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“जलेबी का हिंदी नाम क्या है? 99% लोग नहीं जानते हैं यह वाला नाम, बता द‍िया तो मान जाएंगे ज्ञानी हो आप”

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जलेबी एक ऐसी मिठाई है जो भारत में सभी को पसंद होती है. अगर कोई जलेबी का नाम भी ले लेता है तो लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. जलेबी त्योहारों से लेकर शादी-ब्याह तक हर जगह मौजूद होती है.

त्योहारों के समय भी लोग एक दूसरे को मिठाई के तौर पर देते हैं. कई जगह पर तो सुबह के नाश्ते में लोग जलेबी खाना बहुत ही ज्यादा पसंद करते हैं. जलेबी हर एक मौके को बहुत ही ज्यादा खास और यादगार बना देती है (Popular Sweets In India). जलेबी की खासियत की बात करें तो, उसकी आउटर लेयर कुरकुरी होती है और उसके अंदर मीठा रस भरा होता है जो उसको बहुत ही ज्यादा टेस्टी बनाता है. जलेबी मिठाई होने के बावजूद अन्य मिठाइयों से बहुत ही अलग है (Jalebi Is Different From Other Sweets), लेकिन इतनी खास होने के बाद भी इसका इंग्लिश नाम पूछा जाए तो अधिकांश लोगों को नहीं पता होगा. और आप जानते हैं जलेबी का ‍िहदी नाम क्‍या है. सुनकर चकरा गए ना आप, तो चलिए आज जलेबी से जुड़ी कुछ अहम बातें जानते हैं (Facts About Jalebi).

जलेबी क्या है? (What Is Jalebi?) जलेबी एक गोल और घुमावदार मिठाई होती है. जलेबी को बनाने के लिए एक बैटर तैयार किया जाता है उसके बाद उसे गरम तेल या घी में तला जाता है. जब वो तल जाती है फिर उसको चाश्नी में डुबो दिया जाता है. जलेबी को अंग्रेजी में ‘Sweet Pretzel’ या ‘Coiled Funnel Cake’ भी कहा जाता है क्योंकि वो कॉइल की तरह दिखती है. कुछ लोग इसको ‘Indian Syrup-Coated Dessert’ के नाम से भी जानते हैं. इसका स्वाद और बनावट इसको अन्य मिठाइयों से अलग बनाता है. ये बाहर से क्रंची और अंदर से रस भरी होती है.

कैसा होता है जलेबी का स्वाद? जलेबी के स्वाद की बात करें तो, जिसने गर्मा-गरम जलेबी खाई होगी वो ही इसके स्वाद का असली मजा बता सकता है. जब आप इसे मुंह में रखते हैं तो सबसे पहले इसकी कुरकुराहट का मजा आता है, फिर अंदर से मीठा रस मुंह में फैल जाता है. जलेबी को अक्सर रबड़ी, दही या दूध के साथ खाया जाता है, जिससे उसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है.

हर मौके पर याद की जाती है जलेबी भारत में जलेबी सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि एक परंपरा है. हर त्योहार में जलेबी तो बनती ही है. कई राज्यों में तो लोग इसे सुबह के नाश्ते में भी खाना बहुत ही ज्यादा पसंद करते हैं – जैसे मध्यप्रदेश में पोहा के साथ गरम जलेबी या उत्तर भारत में समोसे के साथ इसको जरूर खाया जाता है. शहरों की गलियों से लेकर गांव की चौपालों और मिठाई की दुकानों पर जलेबी हमेशा ताजा और गरम मिलती है जलेबी का हिंदी नाम क्या है? वैसे तो जलेबी को भारत में भी “जलेबी” ही कहा जाता है. सच तो ये है क‍ि यह अरबी शब्द “जलाबिया” से आया है. भारतीय मूल पर जोर देने वाले कुछ एक्‍सपर्ट इसके प्राचीन भारतीय नाम कुंडलिका या जलवल्लिका भी बताते हैं, जो इसके रसीले स्वभाव को दर्शाता है.

जलेबी से जुड़े रोचक फैक्ट्स (Facts Of Jalebi) मूल रूप से विदेशी मिठाई बता दें, कि भारत में इतनी ज्यादा फेमस और पारंपरिक मिठाई मध्य एशिया (Middle East) से आई है. वहां इसे जलाबिया या ज़ुलबिया के नाम से जाना जाता है. बाद में यह भारत आई और यहां के स्वाद के अनुसार बदलती गई.

