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“G20 से इस ताकतवर देश को किया बाहर! डोनाल्ड ट्रंप का अब तक का सबसे बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया सन्न”

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए दक्षिण अफ्रीका को 2026 में अमेरिका में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन से बाहर निकालने की घोषणा कर दी है।

ट्रंप ने इसके पीछे कारण बताया कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार गोरे लोगों (Afrikaners) और यूरोपीय सेटलर्स के वंशजों के खिलाफ हो रहे ‘भयानक मानवाधिकार उल्लंघनों’ को संबोधित करने से इनकार कर रही है।

उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि दक्षिण अफ्रीका में गोरे लोगों की हत्या की जा रही है और मनमाने ढंग से उनके खेतों को छीना जा रहा है। इस कठोर कार्रवाई के तहत, ट्रंप ने यह भी निर्देश दिया कि दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सहायता और सब्सिडी तुरंत रोक दी जाए, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध गंभीर तनाव में आ गए हैं।

अमेरिका के फ्लोरिडा में होगा 2026 का G20 शिखर सम्मेलन

अपने कड़े रुख के परिणामस्वरूप, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि दक्षिण अफ्रीका को 2026 के G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा। यह शिखर सम्मेलन अगले वर्ष अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित मियामी शहर में आयोजित होने वाला है। ट्रंप ने तर्क दिया कि दक्षिण अफ्रीका ने अपने कार्यों से दुनिया को यह दिखा दिया है कि वह “कहीं भी सदस्यता के योग्य देश नहीं है।” इस घोषणा के साथ, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सहायता और सब्सिडी तुरंत प्रभाव से रोक दी जाए, जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक बड़ा तनाव पैदा हो गया है।

दक्षिण अफ्रीका-अमेरिका G20 विवाद: अध्यक्षता पर तनाव

इस साल दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनुपस्थिति एक बड़ा विवाद बन गई। ट्रंप ने खुद शामिल न होकर एक राजनयिक प्रतिनिधि को सम्मेलन में भेजा, जिससे दक्षिण अफ्रीका नाराज़ था।

मामला तब और बढ़ गया जब G20 की परंपरा के अनुसार, मौजूदा मेजबान देश (दक्षिण अफ्रीका) अगले साल के आयोजक देश (अमेरिका) को विधिवत तरीके से अध्यक्षता सौंपता है। ट्रंप के सम्मेलन में शामिल न होने के विरोध में, दक्षिण अफ्रीका ने कथित तौर पर अमेरिकी दूतावास के अधिकारी को सीधे तौर पर अध्यक्षता सौंपने से इनकार कर दिया। इस कदम को दक्षिण अफ्रीका द्वारा अमेरिका के प्रति असंतोष व्यक्त करने का एक राजनयिक विरोध माना गया, जिसने दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया।

ट्रंप के फैसले पर दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने क्या कहा?

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने 2026 G20 के निमंत्रण को रद्द करने के ट्रंप के फैसले पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने हमेशा अमेरिका के साथ राजनयिक संबंधों को बहाल करने का प्रयास किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने ट्रंप द्वारा श्वेत अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और श्वेत किसानों के नरसंहार के बार-बार किए गए दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह पहली बार नहीं है; देश के श्वेत नेताओं सहित दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने पहले भी इन दावों को गलत बताया है, यह इंगित करते हुए कि ट्रंप के आरोप ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं।

“Sri Lanka को बचाने के लिए भारत ने चलाया ‘ऑपरेशन सागर बंधु’, उतारे INS विक्रांत और INS उदयगिरि-

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भारत ने चक्रवात ‘दितवाह’ से प्रभावित श्रीलंका के लिए अपनी मानवीय पहल ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत राहत भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को बताया कि लगभग 12 टन राहत सामग्री लेकर एक सी-130जे विमान कोलंबो पहुंच चुका है।

क्या-क्या भेजा गया?

