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 Bhagwat ने Modi को बताया Global Leader, कहा- जब PM बोलते हैं तो पूरी दुनिया उन्हें सुनती है”

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पुणे से लेकर अयोध्या तक हाल के दिनों में जो दृश्य सामने आए हैं उन्होंने आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। एक ओर, आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रमों की श्रृंखला में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खुले तौर पर प्रधानमंत्री की वैश्विक छवि की तारीफ की तो वहीं अयोध्या में राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह के दौरान मोदी ने भागवत को सम्मान देते हुए पीछे हटकर उन्हें आगे बढ़ने दिया।

हम आपको बता दें कि पुणे में सोमवार को आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं, तो दुनिया के नेता ध्यान से सुनते हैं।” उन्होंने कहा कि यह बदलाव इसलिए संभव हुआ है क्योंकि भारत की ताकत “उन जगहों पर प्रकट होने लगी है जहां उसे उचित रूप से प्रकट होना चाहिए।” भागवत के भाषण में भारत की वैश्विक भूमिका पर विशेष जोर था। उनका कहना था कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया में संघर्ष कम होते हैं और शांति स्थापित होती है। देखा जाये तो यह कथन केवल सांस्कृतिक आत्मविश्वास नहीं, बल्कि मोदी युग की विदेश नीति के प्रति संघ की स्वीकृति का संकेत भी माना जा रहा है.

हम आपको यह भी बता दें कि पिछले सप्ताह अयोध्या में राम मंदिर में ध्वज-वंदन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा व्यवहार प्रदर्शित किया, जो उनके सामान्य राजनीतिक व्यक्तित्व से अलग था। जब मोदी और भागवत मंदिर में प्रवेश कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने एक कदम पीछे होकर भागवत को आगे बढ़ने दिया था। यह दृश्य इसलिए भी उल्लेखनीय था क्योंकि मोदी की छवि प्रायः ‘मुख्य चेहरा’ और ‘प्रमुख केंद्र’ के रूप में देखी जाती है।

धर्म ध्वज के आरोहण के समय भी मोदी ने भागवत को अपने साथ खड़ा किया और ध्वज उठाने वाले लीवर को दोनों ने एक साथ घुमाया था। यह “संघ प्रमुख को उचित सम्मान” देने का प्रयास था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा-संघ संबंधों में जमी धूल झाड़ने की कोशिश के रूप में देखा गया था। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर भाजपा नेतृत्व और संघ के बीच असहमति की खबरें आती रही हैं- विशेषकर पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी को अक्सर इस टकराव का सूचक माना गया। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मोदी के इस सम्मान-संकेत को संघ नेतृत्व ने सकारात्मक रूप में लिया है और अब भाजपा में नए अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द तय हो सकती है।

भाजपा और संघ की सार्वजनिक निकटता ऐसे समय में सामने आई है, जब संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर भाजपा के लिए नए संतुलन और नए नेतृत्व-निर्णयों की जरूरत बढ़ रही है। शताब्दी वर्ष में संघ भी अपने मूल उद्देश्यों- संगठन, संवाद और राष्ट्र-निर्माण पर पुनः फोकस कर रहा है। ऐसे में मोदी और भागवत की एक ही फ्रेम में बढ़ती उपस्थिति केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले समय के राजनीतिक समीकरणों का संकेत हो सकती है।

देखा जाये तो आरएसएस और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बढ़ती सार्वजनिक निकटता एक राजनीतिक संदेश भी है। भागवत का मोदी की वैश्विक प्रतिष्ठा का सम्मान करना और मोदी का अयोध्या में उन्हें आगे रखना और उनके प्रति विनम्रता दिखाना, दोनों संस्थाओं के लिए परस्पर निर्भरता की व्यावहारिक स्वीकृति भी है। परंतु सवाल यह है कि यह “सम्मान-डिप्लोमैसी” महज़ प्रतीक है या किसी गहरे पुनर्संतुलन का संकेत है।

पुणे के कार्यक्रम में भागवत के संबोधन की अन्य बड़ी बातों का जिक्र करें तो आपको बता दें कि भागवत ने कहा कि किसी को जयंती या शताब्दी समारोह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों का जश्न मनाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि दिए गए कार्य को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा, “संघ यही करता आया है। संघ ने चुनौतियों का सामना करते हुए और कई तूफानों से जूझते हुए भले ही 100 साल पूरे कर लिए हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम आत्मचिंतन करें कि पूरे समाज को एकजुट करने के काम में इतना समय क्यों लगा।”

आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बलिदानों पर प्रकाश डालते हुए भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने उन्हें दिए गए मिशन को पूरा करने की अपनी यात्रा कई बाधाओं और चुनौतियों के बीच शुरू की थी। उन्होंने संघ के शुरुआती महीनों और वर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि उनके काम से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। भागवत ने कहा, “उन्होंने (संघ के स्वयंसेवकों ने) सफलता के बीज बोए और अपना जीवन समर्पित करके परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। हमें उनका आभारी होना चाहिए।”

सभा को एक किस्सा सुनाते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि एक बार उनसे कहा गया था कि संघ 30 साल देरी से आया है। भागवत ने कहा, “मैंने जवाब दिया कि हम देरी से नहीं आए। बल्कि, आपने हमें देरी से सुनना शुरू किया।” उन्होंने कहा कि जब संघ संवाद और सामूहिक कार्य की ताकत की बात करता है, तो इसका तात्पर्य पूरे समाज से होता है। भागवत ने कहा, “हमारी नींव विविधता में एकता में निहित है। हमें साथ मिलकर चलना होगा और इसके लिए धर्म आवश्यक है।” उन्होंने कहा, “भारत में सभी दर्शन एक ही स्रोत से उत्पन्न हुए हैं। चूंकि, सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है, इसलिए हमें सद्भाव के साथ आगे बढ़ना होगा।”

“लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ेगा विपक्ष, खड़गे का बड़ा ऐलान, मतदाता सूची मुद्दे पर गरमाई सियासत”

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संसद के बाहर संयुक्त विपक्ष द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरानराज्यसभा में विपक्ष के नेतासांसद मल्लिकार्जुनखड़गे ने कहाहम लोकतंत्र को बचाने और अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, क्योंकि संसद शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की तैयारी कर रही है।आज की संसद की कार्यवाही से पहले, इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

शीतकालीन सत्र के पहले दिन भी विपक्षी सदस्यों द्वारा 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार दोपहर 12 बजे, दोपहर 2 बजे और बाद में स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस सांसद मणिकमटैगोर ने कहाकि इंडिया ब्लॉक ने कल सुबह फैसला किया कि हम एसआईआर और चुनाव सुधार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा पर ज़ोर देंगे। आज सुबह 10:30 बजे, हम इसी मांग को लेकर मकर द्वार के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी सांसद संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। टैगोर ने आगे कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर बहस चाहता है, क्योंकि यह नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैंने एजेंडा प्रस्ताव भी दिए थे, और हमें उम्मीद है कि वे स्वीकार किए जाएँगे। हम इस विषय पर बहस चाहते हैं। सरकार को इस महत्वपूर्ण मुद्दे से नहीं भागना चाहिए, क्योंकि मतदान का अधिकार दांव पर है। बिहार में 62 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। अब इसे 12 राज्यों में लागू किया गया है। बहुत से बीएलओ आत्महत्या कर रहे हैं। हम भारत के लोकतंत्र की रक्षा करना चाहते हैं। और इसके लिए हमें संसद में बहस की ज़रूरत है।

“कर्नाटक में सीएम की कुर्सी पर सस्पेंस खत्म? सिद्धारमैया ने कहा- ‘जब आलाकमान कहेगा, डीके सीएम बनेंगे'”

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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ दूसरी नाश्ते की बैठक के बाद, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को दोहराया कि कांग्रेस नेता एकजुट हैं और मिलकर कांग्रेस सरकार चलाएँगे।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बारे में पूछे जाने पर, सिद्धारमैया ने कहा, “जब आलाकमान कहेगा।” मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इससे पहले उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से उनके आवास पर मुलाकात की थी, जहाँ दोनों के बीच दूसरी नाश्ते की बैठक हुई थी। अपनी पहली मुलाकात में इडली-सांभर और उपमा के बाद, डीके शिवकुमार ने पारंपरिक नाटी चिकन और इडली की गरमागरम प्लेटों के साथ सिद्धारमैया की मेज़बानी की।

सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि कोई मतभेद नहीं हैं। डीके शिवकुमार और मैं एकजुट हैं। हम सरकार चला रहे हैं। भविष्य में भी हम एकजुट होकर सरकार चलाएंगे। उन्होंने कहा कि आज डीके शिवकुमार ने मुझे नाश्ते पर बुलाया। मैं आने के लिए तैयार हो गया। आज हम दोनों ने नाश्ता किया और डीके सुरेश भी मौजूद थे… नाश्ते के बाद, हमने विधानसभा सत्र पर चर्चा की। तय हुआ कि 8 दिसंबर को सांसदों की एक बैठक बुलाई जाए। हम किसानों के मुद्दों और राज्य के अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगे। हम दोनों आलाकमान, खासकर राहुल, सोनिया, प्रियंका और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा उठाए गए कदमों को स्वीकार करेंगे। अगर वे (पार्टी आलाकमान) हमें (दिल्ली) बुलाते हैं, तो हम ज़रूर जाएँगे। कल मैं केसी वेणुगोपाल से एक समारोह में मिलूँगा जहाँ हम दोनों को आमंत्रित किया गया है।

नेतृत्व संघर्ष की अटकलों को कमज़ोर करते हुए, सिद्धारमैया ने कहा कि वे हमेशा एकजुट रहे हैं। यह एकता आज कोई नई बात नहीं है; हम हमेशा से एकजुट रहे हैं। राहुल गांधी जो भी फ़ैसला लेंगे, हम उसके अनुसार काम करेंगे; यही मैंने कहा है। मुख्यमंत्री ने एमएसपी का मुद्दा उठाया और मक्का और गन्ना किसानों के लिए सरकार के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मैं उनके (उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार) आवास पर नाश्ते के लिए आया हूँ। डीके शिवकुमार मेरे घर नाश्ते के लिए आए थे, और उन्होंने मुझे अपने घर नाश्ते या दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया था। इसलिए मैं आज आया, और हमने नाश्ता किया।

उन्होंने कहा कि हमने पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा की। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगले सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे अविश्वास प्रस्ताव लाएँगे। भाजपा और जद(एस) हमारे किसी भी फ़ैसले का विरोध करने की योजना बना रहे हैं। हमारी सरकार किसान-समर्थक है। हमने मक्का और गन्ने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। मैंने किसानों से बात की है, और सरकार ने क़ीमत तय कर दी है। मैंने किसानों, मुर्गीपालकों और मत्स्यपालकों से भी बात की है। डी.के. शिवकुमार ने राज्य में विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।

“पुतिन-मोदी मुलाकात में बड़ा हथियार सौदा तय? एजेंडे में Su-57 लड़ाकू जेट और S-400 सिस्टम”

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इस सप्ताह नई दिल्ली में होने वाली भारत-रूस बैठक वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में है, क्योंकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली वार्ता में कई अहम रक्षा सौदे शामिल होंगे.

रूस ने संकेत दिया है कि उन्नत सुखोई Su-57 फाइटर जेट और अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर गहन चर्चा की जाएगी. दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के लिए रूस भारत को अत्याधुनिक तकनीक साझा करने और संयुक्त उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में है.

सुखोई Su-57 पर फिर से तेज हुई चर्चा

रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि Su-57 फिफ्थ-जनरेशन लड़ाकू विमान भारत-रूस वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. उन्होंने इसे दुनिया का ‘सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान’ बताया. पेस्कोव ने कहा कि यह मुद्दा पुतिन की भारत यात्रा के दौरान चर्चा में रहेगा, लेकिन प्रतिस्पर्धियों के कारण ज्यादा विवरण साझा नहीं किए जाएंगे. भारत लंबे समय से Su-57 जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ जेट में दिलचस्पी दिखाता आया है.

S-400 के अतिरिक्त सिस्टमों पर भी नजर

भारत ने पहले ही रूस से पांच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया है, जिनमें से कई की आपूर्ति हो चुकी है. पुतिन-मोदी मुलाकात के दौरान अतिरिक्त सिस्टमों, अपग्रेड पैकेज और लॉजिस्टिक सपोर्ट पर चर्चा होने की संभावना है. भारत की रक्षा तैयारी में S-400 की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, इसलिए यह सौदा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है.