दूध के साथ जलेबी भारत के कुछ हिस्सों में जलेबी को गरम दूध के साथ खाया जाता है. यह सर्दियों में खास तौर पर पसंद किया जाता है क्योंकि इससे शरीर को गर्मी मिलती है.

विश्व जलेबी दिवस 30 जुलाई को विश्व जलेबी दिवस (World Jalebi Day) भी मनाया जाता है. इस दिन कई मिठाई की दुकानों पर जलेबी की खास तैयारी होती है और सोशल मीडिया पर लोग अपनी पसंदीदा जलेबी की तस्वीरें भी शेयर करते हैं.

दुनियाभर में प्रसिद्ध बता दें, जलेबी सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और कुछ अफ्रीकी देशों में भी बहुत ही पसंद की जाती है. इसका अनोखा स्वाद इसे दुनिया की सबसे खास मिठाइयों में से एक बनाता है.

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि…

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”महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि; प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि, सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतें हुईं “बाल विवाह मुक्त

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को “बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत” घोषित किया गया है। विगत दो वर्षों में इन पंचायतों में बाल विवाह का एक भी प्रकरण दर्ज न होने के आधार पर यह मान्यता प्रदान की गई।

इस उपलब्धि के पीछे राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की सतत पहल, सक्रिय मार्गदर्शन और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है।उनके नेतृत्व में विभाग ने गाँव-गाँव तक जागरूकता अभियान चलाया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय किया तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की।

श्रीमती राजवाड़े ने कहा, कि सूरजपुर जिले की यह पहल केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का कार्य करेगी। प्रधानमंत्री जी के अमृत महोत्सव वर्ष में यह उपलब्धि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सशक्त संदेश है।

सामुदायिक भागीदारी की सराहना

जिला प्रशासन ने इस पहल की सफलता में महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की संयुक्त भूमिका की सराहना की। सभी के सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित हुआ कि शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता मिले और कोई भी बाल विवाह न हो।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” की शुरुआत हुई थी। यह अभियान यूनिसेफ के सहयोग से और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।राज्य सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में रखा है और विभाग लगातार जनजागरूकता, निगरानी और सामाजिक सहभागिता को मजबूत कर रहा है।

सूरजपुर की इस सफलता से प्रेरित होकर अब छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को “बाल विवाह मुक्त” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिन जिलों में विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहां शीघ्र ही प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

 

“‘देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं राहुल गांधी’, BJP नेता ने ‘जेन-जी’ टिप्पणी पर जताई आपत्ति”

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ‘जेन-जी’ टिप्पणी की आलोचना की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी जानबूझकर भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

वह देश में अराजकता और हिंसा फैलाना चाहते हैं और एक ऐसी सरकार को कमजोर करना चाहते हैं जो तीसरी बार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई है, क्योंकि लोग उन्हें वोट नहीं देते।

पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी की टिप्पणी को दोहराया है। भाजपा सांसद ने कहा, “गुरुवार शाम 7.05 पर उहोंने (राहुल गांधी) ने पोस्ट किया कि ‘देश के युवा, देश के स्टूडेंट, देश के ‘जेन-जी’, संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे।” रविशंकर ने पूछा, क्या ‘जेन-जी’ के नाम पर राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं?

इंडिया के खिलाफ लड़ाई का जिक्र उन्होंने राहुल गांधी के ‘इंडिया स्टेट के खिलाफ लड़ाई’ बयान का भी जिक्र किया। रविशंकर प्रसाद ने कहा, “राहुल गांधी ने कुछ समय पहले कहा था कि मेरी स्टेट ऑफ इंडिया से लड़ाई है। वो मोदी जी की सरकार से लड़ सकते हैं। लेकिन स्टेट ऑफ इंडिया में पूरा देश, सरकार, मीडिया और कोर्ट सभी आते हैं।” रविशंकर ने आगे कहा, “वे चुनाव आयोग का अपमान करते हैं, संसद का अपमान करते हैं और कोर्ट का अपमान करते हैं।”

