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CG: ईसीआई ने दूरदर्शन और आकाशवाणी पर मुफ्त प्रसारण के समय के लिए राष्ट्रीय और राज्यीय दलों को डिजिटल वाउचर आवंटित किए…

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भारत निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 की धारा 39A के तहत, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनावों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को दूरदर्शन और आकाशवाणी (AIR) पर प्रसारण समय के आवंटन के लिए निर्देश जारी किए हैं। तदनुसार, इन 5 चुनावी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों के लिए सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीतिक दलों को आईटी (IT) प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल समय वाउचर जारी किए गए हैं।

प्रसारण की अवधि प्रत्येक चरण में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची के प्रकाशन की तारीख और संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान की तारीख से दो दिन पहले के बीच निर्धारित की जाएगी। वास्तविक प्रसारण का समय राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों और संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी  के कार्यालय के अधिकारियों की उपस्थिति में ‘ड्रॉ ऑफ लॉट्स’ (लॉटरी) के माध्यम से पहले से तय किया जाएगा। इस योजना के तहत, प्रत्येक दल को राज्य के भीतर क्षेत्रीय नेटवर्क पर समान रूप से प्रदान करने के लिए दूरदर्शन और आकाशवाणी दोनों पर 45 मिनट का आधार समय (base time) आवंटित किया गया है।संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पिछले विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अतिरिक्त समय आवंटित किया गया है।

राजनीतिक दलों को प्रासंगिक दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए, अग्रिम रूप से ट्रांसक्रिप्ट और रिकॉर्डिंग जमा करना आवश्यक है। रिकॉर्डिंग प्रसार भारती द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले स्टूडियो में या दूरदर्शन/आकाशवाणी केंद्रों पर की जा सकती है।पार्टी प्रसारणों के अलावा, प्रसार भारती निगम दूरदर्शन और आकाशवाणी पर अधिकतम दो पैनल चर्चाओं और/या बहसों का आयोजन करेगा। प्रत्येक पात्र राजनीतिक दल इस कार्यक्रम के लिए एक प्रतिनिधि को नामित कर सकता है, जिसका संचालन एक अनुमोदित समन्वयक द्वारा किया जाएगा।

CG: 14 मार्च को संपन्न कक्षा 12वीं की हिन्दी परीक्षा हुई निरस्त…

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10 अप्रैल को पुनः होगी परीक्षा

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा परीक्षा समिति की बैठक 23 मार्च 2026 को आयोजित की गई, जिसमें सभी तथ्यों पर विचार-विमर्श के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि 14 मार्च 2026 को संपन्न हिन्दी विषय की परीक्षा को निरस्त किया जाता है। उक्त परीक्षा अब 10 अप्रैल 2026 को प्रातः 9 बजे से 12.15 बजे तक पुनः आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा सभी परीक्षार्थियों से अनुरोध किया गया है, कि वे निर्धारित तिथि पर परीक्षा केन्द्र में अनिवार्य रूप से परीक्षा देने उपस्थित हों।

परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी मण्डल की आधिकारिक वेबसाइट https://www.cgbse.nic.in/ पर उपलब्ध है।

ज्ञातव्य है कि 14 मार्च 2026 को आयोजित कक्षा 12 वीं हिन्दी विषय की परीक्षा के संबंध में मंडल द्वारा यह सूचित किया जाता है कि परीक्षा के उपरांत 15 एवं 16 मार्च 2026 को सोशल मीडिया एवं विभिन्न समाचार पत्रों में प्रश्नपत्र (सेट ‘बी’) के लीक होने के दावे सामने आए। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल साइबर थाना में लिखित सूचना दी गई तथा सिटी कोतवाली में प्राथमिकी (थ्प्त्) दर्ज कराई गई। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मण्डल के अधिकारियों ने बताया कि मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जाँच सुनिश्चित की जा रही है तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

CG: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत से कृषि शिक्षा और अनुसंधान में आएगा बड़ा बदलाव…

