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राजेश एक्सपोर्ट्स की वित्तीय स्थिति पर जांच…

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राजेश एक्सपोर्ट्स के CFO को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि MD को केवल 17,000 रुपये प्रति माह का भुगतान किया गया। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कंपनी के विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और अन्य वित्तीय अनियमितताएँ सामने आई हैं। ED ने बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी से जुड़े स्थानों पर छापे मारे हैं, जहां कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। यह मामला वित्तीय धोखाधड़ी के संकेत दे रहा है, जिसमें शेयरों के हेरफेर के माध्यम से धन का अवैध निकासी भी शामिल है।

राजेश एक्सपोर्ट्स की वित्तीय स्थिति पर जांच

राजेश एक्सपोर्ट्स के संकटग्रस्त CFO को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) को केवल लगभग 17,000 रुपये प्रति माह का भुगतान किया गया, जबकि कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये का समेकित राजस्व रिपोर्ट किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में कंपनी के खिलाफ की गई खोजों के बारे में यह जानकारी दी।

ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स से जुड़े नौ स्थानों पर बेंगलुरु और मुंबई में छापे मारे, यह कार्रवाई भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा कंपनी और इसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करने के बाद की गई। ED की जांच में पाया गया कि राजेश एक्सपोर्ट्स के विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।

ED द्वारा की गई जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के प्रमुख व्यवसाय संकेतक सामान्य व्यावसायिक प्रथाओं से काफी भिन्न थे। “वरिष्ठ प्रबंधन को दी गई वेतन राशि कंपनी के संचालन के पैमाने की तुलना में असामान्य रूप से कम थी। CFO को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला, जबकि MD को केवल 17,000 रुपये प्रति माह का भुगतान किया गया,” बयान में कहा गया।

कंपनी ने अपने विदेशी लेनदेन, जिसमें आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार के बकाया और देनदारियों का निपटान शामिल है, के संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया, जिससे इन लेनदेन की वास्तविकता की पुष्टि करना लगभग असंभव हो गया। उदाहरण के लिए, अफ्रीकी खानों में 1035 करोड़ रुपये के निवेश का कोई रिकॉर्ड कंपनी द्वारा नहीं प्रस्तुत किया गया।

एजेंसी ने यह भी पाया कि लगभग 3000 करोड़ रुपये के विदेशी व्यापार बकाया और देनदारियों के बीच संदिग्ध सेट-ऑफ किया गया था। “कंपनी संदिग्ध विदेशी पक्षों के साथ व्यापार बकाया और देनदारियों का सेट-ऑफ कर रही थी,” एजेंसी ने कहा।

जांच में स्टॉक में विसंगति भी सामने आई, क्योंकि खोज के दौरान भौतिक स्टॉक की जांच में फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भौतिक स्टॉक के बीच लगभग 40% का अंतर पाया गया।

जांच में REL के शेयरों में संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड का भी खुलासा हुआ, जो कुछ व्यक्तियों द्वारा किए गए थे, जिनके नाम अंतरराष्ट्रीय जांच पत्रकारों के संघ (ICIJ) द्वारा जारी लीक में भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए, यह पता चला कि 600 करोड़ रुपये से अधिक का धन शेयरों के हेरफेर के माध्यम से भारत से बाहर निकाला गया।

खोज के दौरान विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

Monsoon Tracker: मानसून की एंट्री शुरू! IMD का नया अपडेट, जानिए दिल्ली समेत उत्तर भारत में कब बदलेगा मौसम….

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IMD Weather Update 2026: मानसून. जानिए दिल्ली-एनसीआर, बिहार और उत्तर भारत में कब होगी भारी बारिश और उमस से कब मिलेगी राहत.

पूर्वांचल जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

बिहार में फिर तेज हुई मानसूनी गतिविधियां

दिल्ली को जल्द उमस भरी गर्मी राहत

IMD मैप में दिखे घने मानसूनी बादल

Monsoon Tracker: उत्तर भारत के लोगों के लिए भीषण उमस के बीच राहत की बड़ी खबर है. लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार उत्तर प्रदेश में अपनी दस्तक दे दी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून ने इस बार अपने पारंपरिक सोनभद्र वाले मार्ग के बजाय बिहार से सटे बलिया जिले के रास्ते प्रदेश में प्रवेश किया है.