भारत को तकनीक ट्रांसफर पर रूस का भरोसा

क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा कि रूस भारत को वह हर तकनीक साझा करने को तैयार है, जिसे साझा किया जा सकता है. उनके अनुसार, कई रक्षा उपकरणों का ‘संयुक्त उत्पादन’ जल्द शुरू किया जाएगा. यह संकेत भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के अनुरूप है. इससे भारत को न केवल उन्नत सैन्य तकनीक मिलेगी, बल्कि भविष्य के प्रोजेक्ट्स में भी बड़ी बढ़त हासिल होगी.

संयुक्त उत्पादन से बढ़ेगी रणनीतिक साझेदारी

भारत और रूस पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल जैसे सफल संयुक्त प्रोजेक्ट कर चुके हैं. दोनों देश अब फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और अन्य रक्षा प्रणालियों के निर्माण में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. संयुक्त उत्पादन भारत को लागत के साथ-साथ समय की भी बड़ी बचत देगा. रूस भी एशियाई बाजार में भारत की बढ़ती क्षमता का लाभ उठा सकेगा.

भारत-रूस रिश्तों की मजबूती का बड़ा संकेत

पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीति तेजी से बदल रही है. भारत और रूस दशकों से रक्षा साझेदार रहे हैं और यह बैठक उस भरोसे को और गहरा करने का संकेत देती है. Su-57 और S-400 जैसे सौदों पर आगे बढ़ने से दोनों देशों के रणनीतिक, तकनीकी और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी.

“NASA Photo: क्या रात में ‘सोने’ की तरह चमकती है हमारी पृथ्वी? अंतरिक्ष से ली गई इस अद्भुत तस्वीर ने किया हैरान”

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बचपन से हम किताबों में पढ़ते आए हैं कि अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी ‘नीली’ दिखाई देती है। लेकिन नासा (NASA) के एस्ट्रोनॉट द्वारा शेयर की गई एक ताजा तस्वीर ने इस नजरिए को बदल दिया है।

इस फोटो में हमारी धरती किसी नीले गोले जैसी नहीं, बल्कि एक सुनहरे और हरे रंग के चमकदार लिफाफे में लिपटी हुई दिख रही है। पहली नजर में यह किसी ‘फोटोशॉप’ या ‘इंस्टाग्राम फिल्टर’ का कमाल लगता है, लेकिन यह 100% असली विज्ञान है।

यह रोशनी क्या है?

इस घटना को विज्ञान की भाषा में एयरग्लो कहा जाता है। इसे समझना बहुत आसान है। क्या आपको बचपन के वो ‘रेडियम’ वाले स्टिकर्स याद हैं? जो दिन भर सूरज की रौशनी सोखते थे और रात होते ही हरे रंग में चमकने लगते थे? पृथ्वी का वायुमंडल भी ठीक ऐसा ही करता है।

दिन में सूरज की तेज अल्ट्रावॉयलेट किरणें वायुमंडल के अणुओं (Atoms) से टकराती हैं और उन्हें ऊर्जा से भर देती हैं। जब सूरज ढल जाता है, तो ये अणु उस जमा हुई ऊर्जा को ‘प्रकाश’ के रूप में धीरे-धीरे छोड़ते हैं। इसी वजह से पृथ्वी के ऊपर यह पतली सी चमकदार परत दिखाई देती है।

हरा और लाल रंग ही क्यों?

तस्वीर में दिख रहे रंग कोई जादू नहीं, बल्कि अलग-अलग कैमिकल की मौजूदगी बताते हैं। दरअसल, हरा रंग ऑक्सीजन के अणुओं के कारण है। यह परत सबसे ज्यादा चमकदार होती है। जबकि नारंगी/पीला रंग सोडियम (Sodium) की परत होती है, जो उल्कापिंडों (Meteors) के जलने से वायुमंडल में आती है। वहीं लाल रंग वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत है, जो सूरज की गतिविधि से प्रभावित होती है।

ऑरोरा और एयरग्लो में फर्क

बहुत से लोग इसे ‘नॉर्दन लाइट्स’ समझने की गलती कर रहे हैं। यहां फर्क समझिए- ऑरोरा, असल में तब बनता है जब सूरज से आने वाले तूफानी कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। यह सिर्फ उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों (Poles) पर दिखता है और बहुत तेज नाचता हुआ लगता है। जबकि एयरग्लो, शांत होता है और पूरी पृथ्वी पर हर वक्त मौजूद रहता है, लेकिन इतना हल्का होता है कि इसे सिर्फ अंतरिक्ष से ही साफ देखा जा सकता है।

