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वोटर वेरिफिकेशन की तैयारी, दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग, चुनाव आयोग करेगा बड़ा ऐलान…

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वोटर वेरिफिकेशन की तैयारी, दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग, चुनाव आयोग करेगा बड़ा ऐलान…

बिहार में हाल ही में वोटर वेरिफिकेशन को लेकर मची हलचल के बीच अब यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू किए जाने की तैयारी जोरों पर है। चुनाव आयोग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 10 सितंबर को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

इस बैठक में SIR को लेकर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि साल के अंत तक देशभर में वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक इस मीटिंग में देशभर में SIR प्रक्रिया को लागू करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

इसमें यह तय किया जाएगा कि कैसे प्रत्येक राज्य में वोटर्स की जानकारी को अद्यतन और सत्यापित किया जाए। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सके ताकि आने वाले चुनावों में निष्पक्ष और भरोसेमंद मतदान सुनिश्चित किया जा सके। आगामी महीनों में इसको लेकर राज्यों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाने की संभावना है।

पंजाब बाढ़: प्रकृति ने दी ऐसी गहरी चोट कि दशकों में भी नहीं होगी भरपाई, दरख्त देखने को तरसेंगे लोग

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पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य की हरी चादर को बर्बाद कर दिया है. वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 776 हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 4,94,956 पेड़ बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं. यह नुकसान पिछले 37 सालों में सबसे भीषण माना जा रहा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) 2023 की रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में महज 1,846 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का केवल 3.7% है. लगभग 83% ज़मीन खेती के अंतर्गत होने के कारण पहले से ही जंगल बढ़ाने की गुंजाइश बेहद कम है. ऐसे में लाखों पेड़ों का एक साथ बह जाना पंजाब की पर्यावरणीय स्थिति को दशकों पीछे धकेल सकता है.
बाढ़ से पंजाब को कितना नुकसान?
वन विभाग ने अब तक का नुकसान करीब 341.3 लाख रुपये आंका है, जबकि विभागीय इमारतों को हुआ 19.2 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान मिलाकर कुल नुकसान 360.5 लाख रुपये से अधिक बैठता है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि ये शुरुआती आंकड़े हैं, बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्थिति और भयावह हो सकती है. उन्होंने आश्वासन दिया कि हालात सुधरने पर हरे-भरे आवरण को फिर से पटरी पर लाने की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब पहले ही देश के उन राज्यों में शामिल है जहां वन क्षेत्र सबसे कम है, और अब बाढ़ ने राज्य सरकार की पौधारोपण योजनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है. इसका असर पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने की कोशिशों पर लंबे समय तक पड़ेगा.
बाढ़ का बढ़ा प्रकोप, मृतकों की संख्या भी बढ़ी

इस बीच, बाढ़ का मानव जीवन पर भी कहर जारी है. पंजाब में शुक्रवार और शनिवार के बीच तीन और लोगों की मौत हुई, जिससे यहां मृतकों का आंकड़ा 46 तक पहुंच गया. 48 नए गांव बाढ़ के खतरे में बताए जा रहे हैं. हरियाणा के अंबाला जिले में तंगड़ी नदी में डूबकर 13 वर्षीय बच्चे की मौत ने स्थिति की भयावहता और स्पष्ट कर दी.
वहीं हिमाचल प्रदेश में हालात और भी गंभीर हैं. यहां अब तक 366 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग अब भी लापता हैं. कुल्लू में भूस्खलन के मलबे में दो लापता व्यक्तियों की तलाश तीसरे दिन भी जारी रही. हालांकि मौसम में कुछ सुधार हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई है.
पंजाब और हिमाचल में प्रकृति का यह कहर साफ संकेत देता है कि पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की कितनी बड़ी कीमत इंसानों और प्रकृति दोनों को चुकानी पड़ रही है. पंजाब में लाखों पेड़ों का नुकसान आने वाली पीढ़ियों को हरे-भरे जंगल देखने के लिए तरसा सकता है.

भारत को बेहतर विपक्ष की जरूरत… GST को लेकर सरकार की आलोचना पर निर्मला सीतारमण का पलटवार

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी सुधारों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना को ‘गलत जानकारी’ पर आधारित करार देते हुए शनिवार को कहा कि भारत को बेहतर विपक्षी दल और बेहतर विपक्षी नेताओं की जरूरत है. सीतारमण ने ‘पीटीआई’ को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किये जाने के समय चार कर दर रखने के लिए भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को जिम्मेदार ठहराया था.
वित्त मंत्री ने कहा कि चार कर दर रखने का फैसला भाजपा का नहीं था और न ही ऐसा था कि तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अलग-अलग कर दर या किसी खास वस्तु पर जीएसटी दर तय कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री भी इस फैसले में शामिल थे. सीतारमण ने सवाल किया, “क्या उन्हें (विपक्ष को) इसकी जानकारी नहीं है?”
जुलाई 2017 में जीएसटी के क्रियान्वयन से पहले चार जीएसटी दर तय करने में विपक्षी दल शासित राज्यों की भूमिका के बारे में बताते हुए सीतारमण ने कहा कि देश को पेड़ कटाई जैसे मुद्दों के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन की तर्ज पर बेहतर विपक्ष और बेहतर विपक्षी नेताओं के लिए भी मुहिम चलाने की जरूरत है.

