Home Blog Page 408

उज्जैन में 5 दिवसीय ‘महाकाल महोत्सव’ का शुभारंभ

0

मध्य प्रदेश पर परमात्मा की विशेष कृपा है, यहां दो ज्योतिर्लिंग स्थित हैं. उज्जैन सौभाग्यशाली है कि यहां हरसिद्धि माता शक्तिपीठ विराजमान हैं और दक्षिण भारत की परंपरा के अनुसार गढ़ कालिका भी शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हैं.

यह बात मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन स्थित महाकाल महालोक में पांच दिवसीय ‘महाकाल महोत्सव’ के शुभारंभ पर कही.

पोर्टल के माध्यम से होगा ऑनलाइन दान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर की नवीन आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल (www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in), महाकाल सृष्टि के टीजर और सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 600 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन भव्य महाकालेश्वर भक्तनिवास एवं CSR पोर्टल का लोकार्पण किया. नवीन पोर्टल के माध्यम से श्रद्धालु शीघ्र दर्शन, भस्म आरती की बुकिंग और ऑनलाइन दान कर सकेंगे.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के आधार पर उज्जैन की एक अलग पहचान बन रही है. राज्य सरकार रोजगार, पर्यटन और धार्मिक विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है. उन्होंने कहा कि कवि कालिदास जी की रचनाओं को सुनते ही स्वर्ग से सुंदर उज्जयिनी अवंतिका नगरी की कल्पना साकार होती है. उन्होंने कहा कि जब ड्रोन से उज्जैन की तस्वीरें ली जाती हैं तो प्रतीत होता है कि यदि आज यह नगरी इतनी सुंदर है, तो प्राचीन काल में इसकी रचना कितनी अद्भुत रही होगी.

महाकाल ‘काल’ यानी समय के देवता हैं- सीएम यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन का इतिहास मूर्ति शिल्प के माध्यम से अपनी गौरवगाथा स्वयं प्रस्तुत करता है, राजा भोज जैसे महापुरुष हजार साल पहले उज्जैन आए और ऐसे सभी ऐतिहासिक महापुरुषों का संगम इस नगरी में देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि महाकाल ‘काल’ यानी समय के देवता हैं और समय सबके लिए नियत है, जिसे न बढ़ाया जा सकता है और न घटाया जा सकता है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि काल के क्रम में प्रत्येक जीव का जन्म अपने कर्म सिद्धांतों के आधार पर होता है. भगवान कृष्ण ने तीन मार्ग बताए हैं, जिनमें जिसकी जैसी श्रद्धा हो, वो उस मार्ग से पुण्य अर्जित कर धाम की ओर प्रस्थान करता है. उन्होंने कहा कि ऐसे काल क्रम में बाबा महाकाल हमको प्रत्येक श्वास के साथ जीवन देते हैं और प्रत्येक श्वास निकलते समय मृत्यु से साक्षात्कार होता है. महाकाल हमारे श्वास में बसे हैं. महाकाल ने हमें उस काल के क्रम में हमको अवसर दिया है. इस अवसर के बलबूते पर परमात्मा हमको अच्छे से अच्छा काम करने का मौका देता है.

14 से 18 जनवरी तक मनाया जाएगा महाकाल महोत्सव

इस अवसर पर महोत्सव में देश-विदेश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से किया. महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन ने अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ ‘शिवोऽहम्’ की संगीतमय प्रस्तुति दी.

15 जनवरी को मुंबई का प्रसिद्ध ‘द ग्रेट इंडियन क्वायर’ ‘शिवा’ थीम पर प्रस्तुति देंगे. 16 जनवरी को सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीतमय यात्रा से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी. 17 जनवरी को इंदौर के श्रेयश शुक्ला और मुंबई के विपिन अनेजा अपने बैंड के साथ सुगम संगीत प्रस्तुत करेंगे. 18 जनवरी को इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और लंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों ने प्रस्तुत शिव केंद्रित नृत्य नाटिका से महोत्सव का समापन होगा.