कांग्रेस इनके लिए नया गुरू ढूंढ़े भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने बार-बार निराधार आरोप लगाए हैं, जिससे विपक्ष के नेता से अपेक्षित गरिमा कम हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “शायद कांग्रेस को उनके लिए कोई नया शिक्षक ढूंढ़ना चाहिए, ताकि कम से कम उन्हें समझ तो आए कि वे क्या कह रहे हैं।” ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी कितना झूठ बोलेंगे, कितना तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रखेंगे। राहुल गांधी देश के लोकतंत्र को धोखा दे रहे हैं। मैंने संसद में और टीवी पर कई बार कहा है कि राहुल गांधी होमवर्क नहीं करते।

सारी हदें पार हो गई उन्होंने कहा, “उनकी  राहुल गांधी  पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस ने तो सारी हदें पार कर दीं। भारत का चुनाव आयोग अपना बचाव तो कर सकता है, लेकिन जब ज्ञानेश कुमार को कुछ महीने पहले ही चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है, तो वे 2023 के चुनावों में पक्षपात के ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? उस प्रेस कांफ्रेंस में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त की तस्वीर दिखा रहे थे। चुनाव आयोग इसके लिए खुद को डिफेंड करेगा। लेकिन, जो ज्ञानेश कुमार कुछ दिन पहले ही कि मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, उनके ऊपर 2023 के चुनाव को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी फोटो दिखा रहे हैं।”

आलंद निर्वाचन क्षेत्र में ‘वोट डिलीशन’ पर उन्होंने कहा, “आलंद विधानसभा भाजपा 2018 तक जीती थी और 2023 में हार गई। 2023 में वहां 248 वोट से कांग्रेस जीती और इसमें इलेक्शन पीटिशन हुआ। अभी जहां तक जानकारी मिली है कि कर्नाटक हाइकोर्ट ने वहां रिपोलिंग का आदेश दिया है। आप अपने ही उम्मीदवार की जीत को कमजोर कर रहे हैं।”

“फडणवीस ने राहुल गांधी की हिटलर के मंत्री से की तुलना, बोले- उनकी सबसे बड़ी कला सफाई से झूठ बोलना”

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस ‘हाइड्रोजन बम’ का दावा किया था, वह पूरी तरह ‘फुस्स बम’ निकला।

नतीजा ये रहा कि ‘पहाड़ खोदने पर चूहा भी नहीं निकला।’

फडणवीस ने राहुल गांधी को ‘सीरियल झूठा’ बताते हुए कहा, “उनकी सबसे बड़ी कला सफाई से झूठ बोलना है। वे बार-बार झूठ बोलकर उसे सच बनाने की कोशिश करते हैं। यह वही तकनीक है जो हिटलर के मंत्री इस्तेमाल करते थे।”

फडणवीस ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग राहुल गांधी को कई बार नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई ठोस सबूत या दस्तावेज पेश नहीं किया। सिर्फ भाषणों और मीडिया में आरोपों की राजनीति चल रही है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “राहुल गांधी जनता को गुमराह कर रहे हैं। वह संविधान, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसे लोकतंत्र के स्तंभों का निरंतर अपमान कर रहे हैं, लेकिन जनता अब जागरूक है, वह ऐसे झूठों से प्रभावित नहीं होती।”

फडणवीस ने बिहार चुनाव को लेकर भी राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बिहार की जमीनी हकीकत और जनता की भावना का कोई अंदाजा नहीं है। बिहार की जनता पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और वही चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

वहीं दूसरी ओर पुणे में बंजारा समाज ने जोरदार आंदोलन छेड़ा है। उनकी मांग है कि समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में शामिल किया जाए और आरक्षण का लाभ दिया जाए।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शंकर राठौर ने बताया कि हैदराबाद गजट में बंजारा समाज को आदिवासी के रूप में मान्यता दी गई है, इसलिए हमें भी एसटी आरक्षण मिलना चाहिए।

इस मांग को लेकर शिवाजीनगर से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक पैदल मोर्चा निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। बंजारा समाज ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को नहीं माना गया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप लेगा।

“पाकिस्तान घर जैसा लगता है… राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा ने अब छोड़ा नया ‘बयान बम'”

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कांग्रेस ने राहुल गांधी के करीबी और इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा के एक बयान पर विवाद शुरू हो गया है. एक इंटरव्यू में सैम पित्रोदा ने नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक की तारीफ की है.

