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CG: डीजल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त, पेट्रोल पर ₹10 की कटौती- केंद्र सरकार के फैसले का मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया स्वागत…

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मुख्यमंत्री ने कहा—140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत देने वाला ऐतिहासिक निर्णय, प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिचायक

केंद्र सरकार द्वारा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र ₹3 प्रति लीटर करने के निर्णय का मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत पहुंचाने वाला ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम बताया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक और मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भी केंद्र सरकार द्वारा आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ने देना एक बड़ी संवेदनशील पहल है, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है। यह फैसला प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और देशवासियों के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है।

CG: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज लेंगे उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक…

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पश्चिम एशिया की स्थिति के मद्देनज़र आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कानून-व्यवस्था पर रहेगा फोकस’

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज 28 मार्च को प्रातः 11:00 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस आयुक्त रायपुर, सभी कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेंगे।

यह बैठक वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयोजित की जा रही है, ताकि राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था सुचारु रूप से बनी रहे और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में रसोई गैस (LPG), पेट्रोल, डीजल एवं उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग और संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री श्री साय कानून-व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे और अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकार की जमाखोरी, कालाबाजारी या कृत्रिम संकट उत्पन्न करने की कोशिशों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई की जाए।
बैठक में खाद्य, उद्योग, कृषि, खनिज, परिवहन, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) एवं ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

CG: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कमिश्नर, आईजी और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कर रहे हैं बड़ी बैठक…

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पेट्रोलियम पदार्थों और गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर ले रहे हैं जानकारी’

पेट्रोलियम पदार्थों और गैस की पर्याप्त उपलब्धता, अफवाहों पर दें ध्यान’

परिस्थिति का फायदा लेकर आवश्यक वस्तु की कालाबाजारी करने वालों पर हो कड़ी करवाई’

मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार सहित आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल के पेट्रोल-डीजल, और गैस डिवीजन के अधिकारी मौजूद’

Bengal Election 2026: ममता की कुर्सी या BJP का राज? SIR, RG Kar-मतुआ समेत ये 5 फैक्टर्स पलटेंगे बंगाल की बाजी…

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West Bengal Election 2026: ममता की कुर्सी या बीजेपी का राज? पश्चिम बंगाल के चुनाव में तीन हफ्ते का समय रह गया और सूबे की सियासी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस (TMC) जहां चौथी बार सत्ता बरकरार रखने की जद्दोजहद में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार ‘दीदी’ के किले में सेंध लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

बंगाल पर दुनिया भर की नजर टिकी है ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि राज्य में चुनावी परिणाम की पटकथा कौन से मुद्दे लिख रहे हैं। SIR (वोटर लिस्ट विवाद), RG Kar मामला और मतुआ वोट बैंक जैसे 5 बड़े फैक्टर्स बंगाल की बाजी पलटने का दम रखते हैं।

2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वामपंथी दलों (CPIM) का सूपड़ा साफ होने के बाद, इस बार चुनावी रणभूमि में नए समीकरण उभर रहे हैं। एक तरफ एआईएमआईएम (AIMIM) और हुमायूं कबीर की एजूपी (AJP) का गठबंधन मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ फुरफुरा शरीफ से जुड़ा इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) अपना प्रभाव बढ़ाने को तैयार है। उत्तर बंगाल के राजबोंग्शी समुदाय से लेकर जंगलमहल के कुर्मी आंदोलन तक, बंगाल चुनाव 2026 की यह लड़ाई केवल नारों की नहीं, बल्कि उन क्षेत्रीय समीकरणों की है जो तय करेंगे कि कोलकाता के ‘राइटर्स बिल्डिंग’ पर इस बार किसका कब्जा होगा।

कागज पर तीन बार की विजेता टीएमसी बेशक आगे नजर आती है, लेकिन बीजेपी जिस तरह चुनाव लड़ती है उसमें चौंकाने वाले फैसले की उम्मीद बेमानी नहीं है। पश्चिम बंगाल के चुनावी गणित को हम मुद्दे और इलाकाई समीकरण में बांट कर समझने का प्रयास करते हैं। 2021 के चुनावों में टीएमसी को 213 सीटें मिलीं, भाजपा को 77, जबकि बाकी दलों का खाता तक नहीं खुला। 2024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी ने 29 सीटें जीतीं, भाजपा को 12। लेकिन विधानसभा स्तर पर नॉर्थ बंगाल, जंगलमहल, मतुआ बहुल इलाके, मुस्लिम बहुल जिले और टीएमसी के शहरी गढ़वा क्षेत्र निर्णायक होंगे। आंकड़ों के आईने में देखें तो चुनाव का रंग साफ दिखता है।