SRK के बाद अब सलमान खान को भी बताया ‘देशद्रोही’, अखिलेश यादव ने यूपी

0

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है. योगी सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह ने फिल्म अभिनेता सलमान खान को देशद्रोही बताया था. जिस पर अब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह पर निशाना साधा है.

दरअसल यूपी सरकार के मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह के एक विवादित बयान को लेकर सियासी घमासान खड़ा हो गया है. अब अखिलेश यादव ने इस बयान को न सिर्फ गैर-जरूरी बताया, बल्कि इसे बीजेपी की दोहरी सोच का उदाहरण भी करार दिया.

सपा चीफ अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि विशेष बयान देने से पहले यूपी के मंत्री जी सामान्य ज्ञान की एक अहम बात भूल गए. उन्होंने बिना नाम लिए याद दिलाया कि कुछ साल पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभिनेता सलमान खान के साथ पतंग उड़ाते नजर आए थे. अखिलेश यादव ने कहा कि अगर अभिनेता के साथ मंच साझा करना या उनके साथ तस्वीरें खिंचवाना गलत है, तो फिर उस समय यह सब कैसे जायज़ था. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब बीजेपी को अपनी ही पुरानी यादों से परहेज होने लगा है.

क्या बोले सपा चीफ अखिलेश यादव

सपा चीफ अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा-“लगता है ये विशेष बयान देने से पहले यूपी के मंत्री जी सामान्य ज्ञान के विषय की ये बात भूल गये कि उनके सर्वेसर्वा ने कुछ साल पहले अभिनेता जी के साथ पतंग उड़ाई थी. कहीं ऐसा न हो ये बयान दिल्ली तक पहुँच जाए और मंत्री जी की डोर कट जाए…या हो सकता है ये बयान जानबूझकर दिया गया हो क्योंकि मंत्री जी को भनक लग गई होगी कि उनकी छंटनी भी तय है.

इससे पहले भी सपा चीफ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह बार-बार ध्यान भटकाने वाली राजनीति करती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और किसानों की समस्याओं पर बात करने के बजाय बीजेपी नेता ऐसे बयान देते हैं, जिनसे बेवजह विवाद खड़ा हो. उनका कहना था कि जनता अब इन हथकंडों को समझने लगी है और ऐसे बयानों से असली मुद्दे दबाए नहीं जा सकते. हालांकि इस पूरे मामले पर बीजेपी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है.

“KGMU केस का दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन! डॉ परवेज का क्लासमेट था आरोपी रमीज”

0

लखनऊ में जबरन धर्मांतरण मामले के आरोपी डॉ रमीज को लेकर जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. डॉ रमीज का दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी डॉ परवेज़ अंसारी से भी कनेक्शन सामने आया है.

जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. दोनों न केवल एक दूसरे को जानते थे बल्कि एक समय पर एक ही कॉलेज में मौजूद भी रहे.

जांच एजेंसियों के मुताबिक जिस वर्ष डॉ. रमीज ने आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया, उसी वर्ष दिल्ली बम धमाके के आरोपी डॉ. परवेज ने भी इसी कॉलेज में एमडी में दाखिला लिया था. ये दोनों एक समय पर एक ही कॉलेज में मौजूद थे जहां दोनों को मुलाकात भी हुई.

परवेज के साथ बनाया ‘इस्लामिक मेडिकोज’ ग्रुप

आरोप है कि डॉ रमीज ने परवेज अंसारी के साथ मिलकर ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था. आरोप है कि इस ग्रुप के जरिए मुस्लिम छात्रों को संगठित करने और टॉपर छात्राओं को फंसाकर उनका मतांतरण करने की साजिश की जाती थी.

जाँच एजेंसियों के मुताबिक इस ग्रुप का विस्तार लखनऊ के केजीएमयू तक पहुंचा और यहां भी इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप को बनाया गया और उसमें सभी मुस्लिम छात्रों को जोड़कर एक मंच पर लाने की कोशिश की गई. इसके जरिए उनके ब्रेन वाश और अन्य गतिविधियों को अंजाम दिया गया.