मगर साथ ही पाकिस्तान की भी जमकर तारीफ की है. सैम पित्रोदा ने कहा, “मैं पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल गया हूं और हर जगह मुझे घर जैसा लगता है. न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे अनुसार, हमारी विदेश नीति को पहले हमारे पड़ोस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. क्या हम वास्तव में अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में काफी सुधार कर सकते हैं?… मैं पाकिस्तान गया हूं, और मुझे आपको बताना चाहिए, मुझे घर जैसा महसूस हुआ. मैं बांग्लादेश गया हूं, मैं नेपाल गया हूं, और मुझे घर जैसा महसूस होता है. मुझे ऐसा महसूस नहीं होता कि मैं किसी विदेशी देश में हूं…”

सैम पित्रोदा के इस बयान के बाद जाहिर है कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकती है. बीजेपी पहले से ही कांग्रेस के देश विरोधी बयानों को मुद्दा बताती आई है. अब इस बयान के बाद एक बार फिर से इस पर हंगामा मचना तय माना जा रहा है. सैम पित्रोदा ने भी ऐसा नहीं है कि पहली बार कांग्रेस को टेंशन दी है. इससे पहले भी वो कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं, जिस पर काफी बवाल हुआ है.

सैम पित्रोदा के विवादित बयान

चीन पर बयान: सैम पित्रोदा ने एक बार कहा था कि चीन से खतरे को अक्सर बढ़ाचढ़ाकर पेश किया जाता है. उन्होंने सुझाव दिया था कि भारत को चीन को दुश्मन मानना बंद करना चाहिए और सहयोग पर ध्यान देना चाहिए. इस बयान से कांग्रेस ने खुद को अलग कर लिया था और कहा था कि यह उनका निजी बयान है.

नस्लीय टिप्पणी: सैम पित्रोदा ने भारतीय लोगों के रंगरूप को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी, इस बयान में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग चीनी जैसे दिखते हैं और दक्षिण के लोग अफ्रीकी जैसे लगते हैं. इस बयान पर भी भाजपा ने कांग्रेस को घेरा था.

विरासत कर: सैम पित्रोदा ने विरासत कर की वकालत की थी और कहा कि अमेरिका में 55% विरासत टैक्स लगता है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में भी विरासत कर लागू किया जाना चाहिए. इस पर भी कांग्रेस घिर गई थी.

पुलवामा हमला: सैम पित्रोदा ने पुलवामा हमले को लेकर भी विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस हमले में सिर्फ 8 लोग शामिल थे. इस बयान पर भी भाजपा ने कांग्रेस को घेरा था.

राम मंदिर: जून 2023 में, सैम पित्रोदा ने राम मंदिर को लेकर एक विवादित बयान दिया था, जिस पर भी काफी चर्चा हुई थी.

1984 के सिख दंगों पर बयान: 2019 में, सैम पित्रोदा ने 1984 के सिख दंगों पर कहा था किहुआ तो हुआ“, जिस पर काफी बवाल मचा था.

सैम भाई, पाकिस्तान आपको घर जैसा तो लगता ही है,कृपया आप अमेरिका छोड़कर पाकिस्तान में ही बस जाइये,साथ में चेले राहुल गांधी को भी ले जाएंगे तो भारत मां पर बहुत बड़ा एहसान होगा.

“Sarva Pitra Amavasya 2025: सर्वपितृ अमावस्या के दिन कैसे करें पिंडदान और तर्पण, जानें संपूर्ण विधि”

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Sarva Pitra Amavasya 2025: सर्वपितृ अमावस्या का दिन पितरों की तृप्ति और मोक्ष के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या  कहा जाता है.

साल 2025 में सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर, रविवार को पड़ रही है. इस दिन पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और परिवार की हर बाधा दूर होती है. यदि पूरे पितृपक्ष में श्राद्ध करना संभव न हो तो केवल सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण भी पूर्ण फल प्रदान करता है.

सर्वपितृ अमावस्या पर पिंडदान और तर्पण की विधि प्रातः स्नान और संकल्प ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें. पीत वस्त्र धारण करें और घर या नदी तट पर पितरों के नाम से संकल्प लें. संकल्प में अपने गोत्र, नाम और पितरों के नाम का उच्चारण करें. पिंडदान की तैयारी पिंड बनाने के लिए चावल का आटा, तिल, जौ का आटा, शहद और घी मिलाकर गोल आकार के पिंड तैयार करें.