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कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग विषय पर पॉच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न’

राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञो द्वारा प्रशिक्षित हुए कृषि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक’

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षण एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कृषि महाविद्यालय रायपुर में 16 से 20 मार्च तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विभिन्न प्रविधियों एवं उपकरणों का प्रभावी उपयोग कर इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने के गुर सिखाया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 17 महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आई.आई.टी. भिलाई, आई.आई.आई.टी. नया रायपुर, एन.आई.टी. रायपुर, आई. आई. एम. रायपुर, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिर्वसिटी नया रायपुर, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, आई.सी.ए.आर. – नार्म हैदराबाद तथा आई.सी.ए.आर – एन.आई.बी.एस.एम. बरोण्डा जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को कृषि शिक्षा अनुसंधान में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस की विभिन्न टेकनिक्स एवं टूल्स के प्रभावी उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।

इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.), भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश तथा आई.सी.ए.आर.-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एन.आई.बी.एस.एम.) बरोण्डा के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि महाविद्यालय, रायपुर में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश का उपयोग पर आयोजित पॉच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन दिनांक 20 मार्च 2026 को डॉ. प्रशंात कविश्वर, महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर के मुख्य अतिथ्य तथा डॉ. ए. के. दवे, निदेशक शिक्षण एवं परीक्षा नियंत्रक, डॉ. अजय वर्मा, अधिष्ठाता, कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, रायपुर, डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर की गरिमामयी उपस्थिति तथा डॉ. आरती गुहे, अधिष्ठाता, कृषि संकाय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के 17 कृषि महाविद्यालयों के 85 सहायक प्राध्यापक, सह प्राध्यापक एवं प्राध्यापकों ने सक्रिय सहभागिता की ।

डॉ. प्रशांत कविश्वर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है, इससे गुणवत्ता में वृद्धि तथा समय की बचत होती है किन्तु इस पर पूर्ण निर्भरता से विपरित परिणाम भी हो सकते है, कोविड 19 महामारी के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग में तेजी से वृद्धि हुई है एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं बल्कि एक सहायक साधन है।

उन्होने ए आई के उपयोग के अनेक उदाहरण देते हुए प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों से शोघ एवं शिक्षण में इसकेे समुचित एवं बुद्धिमत्ता पूर्ण उपयोग करने का अनुरोध किया। डॉ. आरती गुहे, अधिष्ठाता एवं समन्वयक ने पॉच दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया।

डॉ. अजय वर्मा ने बताया की ए.आई. से सृजित जानकारी एवं आकडों का पुष्टीकरण करने के उपरान्त ही उनका उपयोग करे। ए.आई टूल्स, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में आकडों के विश्लेषण, सारणीकरण, प्रस्तुतीकरण एवं प्रकाशन अत्यन्त उपयोगी है। डॉ. ए. के दवे ने ए.आई के क्षेत्र में कार्यरत देश के विभिन्न ख्यातिलब्ध संस्थाओं में कार्यरत विशेषज्ञों को एक स्थान में बुलाकर प्रभावी प्रशिक्षण एवं परिचर्चा आयोजन हेतु प्रशंसा की। डॉ. शुभा बनर्जी, सह. प्राध्यापक ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम सें प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

सहायक प्राध्यापक डॉ. नीता मिश्रा, डॉ. अंजली पटेल तथा डॉ. ऋतुराज रधुवंशी में प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा करते हुए बताया की व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी कार्यछमता एंव ए.आई. के विभिन्न्न घटकों के बारे में ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैं।