नॉर्थ बंगाल: भाजपा का मजबूत, टीएमसी की चुनौती (North Bengal BJP Stronghold, TMC Challenge)

नॉर्थ बंगाल यानी कि दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर वाला इलाका। 294-सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए यह इलाका दोनों ही पार्टियों के लिए महत्त्वपूर्ण है। बल्कि इसे ऐसे समझ सकते हैं कि यहाँ से जो पार्टी आगे रहेगी उसके सरकार बनाने की संभावना अधिक होगी। 2021 में भाजपा ने यहां मजबूत पकड़ दिखाई। पार्टी ने अलीपुरदुआर की 5 में से 5, कूच बिहार की 9 में 7 और जलपाईगुड़ी में भी अच्छा प्रदर्शन किया था। दार्जिलिंग पहाड़ियों में भाजपा ने सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग शहर समेत कई सीटें झटक ली थी, जबकि कालिमपोंग सीट पर स्वतंत्र उम्मीदवार विजयी हुए। इस इलाके की कुल 64 विधानसभा सीटों में भाजपा को करीब आधी सीटों पर जीत मिली थी।

टीएमसी ने मुस्लिम बहुल मालदा (12 सीटें) और उत्तर दिनाजपुर (6 सीटें) में अपनी पकड़ कायम रखी। दक्षिण दिनाजपुर का मुकाबला दोनों दलों के बीच बराबरी पर रहा था। यहाँ से टीएमसी ने 4 जबकि भाजपा ने 3 सीटों पर कब्ज़ा जमाया था। इस चुनाव में टीएमसी ने दार्जिलिंग पहाड़ियों के तीन सीटों – दार्जिलिंग, कालिमपोंग और खुर्सियॉन्ग को अनित थापा की भारतीय गोर्खा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ दिया है। यहाँ से राजबोंगशी समुदाय जो कि इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अनुसूचित जाति वोट बैंक है, उनकी भूमिका निर्णायक होगी। चाय बागान बेल्ट में भाजपा की पुरानी मजबूती को टीएमसी चुनौती दे रही है। 2021 में राजबोंगशी वोटों ने भाजपा को 40% से ज्यादा समर्थन दिया, लेकिन टीएमसी की कल्याण योजनाओं के कारण यह वोट बैंक भी धीरे-धीरे भाजपा से खिसकने लगा है। अगर राजबोंगशी एकजुट हुए तो भाजपा को फायदा, वरना टीएमसी हावी।

जंगलमहल: कुर्मी-आदिवासी वोट बैंक और 46 सीटों का सियासी ‘रण’

जंगलमहल (Jangalmahal) की 46 विधानसभा सीटें इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव का सबसे अनिश्चित क्षेत्र बनी हुई हैं। वहां का पूरा गणित 50 लाख की आबादी वाले कुर्मी समुदाय के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जो लंबे समय से एसटी (ST) दर्जे की मांग को लेकर आंदोलनरत है। 2019 के लोकसभा चुनावों में कुर्मी समुदाय के 35% से अधिक एकतरफा समर्थन ने भाजपा को यहाँ बड़ी जीत दिलाई थी, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी विकास योजनाओं और रणनीतिक घेराबंदी से वापसी करने में कामयाब रही।

गैस की किल्लत से लेकर आम के एक्सपोर्ट तक, हम चुकाएंगे उनकी जंग की कीमत…

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मार्च बीतने से पहले ही कोंकण के बागानों में पक रहे अल्फांसो आमों की खुशबू फैलने लगती है। महाराष्ट्र, गुजरात और तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में आम के मौसम का आगमन खुशहाली का संकेत माना जाता है।

निर्यातक खाड़ी देशों के लिए पैकेजिंग में जुट जाते हैं। किसान अच्छे दामों की उम्मीद करते हैं। आढ़तियों के पास तो खैर बात करने तक की फुरसत नहीं रहती।

