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“चाणक्य-चंद्रगुप्त की धरती है बिहार, संकल्प खाली नहीं जाता… गयाजी की रैली में बोले PM मोदी”

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“चाणक्य-चंद्रगुप्त की धरती है बिहार, संकल्प खाली नहीं जाता… गयाजी की रैली में बोले PM मोदी”

पीएम मोदी ने बिहार के गयाजी में आज राज्य में कई बड़ी सौगात दी. पीएम मोदी ने बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शहरी विकास और जल आपूर्ति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन किया.

इस मौके पर पीएम मोदी ने रैली को भी संबोधित किया. जिसमें पीएम मोदी ने कहा, “गयाजी की यह धरती अध्यात्म और शांति की धरती है, यह भगवान बुद्ध को बोध कराने वाली पावन भूमि है… यहां के लोग चाहते थे कि इस नगर का नाम गया नहीं, बल्कि गयाजी हो. मैं इस निर्णय के लिए बिहार सरकार को बधाई देता हूं. मुझे खुशी है कि बिहार की डबल इंजन सरकार गयाजी के तेज विकास के लिए तेज़ी से काम कर रही है.”

RJD और उसके सहयोगी दल बिहार की जनता को सिर्फ़ अपना वोट बैंक समझते हैं. उन्हें गरीबों के सुख-दुख, मान-सम्मान की कोई चिंता नहीं है. कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री ने मंच से कहा था कि वे बिहार के लोगों को अपने राज्य में घुसने नहीं देंगे… बिहार की जनता के साथ कांग्रेस के दुर्व्यवहार को देखने के बाद भी RJD के लोग गहरी नींद सो रहे थे. बिहार की NDA सरकार कांग्रेस, INDI गठबंधन के इस नफरती अभियान का जवाब दे रही है.

गयाजी की रैली में पीएम मोदी तब तक मोदी चैन से नहीं बैठेगा… पीएम मोदी ने कहा कि मेरा संकल्प है कि जब तक हर जरूरतमंद को पक्का घर नहीं मिल जाता, मोदी चैन से नहीं बैठेगा. इसी सोच के साथ, पिछले 11 सालों में 4 करोड़ से ज़्यादा गरीबों को पक्का घर दिया गया है. अकेले बिहार में 38 लाख से ज़्यादा घर बनाए गए हैं… बिहार चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की धरती है… इस धरती पर लिया गया हर संकल्प कभी व्यर्थ नहीं गया है. जब कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, हमारे निर्दोष नागरिकों को उनका धर्म पूछकर मारा गया, तब मैंने बिहार की इस धरती से आतंकियों को मिट्टी में मिलाने की बात कही थी. आज दुनिया देख रही है कि बिहार की धरती पर लिया गया संकल्प पूरा हुआ है.

आतंकवादी चाहे पाताल में छिप जाएं… प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा नीति की नई लकीर खींच दी है, अब भारत में आतंकी भेजकर हमले कराकर कोई बच नहीं सकेगा. आतंकवादी चाहे पाताल में क्यों न छिप जाएं भारत की मिसाइलें उन्हें दफन करके रहेगी. पीएम मोदी ने कहा कि लालटेन राज में यहां कैसी दुर्दशा थी. लालटेन राज में ये इलाका लाल आतंक से जकड़ा था। माओवादियों के कारण शाम के बाद कहीं आना-जाना मुश्किल था। लालटेन राज में गयाजी जैसे शहर अंधेरे में डूबे रहते थे। हजारों गांवों तक बिजली के खंभे नहीं पहुंचते थे… बिहार की कितनी पीढ़ियों को इन लोगों ने बिहार से पलायन के लिए मजबूर कर दिया था.”

“भोपाल में 92 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश: अंडरवर्ल्ड का नया धंधा, डी-गैंग की एंट्री”

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“भोपाल में 92 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश: अंडरवर्ल्ड का नया धंधा, डी-गैंग की एंट्री”

भोपाल के हज़ारों घरों में से एक साधारण-सा मकान, जगदीशपुरा इलाके में मकान नंबर-11, दरअसल करोड़ों की ड्रग्स फैक्ट्री थी और जिसके तार डी-गैंग से जुड़े थे. 16 अगस्त को राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की टीम ने छापा मारा तो भीतर से बरामद हुआ 61.20 किलो लिक्विड मेफ़ेड्रोन (एमडी), जिसकी क़ीमत करीब ₹92 करोड़ आँकी गई।

साथ ही 541 किलो से अधिक केमिकल्स भी मिले, जिनसे इस घातक ड्रग को तैयार किया जाता था.

