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भारत पर 25 फीसदी टैरिफ… ट्रंप प्रशासन ने जारी कर दिया नोटिफिकेशन, रूस पर दबाव के लिए अमेरिका की चाल

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अमेरिका ने भारत से आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की औपचारिक घोषणा की है. इस ऐलान के बाद कुल टैरिफ 50% हो जाएगा. यह नया शुल्क 27 अगस्त 2025 को सुबह 12:01 बजे (अमेरिकी समय) से लागू होगा. अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने बताया कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 6 अगस्त के कार्यकारी आदेश 14329 को लागू करता है. ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% करने की योजना बनाई थी.

सोमवार को जारी आधिकारिक नोटिस में इसकी पुष्टि की गई. व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाने के लिए है, ताकि रूस की तेल आय कम हो और यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू हो. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है. ट्रंप ने इसे ‘पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देना’ बताया है. इसके जवाब में अमेरिका ने भारत और ब्राजील को सबसे ऊंचे टैरिफ ब्रैकेट में रखा है.

टैरिफ से भारत खुश नहीं

भारत ने इन ‘द्वितीयक टैरिफ’ को अनुचित बताया और अपनी तेल खरीद नीति को राष्ट्रीय हित में सही ठहराया. विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारत की ऊर्जा नीति 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि भारत अपने किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की रक्षा करेगा. यह टैरिफ भारत के टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, मछली और इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे निर्यातों को प्रभावित कर सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अहमदाबाद की एक विशाल जनसभा में अमेरिका की ओर से भारतीय वस्तुओं पर 50% शुल्क लगाने से पहले कहा कि उनकी सरकार किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्यमियों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगी. मोदी ने कहा, ‘हम पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन हम उसे सह लेंगे. आपके हितों को कोई नुकसान नहीं होने देंगे.’
उन्होंने महात्मा गांधी के स्वदेशी मंत्र का जिक्र करते हुए छोटे व्यवसायियों और किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर हाल में उनके साथ खड़ी है. ट्रंप प्रशासन ने 27 अगस्त से भारतीय सामान पर 50% शुल्क लगाने का ऐलान किया है. इसके बीच मोदी ने स्वदेशी वस्तुओं के व्यापक उपयोग पर जोर दिया और व्यापारियों से अपील की कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर बड़े बोर्ड लगाएं, जिस पर लिखा हो- ‘यहां केवल स्वदेशी सामान बिकता है.’

आप नेता सौरभ भारद्वाज के घर सुबह-सुबह रेड, क्या है वह कांड जिस पर ED ने लिया एक्शन

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुबह-सुबह छापेमारी की है. जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई हॉस्पिटल निर्माण घोटाले से जुड़ी जांच के तहत की जा रही है. सुबह से ही ईडी की टीम उनके आवास पर मौजूद है और तलाशी की कार्रवाई चल रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ED अधिकारी मंगलवार सुबह से ही 13 लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं.

बताया जा रहा है कि यह मामला उन अस्पताल परियोजनाओं से जुड़ा है, जिनमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और वित्तीय गबन के आरोप लगे हैं. दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने सबसे पहले इस घोटाले की ओर इशारा किया था. एसीबी की जांच में सामने आया था कि साल 2018-19 में दिल्ली में करीब 5,500 करोड़ रुपये की लागत से 24 अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी. इनमें 11 ग्रीनफ़ील्ड और 13 ब्राउनफ़ील्ड प्रोजेक्ट शामिल थे. लेकिन इन परियोजनाओं में बेवजह देरी हुई और लागत भी कई गुना बढ़ गई, जिससे वित्तीय गबन का संदेह और गहरा हो गया.

क्या है पूरा मामला?

ये अस्पताल निर्माण घोटाला करीब 5,590 करोड़ का है. साल 2018-19 में दिल्ली सरकार ने 24 अस्पतालों के निर्माण के लिए 5,590 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी. इसके तहत 6 महीने में ICU अस्पताल बनना था, लेकिन 3 साल बाद भी काम अधूरा रहा. इनमें से कई प्रोजेक्ट्स में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.
  • प्रोजेक्ट्स को 6 महीने में पूरा करना था, लेकिन 3 साल बाद भी अधिकांश काम अधूरा.
    800 करोड़ खर्च होने के बावजूद केवल 50% काम पूरा हुआ.
  • LNJP अस्पताल की लागत 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ रुपये हो गई, जबकि इसके काम कोई ठोस प्रगति भी नहीं दिखी.
  • कई स्थानों पर बिना मंजूरी के निर्माण कार्य शुरू किए गए और ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई.
  • हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) 2016 से पेंडिंग है, जिसे जानबूझकर टालने का आरोप है.