लेकिन इस साल वहां उदासी दिख रही है। युद्ध ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है। गल्फ कोऑपरेटिव काउंसिल के देश भारतीय आमों के सबसे बड़े खरीदार हैं। 2024 में भारत ने इन देशों को लगभग 12,000 मीट्रिक टन आम निर्यात किए थे। इस वर्ष ऑर्डर लगभग गायब हैं। सूरत के एक फल निर्यातक के शब्दों में- “अब तक आम का एक भी ऑर्डर नहीं मिला है। सच कहूं तो कम-से-कम अगले एक महीने तक कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है।”

जो किसान निर्यात के लिए आम नहीं उपजाते हैं, वे भी उतने ही चिंतित हैं। उनका कहना है कि जैसे ही निर्यात की मांग गिरती है, घरेलू बाजार में फलों की अधिकता हो जाती है और कीमतें मुंह के बल गिरती हैं।

आम का मौसम तो खैर अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुआ, लेकिन तरबूज उगाने वाले किसानों पर युद्ध की मार पड़ चुकी है। 2023 के निर्यात आंकड़े बताते हैं कि भारत ने खाड़ी क्षेत्र में लगभग 2.2 लाख किलोग्राम तरबूज भेजे थे। रमजान के महीने में तो इसकी मांग सबसे अधिक होती है। इस साल रमजान आया और गुजर गया, लेकिन कोई खेप नहीं भेजी गई।

किसानों के लिए यह व्यवधान एक झटके की तरह आया है। एक किसान नेता ने नवजीवन को बताया कि हम अभी नए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रभाव को समझने की कोशिश ही कर रहे थे कि युद्ध ने अलग ही समस्याएं खड़ीं कर दीं।

खाड़ी क्षेत्र केवल फलों का बाजार ही नहीं है। यह बासमती चावल, चाय, मसालों और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। इसलिए यदि लंबा व्यवधान आता है तो कृषि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लाखों किसानों और मजदूरों पर इसका असर पड़ सकता है।

कृषि उत्पाद पूरी कहानी का एक हिस्सा हैं। खाड़ी क्षेत्र भारत के रत्न और आभूषण उद्योग के लिए भी एक बड़ा बाजार है, जिसमें सूरत और मुंबई जैसे शहरों में लाखों लोग काम करते हैं। युद्ध जारी रहता है तो मांग में तेज गिरावट आ सकती है। दवा कंपनियां भी चिंतित हैं। उद्योग के अनुमान बताते हैं कि व्यापार बाधित रहा तो भारत से थोक दवाओं का निर्यात 20 से 30 प्रतिशत तक गिर सकता है।

नौकरियों पर भी इसका असर पड़ना लगभग तय है। निर्यात कारोबार में आमतौर पर बड़ी संख्या में ठेका मजदूर और छोटे आपूर्तिकर्ता जुड़े होते हैं। निर्यात घटता है तो कारोबार की पहली प्रतिक्रिया अक्सर लागत घटाने की होती है, जिसमें छंटनी या काम के घंटे कम करना शामिल होता है। इसका परिणाम बेरोजगारी में वृद्धि के रूप में सामने आ सकता है। पूर्णकालिक और अंशकालिक दोनों तरह के श्रमिकों के लिए, खासकर ग्रामीण इलाकों और असंगठित क्षेत्र के उन कामगारों के लिए जिनकी माली हालत पहले से ही कमजोर हैं।

युद्ध भारतीय कृषि के लिए एक बहुत खतरनाक संकट भी पैदा कर रहा है- उर्वरकों का संकट। भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, खासकर फॉस्फेटिक उर्वरक जैसे डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी)। हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमत तेजी से बढ़ी है। 665 डॉलर प्रति टन से बढ़कर मात्र दो हफ्तों में 730 डॉलर प्रति टन से अधिक हो गई है। भारत को खरीफ बुवाई के मौसम से पहले बड़ी मात्रा में उर्वरक जमा करना होता है। इस बार यह आसान नहीं है।

सरकार सब्सिडी के जरिये डीएपी का खुदरा मूल्य 50 किलो की बोरी पर 1,350 रुपये पर स्थिर रखती है, लेकिन असली समस्या उपलब्धता की है। आयात में देरी या आपूर्ति में कमी से किसानों को यूरिया पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा होगा और फसल की पैदावार घट सकती है।

मिडिल ईस्ट जंग: क्या कुछ हासिल हुआ इस युद्ध से?