इन्हें पीपल पत्ते या कुश के आसन पर रखें. पिंडदान की विधि पिंडों को पीपल वृक्ष के नीचे, नदी तट पर या किसी पवित्र स्थान पर रखें. पितरों के नाम से जल अर्पण करते हुए ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः मंत्र का जाप करें. पिंडों पर तिल और कुश मिलाकर जल अर्पण करें. तर्पण की विधि तर्पण तांबे या पीतल के पात्र से किया जाता है. तिल मिश्रित जल को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दोनों हाथों से अर्पित करें. प्रत्येक बार ॐ पितृभ्यः स्वधा उच्चारण करें. कुल तीन बार या 11 बार तर्पण करें. ब्राह्मण और गौ सेवा पिंडदान और तर्पण के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें. गौ सेवा करें और अन्न, वस्त्र तथा दान-दक्षिणा का दान करें. मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और घर में समृद्धि आती है.

“देश के एक तिहाई अमीरों को नहीं पसंद है शराब, सर्वे में बताई अपनी ख्वाहिश”

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शराब पीने को लेकर अमीर लोगों पर एक सर्वे किया गया, जिसमें चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं. इस सर्वे की रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि एक तिहाई से ज्यादा भारतीय अमीर लोग शराब पीना पसंद नहीं करते हैं.

ये सर्वे 8.5 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति वाले 150 भारतीयों के बीच किया गया.

मर्सिडीज-बेंज हुरुन इंडिया लग्जरी कंज्यूमर सर्वे 2025 के अनुसार, 34 फीसदी लोगों ने कहा कि वे बिल्कुल भी शराब नहीं पीते हैं, जबकि 32 फीसदी लोगों का जवाब था कि उन्हें व्हिस्की पसंद है.

वहीं, 11 फीसदी लोग रेड वाइन और 9 फीसदी लोग शैंपेन पीना पसंद करते हैं. अब सवाल उठता है कि देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा शराब पर पैसा खर्च किया जाता है?

इन राज्यों के लोग शराब पर खर्च करते हैं सबसे ज्यादा पैसे दरअसल, पिछले साल अगस्त में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान यानी राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी की थी, जिसके अनुसार, देशभर में सबसे ज्यादा शराब पर पैसा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में खर्च किया जाता है.

एनएसएसओ के 2011-12 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वे से पता चलता है कि आंध्र प्रदेश में शराब पर प्रति व्यक्ति औसत सालाना उपभोग व्यय सबसे अधिक 620 रुपए है, तो सीएमआईई के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वे (एसपीएचएस) से पता चलता है कि तेलंगाना के परिवार सबसे अधिक औसत सालाना प्रति व्यक्ति 1,623 रुपए की शराब पी जाते हैं.

अगर एनएसएसओ और सीएमआईई दोनों के आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो सबसे कम खर्च करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है, जहां यह खर्च क्रमशः 75 रुपए और 49 रुपए है. एनएसएसओ के सर्वे आंकड़ों के अनुसार, शराब पर प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा खर्च करने वाले अन्य प्रमुख राज्यों में केरल (486 रुपए), हिमाचल प्रदेश (457 रुपए), पंजाब (453 रुपए), तमिलनाडु (330 रुपए) और राजस्थान (308 रुपए) शामिल हैं.

“कौन होगा रूस का अगला राष्ट्रपति? उत्तराधिकारी योजना को लेकर पुतिन का खुलासा”

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कर दिया है कि देश का अगला राजनीतिक नेतृत्व कौन संभालेगा. पुतिन का कहना है कि रूस का भविष्य उन्हीं के हाथों में होगा जिन्होंने यूक्रेन युद्ध का मैदान देखा है.

रूसी संसद (डूमा) की अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से बातचीत में पुतिन ने कहा कि जो लोग देश के लिए अपनी जान दांव पर लगा चुके हैं, उन्हें राजनीति और सत्ता में जगह मिलनी चाहिए. उनके मुताबिक, यही योद्धा आगे चलकर रूस की जिम्मेदारी उठाएँगे और सत्ता के वारिस बनेंगे.