एसएन कॉलेज में एसटीएफ ने की जांच

इसी मामले की जांच के तहत STF की टीम आगरा स्थित एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंची. STF ने कॉलेज से वर्ष 2012 से अब तक के सभी जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का 13 साल का पूरा रिकॉर्ड तलब किया. डॉ. रमीज और डॉ. परवेज दोनों ने एसएन मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की थी, इसलिए STF का यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है.

STF की स्थानीय यूनिट के इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा और हेड कॉन्स्टेबल अंकित गुप्ता कॉलेज पहुंचे. अधिकारियों ने कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता से विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है. STF के मुताबिक, रिकॉर्ड मिलने के बाद डॉ. रमीज की पूरी प्रोफाइल तैयार की जाएगी.

RJD प्रमुख लालू यादव को भारत रत्न देने की मांग, पोस्टर पर लिखा- ‘गरीबो

0

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग उठ रही है. आरजेडी कार्यालय के बाहर इस मांग को लेकर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनपर लालू यादव को ‘गरीबों का मसीहा’ बताया गया है.

इन पोस्टर्स पर लालू यादव और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगी है.

इसके साथ पोस्टर्स पर लिखा है, ‘गरीबों के मसीहा हमारे भगवान. भारत सरकार से अपने आदरणीय नेता के लिए एक मांग. लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए.’ बताया जा रहा है कि ये पोस्टर RJD अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव राजेंद्र रजक द्वारा लगाए गए हैं.

‘समाजवादी आंदोलन के अनमोल रत्न लालू यादव’

बता दें, पहले भी RJD की तरफ से लालू यादव को भारत रत्न देने की मांग की जाती रही है. हालांकि, पहली बार पोस्टर लगाकर ऐसी मांग उठाई गई है. पार्टी की तरफ से ये कहा जाता रहा है कि समाजवादी आंदोलन के बचे अनमोल रत्न लालू यादव भारत रत्न के योग्य हैं, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा दी.

बता दें, समाजवादी पृष्ठभूमि के स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह और स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर को नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही भारत रत्न दिया गया है. लालू यादव भी समाजवादी पृष्ठभूमि से हैं.

नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की हुई थी मांग

यह मांग ऐसे समय में जोर पकड़ रही है जब कुछ दिन पहले ही जदयू नेता KC त्यागी ने सीएम नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. हालांकि, जदयू ने उनके बयान से किनारा कर लिया था.

ब्राह्मणों को लुभाने की एक और कोशिश, सपा-बीजेपी के बाद अब बसपा भी मैदा

0

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर ब्राह्मणों को लुभाने की एक कोशिश की है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी द्वारा जो जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं, उनसे लाभ पहुंचा है.

जनता के दिल में जगह बनाए रखने के लिए पूरे देश में मेरा जन्मदिन जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया गया हैं.

इस दौरान पूर्व सीएम मायावती ने कहा कि बीएसपी को पीछे रखने के लिए कांग्रेस और बीजेपी समय-समय पर तमाम प्रयास करते रहे हैं. उन्होंने पिछले महीने 2025 में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान ब्राह्मण समाज के सभी दल के ब्राह्मण समाज के विधायकों ने अपनी उपेक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है. मायावती ने कहा कि हमारे समाज ने ब्राह्मण समाज को उचित भागीदारी दी है, ब्राह्मण समाज को भी बीजेपी, सपा और कांग्रेस के बहकावे में नहीं आना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी का बाटी चोखा नहीं चाहिए. इस बार बीएसपी सरकार बनने पर इनकी चाहत पूरी की जाएगी, इसके अलावा क्षत्रिय और अन्य समाज की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि मंदिर, मस्जिद और चर्च आदि को हमारी सरकार के समय कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया गया था.

