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“Aadhaar Card : इन लोगों के आधार कार्ड हो जाएंगे निष्क्रिय! जानें ताजा अपडेट”

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आधार कार्ड- आधार कार्ड धारकों के लिए बड़ी खबर। पाँच से सात साल की उम्र के बच्चों का आधार मुफ़्त में अपडेट किया जा सकता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इस आयु वर्ग के उन बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) लागू कर दिया है जिनके बायोमेट्रिक्स अपडेट नहीं हैं।

आप अपने बच्चे की जानकारी किसी भी आधार सेवा केंद्र पर अपडेट करवा सकते हैं। ऐसा न करने पर उनका आधार निष्क्रिय किया जा सकता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के उप महानिदेशक (डीडीजी) प्रशांत कुमार सिंह ने बुधवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित प्रश्नकाल कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने पाठकों की आधार संबंधी समस्याओं को सुना और उनके समाधान भी सुझाए।

डीडीजी सिंह ने कहा कि पाँच साल से कम उम्र के बच्चे अपनी तस्वीर, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और अन्य सहायक दस्तावेज़ देकर आधार नामांकन करा सकते हैं। पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के आधार नामांकन के लिए उंगलियों के निशान और आँखों की बायोमेट्रिक्स नहीं ली जाती क्योंकि वे उस उम्र तक पर्याप्त परिपक्व नहीं होते।

इसलिए, पाँच साल की उम्र तक पहुँचने पर अपने बच्चे के आधार में उसके फिंगरप्रिंट, आईरिस और फोटोग्राफ अपडेट करवाना अनिवार्य है। पाँच से सात साल की उम्र के बीच पहली अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लिए कोई शुल्क नहीं है। सात साल की उम्र के बाद, 100 रुपये का शुल्क लिया जाएगा।

आधार शुल्क नया आधार नामांकन – निःशुल्क अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट – निःशुल्क जनसांख्यिकी अद्यतन – 50 रुपये बायोमेट्रिक अपडेट – 100 रुपये आधार में परिवर्तन नाम में आंशिक परिवर्तन – दो बार जन्मतिथि में परिवर्तन – एक बार। दूसरी बार अपवाद है। जन्म प्रमाण पत्र आवश्यक है। पता, मोबाइल नंबर और फोटो – जितनी बार चाहें उतनी बार बदला जा सकता है। यहां संपर्क करें हेल्पलाइन नंबर – 1947 ईमेल – help , uidai.gov.in यहां से स्थिति जांचें आप MyAadhaar पोर्टल https://myaadhaar.uidai.gov.in/ के ज़रिए अपने आधार की स्थिति देख सकते हैं। आप m-Aadhaar ऐप के ज़रिए भी ऐसा कर सकते हैं। इसकी मदद से आप PVC कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, अपना पता बदल सकते हैं और अपने बायोमेट्रिक्स लॉक कर सकते हैं। आप आधार में अपने परिवार के मुखिया का पता भी बदल सकते हैं। आप अपना ई-आधार भी डाउनलोड कर सकते हैं।

“म्यूचुअल फंड मैनेजर्स को जोमैटो से लेकर जेएसडब्ल्यू स्टील पर हो रहा भरोसा, अगस्त में लगा दिए इतने पैसे”

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म्यूचुअल फंड मैनेजर्स को जोमैटो से लेकर जेएसडब्ल्यू स्टील पर हो रहा भरोसा, अगस्त में लगा दिए इतने पैसे…

भारतीय बाजार में भले ही बीते कई महीनों से बिकवाली हाबी हो. लेकिन कुछ कंपनियां हैं जिन पर म्यूचुअल फंड कंपनियां भी भरोसा जता रही हैं. मार्केट की उठा-पटक के बीच में भी फंड मैनेजर्स ने जोमैटो यानी इटरनल, जेएस स्टील सहित इंफोसिस में पैसा लगाया है.

आइए जानते हैं कि अगस्त महीने में म्यूचुअल फंड कंपनियों के फेवरेट स्टॉक कौन से रहे हैं.

ध्यान देने वाली यह है कि इन कंपनियों में फंड मैनेजर्स ने ऐसे समय में पैसा लगाया है. जब उनकी हिस्सेदारी बीते महीने के मुकाबले कम रही है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, घरेलू म्यूचुअल फंडों के लिए इक्विटी एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) अगस्त 2025 में महीने-दर-महीने (एमओएम) 0.6 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 36.2 ट्रिलियन रुपये रह गया है.

यहां हुई है तगड़ी खरीदारी इटरनल- मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस के अनुसार, जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल फंड मैनेजरों के बीच सबसे पसंदीदा शेयर रहा है. अगस्त के दौरान म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स में 12.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई और विभिन्न योजनाओं में 24.59 करोड़ शेयर जोड़े गए. इटरनल में म्यूचुअल फंड की कुल होल्डिंग बढ़कर 216.5 करोड़ शेयर हो गई, जिसका मूल्य 68,000 करोड़ रुपये है.

श्रीराम फाइनेंस-इटरनल के बाद फंड मैनेजर्स ने श्रीराम फाइनेंस अच्छी खासी खरीदारी की है. अगस्त 2025 में इसकी होल्डिंग 6.9 प्रतिशत बढ़कर 19.4 करोड़ शेयर हो गई, जिसका मूल्य 11,290 रुपये करोड़ था.