पिछले एक हफ्ते से पटना के आसपास रुकी मानसून की उत्तरी सीमा (NLM – Northern Limit of Monsoon) अब फिर से सक्रिय हो गई है. IMD द्वारा जारी ताजा मानसून मैप और सैटेलाइट तस्वीरों में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर घने मानसूनी बादलों के साथ-साथ एक मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) की गतिविधि साफ दिखाई दे रही है. ऐसे में अब यूपी, बिहार और दिल्ली-एनसीआर के लोगों की नजरें अगले कुछ दिनों के मौसम पर टिकी हुई हैं.

IMD Weather  मानसून Update 2026:. जानिए दिल्ली-एनसीआर, बिहार और उत्तर भारत में कब होगी भारी बारिश और उमस से कब मिलेगी राहत.

Monsoon Tracker: उत्तर भारत के लोगों के लिए भीषण उमस के बीच राहत की बड़ी खबर है. लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार उत्तर प्रदेश में अपनी दस्तक दे दी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून ने इस बार अपने पारंपरिक सोनभद्र वाले मार्ग के बजाय बिहार से सटे बलिया जिले के रास्ते प्रदेश में प्रवेश किया है.

पिछले एक हफ्ते से पटना के आसपास रुकी मानसून की उत्तरी सीमा (NLM – Northern Limit of Monsoon) अब फिर से सक्रिय हो गई है. IMD द्वारा जारी ताजा मानसून मैप और सैटेलाइट तस्वीरों में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर घने मानसूनी बादलों के साथ-साथ एक मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) की गतिविधि साफ दिखाई दे रही है. ऐसे में अब यूपी, बिहार और दिल्ली-एनसीआर के लोगों की नजरें अगले कुछ दिनों के मौसम पर टिकी हुई हैं.

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 24 जून को मानसून की उत्तरी सीमा बिहार के मोतिहारी के आसपास तक पहुंच गई थी. इसके बाद मानसूनी हवाओं ने तेजी पकड़ी और बलिया जिले के पूर्वी छोर के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर रही हैं. मौसम विभाग के नए ‘एडवांस ऑफ मॉनसून मैप’ (Advance of Monsoon Map) में पूर्वी यूपी के कई हिस्सों को मानसून क्षेत्र में दिखाया गया है.

दिल्ली-NCR में मानसून की कब होगी एंट्री?

दिल्ली-एनसीआर के लोग इस समय लगभग 43°C से ऊपर के ‘रियल फील’ (उमस भरे तापमान) और भीषण गर्मी से परेशान हैं. सफदरजंग मौसम केंद्र (Safdarjung Weather Station) के मुताबिक, हवा में नमी का स्तर बढ़ने से उमस चरम पर है. हालांकि, IMD का कहना है कि मानसूनी हवाएं अब उत्तर-पश्चिम भारत की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.

मौसम विभाग के जारी ‘मानसून ट्रैक मैप’ के अनुसार, अगले 48 से 72 घंटों में मानसून पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तरफ आगे बढ़ेगा, जिससे दिल्ली के लिए भी रास्ता साफ हो जाएगा. फिलहाल दिल्ली और पंजाब-हरियाणा के आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कुछ इलाकों में प्री-मानसून शावर (Pre-Monsoon Showers) देखने को मिल सकते हैं. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जून के आखिरी दिनों (28 से 30 जून) या जुलाई की शुरुआत तक देश की राजधानी में मानसून आधिकारिक तौर पर दस्तक दे देगा.

IMD सैटेलाइट मैप: क्या बता रही हैं?

भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा मानसून बुलेटिन में साफ दिख रहा है कि मानसून गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार के बड़े हिस्सों को कवर कर चुका है. सैटेलाइट तस्वीरों में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ऊपर बादलों का एक बड़ा समूह (Cloud Mass) दिखाई दे रहा है. मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले 2 से 3 दिनों के दौरान मानसून उत्तर प्रदेश के मध्य भागों की ओर आगे बढ़ सकता है, जिसके बाद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ पहाड़ी इलाकों में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा सकता है.

अन्य राज्यों में क्या है मौसम का अनुमान?

उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी मौसम का मिजाज धीरे-धीरे बदल रहा है. हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में फिलहाल शुष्क पश्चिमी हवाओं के कारण गर्मी बनी रह सकती है, लेकिन पूर्वी हवाओं के सक्रिय होते ही यहां भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा. मौसम विभाग लगातार मानसून की गति पर नजर बनाए हुए है और कृषि मंत्रालय भी खरीफ की बुआई को देखते हुए राज्यों को लगातार अपडेट भेज रहा है.

भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान….

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ऊर्जा की कमी और मानसूनी बारिश में कमी इसका कारण है। महंगाई की बढ़ती दर उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को प्रभावित कर रही है। इसके साथ ही, खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।”

ऊर्जा की कमी, सामान्य से कम मानसून और वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है।

ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को यह अनुमान जताया। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 में 7.7 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रही थी।

एसएंडपी ने एक रिपोर्ट में कहा, ”ऊर्जा की कमी, औसत से कम मानसून का अनुमान और वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के बीच, हमारा अनुमान है कि मार्च, 2027 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह जाएगी।

वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.7 प्रतिशत थी।”महंगाई का असरएसएंडपी का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के अनुरूप है।

अल नीनो के कारण मानसूनी बारिश प्रभावित हुई है। 22 जून तक बारिश की कमी बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है। कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के लिए योजनाएं बनाई हैं।

इसके तहत कम बारिश वाले हालात के हिसाब से वैकल्पिक फसलों की सिफारिश की गई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत आयात करता है और वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी से उसका आयात बिल बढ़ा है और कुल मिलाकर महंगाई बढ़ी है।

खरीद क्षमता और खाद्य उत्पादन पर प्रभावमहंगाई लोगों की खरीद क्षमता को कम कर रहीरिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा संकट का असर दिख रहा है।

उद्योग को कच्चे माल की लागत और आपूर्तिकर्ता के डिलिवरी समय में काफी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, खाद की ऊंची कीमतें खाद्य उत्पादन पर असर डालती हैं और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ाती हैं।

बढ़ती महंगाई लोगों की खरीद क्षमता को कम कर रही है। इससे वृद्धि पर असर पड़ रहा है। उर्वरक कीमतों में तेज बढ़ोतरी खाद्य उत्पादन पर असर डाल सकती है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा सकती है।

भारत में तीसरी तिमाही में उपभोक्ता महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत अधिक होगी और चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो जाएगी। इसका कारण विनिर्माता ऊर्जा की बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं।

साथ ही हाल ही में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नीतिगत दर रेपो में वृद्धि का अनुमान है।”,

” मशहूर केजीएफ (Kolar Gold Fields) बंद होने के सालों बाद, अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल में देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन की शुरुआत…”

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क्या भारत में सोने की खदानें सिर्फ फिल्मों या इतिहास की किताबों तक सीमित हैं? कर्नाटक की मशहूर केजीएफ (Kolar Gold Fields) बंद होने के सालों बाद, अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल में देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन की शुरुआत हो चुकी है. जियोमैसूर और डेक्कन गोल्ड माइंस के इस बड़े प्रोजेक्ट से हर साल टन के हिसाब से सोना निकालने की तैयारी है. जानिए यह प्रोजेक्ट भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे बदलेगा और आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा. क्या आंध्र प्रदेश बनेगा नया सोने का गढ़?

जब भी भारत में सोने की खदान की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले कर्नाटक की मशहूर ‘कोलार गोल्ड फील्ड्स’ (KGF) की तस्वीर उभरती है. फिल्मों और इतिहास के पन्नों में सिमट चुकी इस कहानी के बाद, अब भारत के माइनिंग सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में देश की पहली प्राइवेट सेक्टर की सोने की खदान और प्रोसेसिंग फैसिलिटी का उद्घाटन हो चुका है. यह कदम देश को सोने के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग माना जा रहा है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कर्नूल जिले के तुग्गली मंडल में आने वाले जोन्नागिरी में इस प्राइवेट गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया है. इस पूरे प्रोजेक्ट को जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड मिलकर संभाल रहे हैं, जिन्होंने इसमें करीब 405 करोड़ रुपये का एक बड़ा निवेश किया है. इस जगह की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पहली यूनिट की औपचारिक शुरुआत के साथ ही दूसरी यूनिट का शिलान्यास भी कर दिया. इस मौके पर उनके साथ राज्य के मंत्री कोल्लू रवींद्र, निम्मला रामानायडू और टीजी भरत भी मौजूद थे. यह पूरा प्रोजेक्ट कुल 1,500 एकड़ के बड़े इलाके में फैला हुआ है, जिसके पहले फेज में फिलहाल 600 एकड़ जमीन पर एक्टिव माइनिंग का काम शुरू किया जा चुका है. इस बड़े प्रोजेक्ट की अहमियत को देखते हुए राज्य कैबिनेट ने इसके होस्ट विलेज यानी जोन्नागिरी का नाम बदलकर सांकेतिक रूप से ‘स्वर्णगिरी’ रख दिया है.

