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मनरेगा से निर्मित तालाब किसान के लिए बना सिंचाई व आजीविका का साधन

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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को न केवल रोजगार प्राप्त हो रहा है बल्कि स्थाई परिसम्पत्ति का निर्माण हो रहा है और आजीविका का साधन भी उपलब्ध हो रहा है। मनरेगा के तहत निर्मित क़ृषि तालाब बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड सिमगा अंतर्गत ग्राम अडबंधा के किसान सोमित साहू के लिए सिंचाई की सुविधा और आजीविका का साधन बन गया है।

विकासखंड सिमगा अंतर्गत ग्राम अडबंधा में मनरेगा के तहत करीब ढाई लाख रुपये की लागत से गंमीणों के लिए करीब 600 वर्गमीटर क्षेत्रफल में प्रथम कृषि तालाब का निर्माण किया गया। इस कार्य के लिए ग्राम पंचायत को ही कार्य एजेंसी बनाया गया। कृषि तालाब के निर्माण से जल संचयन के साथ ही अन्य व्यक्तिओं में कृषि तालाब निर्माण कराने में रूचि बढती गई। कृषि तालाब में मछली पालन पर अतिरिक्त आमदनी पर विशेष रूचि लिया जा रहा है।

किसान सोमित साहू ने बताया कि पूर्व में आजीविका के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण जीविकोपार्जन में कठिनाई थी। कृषि तालाब के निर्माण से मछली पालन करने से अतिरिक्त आमदनी से परिवार की आय बढ़ने लगी और फसलों की सिंचाई होने के कारण आय में वृद्धि हुई है। मनरेगा से निर्मित तालाब के कारण मेंरे जीवन में परिवर्तन आया और मेरे लिए रोजी-रोजगार प्राप्त करने के लिए भटकना नहीें पड रहा है।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर निकाली गई साइकल रैली

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राष्ट्रीय खेल दिवस के तहत आज बिलासपुर में स्कूली छात्र-छात्राओं और 300 से अधिक खिलाड़ियों ने साइकल रैली निकाली। भारत सरकार के फिट इंडिया कार्यक्रम “सन्डेस ऑन सायकल” (Sundays on Cycle) के तहत पीएमश्री स्वामी आत्मांनद विद्यालय नूतन चौक सरकंडा से स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई तक यह रैली निकाली गई। पूर्व ओलम्पियन एवं हॉकी के हेड कोच श्री अजीत इमानुएल लकड़ा और अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाडी संजू देवी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया।

भारत सरकार द्वारा देश के समृद्ध खेल विरासत का उत्सव मनाने, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करने, ओलम्पिक मूल्यों में राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह को समाहित कर सपूरे देश को ईमानदारी, महत्वाकांक्षा और सामूहिक भावना के साझा दृष्टिकोण के साथ एकजुट करने तथा मजेदार व प्रतिस्पर्धात्मक खेलों के माध्यम से शारीरिक सक्रियता, समावेशिता और टीम-वर्क को प्रोत्साहित करने व जनसामान्य को खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से इस वर्ष 29 अगस्त से 31 अगस्त तक राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह का राष्ट्रव्यापी आयोजन किया जा रहा है।

खेल विभाग के सहायक संचालक श्री ए. एक्का, स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक संचालक श्री पी. दासरथी और श्री अखिलेश मेहता, खेल अधिकारी श्री सुशील अमलेश, वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री राकेश टोप्पो और जिला क्रीड़ा अधिकारी श्री साजिद खान सहित विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, व्यायाम अनुदेशक, खेल विभाग व खेलो इंडिया स्टेट सेंटर व अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी साइकल रैली में शामिल हुए।

हिमालयन पर्वतारोहण अभियान पर निकली युवा टीम :अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा करें

