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अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है, तो आने वाले समय में लोन…

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अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है, तो आने वाले समय में लोन मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। 2026 के लिए RBI के नए ECL (एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस) नियमों के लागू होने के बाद, बैंक लोन देते समय ज़्यादा सावधानी बरत सकते हैं। बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कम क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को लोन मंज़ूर करवाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर लोन मंज़ूर हो भी जाता है, तो ब्याज दर ज़्यादा हो सकती है। कुछ मामलों में, बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलैटरल (गिरवी रखने के लिए संपत्ति) की मांग कर सकते हैं। चिंता की बात यह है कि देश में 730 से कम CIBIL स्कोर वाले लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है; नतीजतन, अगले साल होम, कार या एजुकेशन लोन लेने की चाहत रखने वाले लोगों को पहले के मुकाबले ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

नए नियम 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे!

RBI के नए नियम 1 अप्रैल, 2027 से लागू होने की संभावना है। आम तौर पर, अगर कोई ग्राहक 90 दिनों तक अपनी EMI का भुगतान नहीं करता है, तो लोन को NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) माना जाता है; लेकिन नए नियमों के तहत, बैंकों को भविष्य में संभावित डिफ़ॉल्ट का अनुमान लगाना होगा। इसके अनुसार, उन्हें पहले से ही फंड अलग रखना होगा। बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि इस बदलाव से बैंकों की कमाई पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इससे बैंकिंग सेक्टर पर ₹42,000 करोड़ तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले लोग कम ब्याज दरों और बेहतर शर्तों पर लोन ले सकते हैं। इसी वजह से, बैंक 730 या उससे ज़्यादा CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों को प्राथमिकता दे सकते हैं। अनुमान है कि देश में लगभग सात करोड़ लोगों का क्रेडिट स्कोर 730 या उससे ज़्यादा है।

बैंक भविष्य के जोखिमों का आकलन कैसे करेंगे?

ECL फ्रेमवर्क के तहत, बैंक सिर्फ़ यह नहीं देखेंगे कि ग्राहक अभी अपनी EMI का भुगतान कर रहा है या नहीं। लोन देने से पहले कई अन्य कारकों पर भी विचार किया जाएगा। उदाहरण के लिए:
• ग्राहक का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड
• CIBIL स्कोर में बदलाव
• आय में कमी या उतार-चढ़ाव
• नौकरी जाने का जोखिम
• लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात
• मौजूदा कर्ज़ की स्थिति
इन सभी कारकों पर विचार करके, बैंक संभावित लोन डिफ़ॉल्ट के जोखिम का आकलन करेगा।

Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट से जहाज को भारत आने में कितना टाइम लगता है, खुलने के बाद कितने दिन में नॉर्मल होगी सप्लाई?

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Strait of Hormuz: हाल ही में होर्मुज से एक एलएनजी कैरियर भारत आया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि होर्मुज से जहाज को भारत आने में कितना समय लगता है.

Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते से भारत को बड़ी राहत मिली है. होर्मुज स्ट्रेट से पहला एलएनजी कैरियर सफलतापूर्वक भारत के पश्चिमी तट तक आ गया है. दिशा नाम का एलएनजी जहाज गुजरात के भरूच जिले में दहेज पोर्ट पर पहुंच चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि होर्मुज से जहाज को भारत आने में कितना समय लगता है.

भारत पहुंचने में जहाज को कितना समय लगता है? 

होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट तक का सफर दूसरे इंटरनेशनल शिपिंग रूट की तुलना में काफी छोटा है. होर्मुज को पार करने के बाद कांडला, मुंद्रा, मुंबई या फिर दहेज जैसे बंदरगाहों की तरफ जाने वाले जहाजों को अरब सागर में लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है.

बड़े तेल टैंकर और एलएनजी कैरियर आमतौर पर मौसम की स्थिति, समुद्री ट्रैफिक और कार्गो लोड के बेस पर यह पूरा सफर 48 से 72 घंटे में पूरा कर लेते हैं. ठीक परिस्थितियों में कुछ जहाज लगभग 33 घंटे के अंदर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं.

कब सामान्य होगी स्थिति? 

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर भी वैश्विक और भारतीय सप्लाई चेन को पूरी तरह से नॉर्मल होने में लगभग 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं. आपको बता दें कि सप्लाई चेन रातों-रात सामान्य नहीं हो सकती. शांति समझौते के बावजूद भी इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं.

