस में रुकावट बताया है।

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल की नीतियों में भारत को दक्षिण एशिया और वेस्टर्न इंडो-पैसिफिक में एक अहम साझेदार बताया। व्यापार, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन रेजिलिएंस को उस साझेदारी के मुख्य स्तंभ के तौर पर रखा गया है।

अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और पिछले दस सालों में दोनों देशों के बीच गुड्स और सर्विसेज का ट्रेड लगातार बढ़ा है। हालांकि, टैरिफ और मार्केट एक्सेस को लेकर समय-समय पर तनातनी सामने आती हैं, लेकिन दोनों सरकारों ने व्यापार में आने वाली दिक्कतों को मैनेज करते हुए कमर्शियल एंगेजमेंट बढ़ाने के मकसद से बातचीत जारी रखी है।

नीतीश कुमार के राबड़ी देवी बयान पर हंगामा, तेजस्वी यादव ने दी तीखी प्रतिक्रिया…

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बिहार विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक हलकों में गर्मी बढ़ा गया है। सीएम नीतीश ने सदन में राबड़ी देवी को “लड़की” कहकर संबोधित किया, जिससे विपक्षी दलों में गहरी नाराजगी पैदा हो गई।

विपक्षी नेताओं ने सीएम के इस बयान को अनुचित और अपमानजनक करार दिया। विपक्ष के सदस्य सदन में हंगामा करने लगे और नारेबाजी की। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में बयान और हंगामा दोनों ही सुर्खियों में रहे।

राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित प्रतीत हो रहे हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि महिला नेताओं के सम्मान के खिलाफ भी है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बिहार के विकास और सामाजिक न्याय के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, और उन्हें इस तरह संबोधित करना राजनीति और नैतिकता दोनों के खिलाफ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी विधानसभा और राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विपक्ष ने इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ नया मुद्दा बनाने का प्रयास माना है। उनका कहना है कि इस प्रकार के विवाद केवल विधानसभा की गरिमा को प्रभावित करते हैं और जनता के सामने सरकार की छवि को कमजोर कर सकते हैं।

स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इस मामले में सीएम का रुख साफ दिखाई देता है। उनका कहना है कि राजनीतिक विरोधियों और पूर्व नेताओं को लेकर कठोर बयान देना उनकी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं, विपक्ष इसे व्यक्तिगत अपमान और महिला नेताओं के सम्मान के खिलाफ कदम मान रहा है।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी तेजस्वी यादव और सीएम नीतीश कुमार के बयान को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने मुख्यमंत्री की आलोचना की, जबकि उनके समर्थक इसे विपक्ष पर कड़ा प्रहार मान रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की राजनीति में इस तरह के बयान अक्सर चुनावी रणनीति और सत्ता समीकरण को प्रभावित करने के लिए दिए जाते हैं।

विधान परिषद में हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्षी दलों ने जोर देकर कहा कि ऐसे बयान संसद और विधान परिषद के गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं। वहीं, सत्ता पक्ष ने कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया थी और वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

अंततः, बिहार विधान परिषद में सीएम नीतीश कुमार द्वारा राबड़ी देवी पर दिया गया बयान और तेजस्वी यादव की तीखी प्रतिक्रिया राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का केंद्र बन गई है। यह मामला अगले कुछ दिनों तक राजनीतिक बहस और मीडिया की सुर्खियों में बना रह सकता है। जनता और राजनीतिक दल दोनों ही इस विवाद पर नजर बनाए हुए हैं।

केंद्रीय बजट 2027 में एमएसएमई, स्किलिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर; पीएम मोदी ने बताया गेमचेंजर…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना करते हुए इसे भारत के ‘आर्थिक परिवर्तन’ का ब्लूप्रिंट बताया।

उन्होंने कहा कि यह बजट सुधारों, छोटे उद्योगों, कौशल विकास, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान देता है और देश को नई विकास दिशा प्रदान करेगा।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “लोकसभा में अपने भाषण में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने इस बात का विस्तृत विवरण दिया कि इस वर्ष का बजट हमारे राष्ट्र के आर्थिक परिवर्तन में कैसे योगदान देगा। उन्होंने रिफॉर्म एक्सप्रेस, लघु एवं मध्यम उद्यमों को समर्थन, कौशल विकास, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों और अन्य बातों पर जोर दिया।”

