डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ तांडव के आगे नहीं झुकेगा भारत, कर ली प्लानिंग
दीदी के लिए भी हेलमेट है न…वोटर अधिकार यात्रा में बहन प्रियंका के ‘बॉडीगार्ड’ बने राहुल गांधी, साथ रहे तेजस्वी
पूरा विपक्ष इन दिनों वोट चोरी का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और सरकार पर हमलावर है. बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चलाए गए SIR अभियान का व्यापक पैमाने पर विरोध हो रहा है. वोटर संशोधन की इस प्रक्रिया में घालमेल के आरोप लगाए जा रहे हैं. बिहार में विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा और भी गरमा गया है. तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की अगुआई में प्रदेश में पूरा विपक्ष वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है. इस यात्रा में कांग्रेस की दिग्गज नेता और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी भी शामिल हुईं. राहुल गांधी ने इस दौरान बुलेट बाइक की सवारी भी की. उन्होंने अपने साथ प्रियंका को भी बुलेट पर पीछे बिठाया. इस दौरान भाई राहुल गांधी की अपनी दीदी प्रियंका के लिए स्वाभाविक सुरक्षा चिंता दिखी. अब उनका यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.
सीएम स्टालिन भी हुए शामिल
सीएम स्टालिन भी हुए शामिल
फाइटर जेट, मिसाइल, ड्रोन…सब हो जाएंगे बेकार, भारत ने आसमान में रच दिया चक्रव्यूह, F-35 बस रह जाएगा परिंदा
तीन लेयर का सुरक्षा चक्र
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
स्टार वॉर टेक्नोलॉजी
इंजन की कमी
बिहार में घुसे जैश के 3 आतंकी कौन? नेपाल के रास्ते ही क्यों आए, क्या एंट्री है बहुत आसान
आज नीरज चोपड़ा गोल्ड पर लगाएंगे निशाना, कहां देखें मुकाबला
ज्यूरिख के लेट्जिग्रंड स्टेडियम में गुरुवार रात (11:15 PM IST के बाद) एक हाई-वोल्टेज मुकाबला होगा. भारत के ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा डायमंड लीग फाइनल के लिए तैयार हैं. भाला फेंक के लिए परिस्थितियां थोड़ी मुश्किल होंगी. मौसम को लेकर जो पूर्वानुमान है उसके मुताबिक हल्की बारिश और तेज हवा की भविष्यवाणी की गई है.
चोपड़ा का ज्यूरिख कनेक्शन
इस बार कोई भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं
पाकिस्तान के अरशद नदीम जो पेरिस ओलंपिक से चोपड़ा के विरोधी रहे वो सर्जरी के कारण नहीं उतरेंगे. उनकी गैरमौजूदगी की वजह से भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं हो पाएगा. हालांकि वेबर की फॉर्म ज्यूरिख में ड्रामा की कमी नहीं होने देगी.
नीरज चोपड़ा का लक्ष्य 91 मीटर
ज्यूरिख डायमंड लीग 2025 में जेवलिन फाइनल कब और कहां होगा?
डायमंड लीग फाइनल में नीरज चोपड़ा को कहां देख सकते हैं?
“भिंड में भाजपा विधायक और कलेक्टर आमने-सामने, धरने के बीच हुई तीखी नोकझोंक”
“भिंड में भाजपा विधायक और कलेक्टर आमने-सामने, धरने के बीच हुई तीखी नोकझोंक”
मध्यप्रदेश के भिंड जिले में बुधवार को एक अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिली, जब भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि विधायक ने गुस्से में कलेक्टर की ओर हाथ तक उठा लिया।
मामला जिले में खाद संकट और माइनिंग प्रभार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा बुधवार को कलेक्टर के बंगले के बाहर धरने पर बैठ गए। विधायक की मुख्य मांग थी कि जिले में चल रहे खाद संकट का समाधान किया जाए और आरआई से माइनिंग का प्रभार हटाया जाए। इसी दौरान कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव वहां पहुंचे और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक कुशवाहा इतने गुस्से में थे कि उन्होंने कलेक्टर को घूंसा मारने के लिए हाथ तक उठा लिया। हालांकि, मौजूद लोगों ने उन्हें रोक दिया और स्थिति बिगड़ने से बचा ली। बहस के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में रेत चोरी नहीं होने दी जाएगी। इस पर भड़कते हुए विधायक ने कलेक्टर को ही “रेत का सबसे बड़ा चोर” कह दिया।
धरना स्थल पर कुछ देर तक हंगामा मचा रहा। बाद में स्थिति को संभालने के लिए भाजपा नेताओं ने हस्तक्षेप किया। बताया जा रहा है कि इस बीच विधायक ने जिले के प्रभारी मंत्री प्रह्लाद पटेल से फोन पर बात की। मंत्री पटेल ने विधायक को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके बाद विधायक ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