आंध्र प्रदेश सरकार के लिए यह गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट किसी लॉटरी से कम नहीं है और सरकारी अधिकारी इसकी तुलना सीधे कर्नाटक के केजीएफ से कर रहे हैं. इस प्लांट से उत्पादन के पहले साल में ही 400 किलोग्राम सोना निकालने की उम्मीद जताई गई है, जो कि अगले साल बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगा. जैसे-जैसे इस प्लांट की प्रोसेसिंग कैपेसिटी को बढ़ाया जाएगा, यहां से हर साल 2 टन यानी 2,000 किलोग्राम सोना निकालने का लक्ष्य रखा गया है.

यह प्रोजेक्ट सिर्फ सोना ही नहीं उगलेगा, बल्कि इससे लगभग 700 स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे. सबसे मजेदार बात यह है कि राज्य सरकार को यहां से निकलने वाले कुल सोने की वैल्यू पर 4 परसेंट की रॉयल्टी मिलेगी. मौजूदा अनुमानों के हिसाब से सरकार को पहले साल के 400 किलोग्राम प्रोडक्शन से लगभग 57 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलेगी, जो अगले साल 900 किलोग्राम प्रोडक्शन होने पर बढ़कर करीब 144 करोड़ रुपये हो जाएगी.

साल 2001 में जब कर्नाटक की केजीएफ खदान पूरी तरह बंद हो गई, तो भारत में प्राइमरी लेवल पर सोने की माइनिंग का काम सिर्फ सरकारी हुट्टी गोल्ड माइंस तक ही सीमित रह गया था, जो कि कर्नाटक में है. किसी भी ऐसी जगह पर जहां सालों से काम बंद पड़ा हो, दोबारा सोने का डिपॉजिट ढूंढना और वहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करना बेहद लंबा, खर्चीला और हाई-रिस्क वाला काम होता है. इसके लिए सालों की खोजबीन और भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है. स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट आज अगर हकीकत बन पाया है, तो उसकी वजह प्राइवेट कंपनी जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सालों की मेहनत है, जिसने इस इलाके में दशकों तक रिसर्च की और रिसोर्सेज को डेवलप किया.

तमिलनाडु की त्रिवेणी अर्थमूवर्स के बैकअप और डेक्कन गोल्ड माइंस के सपोर्ट के साथ इस कंपनी ने सबसे पहले 1990 के दशक में यहां खोजबीन के राइट्स हासिल किए थे. इसके बाद साल 2006 में माइनिंग लीज के लिए अप्लाई किया गया और अब जाकर करीब 405 करोड़ रुपये का निवेश करने के बाद यहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो पाया है.

इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने में सरकार की पॉलिसी और माइनिंग रिफॉर्म्स ने भी एक बहुत बड़ा रोल निभाया है. साल 2015 में सरकार ने नियमों में कुछ बदलाव किए थे, जिसके तहत मिनरल ब्लॉक्स के लिए ट्रांसपेरेंट ऑक्शन यानी पारदर्शी नीलामी को जरूरी बना दिया गया था. इसके बाद साल 2021 में एक और बड़ा अमेंडमेंट किया गया, जिसने प्राइवेट कंपनियों का रास्ता और आसान कर दिया. इस नए नियम के मुताबिक, अगर कोई प्राइवेट कंपनी किसी मिनरल डिपॉजिट को खोज निकालती है, तो माइनिंग के राइट्स उसी के पास सुरक्षित रहेंगे और वह वहां से निकाले गए रिसोर्सेज को कमर्शियल तौर पर बाजार में बेच भी सकती है. स्वर्णगिरी भारत के उन पहले बड़े गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे इस नए कानूनी ढांचे का सीधा फायदा मिला है, और यह दिखाता है कि भारत के माइनिंग सेक्टर में अब प्राइवेट निवेश की भूमिका कितनी तेजी से बढ़ रही है.

अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो केजीएफ ने लगभग 120 सालों के दौरान देश को अनुमानित 800 से 900 टन सोना दिया था. उस खदान की गहराई 3.2 किलोमीटर तक नीचे चली गई थी, जो इसे दुनिया की सबसे गहरी खदानों में से एक बनाती थी, लेकिन धीरे-धीरे वहां सोने का अयस्क कम होता गया और आखिरकार सरकार को उसे बंद करना पड़ा. इसके मुकाबले स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट भारत की गोल्ड माइनिंग के सफर में एक बिल्कुल नया चैप्टर है.