सैकड़ों जहाजों का इंतजार 

सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक है जहाजों का भारी जमावड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक फारस की खाड़ी क्षेत्र में लगभग 500 कमर्शियल जहाज और कार्गो कैरियर मंजूरी और सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहे हैं. सुरक्षा बनाए रखने और भीड़ से बचने के लिए अधिकारी शुरू में हर दिन सिर्फ सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहे हैं.

साथ ही संघर्ष के दौरान रणनीतिक शिपिंग रूट में समुद्री बारूदी सुरंगों और दूसरे समुद्री खतरों को लेकर डर पैदा हो गया था. यही वजह है कि जहाजों को अभी रूट की पूरी चौड़ाई का इस्तेमाल करने के बजाय सुरक्षित कॉरिडोर से निकाला जा रहा है.  पूरे रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित बताने से पहले समुद्री सुरक्षा एजेंसियां जांच और निगरानी कर रही हैं.

 

राज्यसभा में एनडीए गठबंधन में अभी सबसे बड़ा दल बीजेपी है और ये गठबंधन अब 152 सीटों…

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राज्यसभा में एनडीए गठबंधन में अभी सबसे बड़ा दल बीजेपी है और ये गठबंधन अब 152 सीटों तक पहुंच गया है तो वहीं विपक्षी गठबंधन के पास महज 64 सांसद हैं.

बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में भी ताकतवर नजर आ रहा है. हालांकि अभी वो दो तिहाई बहुमत से दूर हैं, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में अच्छा खासा इजाफा कर दिया है. बता दें कि 18 जून तक 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसदों के इस्तीफे के बाद अब कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है.

राज्यसभा में एनडीए गठबंधन में अभी सबसे बड़ा दल बीजेपी ही है और ये गठबंधन अब 152 सीटों तक पहुंच गया है. सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए तो उनमें 19 सांसद एनडीए के ही थे. झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने गुरुवार को एनडीए सांसदों की संख्या बढ़ाकर 20 कर दी है. खास बात ये है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है.

बता दें कि हाल ही में टीएमसी के बागी 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है. इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर बीजेपी आसानी से जीत दर्ज कर सकती है. अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं.

ये पार्टियां किसी का हिस्सा नहीं
दरअसल बीजू जनता दल के राज्यसभा में 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं और ये दोनों ही दल किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं हैं. हालांकि कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं. ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और बीजेपी के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है.

संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को संसद में पास कराने के लिए 2 तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. ऐसे में अगर एनडीए इस आंकड़ों को हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी. कहा जा रहा है कि मोदी सरकार मॉनसून सत्र के दौरान ये बिल दोबारा पेश कर सकती है. हालांकि अभी आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है.

इंडिया गठबंधन के पास कितने सांसद
कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के पास महज 64 सांसद हैं क्योंकि 8 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी इस ग्रुप से अलग हो गई हैं. बता दें कि लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग ग्रुप बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं.

देश के प्रति बढ़ता वैश्विक भरोसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग और निवेश…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आज दुनिया भारत को उम्मीद और उत्साह के साथ देख रही है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति बढ़ता वैश्विक भरोसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग और निवेश के रूप में साफ दिखाई दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आज दुनिया भारत को उम्मीद और उत्साह के साथ देख रही है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति बढ़ता वैश्विक भरोसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग और निवेश के रूप में साफ दिखाई दे रहा है।

माईगव इंडिया के एक लेख को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक बेहतर दुनिया के निर्माण में योगदान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और साथ ही वैश्विक मंच पर लगातार अपनी मजबूत स्थिति भी बना रहा है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत हमेशा बेहतर ग्रह और बेहतर भविष्य के निर्माण में अपना योगदान देने के लिए तैयार रहता है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत के प्रति दुनिया का बढ़ता विश्वास देश के 140 करोड़ नागरिकों के प्रयासों और आकांक्षाओं का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “भारत बेहतर दुनिया के निर्माण में जो भी संभव होगा, उसे करने के लिए हमेशा तैयार है। साथ ही भारत के 140 करोड़ लोगों की बदौलत दुनिया भारत को उम्मीद और उत्साह के साथ देख रही है। यही कारण है कि दुनिया भारत के साथ जुड़ रही है और भारत में निवेश कर रही है।”