इस सनसनीखेज़ खुलासे ने साफ कर दिया है कि दाऊद इब्राहिम के पुराने गुर्गे अब मध्यप्रदेश तक अपने नेटवर्क फैला चुके हैं. इस छापे से तुर्की से लेकर भोपाल तक फैला हुआ अंडरवर्ल्ड का जाल अब खुलकर सामने आ गया है. तुर्की में बैठे कुख्यात तस्कर सलीम डोला ने इस नेटवर्क को फंडिंग और ट्रेनिंग दी, जबकि भोपाल में उसके साथी फैक्ट्री चलाकर मेफेड्रोन तैयार कर रहे थे. यह वही डोला है जो कभी दाऊद के करीबी इकबाल मिर्ची का सहयोगी रहा है और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी का बड़ा खिलाड़ी बन चुका है.

कभी मुंबई पर दाऊद इब्राहिम और उसके गुर्गों का ख़ौफ़ था. सुपारी, रंगदारी और गैंगवार उनकी पहचान थी. लेकिन अब खुफिया एजेंसियों का दावा है कि डी-कंपनी ने अपना धंधा बदल लिया है. सूत्रों के मुताबिक़,दाऊद, सलीम उर्फ़ इस्माइल उर्फ़ डोला और उमैद-उर-रहमान पाकिस्तान और दुबई से आने वाले पैसों के सहारे भारत में मेफ़ेड्रोन (एमडी) का नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं. सलीम डोला, जो पहले स्मगलर इक़बाल मिर्ची का साथी रहा है, अब तुर्की से इस पूरे ऑपरेशन को चला रहा है. उसका भांजा मुस्तफ़ा कुब्बावाला, जिस पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है, इस धंधे में दाएँ हाथ की तरह काम कर रहा है.

छापे में जो फैक्ट्री मिली, वह किसी लोकल जुगाड़ से नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल-ग्रेड लैब थी. अंदर से ड्रग मिक्सिंग मशीनें, तापमान नियंत्रित रिएक्टर और पूरा सेटअप मिला. इस ऑपरेशन की ज़िम्मेदारी थी अशोकनगर के फै़सल कुरैशी पर, जिसने फार्मेसी में डिप्लोमा किया गुजरात से फार्मा की ट्रेनिंग ली थी. उसके साथ था विदिशा का रज़्ज़ाक़ खान, जिसने फैक्ट्री के लिए सुरक्षित ठिकाना और ज़रूरी इंतज़ाम किए। दोनों को यही काम सौंपा गया था कि वे एक सुरक्षित ठिकाना खोजें और वहां से मेफेड्रोन तैयार करें.

जाँच में खुलासा हुआ कि ज़रूरी केमिकल्स मिथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलएमीन, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और 2-ब्रोमो मुंबई के भिवंडी और ठाणे से लाए जा रहे थे. गिरफ़्तार आरोपियों ने कबूल किया कि 400 किलो तक कच्चा माल पहले ही मुंबई से भोपाल पहुँच चुका था, सलीम डोला के इशारों पर. अजहरुद्दीन इदरीसी नामक शख्स को इसके लिए पैसे का लालच देकर इस्तेमाल किया गया.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह मकान पिछले 7 साल से बंद पड़ा था. फिर भी 14 अगस्त को, छापे से सिर्फ़ दो दिन पहले, यहां बिजली का मीटर रिकॉर्ड तेज़ी से लगवा दिया गया. फाइल बिना किसी फील्ड वेरिफिकेशन के पास कर दी गई और चंद घंटों में कनेक्शन दे दिया गया. अब एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि किस अफ़सर ने मोटी रकम लेकर यह सुविधा दिलाई.

एजेंसियों का मानना है कि इस फैक्ट्री से तैयार माल सिर्फ़ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में सप्लाई होना था. सूरत और मुंबई से भी पांच और आरोपियों को पकड़ा गया है, जिससे साफ़ है कि यह सिर्फ़ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि पैन-इंडिया नेटवर्क का हिस्सा है.