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एक विशेष पर्वतारोहण दल हिमालयी अभियान के लिए रवाना हुआ है। दल में शामिल जशपुर के युवा पर्वतारोही हैं रवि सिंह, तेजल भगत, रूसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल हैं। इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू है कि आदिवासी संस्कृति और उसकी जड़ों से जुड़ाव है। जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय परंपराओं, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और सामुहिकता की भावना से है। हिमालय की ऊँचाइयों पर इन युवाओं का पहुँचना केवल एक खेल उपलब्धि नहीं बल्कि इस बात का प्रतीक है कि कैसे आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक ताकत और प्रकृति से गहरे रिश्ते को लेकर दुनिया के सामने खड़ा हो रहा है। दल के सदस्य अपनी संस्कृति और साहस अपने साथ लिए हिमालय की ओर बढ़ रहे हैं। इस अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं।

यह अभियान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन ओर आशीर्वाद से संचालित हो रहा है। दल जशपुर से रांची के लिए रवाना हुआ, जहां से वे ट्रेन द्वारा दिल्ली पहुँचेंगे। दिल्ली से आगे टीम जगतसुख पहुँचेगी, जहाँ वे पर्वतारोहण की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद 5 सितम्बर को टीम आधार शिविर ( Base Camp ) की ओर प्रस्थान करेगी।

दल को विदा करने के लिए जशपुर जिला प्रशासन एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जशपुर कलेक्टर, डीएफओ, जिला पंचायत सीईओ ने टीम को शुभकामनाएँ दीं और उनके सुरक्षित एवं सफल अभियान की कामना की। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि जशपुर की युवा प्रतिभाएँ इस अभियान के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने में योगदान प्रदान करेंगे। वहीं इसे जिले की उभरती खेल एवं साहसिक गतिविधियों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। जिला पंचायत सीईओ जो स्वयं एक अनुभवी पर्वतारोही हैं, ने दल के युवाओं को पर्वतारोहण और ट्रेकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षा उपायों, ऊँचाई पर स्वास्थ्य प्रबंधन और टीम भावना की अहमियत पर बल देते हुए युवाओं को प्रेरित और प्रोत्साहित किया।

इस अभियान को लेकर प्रदेश के लोग उत्साहित और गर्वित हैं। साथ ही स्थानीय जय जंगल कंपनी जो इस एक्सपीडिशन के स्पान्सर में से एक है, के संस्थापक समर्थ जैन का कहना है कि यह दल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को पर्वतारोहण तथा साहसिक खेलों की ओर अग्रसर करेगा। जगह-जगह लोग बच्चों के हौसले और साहस की चर्चा कर रहे हैं और सभी को उम्मीद है कि वे हिमालय से सफलता और गौरव की नई कहानियाँ लेकर लौटेंगे।

इस अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं

इस पर्वतारोही दल का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं साथ ही इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण संदेश है- पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति की दिशा में जागरूकता। यह पहल न केवल युवाओं को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करेगी, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। हिमालय अभियान से यह संदेश भी जाएगा कि साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है। इससे न केवल जशपुर बल्कि पूरे राज्य में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

आंगनबाड़ियों और स्कूलों में बच्चों की बन रही सेहत

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आंगनबाड़ियों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब पहले से बहुत खुश हैं। समय पर स्कूल और आंगनबाड़ी खुल रहे हैं। वहां मिलने वाले नाश्ते खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया, सेवई तथा भोजन से उन्हें ऊर्जा भी मिल रही है। गैस सिलेण्डर की व्यवस्था से आंगनबाड़ियों और स्कूलों में भोजन पकाने के दौरान उत्पन्न होने वाले धुएं से भी मुक्ति मिल गई है। इससे रसोईयों के साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी राहत मिली है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कोरबा जिले के सभी आंगनबाड़ियों तथा प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सुबह के नाश्ते की व्यवस्था डीएमएफ से की जा रही है। नाश्ते और सिलेण्डर की व्यवस्था ने आंगनबाड़ी तथा विद्यालय आने वाले बच्चों की रूचि बढ़ा दी है। अलग-अलग दिनों में निर्धारित मेनू के आधार पर उन्हें नाश्ता और भोजन परोसा जा रहा है। नाश्ते में खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा व भजिया दी जा रही है। विद्यार्थी नाश्ता खाने बहुत उत्सुक रहते हैं और समय पर विद्यालय भी पहुंच जाते हैं।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम धोबघाट प्राथमिक शाला में कक्षा पहली की छात्रा प्रियांशी, छात्र विनय, कक्षा दूसरी की नेहा, तीसरी की रोशनी और नर्मदा तथा कक्षा पांचवी के भूपेश ने बताया कि अब नाश्ते में अलग-अलग दिनों में उन्हें अलग-अलग खाने को मिलता है। खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवईयां मिलती है। विद्यालय में प्रधान पाठक श्री चैनसिंह पुहुप ने बताया कि नाश्ते का प्रभाव बच्चों पर पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि सिलेण्डर की व्यवस्था होने से जल्दी खाना पक जाता है। नाश्ता हो या मध्यान्ह भोजन दोनों को पकाने में आसानी हो गई है।