तस्वीर किसने ली? यह तस्वीर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मौजूद नासा के एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट (Don Pettit) ने ली है। डॉन अपनी बेहतरीन ‘एस्ट्रो-फोटोग्राफी’ के लिए मशहूर हैं। उन्होंने शटर स्पीड को धीमा रखकर इस रोशनी को कैमरे में कैद किया, जिसे हमारी नंगी आंखें शायद इतनी स्पष्टता से न देख पाएं।

यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि हमारी पृथ्वी सिर्फ एक पत्थर का टुकड़ा नहीं है। यह एक जीवित ग्रह है जिसका अपना एक ‘सुरक्षा कवच’ है। अगली बार जब आप रात में आसमान की तरफ देखें, तो याद रखिएगा… भले ही आपको न दिखे, लेकिन आपके ठीक ऊपर वायुमंडल धीरे-धीरे चमक रहा है।

“दुनिया में होने जा रहा बड़ा युद्ध… अरबपति एलन मस्‍क ने दी परमाणु जंग की चेतावनी, जानें कहां पर मंडरा रहा खतरा”

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टेस्‍ला और एक्‍स के मालिक अरबपति एलन मस्‍क लगातार भविष्‍य को लेकर दुनिया को आगाह कर रहे हैं। जनसंख्‍या में कमी हो या एआई का इस्‍तेमाल, एलन मस्‍क ने मानवता को सचेत किया है।

एलन मस्‍क ने अब चेतावनी दी है कि अगले 5 से 10 साल में दुनिया में एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। यह परमाणु युद्ध भी हो सकता है। एक्‍स पर लिखे एक पोस्‍ट में एलन मस्‍क ने कहा कि जल्‍द ही दुनिया एक वैश्विक संघर्ष में फंस सकती है। ट्रंप सरकार के साथ काम कर चुके मस्‍क ने वैश्विक प्रशासन पर परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के असर को लेकर चल रही एक बहस में यह पोस्‍ट किया। मस्‍क के इस बयान के बाद बहस तेज हो गई है।

मस्‍क ने Hunter Ash नामक यूजर के एक पोस्‍ट के जवाब में यह कहा। इस यूजर ने दावा किया था कि दुनियाभर की सरकारें प्रशासन के मामले में कम प्रभावी हैं और इसके पीछे वजह यह है कि उन्‍हें किसी विदेशी युद्ध के खतरे का डर नहीं है। इसके जवाब में एलन मस्‍क ने खुलकर कहा कि एक बड़ा युद्ध होने जा रहा है। आप सवाल कर सकते हैं कि कब और कहां होने जा रहा है? इस पर मस्‍क ने कहा कि साल 2030 तक यह युद्ध हो सकता है। मस्‍क ने कहा, ‘युद्ध अवश्‍यसंभावी है। 5 साल अधिकतम 10 साल।’

ताइवान से लेकर यूक्रेन तक तनाव

हालांकि एलन मस्‍क ने अपनी संभावन को बहुत ज्‍यादा विस्‍तार में नहीं बताया। इससे एक्‍स यूजर को यह नहीं पता चल पाया कि उनकी आशंका किसको लेकर है लेकिन उनकी एक्‍स के एआई ग्रोक का कहना है कि इससे पहले के एक बयान में एलन मस्‍क ने व‍िश्‍व व्‍यवस्‍था को लेकर कहा था। इसमें यूरोप में माइग्रेशन संकट और वैश्विक संघर्ष के खतरे को बताया था। मस्‍क अमेरिका में Department of Government Efficiency के मुखिया रह चुके हैं। ग्रोक ने बताया कि एलन मस्‍क ने किसी पक्ष या कारण के बारे में नहीं बताया है।

ग्रोक ने बताया कि एलन मस्‍क यूरोप और ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर प्रवासन और पहचान की राजनीतिक की वजह से गृहयुद्ध, अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर युद्ध, यूक्रेन में चल रही लड़ाई के तीसरे विश्‍वयुद्ध में बदलने की चेतावनी दे चुके हैं। मस्‍क का कहना है कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता होने के बाद भी दुनिया में तनाव बढ़ रहा है। हालांकि मस्‍क ने अपनी मूल पोस्‍ट में किसी तनाव या लड़ाई का नाम नहीं लिया है। फिर भी माना जा रहा है कि उनका इशारा ताइवान, यूक्रेन और यूरोप के आंतरिक संकट की ओर है।