एसीबी की ओर से दर्ज इस मामले को अब ईडी ने टेकओवर कर लिया है. ईडी की जांच का फोकस अस्पताल निर्माण के दौरान हुए पैसों के हेरफेर और उससे जुड़े राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित मिलीभगत पर है. इस घोटाले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और मौजूदा मंत्री सौरभ भारद्वाज का नाम सामने आया है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर ईडी ने जांच तेज कर दी है.

अमेरिका से टैरिफ वार के बीच रूस से एक और तोहफा, इस साल जमकर मनेगी दिवाली

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अमेरिका से जारी टैरिफ वार के बीच भारत के लिए रूस एक तरह से ढाल बनकर सामने आया है. हथियारों से लेकर सस्ते तेल तक… वह कई चीजें भारत को दिल खोलकर देने को तैयार है जिससे कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हमले के असर को बेअसर किया जा सके. इस बीच एक शानदार रिपोर्ट आई है. इससे हर जरूरतमंद भारतीय के घर में खुशी आ सकती है. दरअसल, पिछले तीन साल से यूक्रेन के साथ जंग में उलझे रूस भारी लेबर संकट से जूझ रहा है. इस संकट को दूर करने के लिए रूस अब अपनी पारंपरिक श्रम आपूर्ति, यानी पूर्व सोवियत गणराज्यों से आगे बढ़कर एशियाई देशों की ओर रुख कर रहा है. इस दिशा में भारत एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभर रहा है. रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने हाल ही में रूसी समाचार एजेंसी TASS को बताया कि रूसी कंपनियां विशेष रूप से मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारतीय कामगारों को नियुक्त करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं. दूसरी तरफ भारत में बड़ी संख्या में युवाओं को अच्छी नौकरी की जरूरत है. लेकिन, उन्हें अच्छे अवसर नहीं मिलते हैं. ऐसे में रूस में रोजगार के नए दरवाजे खुलने से भारतीय परिवारों में खुशहाली आएगी.

यह कदम रूस की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और श्रम की कमी को पूरा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है. रूस में भारतीय कामगारों की बढ़ती संख्या पिछले कुछ वर्षों में रूस में भारतीय कामगारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के अनुसार रूसी सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में जहां केवल 5,480 भारतीयों को रूस में वर्क परमिट जारी किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 36,208 हो गई. यह आंकड़ा रूस की श्रम आवश्यकताओं और भारतीय कामगारों की बढ़ती मांग को स्पष्ट करता है. विनय कुमार ने बताया कि रूस में भारतीय कामगार मुख्य रूप से निर्माण और कपड़ा क्षेत्रों में कार्यरत हैं, लेकिन अब मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में भी उनकी मांग बढ़ रही है.
उन्होंने कहा कि रूस में जनशक्ति की आवश्यकता है और भारत के पास कुशल जनशक्ति उपलब्ध है. वर्तमान में रूसी नियमों और कोटा प्रणाली के तहत कंपनियां भारतीयों को नियुक्त कर रही हैं. हालांकि, भारतीय कामगारों की बढ़ती संख्या ने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों पर भी दबाव बढ़ाया है. राजदूत ने बताया कि पासपोर्ट नवीनीकरण, बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट के नुकसान जैसे कांसुलर सेवाओं की मांग में वृद्धि हुई है. इस चुनौती से निपटने के लिए भारत ने येकातेरिनबर्ग में एक नया वाणिज्य दूतावास खोलने की योजना बनाई है. बीते जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रूस यात्रा के दौरान मॉस्को में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए येकातेरिनबर्ग और कज़ान में दो नए वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा की थी, ताकि यात्रा और व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके.
रूस में कामगारों की कमी का प्रमुख कारण यूक्रेन के साथ चल रहा युद्ध है, जिसने रूसी अर्थव्यवस्था और जनशक्ति को प्रभावित किया है. युद्ध के कारण रूसी सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योगों में भारी भर्ती की गई है, जिसके चलते निजी कंपनियों में कामगारों की कमी हो गई है. इसके अलावा रूस की जनसांख्यिकीय गिरावट और प्रवास-विरोधी नीतियों ने इस संकट को और गहरा किया है. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से लाखों रूसी नागरिक देश छोड़कर चले गए हैं. इस कारण भी श्रम बाजार में और कमी आई. 2024 में रूसी कारखानों ने 47,000 विदेशी कामगारों को नियुक्त किया, जो सरकार द्वारा निर्धारित 40,500 के कोटे से 16 प्रतिशत अधिक है. ये कामगार मुख्य रूप से चीन, भारत, तुर्की, सर्बिया और अन्य वीजा-आवश्यकता वाले देशों से आए हैं. रूसी श्रम मंत्रालय के अनुसार 2025 के लिए भारतीय कामगारों के लिए अधिकतम 71,817 वर्क परमिट का कोटा निर्धारित किया गया है.
रूस की कई कंपनियां भारतीय कामगारों को नियुक्त करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही हैं. उदाहरण के लिए मॉस्को स्थित डेवलपर समोल्योट ग्रुप ने मार्च में भारतीय निर्माण कामगारों को नियुक्त करने के लिए एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया था. हालांकि, इस कार्यक्रम को भाषा और सांस्कृतिक में अंतर के कारण पूरी सफलता नहीं मिली. फिर भी रिटेल दिग्गज X5 ग्रुप और ऑनलाइन मार्केट प्लेस ओजोन जैसी कंपनियों ने हाल के वर्षों में भारतीय कामगारों को नियुक्त किया है. रूस में वेल्डर, कंक्रीट वर्कर, फिनिशर और खाद्य व कृषि कर्मचारियों जैसे व्यवसायों में विदेशी कामगारों की मांग बढ़ रही है. भर्ती एजेंसी इंट्रुड के प्रबंध निदेशक दिमित्री लापशिनोव के अनुसार ये क्षेत्र विशेष रूप से श्रम की कमी से जूझ रहे हैं.