सपा के गुंडों और बदमाशों ने मेरे ऊपर हमला किया- मायावती

मायावती ने कहा कि सपा के शासन में माफिया और गुंडों का ही राज चलता रहा है. दलित वर्ग के लोगों का इनकी सरकार में सबसे बड़ा उत्पीड़न हुआ है. 2 जून को सपा के गुंडों और बदमाशों ने मेरे ऊपर जो हमले करने का प्रयास किया था यह किसी से छुपा नहीं हैं. इनके राज में मुस्लिम समाज भी उपेक्षित रहा है, यही है इनका पीडीए. मायावती ने कहा कि हमने बीएसपी की सरकार में कोई भी दंगा फसाद नहीं होने दिया था.

दलित एवं अन्य उपेक्षित वर्ग के लोग बीजेपी सरकार से हैं परेशान

मायावती ने कहा कि बीएसपी की सत्ता नहीं रहने के बाद अब विरोधियों की सरकार में जितने भी एक्सप्रेस बने हैं, जो एयरपोर्ट बन रहे हैं वह सब मेरी सरकार के समय ही शुरू किए गए थे. एक एकाध तो मेरे समय में ही बन गए थे, पर केन्द्र सरकार के विरोधी रवैये के कारण आगे नहीं बढ़ा था. दलित एवं अन्य उपेक्षित वर्ग के लोग अभी के बीजेपी सरकार में भी काफी परेशान हैं.

मायावती ने गठबंधन पर क्लियर किया अपना स्टैंड

वहीं मायावती ने कहा कि ईवीएम में धांधली करने वालों को फेल करेंगे तब कामयाब होंगे. पूरे देश में ईवीएम के विरोध में आवाज उठाने लगी है, ये व्यवस्था कभी भी खत्म की जा सकती है. एसआईआर में गंभीर शिकायत चर्चा में हैं, पार्टी के लोगों को सजग रहना है. गठबंधन करके चुनाव लड़ना है तो स्पष्ट कर देना चाहती हूं. जिनसे गठबंधन होता है तो उन्हें लाभ मिलता है लेकिन गठबंधन करने के मामले में हमें बीएसपी के हित में देखना जरूरी है. विधानसभा और लोकसभा का चुनाव अकेले लड़ना है, सभी छोटे बड़े चुनाव अकेले लड़ना पार्टी ने उचित समझा है.

बसपा चीफ मायावती ने गठबंधन पर क्लियर स्टैंड करते हुए कहा कि आगे चलकर हमें पूरा भरोसा हो जाएगा तो गठबंधन करने वाली पार्टी अगर बीएसपी को अपर कास्ट लोगों का वोट लाभ दे सकती है तो सोचा जाएगा. अपर कास्ट समाज का पहले से ज्यादा वोट मिल जाएगा, अल्पसंख्यक और दलित समाज का वोट भी बीएसपी को देखता रह जाएगा.

शिमला, देहरादून और जम्मू से भी ठंडी दिल्ली, आज सीजन की सबसे सर्द सुबह

0

राजधानी दिल्ली इन दिनों मौसम और प्रदूषण की दोहरी मार झेल रही है. एक तरफ पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने दिल्ली को ‘कोल्ड चैंबर’ बना दिया है. तो दूसरी तरफ जहरीले स्मॉग ने लोगों का दम घोंटना शुरू कर दिया है.

बृहस्पतिवार को दिल्ली की सुबह इतनी सर्द रही कि इसने ठंड के मामले में कई पहाड़ी पर्यटन स्थलों को भी पीछे छोड़ दिया. दिल्ली में आज सीजन की सबसे सर्द सुबह दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान गिरकर 2.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

यह जनवरी 2023 के बाद का सबसे कम तापमान है. हैरानी की बात यह है कि दिल्ली का पारा आज जम्मू, देहरादून और शिमला जैसे पहाड़ी शहरों से भी नीचे रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग के मुताबिक, 15 जनवरी को जम्मू का न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस, देहरादून का 4.8 डिग्री सेल्सियस और शिमला का तापमान न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है.