यह मामला सिर्फ़ एक ड्रग फैक्ट्री का नहीं, बल्कि उस अंडरवर्ल्ड की वापसी का सबूत है जिसे कभी मुंबई ने झेला था. फर्क सिर्फ़ इतना है कि अब यह गैंग बंदूक और गोली छोड़कर केमिकल और कैश पर दांव खेल रहा है.भोपाल से निकली ₹92 करोड़ की यह खेप दिखाती है कि दाऊद का भूत अभी जिंदा है और अब वह देश के दिल से खेल रहा है.

“‘आयोग को ‘आधार’ लेना ही होगा, लोगों के नाम जुड़वाएं राजनीतिक दल’, बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट”

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“‘आयोग को ‘आधार’ लेना ही होगा, लोगों के नाम जुड़वाएं राजनीतिक दल’, बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट”

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस बात के लिए नाराजगी जताई कि चुनाव आयोग के कहने के बावजूद राजनीतिक पार्टियां आपत्ति दर्ज कराने नहीं पहुंची.

आयोग ने कोर्ट को बताया कि किसी पार्टी ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई, जबकि 2.63 लाख नए वोटर्स ने अर्जी दी है. चुनाव आयोग की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि राजनीतिक पार्टियों से ज्‍यादा वोटर्स ही जागरूक हैं.’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार के लिए राजनीतिक दल भी आगे आएं और लोगों की मदद करें. साथ ही ये भी कहा कि आयोग को प्रमाण के रूप में बाकी वैध दस्‍तावेजों के साथ ‘आधार’ को भी मानना होगा. कोई वयक्ति 11 वैध दस्‍तावेजों में से कोई एक डॉक्‍युमेंट या आधार के जरिये अपना नाम जुड़वा सकेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों के रवैये पर सख्‍त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि वे राजनीतिक दलों के व्यवहार से हैरान हैं और पूछा कि कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में इतनी दूरी क्यों है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब पार्टियों के पास इतनी बड़ी संख्या में बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं, तो वे क्या कर रहे हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर राजनीतिक दल ज्‍यादा जिम्‍मेदार होते तो आज हालात बेहतर होते.

मदद को आगे आएं राजनीतिक दल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही हर व्यक्ति को नाम जुड़वाने या हटाने का अधिकार है, लेकिन यह भी जरूरी है कि बिहार की 12 मान्यता प्राप्त पार्टियां अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) के जरिए इस काम में मदद करें.

कोर्ट ने 14 अगस्‍त को सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को हलफनामा दायर करने को कहा था और ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 65 लाख नामों की लिस्‍ट प्रकाशित करने को कहा था. आयोग ने लिस्‍ट पब्लिश की है और कारण भी बताए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें सुप्रीम कोर्ट ने सभी 12 राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे उन 65 लाख लोगों की सूची ERO (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) को दें, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.

कोर्ट इस बात से हैरान थी कि चुनाव आयोग के अनुसार, 1.60 लाख BLA होने के बावजूद काफी कम आपत्तियां दर्ज की गई हैं.

कोर्ट ने कहा कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि चुनाव आयोग उन्हें आपत्ति दाखिल करने की अनुमति नहीं दे रहा, तो अब वे खुद आगे आकर मतदाताओं की मदद करें.

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चुनाव आयोग को आधार कार्ड को जरूर स्वीकार करना होगा, और किसी भी प्रकार के अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी 12 राजनीतिक दलों को शामिल किया और कहा कि वे सभी अपनी स्थिति के बारे में कोर्ट को एक स्टेटस रिपोर्ट दें. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर उन्हें बड़ी संख्या में लोगों की प्रतिक्रिया मिलती है, तो वे इस पर और विचार करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को आदेश दिया कि वे सभी राजनीतिक दलों को इस फ़ैसले की जानकारी दें और उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए कहें.

कोर्ट ने अपने 14 अगस्त के आदेश को दोहराते हुए यह भी कहा कि लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और उन्हें व्यक्तिगत रूप से कहीं जाने की जरूरत नहीं है.

आइए जानते हैं, इससे पहले कोर्ट में क्‍या-क्‍या हुआ.