वित्त मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर विपक्षी नेता तथ्य पेश कर उन्हें गलत साबित कर दें, तो उन्हें माफी मांगने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी. सीतारमण ने कहा, “मुझे कोई अहम नहीं है. मैं लोगों से माफी मांगने के लिए भी तैयार हूं. लेकिन वे (विपक्षी नेता) जो कह रहे हैं, वह बकवास है.” उन्होंने कहा, “कांग्रेस अब हरकत में आ गई है. अगर आप मुद्दे को नहीं समझते हैं, तो कम से कम आप चुप रह सकते हैं.”

सीतारमण ने मुख्य विपक्षी दल को याद दिलाया कि राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक अधिकार प्राप्त समिति ने ही जीएसटी लागू होने से पहले चार कर दर रखने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि 2017 से जीएसटी में क्या लागू किया जाना है, इसका खाका इसी समिति ने तैयार किया था. बुधवार को, केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी परिषद ने जीएसटी के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया.
सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल सहित कई वर्षों तक चले विचार-विमर्श के दौरान विपक्षी दल शासित अन्य राज्यों के वित्त मंत्रियों के अलावा वामपंथी नेता और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता अधिकार प्राप्त समिति के प्रमुख के रूप में परामर्श को आगे बढ़ाने में शामिल रहे थे.
उन्होंने कहा कि अधिकार प्राप्त समिति ने विभिन्न राज्यों में किसी वस्तु पर कर की विभिन्न दरों का आकलन किया, एक औसत निकाला और फिर उस उत्पाद को औसत के निकटतम चार जीएसटी दरों में से एक में रखने पर सहमति जताई.
वित्त मंत्री के पद पर सीतारमण का यह सातवां वर्ष है. वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने उपभोक्ताओं को राहत देने के मकसद से सरकार के कुछ प्रमुख सुधारों की अगुवाई की, जिसमें पिछले आम बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये किया जाना और उद्योगों की मदद के लिए कई उपायों की घोषणा शामिल है, लेकिन आर्थिक मुद्दों पर उन्हें अक्सर विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा है.

वित्त मंत्री ने जीएसटी को लेकर सरकार की आलोचना किये जाने पर जोरदार पलटवार किया. उन्होंने कहा, “भारत को बेहतर विपक्ष की जरूरत है. मैं इस बात में पूरी तरह से विश्वास करती हूं. भारत को बेहतर विपक्षी नेताओं की जरूरत है. गलत जानकारी वाली टिप्पणियों से कोई फायदा नहीं होगा. ये नेता जनता को गुमराह कर रहे हैं. वे देश की सेवा नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसे नुकसान पहुंचा रहे हैं.”
सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के इस तर्क को खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा करके जीएसटी परिषद को कमजोर किया है. जीएसटी परिषद एक संवैधानिक निकाय है, जो अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से जुड़े सभी फैसले लेती है. वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सुधारों के बारे में देश को संदेश दिया. उन्होंने सवाल किया, “इसमें गलत क्या है?”

यह पूछे जाने पर कि क्या लोगों को राहत देने के मकसद से सुधारों का दौर जारी रहेगा, क्योंकि मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने जैसे उपाय कर चुकी है, सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा से जन-हितैषी सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह काम जारी रखा और आगे भी जारी रखेगी.
जीएसटी परिषद ने दो सितंबर को कर दर को पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत तक सीमित करने तथा 12 फीसदी और 28 फीसदी की दो अन्य दरों को हटाने को मंजूरी दे दी थी. यह व्यवस्था 22 सितंबर को नवरात्रि के पहले दिन से प्रभावी होगी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि उनकी पार्टी कई वर्षों से जीएसटी के सरलीकरण की मांग कर रही है. उन्होंने मोदी सरकार पर लंबे समय से लोगों पर उच्च कर दरों का बोझ डालने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे जीएसटी 1.5 बताया और दावा किया कि जीएसटी 2.0 का इंतजार जारी है.