रूस का एशियाई देशों की ओर रुख

रूस अब केवल भारत ही नहीं बल्कि म्यांमार, श्रीलंका और उत्तर कोरिया जैसे अन्य एशियाई देशों से भी कामगार लाने की योजना बना रहा है. उरल्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख आंद्रेई बेसेडिन ने हाल ही में दावा किया था कि 2025 के अंत तक रूस में 10 लाख भारतीय कामगार आ सकते हैं. हालांकि, रूसी श्रम मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह सटीक नहीं है और विदेशी कामगारों की भर्ती कोटा प्रणाली के तहत ही होगी.

भारत-रूस संबंधों को बढ़ावा

भारतीय कामगारों की बढ़ती मांग न केवल रूस की श्रम आवश्यकताओं को पूरा कर रही है, बल्कि भारत और रूस के बीच आर्थिक और राजनयिक संबंधों को भी मजबूत कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी की हाल की रूस यात्रा और नए वाणिज्य दूतावासों की स्थापना जैसे कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के आवागमन को बढ़ाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण हैं.

प्रियंका का चुनावी दांव……महिला वोटरों को साधने की रणनीति या नई सियासी जंग की शुरुआत

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बिहार की सियासत में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा वोटर अधिकार यात्रा और उसमें प्रियंका गांधी वाड्रा की एंट्री को लेकर है. कांग्रेस ने साफ किया है कि प्रियंका गांधी 26 और 27 अगस्त को बिहार आएंगी और राहुल गांधी-तेजस्वी यादव के साथ मिलकर इस यात्रा को और मजबूती देंगी. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनका यह दौरा हरतालिका तीज जैसे महत्वपूर्ण दिन पर हो रहा है, जब लाखों महिलाएं व्रत रखती हैं. यही वजह है कि अब इसे सिर्फ यात्रा का हिस्सा नहीं बल्कि महिला वोट बैंक पर बड़ी रणनीतिक चाल माना जा रहा है.

