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जम्मू-कश्मीर में सुबह-सुबह एक्शन, पाकिस्तान से भारत में घुस रहे थे आतंकी, सुरक्षाबलों ने 2 को जहन्नुम पहुंचाया

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जम्‍मू-कश्‍मीर से इस वक्‍त की बड़ी खबर सामने आ रही है. इंडियन आर्मी ने घाटी में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया है. सुरक्षाबलों को LoC के जरिये आतंकवादियों के घुसपैठ करने की सूचना मिली थी. इसके बाद चौकसी बढ़ा दी गई थी. पाकिस्‍तान से लगते इलाके में हलचल देखे जाने के बाद आर्मी के जवान एक्‍शन में आ गए. चप्‍पे-चप्‍पे की तलाशी शुरू कर दी गई, जब सुरक्षाबलों की आतंकवादियों से मुलाकात हो गई. इसके बाद एनकाउंटर शुरू हो गया. जवानों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया. बता दें कि पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकवादियों की ओर से किए गए नृशंस नरसंहार के बाद सुरक्षाबलों ने जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकवादियों के सफाये के लिए स्‍पेशल ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

भारतीय सुरक्षाबलों ने गुरेज सेक्‍टर के नौशेरा नर्द में एलओसी पार करने का प्रयास कर रहे दो आतंकवादियो को ढेर किया है. आर्मी के चिनार कोर की ओर से इस बाबत एक्‍स पर जनकारी दी गई है. इस पोस्‍ट में कहा गया है, ‘जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा संभावित घुसपैठ की कोशिश के बारे में दी गई खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना और जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने गुरेज सेक्टर में एक संयुक्त अभियान शुरू किया. सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और उन्हें चुनौती दी, जिसके चलते आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. जवानों ने प्रभावी जवाबी कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया. अभियान जारी है.’

उड़ी में भी हुआ था एनकाउंटर

इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर के तुरिना इलाके में रविवार को सुरक्षाबलों और संदिग्ध आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में बड़ा तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. इसी दौरान थोड़ी देर के लिए दोनों ओर से फायरिंग हुई, जिसके बाद आतंकी घने जंगल की ओर भाग निकले थे. फायरिंग के बाद सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया था. इसमें ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से जंगल और आसपास के इलाकों में तलाशी भी ली गई थी.
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल देवसर इलाके में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ सप्‍ताह से भी ज्‍यादा समय तक चली थी. किश्तवाड़ और कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई और ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई थी. भारतीय सेना के जवानों ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के दुल इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया था. पहलगाम अटैक के बाद से ही सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अपना अभ‍ियान तेज कर दिया है. आतंकवादियों को उनके बिल से निकालकर उन्‍हें जहन्‍नुम भेजा जा चुका है. यह अभियान अभी भी जारी है.

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ तांडव के आगे नहीं झुकेगा भारत, कर ली प्लानिंग

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अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने अपनी टेक्सटाइल निर्यात रणनीति को और मजबूत करने की ठोस योजना बना ली है. इस टैरिफ से भारत के 48 अरब डॉलर से अधिक के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, जिसमें टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण, चमड़ा, जूते, रसायन और मशीनरी जैसे क्षेत्र शामिल हैं. लेकिन भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदलने की रणनीति तैयार कर ली है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश को अपनी नीतियों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दे सकता है. ऐसे में उसने एक शानदार योजना बनाई है.
भारत अब 40 देशों में विशेषआउटरीचकार्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जिसमें यूके, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, कनाडा, मैक्सिको, रूस, तुर्की, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन 40 देशों में भारत लक्षित रणनीति अपनाएगा, ताकि वह गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और इनोवेटिव टेक्सटाइल उत्पादों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सके. भारत वर्तमान में 220 से अधिक देशों को निर्यात करता है, लेकिन इन 40 देशों को सबसे खास माना जा रहा है. ये देश वैश्विक स्तर पर 590 अरब डॉलर से अधिक के टेक्सटाइल और परिधान आयात करते हैं, जिसमें भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 5-6 प्रतिशत है.
इस हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए भारत सरकार और निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसी) सक्रिय रूप से काम करेंगे. 2024-25 में भारत का टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र करीब 179 अरब डॉलर है, जिसमें 142 अरब डॉलर का घरेलू बाजार और 37 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है. वैश्विक टेक्सटाइल और परिधान आयात बाजार करीब 800 अरब डॉलर का है, जिसमें भारत 4.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ छठा सबसे बड़ा निर्यातक है.
अमेरिका के टैरिफ से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद भारत ने निर्यात को डायवर्स की रणनीति पर जोर दिया है. अधिकारी ने बताया कि ईपीसी इस रणनीति का रीढ़ होगा, जो बाजारों का मानचित्रण करेगा, उच्च मांग वाले उत्पादों की पहचान करेगा और सूरत, पानीपत, तिरुपुर और भदोही जैसे उत्पादन केंद्रों को नए अवसरों से जोड़ेगा.