कोरबा विकासखण्ड के दूरस्थ गांव लामपहाड़ में पहाड़ी कोरवा बच्चों में भी नाश्ते का प्रभाव पड़ा है। आंगनबाड़ी केंद्र हो या स्कूल दोनों जगह उनकी उपस्थिति नजर आती है। पहले सुबह से ही अपने परिजनों के साथ जंगल की ओर प्रस्थान कर जाने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चे अब समय से पहले स्कूल पहुंचते हैं। लामपहाड़ आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता सुशीला तिर्की और सहायिका सुलोचनी यादव बताती है कि केंद्र में ज्यादातर बच्चे पहाड़ी कोरवा जनजाति के हैं। कई बच्चों को घर पर पर्याप्त आहार उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में नाश्ता और भोजन उनके शारीरिक विकास के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह दस बजे के आसपास नाश्ता देने के साथ ही दोपहर को एक बजे भोजन दिया जाता है।

आंगनबाड़ी में आने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चों सम्पति, रवीना, सुखमनिया, सुशील और कविता ने बताया कि उन्होंने सुबह नाश्ते में दलिया खाया और दोपहर को दाल, भात और सब्जी खाई है। हर दिन गरम भजिया, पोहा, खीर, पूड़ी, उपमा का नाश्ता मिलता है और इसे खाना भी अच्छा लगता है। यहां भोजन पकाने वाली सहायिका सुलोचनी यादव का कहना था कि पहले बारिश के दिनों में चूल्हा जलाना बहुत मुश्किल हो जाता था। सूखी लकड़ियों की व्यवस्था करना, फिर चूल्हा जलाकर धुएं के बीच खाना पकाना बहुत परेशानी वाला काम था। अब तो गैस से मिनटों में बिना परेशानी के खाना बनने लगा है।

लामपहाड़ के प्राथमिक और माध्यमिक शाला में भी विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की उपस्थिति तथा नाश्ते व मध्याह्न भोजन में रूचि नजर आने लगी है। कक्षा चौथी की देवशीला एवं फूलमनिया ने बताया कि स्कूल में मिलने वाला नाश्ता उन्हें अच्छा लगता है। पाली विकासखंड के दूरस्थ गांव पण्डोपारा में प्राथमिक शाला में लगभग 25 बच्चे हैं। नये भवन में आंगनबाड़ी संचालित है। दोनों जगह बच्चों को समय पर नाश्ता और भोजन मिलता है। गांव में रहने वाली पूजा पण्डो ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। एक आंगनबाड़ी में और दो स्कूल में पढ़ाई करते हैं। तीनों को सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना मिलता है। पहले वे बहाना बनाकर स्कूल जाने में आनाकानी करते थे, पर अब नियमित जाते हैं। स्थानीय प्रशासन ने सभी स्कूलों में नाश्ते का मीनू लिखाने तथा स्थानीय उपलब्धता और विद्यार्थियों की पसंद के अनुरूप नाश्ता परोसने के निर्देश दिए हैं।

सवा दो लाख बच्चे हो रहे लाभान्वित

करीब एक साल पहले 14 अगस्त 2024 को कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा और कोरबा विकासखंड के शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की थाली में गरम नाश्ता परोसने का सिलसिला प्रारंभ किया गया है। ढाई माह तक नाश्ता परोसने और इससे हुए सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए इसे जिले के सभी विकासखण्डों में प्रारंभ करने के निर्देश दिए। पिछले साल दीपावली अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही कोरबा, पाली, करतला और कटघोरा के शेष स्कूलों में भी नाश्ता देना प्रारंभ किया गया। जिले के सभी आंगनबाड़ियों, स्कूलों और छात्रावासों में सिलेण्डर की व्यवस्था कर प्रतिमाह गैस रिफलिंग की सुविधा भी प्रदान की गई है।