डेक्कन गोल्ड माइंस के एक ऑडिट के मुताबिक, इस साइट पर करीब 82 लाख टन ओर मौजूद है, जिसमें प्रति टन औसतन 1.49 ग्राम सोना मिल सकता है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस खदान में करीब 12 टन शुद्ध सोना मौजूद है. इसके मेन माइनिंग पिट की ऑपरेशनल लाइफ की अवधि करीब आठ से नौ साल की होने की उम्मीद है. हालांकि, आंध्र प्रदेश सरकार का यह भी कहना है कि अगर इस पूरे बड़े रीजन को देखा जाए, तो यहां 42.5 टन तक सोना मिल सकता है, लेकिन ये अनुमान अभी सिर्फ शुरुआती खोज पर आधारित हैं और इनका पूरी तरह से वैरिफिकेशन होना अभी बाकी है.

स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी माइनिंग टेक्नोलॉजी है, जो इसे पुराने केजीएफ से बिल्कुल अलग बनाती है. जहां केजीएफ में जमीन के अंदर मीलों गहरे जाकर अंडरग्राउंड माइनिंग करनी पड़ती थी, जो बेहद खतरनाक और मुश्किल काम था, वहीं स्वर्णगिरी को एक ओपन-पिट माइन के रूप में डेवलप किया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि यह एक खुली खदान होगी, जहां बड़ी-बड़ी मशीनों के जरिए सीधे जमीन की ऊपरी सतह की खुदाई करके सोना निकालने वाले ओर को बाहर निकाला जाएगा. यह तरीका न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि इसमें समय और लागत भी काफी कम आती है, जिससे भारत में सोने का उत्पादन अब और भी ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा.

“चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी से लोग परेशान”

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कड़ी गर्मी और उमस ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जिससे लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हैं। बाजारों में सन्नाटा है और सड़कें वीरान हो गई हैं।

बच्चे और लोग गर्मी से बेहाल हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

“चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी से लोग परेशान”

भीषण उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप से लोगो की दिनचर्या पूर्ण रूप से प्रभावित हो गई है। गर्म हवाएं दिन के साथ रात में भी चल रही हैं।

जिसकी वजह से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है जिससे लोगों की रात की नींदे नहीं पूरी हो पा रही हैं। चिलचिलाती धूप और गर्मी का कहर जारी है।

कई दिनों से भीषण गर्मी और तपन से लोग परेशान है। सूर्य की गर्मी शरीर झुलसा रही है। गर्म हवाओं के चलते लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हैं।

दिन में बाहर निकलते ही गला सूखने लगता है। सुबह 10 बजे के बाद से ही सड़कें गर्म हो जाती हैं और दोपहर दो बजे तो मानों अंगारे बरसने लगते हैं।

“चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी से लोग परेशान”

बुधवार को तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस रहा। तेज धूप और भीषण गर्मी का असर बाजारों और सड़कों पर देखने को मिला।

दोपहर होते ही मुख्य सड़कों और व्यापारिक केंद्रों पर सन्नाटा पसर रहा।

सड़कों पर चलने वाले राहगीरों और दफ्तर आने-जाने वालों का पसीना नहीं रुक रहा था।

चेहरा झुलसा देने वाली तीखी धूप से बचने के लिए लोग छाता, टोपी और गमछा लेकर चल रहे थे।

घर में भी लोग गर्मी से बेहाल हो गए हैं। पंखे और कूलर से कोई राहत नहीं मिल रही है। गर्मी की वजह से कई तरह की परेशानियां हो रही है।

ऐसे में तपती धूप जितना असर बड़े लोगों पर करती है उससे कहीं ज्यादा बच्चों पर करती है।

कड़ी धूप बच्चों को अपनी चपेट में ले लेती है। इसका सीधा असर उसकी सेहत पर पड़ता है।

छात्राएं सुबह जिस उमंग और उत्साह से स्कूल जाती दिखी छुट्टी के बाद घर वापस होते समय उन सभी छात्राओं का चेहरा मुरझाया हुआ नजर आया।

भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए दुपट्टे और ओढ़नी से सर को ढककर स्कूल से घर जाती छात्राएं देखी गई।

यह दृश्य देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस समय भयंकर गर्मी में कितनी विकट समस्या है।

 बिना फार्मर रजिस्ट्री भी किसानों को मिलेगा उर्वरक….