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी माईगव इंडिया की उस पोस्ट को साझा करते समय आई, जिसमें पिछले 12 वर्षों में वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया गया था।

माईगव इंडिया ने अपनी पोस्ट में कहा कि वर्ष 2014 के बाद से दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव एक नए और प्रभावशाली दौर में प्रवेश कर चुका है। अब भारत वैश्विक मुद्दों पर चर्चा को दिशा देने, रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में अधिक प्रभावी योगदान देने की भूमिका निभा रहा है।

“इंडियाज ग्लोबल मोमेंटम : ए शिफ्ट द वर्ल्ड कांट इग्नोर” शीर्षक वाली पोस्ट में कहा गया कि भारत का बदलाव वैश्विक मंचों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो विश्व मामलों में उसकी बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाता है।

पोस्ट में कहा गया, “2014 के बाद से दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव अधिक प्रभावशाली हुआ है। देश अब वैश्विक चर्चाओं को दिशा देने, साझेदारियों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में अधिक दृश्यता, विश्वसनीयता और भरोसे के साथ योगदान देने की भूमिका निभा रहा है।”

माईगव इंडिया के अनुसार, भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि देश आज दुनिया की महत्वपूर्ण आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक ताकतों में शामिल हो चुका है।

भारत में 65,000 करोड़ रुपए से अधिक की कोयला गैसीकरण परियोजनाओं…

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भारत में 65,000 करोड़ रुपए से अधिक की कोयला गैसीकरण परियोजनाओं पर वर्तमान में काम चल रहा है, जो इस बात का संकेत है कि कोयले को रसायनों, ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल में बदलने की सरकार की पहल अब केवल नीतिगत योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी तेजी से लागू हो रही है।

भारत में 65,000 करोड़ रुपए से अधिक की कोयला गैसीकरण परियोजनाओं पर वर्तमान में काम चल रहा है, जो इस बात का संकेत है कि कोयले को रसायनों, ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल में बदलने की सरकार की पहल अब केवल नीतिगत योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी तेजी से लागू हो रही है।

हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि इस क्षेत्र को उद्योग जगत से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

उनके अनुसार, जनवरी 2024 में स्वीकृत 8,500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना के तहत आठ परियोजनाएं पहले से ही क्रियान्वयन के चरण में हैं।

इन परियोजनाओं को 6,233 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन समर्थन मिला है। ये परियोजनाएं कोयले से सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी), एथेनॉल, हाइड्रोजन, एसीटिक एसिड, अमोनियम नाइट्रेट, डीआरआई आधारित इस्पात और सतत विमानन ईंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं।

सरकार 37,500 करोड़ रुपए की बड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत निविदा आमंत्रण (आरएफपी) को भी अंतिम रूप दे रही है। मसौदा दस्तावेज को हितधारकों से सुझाव लेने के लिए पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि महाराष्ट्र कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य में पहले से ही पांच परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के माध्यम से कोयले की उपलब्धता, मजबूत औद्योगिक ढांचा और नीतिगत सहयोग का लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि यह राज्य कोयला गैसीकरण परियोजनाओं का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य इस क्षेत्र के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मुंबई का कोयला गैसीकरण तकनीक से ऐतिहासिक संबंध रहा है।

सरकार को उम्मीद है कि कोयला गैसीकरण पहल के तहत लगभग 25 परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ रुपए से 3 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश आकर्षित होगा।

सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।

यह कार्यक्रम भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उर्वरक, रसायन और ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू औद्योगिक क्षमता को मजबूत बनाना और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

मेघालय के री-भोई जिले के भोइरिमबोंग में पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी ऑर्गेनिक मसाला प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन…

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मेघालय के री-भोई जिले के भोइरिमबोंग में पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी ऑर्गेनिक मसाला प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन किया। इस मौके पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और सिक्किम के मुख्यमंत्री पी.एस. तमांग गोले भी मौजूद थे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मेघालय के री-भोई जिले के भोइरिमबोंग में पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी ऑर्गेनिक मसाला प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन किया। इस मौके पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और सिक्किम के मुख्यमंत्री पी.एस. तमांग गोले भी मौजूद थे।

यह मसाला प्रोसेसिंग यूनिट ‘ईस्टर्न री-भोई ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ (एफपीसी) के तहत बनाई गई है। यह किसानों की अपनी कंपनी है जिसे भारत सरकार की योजना ‘मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन’ (एमओवीसीडी-एनईआर) के तहत बढ़ावा दिया गया है।