कोरबा जिले के 2602 आंगनबाड़ियों में छह माह से लेकर तीन वर्ष तक के 48 हजार 217 और तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 56 हजार 477 बच्चे दर्ज हैं। इसी तरह 1502 प्राइमरी स्कूलों में 73 हजार 810 और 537 मिडिल स्कूलों में 47 हजार 122 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ये सभी बच्चे नाश्ते और मध्यान्ह भोजन से लाभान्वित हो रहे हैं। नाश्ता और भोजन पकाने के लिए डीएमएफ से गैस सिलेण्डर की व्यवस्था की गई है।

CG: BJP नेता ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर कराई FIR, मामला गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए विवादित बयान …

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CG: BJP नेता ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर कराई FIR, मामला गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए विवादित बयान …

छत्तीसगढ़ के रायपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ बीजेपी नेता गोपाल सामंतों ने पुलिस में FIR दर्ज कराई है. यह मामला गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए विवादित बयान को लेकर है.

बीजेपी नेता गोपाल सामंतों ने कहा कि उन्होंने यह कदम बहुत भारी मन से उठाया.

गोपाल सामंतों ने बताया, “महुआ मोइत्रा मेरी ही कम्युनिटी से आती हैं और एक सांसद होने के नाते उनसे जिम्मेदाराना व्यवहार की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने जो बयान गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिया, वह बेहद गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक है.”

एफआईआर क्यों दर्ज हुई? सामंतों ने कहा कि महुआ का बयान सिर्फ अमित शाह पर हमला नहीं था, बल्कि इसने बंगाली समुदाय की छवि को भी नुकसान पहुंचाया. उन्होंने इसे समाज और संसदीय गरिमा के खिलाफ बताया. “मैंने यह FIR राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि समाज के सम्मान और संसदीय मर्यादा को बचाने के लिए कराई है. ऐसे लोगों को संसद में जगह नहीं मिलनी चाहिए. समाज को भी ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.”

सामंतों की FIR से राजनीतिक हलचल तेज यह मामला सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. बीजेपी नेता इसे मर्यादा की रक्षा का कदम बता रहे हैं, जबकि TMC समर्थक इसे राजनीतिक साजिश करार दे सकते हैं.

‘समाज में जहर घोलने वालों को समाज करे बहिष्कृत’ गोपाल सामंतों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक बयान का मामला नहीं है, बल्कि नफरत और गलत संदेश फैलाने का मुद्दा है. “ऐसे लोगों को समाज से भी बहिष्कृत किया जाना चाहिए जो समाज में जहर घोलने की कोशिश करते हैं.”

“‘प्राकृतिक आपदाओं से देश दुखी है’, PM मोदी ने ‘मन की बात’ में राहत कार्यों को सराहना दिया”

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“‘प्राकृतिक आपदाओं से देश दुखी है’, PM मोदी ने ‘मन की बात’ में राहत कार्यों को सराहना दिया”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 125वें एपिसोड में देश के कई हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि बारिश और मानसून की वजह से आई बाढ़ और भूस्खलन ने हर हिंदुस्तानी को दुखी किया है और जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनका दर्द हम सबका दर्द है।

राहत और बचाव कार्यों की सराहना पीएम मोदी ने आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में लगे सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन जवानों ने दिन-रात एक करके लोगों को बचाने का काम किया।

आधुनिक तकनीक का उपयोग: प्रधानमंत्री ने बताया कि जवानों ने राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया। इसमें थर्मल कैमरे, लाइव डिटेक्टर, स्निफर डॉग्स और ड्रोन जैसी चीजें शामिल हैं, जिनसे निगरानी और बचाव में मदद मिली।

हेलीकॉप्टर से मदद: फंसे हुए लोगों को निकालने, घायलों को एयरलिफ्ट करने और राहत सामग्री पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया।