उन्होनं प्रशिक्षण के दौरान प्रभावी कार्यक्रम निर्माण, अध्ययन समाग्री तैयार करना, विश्वविद्यालय एवं शासन के नियमों का ज्ञान एवं अनुपालन एवं मुल्यांकन प्रणाली, शोधपत्र लेखन, तथा संदर्भ प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई एवं भविष्य में इस प्रकार के और प्रशिक्षण आयोजित करने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दो प्रमुख घटकों में आयोजित किया गया। पहला घटक नव नियुक्त संकाय सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम जिसका उद्देश्य उन्हें विश्वविद्यालय की दृष्टि, मिशन और शैक्षणिक ढांचे से परिचित कराना एवं दूसरा घटक शिक्षण एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रशिक्षण है, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक ए आई टूल्स और तकनीकों से परिचित कराया गया ताकि वे इनका प्रभावी उपयोग कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, विस्तार गतिविधियों तथा अनुसंधान कार्यों में कर सकें। इन पाँच दिनों के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, विचार-विमर्श तथा प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधारित शिक्षण एवं अनुसंधान की नवीनतम प्रवृत्तियों से अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल क्रियांन्वयन में डॉ. आर.पी. कुजूर, सह. प्राध्यापक, डॉ. रामा मोहन सावू, सह. प्राध्यापक, डॉ. अन्नु वर्मा, प्राध्यापक, तथा डॉ. लक्ष्मी नरसिंहा, सहायक प्राध्यापक की सराहनीय भूमिका रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर. पी. कुजूर, सह. प्राध्यापक, कृषि महाविद्यालय, रायपुर ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजक कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे हैं।

CG: मत्स्य पालन विभाग द्वारा दिए गए तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण और योजनाओं से मिली सफलता…

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मिश्रित मत्स्य एवं झींगा पालन से मां दुर्गा समिति को मिल रही लगभग साढ़े तीन लाख रुपए वार्षिक आय’

महासमुंद जिले अन्तर्गत जय माँ दुर्गा मत्स्य सहकारी समिति मर्यादित, किशनपुर को मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के तहत मिली सहायता ने उनके कार्य को नई दिशा दी है। इस सहायता से आज समिति द्वारा तीन गुणा अधिक आय अर्जित किया जा रहा हैं। इस समिति में कुल 24 सदस्य हैं, जिनमें 11 महिलाएं और 13 पुरुष शामिल हैं। विगत 20 वर्षों से यह समिति मत्स्य पालन के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है तथा इसके पास 31.59 हेक्टेयर जलाशय और 3.50 हेक्टेयर तालाब का जलक्षेत्र उपलब्ध है, जिसका सुनियोजित उपयोग कर समिति ने प्रगति हासिल की है।

समिति सदस्य बताते है कि उनका जीवन पहले काफी संघर्षपूर्ण था, जहां उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर थी। सीमित संसाधनों के कारण उनकी वार्षिक आय लगभग 36 हजार रुपये ही थी, जिससे परिवारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था। लेकिन समय के साथ मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और योजनाओं से जुड़कर समिति ने मत्स्य पालन को अपनाया और धीरे-धीरे अपनी स्थिति में सुधार लाना शुरू किया। मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं उनके कार्य को नई दिशा दी। जाल, आइस बॉक्स, मत्स्य बीज, सीफेक्स, झींगा बीज तथा मोटरसाइकिल अनुदान जैसी सुविधाओं ने उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में भूमिका निभाई। विभागीय अधिकारियों के निरंतर प्रोत्साहन और सफल मत्स्य पालकों से मिली प्रेरणा ने समिति के सदस्यों का मनोबल मजबूत किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

समिति ने पारंपरिक पद्धतियों को छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिसमें मिश्रित मत्स्य पालन, उन्नत बीजों का उपयोग, परिपूरक आहार और वैज्ञानिक तरीके शामिल हैं। इन नवाचारों के परिणामस्वरूप उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जहां पहले लगभग 7 क्विंटल उत्पादन होता था, वहीं अब यह बढ़कर 21 क्विंटल तक पहुंच गया है। इसके साथ ही झींगा पालन को अपनाने से अतिरिक्त आय के नए स्रोत भी विकसित हुए, जिससे कुल आय में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई और वार्षिक आय लगभग 3 लाख 40 हजार रुपये तक पहुंच गई।