इस राहत में तंबू, तिरपाल, कंबल, स्वच्छता किट और तैयार भोजन जैसी ज़रूरी चीजें शामिल हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,

#OperationSagarBandhu शुरू… IAF का C-130J लगभग 12 टन सहायता लेकर कोलंबो पहुंचा।” इस तूफान में अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है।

INS विक्रांत और INS उदयगिरि ने पहुंचाई पहली राहत भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS विक्रांत और युद्धपोत INS उदयगिरि द्वारा भेजी गई पहली राहत खेप शुक्रवार को कोलंबो पहुंची, जिसे श्रीलंकाई अधिकारियों को सौंप दिया गया।

पीएम मोदी ने जताया दुख, कहा- श्रीलंका के खड़ा है भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए श्रीलंका के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने “सबसे करीबी समुद्री पड़ोसी” के साथ एकजुटता दिखाते हुए तुरंत राहत सामग्री और HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) उपकरण भेजे हैं।

भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति

पीएम मोदी ने कहा, “हम स्थिति बिगड़ने पर और मदद देने को तैयार हैं।” उन्होंने बताया कि यह पूरा समर्थन भारत की Neighbourhood First नीति और Vision SAGAR के तहत दिया जा रहा है।

श्रीलंका में बाढ़ और लैंडस्लाइड से हालात खराब

श्रीलंका पहले से बाढ़ और लैंडस्लाइड से लड़ रहा है। चक्रवात ‘दितवाह’ ने देश में कई सालों की सबसे गंभीर आपदा पैदा कर दी है। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है और हताहत तेजी से बढ़ रहे हैं।

80+ मौतें, 12,000 परिवार प्रभावित बढ़ते जलस्तर से ‘बड़ी आपदा’ की चेतावनी

स्थिति और बिगड़ गई है क्योंकि पश्चिमी प्रांत में केलानी और अट्टानाग्लु नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। सरकार ने इसको “बड़ी आपदा स्थिति” बताया है।

कई जिलों में 200 मिमी तक बारिश की भविष्यवाणी

श्रीलंकाई मौसम विभाग ने कहा है कि उत्तरी, उत्तर-मध्य, मध्य, उत्तर-पश्चिमी, सबरागमुवा और पश्चिमी प्रांतों में 200 मिमी से अधिक बारिश हो सकती है। त्रिनकोमाली, बदुल्ला, गाले और मटारा के कुछ हिस्सों में 150 मिमी से ज्यादा बारिश की संभावना है।

“RBI New Digital Banking Rules: 1 जनवरी से बैंकिंग नियम बड़ा बदलाव, डिजिटल ट्रांजैक्शन पर नई गाइडलाइन जारी”

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RBI New Digital Banking Rules: डिजिटल लेनदेन ने भारत की बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। बीते कुछ वर्षों में मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है।

लेकिन इसके साथ धोखाधड़ी (फ्रॉड) के मामलों में भी लगातार इजाफा हुआ है।

इसी चुनौती को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग को और सुरक्षित, पारदर्शी और सरल बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

RBI ने डिजिटल बैंकिंग के लिए 7 नए ‘मास्टर डायरेक्शन’ जारी किए हैं, जिन्हें 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। इन नए नियमों का मकसद है-एक देश, एक नियम के तहत डिजिटल बैंकिंग को साफ-सुथरा, सुरक्षित और आसान बनाना।

क्या है RBI का नया बदलाव?

डिजिटल बैंकिंग से जुड़े नियम अब तक अलग-अलग सर्कुलर और आदेशों में बिखरे हुए थे। इससे बैंकों को नियम समझने और लागू करने में दिक्कत आती थी। अब RBI ने इन्हें समेकित कर 7 नए मास्टर डायरेक्शन जारी किए हैं। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि RBI ने इसी प्रक्रिया में 5673 पुराने सर्कुलरों को रद्द कर दिया है। नए नियमों में 244 मास्टर डायरेक्शन शामिल हैं, जिनमें डिजिटल बैंकिंग से जुड़े 7 प्रमुख नियम हैं।

बैंकों और ग्राहकों के लिए क्या होगा आसान?