भारत इन 40 देशों में पारंपरिक और उभरते दोनों बाजारों पर ध्यान देगा. मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और इन देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं भारतीय निर्यात को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति न केवल अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित भी करेगी. अमेरिकी अधिकारियों को भी भारत की इस त्वरित और रणनीतिक प्रतिक्रिया से आश्चर्य हुआ है. भारत की इस योजना से न केवल उसकी आर्थिक लचीलापन का पता चलता है, बल्कि यह भी संदेश जाता है कि वह वैश्विक व्यापार की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

दीदी के लिए भी हेलमेट है न…वोटर अधिकार यात्रा में बहन प्रियंका के ‘बॉडीगार्ड’ बने राहुल गांधी, साथ रहे तेजस्‍वी

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पूरा विपक्ष इन दिनों वोट चोरी का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और सरकार पर हमलावर है. बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चलाए गए SIR अभियान का व्‍यापक पैमाने पर विरोध हो रहा है. वोटर संशोधन की इस प्रक्रिया में घालमेल के आरोप लगाए जा रहे हैं. बिहार में विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा और भी गरमा गया है. तेजस्‍वी यादव और राहुल गांधी की अगुआई में प्रदेश में पूरा विपक्ष वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है. इस यात्रा में कांग्रेस की दिग्‍गज नेता और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी भी शामिल हुईं. राहुल गांधी ने इस दौरान बुलेट बाइक की सवारी भी की. उन्‍होंने अपने साथ प्रियंका को भी बुलेट पर पीछे बिठाया. इस दौरान भाई राहुल गांधी की अपनी दीदी प्रियंका के लिए स्‍वाभाविक सुरक्षा चिंता दिखी. अब उनका यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

दरअसल, बिहार में चल रहे वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बुलेट की सवारी की. उन्‍होंने प्रियंका गांधी को अपने साथ बिठाकर बुलेट की सवारी भी कराई. जब राहुल गांधी बहन प्रियंका को बुलेट पर बिठाने की तैयारी कर रहे थे तो हेलमेट की तलाश होने लगी. राहुल गांधी को अपना हेलमेट मिल गया तो उन्‍होंने देने वाले से पूछा कि दीदी के लिए हेलमेट है न? इसके बाद प्र‍ियंका के लिए भी तत्‍काल हेलमेट मंगाया गया. ट्रैफिक रूल्‍स के अनुसार बिना हेलमेट के बाइक की सवारी नहीं जा सकती है. प्रियंका गांधी जब बुलेट पर सवार हुईं तो उन्‍होंने राहुल गांधी के कंधे को पकड़ा. इसपर राहुल गांधी ने उन्‍हें कहा कि होल्‍ड माई वेस्‍ट मतलब मेरी कमर को ठीक से पकड़ लें, ताकि किसी तरह की दिक्‍कत न हो. इस दौरान तेजस्‍वी यादव उनके साथ साये की तरह बुलेट से चलते रहे.

सीएम स्‍टालिन भी हुए शामिल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी इस यात्रा में शामिल हुए. मुजफ्फरपुर के गयाघाट विधानसभा क्षेत्र के जारंग स्कूल परिसर में जनसभा को संबोधित किया. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने 24 अगस्त को पूर्णिया जिले के अररिया में भी यात्रा के दौरान मोटरसाइकिल चलाई थी. राहुल गांधी ने मंगलवार को दरभंगा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि लोगों को संविधान को बचाने के लिए अपने मताधिकार की रक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ने भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) और निर्वाचन आयोग की पोल खोल दी है, इसलिए लोग भाजपा के नेताओं को ‘वोट चोर’ कह रहे हैं.’ उन्‍होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नेता चुनाव आयोग के जरिए ‘वोट चोरी’ करा रहे हैं. लोगों को अपने मताधिकार और संविधान की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए.’