मानवीयता को किया सलाम प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में न सिर्फ सरकारी एजेंसियां, बल्कि स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर और प्रशासन भी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने उन सभी नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया, जिन्होंने मुश्किल समय में मानवीयता को सबसे ऊपर रखा। पीएम ने कहा कि ऐसे संकट के समय में हमारा देश एकजुट होकर खड़ा होता है।

प्राकृतिक आपदा से कोई इतना दुखी नहीं होता है प्रकृति अगर लेती है तो देती भी है जनता दुखी है भ्रष्टाचार से सरकारी अधिकारियों से जो सरकार की तनख्वाह तो लेते हैं लेकिन जनता को भी परेशान करते हैं। गरीब का हक दूसरों को पैसे वालों को दे दिया जाता है।

“ट्रंप के 50% टैरिफ से हिला ये राज्य… 34,000 करोड़ का बड़ा घाटा”

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“ट्रंप के 50% टैरिफ से हिला ये राज्य… 34,000 करोड़ का बड़ा घाटा”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी आयात शुल्क (टैरिफ) का असर अब साफ दिखने लगा है। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू हो चुका है और इसके कारण कई सेक्टरों में चिंता बढ़ गई है।

सबसे ज्यादा मार तमिलनाडु की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ रही है। तमिलनाडु को 3.93 अरब डॉलर का नुकसान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा है कि इस टैरिफ से राज्य को करीब 3.93 अरब डॉलर (लगभग 34,600 करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है। उन्होंने इसे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया है।

अमेरिका तमिलनाडु का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका लंबे समय से तमिलनाडु का सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य के कुल निर्यात का 31% हिस्सा केवल अमेरिका को गया था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 20% है। ट्रंप के डबल टैरिफ लागू करने के बाद कई अमेरिकी कंपनियों ने तमिलनाडु से दिए गए ऑर्डर रद्द कर दिए हैं।

इससे खासतौर पर इन सेक्टर्स को बड़ा नुकसान हो रहा है: टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग) मशीनरी जेम्स एंड ज्वेलरी ऑटो पार्ट्स नौकरियों पर संकट सीएम स्टालिन ने चेतावनी दी है कि इस टैरिफ का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 13% से 36% तक नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं। खासतौर पर कपड़ा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा संकट है। अनुमान है कि सिर्फ इसी सेक्टर को 1.62 अरब डॉलर (14,279 करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है।

भारत के कपड़ा निर्यात में तमिलनाडु सबसे आगे भारत के कुल कपड़ा निर्यात में 28% योगदान तमिलनाडु का है। यह उद्योग लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी का साधन है। उदाहरण के लिए, तिरुप्पुर जिला कपड़ा उद्योग का मुख्य केंद्र है, जहां 65% महिलाएं काम करती हैं। अकेले पिछले साल इस जिले से कपड़ा निर्यात ने 40,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की। यह क्षेत्र रंगाई, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और मशीनरी जैसे उद्योगों को भी सहारा देता है।

सीएम स्टालिन ने की पीएम ने राहत पैकेज की मांग सीएम स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि तमिलनाडु को एक स्पेशल राहत पैकेज दिया जाए।

साथ ही उन्होंने ये सुझाव भी दिए हैं: मानव निर्मित फाइबर पर GST सुधार RODTEP स्कीम में बढ़ोतरी यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अफ्रीका के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स में तेजी केंद्र सरकार का बड़ा कदम हाल ही में केंद्र सरकार ने कपास आयात पर 11% कस्टम ड्यूटी को 31 दिसंबर तक स्थगित कर दिया है। स्टालिन ने इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह कदम अमेरिकी टैरिफ से पैदा हुए बड़े संकट का केवल आंशिक समाधान है। जब तक शुल्क वापस नहीं लिए जाते या अतिरिक्त राहत नहीं दी जाती, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।

CG: 3100 रुपए में खरीदा धान.. अन्नदाताओं को मिला मान, किसानों की चेहरे पर लौटी खुशहाली, धान खरीदी व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार..

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CG: 3100 रुपए में खरीदा धान.. अन्नदाताओं को मिला मान, किसानों की चेहरे पर लौटी खुशहाली, धान खरीदी व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार..