जेएसडब्ल्यू स्टील- म्यूचुअल फंडों की जबरदस्त भागीदारी वाला एक और नाम जेएसडब्ल्यू स्टील रहा, जिसके शेयरों की हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत बढ़ गई, जिसके बाद इसकी कुल वैल्यू 10,920 करोड़ रुपये हो गई.

इन्फोसिस-भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक, इन्फोसिस भी एमओएसएल की सूची में प्रमुखता से शामिल रही. इन्फोसिस में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी मासिक आधार पर 5.2 प्रतिशत बढ़कर 82.4 करोड़ शेयर हो गई, जिसकी कुल वैल्यू 1,21,140 करोड़ हो गई. हालांकि, अगस्त में इसके शेयर में 2.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे बड़ी आईटी कंपनियों पर दबाव बना रहा.

बजाज फिनसर्व-इंफोसिस, जेएस स्टील के अलावा, बजाज फिनसर्व ने भी निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा. इस कंपनी में भी म्यूचुअल फंड कंपनियों ने बढ़िया पैसा लगाया. एमओएसएल ने बताया कि कंपनी में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी मासिक आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 11.2 करोड़ शेयर हो गई, जिसका मूल्य 21,460 करोड़ रुपये है. हालांकि, इसके शेयरों में भी अगस्त में कंपनी के शेयर में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी.

“सऊदी-पाकिस्तान में डील, क्या अब भारत के लिए मुश्किल होगा ऑपरेशन सिंदूर 2.0?”

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पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए नए रक्षा समझौते ने दक्षिण एशियाई सामरिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा कर दी है. यह समझौता केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशिक्षण, हथियारों की आपूर्ति, संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी निहित हैं.

भारत के संदर्भ में यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि भारत वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में अपने सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक हितों को मजबूती से साधने में जुटा है. ऐसे समय में जब भारत वैश्विक रक्षा और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाने की दिशा में बढ़ रहा है, तब सऊदीपाक गठजोड़ उसके लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है.

सऊदी-पाक रक्षा समुझौते की अहम बातें इस नए समझौते के अंतर्गत कुछ मुख्य बिंदु जो सामने आए हैं, कुछ इस प्रकार हैं.

सैन्य प्रशिक्षण एवं विशेषज्ञता का आदान-प्रदान पाकिस्तान के पास लंबे समय से एक संगठित सैन्य संरचना है. सऊदी अरब अपने सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण और संचालन में पाकिस्तान की मदद चाहता है. संयुक्त सैन्य अभ्यास भविष्य में दोनों देशों की सेनाएं मिलकर आतंकवाद विरोधी और सामरिक स्तर के अभ्यास करेंगी. इससे पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की सैन्य पैठ बढ़ेगी. रक्षा तकनीक और हथियारों की आपूर्ति सऊदी अरब अपने रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को वित्तीय मदद और संभावित हथियार खरीद का मौका दे सकता है.

रक्षा खुफिया तंत्र साझा करना दोनों देश भविष्य में खुफिया जानकारी साझा करने के लिए भी सहमत होते दिख रहे हैं. यह समझौता पाकिस्तान को आर्थिक व सामरिक दोनों स्तर पर मजबूती देगा और सऊदी अरब को क्षेत्रीय सुरक्षा में एक नया सहयोगी प्रदान करेगा.

भारत के लिए संभावित चुनौतियां खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक संतुलन: भारत सऊदी अरब के साथ ऊर्जा, निवेश और प्रवासी भारतीयों के लिहाज से बेहद घनिष्ठ संबंध रखता है. ऐसे में सऊदी अरब पाकिस्तान की नजदीकी भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती है, क्योंकि यह भारत-सऊदी सहयोग की सीमाओं को कमजोर कर सकती है.

जानिए कैसे? पाकिस्तान को रणनीतिक लाभ :  अगर सऊदी अरब पाकिस्तान को प्रत्यक्ष वित्तीय मदद या हथियार उपलब्ध कराता है, तो यह भारत- पाक सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

नौसैनिक उपस्थिति के लिए बाधाएं: भारत की नौसैनिक ताकत हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय रूप से मौजूद है. सऊदीपाक सैन्य अभ्यास या सहयोग के चलते भारत के लिए वहाँ स्वतंत्र संचालन करना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है.

संकटकाल में आ सकता है दबाव: संकटग्रस्त हालात में नागरिकों की सुरक्षित निकासी या मानवीय मिशन के दौरान पाकिस्तानसऊदी साझेदारी भारत के लिए बाधा उत्पन्न कर सकती है, खासकर जटिल सुरक्षा परिदृश्यों में.

भारत के लिए क्या हैं संभावित अवसर? सऊदी अरब और पाकिस्तान में हुए रक्षा समझौते के बाद सब कुछ खत्म नहीं हो जाता, न ही रास्ते बंद होते हैं. भारत के पास कई ऐसे मौके हैं जिनका फायदा उठाकर वह अपनी स्थिति मज़बूत बना सकता है. यूं भी आज भारत को कोई भी देश हल्के में नहीं ले सकता. उसके दो प्रमुख कारण हैं-पहला बाजार और दूसरा उसकी ताकत.