मत्स्य पालन से जुड़े रहने के कारण समिति के सदस्यों के जीवन स्तर में अधिक बदलाव आया है। पहले जहां आर्थिक तंगी के कारण दैनिक जीवन प्रभावित होता था, वहीं अब परिवारों की स्थिति सुदृढ़ हुई है। कच्चे मकानों को पक्के मकानों में परिवर्तित किया गया, सदस्यों ने मोटरसाइकिल जैसी सुविधाएं प्राप्त कीं और नियमित बचत की दिशा में कदम बढ़ाते हुए समिति के नाम से बैंक खाते में राशि जमा करना शुरू किया गया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी समिति को मजबूती प्रदान की है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है।

CG: सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य के वित्तीय नियमों के तहत…

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महिला एवं बाल विकास विभाग ने सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत आंगनबाड़ियों में आरओ एवं एलईडी टीवी खरीदी को लेकर प्रकाशित एक समाचार को भ्रामक और तथ्यात्मक त्रुटियों से युक्त बताया है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना से संबंधित सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य सरकार के वित्तीय नियमों के अनुरूप ही की जा रही हैं, जिससे किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं है।

विभाग ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि 10 फरवरी 2026 को भारत सरकार से सक्षम आंगनबाड़ी योजना के लिए मदर सैंक्शन प्राप्त हुआ। यह केंद्र प्रवर्तित योजना है, इसलिए मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। मदर सैंक्शन से पहले टेंडर जारी न होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

अधिकारियों ने बताया कि एलईडी टीवी, आरओ प्यूरीफायर, वाल पेंटिंग और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए राशि भारत सरकार द्वारा ही निर्धारित की गई है। इसके तहत एलईडी टीवी के लिए 25 हजार रुपये, आरओ प्यूरीफायर के लिए 10 हजार रुपये, वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार रुपये और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये की राशि तय की गई है।

तकनीकी स्पेसिफिकेशन को लेकर भी विभाग ने पूरी स्पष्टता रखी है। एलईडी टीवी के लिए न्यूनतम 32 इंच या उससे अधिक का प्रावधान विभागीय पत्र में उल्लेखित है और सभी खरीदी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम आंगनबाड़ी के उन्नयन से जुड़े सभी कार्य छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, कोषालय संहिता, वित्तीय संहिता, एसएनए स्पर्श प्रणाली तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर उन्नयन सुनिश्चित हो सके।

CG: 72 घंटे के भीतर रायगढ़ जिला प्रशासन की अफीम की खेती पर ताबड़तोड़ कार्रवाई…

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तमनार के बाद लैलूंगा के नवीन घटगांव और मुड़ागांव में अफीम खेती का भंडाफोड़, आरोपी हिरासत में’

जिला प्रशासन की कार्रवाई से संलिप्त लोगों में हड़कंप’

ड्रोन सर्वे से प्रशासन की पैनी नजर, जिले के सभी अनुविभागों में सघन निगरानी और लगातार कार्रवाई जारी’

कलेक्टरएसएसपी ने ली प्रेस वार्ता, गैर कानूनी अफीम की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए की जा रही कार्रवाई की दी जानकारी’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

इस संबंध में आज प्रशासन द्वारा पुलिस कंट्रोल रुम मे प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी अनुविभागों में व्यापक ड्रोन सर्वे अभियान संचालित किया गया है। इस अभियान के तहत खरसिया (14 ग्राम), घरघोड़ा (10 ग्राम), तमनार (12 ग्राम), लैलूंगा (4 ग्राम), मुकडेगा (3 ग्राम), रायगढ़ (11 ग्राम), पुसौर (13 ग्राम) एवं धरमजयगढ़ (7 ग्राम) में सफलतापूर्वक सर्वे किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही।