यह फैक्ट्री नॉर्थ-ईस्ट में पहली ऑर्गेनिक सर्टिफाइड मसाला प्रोसेसिंग यूनिट है और उम्मीद है कि यह इस इलाके में ऑर्गेनिक खेती के क्षेत्र के लिए एक अहम संस्थान बनेगी।

वित्त मंत्री सीतारमण के अनुसार, यह हर साल 10,000 मीट्रिक टन से ज्यादा कीमती ऑर्गेनिक मसालों (जैसे अदरक, हल्दी, काली मिर्च और मिर्च) की प्रोसेसिंग कर सकती है।

ईस्टर्न री-भोई ऑर्गेनिक एफपीसी ने कलेक्शन और एग्रीगेशन सेंटर, प्रोसेसिंग सुविधाएं, कोल्ड स्टोरेज, वर्मीकम्पोस्ट यूनिट, हायरिंग सेंटर और ट्रांसपोर्टेशन सुविधाएं जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए हैं।

यह यूनिट ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन’ (एनपीओपी) और ईयू ऑर्गेनिक स्टैंडर्ड्स के तहत सर्टिफाइड है, जिससे इसे प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑर्गेनिक मार्केट तक सीधी पहुंच मिलती है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्रोसेसिंग सुविधा से मेघालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लगभग 5,500 ऑर्गेनिक किसानों को सीधे फायदा होने की उम्मीद है। इससे ऑर्गेनिक उपज की वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग बेहतर होगी, आधुनिक स्टोरेज और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा, और एग्रीगेशन व क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम को मजबूत किया जा सकेगा।

इसके अलावा, इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधा संपर्क बनेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।

बयान में कहा गया है कि इससे प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी पैदा होंगे और नॉर्थ-ईस्ट से सर्टिफाइड ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, स्पाइसेस बोर्ड इंडिया के अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से भारतीय मसालों के निर्यात के मौकों में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। बेहतर मार्केट एक्सेस, रेगुलेटरी सहयोग और व्यापार में अधिक निश्चितता से पूरी वैल्यू चेन में एक्सपोर्टर्स, किसानों और एमएसएमई को फायदा होने की संभावना है।

भारतीय मसालों के लिए ईयू सबसे अधिक मूल्य वाले और कड़े नियमों वाले बाजारों में से एक बना हुआ है, और प्रीमियम निर्यात में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ‘एफएसएसएआई’ ने 14 कंपनियों को जारी किया नोटिस…

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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को कहा कि उसने उन फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (एफबीओ) को नोटिस जारी किए हैं, जो अपने प्रोडक्ट को लेकर भ्रामक दावें, ब्रांडिंग और लेबलिंग कर रहे थे। साथ ही, उनके उत्पादों को लेकर ग्राहकों से शिकायतें के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को कहा कि उसने उन फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (एफबीओ) को नोटिस जारी किए हैं, जो अपने प्रोडक्ट को लेकर भ्रामक दावें, ब्रांडिंग और लेबलिंग कर रहे थे। साथ ही, उनके उत्पादों को लेकर ग्राहकों से शिकायतें के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

इसके अलावा, एफएसएसएआई ने एफबीओ को सुधार के उपाय करने के लिए निर्देश भी दिए गए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, एफएसएसएआई ने कहा कि ये नोटिस ‘फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ के नियमों के तहत जारी किए गए थे। ये नोटिस भ्रामक ब्रांड नामों, ट्रेड नामों, प्रोडक्ट के दावों, लेबलिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन और ग्राहकों की अन्य शिकायतों से संबंधित थे।

नियामक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कई फूड बिजनेस को नोटिस भेजे गए हैं। इन फूड ऑपरेटर्स पर ऐसा दावा करने का आरोप है जो ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018’ का उल्लंघन करते हैं या जिनसे ग्राहकों को गुमराह किया जा सकता है।

रेगुलेटर ने जिन कंपनियों पर सवाल उठाए, उनमें ‘प्लक्क’ भी शामिल थी। कंपनी के आम के जूस पर ‘नौ एडेड शुगर’ का दावा किया गया था, लेकिन जांच में पता चला कि सामग्री की सूची में आम का गूदा और गन्ने का रस शामिल था। रेगुलेटर के अनुसार, इस दावे से प्रोडक्ट में मौजूद चीनी की मात्रा को लेकर गलतफहमी पैदा हो सकती थी।

