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“ईरान जंग: समझौता कराने के लिए मिडिल ईस्ट के इस सबसे बड़े शांति दूत की हुई एंट्री”

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ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने में मध्य पूर्व के सबसे बड़े मध्यस्थ माने जाने वाले मिस्र की एंट्री हो गई है. युद्धविराम के लिए मिस्र ने खाड़ी देशों से संपर्क साधने की कवायद शुरू कर दी है.

इसी कड़ी में मिस्र ने कतर और तुर्की के नेताओं से बातचीत की है. तुर्की ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मध्यस्थता का नेतृत्व कर रहा है, लेकिन इस समय मिस्र की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है.

Euronews के मुताबिक, शांति समझौता कराने में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सीसी खुद सक्रिय हैं और लगातार समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं. अल-सीसी की कोशिश मध्य पूर्व को युद्ध से बचाने की है, क्योंकि ईरान ने यह ऐलान किया है कि अगर उसके तेल और ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया गया, तो वह पूरे मध्य पूर्व को युद्ध में झोंक देगा.

मिस्र की भूमिका अहम क्यों?

  1. मिस्र मिडिल ईस्ट का मुस्लिम बहुल देश है. उसके रिश्ते अमेरिका, रूस और सभी मुस्लिम देशों से बेहतर हैं. इजराइल से भी मिस्र के रिश्ते सामान्य हैं. स्वेज नहर मिस्र के कंट्रोल में है. अगर होर्मुज के बाद इसे ब्लॉक किया जाता है तो पूरे यूरोप में त्राहिमाम मच जाएगा. यही वजह है कि मिस्र की भूमिका इस वक्त काफी अहम है.
  2. मिस्र अब तक दुनिया के 7 सबसे पेचीदा जंग को खत्म कर चुका है. इनमें इजराइल-गाजा, इजराइल-जॉर्डन, सूडान और इथोपिया का जंग अहम है. मिस्र यमन, सूडान और गाजा में आंतरिक लड़ाई भी खत्म करा चुका है. इस्लामिक कट्टरपंथी नेताओं से भी मिस्र के बेहतरीन संबंध रहे हैं.
  3. ईरान और अमेरिका के बीच अब तक ओमान और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका में रहा है. ईरान दोनों ही देशों पर भरोसा नहीं कर रहा है. ईरान का कहना है कि पहले अमेरिका युद्ध रोकने की गारंटी दे. इसलिए अब मिस्र की एंट्री हुई है. मिस्र ने गाजा मामले में अमेरिका को कन्फिडेंस लिया था.

समझौते के लिए ईरान की 6 शर्तें

ईरान ने समझौते के लिए कुल 6 शर्तें सामने रखी हैं. इनमें भविष्य में कभी भी तेहरान पर हमला न करने की गारंटी प्रमुख हैं. इसके अलावा ईरान ने अमेरिका से हर्जाने की मांग की है. ईरान का कहना कि उसे युद्ध का हर्जाना दिया जाए. ईरान ने अपने विरोधी पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की है.

वहीं अमेरिका चाहता है कि समझौते के तहत होर्मुज से ईरान अपना कंट्रोल छोड़ दे. साथ ही ईरान यह तय करे कि वो भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबी दूरी के मिसाइलों का भी उत्पादन न करे.

Weather Update: मौसम का उतार-चढ़ाव जारी, दिल्ली में बूंदाबांदी; MP-UP में बदले हालात, IMD का अलर्ट…

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दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। IMD ने हल्की बारिश की संभावना जताई है। वहीं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मौसम में बदलाव देखा जा रहा है, जिससे लोगों को अस्थायी राहत मिली है।

दिल्ली-एनसीआर में बूंदाबांदी, मौसम हुआ सुहावना

सुबह-सुबह हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। आसमान में बादलों की आवाजाही भी लगातार बनी रही।

IMD का ताजा अपडेट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सोमवार को हल्की बारिश की संभावना पहले ही जताई गई थी। विभाग ने अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान दिया है। इस बदलाव से मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना हुआ है।