तीज और प्रियंका का चुनावी दांव
प्रियंका गांधी 26 अगस्त को सुपौल और 27 अगस्त को सीतामढ़ी में यात्रा का हिस्सा बनेंगी. सीतामढ़ी में वह जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और महिला मतदाताओं से संवाद करेंगी. कांग्रेस इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश बता रही है, लेकिन विपक्षी खेमे में इसको लेकर चर्चा है कि प्रियंका गांधी “तीज की धार्मिक-सामाजिक आस्था” को भुनाकर महिलाओं को प्रभावित करना चाहती हैं. खासकर इसलिए क्योंकि उत्तर बिहार का यह इलाका एनडीए का गढ़ माना जाता है और यहां की आधी आबादी यानी महिला वोटर चुनावी समीकरण बदल सकती हैं. सुपौल से मुजफ्फरपुर तक यात्रा में प्रियंका गांधी शामिल होंगी.
एनडीए बनाम कांग्रेस: महिला वोटों की सियासत
नीतीश कुमार लंबे समय से महिला वोट बैंक को साधने में सफल रहे हैं. चाहे आरक्षण की नीतियां हों या साइकिल-स्कूल योजना, महिलाओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है. ऐसे में कांग्रेस का यह कदम सीधे-सीधे नीतीश कुमार के कोर वोटरों पर सेंध लगाने जैसा है. पार्टी चाहती है कि तीज जैसे मौके पर प्रियंका गांधी महिलाओं के बीच अपनी छवि मजबूत करें और यह संदेश दें कि कांग्रेस भी महिला सशक्तिकरण की राजनीति में पीछे नहीं है.
राहुल-तेजस्वी संग प्रियंका की ‘त्रिकोणीय पिच’
वोटर अधिकार यात्रा पहले से ही बिहार की राजनीति में हलचल मचा रही है. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव इसकी अगुवाई कर रहे हैं, लेकिन प्रियंका गांधी की एंट्री इसे नया मोमेंटम दे सकती है. कांग्रेस की रणनीति साफ है राहुल गांधी युवाओं और बेरोजगारी का मुद्दा उठाएंगे, तेजस्वी यादव सामाजिक न्याय की राजनीति करेंगे और प्रियंका गांधी महिला वोटरों पर फोकस करेंगी. यह त्रिकोणीय पिच बिहार में विपक्ष की ताकत को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है.
नतीजा क्या होगा?
प्रियंका गांधी का यह दौरा कांग्रेस के लिए दोहरी लड़ाई जैसा है. एक तरफ एनडीए के मजबूत महिला वोट बैंक को चुनौती देना और दूसरी तरफ बिहार में अपनी पार्टी को विपक्षी खेमे में प्रासंगिक बनाए रखना. यह दांव कितना असर डालेगा, यह तो लोकसभा चुनाव के नतीजे बताएंगे, लेकिन इतना तय है कि तीज वाले दिन प्रियंका गांधी का बिहार दौरा सियासी हलचल मचाने में पूरी तरह सफल रहा है

मनाली में भारी बारिश से तबाही, हाईवे पर बहने लगी ब्यास नदी, आलू ग्राउंड-ग्रीन बैरियर डूबे…होटल और घर बह गया

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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का दौर चलातार जारी है. मौसम विभाग की तरफ से रेड अलर्ट के बाद मनाली में बीती रात को भारी बारिश हुई और अब भी जारी है. ऐसे में ब्यास नदी चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे पर बहने लगी थी. बीती रात को लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण ब्यास नदी का पानी आलू ग्राउंड तक सड़क पर आ गया और आलू ग्राउंड, वॉल्वो बस स्टैंड, ग्रीन टैक्स बैरियर डूब गए. मनाली में प्रशासन ने मंगलवार के लिए स्कूल और कॉलेज बंद करने का फैसला लिया है.

उधर, बाहंग क्षेत्र के किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है. उधर, मनाली के बाहंग में कुछ दुकानें, और शेरे-ए-पंजाब होटल और घर नदी में बह गया है. बीती रात को ब्यास नदी के ऊफान में कैफे का केवल गेट ही बचा, बाकी सामान सहित सब कुछ बह गया. इसके साथ में शेड्स भी नदी में बह गए हैं.
जानकारी के अनुसार, रात को आलू ग्राउंड में सब्ज़ी मंडी किसान भवन (एपीएमसी बिल्डिंग) में एपीएमसी का एक कर्मचारी दीप चंद (36, निवासी कटराई, कुल्लू भवन में फंस गया था. ब्यास नदी का पानी भवन के दोनों ओर भर गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और बाद में पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. फिर हाइड्रा क्रेन और स्थानीय कर्मचारियों की मदद से दीप चंद को सुरक्षित बाहर निकाला गया.
इसी बीच मनाली-केलांग-लेह मार्ग पर समाहन के पास सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है. भूस्खलन और कटाव से कई जगहों पर यातायात बाधित हुआ है. प्रशासन ने कहा कि हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है. मनाली में ब्यास नदी की तबाही से लोगों में दहशत का माहौल है, वहीं प्रशासन ने अपील की है कि लोग नदी किनारे न जाएं और सावधानी बरतें. मनाली में होटल में फंसे ओम ठाकुर ने बताया कि वह टूअर लेकर स्पीति गए थे और फिर लौटते हुए तीन दिन से मनाली में फंसे हुए हैं. बीती रात से ही मनाली में बारिश हो रही है और ब्यास नदी पूरे ऊफान पर है.
मनाली में ब्यास नदी के उफान और लगातार भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. मनाली–कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) ढँकार के पास क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. वहीं मनाली से कुल्लू तक राइट बैंक मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही रुक गई है. प्रशासन ने वाहनों को रायसन से लेफ्ट बैंक मार्ग होकर मनाली की ओर भेजना शुरू किया है, ताकि लोगों को राहत मिल सके. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से मनाली के कई इलाक़ों में भूस्खलन और जलभराव की घटनाएँ सामने आई हैं. कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