भारत के हृदय स्थल से 1 नवंबर 2000 को जन्मा छत्तीसगढ़ राज्य 2025 में अपना रजत जंयती वर्ष मना रहा है। अपनी स्थापना के बाद 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य ने उत्तरोत्तर प्रगति की है। यह सफर केवल एक राज्य के प्रशासनिक निर्माण का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशिता की मिसाल बन चुका है। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश की कमान सरल, सहज और सौम्य मुख्यमंत्री विष्णुदेव के पास है। साय सरकार ने प्रदेश के लोगों क कई योजनाएं संचालित कर रही है, जिससे बस्तर से सरगुजा तक के लोगों में एक नई खुशहाली दिख रही है।

कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार है, क्योंकि यहां की अधिकांश आबादी (लगभग 70%) कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर निर्भर है। यहाँ की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक विविधता इसे विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त बनाती है। यहीं वजह है कि प्रदेश में धान की खेती अधिक होती है। राज्य की कुल जनसंख्या लगभग 2.55 करोड़ है, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में संलिप्त है। राज्य में लगभग 40.11 लाख कृषक परिवार है, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत लघु एवं सीमांत श्रेणी के है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य में खेती को उन्नत और लाभकारी बनाने के लिए लगातार नित नए नवाचार किए जा रहे हैं। किसानों को उन्नत कृषि उपकरणों के उपयोग और वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किए जा रहा है।

साय सरकार आने के बाद सुधरी किसानों की दशा

किसानों की चेहरे पर लौटी खुशहाली

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली सुशासन सरकार ने किसानों की आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी है। सरकार ने किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की। समर्थन मूल्य पर सर्वाधिक किसानों से धान खरीदने वाला तथा धान का सर्वाधिक 3100 रुपए प्रति क्विंटल के मान से मूल्य देने वाला छत्तीसगढ़, देश का प्रथम राज्य है। छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है।

धान खरीदी व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मिला है। उनकी सरकार ने धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, लाभकारी और किसान-हितैषी बनाकर एक ऐतिहासिक पहल की है, जिससे राज्य के लाखों किसानों को सीधा लाभ पहुंचा है। पहले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों और बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां उन्हें अक्सर ठगा जाता था। मुख्यमंत्री साय की पहल से अब सीधी सरकारी खरीदी केंद्रों के माध्यम से धान की खरीदी हो रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का वास्तविक और लाभकारी मूल्य दिलाया है। साथ ही, बोनस योजना के तहत MSP के अतिरिक्त दी गई राशि ने किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा किया है। खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण के लिए सरकार ने गोदामों और वेयरहाउस की संख्या में बड़ा इजाफा किया है, जिससे फसल की बर्बादी को रोका जा सके। अब किसानों को उनकी फसल की कीमत सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है।

बढ़ी सिंचाई की सुविधा, लहराई फसलें

राज्य गठन (2000) के बाद से सिंचाई के क्षेत्र में निरंतर बदलाव देख रहा है। जब राज्य अस्तित्व में आया, तब कुल सिंचाई क्षमता महज 13.28 लाख हेक्टेयर थी। लेकिन बीते ढाई दशकों में सरकार द्वारा नहरों, जलाशयों, लघु सिंचाई परियोजनाओं और कुओं के माध्यम से इस क्षमता को 21.21 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया गया है। रजत जंयती वर्ष में साय सरकार ने इस ओर विशेष ध्यान दिया है। प्रदेश में ऐसे सैकड़ो सिंचाई परियोजनाएं हैं, जो विगत कई वर्षों से अपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं को आगामी वर्षो में कार्ययोजना बनाकर शीघ्र पूरा करने के उद्देश्य से साय सरकार ने अटल सिंचाई योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस पूरी कार्य अवधि में लगभग 5,000 करोड़ व्यय करके 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता सृजित करने का साहसी लक्ष्य रखा है। सिंचाईं परियोजनाओं के निर्माण एवं अनुरक्षण के लिए बजट में कुल 3 हजार 800 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