बीते 1 फरवरी को संसद में पेश किए गए इस बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) पर विशेष फोकस रखा गया है, जो देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देता है और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। वित्त मंत्री ने एमएसएमई के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने, नियमों को सरल बनाने और लक्षित प्रोत्साहन देने की घोषणा की है, ताकि छोटे उद्योग वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ सकें और विस्तार कर सकें। उन्होंने कहा कि एमएसएमई भारत की विकास यात्रा की रीढ़ हैं और यह बजट उन्हें नवाचार और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक सहयोग देगा।

कौशल विकास और रोजगार सृजन भी बजट की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सरकार ने ग्रीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने की नई पहल का प्रस्ताव रखा है। उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को भी बढ़ावा देने की योजना है, ताकि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सरकार ने अगली पीढ़ी की परियोजनाओं पर जोर दिया है। डिजिटल कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और शहरी विकास में निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, स्वास्थ्य और शिक्षा को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों में बजट बढ़ाने और सुधारों के जरिए दूरदराज व पिछड़े इलाकों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलती सप्लाई चेन के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सरकार ने विकासोन्मुख खर्च के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन पर भी जोर देने की बात दोहराई है।

हरिद्वार और ऋषिकेश के मंदिरों में ड्रेस कोड लागू, फटी जींस-स्कर्ट पहनकर जाने वालों को नहीं मिलेगी एंट्री…

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हरिद्वार और ऋषिकेश के कई मंदिरों के बाहर सख्त ड्रेस कोड गाइडलाइन वाले पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में साफ-साफ लिखा है, “सभी महिलाओं और पुरुषों को अच्छे कपड़े पहनकर मंदिर में आना चाहिए।

शॉर्ट्स, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, रिप्ड जींस वगैरह पहनने वाले किसी भी व्यक्ति को बाहर से ही पूजा करके सहयोग करना चाहिए।” इन पोस्टरों में भक्तों से मंदिर परिसर में अच्छा व्यवहार और पारंपरिक कपड़े पहनने की अपील की गई है। ये संदेश हरिद्वार और ऋषिकेश के बड़े मंदिरों में एक साथ दिखाई दिए हैं। मंदिर मैनेजमेंट का कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। पोस्टरों में साफ-साफ लिखा है कि जो भक्त तय ड्रेस कोड का पालन नहीं करेंगे, उन्हें मंदिर के बाहर से ही पूजा करनी होगी।

दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर में सख्ती

हरिद्वार में दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर के एंट्रेंस पर भी ऐसे ही पोस्टर लगाए गए हैं। महानिर्वाणी अखाड़े के सेक्रेटरी और मंदिर के मैनेजर श्री महंत स्वामी रवींद्र पुरी महाराज ने भक्तों से अच्छा व्यवहार और कपड़े पहनने की अपील की है। उन्होंने सभी हिंदू भाई-बहनों से अपने बच्चों में धार्मिक मूल्यों को शामिल करने की अपील की।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोगों को मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपने मन की शांति के लिए मंदिर जाना चाहिए। मंदिर जाने से पहले हमारे कपड़े, व्यवहार, व्यवहार और भावनाएँ पवित्र होनी चाहिए; तभी मंदिरों में जाने का असली फ़ायदा मिलेगा। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि महिलाएँ और युवा अक्सर अनजाने में ऐसे कपड़े पहन लेते हैं जो धार्मिक नियमों के खिलाफ़ होते हैं, जिससे बाद में उनकी बुराई होती है।

ऋषिकेश के इस्कॉन मंदिर में भी पोस्टर लगे

ऋषिकेश के इस्कॉन मंदिर के बाहर भी ऐसा ही एक पोस्टर लगाया गया है। पोस्टर में लिखा है, “मंदिर आने वाली सभी महिलाओं, लड़कियों और पुरुषों से अनुरोध है कि वे मंदिर परिसर में अच्छे कपड़े पहनें। अगर कोई भी छोटे कपड़े जैसे हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, फटी जींस वगैरह पहनकर आता है, तो कृपया बाहर से आकर अपना सहयोग दें। हम अपनी भारतीय संस्कृति के रक्षक हैं।”

पहले भी चलाए जा चुके हैं कैंपेन

स्वामी रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी कैंपेन चलाए जा चुके हैं। उन्होंने मंदिर एडमिनिस्ट्रेटर्स, सरकारी मंदिर बोर्ड्स और संतों के आश्रमों से इस मामले पर खास ध्यान देने की अपील की। ​​उन्होंने कहा, “अगर हमारे आचार-व्यवहार और व्यवहार में मर्यादा नहीं रखी जाएगी, तो हमारे धर्म की भी रक्षा नहीं हो पाएगी। धर्म का मतलब है बनाए रखना, इसलिए मर्यादा का पालन करना ज़रूरी है।”