पूर्व मंत्री और विधायक गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते मनाली लेह सड़क समाहण के पास पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. वहीं, ओल्ड मनाली से बुरुआ सड़क संपर्क मार्ग भी टूट चुका है. अभी मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों के साथ स्थिति का जायजा लिया।व्यास नदी और मनालसु नाले का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ हुआ है. मेरी सभी लोगों से अपील है कि नदी-नालों के पास न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें. माता हिडिंबा सबकी रक्षा करें.
पानी की सप्लाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित

मनाली में पानी की सप्लाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. नगर का मेन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण मनाली शहर में पानी की आपूर्ति बाधित रहेगी. प्रशासन ने जानकारी दी है कि बहाल करने का काम तभी शुरू किया जाएगा जब मनालसु नाले का जलस्तर कम होगा. पुरानी मनाली पंपिंग स्टेशन पर हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है. जल विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी और संयम के साथ करें, ताकि इस आपात स्थिति से निपटा जा सके.
2023 की याद दिलाने लगी ब्यास

गौरतलब है कि 2023 में भी मनाली में भंयकर बारिश हुई थी और इस वजह से ब्यास नदी हाईवे पर आ गई थी. इस दौरान कुल्लू से मनाली तक ब्यास ने हाईवे को क्षति पहुंचाई थी.

शुभ योग में आज हरतालिका तीज, जानें महत्व, पूजा विधि और पूजन का सही मुहूर्त

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आज देशभर में हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है, हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत किया जाता है. इसका महत्व मुख्य रूप से विवाहिक सुख, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन की मधुरता से जुड़ा है. मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तप करके इस दिन भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. तभी से सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना से यह व्रत करती हैं. ज्योतिष दृष्टि से इस बार यह तीज अत्यंत शुभ मानी जा रही है क्योंकि कई ग्रहों के संयोग से विशेष योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आइए जानते हैं हरतालिका तीज का महत्व, पूजा विधि और पूजन का सही मुहूर्त…

हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज व्रत पति की लंबी आयु, वैवाहिक सुख और कन्याओं को योग्य पति की प्राप्ति का व्रत है. साथ ही कुंवरी कन्याएं शिव जैसा पति प्राप्त करने के लिए हरतालिका तीज का व्रत करती हैं. इस दिन गौरी शंकर की पूजा अर्चना की जाती है और यह व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है. हरतालिका तीज का व्रत निर्जला व्रत होता है अर्थात महिलाएं 24 घंटे से ज्यादा समय तक बिना पानी और भोजन के रहती हैं. इस व्रत की कठोरता ही इसे सभी व्रतों से अलग बनाती है.
हरतालिका तीज सरगी का समय
हरतालिका तीज के दिन सूर्योदय 05:56 ए एम पर होगा. सूर्योदय से पूर्व ही सरगी ग्रहण करते हैं. इसमें व्रती महिलाएं दूध, फल, चाय, पानी, जूस आदि ग्रहण करके निर्जला व्रत का प्रारंभ करती हैं. पूरे दिन और अगले दिन सूर्योदय से पूर्व तक अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं करती हैं. तीज के दिन आप 05:56 ए एम से पहले सरगी कर लें.
हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:58 ए एम से 12:49 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:32 पी एम से 03:24 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 06:50 पी एम से 07:12 पी एम

लाभ चौघड़िया: सुबह में 10:46 ए एम से 12:23 पी एम तक
अमृत चौघड़िया: दोपहर में 12:23 पी एम से 1:59 पी एम तक
हरतालिका तीज प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त दोपहर में 3 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 12 मिनट तक
हरतालिका तीज पर बनने वाले योग
हरतालिका तीज पर चार शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आज पूरे दिन रवि योग रहने वाला है, इसके साथ ही साध्य योग, शुभ योग और पंचमहापुरुष योग भी बन रहा है. इन शुभ योग को ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली योग माना गया है. ये योग जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर इच्छित फल देते हैं और बुद्धि, प्रतिष्ठा, सौभाग्य और सम्मान में वृद्धि करते हैं. इन शुभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी इच्छाएं की पूर्ति होती है.
हरतालिका तीज पूजा विधि
तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं. फिर घर के पवित्र स्थान पर मिट्टी, चांदी या पीतल की शिव-पार्वती प्रतिमा की स्थापना की जाती है. इसके बाद भगवान गणेश के साथ पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है. पूजन में बेलपत्र, धूप, दीप, फूल, मिष्ठान्न, फल, और ऋतुफल अर्पित किए जाते हैं. पूजा के बाद हरतालिका व्रत कथा का श्रवण अनिवार्य माना गया है. इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित होता है. अगर अनजाने में चंद्रमा का दर्शन हो जाए तो स्वमंतक मणि की कथा सुनना आवश्यक बताया गया है. रात भर महिलाएं जागरण करती हैं, भजन-कीर्तन होता है.