सीएम स्‍टालिन भी हुए शामिल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी इस यात्रा में शामिल हुए. मुजफ्फरपुर के गयाघाट विधानसभा क्षेत्र के जारंग स्कूल परिसर में जनसभा को संबोधित किया. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने 24 अगस्त को पूर्णिया जिले के अररिया में भी यात्रा के दौरान मोटरसाइकिल चलाई थी. राहुल गांधी ने मंगलवार को दरभंगा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि लोगों को संविधान को बचाने के लिए अपने मताधिकार की रक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ने भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) और निर्वाचन आयोग की पोल खोल दी है, इसलिए लोग भाजपा के नेताओं को ‘वोट चोर’ कह रहे हैं.’ उन्‍होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नेता चुनाव आयोग के जरिए ‘वोट चोरी’ करा रहे हैं. लोगों को अपने मताधिकार और संविधान की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए.’

फाइटर जेट, मिसाइल, ड्रोन…सब हो जाएंगे बेकार, भारत ने आसमान में रच दिया चक्रव्‍यूह, F-35 बस रह जाएगा परिंदा

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भारत ने देसी एयर डिफेंस सिस्‍टम को डेवलप करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा लिया है. देसी वायु रक्षा प्रणाली फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को तबाह करने में सक्षम है. आने वाले समय में इस ‘सुदर्शन चक्र’ के इस तरह कि डेवलप किया जाएगा कि F-35 जैसे जेट भी महज परिंदा बनकर रह जाएंगे. इस पूरे सिस्‍टम को तीन लेयर में तैयार किया गया है, ताकि यदि किसी एक चक्र से दुश्‍मनों का वार बच भी जाए तो दूसरे और तीसरे लेयर में वह फंस कर रह जाए.

दरअसल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 23 अगस्त को ओडिशा तट से Integrated Air Defence Weapon System (IADWS) का सफलतापूर्वक पहला परीक्षण किया था. यह भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड है. यह शील्‍ड मिसाइलों, फाइटर जेट्स और ड्रोन जैसे हवाई खतरों को एक साथ निष्क्रिय करने में सक्षम है. टेस्ट डेमो में IADWS ने एक ही समय में तीन टारगेट (दो हाई-स्पीड UAVs और एक मल्टीकॉप्टर ड्रोन) को अलग-अलग ऊंचाइयों और रेंज पर मार गिराया. यह भारत की मल्‍टीलेयर वायु-रक्षा क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है.

तीन लेयर का सुरक्षा चक्र

यह प्रणाली तीन प्रमुख स्वदेशी तकनीकों को इंटीग्रेट करती है.
25-30 किमी रेंज और 10 किमी ऊंचाई तक टारगेट हिट करने में सक्षम. 8×8 मोबाइल व्हीकल्स पर माउंटेड, यह फायर-ऑन-द-मूव क्षमता देता है.
VSHORADS (Very Short Range Air Defence System): लो-एल्टीट्यूड खतरों को टैकल करने वाला पोर्टेबल और फील्ड-डिप्लॉयबल सिस्टम.

Directed Energy Weapon (DEW): 30 किलोवॉट लेजर जो 3.5 किमी तक ड्रोन, हेलिकॉप्टर और मिसाइल को ध्वस्त कर सकता है.
ये सभी एक सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से नियंत्रित होते हैं, जिसे DRDL ने विकसित किया है.

ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

यह सफलता मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में अहम मानी जा रही है, जब भारतीय रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को निष्क्रिय किया था. उसी ऑपरेशन ने स्वदेशी एयर शील्ड की तात्कालिक जरूरत को उजागर किया.

स्टार वॉर टेक्नोलॉजी

रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के पास पहले से ही इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जो अमेरिकी एयर पावर को एक निश्चित दूरी पर रोकते हैं. IADWS उसी रणनीति का भारतीय संस्करण है, जो विशेष रूप से क्षेत्रीय खतरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने कहा, ‘यह सिर्फ शुरुआत है. हम हाई-एनर्जी माइक्रोवेव्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स जैसी तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं, जो हमें स्टार वॉर्स जैसी क्षमता देंगे.’

इंजन की कमी

यह उपलब्धि भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Indigenisation) की दिशा में बड़ी छलांग है. हालांकि, देश फाइटर जेट इंजन टेक्‍नोलॉजी में भारत अब भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है. कावेरी इंजन पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च के बावजूद सफलता नहीं मिली. तेजस और AMCA जैसे प्रोजेक्ट्स आज भी अमेरिकी, फ्रांसीसी और रूसी इंजनों पर टिके हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से आह्वान किया था कि देश को स्वदेशी जेट इंजन विकसित करना होगा. मिसाइल और रडार में प्रगति के बावजूद यह कमी भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनी हुई है.