ऊर्जा आयात वैश्विक संघर्ष के दौरान भारत की शायद सबसे बड़ी कमजोरी है। देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, और कीमतों में तेज वृद्धि का सीधा असर महंगाई और चालू खाते के घाटे पर पड़ता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत के चालू खाते के घाटे को लगभग 9 अरब डॉलर तक बढ़ा सकती है।

फिलहाल सरकार ने संसद को आश्वस्त किया है कि भारत के पास पर्याप्त पेट्रोलियम भंडार हैं। हालांकि स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। अमेरिका से मिली अस्थायी छूट ने भारत को सीमित अवधि तक रूस से तेल खरीदना जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन ऐसे इंतजाम उन फैसलों के भरोसे रहेंगे जो भारत के नियंत्रण से बाहर हैं।

यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो ऊर्जा की लागत तेजी से बढ़ सकती है, जिससे परिवहन, विनिर्माण और घरेलू खर्च सभी प्रभावित होंगे।

तात्कालिक संकट प्राकृतिक गैस का है। भारत तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात पर काफी निर्भर है। इनकी बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जो विश्व ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। वहां कोई भी व्यवधान भारत में रसोई गैस, सीएनजी परिवहन ईंधन और औद्योगिक गैस आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।

इस कमी के संकेत अब अप्रत्याशित जगहों पर भी दिखने लगे हैं। खबरें हैं कि कई शहरों में रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसायों ने एलपीजी की कमी के कारण अपने संचालन को कम कर दिया है या अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसका असर क्लाउड किचन से लेकर गिग इकॉनमी में काम करने वाले डिलीवरी कर्मियों तक, कई श्रमिकों पर पड़ रहा है।

युद्ध अगर लंबा खिंचता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव गहरे हो सकते हैं। निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को लंबे समय तक मांग के झटके झेलने पड़ सकते हैं, जिससे कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं और बाजारों पर फिर से विचार करना पड़ेगा। ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं, जिससे केन्द्रीय बैंक को लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। इससे निवेश और आर्थिक विकास में सुस्ती का खतरा पैदा होगा। उर्वरक आपूर्ति में व्यवधान और कृषि लागत में वृद्धि ग्रामीण संकट को बढ़ा सकती है और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों से आने वाली धनराशि (रेमिटेंस) को भी खतरे में डाल सकती है, जो भारत के लिए विदेशी मुद्रा का एक बड़ा स्रोत है।

सबसे चिंताजनक अनुमान अमेरिका स्थित थिंक टैंक सोलेबिलिटी का है, जिसकी रिपोर्ट कहती है कि संघर्ष लंबा खिंचा तो सिर्फ गैस और उर्वरक संकट के कारण ही दीर्घकालिक प्रभाव भारत की जीडीपी को लगभग 1.7 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।

युद्ध भले ही हजारों किलोमीटर दूर लड़े जा रहे हों, लेकिन उनके आर्थिक परिणाम हर घर तक महसूस किए जाते हैं। कोंकण के आम बागानों से लेकर दिल्ली के रेस्तरां तक, उर्वरक आयात से लेकर ऊर्जा आपूर्ति तक, इसके प्रभाव व्यापार मार्गों, बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिये दूर-दूर तक फैलते हैं।

अल्फांसो की फसल का दुर्भाग्य बताता है कि कभी-कभी आम की मिठास भी युद्ध की कड़वाहट के आगे फीकी पड़ जाती है।

West Asia की डिमांड में भारी उछाल, Air India ने 22 नई Flights से बढ़ाई क्षमता…

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एयर इंडिया और उसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने शुक्रवार (27 मार्च) के लिए अद्यतन अंतरराष्ट्रीय उड़ान कार्यक्रम जारी किया है, जिसमें भारत और पश्चिम एशिया के प्रमुख गंतव्यों के बीच संचालित होने वाली 22 निर्धारित और गैर-निर्धारित उड़ानों की पुष्टि की गई है।