हरतालिका तीज का देवी पार्वती से संबंध
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की सखियों को जब पता चला कि उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करने की तैयारी कर रहे हैं तो वे देवी पार्वती को महल से ले जाकर जंगल में एक गुफा में छिपा दिया. वहां पर माता पार्वती ने हजारों सालों तक तप, जप और पूजन किया ताकि भगवान शिव प्रसन्न हों. फिर दोनों का विवाह हो. मां पार्वती के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए. उनके आशीर्वाद से मां पार्वती शिव जी को पति स्वरूप में पाने में सफल हुईं. मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्वती की मनोकामना पूरी हुई थी, जिसकी वजह से महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखकर शिव और पार्वती की पूजा करती हैं, वहीं सुहागन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत करती हैं.

ट्रंप से मीटिंग के बाद पुतिन का नया खेल, अलास्का में भेज दिया जासूसी विमान, अमेरिका के फाइटर जेट ने खदेड़ा

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अलास्का के पास रूस ने एक बार फिर जासूसी विमान तैनात किया है. यह इस सप्ताह तीसरी बार है जब अमेरिका को अपने लड़ाकू जेट भेजकर इसका जवाब देना पड़ा. नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) ने एक बयान में बताया कि रविवार को रूस का एक जासूसी विमान अलास्का के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में देखा गया. यह क्षेत्र अमेरिका और कनाडा के संप्रभु हवाई क्षेत्र के ठीक बाहर है. नॉराड ने कहा कि इस तरह की रूसी गतिविधि को खतरा नहीं माना जाता और यह ADIZ में अक्सर होती रहती है.

नॉराड ने बताया कि रविवार को अलास्का के पास रूस का एक आईएल-20 कूट (IL-20 COOT) विमान देखा गया. यह शीत युद्ध के समय का एक जासूसी विमान है, जिसे रूसी सेना खुफिया जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल करती है. इससे पहले बुधवार और गुरुवार को भी इसी तरह के विमान इस क्षेत्र में देखे गए थे. नॉराड ने हर बार जवाब में अमेरिकी लड़ाकू जेट भेजे, ताकि रूसी विमानों पर नजर रखी जा सके. हालांकि, रूसी विमान अमेरिका या कनाडा के संप्रभु क्षेत्र में नहीं घुसे और अलास्का के तट से लगे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में ही रहे.

पुतिन-ट्रंप की मुलाकात के बाद दिखे विमान

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में मुलाकात हुई थी. यह कई वर्षों में पहला मौका था, जब पुतिन ने अमेरिकी धरती पर कदम रखा. इस मुलाकात के बाद रूसी विमानों की गतिविधियों ने ध्यान खींचा है.
इस साल की शुरुआत में भी रूस के विमानों को अलास्का के पास देखा गया था. जनवरी में, अमेरिका और कनाडा ने आर्कटिक क्षेत्र में रूसी युद्धक विमानों को रोकने के लिए लड़ाकू जेट भेजे थे. उस समय बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह घटना सुर्खियों में आई थी. अमेरिकी सेना ने तब ग्रीनलैंड में दो लड़ाकू जेट तैनात किए थे, ताकि नॉराड की उपस्थिति को आर्कटिक में मजबूत किया जा सके.

रूसी विमान की क्या है ताकत?

IL-20M ‘कूट-ए’ एक सोवियत-युग का जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया (ELINT) विमान है, जो इल्यूशिन IL-18 यात्री विमान से विकसित किया गया. इसका पहला उड़ान परीक्षण 21 मार्च 1968 को हुआ और यह रूसी वायुसेना में आज भी सीमित उपयोग में है. इलेक्ट्रॉनिक खुफिया क्षमता, लंबी उड़ान और इसका डिजाइन इसकी खासियत हैं. विमान के नीचे सिगार-आकार का रडार पॉड और फ्यूजलेज पर सेंसर ब्लिस्टर इसे IL-18 से अलग करते हैं.