इसके अलावा, रेगुलेटर ने पनीर के एक प्रोडक्ट पर ‘नेचुरल पनीर’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह जानकारी मिश्रित खाद्य पदार्थों के लिए ‘नेचुरल’ शब्द के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लंघन करती है।

जिन दूसरी कंपनियों को नोटिस मिले हैं, उनमें ‘सिल्कन टोफू’ प्रोडक्ट के दावों के लिए ‘गौर हेल्दी फूड’; ‘100 परसेंट नेचुरल’, ‘फ्रेशली मेड’ जैसे दावों और ‘ऑर्गेनिक आटा’ के जिक्र के लिए ‘मास्टरचाउ फूड्स प्राइवेट लिमिटेड’; ‘किंडर जॉय-कोटेड वेफर बिस्किट’ प्रोडक्ट पर ‘रिच इन मिल्क सॉलिड्स’ (दूध के ठोस पदार्थों से भरपूर) दावे के लिए ‘फेरेरो इंडिया’; और ‘सैफोला टोटल हार्ट प्रो’ कुकिंग ऑयल से जुड़े ब्रांडिंग और हेल्थ से संबंधित दावों के लिए ‘मैरिको लिमिटेड’ शामिल हैं।

इसके अलावा, एफएसएसएआई ने मेडिजेन लैब्स, नेक्सा इंडस्ट्रीज, रॉ प्रेसरी, न्यूट्रास्युटिकल के ‘इंसिप्रो गोल्ड पाउडर वनीला’ प्रोडक्ट और कोरियाई जिनसेंग न्यूट्रास्युटिकल प्रोडक्ट के दावों पर भी सवाल उठाए। सरकारी एजेंसी का कहना था कि हेल्थ और परफॉर्मेंस से जुड़े कई दावों के लिए वैज्ञानिक सबूतों की जरूरत थी या वे मौजूदा नियमों के तहत मंजूर नहीं थे।

इसके अतिरिक्त, रेगुलेटर ने सोशल मीडिया के जरिए मिली ग्राहकों की शिकायतों के बाद बीकानेरवाला और परम डेयरी लिमिटेड को भी नोटिस जारी किए।

बीकानेरवाला को नोटिस हाइजीन (साफ-सफाई) से जुड़ी चिंताओं के कारण भेजा गया। एक शिकायत में कहा गया था कि काम के घंटों के दौरान एक स्टाफ मेंबर सर्विस या किचन एरिया के अंदर खाना खा रहा था। कंपनी से कहा गया है कि वह अपनी जांच, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और शिकायत के जवाब में उठाए गए सुधारात्मक कदमों की जानकारी दे।

वहीं, परम डेयरी लिमिटेड को आईआरसीटीसी कैटरिंग सर्विस के जरिए सप्लाई किए गए डेयरी-बेस्ड प्रोडक्ट्स (दही और रबड़ी) में फंगस के संक्रमण के आरोपों पर नोटिस जारी किया गया। कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह सप्लाई किए गए प्रोडक्ट्स, इन्वेंट्री मैनेजमेंट के तरीकों, उठाए गए सुधारात्मक कदमों और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अपनाए गए उपायों की जानकारी दे।

एफएसएसएआई ने कहा कि सभी संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को निर्देश दिया गया है कि वे उचित सुधारात्मक कदम उठाएं और लागू फूड सेफ्टी, विज्ञापन और लेबलिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के झारसुगुडा जिले खनपुर में 25,016 करोड़ रुपए के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट….

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात कम करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में 25,016 करोड़ रुपए के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात कम करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में 25,016 करोड़ रुपए के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई है।

बयान में कहा गया है कि लखनपुर प्रोजेक्ट भारत की पहली कमर्शियल-स्केल कोयले से अमोनियम नाइट्रेट बनाने वाली सुविधा के तौर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह प्रोजेक्ट भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का जॉइंट वेंचर है। यह प्रोजेक्ट बीएचइएल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित कोयला गैसीफिकेशन तकनीक का इस्तेमाल करके हर दिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करेगा।

यह प्रोजेक्ट भविष्य के कोयला गैसीफिकेशन वेंचर्स के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगा और भारत के आत्मनिर्भर मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनने के विज़न में अहम योगदान देगा। लखनपुर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखना स्वच्छ कोयला तकनीकों को बढ़ावा देने, घरेलू संसाधनों से ज्यादा से ज्यादा वैल्यू हासिल करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