एयरलाइनों ने बताया कि संशोधित योजना क्षेत्र में वर्तमान यात्रा पैटर्न और परिचालन आवश्यकताओं को दर्शाती है। बयान के अनुसार, एयर इंडिया जेद्दा से आने-जाने वाली चार निर्धारित उड़ानें संचालित करेगी, जिनमें दिल्ली और मुंबई से दो-दो उड़ानें शामिल हैं। मुंबई-रियाद मार्ग पर दो और निर्धारित उड़ानें संचालित होंगी। बयान में कहा गया है कि एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट और रियाद से आने-जाने वाली चार-चार उड़ानों के साथ इन मार्गों को और मजबूत करेगी। मस्कट की उड़ानें दिल्ली और मुंबई से संचालित होंगी, जबकि रियाद की उड़ानें बेंगलुरु और कोझिकोड से शुरू होंगी।

व्यस्त समय में यात्रियों की संख्या को कम करने के लिए यूएई के लिए अतिरिक्त सेवाएं

दोनों एयरलाइनें हवाईअड्डों पर उपलब्ध स्लॉट और मौजूदा जमीनी परिस्थितियों के आधार पर संयुक्त अरब अमीरात से आने-जाने वाली आठ अनियमित उड़ानें भी संचालित करेंगी। बयान के अनुसार, इन अतिरिक्त उड़ानों का उद्देश्य यात्रियों की भारी मांग को प्रबंधित करना और उनके लिए अधिक क्षमता सुनिश्चित करना है। प्रेस नोट में उस दिन की निर्धारित, अनियमित और अस्थायी रूप से निलंबित सेवाओं की पूरी सूची दी गई है। जेद्दा, रियाद और मस्कट जैसे मार्गों पर नियमित उड़ानें जारी रहेंगी, जबकि दुबई और अबू धाबी सहित यूएई के कुछ हवाई अड्डों पर केवल अनियमित उड़ानें ही चलेंगी।

यात्री सहायता उपाय और लचीली पुनर्बुकिंग

यात्रियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, एयर इंडिया ने कहा, जिन यात्रियों ने उन मार्गों पर यात्रा के लिए बुकिंग की है जहां एयर इंडिया समूह की निर्धारित सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित हैं, वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तिथि के लिए आसानी से पुनर्बुक कर सकते हैं या पूर्ण धनवापसी का विकल्प चुन सकते हैं।” यात्री वेबसाइट या 24×7 ग्राहक सेवा टीम के माध्यम से बदलाव कर सकते हैं। यूएई हवाई अड्डों से बुकिंग कराने वाले एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों को भी लचीली पुनर्बुकिंग के विकल्प मिलेंगे। एयरलाइन ने कहा कि वह आवश्यक संपर्क बनाए रखने और यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पश्चिम एशिया में और अधिक तदर्थ उड़ानों की संभावना तलाश रही है।

लिव-इन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शादीशुदा पुरुष के साथ रहना जुर्म नहीं, गिरफ्तारी पर रोक…

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम और स्पष्ट फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन में रहता है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि नैतिकता और कानून दो अलग-अलग बातें हैं, और जब तक कोई कानून नहीं टूटा है, केवल सामाजिक सोच के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

कोर्ट का सख्त रुख, गिरफ्तारी पर रोक, सुरक्षा का आदेश

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने अनामिका और नेत्रपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जोड़े की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें गिरफ्तार न किया जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही, महिला के परिवार को भी सख्त चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी तरह से इस जोड़े को नुकसान न पहुंचाएं। कोर्ट ने साफ कहा कि परिवार का कोई सदस्य उनके घर में घुसने या फोन, मैसेज या किसी तीसरे व्यक्ति के जरिए संपर्क करने की कोशिश भी नहीं करेगा।

पुलिस की जिम्मेदारी तय, 24 घंटे में आदेश लागू करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट के 2018 के ‘शक्ति वाहिनी’ केस का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सुरक्षा के तय नियमों का पालन जरूरी है। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया गया है कि आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला शाहजहांपुर के जैतीपुर थाना क्षेत्र का है। 8 जनवरी 2026 को महिला अनामिका की मां कांति ने एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नेत्रपाल उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया। साथ ही धर्मपाल नाम के व्यक्ति पर मदद करने का आरोप भी लगाया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ बीएनएस की धारा 87 के तहत केस दर्ज किया था। इस कार्रवाई को चुनौती देने के लिए जोड़ा हाईकोर्ट पहुंचा, जहां उन्हें राहत मिली।

8 अप्रैल को अगली सुनवाई

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की है। तब तक के लिए जोड़े को कानूनी संरक्षण और सुरक्षा मिली हुई है।