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कृषि विभाग ने बिना फार्मर रजिस्ट्री वाले किसानों को उर्वरक देने का निर्णय लिया है।

अब किसान अपनी खतौनी में दर्ज रकबे के अनुसार उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है, जिससे फास्फेटिक और यूरिया की मांग बढ़ी है।

“बिना फार्मर रजिस्ट्री भी किसानों को मिलेगा उर्वरक”

बिना फार्मर रजिस्ट्री वाले किसानों को भी उर्वरक मिलेगा। किसानों की खतौनी में दर्ज रकबे के अनुसार उर्वरक दिया जायेगा।

किसानों की समस्याओं को देख कृषि विभाग ने उर्वरक वितरण में संशोधन किया है। खरीफ में फसलों की बुवाई के साथ फास्फेटिक और यूरिया की डिमांड बढ़ने लगी है। खरीफ सीजन में धान की बुवाई की जायेगी।

इसके लिए किसान नर्सरी तैयार करने में जुट गये हैं। इसके अलावा मोटे अनाज में मक्का तथा दलहनी, तिलहनी फसकी की भी खेती होगी। सीधे धान की बुवाई शुरू हो गयी हैं, जबकि कुछ जगहों पर पंपसेट से पानी चलाकर धान की रोपाई भी होने लगी है।

बिना फार्मर रजिस्ट्री भी किसानों को मिलेगा उर्वरक

किसान मोटे अनाज व दलहनी, तिलहनी फसलों की बुवाई भी करने लगे। इसके साथ फास्फेटिक खाद व यूरिया की मांग बढ़ने लगी है। उर्वरक वितरण में यह नियम लागू किया गया कि जिन किसानों ने फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराया है उन्हे उर्वरक नहीं मिलेगा।

इससे काफी किसान परेशान हो गये। यह देख कृषि विभाग ने समसत फुटकर उर्वरक विक्रेताओं व साधन सहकारी समितियों को निर्देशित किया है कि जिन किसानों का फार्मर आईडी नहीं बना है उनकों खेत की खतौनी में अंकित क्षेत्रफल व बोई गयी फसलों के आधार पर उर्वरक दिया जायेगा।

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि किसान खतौनी व आधार कार्ड उर्वरक विक्रेता को उपलब्ध कराकर अपनी जोत और बोई गयी फसलों के अनुसार उर्वरक की खरीदारी कर सकते हैं। किसी भी किसान को फार्मर आईडी के अभाव में उर्वरक देने से मना नहीं किया जायेगा।

अयोध्या में बनकर तैयार हुआ नर्सिंग कॉलेज व छात्रावास….

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राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज परिसर में अत्याधुनिक नर्सिंग कॉलेज भवन और छात्रावास का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस आधुनिक परिसर के साथ अब जिले में नर्सिंग शिक्षा को मजबूत आधार मिल गया है।

केन्द्रीय सहायतित योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड, अयोध्या इकाई द्वारा यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी की गई।

परियोजना में जी 1 मंजिला एकेडमिक ब्लॉक और जी 2 मंजिला हॉस्टल ब्लॉक का निर्माण शामिल था।

30 अगस्त 2024 को कार्य प्रारंभ होने के बाद 28 फरवरी 2026 को निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कर लिया गया।

अयोध्या में बनकर तैयार हुआ नर्सिंग कॉलेज व छात्रावास

इस नर्सिंग कॉलेज में आधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षण सुविधाएं और छात्रावास का प्रावधान किया गया है, जो भविष्य के नर्सिंग पेशेवरों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवासीय सुविधा उपलब्ध कराएगा।

चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना से अयोध्या में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास को नई गति मिलेगी।

इस आधुनिक नर्सिंग कॉलेज के शुरू होने से अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को नर्सिंग पेशे में करियर बनाने का बेहतर अवसर मिलेगा। साथ ही, राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंदर यादव ने बताया कि परियोजना को उच्च गुणवत्ता के साथ समयसीमा के अंदर पूरा करने के लिए निरंतर निगरानी रखी गई।

निर्माण कार्य में स्थानीय श्रमिकों को भी रोजगार मिला, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचा। यह परियोजना न केवल अयोध्या बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक सकारात्मक विकास है।

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से युक्त नर्सिंग कॉलेज अब तैयार है, जो आने वाले वर्षों में कुशल नर्सिंग पेशेवर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ईरानी तेल पर अमेरिका ने दी रियायत, भारत को कितना फ़ायदा?