इसी क्रम में 23 मार्च को फिजिकल एवं ड्रोन सर्वे के दौरान लैलूंगा तहसील के ग्राम नवीन घटगांव में भी अवैध खेती का मामला सामने आया। यहां भूमिस्वामी सादराम नाग द्वारा अपने खेत में साग-भाजी के बीच छोटे क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी। पौधों में सफेद फूल आना प्रारंभ हो गया था तथा कुछ डंठल सूख चुके थे। पुलिस ने तत्काल फसल को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते विफल करते हुए सामग्री जब्त की गई।

लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में लगभग 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल की खेती किए जाने की बात सामने आई है। उसके घर से पेड़, पत्तियां एवं तने के सूखे अवशेष प्रशासनिक टीम द्वारा बरामद कर जांच के लिए भेजा गया हैं। पुलिस टीम नारकोटिक्स के अधिकारियों के संपर्क में है, रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है, पूछताछ करने के बाद उनकी भूमिका पूरी तरीके से स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद नारकोटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

CG: दो बड़े खेल अधोसंरचनाओं के लिए 109.40 करोड़ मंजूर…

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद प्रशासकीय स्वीकृति के आदेश जारी

राज्य शासन ने दो बड़े खेल अधोसंरचनाओं के निर्माण के लिए 109 करोड़ 39 लाख 75 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने आज मंत्रालय से इनकी प्रशासकीय मंजूरी के आदेश जारी कर दिए हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने नवा रायपुर में खेल कॉम्प्लेक्स के लिए 94 करोड़ 68 लाख 98 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। विभाग द्वारा दुर्ग में बहु-उद्देश्यीय स्टेडियम के निर्माण के लिए 14 करोड़ 70 लाख 77 हजार रुपए की मंजूरी दी गई है।

CG: किसानों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही छत्तीसगढ़ सरकार…

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– उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

उपमुख्यमंत्री ने ग्राम बद्दो में किया भोरमदेव सकरी फीडर नहर विस्तारीकरण कार्य का भूमिपूजन’

11.49 करोड़ रुपए की नहर परियोजना से 6 गांवों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ’

770 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित, किसानों की आय में होगी वृद्धि’

चैत्र नवरात्रि पंचमी की पावन तिथि के अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत वनांचल ग्राम बद्दो में किसानों को बड़ी सौगात दी। उन्होंने 11.49 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले भोरमदेव सकरी फीडर नहर विस्तारीकरण कार्य का विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भूमिपूजन किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र के 6 गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। नहर विस्तारीकरण के माध्यम से लगभग 770 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। कार्यक्रम में पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, श्री नितेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्री नन्द श्रीवास, श्री राम किंकर वर्मा, श्री लोकचंद साहू सहित जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव सकरी फीडर नहर के विस्तार से क्षेत्र के हजारों किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस नहर से खेतों तक पानी आसानी से पहुंचेगा और खेती में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि 770 हेक्टेयर जमीन को स्थायी सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे फसल अच्छी होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसे काम करना है जिससे किसानों का जीवन बेहतर हो। उन्होंने कहा कि इस बड़ी परियोजना की शुरुआत यह दर्शाती है कि वर्तमान सरकार वनांचल क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों तक भी विकास की योजनाएं पहुंचे और वहां के लोगों को इसका पूरा लाभ मिल सके।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि भोरमदेव सकरी फीडर नहर के विस्तारीकरण कार्य को सफल बनाने के लिए जन सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की बड़ी परियोजनाएं तभी समय पर और बेहतर तरीके से पूरी हो पाती हैं, जब स्थानीय लोगों, विशेषकर किसानों का पूरा सहयोग मिलता है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि यह नहर उनके ही हित में बनाई जा रही है। सभी गांवों के किसानों की सहभागिता और सहयोग से ही इस परियोजना को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जब जनभागीदारी के साथ विकास कार्य होते हैं, तो उनका लाभ भी लंबे समय तक और प्रभावी रूप से मिलता है। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जिले में चल रहे विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर क्षेत्र में संतुलित विकास हो और गांव-गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें। इसके लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं और अनेक कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।