RBI के नए नियमों से बैंकों और NBFCs पर अनावश्यक कागजी कार्रवाई का बोझ कम होगा, जिससे कामकाज तेज़ और पारदर्शी बन सकेगा। ये डिजिटल बैंकिंग नियम देश के सभी बैंकों-कमर्शियल बैंक, पेमेंट बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, लोकल एरिया बैंक, रीजनल रूरल बैंक, शहरी और ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंकों-पर लागू होंगे। यानी अब भारत में काम करने वाला हर बैंक इन नए डिजिटल मानकों का पालन करेगा, जिससे ग्राहकों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिलेंगी।

हर बैंक को बनानी होगी नई डिजिटल बैंकिंग पॉलिसी

RBI के नए नियमों के मुताबिक अब हर बैंक को अपनी एक अलग डिजिटल बैंकिंग पॉलिसी बनानी होगी। इसमें बैंक यह बताएगा कि इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI को सुरक्षित रखने के लिए वह क्या-क्या कदम उठाएगा और ग्राहक का पैसा कैसे सुरक्षित रहेगा। सर्वर डाउन होने या कोई बड़ी गड़बड़ी होने पर बैंक उसे कैसे ठीक करेगा। ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय कोई खतरा न हो और सेवाएं ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकें।

ग्राहकों को क्या लाभ होगा?

नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। बैंक अब तेज़ी से नई डिजिटल सेवाएं शुरू कर सकेंगे और सुरक्षा मानकों को पहले से बेहतर बना पाएंगे। इसका असर छोटे बैंकों पर भी पड़ेगा, क्योंकि अब वे भी बड़े बैंकों की तरह आधुनिक और सुरक्षित डिजिटल सुविधाएं प्रदान कर सकेंगे।

नए नियम साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने में भी मदद करेंगे, जिससे ऑनलाइन लेन-देन पहले से अधिक सुरक्षित हो जाएगा। इसके साथ ही बैंकिंग से जुड़ी शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया भी तेज़ और व्यवस्थित होगी, जिससे ग्राहकों को राहत मिलेगी।

“Delimitation: परिसीमन के मुद्दे पर शीतकालीन सत्र में संग्राम के आसार, समझें विवाद की पूरी क्रोनोलॉजी”

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संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला हैं। विपक्ष के साथ टकराव टालने के लिए इससे एक दिन पहले रविवार (30 नवंबर) को ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है।

इस बार सत्र में परमाणु उर्जा बिल, हाईवे संशोधन बिल समेत कुल 10 अहम बिल पेश किए जाएंगे। इसके अलावा, परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर भी जमकर हंगामा हो सकता है। दक्षिण भारतीय राज्यों की पार्टियां खास तौर पर इस मुद्दे पर बेहद मुखर हैं।

लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण के इस विषय को लेकर राजनीतिक दल पहले ही आमने-सामने आ चुके हैं। ऐसे में आगामी सत्र में तीखी बहस और टकराव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। परिसीमन का यह विवाद केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा नहीं है। इसका सीधा असर राज्यों की शक्ति संतुलन, केंद्र-राज्य समीकरण पर भी पड़ना तय है।

Winter Session में परिसीमन पर संग्राम के आसार

शीतकालीन सत्र में विपक्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य, बेरोज़गारी और महंगाई के साथ परिसीमन को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाएगा।

सत्ता पक्ष प्रक्रिया को स्वाभाविक और संवैधानिक बताते हुए आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह सत्र पिछले वर्षों की तुलना में अधिक विवादास्पद और चर्चित होने वाला है।

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Delimitation प्रक्रिया क्या होती है?

भारत में परिसीमन की प्रक्रिया संविधान के तहत समय-समय पर होती आई है। 1971 की जनगणना के बाद बढ़ती जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए सीटों में बदलाव का मुद्दा उठा। 2026 में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है। दरअसल परिसीमन तेजी से बढ़ती आबादी के मुताबिक संसदीय राजनीति में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था है। हालांकि पिछले 3 दशक में जनसंख्या में वृद्धि का अनुपात पूरे देश समानुपातिक दर से नहीं हुआ है।

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परिसीमन को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?