संतुलित कूटनीति भारत दोनों देशों-सऊदी अरब और पाकिस्तान-के सामरिक समीकरणों को अच्छी तरह से जानता है. भारत चाहे तो सऊदी अरब के ऊर्जा और निवेश सहयोग को और अधिक मजबूत कर अपने हितों को सुरक्षित कर सकता है.

गठबंधन राजनीति में लचीलापन भारत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और ओमान जैसे खाड़ी देशों के साथ रक्षा सहयोग पहले से बढ़ा रहा है. यह सहयोग भारत को विकल्प प्रदान करेगा कि अगर सऊदीपाक धुरी मजबूत होती है तब भी उसके पास वैकल्पिक साझेदार बने रहें.

नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन भारतीय नौसेना लगातार मल्टीनेशनल अभ्यासों में हिस्सा लेती है. ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के तहत भारत अपनी नौसैनिक ताकत और मानवतावादी दृष्टिकोण दोनों को दिखाकर अन्य देशों का विश्वास जीत सकता है.

रणनीतिक स्वायत्तता का लाभ भारत न तो किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा है, न ही उसकी नीति किसी एक ध्रुव पर निर्भर है. इस स्वायत्तता की नीति के कारण भारत को लचीलापन हासिल है.

वैश्विक परिपेक्ष में क्या मायने रखता है ताजा समझौता सऊदी अरब-पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते को वैश्विक राजनीति से अलग नहीं देखा जा सकता. अमेरिका, चीन और रूस जैसी महाशक्तियां पहले से ही खाड़ी क्षेत्र में प्रभाव बनाए हुए हैं.

अमेरिका सऊदी अरब का परंपरागत सहयोगी है.चीन, सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनों से ही गहरे आर्थिक संबंध रखता है. रूस ऊर्जा राजनीति के माध्यम से इस क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है. भारत को इस जटिल परिदृश्य में संतुलन साधना होगा और यह कूटनीति से ही संभव है.

क्या हो सकती है भविष्य की रणनीति

  1. ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता: भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा खाड़ी से आता है. इसलिए ऊर्जा समझौते और दीर्घकालिक अनुबंधों पर जोर देना होगा.
  2. प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में लगभग 80 लाख भारतीय काम करते हैं. किसी भी रक्षा सहयोग या तनाव की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी.
  3. सुरक्षा सहयोग का विस्तार: भारत को यूएई और ओमान जैसे देशों के साथ नौसैनिक आधार और अभ्यास को और मजबूत करना होगा.
  4. बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल: जी20, शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है, ताकि सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनों को संतुलित संदेश मिले.

ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की स्थिति में आगे का रास्ता? अब सवाल उठता है कि अगर पाकिस्तान फिर से कोई नापाक हरकत करता है और भारत को ऑपरेशन सिंदूर 2.0 चलाना पड़े तो क्या हालात बनेगे?

हालांकि सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते की जो बातें बाहर आई हैं, उसके मुताबिक एक पर हमला, दूसरे पर भी माना जाएगा. मतलब पाकिस्तान पर हमला होगा तो उसे सऊदी अरब खुद पर हमला मानेगा. पर, यह व्यवहार में उतना आसान नहीं है. यह कोई मोहल्ले के पड़ोसियों की लड़ाई नहीं है. वैश्विक राजनीति में इस तरह के समझौते होते रहते हैं. हां, भारत को सतर्क रहना होगा.अगर ऑपरेशन सिंदूर-2 जैसी कोई स्थिति बनती है तो उसे ऑपरेशन से पहले सऊदी अरब को भरोसे में लेना होगा. क्योंकि भारत खुद से हमला न करने के लिए संकल्पबद्ध है ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्थिति में दुश्मनों का विनाश लक्ष्य होगा. आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी दुनिया एक है तब हमें अपनी पेशबंदी मजबूत रखनी होगी.

विदेश नीति भी बनेगी मददगार मूल रूप से भारत की विदेश नीति और सामरिक कूटनीति का वह पहलू है, जिसके जरिए भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा, विदेशी धरती पर बचाव अभियानों और आपदा प्रबंधन में तेजी के साथ काम करता है. दूसरे शब्दों में, यह भारत की हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर दोनों का सम्मिलन है, जहां एक ओर भारत अपनी नौसेना और वायुसेना के दम पर खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय रहता है, वहीं दूसरी ओर मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों के ज़रिए अपनी छवि को मजबूती देता है.

सऊदी – पाक रक्षा समझौता निश्चित तौर पर भारत के लिए नई कूटनीतिक और सामरिक चुनौतियां लेकर आया है. लेकिन भारत की बहुआयामी विदेश नीति, आर्थिक ताकत और मजबूत नौसैनिक उपस्थिति इस बात को सुनिश्चित करती है कि वह किसी भी एक सामरिक धुरी पर निर्भर नहीं है. भारत न केवल अपनी नागरिक सुरक्षा और मानवीय पहलू को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी सक्रिय, जिम्मेदार शक्ति की छवि भी बना रहा है. यदि भारत ऊर्जा हितों की रक्षा, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और संतुलित कूटनीति पर ध्यान रखता है तो सऊदीपाक गठजोड़ उसकी राह में बड़ी बाधा नहीं बनेगा. बल्कि, यह भारत को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनने का अवसर भी दे सकता है. हां, सतर्क दृष्टि जरूर रखना होगा.