दिल्ली के विभिन्न इलाकों का हाल:

  • पालम: 2.3 डिग्री सेल्सियस (2010 के बाद सबसे कम)
  • आयानगर: 2.7 डिग्री सेल्सियस
  • सफदरजंग: 2.9 डिग्री सेल्सियस
  • लोधी मार्ग: 3.4 डिग्री सेल्सियस
  • रिज स्टेशन: 4.5 डिग्री सेल्सियस

पालम में ठंड ने पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इससे पहले साल 2013 में यहां पारा 2.6 डिग्री तक गिरा था.

जहरीली हवा ने बढ़ाई मुश्किल

कड़ाके की ठंड के बीच दिल्ली-एनसीआर की हवा ‘दमघोंटू’ बनी हुई है. CPCB के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 349 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है. नेहरू नगर (397), पंजाबी बाग (386) और चांदनी चौक (384) जैसे इलाकों में हवा ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब पहुंच गई है. पूसा में AQI 399 तक पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है.

अगले 24 घंटे और भारी

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिल्ली फिलहाल अगले कुछ दिनों तक Cold Wave (शीत लहर) की चपेट में रहेगी. आसमान साफ रहने के कारण रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है. प्रदूषण और ठंड के इस घातक कॉम्बिनेशन ने बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं.

दुबई भागने की फिराक में खामेनेई का पूरा परिवार! ईरान से ट्रांसफर किए

0

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई पूरे परिवार के साथ दुबई भागने के फिराक में हैं. यह दावा इजराइली मीडिया चैनल-14 ने किया है. चैनल-14 का कहना है कि ईरान में जो बवाल चल रहा है, उस बीच खमनाई के बेटे ने 1.5 बिलियन डॉलर (1353 करोड़ रुपए) दुबई ट्रांसफर किए हैं.

यह पैसे क्यों ट्रांसफर किए गए हैं, इसका खुलासा नहीं हो पाया है. ईरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसको लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है.

अयातुल्लाह अली खामेनेई के परिवार में पत्नी मंसूरेह खोजास्ते के अलावा 10 से ज्यादा लोग हैं. खामेनेई खुद 4 बेटे और 2 बेटियों के पिता हैं. खामेनेई के अलावा उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान में काफी पावरफुल हैं. मोजतबा को ईरान में खामेनेई के उत्तराधिकारी का भी मजबूत दावेदार माना जाता है.

दुबई भागने की चर्चा क्यों?

  1. वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान और इजराइल ने रूस की मदद से एक समझौता किया है. इसमें कहा गया है कि दोनों ही देश पहला हमला एक-दूसरे पर नहीं करेगा. यानी न तो ईरान और न ही इजराइल एक दूसरे पर पहला हमला करेगा. ऐसी स्थिति में ईरान के लिए यूएई एक सेफ मुल्क है. खासकर दुबई.
  2. ईरान और यूएई के बीच व्यापारिक रिश्ते भी हैं. दोनों देश ने हाल ही में यमन को लेकर भी वार्ता की थी. जून 2025 में इजराइल और ईरान युद्ध सुलझाने में यूएई ने एक बड़ी भूमिका निभाई थी.

रूस जाने की भी हुई थी चर्चा

दुबई से पहले खामेनेई परिवार के रूस भागने की भी चर्चा हुई थी. ब्रिटेन की द टाइम्स ने एक रिपोर्ट की थी, जिसमें कहा गया था कि संकट की स्थिति में खामेनेई पूरे परिवार के साथ रूस भाग सकते हैं. रूस ईरान का सबसे करीबी दोस्त है. 86 साल के खामेनेई वर्तमान में परिवार के साथ तेहरान में रहते हैं.