कोर्ट ने पूछा- कोई आया, आयोग बोला- नहीं सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से पूछा, ’12 पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों में से कितनी पार्टियां इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट आई हैं?’ चुनाव आयोग ने जवाब दिया, ‘कोई नहीं.’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में आरजेडी की ओर से कपिल सिब्बल पेश हुए. उन्‍होंने कहा कि आरजेडी के मनोज झा की ओर से वो पक्ष रख रहे हैं. सात अन्य राजनीतिक पार्टियों की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए.

इस पर आरजेडी की ओर से पेश हुए वकील सिब्बल ने कहा कि वो आरजेडी के लिए ही हैं, जबकि सिंघवी ने बताया कि कई और पार्टियां भी इस मुद्दे से जुड़ी हुई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने फिर पूछा, ‘कितने बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए गए हैं और क्या आपको और एजेंटों की जरूरत है?’

चुनाव आयोग ने बताया कि किसी भी पार्टी ने इस संबंध में कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बीजेपी का भी नाम लिया. इस पर सिब्बल ने कहा कि बीजेपी क्यों आएगी?

आयोग के वकील ने बताया- क्‍या करना होगा?

चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि ड्राफ्ट लिस्ट में नाम शामिल न होने के कारणों को वेबसाइट पर ज़िला स्तर पर सार्वजनिक किया गया है. उन्होंने कहा कि यह जानकारी पहले बीएलए को भी दी गई थी. पंचायत और बीडीओ कार्यालयों में भी लिस्ट लगाई गई थी और सोशल मीडिया पर भी इसकी जानकारी दी गई थी.

द्विवेदी ने बताया कि इन 65 लाख लोगों को डिजिटल तरीके से भी अपना आधार कार्ड जमा कर जानकारी हासिल करने का विकल्प दिया गया था. अब अगर किसी को सुधार कराना है तो उसे आवेदन के साथ फॉर्म 6 भरकर दावा करना होगा.

इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा, ‘तो क्या इन लोगों को आपत्ति दर्ज करानी होगी?’ चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि सुधार के लिए आवेदन या फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र देना होगा. कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से आवेदन कर सकता है.

‘1.61 लाख BLA, लेकिन किसी ने…’चुनाव आयोग (EC) ने राजनीतिक पार्टियों के रवैये पर सवाल खड़े किए कि कोई पार्टी आपत्ति लेकर नहीं आई. आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि जो पार्टियां मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं, उन्होंने अब तक एक भी लिखित आपत्ति दर्ज नहीं कराई है. उन्होंने बताया कि इन पार्टियों के पास 1 लाख 61 हजार बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं. एक BLA एक दिन में 10 आपत्तियों का सत्यापन कर सकता है, लेकिन किसी ने भी इसका फायदा नहीं उठाया.

जिन्‍हें आपत्ति, उन्‍हें बिहार आने की जरूरत नहीं चुनाव आयोग की ओर से ये भी बताया गया कि 2 लाख 63 हजार नए वोटरों ने 1 अगस्त के बाद मतदाता सूची में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है. कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ऑनलाइन या ऑफलाइन दावा दाखिल कर सकता है. इसके लिए उसे बिहार आने की जरूरत नहीं है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने चुनाव आयोग को उन 65 लाख लोगों की बूथ-वार सूची जारी करने का निर्देश दिया था, जिनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं थे. कोर्ट ने यह भी कहा था कि लिस्ट में नाम न होने की वजह भी बताई जाए.

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि निर्देशों का पालन किया गया है और 65 लाख लोगों की बूथ-वार लिस्ट वेबसाइट पर डाल दी गई है. इसमें नाम न होने के कारण भी बताए गए हैं और ये जानकारी ज़िला स्तर पर उपलब्ध है.

इसके अलावा, बीएलए और सोशल मीडिया के जरिए भी यह जानकारी साझा की गई है कि लोग डिजिटल माध्यम से आधार कार्ड जमा कर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. अब अगर किसी को सुधार कराना है, तो उसे आवेदन के साथ फॉर्म 6 के ज़रिए दावा करना होगा.