साय सरकार ने चला रही ये योजना

विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में सरकार ने प्रदेश के किसानों के खाते में विभिन्न योजनाओं के तहत समग्र रूप से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की राशि अंतरित की है। इस साल के बजट में भी कई प्रावधान किए गए हैं। कृषक उन्नति योजना के लिए विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी 10 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। मोदी की गारंटी के तहत दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषक मजदूर कल्याण योजना के माध्यम से 5 लाख 62 हजार भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रूपये की आर्थिक सहायता करते हुए 562 करोड़ राशि का भुगतान किया गया। आगामी वर्ष हेतु इस योजना अंतर्गत 600 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कृषि पंपों के निःशुल्क विद्युत प्रदाय योजनांतर्गत 3,500 करोड़ का बजट प्रावधान है।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्यांश के लिये इस बजट में 750 करोड़ का प्रावधान किया गया है। बजट में ये भी प्रावधान किए गए हैंः-

  • किसानों ने अब तक 1,362 करोड़ रुपये का प्रीमियम अदा किया है।
  • इसके बदले उन्हें 7,156 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम भुगतान हुआ है।
  • इस वर्ष से दलहन और तिलहन फसलों की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होगी।
  • प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • धान, गेहूं, रागी, कोदो-कुटकी सहित दलहन-तिलहन बीज वितरण के लिए 150 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
  • आगामी वर्ष से राज्य में नैनो यूरिया और डीएपी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत ऑर्गेनिक खेती के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण हेतु 24 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
  • एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत 200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
  • कृषि पंपों के ऊर्जीकरण (विद्युतीकरण) के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
  • गन्ना किसानों को बोनस देने हेतु 60 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में बना धान खरीदी में नया कीर्तिमान

छत्तीसगढ़ में राज्य शासन द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत इस खरीफ सीजन में रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है। इसमें मोटा धान 81.98 लाख मीट्रिक टन, पतला धान 10.75 लाख मीट्रिक टन और सरना धान 56.52 लाख मीट्रिक टन शामिल है। धान की यह खरीदी राज्य बनने के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। धान खरीदी का सिलसिला 14 नवंबर 2024 से शुरू होकर 31 जनवरी 2025 तक निरंतर जारी रहा जिसके अंतर्गत राज्य के पंजीकृत 25 लाख 49 हजार 592 किसानों ने धान विक्रय किया। महासमुंद जिला सर्वाधिक 11.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर राज्य में पहले नंबर पर है। वहीं बेमेतरा जिला 9.38 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर दूसरा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिला 8.56 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर तीसरा स्थान हासिल की है।

छत्तीसगढ़ी सभ्यताओं पर आधारित पूजा पंडाल, भगवान गणेश को अपने बाल सखा के पीठ पर सवारी करते दिखाया…

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छत्तीसगढ़ी सभ्यताओं पर आधारित पूजा पंडाल, भगवान गणेश को अपने बाल सखा के पीठ पर सवारी करते दिखाया…

”इस पंडाल में छत्तीसगढ़ी परिधान में एक महिला को करधन, सुता, मुंदरी सहित अन्य पारंपरिक श्रृंगार में दिखाया गया है, जो चूल्हे में तवे पर रोटियां बना रही है।”

”पंडाल मिट्टी और घास-फूस खादर से निर्मित घर के रूप में बनाया, छत्तीसगढ़ी सभ्यताओं पर आधारित पूजा पंडाल, भगवान गणेश को अपने बाल सखा के पीठ पर सवारी करते दिखाया.’

”पूरे पंडाल को मिट्टी और घास-फूस खादर से निर्मित घर के रूप में बनाया गया है, जो गांव के पुराने दौर में सुसज्जित और व्यवस्थित घर को प्रदर्शित कर रहा है।”

”विलुप्त होते छत्तीसगढ़ी परिवेश को गणेश पूजा पंडाल के माध्यम से लोगों के सामने लाने और पुराने दौर में उपयोग किए जाने वाले घरेलू सामग्रियों की अहमियत दिखाने और नई पीढ़ी को इनसे वाकिफ कराने के लिए पंडाल सजाया गया है।”

”इस पंडाल में छत्तीसगढ़ी परिधान में एक महिला को करधन, सुता, मुंदरी सहित अन्य पारंपरिक श्रृंगार में दिखाया गया है, जो चूल्हे में तवे पर रोटियां बना रही है।”