बिहार में घुसे जैश के 3 आतंकी कौन? नेपाल के रास्ते ही क्यों आए, क्या एंट्री है बहुत आसान

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बिहार में चुनाव से पहले खलबली मच गई है. बिहार में तीन आतंकियों की एंट्री हो चुकी है. नेपाल के रास्ते जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी बिहार में घुसे हैं. बिहार पुलिस ने इसे लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया है. पुलिस ने आतंकियों की फोटो और कुंडली भी जारी की है. आतंकियों की एंट्री से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप है. पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की एंट्री ऐसे वक्त में हुई है, जब बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज है. खुद राहुल गांधी यात्रा कर रहे हैं. चलिए जानते हैं कि बिहार में घुसे ये तीनों आतंकी कौन-कौन हैं और नेपाल के रास्ते ही ये क्यों घुसे हैं?

बिहार पुलिस की मानें तो ये तीनों आतंकी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं. ये तीन आतंकी नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे हैं. इनकी पहचान हसनैन अली, आदिल हुसैन, और मोहम्मद उस्मान के रूप में हुई है. हसनैन अली रावलपिंडी का, आदिल हुसैन उमरकोट का और मोहम्मद उस्मान बहावलपुर का रहने वाला है. यहां बताना जरूरी है कि बहावलपुर जैश का गढ़ है. ये आतंकी अगस्त के दूसरे हफ्ते में काठमांडू पहुंचे और तीसरे हफ्ते में बिहार में दाखिल हुए. पुलिस ने इनके नाम, तस्वीरें और पासपोर्ट विवरण जारी कर हाई अलर्ट घोषित किया है.
नेपाल के रास्ते घुसपैठ क्यों?
भारत और नेपाल के बीच करीब 1700 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है. इसमें बिहार के सात जिले सीधे नेपाल से सटे हैं. ये जिले हैं सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और पश्चिम चंपारण. सीमा खुली होने के कारण दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के आवाजाही कर सकते हैं. जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन इस खुली सीमा का फायदा उठाते हैं. ये फेक आईडी और पासपोर्ट बनवा कर घुसपैठ कर लेते हैं.
बिहार में कब आए आतंकी?

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, ये आतंकी अगस्त के दूसरे हफ्ते में काठमांडू पहुंचे और तीसरे हफ्ते में बिहार में दाखिल हुए. अक्सर नेपाल में कमजोर सुरक्षा जांच और स्थानीय सहायता से आतंकियों को भारत में प्रवेश करने में आसानी होती है. बिहार के सीमावर्ती इलाकों में घने जंगल, नदियां और ग्रामीण क्षेत्र होने से निगरानी में कठिनाई आती है. बिहार के 729 किलोमीटर लंबे बॉर्डर पर एसएसबी यानी सशस्त्र सीमा बल और स्थानीय पुलिस तैनात हैं. मगर विशाल क्षेत्र और संसाधनों की कमी के कारण पूरी निगरानी मुश्किल है. यही वजह है कि आतंकी नकली पासपोर्ट या स्थानीय तस्करों की मदद से आसानी से सीमा पार कर लेते हैं. दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में पहरा कड़ा है.
नेपाल से मिली मदद?

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि नेपाल में आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल सक्रिय हैं. यही लोग घुसपैठ में सहायता करते हैं. पिछले छह महीनों में बिहार-नेपाल सीमा से 41 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि यह रास्ता घुसपैठ के लिए पसंदीदा है. मई 2025 में भी 20 दिनों में 18 संदिग्धों की घुसपैठ की खबर आई थी. बिहार में विधानसभा चुनाव और राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जैसे आयोजनों के कारण आतंकी गतिविधियों का खतरा बढ़ गया है. बहरहाल, पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को सतर्क कर दिया है. खासकर सीमावर्ती जिले सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, अररिया, किशनगंज और सुपौल में चौकसी बढ़ा दी गई है.
क्या है आतंकियों के नापाक इरादे?

अब सवाल है कि आखिर ये आतंकी क्या करने आए हैं? बताया जा रहा है कि आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं. बीते दिनों सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में अमित शाह ने मंदिर की आधारशीला रखी थी. वहीं, अभी बिहार में राहुल गांधी भी वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं. ऐसे में आतंकियों के नापाक इरादों को समझने में जांच एजेंसियां जुटी हैं. बिहार में रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जांच तेज कर दी है. ड्रोन और सैटेलाइट से आतंकियों की तलाश की जा रही है.

आज नीरज चोपड़ा गोल्ड पर लगाएंगे निशाना, कहां देखें मुकाबला

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ज्यूरिख के लेट्जिग्रंड स्टेडियम में गुरुवार रात (11:15 PM IST के बाद) एक हाई-वोल्टेज मुकाबला होगा. भारत के ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा डायमंड लीग फाइनल के लिए तैयार हैं. भाला फेंक के लिए परिस्थितियां थोड़ी मुश्किल होंगी. मौसम को लेकर जो पूर्वानुमान है उसके मुताबिक हल्की बारिश और तेज हवा की भविष्यवाणी की गई है.