पश्चिमी विक्षोभ का असर

मौसम विभाग के मुताबिक, 26 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा, जिससे फिर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। राजधानी में हाल के दिनों में हवा की रफ्तार बढ़ने और तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषण स्तर में कमी आई है।

मध्यप्रदेश में फिर बढ़ेगी गर्मी

मध्यप्रदेश में पिछले चार दिनों से जारी बारिश और बादलों का दौर अब समाप्त हो गया है। मौसम साफ होते ही एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ने लगा है। हालांकि, 26 मार्च के बाद पश्चिमी हिस्सों में बारिश की संभावना बन सकती है।

उत्तर प्रदेश और बिहार का हाल

उत्तर प्रदेश में हालिया मौसम परिवर्तन के कारण तापमान में दो से चार डिग्री की गिरावट आई है, जिससे लोगों को कुछ दिन राहत मिलेगी। लेकिन मार्च के अंत तक तापमान फिर बढ़ने की संभावना है।

वहीं बिहार में मौसम विभाग ने आंधी और बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। पटना में तापमान में सात डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम सामान्य बना हुआ है।

ईरान जंग से गहराया गैस-तेल संकट, पीएम मोदी ने बताया भारत की क्या है तैयारी…

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ईरान और इजराइल-अमेरिका जंग से गहराए गैस-तेल संकट को लेकर सरकार संवेदनशील है. ये बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कही. उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है.

भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं. युद्ध के बाद से ही हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है. इसके बावजूद हमारी सरकार का प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित ना हो. इस पर हमारा फोकस रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और कई जरूरी चीजें आती हैं.

जब से युद्ध शुरू हुआ है, होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही बहुत मुश्किल हो गई है. इसके बावजूद हमारी सरकार ने यह पक्का करने की कोशिश की है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर कोई बुरा असर ना पड़े.

पीएम मोदी ने कहा, जैसा कि हम सभी जानते हैं, देश अपनी LPG की 60% जरूरत आयात से पूरी करता है. सप्लाई में अनिश्चितता की वजह से, सरकार ने घरेलू LPG उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है. साथ ही LPG का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है.

पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे, इसके लिए भी लगातार कोशिशें की जा रही हैं.

उन्होंने कहा, बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है. आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है. 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है. बीते 11 साल में हमारी रिफाइनरी कैपेसिटी में भी बड़ा इजाफा हुआ है.

सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर्स के साथ भी लगातार संपर्क में है.

प्रधानमंत्री ने कहा, बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं. संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है. पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है. एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी.

आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं. इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा, पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, अब यह आंकड़ा बढ़कर 41 हो गया है. एक बड़ा सवाल ये है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा? देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है.

हमारा ये भी प्रयास है कि खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके. सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हर संभव मदद करती रहेगी. युद्ध के कारण और भारत में गर्मी का मौसम शुरू होने की वजह से, बिजली की मांग बढ़ गई है. फिलहाल, देश के सभी पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.

भारत ने लगातार दूसरे साल 1 अरब टन से ज़्यादा कोयले का उत्पादन करके एक रिकॉर्ड बनाया है. पिछले एक दशक में देश ने रिन्यूएबल एनर्जी की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं.

पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कूटनीति में भारत की भूमिका स्पष्ट है. शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है. मैंने व्यक्तिगत रूप से पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बात की है.

मैंने सभी से तनाव कम करने और संघर्ष को खत्म करने का आग्रह किया है. भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की है.

प्रधानमंत्री ने कहा, वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की नाकेबंदी अस्वीकार्य है. भारत इस युद्ध जैसे माहौल में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति के माध्यम से लगातार प्रयास कर रहा है. भारत ने हमेशा मानवता के कल्याण और शांति की वकालत की है.

मैं दोहराता हूं कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का एकमात्र समाधान हैं. हमारे सभी प्रयासों का उद्देश्य तनाव कम करना और इस संघर्ष को समाप्त करना है.

पीएम मोदी ने कहा, इस युद्ध में किसी के भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हित में नहीं है. इसलिए, भारत के प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द एक शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है.