हर की पौड़ी – 110 साल पुराने कानून को रद्द करना

दूसरी तरफ, कुछ ही दिन पहले, श्री गंगा सभा ने हर की पौड़ी इलाके में 10 से ज़्यादा जगहों पर “गैर-हिंदुओं के लिए नो एंट्री” के साइन लगाए थे। गंगा सभा के प्रेसिडेंट नितिन गौतम के मुताबिक, यह कोई नया नियम नहीं है; बल्कि हरिद्वार म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन बाय-लॉ 1916 पहले से ही हर की पौड़ी इलाके में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाता है। गंगा की धार्मिक पहचान को बचाए रखने के लिए 2027 कुंभ मेले से पहले इस नियम को सख्ती से लागू करने की मांग की जा रही है।

रील और ड्रोन पर सख्ती

धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, गंगा सभा ने हर की पौड़ी पर बिना इजाज़त के फ़िल्मी गानों की रील और ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। संतों का मानना ​​है कि इन गतिविधियों से तीर्थस्थल की शांति और पवित्रता भंग होती है।

हरिद्वार में 2027 में अर्ध कुंभ मेला होने वाला है, लेकिन उससे पहले ही इस इलाके में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगाने की मांग तेज़ हो गई है। इस बीच, आज हरिद्वार के हर की पौड़ी इलाके में करीब 12 पोस्टर लगाए गए, जिन पर लिखा था, “गैर-हिंदुओं की एंट्री नहीं, हरिद्वार म्युनिसिपल एक्ट के तहत आदेश।” गंगा सभा की तरफ से घाटों पर अलग-अलग जगहों पर लगाए गए इन पोस्टरों ने गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

खतरे में पड़ी राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता! बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने भेजा नोटिस, जाने क्या है पूरा मामला ?

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BJP MP निशिकांत दुबे ने लोकसभा में एक मोशन पेश किया है, जिसमें कांग्रेस MP और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पार्लियामेंट्री मेंबरशिप खत्म करने की मांग की गई है। यह कदम भारत-US इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट और यूनियन बजट को लेकर सरकार पर राहुल गांधी के तीखे हमलों के बीच उठाया गया है।

निशिकांत दुबे ने मोशन पेश किया

BJP MP निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने लोकसभा में एक मोशन पेश किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं। दुबे ने कहा कि अपने मोशन में उन्होंने मांग की है कि इस मामले पर चर्चा हो, राहुल गांधी की पार्लियामेंट्री मेंबरशिप खत्म की जाए और उन्हें लाइफटाइम चुनाव लड़ने से रोका जाए। हालांकि, दुबे ने साफ किया कि राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन पेश करने का कोई प्लान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक इंडिपेंडेंट मोशन है जिसमें गांधी को पार्लियामेंट से सस्पेंड करने की मांग की गई है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन पेश नहीं करेगी। राहुल गांधी का कल का भाषण हटा दिया जाएगा क्योंकि उनके लगाए गए आरोप ऑथेंटिकेट नहीं थे।

सोरोस का नाम भी आया

निशिकांत दुबे ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि अपने प्रपोज़ल में उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी बाहरी ताकतों के सपोर्ट से देश को गुमराह कर रहे हैं।

राहुल गांधी के बयान पर विवाद

बुधवार को लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने इंडिया-US ट्रेड एग्रीमेंट में देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद मानती है कि दुनिया इस समय एक अस्थिर दौर से गुज़र रही है, जहाँ एनर्जी और फाइनेंस को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद, उनके मुताबिक, भारत ने अपनी एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े अहम फैसलों में US को ज़्यादा दखल दिया है।

BJP नेताओं ने इसे ‘इमैच्योर’ बताया

कई BJP नेताओं ने राहुल गांधी के भाषण की आलोचना करते हुए इसे ‘इमैच्योर’ बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश की इमेज खराब करने की कोशिश कर रहा है।

कहां तक पहुंची एयर इंडिया हादसे की जांच, सरकार ने SC को बताया; प्रशांत भूषण से क्या बोले CJI…

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को केंद्र सरकार ने कहा कि एयर इंडिया विमान हादसे की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (एएआईबी) द्वारा की जा रही जांच अब अपने आखिरी चरण में है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार से अब तक अपनाए गए ‘प्रोसिजरल प्रोटोकॉल’ पर एक छोटी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि 12 जून, 2025 को हुए विमान हादसे की एएआईबी जांच आखिरी पड़ाव पर है और इसके कुछ हिस्से दूसरे देशों में पूरे होने हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई तय करने का आग्रह किया। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि एएआईबी की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाए। मेहता ने भरोसा दिलाया कि विवरण साझा किया जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि एएआईबी का काम क्रैश की वजह का पता लगाना है, न कि मकसद बताना।

मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें: सीजेआई

गैर सरकारी संगठन सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि तीन और बोइंग के साथ ऐसी ही घटनाएं हुई थीं और केंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गैर सत्यापित रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें।

कमेंट करते समय कंजर्वेटिव होना चाहिए

सीजेआई ने कहा कि पिछले सप्ताह कहा गया कि लंदन-दिल्ली उड़ान में भी फ्यूल स्विच में दिक्कत थी। बाद में, एयरलाइन ने कहा कि यह ठीक था। कहा किसी एयरलाइन पर कमेंट करते समय कंजर्वेटिव होना चाहिए।

पायलट कह रहे हैं कि बोइंग 787 सुरक्षित नहीं

भूषण ने कहा कि 8,000 से अधिक पायलट कह रहे हैं कि बोइंग 787 सुरक्षित नहीं है। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि भूषण को संतुष्ट करने का एकमात्र तरीका खुद भूषण की अध्यक्षता में कमेटी बनाना है।

आपको बता दें कि अहमदाबाद से लंदन जा रहे दुर्घटनाग्रस्त हुए इस विमान में 261 लोग सवार थे। चालक दल के सदस्यों सहित 260 लोगों की दुर्घटना में मौत हो गई थी सिर्फ एक व्यक्ति ही बचा था। मरने वालों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। विमान के पायलट सुमित सभरवाल के पिता और कुछ और लोगों ने विमानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर रखी हैं। साथ ही हादसे की जांच की मांग भी की है।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और डीजीसीए की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (एएईइबी) की जांच अंतिम चरण में है और इसके कुछ हिस्से विदेशों में किए जाने हैं।

भारत बंद आज, किसान संघ और ट्रेड यूनियन किस बात के विरोध में; जानें क्या रहेगा खुला…

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नए श्रम कानूनों, आर्थिक नीतियों और भारत और अमेरिका की ट्रेड डील के विरोध में गुरुवार को भारत बंद का आह्वान किया गया है। 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट प्लेटफॉर्म ने अलग-अलग किसान संगठनों के समर्थन से बंद का आह्वान किया है।

राज्य स्तर पर कुछ राजनीतिक दलों ने भी बंद को समर्थन दिया है। विस्तार से जानते हैं कि इस दौरान क्या खुला और क्या बंद रहेगा।

संयुक्त मंच में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं। ANI से बात करते हुए, SKM के संयोजक हन्नान मोल्लाह ने इस समझौते पर असहमति जताई और कहा कि इसके भारतीय किसानों पर बुरे परिणाम होंगे। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अमेरिका की चालाकी के आगे घुटने टेकने का आरोप लगाया।

क्या खुला रहेगा

आपातकालीन सेवाएं: अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है।

एम्बुलेंस सेवाएं: चिकित्सा आपात स्थिति में सहायता के लिए एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के चलने की संभावना है।

हवाई और रेल सेवाएं: उड़ानें और ट्रेनें चलने की उम्मीद है, लेकिन यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक या स्थानीय विरोध के कारण होने वाली संभावित देरी के लिए एयरलाइन या IRCTC ऐप चेक करते रहें।

दवा की दुकानें: मेडिकल स्टोर्स और फार्मेसी खुले रहने की संभावना है।

जरूरी आपूर्ति: दूध और अखबार की सप्लाई जैसी जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी।

बैंकिंग (सीमित): हालांकि बैंक यूनियन हड़ताल पर हैं, लेकिन नेट बैंकिंग और एटीएम (ATM) सेवाएं चालू रहने की उम्मीद है।

क्या रहेगा बंद

केरल, कर्नाटक और ओडिशा सहित कुछ राज्यों में स्कूल और कॉलेज बंद रह सकते हैं, यदि स्थानीय संगठन इस बंद को अपना समर्थन देते हैं। उन इलाकों में बाजार और स्थानीय दुकानें आंशिक या पूरी तरह से बंद रह सकती हैं, जहां हड़ताल का व्यापक असर दिखेगा। कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने के कारण बैंकों के कामकाज में बाधा आ सकती है। कुछ शाखाएं बंद रह सकती हैं या सीमित कर्मचारियों के साथ काम कर सकती हैं।

कई शहरों में सड़क जाम, विरोध प्रदर्शन या सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है, जिससे जाम की स्थिति बन सकती है। निजी कार्यालयों के सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है।