बंगाल की खाड़ी से उठ रही तबाही, ओडिशा से बिहार तक बारिश की चेतावनी, पंजाब में बाढ़ से राहत

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उत्तर भारत में मानसून की तबाही चल रही है. कई राज्यों में मानसून की बारिश से भारी तबाही हुई है. उत्तरी राज्यों का बाढ़ और उसकी तबाही से बुरा हाल है. कश्मीर से लेकर पंजाब, गुजरात और दिल्ली तक राज्य बाढ़ प्रताड़ित हैं. इधर पहाड़ों पर बादल फटने तो मैदानी हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है. दिल्ली-एनसीआर भी बाढ़ की चपेट में है. दिल्ली के कई निचली इलाके बाढ़ग्रस्त है. यमुना के बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गए हैं. हालांकि, शनिवार से यमुना के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई है. पंजाब में भारी बाढ़ से त्राहिमाम मचा हुआ है.
सितंबर महीने में भी बारिश से राहत मिलती नहीं दिख रही है. मौसम विभाग ने रविवार को गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश की चेतावनी जारी किया है. मौसम विभाग ने गुजरात और राजस्थान में भारी बारिश को देखते हुए Red Alert जारी किया है. वहीं, कोंकण, गोवा पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी है. मौसम विभाग ने बताया कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश से सटे बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है, जिसकी वजह से तटीय इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है. इसका असर बंगाल, बिहार से लेकर दिल्ली तक हो सकती है.

मौसम विभाग ने गुजरात में एक साथ 4 मानसूनी सिस्टम सक्रिय होने की संभावना जताई है. इसकी वजह से आज भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग वे आज राज्य के 5 ज़िलों बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महेसाणा और कच्छ में अति भारी बारिश की संभावना जताई है. इसके अलावा, पाटण, गांधीनगर, महीसागर, मोरबी, राजकोट और सुरेन्द्रनगर में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, राज्य के 15 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है. संभावित स्थिति से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमें भी तैनात हैं.

उत्तरकाशी में बाढ़ से राहत
उत्तराखंड में भारी बारिश ने जमकर तबाही मचाई. उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग में बादल फटने की वजह से काफी तबाही हुई है. अब शनिवार को एक बार फिर से उत्तरकाशी में बादल फटने की वजह से भारी तबाही हुई है. यमुनाघाटी में तेज बारिश से नौगांव क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है. देवलसारी गांव के पास स्थित खड्ड में आया भारी उफान आ गया है. आधा दर्जन से अधिक गरों में पानी समा गया है और कई घर पानी में बह गए हैं.

जिसने राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का किया था दावा, अब वह ED के रडार पर, कांग्रेस का कुछ भी कहने से इनकार

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक के उस भाजपा कार्यकर्ता को तलब किया है, जिसने राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का दावा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. व्यक्ति की पहचान एस. विग्नेश शिशिर के रूप में हुई है. उन्हें नौ सितंबर को केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है.
ईडी सूत्रों ने बताया कि शिशिर से मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत मामले से संबंधित सभी साक्ष्य और दस्तावेज के साथ पेश होने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि इन आरोपों की जांच की जा रही है. फेमा के तहत ईडी व्यक्तियों और कंपनियों द्वारा विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करता है. जब इस मामले पर कांग्रेस पार्टी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उसने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में शिशिर ने दावा किया था कि उनके पास ब्रिटिश सरकार के कुछ दस्तावेज और ईमेल हैं, जो यह साबित करते हैं कि लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ब्रिटेन के नागरिक हैं और इस कारण भारत में चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 30 अगस्त को केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि शिशिर को 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की जाए.

जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बी. आर. सिंह की खंडपीठ ने भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया. अपने अंतरिम आदेश में पीठ ने कहा, “हम पहली नजर में संतुष्ट हैं कि यह मामला विचार योग्य है क्योंकि याचिकाकर्ता ने एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ मामला दायर किया है और लगातार धमकियों का सामना कर रहा है तथा नोटिस के अनुपालन में उन्हें रायबरेली जिले के कोतवाली थाने में जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना पड़ रहा है.”

शिशिर ने हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी जून 2024 में की गई शिकायत के आधार पर सीबीआई जांच कर रही है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कई बार दिल्ली में एजेंसी के समक्ष पेश हो चुके हैं और उन्होंने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े साक्ष्य भी दिए हैं. हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई नौ अक्टूबर के लिए तय की है. इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार को गांधी की ब्रिटिश नागरिकता से संबंधित विवरण उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है.