S-400 की डिलीवरी, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव, कई बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी देने की तैयारी में भारत…

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रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) शुक्रवार को भारत की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण खरीद प्रस्तावों पर अहम फैसले ले सकती है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एजेंडा में शामिल प्रमुख मदों में 60 मध्यम परिवहन विमानों की खरीद, अतिरिक्त एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, नए मानवरहित लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन और लंबी दूरी की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों का बड़ा भंडार शामिल है। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे और इसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

एस-400 इकाइयों की और अधिक खरीद की संभावना

मंजूरी के लिए पेश किए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक एस-400 सुदर्शन वायु रक्षा प्रणाली की पांच अतिरिक्त इकाइयों की खरीद से संबंधित है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय वायु सेना की टीमें पिछले पांच इकाइयों के सौदे के तहत चौथी एस-400 स्क्वाड्रन प्राप्त करने के लिए रूस में हैं। चौथी इकाई के अप्रैल और मई के बीच पहुंचने की उम्मीद है, जबकि पांचवीं स्क्वाड्रन इस साल नवंबर या दिसंबर के आसपास पहुंचेगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, एस-400 प्रणाली ने कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक उच्च-मूल्य वाले निगरानी विमान को रोकने में सफलता हासिल की। ​​अधिकारियों ने इस कार्रवाई को भारतीय वायु सेना द्वारा हासिल की गई सबसे लंबी दूरी की हवाई अवरोधन कार्रवाइयों में से एक बताया, जिसमें कथित तौर पर 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था। इस प्रणाली का उपयोग सीमा पार से दागी गई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरों का मुकाबला करने के लिए भी किया गया था।

स्वदेशी लड़ाकू ड्रोन स्क्वाड्रन पर विचार-विमर्श जारी

भारतीय वायु सेना द्वारा स्वदेशी रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (जिसे अक्सर मानवरहित लड़ाकू जेट कहा जाता है) के लगभग चार स्क्वाड्रन शामिल करने के प्रस्ताव को डीएसी (DAC) द्वारा हरी झंडी दिए जाने की संभावना है। इस कदम से लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता में मजबूती आएगी और निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया कि भारतीय सेना की बड़ी संख्या में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खरीद की योजना पर भी मंजूरी के लिए विचार किया जाएगा, जिनमें से प्रत्येक 800 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। एक अन्य प्रमुख प्रस्ताव जिस पर विचार किए जाने की संभावना है, वह 300 स्वदेशी धनुष हॉवित्जर की खरीद के लिए मंजूरी है।

परिवहन विमान कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है

मध्यम परिवहन विमान कार्यक्रम के तहत, भारतीय वायु सेना 60 विमानों की खरीद के लिए बोलियों की जांच कर रही है, जिसमें ब्राजील की एम्ब्रेयर, अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और रूस की इल्युशिन जैसी प्रमुख वैश्विक निर्माता कंपनियां मुख्य दावेदार के रूप में उभर रही हैं। ये विमान सामरिक और रणनीतिक परिवहन क्षमताओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कुशा परियोजना के तहत स्वदेशी वायु रक्षा को मजबूत करना

यह उल्लेखनीय है कि भारतीय वायु सेना को डीआरडीओ द्वारा कुशा परियोजना के तहत विकसित लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के पांच स्क्वाड्रन के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। यह सरकार द्वारा घरेलू रक्षा विनिर्माण को मजबूत करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता को कम करने के व्यापक प्रयासों की ओर इशारा करता है।

बंगाल चुनाव 2026: CEC ने साइकिल रैली से किया मतदाताओं को जागरुक, ‘छोटा भीम’ और ‘चुटकी’ ने खींचा ध्यान…

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पूरे राज्य में मतदाता जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के हावड़ा में ‘चुनाव का पर्व, पश्चिम बंगाल का गर्व’ साइकिल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) और जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) ने भी हिस्सा लिया।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा ब्रिज पर चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने शपथ ग्रहण समारोह में सक्रिय रूप से भाग लिया। डीईओ और सीपी हावड़ा ने साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसमें बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के छात्रों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं ने हिस्सा लिया।