“Cyclone Ditwah: भारी बारिश के बीच तमिलनाडु में स्कूल-कॉलेज बंद, IMD का कई इलाकों में अलर्ट जारी”

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साइक्लोन दितवाह के मद्देनजर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। भारी बारिश के अनुमान के बाद तमिलनाडु के तीन जिलों चेन्नई, तिरुवल्लूर और कांचीपुरम में स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का फैसला किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि तेज बारिश और पानी भरने की संभावना के बीच यह फैसला किया गया है।

लोगों से सावधान रहने, बिना जरूरत यात्रा न करने और राज्य सरकार और डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसियों द्वारा जारी की गई आगे की एडवाइजरी का पालन करने का आग्रह किया गया है। तमिलनाडु के डिजास्टर मैनेजमेंट मिनिस्टर केकेएसएसआर रामचंद्रन ने कहा कि राज्य में अब तक 3 लोगों की मौत हो गई है।

श्रीलंका में मचाई भयंकर तबाही

श्रीलंका में भयकंर तबाही मचाने के बाद साइक्लोन दितवाह भारत की ओर बढ़ रहा है। श्रीलंका में अब तक 334 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कोलंबो के कुछ हिस्से अब भी बाढ़ झेल रहे हैं। भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका को 53 टन राहत सामग्री भेजी है।

INS विक्रांत के चेतक हेलीकॉप्टर और भारतीय वायु सेना के MI-17 हेलीकॉप्टरों ने श्रीलंकाई वायु सेना के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर बचाव ऑपरेशन चलाए, जिसमें गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर रूप से घायल लोगों सहित फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट किया गया।

बता दें कि 28 नवंबर को भारत ने साइक्लोन के मद्देनजर श्रीलंका को तुरंत सर्च एंड रेस्क्यू और मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) मदद देने के लिए ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया। बचाए गए लोगों में श्रीलंका, भारत, जर्मनी, स्लोवेनिया, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका, पोलैंड, बेलारूस, ईरान, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिक शामिल थे।

“कुवैत से हैदराबाद आ रही इंडिगो की फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी, मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग”

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इंडिगो की एक फ्लाइट की मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई है। यह फ्लाइट कुवैत से हैदराबाद आ रही थी। उड़ान के दौरान ही फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी मिली।

आनन-फानन में फ्लाइट को मुंबई एयरपोर्ट पर लैंड करवाया गया है।

दिल्ली एयरपोर्ट को मिली थी धमकी

जानकारी के अनुसार, फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी ईमेल के जरिए भेजी गई थी। यह ईमेल दिल्ली एयरपोर्ट को आया था। ईमेल मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन अलर्ट हो गया और इंडिगो की फ्लाइट की मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपातकाल लैंडिंग करवाई गई।

मुंबई में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

FlightRadar24 के अनुसार, इंडिगो की फ्लाइट एयरबस A321-251NX ने रात को 1.56 बजे कुवैत से उड़ान भरी थी। यह फ्लाइट हैदराबाद की तरफ जा रही थी। हालांकि, धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद फ्लाइट को आज सुबह 8:10 बजे मुंबई में ही लैंड करवाया गया।

पहले भी मिली थी धमकी

इससे पहले 23 नवंबर को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की एक फ्लाइट को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह फ्लाइट बहरीन से हैदराबाद आ रही थी। धमकी मिलने के बाद विमान को मुंबई एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया गया और फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई थी।

“CGPSC PCS 2025: छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा के लिए आवेदन स्टार्ट, ग्रेजुएट अभ्यर्थी इस डेट तक भर सकते हैं फॉर्म”

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छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC) की ओर से राज्य सेवा परीक्षा (CGPSC PCS 2025) के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 दिसंबर से स्टार्ट कर दी गई है। जो भी अभ्यर्थी इस भर्ती परीक्षा की तैयारियों में लगे हैं वे ऑनलाइन माध्यम से सीजीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट psc.cg.gov.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।

एप्लीकेशन फॉर्म भरने एवं फीस जमा करने की लास्ट डेट 30 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई है।