रूस में विपक्ष दबा, राष्ट्रवाद हावी दरअसल, रूस की राजनीति में पहले ही विपक्ष की आवाज लगभग खत्म हो चुकी है. पुतिन के करीबी यूनाइटेड रशिया पार्टी का दबदबा है. ऐसे में उनका नया बयान साफ दिखाता है कि आने वाले वक्त में रूस और भी ज़्यादा राष्ट्रवादी और सख्त रुख अपनाएगा. ये सोच पुतिन के बाद भी लंबे समय तक रूस की राजनीति पर असर डालेगी.

जंग में लाखों सैनिक मारे जा चुके हैं फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था. तब से लाखों सैनिक मोर्चे पर भेजे गए. यहाँ तक कि कैदियों को भी जेल से रिहा कर लड़ाई में उतारा गया. रूस आधिकारिक आंकड़े नहीं बताता, लेकिन बीबीसी और स्वतंत्र मीडिया के मुताबिक अब तक कम से कम 1,30,000 रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं. जो लौट रहे हैं, उनमें से कई मानसिक और शारीरिक तौर पर टूट चुके हैं. हिंसक अपराध और सामाजिक तनाव जैसी समस्याएँ अब रूस के लिए सिरदर्द बन रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की शुरुआत तक करीब 15 लाख रूसी नागरिक इस युद्ध में शामिल हो चुके हैं.

शांति की कोशिशें और अड़चनें युद्ध अभी भी थमता नज़र नहीं आ रहा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई बड़ी सफलता नहीं मिली. रूस यूक्रेन के पाँचवें हिस्से पर कब्जा कर चुका है और युद्धविराम नहीं, बल्कि सीधा सौदा चाहता है. रूस चाहता है कि यूक्रेन नाटो में न जाए और कुछ जमीन छोड़े. वहीं यूक्रेन का कहना है कि रूस उसकी संप्रभुता और पहचान मिटाकर उसे अपने कब्जे में लेना चाहता है.

“IMD Weather : अगले 100 घंटे में कैसा रहेगा राजस्थान, दिल्ली, यूपी का मौसम, आईएमडी ने अलर्ट किया जारी”

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IMD Weather : भारत में इस साल मॉनसून का सीज़न बेहतरीन रहा है। पूरे देश में अच्छी बारिश हुई, जिससे कृषि को लाभ मिला। हालांकि, कुछ राज्यों में ज़रूरत से ज़्यादा बारिश ने बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा कीं।

ऐसे में चलिए आइए नीचे खबर में जान लेते है कि अगले 100 घंटे में राजस्थान, दिल्ली, यूपी में मौसम कैसा रहने वाला हैं- भारत में इस साल मॉनसून का सीज़न बेहतरीन रहा है। पूरे देश में अच्छी बारिश हुई, जिससे कृषि को लाभ मिला। हालांकि, कुछ राज्यों में ज़रूरत से ज़्यादा बारिश ने बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा कीं। अब मॉनसून (monsoon) की गति धीमी हो गई है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी बारिश जारी है। यह मॉनसून सीज़न खेती और पानी के भंडारों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ है, जिसने देश को जल संकट से राहत दी है।

(Weather Update) हालांकि अभी मानसून के इस सीज़न का अंत नहीं हुआ है है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) के अनुसार मानसून पलटकर लौटेगा। इससे अगले 100 घंटों में देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है।

राजस्थान में अगले 100 घंटों में कैसा रहेगा मौसम? राजस्थान में इस साल मानसून अच्छा रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं हुई है। अब मौसम विभाग ने अगले 100 घंटों के लिए फिर से बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कुछ जिलों में रुक-रूककर भारी बारिश के साथ आंधी और तेज़ हवाएं चलने की संभावना है। यह पूर्वानुमान किसानों और आम जनता के लिए महत्वपूर्ण है। सभी को सावधानी बरतने और सुरक्षित रहने की सलाह दी जाती है।