बयान के मुताबिक, कोल गैसीफिकेशन भारत की उस रणनीति का एक अहम हिस्सा बन रहा है जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, आयातित जरूरी कच्चे माल पर निर्भरता कम करना, घरेलू कोयला संसाधनों से बनने वाले उत्पादों का मूल्य बढ़ाना और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के विकास में मदद करना है।

इस प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक नेचुरल गैस और अन्य केमिकल फीडस्टॉक जैसे कई तरह के मूल्य-वर्धित उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। इसमें औद्योगिक विकास को गति देने, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा व आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की क्षमता है।

बयान के अनुसार, भारत दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है, और कोल इंडिया लिमिटेड दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। भारत के पास दुनिया का 5वां सबसे बड़ा कोयला भंडार है, जो 400 बिलियन टन से भी अधिक है। कोल गैसीफिकेशन के जरिए इन संसाधनों का सही इस्तेमाल करके देश के औद्योगिक परिदृश्य को काफी हद तक बदला जा सकता है, साथ ही जरूरी फीडस्टॉक और केमिकल के लिए आयात पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।

कोल गैसीफिकेशन की बदलाव लाने वाली क्षमता को देखते हुए, भारत सरकार ने देश भर में सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए कुल 46,000 करोड़ रुपए तक की प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका मकसद देश भर में कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स की स्थापना में तेजी लाना, रणनीतिक औद्योगिक और केमिकल उत्पादों के लिए घरेलू कोयले के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और नेचुरल गैस, मेथनॉल, अमोनिया व अन्य जरूरी फीडस्टॉक के आयात पर निर्भरता कम करना है।

बयान में आगे कहा गया है कि भारत अभी हर साल लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपए मूल्य के अंतिम-उपयोग और इंटरमीडिएट केमिकल उत्पादों का आयात करता है। कोल गैसीफिकेशन इन आयातों को कम करने, विदेशी मुद्रा की काफी बचत करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ औद्योगिक विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक बड़ा मौका देता है।

कोयला गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने की इस पहल से 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने और कोयला-उत्पादक क्षेत्रों में 25 प्रोजेक्ट्स के जरिए लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

अभिजीत दीपके ने PM मोदी को लिखा पत्र, पीड़ित छात्रों के लिए 1 करोड़ मुआवजे की मांग…

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NEET पेपर लीक विवाद के बीच, ‘कोकरोच जनता पार्टी’ के प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हाल ही में हुई आत्महत्या की घटनाओं के संबंध में एक अहम मांग की है। पत्र में दीपके ने प्रधानमंत्री से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवज़ा देने का आग्रह किया है। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था में विफलता का आरोप लगाते हुए दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े या उन्हें पद से हटाने की मांग की है।

दीपके ने क्या लिखा?

कोकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने अपने पत्र में लिखा, “मैं आज भारी मन से आपको यह पत्र लिख रहा हूँ ताकि आपका ध्यान एक गंभीर संकट की ओर आकर्षित कर सकूँ जो हमारे देश के भविष्य को खतरे में डाल रहा है और हमारे युवा छात्रों के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को जोखिम में डाल रहा है।”

दीपके ने अपने पत्र में दावा किया है कि पिछले एक हफ़्ते में 11 NEET उम्मीदवारों ने आत्महत्या की है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से पाँच दिल दहला देने वाली घटनाएँ पिछले 48 घंटों में हुई हैं। दीपके ने आरोप लगाया है कि परीक्षा से जुड़े बार-बार होने वाले विवादों के कारण छात्रों का भरोसा उठ गया है और कई छात्र भारी मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

आर्थिक तंगी का सामना कर रहे प्रभावित परिवार

दीपके ने लिखा, “पिछले दो महीनों में, मैं व्यक्तिगत रूप से कई ऐसे शोक संतप्त परिवारों से मिला हूँ जिनके बच्चों ने आत्महत्या की है। बच्चे को खोने के असहनीय भावनात्मक सदमे के अलावा, ये परिवार अब गंभीर और तेज़ी से बिगड़ती आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं।