उन्होंने कहा, जब ऐसे संकट उत्पन्न होते हैं तो कुछ तत्व उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. इसलिए, एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है. सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो, या रणनीतिक प्रतिष्ठान हों.

National Tribal Games 2026: रायपुर में सजेगा ट्राइबल गेम्स का मंच, छत्तीसगढ़ के 200 खिलाड़ी होंगे शामिल…

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रायपुर एक बार फिर बड़े खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तैयार है। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर बड़े खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तैयार है। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देशभर से आने वाले 1069 खिलाड़ी और ऑफिशियल्स के ठहरने, आवागमन और प्रतियोगिताओं के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन और खेल विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

7 होटलों में ठहरेंगे खिलाड़ी और ऑफिशियल्स

इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में शामिल होने वाले खिलाड़ियों और उनके ऑफिशियल्स को रायपुर के 7 अलग-अलग होटलों में ठहराया जाएगा। खासतौर पर वीआईपी रोड और आसपास के प्रमुख होटलों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जहां सुरक्षा, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

इन खेलों में दिखेगा जनजातीय प्रतिभा का दम

ट्राइबल गेम्स में इस बार स्विमिंग, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तीरंदाजी जैसी प्रमुख प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन खेलों में केवल जनजातीय वर्ग के खिलाड़ी ही हिस्सा लेंगे, जिससे देशभर की पारंपरिक और उभरती खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।

छत्तीसगढ़ से 200 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

मेजबान राज्य छत्तीसगढ़ की ओर से करीब 200 खिलाड़ियों का दल इस आयोजन में भाग लेगा। स्थानीय खिलाड़ियों को अपने घरेलू मैदान पर प्रदर्शन का मौका मिलेगा, जिससे राज्य के खेल प्रतिभाओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

पहली बार लद्दाख की टीम भी शामिल

इस बार आयोजन की खास बात यह है कि पहली बार लद्दाख की टीम भी इसमें हिस्सा लेने रायपुर पहुंचेगी। इससे खेलों का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है और विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय खेल संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा।

खिलाड़ियों का आगमन शुरू, कंट्रोल रूम स्थापित

खिलाड़ियों के रायपुर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। अरुणाचल प्रदेश की वेटलिफ्टिंग टीम 22 मार्च को राजधानी पहुंच गई है। वहीं, 24 मार्च की सुबह तक सभी टीमों के पहुंचने की संभावना है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जिससे आवागमन और समन्वय में किसी तरह की परेशानी न हो।

10 दिनों तक चलेगा खेल महाकुंभ

करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस खेल आयोजन का उद्घाटन 25 मार्च को रायपुर में होगा। वहीं, समापन समारोह अंबिकापुर में आयोजित किए जाने की संभावना है। यह आयोजन इस वर्ष राजधानी में स्कूल नेशनल के बाद दूसरा बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट है।

व्यापक तैयारियों में जुटा प्रशासन

इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और खेल विभाग पूरी तरह सक्रिय है। खिलाड़ियों के ठहरने से लेकर प्रतियोगिता स्थलों की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

CG” किसान होंगे समृद्ध, महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर.. साय सरकार के ‘SANKALP’ से संवरेगा छत्तीसगढ़’

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छत्तीसगढ़ के किसान होंगे समृद्ध, महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर..