पुतिन की रडार पर क्यों आया जर्मनी और ब्रिटेन? परमाणु हमले तक की दे दी

0

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर हालात खतरनाक मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं. इस बार निशाने पर हैं यूरोप की दो सबसे ताकतवर ताकतें जर्मनी और ब्रिटेन. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी और उनके पूर्व सलाहकार सर्गेई करागानोव ने साफ शब्दों में चेतावनी दे डाली है.

सर्गेई करागानोव ने कहा है कि अगर रूस को हार के करीब धकेला गया, तो यूरोप, खासकर जर्मनी और ब्रिटेन, परमाणु हमले की चपेट में आ सकते हैं. यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी भी तरह का समझौता होता नहीं दिख रहा.

जर्मनी और ब्रिटेन क्यों बने रूस के निशाने पर?

करागानोव ने टकर कार्लसन को दिए इंटरव्यू में कहा कि रूस को सबसे बड़ा खतरा यूरोप के उन्हीं देशों से है जो युद्ध को लगातार हवा दे रहे हैं. रूस के नजरिए से देखें तो यूरोप में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ही सबसे ज्यादा ताकतवर देश हैं, और इनमें ब्रिटेन और जर्मनी रूस के खिलाफ सबसे आक्रामक भूमिका निभा रहे हैं. हाल ही में रूस ने आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन और जर्मनी को अपनी अनफ्रेंडली नेशंस लिस्ट में शामिल किया है. मॉस्को का आरोप है कि दोनों देश न सिर्फ यूक्रेन को सैन्य मदद दे रहे हैं, बल्कि रूस के खिलाफ खुफिया गतिविधियों और रणनीतिक साजिशों में भी शामिल हैं.

जासूसी और तेल टैंकर बना विवाद की बड़ी वजह

रूस का कहना है कि ब्रिटेन और जर्मनी लगातार उसकी जासूसी करा रहे हैं. इसके अलावा ब्रिटेन पर अमेरिका के साथ मिलकर रूसी तेल टैंकरों को रोकने और जब्त करने का भी आरोप है. मॉस्को इसे सीधी आर्थिक जंग मानता है. रूसी नेतृत्व का मानना है कि इन कार्रवाइयों के पीछे ब्रिटेन एक किंगपिन की तरह काम कर रहा है और पूरे यूरोप को रूस के खिलाफ उकसा रहा है.

परमाणु चेतावनी क्यों दी गई?

करागानोव के मुताबिक, रूस की हार की कल्पना करना ही गलत है. उनका कहना है कि अगर रूस कभी अस्तित्व के संकट में पहुंचा, तो वह पारंपरिक युद्ध की सीमाओं में नहीं बंधेगा. उन्होंने साफ संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है, और इसका सबसे बड़ा असर यूरोप पर पड़ेगा.

यूरोपीय नेतृत्व पर भी किया करारा हमला

रूसी रणनीतिकार ने यूरोप के नेताओं को वास्तविकता से कटे हुए बताया. उनका दावा है कि यूरोपीय नेतृत्व इस भ्रम में जी रहा है कि युद्ध कभी उनके घर तक नहीं पहुंचेगा. इसी सोच के चलते वे यूक्रेन युद्ध में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं और रूस को उकसा रहे हैं. करागानोव ने यह भी माना कि रूस अब तक जरूरत से ज्यादा संयम बरतता रहा है लेकिन अगर यूरोप, खासकर ब्रिटेन और जर्मनी, यूक्रेन युद्ध को समर्थन देना बंद नहीं करते और हालात और बिगड़ते हैं, तो रूस को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.

‘भारत में लोकतंत्र स्थिर और प्रभावी है’, CSPOC मंच से PM मोदी’

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद के संविधान सदन में आयोजित कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस के 28वें संस्करण का उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, संस्थानों की मजबूती और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को रेखांकित किया.

भारत की विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बनाया है.