योजना से बहुउद्देशीय लाभ

इस योजना से 635 हे. क्षेत्र में सिंचाई की कमी की पूर्ति सहित 770 हेक्टेयर रूपांकित क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई होगी। असिंचित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर कृषि भूमि की दरों में उन्नयन होगा। नहरों के सर्विस बैंक निर्माण से ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही, सिंचाई सुविधा मिलने से किसान अब एक से अधिक फसल लेने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह योजना क्षेत्र के किसानों के लिए दीर्घकालीन रूप से लाभकारी साबित होगी और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी।

योजना से लाभन्वित ग्राम

परियोजना के पूर्ण होने पर बाघुटोला, लाटा, खिरसाली, बद्दो, रघ्घुपारा एवं छपरी सहित कुल 6 ग्रामों के किसानों को सीधा लाभ प्राप्त होगा। इस नहर विस्तारीकरण के माध्यम से लगभग 770 हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे इन गांवों के किसानों को समय पर पानी उपलब्ध होगा, जिससे फसलों की पैदावार में वृद्धि होगी।

CG: अंत्योदय का संकल्प : करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात…

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22 हजार से अधिक बैगागुनिया परिवार होंगे लाभान्वित’

दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना‘  के अंतर्गत हितग्राहियों को मिलेगी धनराशि’

बलौदाबाजार में 25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम’

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।

इस योजना के तहत इस साल 4,95,965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10,000 रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

25 मार्च को बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के ‘न्याय और सुशासन’ की गूंज होगी। ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि ‘अंत्योदय’ की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

24*7 हेल्पलाइन-ईरान से 1000 भारतीय लौटे. मिडिल संकट पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी, बताया सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए..

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच आज लोक सभा में भारतीयों को दी जाने वाली मदद की जानकारी दी. पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इसकी वजह से भारत के सामने आई चुनौतियों पर अपनी बात रखने के लिए उपस्थित हुआ हूं.पीएम मोदी ने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं.

वहां समंदर में जो कॉमर्शियल शिप चलते हैं वहां पर भी भारतीय क्रू मेंबर की संख्या ज्यादा है. ऐसे अलग-अलग कारणों की वजह से भारत की चिंता स्वाभाविक रूप से ज्यादा है.

पीएम मोदी ने कहा कि इसलिए ये जरूरी है कि भारत की संसद से एकमद आवाज दुनिया में जाए. पीएम ने कहा कि जबसे युद्ध शुरू हुआ है तबसे प्रभावित देश में हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया के ज्यादातर राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है. सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है.

भारतीयों को दी जा रही है मदद

पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य इस युद्ध के दौरान कुछ लोगों की मौत हुई है और कुछ घायल हुए हैं. ऐसे मुश्लिकल हालात में परिवारजनों को जरूरी मदद दी जा रही है. जो घायल हैं उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है. प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं. वो निरंतर भारतीयों की मदद करने में जुटे हैं. वहां कम काम करने वाले भारतीय हों या फिर जो टूरिस्ट वहां गए हैं, सभी को हर संभवर मदद दी जा रही है. हमारे मिशन जरूरी रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं.

भारत की ओर से उठाए गए कदम

हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं. यहां भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24×7 कंट्रोल रूप और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं.

इनके माध्यम से सभी प्रभावितों को त्वरित जानकारी दी जा रही है.

संकट की इस स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है.

युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख, 75 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं.

बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है.

आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है.

ईरान से 1000 भारतीय वापस आए.

पीएम ने कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है. पीएम मोदी ने बताया कि बीते दो-तीन हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और हरदीप पुरी जी ने सदन को जरूरी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि इस संकट को 3 हफ्ते से ज्यादा का समय हो रहा है. इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरीत असर हो रहा है. इसलिए पूरी दुनिया इस संकट से समाधान के लिए सभी पक्षों के आग्रह भी कर रही है. पीएम मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने नेशनल सिक्योरिटी, आर्थिक और मनीवय तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.