अमेरिका में रहने वाले या वहां जाने की प्लानिंग करने वाले भारतीयों को चेतावनी, ‘ओवरस्टे’ के हो सकते हैं गंभीर नतीजे

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अमेरिका में रहने वाले या वहां जाने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है. नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए इस बात की जानकारी दी है. अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अमेरिका में अपने अधिकृत प्रवास की अवधि से अधिक समय तक रहना अमेरिकी आव्रजन कानून का उल्लंघन है और इसके भविष्य में गंभीर परिणाम हो सकते हैं.”
अमेरिकी दूतावास ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया है कि अमेरिका में रहने की आपकी अधिकृत अवधि आपके वीजा की समाप्ति तिथि पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि यह आपके फॉर्म आई-94 पर लिखी गई ‘प्रवेश की अंतिम तिथि’ पर आधारित होती है.
बता दें कि यह एक ऐसा बिंदु है जिस पर अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं और इसी कारण अनजाने में कानून का उल्लंघन कर बैठते हैं. दूतावास ने इस गंभीर गलती से बचने के लिए एक सीधा उपाय भी सुझाया है. ‘एक्स’ पोस्ट में कहा गया है कि लोग अपनी ‘प्रवेश की अंतिम तिथि’ की जांच ‘आई94डॉटसीबीपीडॉटडीएचएसडॉटजीओवी’ की वेबसाइट पर कर सकते हैं.

यह वेबसाइट अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) की ओर से संचालित की जाती है और यहां पर आपकी यात्रा से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध होती है. इस आसान कदम से आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप कानूनी रूप से अपनी स्वीकृत अवधि के भीतर ही अमेरिका में रहें.

कई लोग इस चेतावनी का मुख्य उद्देश्य लोगों को ‘ओवरस्टे’ (अधिक समय तक रुकना) के जोखिमों के प्रति जागरूक करने के रूप में देख रहे हैं. अमेरिकी आव्रजन कानूनों (इमीग्रेशन लॉ) के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपने आई-94 फॉर्म में दी गई तारीख के बाद भी अमेरिका में रहता है, तो इसे ‘ओवरस्टे’ माना जाता है.
अमेरिकी दूतावास का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब भारत से बड़ी संख्या में छात्र, पर्यटक और कामगार अमेरिका जा रहे हैं. कई बार, जानकारी के अभाव में, लोग अनजाने में इन नियमों का उल्लंघन कर बैठते हैं.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से PM मोदी ने की मुलाकात, हाल ही में SCO समिट से लौटे हैं प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. राष्ट्रपति भवन की ओर से यह जानकारी दी गई है. राष्ट्रपति भवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले. उनकी मुलाकात की एक तस्वीर भी शेयर की गई है. बता दें कि जापान और चीन की यात्रा से लौटने के कुछ दिनों बाद पीएम मोदी राष्ट्रपति भवन पहुंचे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने भारत-जापान के बीच स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई. पीएम मोदी ने कहा था कि भारत और जापान न सिर्फ दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, बल्कि जीवंत लोकतंत्र भी हैं, और ऐसे में उनकी साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है. भारत ने अगले दस वर्षों में जापान से 10 ट्रिलियन येन निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम दोनों देशों की प्रतिबद्धता और विश्वास को दर्शाता है.
जापान के बाद पीएम मोदी चीन की यात्रा पर गए, जहां उन्होंने 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक बैठक की थी. इसे लेकर पीएम मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर सहमति जताई. पीएम मोदी ने इस मुलाकात से संबंधित तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया था.

पीएम मोदी ने लिखा, “एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सार्थक बैठक हुई. हमने कजान में पिछली बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की. हमने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर सहमति जताई और पारस्परिक सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर सहयोग के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.”

12 बजे बंद होंगे महामाया मंदिर के पट, महाकाल में बदली आरती की व्यवस्था

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इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण आज रात को होगा, जो पितृपक्ष की शुरुआत के साथ एक दुर्लभ संयोग बनाएगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू होगा और रात 1:26 बजे समाप्त होगा. रात 11:42 बजे चंद्रमा पूर्ण ग्रहण की अवस्था में दिखाई देगा. ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से शुरू होगा, जिसके कारण धार्मिक कार्य सुबह ही पूरे किए जाएंगे.
भोपाल में मंदिरों की पूजन व्यवस्था में बदलाव किया गया है. शयन आरती का समय रात 9:30 बजे निर्धारित किया गया है, और ग्रहण शुरू होते ही रात 9:58 बजे मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे. रायपुर में भी मंदिरों में समान व्यवस्थाएं लागू हैं, जहां ग्रहण समाप्ति के बाद प्रातःकाल मंदिरों का शुद्धिकरण होगा. श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रस्ट और अन्य धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है. ग्रहण के दौरान गर्भगृह में पूजन सामग्री ले जाना प्रतिबंधित रहेगा. यह खगोलीय घटना दोनों शहरों में खुली आंखों से सुरक्षित रूप से देखी जा सकती है.