Vishnu Ka Sushasan: Chhattisgarh Sankalp Budget 2026

Chhattisgarh Sankalp Budget 2026 छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में शासन की नई शैली और प्राथमिकताओं का स्पष्ट बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने अपने कार्यकाल में “सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण” को केंद्र में रखते हुए कई अहम पहलें की हैं, जिनका असर राज्य के विभिन्न वर्गों किसान, गरीब, युवा और महिलाओं पर दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार का हालिया बजट राज्य की आर्थिक प्राथमिकताओं और विकास की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और विज़न का प्रतिबिंब है, जिसमें किसान, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को केंद्र में रखा गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली सुशासन की सरकार ने GYAN, GATI के बाद SANKALP पर फोकस किया है। इस बार का बजट SANKALP थीम पर आधारित है। छत्तीसगढ़ में साय सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए बस्तर और अन्य पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार का बड़ा रोडमैप सामने रखा है। सरकार ने इस वर्ष कुल व्यय 1.72 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया है, जिसमें राजस्व व्यय 1.45 लाख करोड़ रुपए और पूंजीगत व्यय 26,500 करोड़ रुपए रखा गया है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को गति मिलेगी, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों को मजबूती मिलेगी। बजट में पूंजी निवेश के लिए केंद्र से मिलने वाली विशेष सहायता को 4,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 8,500 करोड़ रुपए किया गया है, जिससे बड़े बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं राजकोषीय घाटा GSDP के 2.87 प्रतिशत पर नियंत्रित रखा गया है, जो संतुलित वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है और राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत देता है।

किसानों के लिए बजट का बड़ा हिस्सा (Chhattisgarh Sankalp Budget 2026)

Chhattisgarh Sankalp Budget 2026 साय सरकार ने बजट में कृषि क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। धान खरीदी, समर्थन मूल्य और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। साथ ही सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के लिए बजट में विशेष राशि का प्रावधान कर कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार ने ‘कृषक उन्नति योजना’ के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जिससे किसानों को आर्थिक सहायता और कृषि विकास को गति मिलेगी। कृषि पंपों के लिए 5,500 करोड़ रुपए की व्यवस्था कर सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, वहीं भूमिहीन कृषि परिवारों के समर्थन के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योग, एग्रो-फॉरेस्ट प्रोसेसिंग, राइस मिल और पोल्ट्री फार्म जैसे रोजगारमूलक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में मदद मिलेगी।

महिलाओं को पंजीयन शुल्क में छूट, बालिकाओं को 1.5 लाख

छत्तीसगढ़ बजट 2026–27 में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने महिलाओं के नाम से संपत्ति क्रय पर लगने वाले पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे महिलाओं को संपत्ति में स्वामित्व और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ‘रानी दुर्गावती योजना’ शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर पात्र बालिकाओं को 1.5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसक साथ ही ‘मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना’ लागू की जाएगी, वहीं उनके सामाजिक सशक्तिकरण के लिए 250 महतारी सदनों के निर्माण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा महतारी वंदन योजना के लिए भी राशि आवंटित की गई है।

स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस

बजट में गरीब, श्रमिक और कमजोर वर्गों के लिए कई योजनाओं को जारी रखते हुए उनका दायरा बढ़ाया गया है। राशन, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटन बढ़ाया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिले। साय सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है। स्कूलों के उन्नयन, शिक्षकों की भर्ती और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज एवं मेडिकल सिटी की स्थापना की घोषणा की गई है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में डॉक्टरों की विशेष भर्ती की जाएगी, ताकि दूरस्थ इलाकों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार अपने ही क्षेत्र में मिल सके। सड़क, पुल और शहरी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए बजट में बड़ा आवंटन किया गया है। इससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

अधोसंरचना और औद्योगिक विकास

राज्य में 23 नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री नगर उत्थान योजना के लिए 450 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य की 36 सड़कों को मुख्यमंत्री सड़क संपर्क योजना से जोड़ा जाएगा, जिनमें न्यूनतम दो लेन सड़क का प्रावधान रहेगा। सीजी वायु योजना के माध्यम से बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर सहित अन्य क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि 1947 से 2014 तक जितने एयरपोर्ट बने, उससे अधिक एयरपोर्ट पिछले दशक में बने हैं और राज्य सरकार भी इस दिशा में सहयोग कर रही है। छत्तीसगढ़ असिस्टेंस फॉर कॉम्पिटेटिव एग्जाम योजना के तहत ‘उड़ान’, ‘शिखर’ और ‘मंजिल’ घटकों के माध्यम से केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो नई एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी। नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना तथा लैंड बैंक के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं ‘निपुण’ योजना के माध्यम से नई पीढ़ी को औद्योगिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

लोगों में खुशी की नई लहर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के सर्वांगीण और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने विधानसभा में संकल्प-आधारित यह बजट प्रस्तुत करते हुए सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। नीति, न्याय, निवेश, निर्माण और नवाचार के पंचतत्त्वों पर आधारित यह बजट विकसित छत्तीसगढ़ के विजन डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर-2047’ के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में ठोस एवं परिणाममुखी कदम माना जा रहा है। सरकार के इन फैसलों से लोगों में खुशी की नई लहर देखने को मिल रही है और साय सरकार को हितैषी बता रहे हैं।

Navratri Special Train: डोंगरगढ़ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी, इतने दिनों तक चलेंगी स्पेशल ट्रेन, जानें टाइम टेबल….