राजनीतिक दलों से ज्‍यादा जागरूक हैं वोटर्स: SC चुनाव आयोग की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि मतदाता राजनीतिक दलों से ज्‍यादा जागरूक हैं.’ दरअसल, चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने में आम लोग राजनीतिक पार्टियों से ज्‍यादा सक्रिय हैं. आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि राजनीतिक दल सिर्फ ‘हल्ला मचा रहे हैं’ और वे चुनाव आयोग की मदद नहीं कर रहे. उन्होंने बताया कि अब तक पार्टियों ने एक भी लिखित आपत्ति नहीं दी है, जबकि 2.63 लाख नए वोटरों ने खुद ही आवेदन किया है. जस्टिस बागची ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘मतदाता राजनीतिक दलों से ज्‍यादा जागरूक हैं.’

22 लाख लोग मृत पाए गए, 8 लाख डुप्लिकेट  राकेश द्विवेदी ने कहा कि 65 लाख में से 22 लाख लोगों को मृत पाया गया है और 8 लाख डुप्लिकेट हैं. जो बाकी 35 लाख लोग हैं, अगर वे आगे आते हैं तो उनके दावों की जांच की जाएगी. उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह जाता है, तो उसे ख़ुद चुनाव आयोग को सूचित करना होता है. लेकिन, राजनीतिक दल सहयोग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार के लोग इस मामले में ज्‍यादा सतर्क हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी पार्टियों और संगठनों से मदद मांगी है ताकि पता लगाया जा सके कि गलती कहां हुई है.

‘BLA चाहें तो… समय की कोई कमी नहीं’ चुनाव आयोग ने कहा कि अगर हर बूथ लेवल एजेंट (BLA) एक दिन में 10 लोगों की जांच करे, तो 16 लाख नामों को कवर किया जा सकता है. समय की कोई कमी नहीं है. एक BLA को एक दिन में 10 फॉर्म दाखिल करने का अधिकार है, जिसे डिजिटल या व्यक्तिगत रूप से जमा किया जा सकता है. चुनाव आयोग ने आगे कहा, ‘राजनीतिक दलों को आगे आकर हमारी मदद करनी चाहिए.’

जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल किया, ‘क्या आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार सिर्फ व्यक्ति को है?’ इस पर द्विवेदी ने जवाब दिया, ‘हां, लेकिन हम इस पर सख़्ती से विचार नहीं कर रहे हैं. हम अभी भी जांच कर रहे हैं.’

याचिकाकर्ताओं ने क्‍या दलीलें दीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने आरोप लगाया कि मतदाता तो पहल कर रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग (EC) ही समस्याएं पैदा कर रहा है. उन्होंने कहा कि आयोग को जमीनी हकीकत को समझने की जरूरत है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे हैं और मीडिया रिपोर्ट्स में भी इसका जिक्र है.

एक अन्य वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि 85,000 लोग सामने आए हैं, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग, जैसे कि प्रवासी मजदूर, राज्य से बाहर हैं और बाढ़ के हालात के कारण भी कई लोग आवेदन नहीं कर पाए होंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी आरजेडी ने सिर्फ़ आधे निर्वाचन क्षेत्रों में ही BLA तैनात किए हैं.

भूषण ने बताया कि चुनाव आयोग कह रहा है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें फॉर्म 6 के जरिए दावा करना होगा. जबकि यह फॉर्म नए मतदाताओं के लिए होता है, न कि नाम में सुधार के लिए. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग आधार कार्ड के अलावा दूसरे दस्तावेजों की मांग कर रहा है, जिससे लोग परेशान हैं. उन्होंने कोर्ट को एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण भी दिया, जिसे मृत घोषित कर दिया गया था. जब वह ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) के पास गया, तो उन्होंने कहा कि सिर्फ़ आधार पर्याप्त नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट की सख्‍त टिप्‍प्‍णी सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने राजनीतिक दलों को सख़्त लहजे में फटकार लगाई. उन्होंने पूछा, ‘1 अगस्त से अब तक राजनीतिक दलों ने SIR (Special Integrity Review) ड्राफ्ट लिस्ट में सुधार के लिए क्या किया है?’ उन्होंने कहा, ‘अगर राजनीतिक दल ज्यादा जिम्मेदार होते और अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से पालन करते, तो आज हालात बहुत बेहतर होते.’

कोर्ट ने कहा कि वह सभी 12 राजनीतिक पार्टियों से जवाब मांग रहे हैं और इस मामले पर नजर बनाए रखेंगे. वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट से अपील की कि बाहर किए गए लोगों को निष्पक्ष सुनवाई का मौका देने के लिए SIR के लिए और ज्यादा समय दिया जाना चाहिए.