जैसे-जैसे देश 2026 की समयसीमा के करीब पहुंच रहा है, यह प्रश्न फिर उभर आया है कि क्या आबादी में अंतर को देखते हुए सीटों का परिसीमन होगा? दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। परिसीमन होने पर इन प्रदेशों में सीटों की संख्या उस अनुपात से नहीं बढ़ेगी, जैसी उत्तर भारतीय राज्यों में बढ़ने का अनुमान है। दूसरी ओर, उत्तर भारत के जनसंख्या-बहुल राज्यों का कहना है कि प्रतिनिधित्व का आधार जनसंख्या ही होना चाहिए न कि जनसंख्या नियंत्रण का प्रदर्शन।

Amit Shah ने दक्षिण भारतीय राज्यों को दिया है आश्वासन

सांसदों और विशेषज्ञों के कई बयान सामने आए, जिसमें परिसीमन को लेकर आयोग के गठन, सीटों के संभावित वितरण और राज्यों के अनुपात में बदलाव की बात कही गई। विपक्ष का आरोप है कि नए परिसीमन से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश हो सकती है। सरकार का कहना है कि कोई भी फैसला संवैधानिक प्रावधानों और जनसंख्या डेटा के आधार पर ही होगा। गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें किसी सूरत में कम नहीं की जाएंगी।

“Anthony Albanese Marries: 62 की उम्र में इस देश के प्रधानमंत्री ने की शादी, PM मोदी के हैं करीबी दोस्त”

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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीज़ ने शनिवार दोपहर को अपनी पार्टनर जोडी हेडन के साथ विवाह करके इतिहास रच दिया। वह पद पर रहते हुए शादी करने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री बन गए हैं।

यह निजी समारोह 2025 के संसद सत्र के अंतिम दिन के बाद कैनबरा में प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास ‘द लॉज’ में आयोजित किया गया था।

यह शादी अल्बनीज़ के बेटे नाथन और हेडन के माता-पिता बिल और पॉलीन सहित कुछ करीबी परिवार और दोस्तों की उपस्थिति में एक अंतरंग कार्यक्रम था। दोनों ने अपने इस प्रेम और भविष्य की प्रतिबद्धता को साझा करते हुए खुशी व्यक्त की।

Anthony Albanese Wedding: करीबी मेहमान हुए शामिल

प्रधानमंत्री अल्बनीज़ और जोडी हेडन का विवाह समारोह अत्यंत निजी रहा, जिसके विवरण को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गोपनीय रखा था। यह विवाह समारोह कैनबरा में प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास ‘द लॉज’ में संपन्न हुआ। इसमें केवल उनके करीबी परिवार और दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया था। उपस्थित लोगों में अल्बनीज़ के बेटे नाथन और हेडन के माता-पिता बिल और पॉलीन शामिल थे। इस जोड़े ने एक संयुक्त बयान जारी कर अपने परिवार और करीबी दोस्तों के सामने अपने प्यार और भविष्य के जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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पद पर रहते हुए शादी करने वाले पहले PM

एंथोनी अल्बनीज़ की यह शादी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है क्योंकि वह पद पर रहते हुए विवाह करने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने फरवरी 2024 में वैलेंटाइन डे के अवसर पर ‘द लॉज’ की बालकनी पर ही जोडी हेडन को प्रपोज़ किया था। अल्बनीज़ ने हेडन के लिए स्वयं एक सगाई की अंगूठी डिज़ाइन की थी। संसद सत्र के तुरंत बाद हुई यह शादी, सार्वजनिक जीवन में एक निजी और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ती है।

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1979 में बैंकस्टाउन में जन्मीं जोडी हेडन का पालन-पोषण न्यू साउथ वेल्स (NSW) सेंट्रल कोस्ट पर हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सुपरएनुएशन (पेंशन/सेवानिवृत्ति निधि) सेक्टर में दो दशक लंबा करियर बनाया, जहाँ उन्होंने प्रमुख वित्तीय संस्थानों और उद्योग फंडों के लिए काम किया। बाद में, उन्होंने रणनीतिक नेतृत्व भूमिकाओं की ओर कदम बढ़ाया। शिक्षकों के परिवार से आने के बावजूद, उन्होंने यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी ताकि सुपरएनुएशन उद्योग में अपना करियर बना सकें। जोडी, प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीज़ से 16 साल छोटी हैं और अपने आप में एक ‘पावरहाउस’ मानी जाती हैं।