चंद्रग्रहण लगने से पहले ही इन मंदिरों के पट होंगे बंद
1. लक्ष्मण मंदिर, सिरपुर

काल : 7वीं शताब्दी

लोकेशन : सिरपुर, महासमुंद जिला (महासमुंद से 35 किमी, रायपुर से 78 किमी)

2. गंडई शिव मंदिर

काल : 7वीं–8वीं शताब्दी

लोकेशन : गंडई, राजनांदगांव जिला (राजनांदगांव से 70 किमी, रायपुर से 125 किमी)

3. बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़

काल : 9वीं–10वीं शताब्दी

लोकेशन : डोंगरगढ़, राजनांदगांव जिला (राजनांदगांव से 40 किमी, रायपुर से 110 किमी)

4. महामाया मंदिर, रतनपुर

काल : 11वीं शताब्दी

लोकेशन : रतनपुर, बिलासपुर जिला (बिलासपुर से 25 किमी, रायपुर से 150 किमी)

5. ब्रह्मा मंदिर, कसडोल–समलईपाली
काल : 11वीं शताब्दी
लोकेशन : कसडोल (बलौदाबाजार-भाटापारा जिला), रायपुर से लगभग 95 किमी
6. दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
काल : 11वीं–12वीं शताब्दी
लोकेशन : दंतेवाड़ा जिला (जगदलपुर से 80 किमी, रायपुर से 400 किमी)
7. राजीव लोचन मंदिर, राजिम
काल : 12वीं शताब्दी
लोकेशन : राजिम, गरियाबंद जिला (रायपुर से 45 किमी)

8. भोरमदेव मंदिर, कवर्धा
काल : 11वीं–13वीं शताब्दी
लोकेशन : भोरमदेव, कवर्धा जिला (कवर्धा से 18 किमी, रायपुर से 125 किमी)

9. खंडेराव महादेव मंदिर, बिलासपुर
काल : 13वीं–14वीं शताब्दी
लोकेशन : बिलासपुर शहर, बिलासपुर जिला (रेलवे स्टेशन के पास स्थित)

चंद्रग्रहण पर मंदिर बंद, भोग आरती के बाद नहीं होंगे दर्शन, जानें 8 सितंबर की व्यवस्था
आज 07 सितंबर 2025, रविवार को शनि चंद्रग्रहण के चलते सूतक काल सुबह 9:30 बजे से प्रभावी हो गया. भोग आरती के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया गया है. अब 08 सितंबर को प्रातः देव स्नान व पूजन के बाद ही दर्शन शुरू होंगे. श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि निर्धारित समय के अनुसार ही दर्शन हेतु आएं.

चंद्रग्रहण का असर नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के पट बंद, हवन-पूजन भी स्थगित
आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर में चंद्रग्रहण के कारण मंदिर के पट बंद कर दिए गए हैं. पुजारी दिनेश गुरु ने विधिवत पूजन कर पट बंद किए. सभी हवन और अनुष्ठान स्थगित कर दिए गए हैं. अब दर्शन-पूजन चंद्रग्रहण समाप्ति के बाद कल सुबह मंगला आरती के साथ फिर से शुरू होंगे.

चंद्र ग्रहण का असर कोरबा के इन प्रसिद्ध मंदिरों में नहीं होंगे दर्शन, गर्भगृह रहेंगे बंद
कोरबा जिले के प्रमुख मंदिरों में चंद्र ग्रहण के कारण सूतक काल के दौरान गर्भगृह के पट बंद रहेंगे. इसमें सर्वमांगला मंदिर, सप्तदेव मंदिर, श्याम मंदिर, कॉपीलेश्वर मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर शामिल हैं. यह निर्णय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लिया गया है, और दर्शन अब ग्रहण समाप्ति के बाद ही किए जा सकेंगे.

चंद्र ग्रहण पर रायपुर के ये प्रसिद्ध मंदिर रहेंगे बंद, जानें सूतक का असर कहां-कहां पड़ेगा
रायपुर में आज चंद्र ग्रहण के कारण सूतक काल की मान्यता के अनुसार कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद रहेंगे. इनमें पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर, समलेश्वरी मंदिर, आकाशवाणी चौक का महाकाली मंदिर, बूढ़ातालाब के हनुमान व सिद्धिविनायक मंदिर और कुशालपुर का दंतेश्वरी मंदिर शामिल हैं. दर्शन अब ग्रहण समाप्ति के बाद ही होंगे.