इस घटना ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक ओर भाजपा विधायक का यह आक्रामक रुख चर्चा में है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सार्वजनिक मंच पर हुई इस तरह की तीखी झड़प ने सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने इसे शासन-प्रशासन के बीच समन्वय की कमी करार दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद संकट और अवैध खनन जैसे मुद्दों पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच सहयोग आवश्यक है, लेकिन जब दोनों ही पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं तो आम जनता का भरोसा डगमगाता है। किसान संगठनों ने भी खाद संकट का समाधान जल्द से जल्द निकालने की मांग की है।
फिलहाल जिले में माहौल गरम है और विधायक व कलेक्टर की यह भिड़ंत लोगों की जुबान पर बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद स्थिति कैसे संभलती है और क्या वाकई विधायक की मांगों पर अमल होता है या नहीं।
“टैरिफ़ विवाद में भारत का सख़्त रुख़, पीएम मोदी ने ट्रंप को दिखाया आईना- आत्मनिर्भर भारत बना रणनीति का मंत्र”
“टैरिफ़ विवाद में भारत का सख़्त रुख़, पीएम मोदी ने ट्रंप को दिखाया आईना- आत्मनिर्भर भारत बना रणनीति का मंत्र”
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ युद्ध तेज हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक का भारी टैरिफ लगा दिया है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत झुकेगा नहीं।
मोदी सरकार ने रूस से तेल आयात जारी रखने और स्वदेशी व आत्मनिर्भरता पर जोर देकर अमेरिका की रणनीति को करारा जवाब दिया है।
अमेरिका का बड़ा दांव, भारत का सख्त जवाब 27 अगस्त से लागू हुए इन टैरिफ में पहले से मौजूद 25% शुल्क के ऊपर अतिरिक्त 25% लगाया गया है। अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल खरीदना उसके प्रतिबंधों के खिलाफ है, लेकिन भारत ने इसे ‘अनुचित’ और ‘दंडात्मक’ कदम बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को भारत से होने वाला निर्यात 86.5 अरब डॉलर (2024-25) का था, जो भारत की जीडीपी का सिर्फ 2% है। लेकिन श्रम-प्रधान सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा और सीफूड सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
मोदी का संदेश: ‘राष्ट्रीय हित पहले’ पीएम मोदी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में साफ कहा था—’कठिनाइयों के समय राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। दुनिया अपने-अपने एजेंडे में व्यस्त है। भारत किसानों और कृषि क्षेत्र की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है।’
भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 18% है। यही वजह है कि सरकार का पहला फोकस किसानों और ऊर्जा सुरक्षा पर है।
ऊर्जा सुरक्षा: रूस से जारी रहेगा तेल आयात विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि भारत की ऊर्जा खरीद बाजार की उपलब्धता और वैश्विक हालात पर आधारित है। 2024-25 में भारत ने रूस से 8.8 करोड़ मीट्रिक टन कच्चा तेल खरीदा, जो कुल आयात का 36% है।
अगर अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह लागू होता है तो भारत का निर्यात 40-55% तक गिर सकता है, जिससे जीडीपी वृद्धि दर 6% से नीचे आ सकती है। हालांकि सरकार को भरोसा है कि 7-8% की मजबूत विकास दर से भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर बढ़ता रहेगा। ट्रंप-मोदी टकराव और कूटनीतिक तनाव जर्मन अखबार FAZ की रिपोर्ट ने सनसनी फैलाई है। दावा किया गया है कि हाल ही में ट्रंप ने मोदी को चार बार कॉल किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया। वजह— ट्रंप द्वारा भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहना और लगातार धमकी भरी रणनीति अपनाना।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा रद्द हो चुकी है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का इंडो-पैसिफिक गठबंधन कमजोर हो रहा है और भारत चीन-रूस के साथ नए समीकरण बना रहा है।