चोपड़ा का ज्यूरिख कनेक्शन

नीरज चोपड़ा के लिए ज्यूरिख में खेलना अब तक शानदार रहा है. तीन साल पहले उन्होंने इसी स्थान पर डायमंड लीग फाइनल जीता था और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने थे. पिछले दो एडिशन में वह उपविजेता रहे. पिछले साल ब्रुसेल्स में ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स से एक सेंटीमीटर के मामूली अंतर से चूक गए थे. आज रात दुनिया के सात टॉप भाला फेंकने वाले खिलाड़ी मैदान में होंगे.
नीरज चोपड़ा को यहां कड़ी टक्कर मिलने वाली है. सबसे बड़ा खतरा डिफेंडिंग चैंपियन पीटर्स ही होंगे जो खुद को बड़े मंच पर कई बार साबित हो चुके. जर्मनी के जूलियन वेबर भी नीरज चोपड़ा के लिए कड़ी चुनौती पेश करेंगे. 30 साल के यूरोपीय चैंपियन इस सीजन में उनके सबसे लगातार प्रतिद्वंद्वी रहे हैं. वेबर पदक के दावेदार है.

इस बार कोई भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं

पाकिस्तान के अरशद नदीम जो पेरिस ओलंपिक से चोपड़ा के विरोधी रहे वो सर्जरी के कारण नहीं उतरेंगे. उनकी गैरमौजूदगी की वजह से भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं हो पाएगा. हालांकि वेबर की फॉर्म ज्यूरिख में ड्रामा की कमी नहीं होने देगी.

नीरज चोपड़ा का लक्ष्य 91 मीटर

इस सीजन दोहा में नीरज चोपड़ा और वेबर दोनों ने पहली बार 90 मीटर का निशान पार किया. चोपड़ा ने 90.23 मीटर का करियर बेस्ट प्रदर्शन कर नेशनल रिकॉर्ड बनाया था. वहीं वेबर ने अंतिम राउंड में 91.06 मीटर का जवाब दिया. पिछले सप्ताह वेबर ने ब्रुसेल्स में 89.65 मीटर की थ्रो के साथ अपनी निरंतरता को मजबूत किया

ज्यूरिख डायमंड लीग 2025 में जेवलिन फाइनल कब और कहां होगा?

ज्यूरिख डायमंड लीग 2025 में जेवलिन फाइनल लेट्जिग्रंड स्टेडियम, ज्यूरिख, स्विट्ज़रलैंड में होगा. इस इवेंट की शुरुआत का समय भारतीय समयानुसार रात 11:15 बजे है.

डायमंड लीग फाइनल में नीरज चोपड़ा को कहां देख सकते हैं?

डायमंड लीग फाइनल का लाइवस्ट्रीम डायमंड लीग के आधिकारिक यूट्यूब पेज पर किया जाएगा, लेकिन जेवलिन फाइनल की कवरेज बीच-बीच में होगी.

“भिंड में भाजपा विधायक और कलेक्टर आमने-सामने, धरने के बीच हुई तीखी नोकझोंक”

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“भिंड में भाजपा विधायक और कलेक्टर आमने-सामने, धरने के बीच हुई तीखी नोकझोंक”

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में बुधवार को एक अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिली, जब भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि विधायक ने गुस्से में कलेक्टर की ओर हाथ तक उठा लिया।

मामला जिले में खाद संकट और माइनिंग प्रभार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा बुधवार को कलेक्टर के बंगले के बाहर धरने पर बैठ गए। विधायक की मुख्य मांग थी कि जिले में चल रहे खाद संकट का समाधान किया जाए और आरआई से माइनिंग का प्रभार हटाया जाए। इसी दौरान कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव वहां पहुंचे और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक कुशवाहा इतने गुस्से में थे कि उन्होंने कलेक्टर को घूंसा मारने के लिए हाथ तक उठा लिया। हालांकि, मौजूद लोगों ने उन्हें रोक दिया और स्थिति बिगड़ने से बचा ली। बहस के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में रेत चोरी नहीं होने दी जाएगी। इस पर भड़कते हुए विधायक ने कलेक्टर को ही “रेत का सबसे बड़ा चोर” कह दिया।