“Petrol diesel price : 19 सितंबर 2025 के दिन पेट्रोल डीजल का रेट कम हुए या ज्यादा ,देखें आज के ताजा रेट”

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19 सितंबर 2025 के दिन पेट्रोल डीजल : आज देश में तेल कंपनियों ने 19 सितंबर 2025 को ईंधन के रेट अपडेट कर दिए हैं। यह नए रेट सुबह-सुबह 6:00 बजे जारी हुए हैं आप अपने शहर में चल रहे पेट्रोल डीजल के दामों को नीचे दी गई लिस्ट में देख सकते हैं।

भारत के बड़े शहरों में आज पेट्रोल डीजल के रेट नई दिल्ली पेट्रोल 94.77 डीजल 87.67।

कोलकाता पेट्रोल 105.41 डीजल 92.02।
मुंबई पेट्रोल 103.50 डीजल 90.03।
चेन्नई पेट्रोल 100.80 पेट्रोल 92.39।
गुरुग्राम पेट्रोल 95.51 डीजल87.97।
नोएडा पेट्रोल 94.85 डीजल 87.98।
बेंगलुरु पेट्रोल 102.92 डीजल 90.99।
भुवनेश्वर पेट्रोल 101.35 डीजल 92.92।
चंडीगढ़ पेट्रोल 94.30 डीजल 82.45।
हैदराबाद पेट्रोल 107.46 डीजल 95.70।
जयपुर पेट्रोल 104.72 डीजल90.21।
लखनऊ पेट्रोल 94.58 डीजल 87.68।
पटना पेट्रोल 105.60 डीजल 91.83।
तिरुवनंतपुरम पेट्रोल 107.49 डीजल96.48।
असम पेट्रोल 98.46 डीजल 89.68।
बिहार पेट्रोल 105.60 डीजल 91.83।
चंडीगढ़ पेट्रोल 94.30 डीजल 82.45।
छत्तीसगढ़ पेट्रोल 99.44 डीजल 93.39।

घर बैठे एसएमएस के द्वारा ऐसे चेक करें पेट्रोल डीजल के रेट  आप घर ऑफिस में बैठे भी पेट्रोल डीजल के रेट जान सकते हैं यह आप ऑनलाइन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर भी देख सकते हैं। इंडियन ऑयल के ग्राहक आरएसपी के साथ शहर का कोड लिखें और 922 499 2249 पर एसएमएस भेज दें। आपके पास शहर की पेट्रोल पंप के अनुसार रेट लिस्ट आ जाएगी।

बीपीसीएल के ग्राहक आरएसपी लिखें और 922 311 2222 पर भेज दें फिर आपको एसएमएस के जरिए रेट का पता चल जाएगा।

“Bank New Rule: बैंक ग्राहक सावधान! खाते में 10,000 से कम बैलेंस हुआ तो कटेगा पैसा”

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जैसा कि आप लोगों को मालूम है कि बैंक के द्वारा अब आपको अपने बैंक खाते में मिनिमम 10000 की राशि रखनी होगी अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको बड़ी जुर्माना देना पड़ सकता है हाल के दिनों मे बैंक के द्वारा कहा गया है कि यदि आपके पास सेविंग अकाउंट है तो आपको 10000 की राशि रखनी होगी ऐसे में सेविंग अकाउंट संबंधित नया नियम क्या है उसके बारे में पूरी जानकारी हम आपको आर्टिकल में देंगे.

सेविंग अकाउंट संबंधित नया नियम क्या हैबैंक में 10000 की राशि रखने का नियम क्यों बनाया गया?

सेविंग अकाउंट संबंधित नया नियम क्या है आपको बता दे कि यदि आपके पास भी सेविंग अकाउंट है तो आपको अपने खाते में 10000 की राशि रखना होगा नहीं तो आपको कई प्रकार के चार्ज और जुर्माना देना पड़ सकता है जो आपके लिए एक प्रकार का आंतरिक आर्थिक बोझ होगा.इसलिए आपकी जानकारी के लिए बता दे की बैंक के द्वारा जो नियम बनाया गया है उसका पालन आपको करना होगा .

बैंक में 10000 की राशि रखने का नियम क्यों बनाया गया?

यदि आप भी सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं तो आपको अपने खाते में 10000 रखने होंगे नहीं तो आपको आर्थिक जुर्माना देना पड़ सकता है.इस नियम को बनाने का प्रमुख मकसद कस्टमर को कई प्रकार के डिजिटल सेवा का लाभ देना है ताकि कस्टमर आसानी से बैंकिंग सुविधा का लाभ ले सके. इसके संदर्भ में बैंक के द्वारा कहा गया है कि बैंक को कई प्रकार के डिजिटल सेवा लाभ देने के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है.जिसके कारण बैंक के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है यही वजह है कि बैंक के द्वारा 10000 की राशि आपको अपने अकाउंट में रखनी होग .