”वहीं भगवान गणेश को अपने बाल सखा के पीठ पर सवारी करते दिखाया गया हैं। जो खुशहाल परिवार के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्धि को दर्शा रहा है।”

”इस गणेश पंडाल में आने वाले बुजुर्ग पुराने वस्तुओं को देखकर निहार रहे हैं, तो वही युवा और बच्चों के लिए यह सामग्री काफी आकर्षित करने वाली है।”

”’इस गणेश पंडाल को लेकर समिति के अध्यक्ष मोन्टू यादव ने बताया कि हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपरा धीरे-धीरे आधुनिकता के दौर में खोती जा रही है जिसे सहजने का संदेश लेकर यहां पर इसकी स्थापना की गई है ।”

”पंडाल में पुराने दौर में घरेलू उपयोग में आने वाले चूल्हा, सिगड़ी, गोबर के कंडे, मिट्टी के बर्तन, झंहुआ, पररा, सुपा, सिलबट्टा, लालटेन, माखन की हांडी, सुवा, देव स्थान, खेल सामग्री में बांटी, भवरा, गाय, बैल, तुलसी चौरा बनाया गया है। इसमें मिट्टी से बनी कई सामग्रियां हु-ब-हु नजर आ रही है।”

 

आज का मौसम 31 अगस्त 2025: दिल्ली-एनसीआर में जोरदार बारिश, यूपी में भी भीषण बरसात का अलर्ट..

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आज का मौसम 31 अगस्त 2025: दिल्ली-एनसीआर में जोरदार बारिश, यूपी में भी भीषण बरसात का अलर्ट..

आज का मौसम 31 अगस्त 2025, नई दिल्ली: मॉनसून की बरसात वैसे तो देश के ज्यादातर राज्यों में जारी है। लेकिन पहाड़ी राज्यों में बाढ़-बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने के साथ-साथ लैंडस्लाइड की घटनाएं भी जारी हैं।

पहाड़ी राज्यों में रहने वाले लोगों को डर के साए में जीना पड़ रहा है। हालांकि, मैदानी इलाकों में भी बारिश कम कहर नहीं बरपा रही है। राजधानी दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार और पंजाब तक बारिश जारी है। इस मौसम विभाग ने आज (31 अगस्त) के लिए भी कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली में आज कैसा रहेगा मौसम दिल्ली-NCR में जोरदार बारिश हो रही है। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण वैसे तो ज्यादातर लोग घरों पर ही बारिश का लुत्फ उठा रहे हैं, लेकिन जिन लोगों को किसी काम से बाहर जाना था, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के चलते कई इलाकों और सड़कों पर पानी भरने का सिलसिला शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने पहले ही आज (31 अगस्त) मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी कर दी थी। मौसम विभाग ने आज पूर्वी दिल्ली, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, मध्य दिल्ली और शाहदरा जैसे इलाकों के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया था। बता दें कि दो दिन पहले दिल्ली में हुई बारिश ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी थी।

आज आपके शहर में कितना रहेगा तापमान? शहर अधिकतम तापमान (31 अगस्त) न्यूनतम तापमान (31 अगस्त)

दिल्ली 30°C-26°C
मुंबई 28°C-27°C
कोलकाता 32°C-27°C
चेन्नई 35°C-28°C
लखनऊ 30°C-26°C
पटना 32°C-28°C
रांची 28°C-23°C
जयपुर 29°C-24°C
हैदराबाद 28°C-23°C
बेंगलुरु 27°C-21°C
भोपाल 28°C-23°C

उत्तर प्रदेश में कैसा रहेगा मौसम यूपी में मौसम का मिजाज फिर बदल गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में राज्य के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। यूपी में आज से भीषण बारिश की शुरुआत हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक आज पश्चिमी यूपी के साथ-साथ पूर्वी यूपी के कुछ इलाकों में बारिश और गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तराखंड के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में बादल छाए हुए हैं और बारिश का दौर भी चल रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का क्रम जारी है। अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने आज देहरादून सहित 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सितंबर के पहले सप्ताह में उत्तराखंड में मानसून की बारिश सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। जबकि दूसरे सप्ताह से भारी बारिश का सिलसिला धीमा पड़ सकता है।