SCO सम्मेलन: भारत-चीन-रूस की तिकड़ी पीएम मोदी जल्द ही चीन के तियानजिन में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-चीन-रूस की यह तिकड़ी अमेरिका की रणनीति को ‘चेकमेट’ कर सकती है।
RSS का समर्थन और स्वदेशी का आह्वान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी मोदी की रणनीति का समर्थन किया। उन्होंने शताब्दी समारोह में कहा—’आत्मनिर्भरता सभी समस्याओं का समाधान है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए।’
RSS हमेशा से स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर जोर देती रही है और अब यह अमेरिकी दबाव के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन रहा है।
वैश्विक व्यापार और भारत की नई राह भारत अमेरिका से संवाद के रास्ते खुले रखे हुए है, लेकिन अब वह रिश्तों को डायवर्सिफाई कर रहा है। यूके के साथ सफल ट्रेड डील यूरोपीय संघ के साथ चल रही बातचीत 100 देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्यात निर्यातकों के लिए ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी पैकेज पर विचार यह सब दर्शाता है कि भारत सिर्फ डिफेंसिव नहीं बल्कि आक्रामक रणनीति अपना रहा है।
l-अमेरिका का ‘सेल्फ गोल’? विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका के लिए उल्टा असर डाल सकता है। भारत, चीन के खिलाफ अमेरिका का अहम साझेदार था। ट्रंप की नीति से भारत और रूस नज़दीक आ रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा— ‘यूरोप और चीन रूस से खरीद रहे हैं, लेकिन सजा सिर्फ भारत को दी जा रही है।’
यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जाएगी।
निष्कर्ष अमेरिका-भारत टैरिफ युद्ध केवल व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि भूराजनीतिक समीकरणों को भी बदल रहा है। मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी को आधार बनाकर संदेश दिया है कि भारत दबाव में नहीं झुकेगा। आने वाले महीनों में यह विवाद तय करेगा कि क्या भारत अमेरिका का भरोसेमंद सहयोगी बना रहेगा या रूस-चीन के साथ नए सुपर ग्रुप की राह पर बढ़ेगा।
“ट्रंप को भारी पड़ेगा 50% टैरिफ, अमेरिका में आने वाला है आर्थिक भूचाल; रिपोर्ट में आ गए आंकड़े”
“ट्रंप को भारी पड़ेगा 50% टैरिफ, अमेरिका में आने वाला है आर्थिक भूचाल; रिपोर्ट में आ गए आंकड़े”
Donald Trump Tariffs on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जो कि 27 अगस्त से लागू हो गया है। अब भारतीय उत्पादों पर अब कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया।
”अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बेस टैरिफ के बाद एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से पैनाल्टी के तौर पर लगाया गया है। हालांकि, ये भारत नहीं अमेरिकी के लिए भी कभी घातक साबित होने वाला है, ऐसा करके ट्रंप खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लिए हैं।”
”भारतीय स्टेट बैंक (SBI)की रिपोर्ट के अनुसार, भारत पर लगाए गए उच्च टैरिफ का असर उल्टा अमेरिका पर पड़ सकता है और उसकी अर्थव्यवस्था में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा भारतीय उत्पादों पर हाई टैरिफ से महंगाई बढ़ेगी तो वहीं, दूसरी ओर ग्रोथ को बड़ा झटका लग सकता है।”
”नए टैरिफ अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ में रुकावट न्यूज एजेंसी एएनआई ने एसबीआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि नए टैरिफ के कारण अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ गिरकर 40-50 बेसिस प्वाइंट्स (bps) पर आ सकता है। इसके साथ ही कमजोर अमेरिकी डॉलर और लागत कीमतों में में बढ़ोतरी की वजह से महंगाई भी जबरदस्त बढ़ने वाली है।”
”अमेरिका में कुछ ऐसे सेक्टर हैं जो पूरी तरह से इंपोर्ट पर निर्भर हैं, जैसे फार्मास्युटिकल, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, वहां पर इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।”
”भारतीय स्टेट बैंक ने अपने रिपोर्ट में यह भी बताया है कि यूएस फेडरल रिजर्व का 2026 में अनुमानित लक्ष्य 2 प्रतिशत है, लेकिन यह रेट रेट उससे काफी अधिक रहने वाली है। इसकी मुख्य वजह टैरिफ का असर है।”
इस सेक्टर पर टैरिफ का बुरा असर आपको बताते चलें कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगभग 45 अरब डॉलर के भारतीय उत्पादों पर हाई टैरिफ लगाया है।