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी है

आपको बता दे कि जो लोग ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं उनके पास इतने पैसे नहीं है क्यों अपने बैंक खाते में 10000 की न्यूनतम राशि रख सके.जिसके कारण हमको कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. ऐसे मेरी आप भी ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं तो आप प्रधानमंत्री जनधन खाता का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इसमें आपको कोई भी पैसे रखने की जरूरत नहीं है.इसके पीछे की वजह है कि जनधन खाता एक न्यूनतम बैलेंस अकाउंट है.

“School Holiday: 22 सितंबर को अचानक छुट्टी का ऐलान, देश के सभी स्कूल-कॉलेज, बैंक व दफ्तर बंद”

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सरकार ने राज्यवासियों को बड़ी खुशखबरी दी है. सितंबर माह में पहले से ही कई त्योहारों और अवसरों पर छुट्टियां तय की गई थीं और अब इसमें एक और अवकाश जुड़ गया है. सरकार ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए घोषणा की है कि 22 सितंबर (सोमवार) को महाराजा अग्रसेन जयंती के उपलक्ष्य में पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश (Monday School Holiday) रहेगा.

इस दिन पंजाब के सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, स्कूल-कॉलेज और अन्य सरकारी दफ्तर पूरी तरह बंद रहेंगे.

महाराजा अग्रसेन जयंती पर छुट्टी क्यों घोषित की गई?किन संस्थानों पर लागू होगा यह अवकाश?छात्रों और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहतसोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है #MondayHolidayकब से प्रभावी होगा आदेश?

महाराजा अग्रसेन जयंती पर छुट्टी क्यों घोषित की गई? महाराजा अग्रसेन भारतीय इतिहास में एक महान समाज सुधारक, व्यापारी वर्ग के आदर्श और अग्रवाल समाज के संस्थापक माने जाते हैं. उनकी जयंती पर हर साल देशभर में भव्य आयोजन होते हैं. पंजाब सरकार ने उनके योगदान को सम्मान देने के लिए इस बार 22 सितंबर को सरकारी अवकाश (Maharaja Agrasen Jayanti Holiday) घोषित किया है, जिससे लोग इस दिन सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले सकें.

किन संस्थानों पर लागू होगा यह अवकाश? पंजाब सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, Monday School Holiday का असर पूरे राज्य पर होगा. इस दिन निम्नलिखित संस्थान बंद रहेंगे: सभी सरकारी और निजी स्कूल (Punjab School Holiday) सभी कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग संस्थान सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे आंगनबाड़ी केंद्र, डे-केयर सेंटर और स्थानीय निकायों के कार्यालय हालांकि, अस्पताल, पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी.

छात्रों और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत इस अवकाश से न केवल सरकारी कर्मचारियों बल्कि छात्रों को भी राहत मिलेगी. सितंबर माह में लगातार कई परीक्षाएं और कक्षाएं चल रही थीं, ऐसे में यह Monday School Holiday उन्हें मानसिक रूप से रिफ्रेश होने का मौका देगा. कर्मचारियों को भी परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा.

सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है #MondayHoliday जैसे ही पंजाब सरकार की ओर से 22 सितंबर Holiday का आदेश जारी हुआ, सोशल मीडिया पर #MondayHoliday और #MaharajaAgrasenJayanti है. शटैग ट्रेंड करने लगे. कई यूजर्स ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे एक सराहनीय कदम बताया है.

कब से प्रभावी होगा आदेश? पंजाब सरकार का आदेश 22 सितंबर (सोमवार) को पूरे दिन के लिए प्रभावी रहेगा. इस दिन सभी शैक्षणिक व सरकारी संस्थान बंद रहेंगे और अगले दिन यानी मंगलवार से सभी संस्थान सामान्य रूप से फिर से खुल जाएंगे. सरकार ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे इस आदेश की जानकारी कर्मचारियों और छात्रों तक समय रहते पहुंचा दें.

पंजाब सरकार का यह निर्णय राज्यवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. Monday School Holiday की घोषणा से न केवल छात्रों और कर्मचारियों को आराम मिलेगा बल्कि वे महाराजा अग्रसेन जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर को परिवार व समाज के साथ मना सकेंगे. इस अवकाश से सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा मिले.

“सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! 2026 से फिर लौटेगी पुरानी पेंशन, कर्मचारियों में खुशी की लहर”

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Old Pension Scheme Again Start: सरकारी नौकरी करने वाले हर व्यक्ति की एक बड़ी चिंता होती है रिटायरमेंट के बाद आय का क्या होगा? पहले पुरानी पेंशन योजना (OPS) इस चिंता को खत्म कर देती थी, लेकिन इसके बंद होने के बाद कर्मचारियों में असुरक्षा बढ़ गई थी.

लेकिन हम आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सरकार को निर्देश दिए गए हैं. कि दोबारा से पुरानी पेंशन प्रणाली को लागू किया जाए ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 2026 में पुरानी पेंशन प्रणाली शुरू हो सकता है जिसके बारे में पूरा विवरण हम आपको आर्टिकल में देंगे चलिए जानते हैं-

पुरानी पेंशन योजना क्यों है खास?सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसलासरकार का बड़ा ऐलान – 2026 से लागू होगी OPS कर्मचारियों और परिवारों में खुशी की लहर पुरानी पेंशन योजना क्यों है खास?