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Navratri Special Train: 23 से 28 मार्च तक कोरबा-इतवारी के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी, ट्रेन 63 स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे यात्रियों को आसानी होगी, नवरात्रि मेला के लिए डोंगरगढ़ जाने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिलेगी..”

Navratri Special Train आज नवरात्रि का पांचवां दिन है। अगर आप भी मां बंलेश्वरी के दर्शन करने का सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, रेलवे प्रशासन ने चैत्र नवरात्रि मेला पर ट्रेनों में यात्रियों की होने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। रेलवे ने कोरबा-नेताजी सुभाष चंद्र बोस(इतवारी)-कोरबा के मध्य चैत्र नवरात्रि मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। ये गाड़ी 23 से 28 मार्च तक चलेंगी, जो 63 स्टेशनों पर रुकेगी। इससे नवरात्रि मेला के लिए डोंगरगढ़ जाने वाले यात्रियों को अच्छी सुविधा मिलेगी।

जानें टाइम टेबल

Navratri Special Train गाड़ी संख्या 06883 नेताजी सुभाष चंद्र बोस(इतवारी)-कोरबा मेमू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस(इतवारी) स्टेशन से प्रतिदिन सुबह 05 बजे रवाना होकर दुर्ग स्टेशन पर 11:05 बजे, रायपुर स्टेशन पर 12:25 बजे, तिल्दा नेवरा स्टेशन पर 13.50 बजे, भाटापारा स्टेशन पर 14-14 बजे बिलासपुर स्टेशन पर 16.00 बजे, 19.30 बजे कोरबा स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 06884 कोरबा- नेताजी सुभाष चंद्र बोस(इतवारी) मेमू, कोरबा स्टेशन से प्रतिदिन सुबह 05.10 बजे रवाना होकर बिलासपुर 7:25 बजे, भाटापारा 8.37 बजे, तिल्दा नेवरा 9:06 बजे, रायपुर 10.14 बजे, दुर्गा 1225 बजे गोंदिया 16.00 बजे, तथा 19.30 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस(इतवारी) स्टेशन पहुंचेगी।

छत्तीसगढ़ में एक और जगह हो रही अफीम की खेती, मामला सामने आते ही मचा हड़कंप, रायगढ़ जिले में दूसरा मामला आया सामने…

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धान का कटोरा कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ इन दिनों अफीम की खेती को लेकर बेहद सुर्खियों में बना हुआ है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आ रहा है। इसी कड़ी में खबर आ रही रायगढ़ जिले के लैलूंगा में भी अफीम की खेती किए जाने की जानकारी मिली है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम लैलूंगा के लिए रवाना हो चुकी है। फिलहाल अभी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया कि यहां कितनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अनाज पैदा करने वाले किसान क्यों नशे की फसल उगाने लग गए?

एक और किसान उगा रहा था अफीम

मिली जानकारी के अनुसार मामला लैलूंगा के नवीन चट गांव का है, जहां अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां का किसान अपने खेत के कुछ हिस्सों में चोरी छिपे अफीम की खेती कर रहा था। अफीम की खेती किए जाने की जानकारी होने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी है। बता दें कि इससे पहले भी रायगढ़ जिले में अफीम की खेती का खुलासा हो चुका है।