CG: तोमर बंधुओं की संपत्तियों की कुर्की पर फैसला एक दिन बढ़ा, अब आज होगी सुनवाई ..

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CG: तोमर बंधुओं की संपत्तियों की कुर्की पर फैसला एक दिन बढ़ा, अब आज होगी सुनवाई ..

तोमर बंधुओं की संपत्तियों को कुर्क करने पर गुरुवार को सेशन कोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन, इसे एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया गया। अब इसकी सुनवाई 22 अगस्त को होगी।

न्यायालय के फैसले के बाद जिला प्रशासन कुर्की की कार्रवाई करेगा। सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग, मारपीट और आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य गंभीर अपराधों में फरार चल रहे वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित तोमर की संपत्तियों को कुर्क किया जाना है। जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा संपत्तियों की पहचान करने के बाद रायपुर कलेक्टर के पास चार संपत्ति कुर्क करने प्रतिवेदन भेजा गया है।

CG: मोदी की गारंटी को लागू करने की मांग को लेकर नगरीय निकायों में 22 अगस्त को कलम बंद, काम बंद हड़ताल ..

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CG: मोदी की गारंटी को लागू करने की मांग को लेकर नगरीय निकायों में 22 अगस्त को कलम बंद, काम बंद हड़ताल ..

छत्तीसगढ़ के दल्लीराजहरा में नगरीय निकाय कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष गोविंद साहू के अनुसार मोदी की गारंटी को लागू करने की मांग को लेकर नगरीय निकायों में 22 अगस्त को कलम बंद, काम बंद हड़ताल होगी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन एवं अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय के आह्वान पर हड़ताल की जाएगी। शासकीय सेवकों को केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता, डीए एरियस को जीपीएफ में समायोजित करने की मांग है।वेतन विसंगति दूर करने, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना के आधार पर समस्त सेवा लाभ देने एवं नगरीय निकाय के कर्मचारियों को प्रतिमाह एक तारीख को वेतन भुगतान करने एवं नगरीय निकाय के कर्मचारियों को निकायों में पद स्वीकृत कर कर्मचारियों की पदोन्नति करने सहित 13 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल होगी।

CG: यात्री सुविधाओँ को बढ़ाने के साथ ही देशभर के विभिन्न राज्यों को जोड़ने के लिए ऑपरेटरों को टूरिस्ट परमिट मिलेगा ..

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CG: यात्री सुविधाओँ को बढ़ाने के साथ ही देशभर के विभिन्न राज्यों को जोड़ने के लिए ऑपरेटरों को टूरिस्ट परमिट मिलेगा। राज्य परिवहन प्राधिकार आवेदनों की जांच और सुनवाई कर इसे जारी करेंगे। 

छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों के लिए करीब 100 बसों का संचालन रायपुर के साथ ही अन्य शहरों से होता है। रायपुर से मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, पुणे, नागपुर, हैदराबाद, गोवा, इंदौर, जबलपुर, भुवनेश्वर, जमशेदपुर, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी के लिए बस चलती है।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से देशभर के लिए बसे चलेंगी। हर साल राजधानी रायपुर सहित अन्य शहरों से दूसरे राज्यों में 1,50,000 से ज्यादा यात्री हर साल सफर करते है। लेकिन, बसों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। कोरोनाकॉल के बाद से दूसरे राज्यों में जाने वाले यात्रियों की संख्या को देखते हुए इसकी कवायद चल रही है। इससे यात्रियों को सुविधा के साथ ही सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दूसरी तरफ आवागमन के साधन बढ़ने से लोगों को ट्रेन की टिकटों के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यात्रियों को आसानी से बसों से उनके रूट से आवागमन करने का लुफ्त मिलेगा। बता दें कि इस समय देशभर के 9 राज्यों के 18 महत्वपूर्ण शहरों के लिए राजधानी रायपुर से लेकर अन्य शहरों से यात्री बसों का संचालन होता है।

छत्तीसगढ़ से सटे हुए ओडिशा के जगन्नाथपुरी, भुवनेश्वर, महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, उत्तरप्रदेश में अयोध्या, प्रयागराज, बनारस, मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर और जबलपुर, तेलंगाना में हैदराबाद, आंध्रप्रदेश में विशाखापट्नम और दिल्ली जाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसमें अधिकांश यात्री स्थानीय डेस्टिनेशन के साथ धार्मिक यात्रा पर जाते है।

छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों के लिए करीब 100 बसों का संचालन रायपुर के साथ ही अन्य शहरों से होता है। रायपुर से मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, पुणे, नागपुर, हैदराबाद, गोवा, इंदौर, जबलपुर, भुवनेश्वर, जमशेदपुर, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी के लिए बस चलती है। वहीं दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और रायगढ़ से पटना, जगन्नाथपुरी, भुवनेश्वर, आरकू-वैली, विशाखापट्टनम, इंदौर और भोपाल सहित अन्य शहरों के लिए बसों का संचालन किया जाता है।

Raipur: वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा, जीएसटी घटने से वस्तुओं के दाम कम होंगे ..

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Raipur: वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा, जीएसटी घटने से वस्तुओं के दाम कम होंगे ..

केंद्र सरकार GST की दो स्लैब खत्म करेगी वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा जीएसटी घटने से वस्तुओं के दाम कम होंगे गरीब उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी लोगों के बचत क्षमता में वृद्धि होगी छग के GST कलेक्शन में कोई खासा प्रभाव नहीं पड़ेगा मोदी जी पहले IT छूट को 12 लाख ले गए थे इससे निम्न और मध्यम वर्ग को राहत मिला था ग्रुप ऑफ मिनिस्टर की मीटिंग में कई चर्चाएं हुई है.

कांकेर में तिरंगा फहराने वाले व्यक्ति की नक्सलियों ने की हत्या, जन अदालत लगाकर मारा

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के एक सुदूर गांव में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने वाले व्यक्ति की नक्सलियों ने हत्या कर दी. नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के शक में उसको पकड़ा और बेरहमी से मार दिया. पीड़ित की पहचान छोटेबेटिया पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिनगुंडा गांव के मनीष नुरेती के रूप में की. सोमवार (18 अगस्त) को नक्सलियों का एक ग्रुप हथियारों के साथ गांव में पहुंचा और नुरेती और दो अन्य को अपने साथ ले गया.

नक्सलियों ने एक एक जन अदालत लगाई जहां नुरेती को मार दिया, जबकि बाकी दो को पिटाई के बाद रिहा कर दिया, माओवादियों ने एक पोस्टर लगाकर दावा किया कि नुरेती पुलिस का मुखबिर था. हालांकि, यह सच नहीं है. कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक आईके एलेसेला ने कहा कि नुरेती का शव अभी बरामद नहीं हुआ है. उसके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है. नक्सली अक्सर बिनगुंडा गांव आते रहते हैं.

मृतक का पुलिस के साथ नहीं था कोई संबंध
पिछले डेढ़ साल में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाकर चार-पांच लोगों की हत्या कर दी है. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतकों में से किसी का भी पुलिस से कोई संबंध नहीं था. बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया, “एक छोटा वीडियो भी सामने आया है जिसमें मनीष नुरेटी स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेते दिख रहे हैं.”

राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने से नाराज थे नक्सली
आईजी ने कहा कि हत्या की जांच की जा रही है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में बच्चों समेत कुछ ग्रामीणों को ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए तिरंगा फहराते हुए दिखाया गया है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि नक्सली 15 अगस्त को गांव में राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर नुरेटी और कुछ अन्य लोगों से नाखुश थे. उन्होंने बताया कि नुरेती वीडियो में दिख रहे ग्रामीणों में से एक था.

वाणिज्य उद्योग मंत्री 23 अगस्त को राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन में होंगे शामिल

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वाणिज्य उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन शनिवार 23 अगस्त को सवेरे 11:00 बजे राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन में शामिल होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री देवांगन माना विमानतल के सामने जैनम मानस भवन में सहकार भारती राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन में भाग लेंगे।

राजभवन परिसर में अधिकारियों-कर्मचारियों ने की साफ-सफाई

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स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुक्रवार की सुबह राजभवन परिसर में साफ-सफाई की गई। राजभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सुबह 7 से 8 बजे तक राजभवन परिसर के अलग-अलग स्थानों पर झाडू लगाकर कचडे़ को एकत्र कर उसका निपटान किया।