धरना स्थल पर कुछ देर तक हंगामा मचा रहा। बाद में स्थिति को संभालने के लिए भाजपा नेताओं ने हस्तक्षेप किया। बताया जा रहा है कि इस बीच विधायक ने जिले के प्रभारी मंत्री प्रह्लाद पटेल से फोन पर बात की। मंत्री पटेल ने विधायक को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके बाद विधायक ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

इस घटना ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक ओर भाजपा विधायक का यह आक्रामक रुख चर्चा में है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सार्वजनिक मंच पर हुई इस तरह की तीखी झड़प ने सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने इसे शासन-प्रशासन के बीच समन्वय की कमी करार दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि खाद संकट और अवैध खनन जैसे मुद्दों पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच सहयोग आवश्यक है, लेकिन जब दोनों ही पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं तो आम जनता का भरोसा डगमगाता है। किसान संगठनों ने भी खाद संकट का समाधान जल्द से जल्द निकालने की मांग की है।

फिलहाल जिले में माहौल गरम है और विधायक व कलेक्टर की यह भिड़ंत लोगों की जुबान पर बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद स्थिति कैसे संभलती है और क्या वाकई विधायक की मांगों पर अमल होता है या नहीं।

“टैरिफ़ विवाद में भारत का सख़्त रुख़, पीएम मोदी ने ट्रंप को दिखाया आईना- आत्मनिर्भर भारत बना रणनीति का मंत्र”

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“टैरिफ़ विवाद में भारत का सख़्त रुख़, पीएम मोदी ने ट्रंप को दिखाया आईना- आत्मनिर्भर भारत बना रणनीति का मंत्र”

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ युद्ध तेज हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक का भारी टैरिफ लगा दिया है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत झुकेगा नहीं।

मोदी सरकार ने रूस से तेल आयात जारी रखने और स्वदेशी व आत्मनिर्भरता पर जोर देकर अमेरिका की रणनीति को करारा जवाब दिया है।

अमेरिका का बड़ा दांव, भारत का सख्त जवाब 27 अगस्त से लागू हुए इन टैरिफ में पहले से मौजूद 25% शुल्क के ऊपर अतिरिक्त 25% लगाया गया है। अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल खरीदना उसके प्रतिबंधों के खिलाफ है, लेकिन भारत ने इसे ‘अनुचित’ और ‘दंडात्मक’ कदम बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को भारत से होने वाला निर्यात 86.5 अरब डॉलर (2024-25) का था, जो भारत की जीडीपी का सिर्फ 2% है। लेकिन श्रम-प्रधान सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा और सीफूड सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

मोदी का संदेश: ‘राष्ट्रीय हित पहले’ पीएम मोदी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में साफ कहा था—’कठिनाइयों के समय राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। दुनिया अपने-अपने एजेंडे में व्यस्त है। भारत किसानों और कृषि क्षेत्र की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है।’

भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 18% है। यही वजह है कि सरकार का पहला फोकस किसानों और ऊर्जा सुरक्षा पर है।

ऊर्जा सुरक्षा: रूस से जारी रहेगा तेल आयात विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि भारत की ऊर्जा खरीद बाजार की उपलब्धता और वैश्विक हालात पर आधारित है। 2024-25 में भारत ने रूस से 8.8 करोड़ मीट्रिक टन कच्चा तेल खरीदा, जो कुल आयात का 36% है।

अगर अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह लागू होता है तो भारत का निर्यात 40-55% तक गिर सकता है, जिससे जीडीपी वृद्धि दर 6% से नीचे आ सकती है। हालांकि सरकार को भरोसा है कि 7-8% की मजबूत विकास दर से भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर बढ़ता रहेगा। ट्रंप-मोदी टकराव और कूटनीतिक तनाव जर्मन अखबार FAZ की रिपोर्ट ने सनसनी फैलाई है। दावा किया गया है कि हाल ही में ट्रंप ने मोदी को चार बार कॉल किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया। वजह— ट्रंप द्वारा भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहना और लगातार धमकी भरी रणनीति अपनाना।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा रद्द हो चुकी है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का इंडो-पैसिफिक गठबंधन कमजोर हो रहा है और भारत चीन-रूस के साथ नए समीकरण बना रहा है।

SCO सम्मेलन: भारत-चीन-रूस की तिकड़ी पीएम मोदी जल्द ही चीन के तियानजिन में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-चीन-रूस की यह तिकड़ी अमेरिका की रणनीति को ‘चेकमेट’ कर सकती है।

RSS का समर्थन और स्वदेशी का आह्वान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी मोदी की रणनीति का समर्थन किया। उन्होंने शताब्दी समारोह में कहा—’आत्मनिर्भरता सभी समस्याओं का समाधान है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए।’