भूपेश बघेल को फिर से मिले छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमान, रविंद्र चौबे के बयान पर सियासत तेज, बीजेपी ने कसा तंज

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है. इस बार पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे के बयान ने नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतरखाने हलचल तेज कर दी है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कांग्रेस का नेतृत्व सौंपने की इच्छा पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे ने जताई है. रविंद्र चौबे छत्तीसगढ़ की सियासत में अपनी विद्वता और विशिष्ट कार्यशैली के लिए जाने पहचाने जाते हैं. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भूपेश को कांग्रेस का नेतृत्व सौंपने की बात कही. अब रविंद्र चौबे के बयान ने प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर उठापटक को फिर उजागर कर दिया है. यूं तो कुछ महीने पहले ही भूपेश बघेल को राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब का प्रभारी बनाया गया है, लेकिन रविंद्र चौबे ने उन्हें प्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व देने की मांग कर डाली.

इतना ही नहीं प्रदेश में किसानों की सरकार फिर से भूपेश बघेल के नेृत्व में बनने की बात कही. इससे कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व यानी दीपक बैज तो असहज हुए ही, बीजेपी को भी कांग्रेस के भीतर चल रहे उठापटक पर तंज कसने का अवसर मिल गया.
बीजेपी ने साधा निशाना
दरअसल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहता है. ऐसे में रविंद्र चौबे ने दो टूक लहजे में कहा कि भूपेश बघेल ही प्रदेश में भाजपा का मुकाबला कर सकते हैं. यही वजह है कि पीसीसी चीफ दीपक बैज ने रविंद्र चौबे को महाज्ञानी नेता बताते हुए उनके वक्तव्य को निजी बयान करार दिया. साथ ही बीते डेढ़ सालों में सरकार के खिलाफ संघर्ष की बात भी कही. दूसरी ओर कांग्रेस के सहप्रभारी विजय जांगिड़ ने कलेक्टिव लीडरशिप की बात कही, लेकिन अब कांग्रेस के भीतरखाने छिड़े बवाल ने भाजपा को तंज कसने का अवसर दे दिया है.
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व को लेकर उठापटक का दौर चल रहा है. ऐसे में रविंद्र चौबे ने भूपेश बघेल को नेतृत्व सौंपने की बात कहकर नई बहस तो छेड़ ही दी है. यह संकेत भी दे दिया है कि पार्टी के भीतर आने वाले दिनों में नेतृत्व को लेकर टकराव और बढ़ेगा. अब कांग्रेस हाईकमान इस बयान को कैसे देखता है और क्या फैसला लेता है, यह तो कुछ वक्त बाद पता चलेगा.

“इन चीजों पर आज तक क्यों नहीं लगाई गई GST? देखें पूरी लिस्ट”

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“इन चीजों पर आज तक क्यों नहीं लगाई गई GST? देखें पूरी लिस्ट”

भारत में जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ था. इसने भारत के टैक्स सिस्टम को सरल बनाया, लेकिन कुछ आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को इससे छूट दी गई है. चलिए जानते हैं कि ऐसा क्यों है और कौन सी चीजें इस सूची में शामिल हैं.

जीएसटी छूट का कारण जीएसटी छूट का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण, आर्थिक विकास और आवश्यक वस्तुओं को किफायती बनाए रखना है. सरकार ने उन वस्तुओं और सेवाओं को छूट दी है, जो आम लोगों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी हैं या जिनका आर्थिक और सामाजिक महत्व है. इनमें खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और कृषि से जुड़े उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा, छोटे व्यवसायों और निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए भी कुछ छूट दी गई हैं.

GST से छूट प्राप्त वस्तुओं की सूची  कृषि उत्पाद ताजा फल, सब्जियां, बिना प्रोसेस्ड अनाज (जैसे चावल, गेहूं, दाल), बुवाई के बीज, जैविक खाद और पशु चारा. ये छूट किसानों को समर्थन देने और खाद्य कीमतों को किफायती रखने के लिए दी गई है.

खाद्य पदार्थ ताजा दूध, दही, छाछ, अंडे, नमक, चीनी और बिना ब्रांड वाले आटे को जीएसटी से छूट है. ये रोजमर्रा की जरूरतें हैं जिन्हें सस्ता रखना सरकार की प्राथमिकता है. स्वास्थ्य सेवाएं और सामान मानव रक्त, टीके, जीवन रक्षक दवाएं, हियरिंग एड्स, व्हीलचेयर और डायग्नोस्टिक किट. ये छूट स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए हैं.

शैक्षिक सामग्री किताबें, समाचार पत्र, स्लेट, चाक और शैक्षिक उपकरण. शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ये छूट दी गई हैं. धार्मिक और चैरिटेबल सेवाएं धार्मिक समारोह, पूजा सेवाएं और चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दी जाने वाली सेवाएं. ये सामाजिक कल्याण को प्रोत्साहित करती हैं.