”इससे श्रमिकों वाले सेक्टर जैसे- टेक्सटाइल, जेम्स और ज्वेलर्स इत्यादि पर ज्यादा मार पड़ेगा। हालांकि, सबसे राहत की बात यह है कि फॉर्मास्युटिक्ल, स्टील और स्मार्टफोन्स को इस टैरिफ के दायरे में नहीं रखा गया है। यह पूरी तरह टैरिफ से मुक्त है।”
‘भारत-अमेरिका का घट सकता है कारोबार एसबीआई ने अपने रिपोर्ट में इस बात की चिंता जताया है कि अगर 50 प्रतिशत का यह टैरिफ भारत के 44 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर लागू रहता है तो फिर दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार में गिरावट आ सकती है।”
”हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ट्रेड वार्ता के जरिए नई दिल्ली और वाशिंगटन में विश्वास बहाल किया जा सकता और अमेरिका के साथ निर्यात को बढ़ाया जा सकता है।”
”CG: उद्योग मंत्री श्री देवांगन के विशेष प्रयास से कोरबा में एल्युमिनियम पार्क का मार्ग प्रशस्त, ज़मीन हस्तांतरित हेतु जनरेशन कंपनी की बोर्ड से मिली हरी झंडी”
”CG: उद्योग मंत्री श्री देवांगन के विशेष प्रयास से कोरबा में एल्युमिनियम पार्क का मार्ग प्रशस्त, ज़मीन हस्तांतरित हेतु जनरेशन कंपनी की बोर्ड से मिली हरी झंडी”
”कोरबा ताप विद्युत गृह की 105 हेक्टेयर ज़मीन उद्योग विभाग को जल्द होगी हस्तांतरित”
”उद्योग मंत्री का प्रयास रंग लाया, जमीन मिलते ही उद्योग विभाग पार्क बनाने शुरू करेगा तैयारी”
कोरबा को व्यावसायिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के दिशा में नगर विधायक कोरबा वाणिज्य, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम और आबकारी, श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से बहुप्रतीक्षित एल्युमिनियम पार्क का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उत्पादन कंपनी के बोर्ड की हुई बैठक में पूर्व सयंत्र के ज़मीन हस्तांतरित हेतु हरी झंडी मिल गई है।
कोहड़िया स्थित कोरबा ताप विद्युत गृह की 105 हेक्टेयर ज़मीन उद्योग विभाग को अब जल्द हस्तांतरित की जाएगी। इसके लिए बोर्ड ने प्रबंध निदेशक को अधिकृत किया है। साथ ही जिला प्रशासन, नजुल, राजस्व विभाग को ज़मीन का सत्यापन एवं सीमांकन कर उद्योग विभाग को हस्ताँतरित करने के लिए ऊर्जा विभाग द्वारा नजूल अधिकारी को पत्र जारी किया गया है।
कोरबा ज़िले में एल्यूमिनियम पार्क निर्माण हेतु उद्योग मंत्री के प्रस्ताव पर वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये उद्योग विभाग के बजट प्रस्ताव में 5 करोड़ रुपए का घोषणा की गई थी। इसके बाद उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने ही उत्पादन कम्पनी के बंद पड़ी प्लांट की ज़मीन में एल्यूमिनियम पार्क हेतु प्रस्ताव ऊर्जा विभाग और उद्योग विभाग को दिया था।
उद्योग मंत्री के सशक्त प्रयास का अब लाभ अब कोरबा को: कोरबा के विधायक और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के सशक्त प्रयास का लाभ कोरबा जिले को मिलने जा रहा है। जिला चेम्बर ऑफ कॉमर्स, उद्योग संघ द्वारा वर्षों से मांग की जा रही थी। अब एल्यूमिनियम पार्क बनने से जहा एल्यूमिनियम सेक्टर के छोटे बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
एल्यूमिनियम सामान की बढ़ रही डिमांड: एल्यूमिनियम की खपत विद्युत संयंत्रों के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। आफिस, बिल्डिंग के निर्माण में भी उपयोग हो रहा है। कांच के दरवाजे व खिड़कियों के लिए एल्यूमिनियम का ही उपयोग होता है। रेलवे भी एल्यूमिनियम फैब्रिकेशन व इंजीनियरिंग पार्ट से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल करता है। पैकेजिंग, इलेक्ट्रिकल सामान, वाहनों की बॉडी स्ट्रक्चर, व्हील्स, प्लेन व प्रिंटेड फाइल्स, फर्मा व बर्तन प्रोडक्ट तैयार करने में एल्यूमिनियम का उपयोग किया जाता है। इन सेक्टर के उद्योग अधिक संख्या में लग सकेंगे।
एक ही जगह पर कई उत्पाद” बालको के स्मेल्टर प्लांट में एल्यूमिना तैयार होता है। एल्यूमिनियम पार्क के बन जाने से एल्यूमिनियम से तैयार होने वाले उत्पाद कोरबा में ही बन सकेंगे। एक ही जगह पर कई प्रकार के उत्पाद बनाए जा सकेंगे। इसके लिए स्थानीय और बाहरी उद्योगपति कोरबा में संयंत्र लगाने के लिए रुचि लेंगे।