पात्रता एवं मापदंड

सीजी पीसीएस भर्ती 2025 में शामिल होने के लिए उम्मीदवार का मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ संस्थान से ग्रेजुएशन या इसके समकक्ष उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। जो अभ्यर्थी स्नातक के अंतिम वर्ष के पेपर दे चुके हैं या देने जा रहे हैं वे भी इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसके अलावा अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष एवं अधिकतम आयु 28 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, आरक्षित वर्ग से आने वाले अभ्यर्थियों को ऊपरी उम्र में नियमानुसार छूट दी जाएगी।

एप्लीकेशन प्रॉसेस

भर्ती में शामिल होने के लिए पात्र अभ्यर्थी स्वयं ही फॉर्म भर सकते हैं। आपकी सहूलियत के लिए आवेदन का लिंक एवं स्टेप्स यहां दी जा रही हैं-सीजीपीएससी पीसीएस 2025 एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट psc.cg.gov.in पर विजिट करें।

वेबसाइट के होम पेज पर आपको ONLINE APPLICATION में STATE SERVICE EXAMINATION-2025 पर क्लिक करना है।

इसके बाद एप्लीकेशन लिंक पर क्लिक करके पहले मांगी गई डिटेल भरकर रजिस्ट्रेशन कर लें। पंजीकरण होने के बाद अन्य डिटेल भरकर फॉर्म को पूरा कर लें।हस्ताक्षर एवं फोटोग्राफ अपलोड करें। अंत में कैटेगरी के अनुसार निर्धारित फीस जमा करें और फॉर्म को सबमिट करके उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।

CGPSC PCS 2025 Application Form नोटिफिकेशन (PDF) डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।

एप्लीकेशन फीस

इस भर्ती में आवेदन के साथ जनरल एवं छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर के अभ्यर्थियों को फीस के रूप में 400 रुपये जमा करना होगा। एससी, एसटी, ओबीसी एवं पीडब्ल्यूबीडी (केवल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थी) वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए फीस 300 रुपये तय की गई है। उम्मीदवारों को आवेदन के साथ पोर्टल शुल्क+GST भी देना होगा।

भर्ती विवरण

इस भर्ती के माध्यम से राज्य की विभिन्न सेवाओं में कुल 238 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इस बार सर्वाधिक 51 पद नायब तहसीलदार के लिए हैं, जो राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित होंगे। इसके बाद 29 पद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (कक्षा ‘ग’) और 28 पद राज्य पुलिस सेवा (उप पुलिस अधीक्षक) के लिए आए हैं।

“रेकॉर्ड पर पहुंचने के बाद धड़ाम हुई चांदी, सोना भी आया नीचे, शादियों के सीजन में जानिए नया रेट”

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चांदी सोमवार को रेकॉर्ड पर पहुंच गई थी। इस साल इसकी कीमत में 104 फीसदी तेजी आई है जबकि सोना करीब 60 फीसदी चढ़ा है। लेकिन आज दोनों कीमती धातुओं की कीमत में गिरावट आई है।

एमसीएक्स पर चांदी की कीमत में 4,000 रुपये से ज्यादा गिरावट आई जबकि सोना 1,000 रुपये से ज्यादा सस्ता हुआ है। 5 फरवरी की डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,30,652 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था और आज 1,30,110 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 129597.00 रुपये तक लो और 130778.00 रुपये तक हाई गया।

दोपहर बाद 3.00 बजे सोना 10,37 रुपये यानी 0.79 फीसदी गिरावट के साथ 1,29,615 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इस साल अब तक 11 महीनों में से सोने की कीमत में 10 बार तेजी आई है और यह 46 साल में अपने सबसे बेहतर प्रदर्शन की तरफ बढ़ रहा है। पिछले 100 साल में सोने का यह चौथा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा। उसने 1973, 1974 और 1979 में इससे बेहतर प्रदर्शन किया था।

चांदी की कीमत

चांदी सोमवार को 1,82,998 रुपये किलो के ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद 1,82,030 रुपये पर बंद हुई थी। आज यह 1,80,701 रुपये पर खुली। शुरुआती कारोबार में यह 1,77,750 रुपये तक लो और 1,80,701 रुपये तक हाई गई। 3.10 मिनट पर यह 3,930 रुपये यानी 2.16 फीसदी गिरावट के साथ 1,78,100 रुपये पर ट्रेड कर रही थी। चांदी की कीमत हाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार 58 डॉलर प्रति ओंस के पार पहुंची थी। चांदी भी 1979 के बाद पहली बार अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ओर बढ़ रही है।