नदी किनारे हो रही थी खेती

गौरतलब है कि तमनार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आमाघाट गांव में नदी किनारे लगभग एक एकड़ भूमि में अफीम की अवैध खेती का पता चला था। पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली तब पुलिस दल मौके पर पहुंचा और एक आरोपी मार्शल सांगा (40) को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने अफीम की फसल को जब्त कर लिया है। बताया गया कि आरोपी झारखंड राज्य के खुंटी जिले का निवासी है और उसकी शादी तमनार क्षेत्र की सुषमा खलखो से हुई है। वह पिछले कुछ वर्षों से ससुराल में रहकर, स्थानीय किसानों से तरबूज़, ककड़ी और सब्जी उगाने के नाम पर खेत किराये पर ले रहा था और गोपनीय तरीके से अफीम की अवैध खेती कर रहा था।

झूठे आरोप अच्छे नहीं लगते: डिप्टी सीएम अरुण साव

इस पूरे मामले पर Arun Sao ने बीते दिनों कहा था कि राज्य सरकार नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि Vishnu Deo Sai ने पहले ही इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद प्रशासन लगातार सक्रिय है। वहीं, कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान नशे के कारोबार को संरक्षण मिलता था और उस समय इस तरह के मामलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं के मुंह से इस तरह के झूठे आरोप अच्छे नहीं लगते, क्योंकि उनके कार्यकाल में ही ऐसी गतिविधियां पनपती रहीं।

दुर्ग में सबसे पहले हुआ खुलासा

बता दें कि, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक बड़ा अफीम खेती का मामला सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, जिले के जेवरा सिरसा पुलिस चौकी के ग्राम समोदा में डेढ़ से 7 एकड़ क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती की जा रही थी। यह खेती शिवनाथ नदी के किनारे की जमीन पर की जा रही थी। मामले में दो भाजपा नेताओं विनायक ताम्रकार और बृजेश ताम्रकार को हिरासत में लिया गया है। पुलिस और जिला प्रशासन की टीम सुबह से ही इलाके में जांच में जुटी हुई है। कलेक्टर अभिजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे और अफीम के पौधों का निरीक्षण किया और कार्रवाई कर रहे हैं।

CG: आम चुनाव और उपचुनाव 2026: सभी मतदान केंद्रों पर सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं और मतदाता सहायता प्रदान की जाएगी…

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की थी।

निर्वाचन आयोग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों  को यह सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक 2,18,807 मतदान केंद्र मतदान के दिन सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं और मतदाता सहायता से सुसज्जित हों।सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं  में पीने का पानी, छाया वाला प्रतीक्षालय, पानी की सुविधा के साथ शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढाल वाला रैंप, एक मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत चिह्न (साइनएज) शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाने के लिए भी कहा गया है ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।

मतदाता जागरूकता को मजबूत करने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार समान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (VFP) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, अनुमोदित पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान केंद्र संख्या और क्रम संख्या खोजने में मदद करने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र स्थान पर बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs)/कर्मचारियों की एक टीम के साथ मतदाता सहायता बूथ (VABs) स्थापित किए जाएंगे। मतदाता सहायता बूथों (VABs) पर प्रमुख संकेत चिह्न होंगे और जैसे ही मतदाता मतदान परिसर के पास पहुंचेंगे, ये आसानी से दिखाई देंगे।

मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग द्वारा की गई कई पहलों में से एक के रूप में, मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाताओं के लिए मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा प्रदान की जाएगी। मतदाता मतदान केंद्र में प्रवेश करने से पहले अपना फोन (स्विच ऑफ करके) एक नामित स्वयंसेवक को सौंप सकते हैं और वोट डालने के बाद उसे वापस प्राप्त कर सकते।आयोग दोहराता है कि सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (AMF) और संबंधित पहुंच उपायों का प्रावधान अनिवार्य है और सभी मतदान केंद्रों पर इसके सख्त अनुपालन की निगरानी की जाएगी। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी मतदाताओं के लिए एक निर्बाध और सुखद मतदान अनुभव सुनिश्चित करने के लिए मतदान की तारीखों से काफी पहले आवश्यक कार्य पूरे कर लें।

हम मुबंई-दिल्ली पर हमला करेंगे. अमेरिका का जिक्र कर पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने क्यों कहा ऐसा?