ओंकारेश्वर में चंद्र ग्रहण के चलते बदली मंदिरों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिए जरूरी जानकारी
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में चंद्र ग्रहण के चलते सभी मंदिरों के पट आज दोपहर 12:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे. ये पट ग्रहण समाप्ति के बाद विधिवत शुद्धिकरण एवं पूजा-अर्चना के उपरांत ही पुनः खोले जाएंगे. मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है और पूजन नियमों का पालन करने को कहा है.

खंडवा में चंद्रग्रहण के बीच धुनी वाले दादाजी मंदिर में जारी रहेगा पूजन, बाकी मंदिरों के पट 12:56 पर होंगे बंद
खंडवा के प्रसिद्ध दादाजी धुनी वाले मंदिर में इस बार भी चंद्रग्रहण के दौरान पट बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ सामान्य रूप से जारी रहेगा. वहीं, जिले के अन्य सभी मंदिरों में दोपहर 12:56 बजे से ग्रहण सूतक काल के कारण पट बंद कर दिए जाएंगे. धुनी वाले मंदिर की परंपरा अनुसार हर बार की तरह पूजन विधि जारी रहेगी.

चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को क्या करना चाहिए?
छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों में गर्भवती महिलाओं के लिए चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ परंपरागत मान्यताएं और सावधानियां वर्षों से प्रचलित हैं. इन्हें ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है, खासतौर पर गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए. नीचे प्रमुख मान्यताएं और सावधानियां दी गई हैं:–

1. ग्रहण के दौरान बाहर न निकलें
2.धारदार वस्तुओं का प्रयोग वर्जित
3.लेटना और सोना नहीं चाहिए
4.तुलसी और मंदिर से दूरी
5.मंत्र जाप और धार्मिक पाठ करें

मध्य प्रदेश में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कब?
मध्य प्रदेश में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण को रात 9 बजकर 58 मिनट पर लगेगा और इसका समापन 8 सितंबर की रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगा.

महाकाल मंदिर में बदली पूजन व्यवस्था, जानें सूतक और आरती का नया समय
उज्जैन के मंदिरों, विशेष रूप से महाकालेश्वर मंदिर में पूजन व्यवस्था में बदलाव किया गया है. महाकाल मंदिर में शयन आरती, जो सामान्यतः रात 10:30 बजे होती है, आज रात 9:30 बजे होगी. मंदिर के पट, जो आमतौर पर रात 11 बजे बंद होते हैं, आज रात 9:56 बजे बंद हो जाएंगे. भस्म आरती, भोग आरती और संध्या आरती अपने निर्धारित समय पर होंगी. ग्रहण समाप्त होने के बाद रात में मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा. मंदिर को धोया जाएगा, और भगवान का स्नान व अभिषेक कर भस्म आरती की जाएगी. यह ग्रहण और पितृपक्ष का संयोग भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है.

अंबिकापुर में चंद्र ग्रहण का असर, सूतक लगते ही दोपहर 12 बजे बंद होंगे महामाया मंदिर के पट
आज के चंद्र ग्रहण को लेकर अंबिकापुर के प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर के पट दोपहर 12 बजे बंद कर दिए जाएंगे. ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगने के कारण यह निर्णय लिया गया है. श्रद्धालुओं की सुबह से भारी भीड़ देखी गई. मंदिर के पुजारी ने बताया कि कल सुबह विधिवत पूजा की जाएगी.

ओंकारेश्वर मंदिर में चंद्रग्रहण का असर, श्रद्धालुओं के लिए बदली पूजन व्यवस्था, जानें मंदिर के नए नियम
खंडवा के ओंकारेश्वर में आज चंद्रग्रहण के कारण मंदिर की पूजन व्यवस्था में बदलाव किया गया है. सुबह से भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन हो रहे हैं, लेकिन गर्भगृह में जल, फूल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री ले जाना प्रतिबंधित है. ग्रहण शुरू होने से पहले रात 9:30 बजे शयन आरती होगी. रात 9:58 बजे चंद्रग्रहण शुरू होते ही मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे. ग्रहण समाप्ति के बाद प्रातःकाल मंदिर खुलने पर परिसर का विधिवत शुद्धिकरण और पूजा-अर्चना होगी, फिर दर्शन शुरू होंगे. श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से सहयोग मांगा है.