उन्होंने कहा कि पहले यह कहा जाता था कि भारत जैसे इतने विविधतापूर्ण देश में लोकतंत्र लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा, लेकिन भारत ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक संस्थान और प्रक्रिया लोकतंत्र को स्थिरता, गति, मजबूती देती हैं. भारत में लोकतंत्र का अर्थ है, अंतिम पंक्ति तक सेवा की पहुंच. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र तभी सार्थक होता है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक भावना के चलते हाल के वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं. भारत में लोकतंत्र डिलीवर करता है. संविधान और सदन के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यही वह स्थान है, जहां संविधान सभा ने भारत के संविधान का निर्माण किया था और स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक यहीं से देश की संसद संचालित हुई.

उन्होंने कहा कि संसद भवन को संविधान सदन के रूप में समर्पित करना भारत की लोकतांत्रिक विरासत का सम्मान है. भारत का लोकतंत्र एक गहरे जड़ों वाले विशाल वृक्ष की तरह है, जो संवाद, विमर्श और सामूहिक निर्णय की परंपरा पर आधारित है. उन्होंने भारत को ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ बताते हुए वैदिक काल, बौद्ध संघ और तमिलनाडु के प्राचीन ग्राम सभाओं के उदाहरणों का उल्लेख किया.

साल 2024 के आम चुनाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था, जिसमें करीब 98 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे. उन्होंने महिला नेतृत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि आज भारत में महिलाएं न केवल मतदान कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी अग्रणी हैं. भारत वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाता रहा है.

उन्होंने याद दिलाया कि भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान भी ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा गया. भारत ओपन-सोर्स तकनीक और नवाचार के जरिए देशों के विकास में सहयोग कर रहा है. लोकतंत्र को जनता से जोड़ने के प्रयासों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संसद अध्ययन यात्राओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और इंटर्नशिप के माध्यम से नागरिकों को संसद के कामकाज से जोड़ रही है.

उन्होंने यह भी बताया कि AI की मदद से संसद की कार्यवाही का रियल-टाइम अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में किया जा रहा है, जिससे युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी. सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन की अध्यक्ष डॉ. टुलिया एक्सन और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलिला सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे.

28वां CSPOC सम्मेलन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा है, जिसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं. सम्मेलन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, संसद में AI का उपयोग, सोशल मीडिया का प्रभाव और नागरिक सहभागिता जैसे विषयों पर मंथन किया जाएगा.

भारत का 78वां सेना दिवस: गर्व और सम्मान का प्रतीक

0

सेना दिवस का महत्व

भारत आज, 15 जनवरी 2026 को अपना 78वां भारतीय सेना दिवस मना रहा है। यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर भारतीय सेना की सराहना करते हुए कहा कि हमारे सैनिक निस्वार्थ सेवा का उदाहरण पेश करते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ खड़े रहते हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा, “दुर्गम स्थानों से लेकर बर्फीली चोटियों तक, हमारी सेना का साहस और पराक्रम हर भारतीय को गर्वित करता है। सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों का दिल से अभिनंदन!” उन्होंने यह भी कहा कि देश उन बहादुरों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

सेना दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

15 जनवरी को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की याद में मनाया जाता है। उन्होंने 1949 में ब्रिटिश जनरल सर एफआरआर बुचर की जगह ली थी।

सेना दिवस 2026 की विशेषताएं

परेड का स्थान (जयपुर): इस वर्ष की मुख्य सेना दिवस परेड जयपुर (राजस्थान) में आयोजित की जा रही है। यह परंपरा है कि परेड को दिल्ली से बाहर विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाता है ताकि जनता सेना के शौर्य को देख सके।

इस साल की थीम (थीम): 2026 को सेना “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिकिटी का साल” के रूप में मना रही है, जो दर्शाता है कि हमारी सेना तकनीक और डिजिटल नेटवर्किंग में और अधिक आधुनिक हो रही है।

शौर्य कथा: जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में शाम को एक विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें 1,000 से अधिक डूबे लोगों के साथ ‘ड्रोन शो’ और युद्ध कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

सम्मान: इस दिन थल सेना प्रमुख को ‘सेना मेडल’ और वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है।