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2020 में दोनों की हुई थी पहली मुलाकात

एंथोनी अल्बनीज़ (60) और जोडी हेडन (45) की मुलाकात मार्च 2020 में मेलबर्न में एक डिनर इवेंट में हुई थी, जहाँ लेबर नेता अल्बनीज़ भाषण दे रहे थे। अल्बनीज़ ने भीड़ से पूछा कि क्या वहाँ NRL टीम साउथ सिडनी रैबिटोह्स के कोई प्रशंसक हैं, जिस पर जोडी ने प्रतिक्रिया दी। अल्बनीज़ ने बाद में जोडी से परिचय किया और पाया कि वह उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र में रहती थीं। पहली मुलाकात के बाद, दोनों ने सिडनी में एक ड्रिंक पर मुलाकात की। अल्बनीज़ ने याद किया कि उन्हें लगा था कि यह सिर्फ एक ड्रिंक होगी, लेकिन दोनों में अच्छी बॉन्डिंग हो गई, जिसके बाद वे करीब आते चले गए।

DGP-IGP बैठक का सत्र, बदलते सिक्योरिटी लैंडस्केप पर होगी चर्चा…

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रायपुर: टी ब्रेक के बाद DGP-IGP बैठक का सत्र दुबारा शुरू हो चुका है। 12:20 से शुरू हुआ सेशन एक घंटा 1:20 बजे तक चलेगा। सभी राज्यों के ACS होम बैठक से निकले। बैठक में सभी ACS होम ने अपने अपने राज्यों की आंतरिक स्थिति का प्रजेंटेशन दिया है।

वहीं टी ब्रेक के बाद रॉ के चीफ ने प्रजेंटेशन दिया। रॉ चीफ के प्रजेंटेशन के बाद जियो-पॉलिटिकल चुनौतियो परचर्चा दुबार शुरू हुई। पड़ोस में भारत की चुनौतियाँ और बाहरी खतरे समेत बदलते सिक्योरिटी लैंडस्केप पर चर्चा होगी।

छत्तीसगढ़ के रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक डीजीपी-आइजी सम्मेलन होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 व 30 नवंबर को शामिल होंगे। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत देशभर के पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे।

इस 60वीं कांग्रेस में विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन प्रधानमंत्री मोदी विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे। इस सम्मेलन में सभी राज्यों के गृह मंत्री, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे।

फिलहाल नवा रायपुर में सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किये गये है। जगह-जगह पर स्पेशल फ़ोर्स और पुलिस के जवानों की कई स्तरों पर तैनाती की गई है।

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक बदलाव किया, 41 जिला कमेटियों में अध्यक्षों नियुक्त…

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रायपुर: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने छत्तीसगढ़ में पार्टी के संगठनात्मक बदलाव के तहत 41 जिला कांग्रेस कमेटियों में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। पार्टी के पदाधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं की पसंद के अनुसार यह नियुक्ति ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत बड़े संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा हैं, जिसका मकसद राज्य में पार्टी के शहरी और जमीनी ढांचे को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि नियुक्तियों की सूची, जिसमें पांच महिला नेता भी शामिल हैं, शुक्रवार देर शाम जारी की गई।

कांग्रेस पार्टी की यह सूची कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राज्य प्रभारी सचिन पायलट के छत्तीसगढ़ के दो दिन के दौरे के खत्म होने के एक दिन बाद आई है। पायलट ने कहा था कि नई नियुक्तियों की सूची जल्द ही जारी की जाएगी।

एआईसीसी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा है, ”कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छत्तीसगढ़ की ज़िला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत किए गए हैं।”

उन्होंने बयान में कहा है कि इस पहल के तहत, हर जिले में नियुक्त एआईसीसी पर्यवेक्षक ने विस्तृत मूल्यांकन किया तथा पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं से बातचीत की। बाद में उन्होंने रिपोर्ट जमा की।

बयान के मुताबिक इन रिपोर्ट को जमा करने के बाद, नियुक्ति से पहले प्रत्येक पर्यवेक्षक के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की गई।