5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ पेट्रोल 5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ डीजल…

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5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ पेट्रोल 5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ डीजल…

Petrol Diesel Price 07 Sep 2025 लाख कोशिशों के बाद भी महंगाई कम नहीं हो रही है। आटा, चीनी, पेट्रोल और बिजली जैसे जरूरी चीजों के दामों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है।

इन आवश्यक वस्तुओं के दामों में भारी उछाल ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है। जनता की उम्मीद भरी निगाहें अब सरकार की ओर हैं। लेकिन अगर पिछले पांच सालों के आंकड़ों को देखें तो कई राज्यों पेट्रोल-डीजल के दाम में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी देखने को मिली है।

Petrol Diesel Price 07 Sep 2025 पिछले 5 साल में मध्य प्रदेश में 15, राजस्थान में 14 रुपए लीटर पेट्रोल के दाम बढ़े हैं। सबसे ज्यादा कीमतें अंडमान में 35 रुपए बढ़ी हैं। जबकि झारखंड में पांच साल में पेट्रोल की कीमतों में कोई भी अंतर नहीं आया है। वहं, सबसे कम लद्दाख में ईंधन की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है। यहां पिछले 5 साल में पेट्रोल 3 और डीजल 7 रुपए महंगा हुआ है। वहीं, बात करें मध्यप्रदेश की तो पिछले 5 सालों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें राष्ट्रीय औसत से ज्यादा बढ़ी हैं।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम पेट्रोल में 5 सालों में सबसे ज्यादा अंडमान निकोबार में 49 (35 रुपए) प्रतिशत कीमतें बढ़ी हैं। वहीं, पंजाब में 27 फीसदी (23 रुपए), पश्चिम बंगाल में 24 फीसदी (20 रुपए), तेलंगाना में 20 रुपए, महाराष्ट्र में 20 रुपए शामिल हैं। वहीं, मिजोरम में 18 रुपए बढ़ाए गए हैं।

;5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ पेट्रोल 5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ डीजल

5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ पेट्रोल

राज्य 2021 (₹) 2022 (₹) 2023 (₹) 2024 (₹) अगस्त 2025 (₹) बढ़े दाम (₹) वृद्धि (%)
अंडमान निकोबार 70.48 82.96 84.1 84.1 105.23 35 49%
पंजाब 84.82 94.94 96.18 98.01 107.48 23 27%
पश्चिम बंगाल 85.19 104.67 106.03 106.03 105.41 20 24%
तेलंगाना 87.06 108.2 109.66 109.66 107.46 20 23%
मिजोरम 81.3 94.5 95.64 95.64 99.29 18 22%
महाराष्ट्र 90.04 109.52 105.84 105.84 109.74 20 22%
गोवा 80.62 96.38 97.68 97.22 97.75 17 21%
ओडिशा 84.34 101.81 103.19 103.19 101.11 17 20%
हिमाचल प्रदेश 81.81 95.78 96.96 96.96 97.86 16 20%
जम्मू और कश्मीर 83.88 96.15 97.5 97.5 100.32 16 20%
सिक्किम 85 98.5 102.7 102.7 101.55 17 19%
कर्नाटक 89.51 100.58 101.94 101.94 102.92 16 19%
हरियाणा 81 95.3 97.48 97.48 95.94 15 18%
चंडीगढ़ 80.59 94.23 96.2 95.2 94.3 14 17%
अरुणाचल प्रदेश 77.8 92.02 93.23 92.73 90.92 13 17%
छत्तीसगढ़ 82.46 101.11 102.45 102.45 96.26 14 17%
उत्तर प्रदेश 83.59 95.28 96.57 96.57 97.55 14 17%
तमिलनाडु 86.51 101.4 102.63 102.63 100.8 14 17%
गुजरात 81.29 95.35 96.63 96.63 94.7 13 16%
मध्यप्रदेश 91.5 107.23 108.65 108.65 106.52 15 16%
त्रिपुरा 84.13 98.23 99.49 99.49 97.53 13 16%
दादरा 79.93 93.1 94.31 94.31 92.56 13 16%
दमन दीव
राजस्थान 91.09 107.06 108.48 108.48 104.72 14 15%
महाराष्ट्र 90.34 109.98 106.31 106.31 103.5 13 15%
मणिपुर 87.21 99.82 101.25 101.25 99.18 12 14%
आंध्र प्रदेश 88.62 109.05 110.48 110.48 100.75 12 14%
मेघालय 87.56 93.91 96.39 97.92 99.44 12 14%
दिल्ली 83.71 95.41 96.72 96.72 94.77 11 13%
आंध्र प्रदेश 89.92 110.47 111.87 111.87 101.69 12 13%
पुडुचेरी 85.43 94.94 96.16 96.16 96.43 11 13%
असम 87 94.58 97.02 98.03 98.19 11 13%
केरल 85.72 106.36 107.71 109.73 95.34 10 11%
उत्तराखंड 84.2 94 95.13 95.13 93.55 9 11%
नागालैंड 87.04 98.05 99.46 99.46 96.49 9 11%
जम्मू एवं कश्मीर 87.43 100.36 101.74 101.74 96.32 9 10%
बिहार 86.25 105.9 107.24 107.24 94.69 8 10%
लद्दाख 89.87 102.99 104.27 104.27 92.44 3 3%
झारखंड 82.8 98.52 99.84 99.84 82.46 0 0%