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भारत पिछले कुछ महीनों से दूसरों के युद्ध की क़ीमत चुका रहा है.

28 फ़रवरी को जब इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठने लगे.

अमेरिका के दबाव में भारत को कई नीतियां बदलनी पड़ीं. होर्मुज़ स्ट्रेट से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत को कई स्तरों पर संघर्ष करना पड़ा. दरअसल अमेरिका का भारी दबाव था कि भारत कहाँ से तेल ख़रीदे और कहाँ से नहीं.

भारत कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी के लिए आयात पर निर्भर है. ईरान युद्ध ने हाल के महीनों में इन तीनों ईंधनों की क़ीमतों में भारी बढ़ोतरी की है.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक, चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक और दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है. घरेलू ऊर्जा उद्योग की बात करें तो भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यातक है.

हाल तक भारत के ज़्यादातर ऊर्जा आयात हॉर्मुज़ के रास्ते रूस से आते थे जबकि रिफाइंड उत्पादों का निर्यात भी इसी मार्ग से होता था.

जब होर्मुज़ पूरी तरह संचालन में था, तब भारत के लगभग 45 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत एलएनजी और 90 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी रास्ते से गुज़रते थे.

भारत पहले ईरान के तेल पर काफ़ी निर्भर था. हालांकि हाल के वर्षों में ईरानी ऊर्जा पर कड़े प्रतिबंधों के कारण उसने अपनी निर्भरता मध्य-पूर्व के अन्य देशों इराक़, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत की ओर बढ़ा दी.

भारत की ज़्यादातर एलएनजी आपूर्ति क़तर, यूएई और ओमान से होती थी जबकि एलपीजी की आपूर्ति मुख्य रूप से यूएई, क़तर, कुवैत, सऊदी अरब और ओमान से होती थी.

” जीएसटी विवादों के जल्द समाधान ” करदाताओं और कारोबारियों को विवादों का समाधान ..”

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जीएसटी से जुड़े विवादों के तेजी से निपटारे की दिशा में जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की चेन्नई बेंच ने अपनी पहली सुनवाई शुरू की।

इससे करदाताओं और कारोबारियों को विवादों का समाधान करने के लिए एक प्रभावी मंच मिलेगा।

न्याय व्यवस्था में तेजी लाने के उद्देश्य से ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है।

जीएसटी से जुड़े विवादों के तेजी से निपटारे की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल की चेन्नई बेंच ने अपनी पहली सुनवाई के साथ औपचारिक रूप से कामकाज शुरू कर दिया।

इससे करदाताओं, कारोबारियों और उद्योग जगत को अपीलों के निपटारे के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध होगा।

पहली सुनवाई का उद्घाटन जीएसटीएटी की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के प्रेसिडेंट जस्टिस डॉ.संजय कुमार मिश्रा ने वर्चुअल माध्यम से किया।

उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल जीएसटी व्यवस्था के तहत उत्पन्न विवादों के समाधान के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

कार्यक्रम में प्रमुख सदस्य

कार्यक्रम में जीएसटीएटी प्रिंसिपल बेंच के ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस मयंक कुमार जैन भी शामिल हुए। उन्होंने ट्रिब्यूनल की भूमिका और करदाताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर प्रकाश डाला।

स्वागत भाषण

इससे पहले जीएसटीएटी तमिलनाडु और पुडुचेरी के वाइस प्रेसिडेंट प्रवीण कुमार जैन ने स्वागत भाषण दिया। चेन्नई बेंच के ज्यूडिशियल मेंबर गिरीश कुमार वैश और टेक्निकल मेंबर शेख खादर रहमान भी मौजूद रहे।

समारोह में उपस्थित अधिकारी

समारोह में तमिलनाडु सरकार के कमर्शियल टैक्स कमिश्नर एस. नागराजन, कस्टम्स के चीफ कमिश्नर एस.के. विमलनाथन और जीएसटी व सेंट्रल एक्साइज चेन्नई नॉर्थ कमिश्नरेट के प्रिंसिपल कमिश्नर प्रदीप कुमार सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में हिस्सेदारी

कार्यक्रम में वकीलों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, उद्योग संगठनों, विभागीय अधिकारियों और करदाताओं ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने कहा कि जीएसटीएटी बेंच की शुरुआत से लंबित अपीलों के समाधान में तेजी आएगी और जीएसटी व्यवस्था में भरोसा मजबूत होगा।

क्या है जीएसटीएटी?