एआईसीसी द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार श्रीकुमार शंकर मेनन को रायपुर शहर का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि राजेंद्र पप्पू बंजारे रायपुर ग्रामीण के अध्यक्ष होंगे। वहीं बिलासपुर में सिद्धांशु मिश्रा शहर के और महेंद्र गंगोत्री बिलासपुर ग्रामीण के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।

सूची के अनुसार सुकमा में पूर्व मंत्री और मौजूदा कांग्रेस के विधायक कवासी लखमा के बेटे हरीश लखमा को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सूची में महासमुंद जिले के लिए विधायक द्वारिकाधीश यादव, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के लिए अशोक श्रीवास्तव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के लिए सुरजीत सिंह ठाकुर को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं रायगढ़ शहर के लिए शाखा यादव को और सूरजपुर जिले में शशि सिंह कोर्राम को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सूची के अनुसार बलरामपुर में हरिहर प्रसाद यादव और बस्तर ग्रामीण के लिए प्रेम शंकर शुक्ला को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सूची में दंतेवाड़ा में सलीम राजा उस्मानी, धमतरी में तारिणी चंद्राकर को, दुर्ग शहर में धीरज बाकलीवाल को, कोंडागांव में रवि घोष को, राजनांदगांव में पूर्व वरिष्ठ नेता उदय मुदलियार के पुत्र जितेंद्र उदय मुदलियार तथा कोरबा शहर में मुकेश कुमार राठौर को नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

बस्तर के झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुए नक्सली हमले में उदय मुदलियार और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे।

सूची में शामिल बेमेतरा जिले से पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा, बालोद से चंद्रेश कुमार हिरवानी, बलौदाबाजार से सुमित्रा घृतलहरे, रायगढ़ ग्रामीण से नागेंद्र नेगी समेत 11 ऐसे मौजूदा जिला अध्यक्ष हैं, जहां कोई बदलाव नहीं हुआ है।

“पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय राजनांदगाँव में स्काउट्स-गाइड्स प्रशिक्षण शिविर ” प्राचार्य ने कहा—हर दायित्व पूरी निष्ठा से निभाएँ…

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राजनांदगाँव। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय राजनांदगाँव में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के अंतर्गत प्रवेश, प्रथम एवं द्वितीय सोपान हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं परीक्षण शिविर का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। शिविर 28 और 29 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

प्राचार्य मनोज कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्काउटिंग का मूलमंत्र सेवा, त्याग और समर्पण है। उन्होंने छात्रों को समाज के प्रत्येक दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाने तथा सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा दी।

शिविर के प्रथम दिन स्काउट मास्टर श्री यगेश्वर साहू, श्री नारद जांगड़े, श्री लोकेश तिड़पुड़े तथा गाइड कैप्टन श्रीमती प्रतिभा भेले और श्रीमती सोनम अवस्थी द्वारा प्रतिभागियों को स्काउट-गाइड की संरचना, प्राथमिक नियमों, अनुशासन और आवश्यक प्रशिक्षण से अवगत कराया गया। विद्यालय की गाइड कैप्टन श्रीमती मोहिनी साहू ने गाँठें, कैम्प फायर कार्यक्रम, चिन्हों तथा दक्षता पदकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

विभाग प्रभारी श्री अनिल खोब्रागढ़े ने बताया कि इस प्रकार के शिविर बच्चों में नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और अनुशासन के गुणों को सुदृढ़ करते हैं।
शिविर का समापन शनिवार को परेड निरीक्षण और विभिन्न मूल्यांकन गतिविधियों के साथ सम्पन्न हुआ।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का स्वामी विवेकानंद विमानतल पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया आत्मीय स्वागत…

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रायपुर: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के  रायपुर आगमन पर स्वामी विवेकानंद विमानतल में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से बिहार के पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन ने की सौजन्य मुलाकात…

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रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बिहार के पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री नितिन नवीन का आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें शॉल एवं प्रतीक चिन्ह नन्दी भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर विधायक श्री किरण देव एवं छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह उपस्थित थे।