5 साल में किस राज्य में कितना महंगा हुआ डीजल

राज्य 2021 (₹) 2022 (₹) 2023 (₹) 2024 (₹) अगस्त 2025 (₹) बढ़े दाम (₹) वृद्धि (%)
अंडमान 69.22 77.13 79.74 79.74 91.49 22 32%
हरियाणा 69.22 77.13 79.74 79.74 91.49 22 32%
पंजाब 75.54 83.75 86.55 88.34 96.48 21 28%
हिमाचल प्रदेश 73.68 80.35 82.94 88.94 92.62 19 26%
महाराष्ट्र 79.01 92.31 92.36 92.36 97.57 19 23%
मिजोरम 73.32 79.55 82.12 82.12 88.07 15 20%
हरियाणा 73.94 86.53 90.31 90.31 88.37 14 20%
पश्चिम बंगाल 77.44 89.79 92.76 92.76 92.02 15 19%
तेलंगाना 80.6 94.62 97.82 97.82 95.7 15 19%
दिल्ली 73.87 86.67 89.62 89.62 87.67 14 19%
उत्तराखंड 74.51 87.32 90.2 90.2 88.37 14 19%
उत्तर प्रदेश 74.21 86.8 89.76 89.76 87.38 13 18%
आंध्र प्रदेश 81.73 95.18 98.27 98.27 95.71 14 17%
मेघालय 80.01 80.58 84.65 86.68 93.39 13 17%
तमिलनाडु 79.21 91.43 94.24 94.24 92.39 13 17%
सिक्किम 76.4 83.55 89.8 89.8 88.85 12 16%
कर्नाटक 78.31 85.01 87.89 87.89 90.99 13 16%
जम्मू और कश्मीर 74.59 80.32 83.26 83.26 86.65 12 16%
गोवा 80.46 91.62 94.76 94.76 92.69 12 15%
ओडिशा 77.35 87.27 90.23 89.79 88.86 12 15%
गुजरात 79.72 89.33 92.38 92.38 90.38 11 13%
जम्मू और कश्मीर 77.63 83.91 86.83 86.83 87.52 10 13%
अरुणाचल प्रदेश 71.44 79.63 82.32 82.17 80.41 9 13%
पुडुचेरी 78.4 83.58 86.33 86.33 88.2 10 13%
मध्यप्रदेश 81.68 90.87 93.9 93.9 91.89 10 13%
दादरा 78.42 86.97 89.86 89.86 88.05 10 12%
त्रिपुरा 77.25 85.61 88.44 88.44 86.55 9 12%
चंडीगढ़ 73.61 80.9 84.26 84.26 82.45 9 12%
राजस्थान 80.51 94.34 94.27 94.27 90.03 10 12%
असम 80.42 81.29 87.95 90.33 89.42 9 11%
बिहार 79.04 91.09 94.04 94.04 87.81 9 11%
मणिपुर 77.09 84.26 87.17 87.17 85.25 8 11%
केरल 79.65 93.47 96.52 98.53 87.32 8 10%
लद्दाख 80.59 86.67 89.25 89.37 87.94 7 9%
छत्तीसगढ़ 80.1 92.33 95.44 95.44 86.47 6 8%
नागालैंड 77.79 84.59 87.56 87.56 83.33 6 8%
आंध्र प्रदेश 82.98 96.55 99.61 99.61 87.06 4 5%
झारखंड 78.17 91.56 94.65 94.65 78.05 0 0%

भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की दो दिवसीय वर्कशॉप, GST स्लैब बदलाव जैसे अहम सुधारों के लिए PM मोदी होंगे सम्मानित…

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भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की दो दिवसीय वर्कशॉप, GST स्लैब बदलाव जैसे अहम सुधारों के लिए PM मोदी होंगे सम्मानित…

दिल्ली में आज से भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की दो दिवसीय वर्कशॉप की शुरुआत हो रही है। इस वर्कशॉप का उद्देश्य सांसदों की कार्यकुशलता बढ़ाना, पार्टी के इतिहास और विकास की जानकारी देना तथा उन्हें आगामी रणनीतियों से अवगत कराना है। वर्कशॉप के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें जीएसटी स्लैब में बदलाव जैसे अहम सुधारों के लिए दिया जाएगा, जिनका व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ा है। कार्यक्रम के दौरान कुल चार सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सांसदों को संसदीय कार्य प्रणाली, जनसंपर्क कौशल, नीति निर्माण की प्रक्रिया और पार्टी के मूल सिद्धांतों पर प्रशिक्षित किया जाएगा।