RSS हमेशा से स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर जोर देती रही है और अब यह अमेरिकी दबाव के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन रहा है।

वैश्विक व्यापार और भारत की नई राह भारत अमेरिका से संवाद के रास्ते खुले रखे हुए है, लेकिन अब वह रिश्तों को डायवर्सिफाई कर रहा है। यूके के साथ सफल  ट्रेड डील यूरोपीय संघ के साथ चल रही बातचीत 100 देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्यात निर्यातकों के लिए ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी पैकेज पर विचार यह सब दर्शाता है कि भारत सिर्फ डिफेंसिव नहीं बल्कि आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

l-अमेरिका का ‘सेल्फ गोल’? विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका के लिए उल्टा असर डाल सकता है। भारत, चीन के खिलाफ अमेरिका का अहम साझेदार था। ट्रंप की नीति से भारत और रूस नज़दीक आ रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा— ‘यूरोप और चीन रूस से खरीद रहे हैं, लेकिन सजा सिर्फ भारत को दी जा रही है।’

यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जाएगी।

निष्कर्ष अमेरिका-भारत टैरिफ युद्ध केवल व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि भूराजनीतिक समीकरणों को भी बदल रहा है। मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी को आधार बनाकर संदेश दिया है कि भारत दबाव में नहीं झुकेगा। आने वाले महीनों में यह विवाद तय करेगा कि क्या भारत अमेरिका का भरोसेमंद सहयोगी बना रहेगा या रूस-चीन के साथ नए सुपर ग्रुप की राह पर बढ़ेगा।

“ट्रंप को भारी पड़ेगा 50% टैरिफ, अमेरिका में आने वाला है आर्थिक भूचाल; रिपोर्ट में आ गए आंकड़े”

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“ट्रंप को भारी पड़ेगा 50% टैरिफ, अमेरिका में आने वाला है आर्थिक भूचाल; रिपोर्ट में आ गए आंकड़े”

Donald Trump Tariffs on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जो कि 27 अगस्त से लागू हो गया है। अब भारतीय उत्पादों पर अब कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया।

”अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बेस टैरिफ के बाद एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से पैनाल्टी के तौर पर लगाया गया है। हालांकि, ये भारत नहीं अमेरिकी के लिए भी कभी घातक साबित होने वाला है, ऐसा करके ट्रंप खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लिए हैं।”

”भारतीय स्टेट बैंक (SBI)की रिपोर्ट के अनुसार, भारत पर लगाए गए उच्च टैरिफ का असर उल्टा अमेरिका पर पड़ सकता है और उसकी अर्थव्यवस्था में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा भारतीय उत्पादों पर हाई टैरिफ से महंगाई बढ़ेगी तो वहीं, दूसरी ओर ग्रोथ को बड़ा झटका लग सकता है।”

”नए टैरिफ अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ में रुकावट न्यूज एजेंसी एएनआई ने एसबीआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि नए टैरिफ के कारण अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ गिरकर 40-50 बेसिस प्वाइंट्स (bps) पर आ सकता है। इसके साथ ही कमजोर अमेरिकी डॉलर और लागत कीमतों में में बढ़ोतरी की वजह से महंगाई भी जबरदस्त बढ़ने वाली है।”

”अमेरिका में कुछ ऐसे सेक्टर हैं जो पूरी तरह से इंपोर्ट पर निर्भर हैं, जैसे फार्मास्युटिकल, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, वहां पर इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।”

”भारतीय स्टेट बैंक ने अपने रिपोर्ट में यह भी बताया है कि यूएस फेडरल रिजर्व का 2026 में अनुमानित लक्ष्य 2 प्रतिशत है, लेकिन यह रेट रेट उससे काफी अधिक रहने वाली है। इसकी मुख्य वजह टैरिफ का असर है।”

इस सेक्टर पर टैरिफ का बुरा असर आपको बताते चलें कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगभग 45 अरब डॉलर के भारतीय उत्पादों पर हाई टैरिफ लगाया है।

”इससे श्रमिकों वाले सेक्टर जैसे- टेक्सटाइल, जेम्स और ज्वेलर्स इत्यादि पर ज्यादा मार पड़ेगा। हालांकि, सबसे राहत की बात यह है कि फॉर्मास्युटिक्ल, स्टील और स्मार्टफोन्स को इस टैरिफ के दायरे में नहीं रखा गया है। यह पूरी तरह टैरिफ से मुक्त है।”