आपकी जानकारी के लिए बताने की पुरानी पेंशन प्रणाली काफी अच्छी थी इसमें आपको रिटायरमेंट के बाद एक करता है. राशि पेंशन के तौर पर दी जाती थी. जिसका उपयोग आप अपने परिवार के आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कर सकते हैं. ताकि बुढ़ापे में आपको दूसरे व्यक्ति के ऊपर निर्भर बनाना पड़े इसके अलावा पुराने पेंशन प्रणाली के दौरान जो व्यक्ति रिटायर होते थे उनका जीवन में एक निश्चित आय प्राप्त होती थी. जिससे उनकी मानसिक शांति बनी रहती थी।नई पेंशन योजना (NPS) आने के बाद कर्मचारियों को पेंशन का भरोसा नहीं रहा था. इसी कारण OPS को दोबारा लागू करने की मांग लगातार हो रही थी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा पेंशन सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारी का अधिकार है. यह उसके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय है.”सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पुरानी पेंशन योजना दोबारा लागू की जाए, ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रह सके.

सरकार का बड़ा ऐलान – 2026 से लागू होगी OPS सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने भी घोषणा की है कि: 2026 में पुरानी पेंशन योजना को दोबारा से देश में लागू किया जाएगा. जिसका लाभ सभी केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा इसके लिए जरूरी प्रक्रिया और विशेष प्रकार के गाइडलाइन जल्दी जारी होंगे. इसलिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.

कर्मचारियों और परिवारों में खुशी की लहर जैसे ही यह खबर आई, कर्मचारियों के बीच खुशी का माहौल बन गया. अब रिटायरमेंट के बाद आय की चिंता नहीं रहेगी.परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.लंबे समय से चल रहा आंदोलन सफल हुआ.कई कर्मचारियों ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद व्यक्त किया है.उन्होंने कहा कि आज भी देश में कानून जिंदा है और न्यायालय ने एक अच्छा फैसला दिया है हम उसकी तारीफ करते हैं और न्यायालय को आभार व्यक्त करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार का यह निर्णय देशभर के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। 2026 से OPS लागू होने के बाद कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा और रिटायरमेंट के बाद भी उनके आर्थिक और सामाजिक जीवन में बदलाव आएगा.

EOW: निलंबित राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया पर अवैध वसूली से खरीदी गईं 16 संपत्तियां…

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रायपुर छत्तीसगढ़ की निलंबित राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने शिकंजा कस दिया है।

रायपुर छत्तीसगढ़ की निलंबित राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने शिकंजा कस दिया है। ईओडब्ल्यू ने विशेष न्यायालय में आवेदन लगाकर सौम्या की आय से अधिक 16 चल-अचल संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति मांगी है।

अवैध वसूली से खरीदी गईं 16 संपत्तियां

आवेदन में ईओडब्ल्यू ने बताया कि सौम्या ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली और कमीशनखोरी से करोड़ों की राशि अर्जित की। इन्हीं पैसों से उन्होंने अपने परिजनों और अन्य लोगों के नाम पर कुल 45 संपत्तियां खरीदीं। इनमें से भिलाई-दुर्ग जिले की संपत्तियों को चिन्हांकित कर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) 29 अगस्त को पहले ही अटैच कर चुका है। अब बाकी 16 संपत्तियों को भी अटैच करने की अनुमति मांगी गई है।

ईओडब्ल्यू ने लगाई संपत्ति अटैच करने की अर्जी

ईओडब्ल्यू का कहना है कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि सौम्या ने अपने कार्यकाल के दौरान आय से कई गुना अधिक संपत्तियां खरीदी हैं। इन संपत्तियों के लिए प्रत्यक्ष रूप से कोई वैध आय स्रोत नहीं मिला है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि जिन संपत्तियों को सौम्या की बताई जा रही है, वे परिजनों द्वारा खरीदी गई हैं और इसका दस्तावेजी साक्ष्य भी मौजूद है। बचाव पक्ष ने न्यायालय से अतिरिक्त समय की मांग करते हुए 2 पन्नों का आवेदन प्रस्तुत किया।

विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बचाव पक्ष को 22 सितंबर तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है। इसके बाद ही इन संपत्तियों को अटैच करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बता दें कि सौम्या चौरसिया को कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद हाल ही में रायपुर जेल से रिहाई मिली है।

बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई…

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को गिरफ्तार कर लिया है.

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी व पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को गिरफ्तार कर लिया है. यह मामला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का है, जब निरंजन दास आबकारी आयुक्त के रूप में कार्यरत थे. EOW की जांच में सामने आया है कि शराब घोटाले में उनकी अहम भूमिका रही है. इस प्रकरण में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पहले से ही जेल में हैं.

घोटाले का नेटवर्क

EOW के अनुसार, निरंजन दास ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, विशेष सचिव आबकारी अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर (पूर्व मेयर एजाज ढेबर के भाई) और अन्य के साथ मिलकर एक शराब सिंडिकेट बनाया था. इस सिंडिकेट का काम सरकारी शराब दुकानों में कमीशन तय करना था. इसके अलावा डिस्टलरियों से अतिरिक्त शराब बनवाना, विदेशी ब्रांड की अवैध सप्लाई से वसूली करना और डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर शराब बेचना था.