(Rajasthan Update) राजधानी दिल्ली में क्या रहेगा मौसम का हाल? राजधानी दिल्ली में मानसून का पहला दौर सूखा रहा, लेकिन दूसरे दौर में अच्छी बारिश हुई। हालांकि पिछले कुछ दिनों से बारिश रुकी हुई है। लेकिन मौसम विभाग के अनुसार, अगले 100 घंटों में दिल्ली में मानसून की वापसी होगी। इससे कई इलाकों में हल्की से तेज़ बारिश का अनुमान है। यह दिल्लीवासियों के लिए एक राहत की खबर है। (Delhi Weather Update) इन राज्यों में होगी भारी बारिश-मौसम विभाग ने आगामी 100 घंटों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तर भारत में मानसून की वापसी के कारण, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना है। वहीं, दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, यनम, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी तेज़ हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पश्चिमी भारत में मानसून सक्रिय है, जिससे महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण में अगले 100 घंटों में गरज के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत में भी, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और नागालैंड में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों जैसे मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार और विदर्भ में भी अच्छी बारिश की उम्मीद है।

कई इलाकों में होगी हल्की बारिश-मौसम विभाग के अनुसार अगले 100 घंटों में उत्तरपश्चिम भारत, दक्षिण भारत, पश्चिम भारत, उत्तरीपूर्व भारत और पूर्वी और मध्य भारत के कई इलाकों में हल्की बारिश का अलर्ट है। इस दौरान तेज़ हवाएं और आंधी भी चल सकती हैं।

“इन रूटों पर चलेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, सफर होगा आसान”

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इन रूटों पर चलेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, सफर होगा आसान

स्लीपर वंदे भारत अपडेट: वंदे भारत ट्रेन भारत की सबसे सुसज्जित और शानदार ट्रेन मानी जाती है। आम नागरिक भी वंदे भारत ट्रेन में सवार होने का सपना देखते हैं। टिकट महंगे होने के कारण कई लोग इसमें सवार नहीं हो पाते।

भारतीय रेलवे ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। जल्द ही रेलवे स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलाएगा।

रूट तय होने की उम्मीद है। यह स्लीपर वंदे भारत ट्रेन पाँच रूटों पर चलेगी और विभिन्न शहरों को जोड़ेगी, और इसमें लोगों की काफ़ी रुचि देखी जा रही है। जिन रूटों पर स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलने की उम्मीद है, वे नीचे सूचीबद्ध हैं। देश भर में पहले से ही 75 से ज़्यादा वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, जो विभिन्न शहरों को जोड़ती हैं।

स्लीपर वंदे भारत ट्रेन विशेष होगी। भारतीय रेलवे के अनुसार, स्लीपर वंदे भारत ट्रेन बेहद खास होगी, जो यात्रियों को आरामदायक यात्रा प्रदान करेगी। खबरों के अनुसार, यह 24 कोच वाली स्लीपर ट्रेन होगी। इसमें राजधानी जैसी 1AC, 2AC और 3AC कोच शामिल होंगे। इससे लंबी दूरी के यात्री पहले से ज़्यादा आरामदायक यात्रा कर पाएँगे।

इसमें हवाई जहाज़ों जैसी कई अनूठी विशेषताएँ होंगी। सबसे खास बात यह है कि इसमें सुरक्षा कवच प्रणाली, छत-रोधी डिज़ाइन और चढ़ाई-रोधी विशेषताएँ शामिल हैं। इसकी टिकट की कीमत राजधानी एक्सप्रेस से थोड़ी ज़्यादा होगी।

इसमें पांच मार्ग शामिल किये जायेंगे।

भारतीय रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, स्लीपर वंदे भारत ट्रेन लंबे रूटों पर चलाई जाएगी। वंदे भारत ट्रेन पहले से ही लगभग 700 से 800 किलोमीटर की दूरी तय करती है। स्लीपर वंदे भारत के ज़रिए महानगरों को राजधानी दिल्ली से जोड़ना प्राथमिकता होगी। सूत्रों के अनुसार, पहली ट्रेन दिल्ली और कोलकाता के बीच चलने की संभावना है।

यह ट्रेन बिहार और उत्तर प्रदेश होते हुए सीधे दिल्ली पहुँचेगी। चुनाव से पहले बिहारवासियों के लिए यह एक बड़ा तोहफ़ा साबित हो सकता है। इसके अलावा, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-अहमदाबाद और दिल्ली-लेंगलुरु रूट पर भी ट्रेनें चलने की उम्मीद है। दिल्ली-भोपाल रूट पर भी विचार किया जा सकता है। हालाँकि, ये रूट अभी तय नहीं हुए हैं। शुरुआत में, प्रत्येक रूट पर दो ट्रेनें चलने की उम्मीद है।