बेहतर भविष्य की तलाश में, कई परिवारों ने अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए भारी-भरकम शिक्षा ऋण लिया था – ऐसे सपने जो व्यवस्थागत विफलताओं के कारण बेरहमी से टूट गए। जिन बच्चों की शिक्षा पर उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत लगाई थी, उन्हें खोने के बाद ये परिवार पूरी तरह से बेसहारा हो गए हैं। सरकार को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए आगे आना चाहिए। हमारी मांग है कि आपका प्रशासन परीक्षा पेपर लीक के बढ़ते संकट के कारण आत्महत्या करने वाले प्रत्येक छात्र के परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवज़ा दे।”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग

अभिजीत दीपके ने सरकारी जवाबदेही के लिए अपनी पार्टी की मांग को दोहराया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की। उन्होंने लिखा, “पिछले एक महीने से, ‘कोकरोच जनता पार्टी’ शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रही है और इन मांगों को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रही है। छात्रों के तौर पर हमारी एकमात्र मांग यह है कि जान-माल के नुकसान के लिए ज़िम्मेदारी तय की जाए।” अभिजीत दीपके ने आगे कहा, “इन परीक्षाओं को लेकर बार-बार सिस्टम की नाकामी, कुप्रबंधन और बहुत ज़्यादा चिंता हमारे शिक्षा तंत्र के ढहने की ओर इशारा करती है। इसलिए, हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि शिक्षा मंत्री को हटा दें। वे आपकी इच्छा के अनुसार काम करते हैं और अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का होता है।”

“कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज अपना 54वां जन्मदिन” जलाभिषेक करते दिखे कांग्रेस कार्यकर्ता “

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर पार्टी कई कार्यक्रम आयोजित कर रही है और कई कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है।

इस बीच, वाराणसी में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अनोखे तरीके से जश्न मनाया; उन्होंने राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाया, जिनके हाथ में संविधान की एक प्रति थी।

कार्यकर्ताओं ने दूध से बनी तस्वीर का धार्मिक स्नान (अभिषेक) किया और लड्डू से बना केक काटा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। पीएम मोदी ने X पर लिखा, “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करता हूं।”

दूध और गंगाजल से धार्मिक स्नान

वाराणसी में, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दूध और गंगाजल का इस्तेमाल करके राहुल गांधी के पोस्टर का धार्मिक स्नान कराया। पोस्टर में राहुल गांधी को एक हाथ में कुल्हाड़ी (फरसा) और दूसरे हाथ में संविधान की प्रति लिए हुए दिखाया गया था।

परशुराम के वंशज धार्मिक स्नान कराते हैं – कांग्रेस प्रवक्ता

‘परशुराम’ अवतार वाले पोस्टर के धार्मिक स्नान के बारे में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि बनारस में कार्यक्रम आयोजित करने वाले सभी लोग ब्राह्मण और परशुराम के वंशज हैं; उन्होंने ऐसा करके अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

बीजेपी पर निशाना साधते हुए राजपूत ने कहा, “बीजेपी को *सनातन* [परंपरा] के बारे में बात करते हुए शर्म आनी चाहिए, जब वह भगवान राम के लिए दान और प्रसाद चुराती है, गोहत्या की अनुमति देती है, शंकराचार्य को उनकी पालकी से उतरने के लिए मजबूर करती है और उनके खिलाफ POCSO का मामला दर्ज कराती है! बीजेपी को नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी।”

लोग नायकों को अपने नायकों से जोड़ते हैं – कन्हैया कुमार

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “लोग देश के नायकों को अपने नायकों के साथ जोड़कर देखते हैं; इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कुछ लोग राहुल गांधी को अंबेडकर और बिरसा मुंडा की तरह ही देखते हैं। क्या परशुराम पर बीजेपी का पेटेंट है? उन्हें नाथूराम की तस्वीर दिखानी चाहिए। क्या हिंदू होने और *संघी* होने में कोई अंतर है?” कांग्रेस ने राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी।

X पर राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए कांग्रेस ने लिखा: “ऐसी दुनिया में जहाँ ज़्यादातर लोग चुप रहना पसंद करते हैं, आपने हमेशा उस बात के लिए आवाज़ उठाई है जिसे आप सही मानते हैं। अन्याय, असमानता और सत्ता के दुरुपयोग के ख़िलाफ़ आपकी लगातार लड़ाई ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है। आप लोगों को दिखाते हैं कि राजनीति सिर्फ़ सत्ता की बेरहम दौड़ नहीं है, बल्कि बदलाव लाने का एक सशक्त ज़रिया है – जो सिद्धांतों और संवेदना से प्रेरित है।”