सार्वजनिक परिवहन गैर-वातानुकूलित रेल, मेट्रो और बस सेवाएं आमतौर पर जीएसटी से मुक्त होते हैं. अन्य कच्चे जूट, रेशम, खादी, हथकरघा उत्पाद और जीवित पशु (वाणिज्यिक प्रजनन को छोड़कर). ये पारंपरिक उद्योगों और पर्यावरण को समर्थन देते हैं.

गैर-जीएसटी उत्पाद पेट्रोल, डीजल और मानव उपभोग के लिए शराब. ये जीएसटी के दायरे से बाहर हैं. छूट क्यों दी जाती है? ये छूट सामाजिक और आर्थिक कारणों से दी जाती हैं. बुनियादी जरूरतों जैसे भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर कर लगाने से आम लोगों पर बोझ बढ़ेगा. कृषि और छोटे व्यवसायों को समर्थन देने के लिए भी छूट जरूरी है. साथ ही निर्यात को शून्य-दर पर कर लगाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जाता है.

“भारत के ग्रोथ पर अमेरिकी एजेंसी की मुहर, राष्ट्रपति ट्रंप को दिखाया आइना, कहा- कुछ नहीं बिगड़ेगा”

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“भारत के ग्रोथ पर अमेरिकी एजेंसी की मुहर, राष्ट्रपति ट्रंप को दिखाया आइना, कहा- कुछ नहीं बिगड़ेगा”

फिच रेटिंग्स ने वृद्धि दर और बाह्य मोर्चे पर मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ भारत की साख को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘BBB-‘ पर बरकरार रखा है. भारत पर प्रस्तावित 50% अमेरिकी शुल्क से चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 6.5 प्रतिशत वृद्धि दर अनुमान पर मामूली नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है.

फिच ने कहा, ” यदि प्रस्तावित माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार अपनाए जाते हैं, तो इससे उपभोग को बढ़ावा मिलेगा तथा वृद्धि संबंधी कुछ जोखिम कम हो जाएंगे.”

केंद्र ने जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने पर गठित मंत्रिसमूह के समक्ष ”योग्यता” और ”मानक” वस्तुओं व सेवाओं के लिए पांच और 18 प्रतिशत की द्वि-स्तरीय कर संरचना के साथ ही पांच से सात वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की दर का प्रस्ताव रखा है. इस प्रस्ताव में मौजूदा 12 और 28 प्रतिशत कर ‘स्लैब’ को समाप्त करना शामिल है.

भारत के ग्रोथ पर यूएस एजेंसी की मुहर फिच ने कहा, ” भारत की रेटिंग को उसकी मजबूत वृद्धि और ठोस बाह्य वित्तीय स्थिति का समर्थन प्राप्त है.” ‘BBB-‘ सबसे निचली निवेश श्रेणी की रेटिंग है. यह रेटिंग वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी द्वारा भारत की साख रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर ‘बीबीबी’ करने के एक पखवाड़े के भीतर आई है. गौरतलब है कि एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 14 अगस्त को भारत की साख को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-‘ से बढ़ाकर ‘बीबीबी’ कर दिया था. एसएंडपी ने 18 वर्ष में पहली बार भारत की साख को बढ़ाया है.

एक अन्य वैश्विक रेटिंग एजेंसी मॉर्निंग डीबीआरएस ने इस वर्ष मई में संरचनात्मक सुधारों का हवाला देते हुए भारत की रेटिंग बढ़ाकर ‘बीबीबी’ कर दी थी. एजेंसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के समान है और 2.5 प्रतिशत के ‘बीबीबी’ औसत से काफी ऊपर है. इसने कहा कि भारत का आर्थिक परिदृश्य समकक्ष देशों की तुलना में मजबूत बना हुआ है, हालांकि पिछले दो वर्ष में इसकी गति धीमी हुई है.

टैरिफ का नहीं होगा असर एजेंसी ने कहा कि इसमें मजबूत सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, निजी निवेश में वृद्धि और अनुकूल जनसांख्यिकी के कारण मध्यम अवधि में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि क्षमता का अनुमान लगाया गया है. फिच ने कहा, ” यदि प्रस्तावित माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार अपनाए जाते हैं, तो इससे उपभोग को बढ़ावा मिलेगा तथा वृद्धि संबंधी कुछ जोखिम कम हो जाएंगे.” रेटिंग एजेंसी ने हालांकि ‘बीबीबी’ वर्ग के देशों की तुलना में उच्च घाटे और कर्ज का हवाला देते हुए फिच ने राजकोषीय मोर्चे पर चिंता जाहिर की है.