3200 करोड़ का घोटाला

EOW ने बताया कि यह घोटाला पहले बताए गए 2200 करोड़ का नहीं, बल्कि लगभग 3200 करोड़ रुपये का है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने करीब 400 ट्रक शराब की अवैध सप्लाई की जाती थी. इसके चलते रिकॉर्ड और दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं.

बड़े नामों का हो सकता है खुलासा

जांच एजेंसी का मानना है कि इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं. अदालत ने इसकी गंभीरता को देखते हुए EOW को जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं. छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है और लगातार कई बड़े अधिकारी और नेता जांच के दायरे में है.

IAS अफसर अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत याचिका रद्द

उधर छत्तीसगढ़ घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने IAS अफसर अनिल टुटेजा  और आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी. दोनों को ईडी (ED) की चार हफ्ते की कस्टडी में भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अग्रिम जमानत देने योग्य मामला नहीं था, दोनों को एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही दोनों को ED जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है.

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ED हिरासत पूरी होने के बाद, अगर किसी अन्य मामले में जरूरत न हो तो उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों पर रिहा किया जाए.

हालांकि बेंच ने आदेश दिया कि दोनों अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा. सरेंडर के बाद उन्हें चार सप्ताह तक ED की हिरासत में रखा जाएगा, ताकि एजेंसी जांच पूरी कर सके और अपनी शिकायत दाखिल कर सके.

 

”कथित शराब सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर करोड़ों के शराब घोटाले का आरोप ”

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छत्तीसगढ़ में कथित शराब सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को आरोपी बनाया है. ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल ने कथित तौर पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम संभाली और अपने व्यवसायिक उद्यमों के लिए इसका उपयोग किया.

छत्तीसगढ़ में “बिग बॉस” चकाचौंध भरा टीवी शो नहीं, जिसे बॉलीवुड स्टार सलमान खान होस्ट करते हों, बल्कि यहां का “बिग बॉस” कथित तौर पर एक विशाल शराब सिंडिकेट था और इसका सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल थे. अगर प्रवर्तन निदेशालय की मानें तो जो कुछ सामने आया वह रियलिटी शो नहीं, बल्कि राजनीतिक अंधेरे में बुना गया हजारों करोड़ का घोटाला था.

चैतन्य बघेल इस समय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू, EOW) भी उन्हें अपनी कस्टडी में लेने की तैयारी कर रही है. 15 सितंबर को ईडी ने विशेष अदालत में 5वां पूरक आरोपपत्र दाखिल किया. इस चार्जशीट में खुलासा हुआ कि चैतन्य ने अकेले ही हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम संभाली.

ग्रुप के जरिए लेनदेन, चैतन्य बघेल थे ‘बिट्टू’

जांच में कथित तौर पर एक वॉट्सऐप ग्रुप का खुलासा हुआ, जिसका नाम ही “बिग बॉस” था. पूरा सिंडिकेट इसी ग्रुप से चलता था. इस ग्रुप के जरिये सैकड़ों करोड़ के वित्तीय लेन-देन कथित तौर पर तय किए जाते थे. इसमें चैतन्य बघेल, जिन्हें “बिट्टू” नाम से सेव किया गया था, कांग्रेस नेता अनवर ढेबर, रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी अधिकारी सौम्या चौरसिया और व्यापारी पुष्पक शामिल थे.

ग्रुप में बनती थी रणनीति

आरोपपत्र में इन चैट्स के स्क्रीनशॉट भी जोड़े गए हैं, जिसमें पूरे तफसील से दर्ज है कि “बिट्टू” ने कब किसे फोन किया, कितनी देर बात हुई और किसे कितना पैसा कहां भेजना है. यह ग्रुप राज्य की शराब व्यवस्था का समानांतर कमांड सेंटर बन गया था, जहां नकद के रास्ते, नकली होलोग्राम और कमीशन बांटने की रणनीति तय होती थी. इसके ग्रुप के कई चैट्स एनडीटीवी के पास मौजूद हैं.

अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल फोन से मिले साक्ष्यों ने केस को और पुख्ता किया. अनवर के फोन में चैतन्य का नंबर “बिट्टू” के नाम से सेव था. चैट्स में भारी नकद लेन-देन, नकली होलोग्राम बनाने और काले धन के बंटवारे की बातें दर्ज थीं.

अकेले चैतन्य ने कमाए 200 करोड़, 850 करोड़ कांग्रेस को भेजे

ईडी का कहना है कि चैतन्य ने अकेले कम से कम 200 करोड़ रुपये कमाए, जबकि 850 करोड़ रुपये तत्कालीन कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को भेजे गए. एजेंसी का दावा है कि यह पूरा ऑपरेशन एक सैन्य अनुशासन की तरह चलता था, जिसमें तय होता था कि किसे पैसा मिलेगा, कौन-सा ठेकेदार भुगतान पाएगा और कितनी रकम सफेद की जाएगी.