यह रैली सुबह 7:00 बजे हावड़ा ब्रिज चेक पोस्ट से शुरू होकर रेल म्यूजियम के रास्ते रामकृष्णपुर फेरी घाट पर समाप्त हुई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लोकगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से मतदान के महत्व और चुनावी उत्सव का संदेश दिया गया। इसके अलावा, मतदाता जागरूकता बोट फेरी जैसे अन्य ‘स्वीप’ कार्यक्रमों की भी शुरुआत की गई।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण लोकप्रिय एनिमेशन पात्र ‘छोटा भीम’ और ‘चुटकी’ रहे, जिन्होंने खासकर युवा और पहली बार वोट करने वाले मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में भाग लिया।

चुनाव आयोग के मीडिया इंचार्ज आशीष गोयल ने कहा, “आज का कार्यक्रम व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी (स्वीप) कार्यक्रम का हिस्सा है, जो मतदाताओं की जागरुकता पर केंद्रित है। हमारी कोशिश है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव एक त्योहार की तरह मनाया जाए।

वहीं, चुनाव आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मतदाता जागरूकता अभियान का उद्देश्य मतदाताओं को मतदान के महत्व के बारे में शिक्षित और जागरूक करना है। साथ ही मतदान केंद्र की जानकारी और मतदान दिवस की समय-सारणी जैसी जरूरी सूचनाएं देना भी है। इन प्रयासों का लक्ष्य खासकर शहरी मतदाताओं, महिलाओं, दिव्यांग मतदाताओं, युवाओं और पहली बार वोट करने वालों की भागीदारी बढ़ाना है।

आयोग ने कहा, “इन कार्यक्रमों के जरिए ईसीआई की ओर से हाल ही में लागू किए गए उपायों को भी उजागर किया जाएगा। पहली बार और युवा मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जाएगी। साथ ही युवाओं को जोड़ने के लिए राज्य की सांस्कृतिक झलक के साथ एक प्रभावी सोशल मीडिया अभियान भी चलाया जाएगा। सरकारी विभागों और कॉर्पोरेट संगठनों के साथ सहयोग के जरिए इस अभियान की पहुंच को और मजबूत किया जाएगा।”

Maharashtra Assembly की सुरक्षा में बड़ी सेंध, Fake Pass रैकेट का पर्दाफाश, मंत्रालय के कर्मचारी भी शामिल…

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महाराष्ट्र पुलिस ने विधानसभा सत्र के दौरान फर्जी प्रवेश पास बनाने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब एक शिकायत में अनधिकृत पासों के वितरण का जिक्र किया गया।

सत्र के दौरान राज्य मंत्री उदय सामंत ने भी इस मुद्दे को उठाया था। शिकायत के आधार पर, मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ने जांच की और इस रैकेट से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ मंत्रालय से जुड़े कर्मचारी हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान केशव गुंजल (53), गणपत भाऊ जावले (50), नागेश शिवाजी पाटिल (42), मनोज आनंद मोरबाले (40) और स्वप्निल रमेश तायडे (40) के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माना जा रहा है कि और भी संदिग्ध इसमें शामिल हैं और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।

सुरक्षा में हुई चूक की जांच के दायरे में आने से जांच का दायरा बढ़ा

इस मामले ने एक महत्वपूर्ण विधायी सत्र के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि फर्जी पास कैसे बनाए गए, इस प्रक्रिया को किसने अधिकृत किया और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति के समर्थन से यह जालसाजी संभव हुई।

बुधवार (25 मार्च) को महाराष्ट्र विधान परिषद ने एक प्रस्ताव को लागू करने का आदेश दिया, जिसमें एनसीपी विधायक अमोल मितकारी के खिलाफ यूट्यूब चैनल पर फर्जी खबर प्रकाशित करने के आरोप में अकोला के एक युवक को पांच दिन की जेल की सजा देने की सिफारिश की गई थी। युवक अंकुश गावंडे को फर्जी खबर के संबंध में माफी मांगने के लिए बुधवार को सदन में उपस्थित रहने को कहा गया था। गावंडे के साथ पत्रकार गणेश सोनावाने, हर्षदा सोनावाने और अमोल नंदुरकर ने भी ‘सत्या लाधा’ यूट्यूब चैनल पर मितकारी के खिलाफ फर्जी खबर प्रकाशित की थी। तीनों पत्रकारों ने सदन में माफी मांगी और उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। “हालांकि, सदन के आदेश के बावजूद गावंडे उपस्थित नहीं हुए। इसलिए उनके खिलाफ सजा लागू की जानी चाहिए।