‘भारत-अमेरिका का घट सकता है कारोबार एसबीआई ने अपने रिपोर्ट में इस बात की चिंता जताया है कि अगर 50 प्रतिशत का यह टैरिफ भारत के 44 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर लागू रहता है तो फिर दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार में गिरावट आ सकती है।”

”हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ट्रेड वार्ता के जरिए नई दिल्ली और वाशिंगटन में विश्वास बहाल किया जा सकता और अमेरिका  के साथ निर्यात को बढ़ाया जा सकता है।”

”CG: उद्योग मंत्री श्री देवांगन के विशेष प्रयास से कोरबा में एल्युमिनियम पार्क का मार्ग प्रशस्त, ज़मीन हस्तांतरित हेतु जनरेशन कंपनी की बोर्ड से मिली हरी झंडी”

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”CG: उद्योग मंत्री श्री देवांगन के विशेष प्रयास से कोरबा में एल्युमिनियम पार्क का मार्ग प्रशस्त, ज़मीन हस्तांतरित हेतु जनरेशन कंपनी की बोर्ड से मिली हरी झंडी”

”कोरबा ताप विद्युत गृह की 105 हेक्टेयर ज़मीन उद्योग विभाग को जल्द होगी हस्तांतरित”

”उद्योग मंत्री का प्रयास रंग लाया, जमीन मिलते ही उद्योग विभाग पार्क बनाने शुरू करेगा तैयारी”

कोरबा को व्यावसायिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के दिशा में नगर विधायक कोरबा वाणिज्य, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम और आबकारी, श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से  बहुप्रतीक्षित एल्युमिनियम पार्क का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उत्पादन कंपनी के बोर्ड की हुई बैठक में पूर्व सयंत्र के ज़मीन हस्तांतरित हेतु हरी झंडी मिल गई है।

कोहड़िया स्थित कोरबा ताप विद्युत गृह की 105 हेक्टेयर ज़मीन उद्योग विभाग को अब जल्द  हस्तांतरित की जाएगी। इसके लिए बोर्ड ने प्रबंध निदेशक को अधिकृत किया है। साथ ही जिला प्रशासन, नजुल, राजस्व विभाग को ज़मीन का सत्यापन एवं सीमांकन कर उद्योग विभाग को हस्ताँतरित करने के लिए ऊर्जा विभाग द्वारा नजूल अधिकारी को पत्र जारी किया गया है।

कोरबा ज़िले में एल्यूमिनियम पार्क निर्माण हेतु उद्योग मंत्री के प्रस्ताव पर  वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये उद्योग विभाग के बजट प्रस्ताव में 5 करोड़ रुपए का घोषणा की गई थी। इसके बाद उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने ही उत्पादन कम्पनी के बंद पड़ी प्लांट की ज़मीन में एल्यूमिनियम पार्क हेतु प्रस्ताव ऊर्जा विभाग और उद्योग विभाग को दिया था।

उद्योग मंत्री के सशक्त प्रयास का अब लाभ अब कोरबा को: कोरबा के विधायक और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के सशक्त प्रयास का लाभ कोरबा जिले को मिलने जा रहा है। जिला चेम्बर ऑफ कॉमर्स, उद्योग संघ  द्वारा वर्षों से मांग की जा रही थी। अब एल्यूमिनियम पार्क बनने से जहा एल्यूमिनियम सेक्टर के छोटे बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

एल्यूमिनियम सामान की बढ़ रही डिमांड: एल्यूमिनियम की खपत विद्युत संयंत्रों के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। आफिस, बिल्डिंग के निर्माण में भी उपयोग हो रहा है। कांच के दरवाजे व खिड़कियों के लिए एल्यूमिनियम का ही उपयोग होता है। रेलवे भी एल्यूमिनियम फैब्रिकेशन व इंजीनियरिंग पार्ट से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल करता है। पैकेजिंग, इलेक्ट्रिकल सामान, वाहनों की बॉडी स्ट्रक्चर, व्हील्स, प्लेन व प्रिंटेड फाइल्स, फर्मा व बर्तन प्रोडक्ट तैयार करने में एल्यूमिनियम का उपयोग किया जाता है। इन सेक्टर के उद्योग अधिक संख्या में लग सकेंगे।

एक ही जगह पर कई उत्पाद” बालको के स्मेल्टर प्लांट में एल्यूमिना तैयार होता है। एल्यूमिनियम पार्क के बन जाने से एल्यूमिनियम से तैयार होने वाले उत्पाद कोरबा में ही बन सकेंगे। एक ही जगह पर कई प्रकार के उत्पाद बनाए जा सकेंगे। इसके लिए स्थानीय और बाहरी उद्योगपति कोरबा में संयंत्र लगाने के लिए रुचि लेंगे।