भूपेश बघेल के करीबी ने किया था सनसनीखेज खुलासा

सबसे सनसनीखेज बयान शराब कारोबारी लक्ष्मीनारायण उर्फ पप्पू बंसल का आया, जो भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं. पूछताछ में बंसल ने माना कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक नकद को संभाला. बंसल ने खुलासा किया कि यह पैसा अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाया गया. सिर्फ तीन महीने में ही बंसल ने 136 करोड़ रुपये को इधर से उधर किया. ईडी अधिकारियों का कहना है कि बंसल की गवाही बताती है कि सिंडिकेट किस तरह राजनीतिक ढांचे में गहराई से पैठ बना चुका था.

रियल एस्टेट में लगाया पैसा, काला धन छिपाने की थी रणनीति

चार्जशीट यह भी दिखाती है कि घोटाले का पैसा किस तरह रियल एस्टेट में लगाया गया. चैतन्य की परियोजनाएं विठ्ठल ग्रीन और बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का अड्डा थीं. आधिकारिक रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि जांचकर्ताओं के अनुसार, असली लागत 13 से 15 करोड़ थी, जिसमें से 4.2 करोड़ नकद ठेकेदारों को दिए गए. 2020 में एक ही दिन में शराब कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों ने विठ्ठल ग्रीन में 19 फ्लैट खरीदे. ईडी के मुताबिक यह काले धन को छिपाने की रणनीति थी.

भिलाई के नामी ज्वैलर्स भी शामिल

भिलाई के नामी ज्वैलर्स के नाम भी सामने आए. आरोप है कि उन्होंने बघेल की कंपनियों को 5 करोड़ रुपये “ऋण” दिया और बाद में मात्र 80 लाख रुपये में छह जमीनें खरीदी गईं. ईडी ने इसे क्लासिक मनी लॉन्ड्रिंग का उदाहरण बताया- नकद अंदर, ज़मीन बाहर, सब कुछ वैध व्यापार के नाम पर.

चैतन्य के वकील ने क्या कहा

हालांकि चैतन्य के वकील फैसल रिजवी ने इस केस को राजनीति से प्रेरित बताया है. उनका कहना है कि गिरफ्तारी अवैध है और केवल पप्पू बंसल के बयान पर आधारित है, जो खुद फरार है और जिसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है. रिजवी ने कहा कि चैतन्य ने हमेशा जांच में सहयोग किया, सभी दस्तावेज सौंपे, फिर भी उन्हें कभी पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया और अचानक गिरफ्तार कर लिया गया. उनके अनुसार यह सब पूर्व मुख्यमंत्री को निशाना बनाने के लिए किया गया है.

2019 में होटल में बुलाई थी बैठक

शराब घोटाले की जड़ें फरवरी 2019 तक जाती हैं, जब अनवर ढेबर ने रायपुर के एक होटल में बैठक बुलाई. इसमें छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी के नवीन केडिया, भाटिया वाइंस के प्रिंस भाटिया और वेलकम डिस्टिलरी के राजेंद्र जायसवाल सहित कई डिस्टिलर मौजूद थे. साथ ही एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह जैसे अफसर भी शामिल थे. बैठक में तय हुआ कि हर शराब केस पर कमीशन लिया जाएगा और बदले में डिस्टिलरी ऑपरेटरों को रेट बढ़ाकर दिए जाएंगे. जल्द ही सिंडिकेट का काम तीन हिस्सों में बंट गया. पहला, हर केस पर 75 रुपये का कमीशन, जिससे 300 करोड़ से अधिक जुटाए गए.

दूसरा, एक समानांतर शराब बाजार, जिसमें डुप्लीकेट होलोग्राम से हजारों केस सरकारी गोदामों से बाहर बेचे गए. 2022–23 में ही 400 ट्रक अवैध शराब हर महीने चली और प्रति केस 3000 रुपये का मुनाफा कमाया गया. तीसरा हिस्सा था फ़ॉरेन लिकर लाइसेंस FL-10A, जिसे चुनिंदा कंपनियों को बांटकर प्रीमियम ब्रांड ऊंचे दाम पर बेचने का अधिकार मिला और इससे 211 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन मुख्य सचिव रहे रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांड भी सिर्फ मूक दर्शक नहीं बल्कि सीधे लाभार्थी थे. ईडी के शब्दों में, आबकारी विभाग को “हाई-परफॉरमेंस करप्शन इंजन” में बदल दिया गया, जिसे डर, फायदे और अरबों की दौलत से चलाया जाता था.

घोटाले का पैमाना चौंकाने वाला है. ईडी का दावा है कि 2019 से 2022 के बीच ही कम से कम 1392 करोड़ रुपये कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगियों तक पहुंचे. चैतन्य की कथित भूमिका बतौर “बिग बॉस” ही इस गिरफ्तारी को विस्फोटक बनाती है. उनकी रियल एस्टेट परियोजनाएँ, वॉट्सऐप चैट्स, कैश हैंडलर्स की गवाही और नकली होलोग्राम की कड़ियां मिलकर एक भयावह तस्वीर पेश करती हैं. एजेंसी का कहना है कि उनके समन्वय के बिना यह सिंडिकेट इतने बड़े स्तर पर चल ही नहीं सकता था.