जीएसटी मामलों की अपील सुनने वाला विशेष ट्रिब्यूनल•करदाताओं और विभाग के विवादों का निपटारा करता है•हाईकोर्ट जाने से पहले प्रभावी अपीलीय मंच

सामान्य प्रश्न

जीएसटीएटी का उद्देश्य क्या है?

जीएसटीएटी का उद्देश्य जीएसटी व्यवस्था के तहत उत्पन्न विवादों का निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित न्याय प्रदान करना है।

भारत में अमेजन की सबसे तेजी से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट…

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अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एंडी जेसी ने बुधवार को कहा कि भारत कंपनी के क्विक कॉमर्स कारोबार के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि कंपनी की ‘अमेजन नाउ’ सेवा भारत में अमेजन की सबसे तेजी से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट बन गई है।

अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एंडी जेसी ने बुधवार को कहा कि भारत कंपनी के क्विक कॉमर्स कारोबार के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि कंपनी की ‘अमेजन नाउ’ सेवा भारत में अमेजन की सबसे तेजी से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट बन गई है।

मुंबई के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित ‘अमेजन नाउ’ माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर का दौरा करने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए जेसी ने कहा कि यह सेवा असाधारण गति से बढ़ रही है, क्योंकि ग्राहक अब ऑर्डर देने के कुछ ही मिनटों के भीतर डिलीवरी प्राप्त करना पसंद कर रहे हैं।

माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर इस तरह से तैयार किए गए हैं कि वे किराना सामान, शैम्पू, बच्चों से जुड़े उत्पाद और घरेलू उपयोग की वस्तुओं जैसे रोजमर्रा के जरूरी सामानों को तेजी से चुनकर ग्राहकों तक भेज सकें।

इस व्यवस्था के जरिए ग्राहक ऑर्डर देने के कुछ ही मिनटों के भीतर अपना सामान प्राप्त कर सकते हैं।

जेसी ने कहा, “भारत में होना और मुंबई के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में से एक में स्थित ‘अमेजन नाउ’ माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर का दौरा करना बेहद अच्छा अनुभव रहा।”

उन्होंने कहा, “किराना, शैम्पू, बच्चों के उत्पाद और अन्य जरूरी सामान जैसे उत्पाद ऑर्डर मिलने के कुछ ही मिनटों में चुनकर ग्राहकों तक पहुंचा दिए जाते हैं।”

जेसी के अनुसार, जो प्राइम सदस्य इस सेवा का उपयोग करना शुरू करते हैं, उनकी खरीदारी की आवृत्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।

उन्होंने बताया कि सेवा का उपयोग शुरू करने के बाद प्राइम सदस्य पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक खरीदारी करने लगते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में इस सेवा की शुरुआत के बाद से हर तिमाही में ऑर्डर की संख्या दोगुनी होती जा रही है।

जेसी ने कहा, “ग्राहकों को यह सेवा बेहद पसंद आ रही है। प्राइम सदस्य इसका इस्तेमाल शुरू करने के बाद अपनी खरीदारी की आवृत्ति तीन गुना बढ़ा देते हैं और लॉन्च के बाद से हमने हर तिमाही में ऑर्डर की संख्या को दोगुना होते देखा है।”

भारत में ‘अमेजन नाउ’ को कंपनी का सबसे तेजी से बढ़ता ई-कॉमर्स कारोबार बताते हुए जेसी ने कहा कि अमेजन इसे 300 से अधिक शहरों तक पहुंचाने की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य भारत में मिनटों में डिलीवरी करने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क तैयार करना है।

जेसी ने बताया कि भारत में क्विक कॉमर्स मॉडल विकसित करने के दौरान मिले नवाचार और संचालन संबंधी अनुभव अब अमेजन को अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसी तरह की सेवाओं का विस्तार करने में मदद कर रहे हैं।

भारत में कंपनी की भविष्य की संभावनाओं को लेकर विश्वास जताते हुए जेसी ने कहा कि उन्हें उन टीमों, कर्मचारियों और साझेदारों पर गर्व है जिन्होंने इस कारोबार को खड़ा करने में योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार में अवसरों की अभी सिर्फ शुरुआत हुई है और आने वाले समय में यहां विकास की संभावनाएं बेहद विशाल हैं।