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भारत में पाकिस्तान के पूर्व हाई कमिश्नर अब्दुल बासित का हैरान करने वाला बयान सामने आया. अब्दुल बासित ने कहा कि अगर पाकिस्तान पर कोई देश हमला करता है तो वो भारत को निशाना बना सकता और यहां हमला करेगा.

अब्दुल बासित ने कहा कि इस इलाके में पहले से ही तनाव काफी ज्यादा है. एक काल्पनिक संघर्ष को लेकर चर्चा की गई. इस दौरान बासित ने कहा कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो हमें बिना एक पल भी सोचे भारत के मुंबई, नई दिल्ली पर हमला करना होगा. उन्होंने कहा कि हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे. इस कद के बाद में जो होगा वो देखा जाएगा.

बासित ने बार-बार इस स्थिति को असंभव बताया. लेकिन चर्चा के दौरान वो फिर से इसी टॉपिक पर लौट आए.<br> उन्होंने कहा कि अगर कोई हमें बुरी नजर से देखता है, तो पाकिस्तान के पास भारत पर हमला करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल हम ऐसा नहीं चाहते और भारत भी ऐसा नहीं चाहता.

बासित ने भारत में किया है काम

बासित भारत से अनजान नहीं हैं. उन्होंने 2014 से 2017 तक नई दिल्ली में पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक के तौर पर काम किया. यह वो दौर था जब दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी पेचीदा थे. उनकी पिछली भूमिका ने उनकी प्रतिक्रिया को और भी ज्यादा अहमियत दी है, क्योंकि अपने कार्यकाल के दौरान उनका भारत के साथ सीधा जुड़ाव रहा था. ये बातें पाकिस्तान से जुड़े तनावपूर्ण रिश्तों के माहौल में सामने आई हैं. इसमें अफगानिस्तान के साथ बढ़ता टकराव भी शामिल है.

अफगान अधिकारियों ने हमले का किया दावा

अफगान अधिकारियों ने पाकिस्तान की सेना पर काबुल, कंधार और पक्तिका जैसे इलाकों में हवाई हमले करने का आरोप लगाया है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने दावा किया कि आम नागरिकों के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें एक पुनर्वास केंद्र भी शामिल था.

कई जानकारों के लिए ये एक अंदाजे के तौर पर शुरू हुआ था, उसने रीजनल सिक्योरिटी और पुराने अधिकारियों की भाषा के बारे में एक बड़ी बातचीत को बढ़ावा दिया है. ऐसे समय में जब जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ा हुआ है, तो काल्पनिक बातों ने भी अपने संभावित असर के लिए ध्यान खींचा है. अभी तक भारतीय अधिकारियों की तरफ से कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है. हालांकि, इसको लेकर अलग-अलग जगहों पर चर्चाएं शुरू कर दी गई हैं.

युद्ध का असर! पेट्रोल-गैस के बाद अब स्मार्टफोन भी होंगे महंगे, अब पसंदीदा गैजेट खरीदने के लिए देने होंगे इतने ज्यादा पैसे…

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दरअसल, सेमीकंडक्टर बनाने के लिए जरूरी कई अहम संसाधन मिडिल ईस्ट से आते हैं. भले ही वहां बड़ी चिप फैक्ट्रियां न हों, लेकिन कच्चे माल की सप्लाई इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है. उदाहरण के तौर पर हीलियम गैस जो चिप निर्माण में कूलिंग और लेजर प्रोसेस के लिए जरूरी होती है उसकी बड़ी आपूर्ति इसी इलाके से होती है. अगर तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है.

इसके अलावा ब्रोमीन जैसे केमिकल जो चिप पैकेजिंग में काम आते हैं और सफाई के लिए जरूरी सल्फ्यूरिक एसिड का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर हालात बिगड़ते हैं तो इन जरूरी सामग्रियों की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

ऊपर से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है. चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों में भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है और ऊर्जा महंगी होने से उत्पादन लागत भी बढ़ रही है. इसके साथ ही माल ढुलाई और बीमा खर्च भी बढ़ रहे हैं जिससे कुल लागत पर दबाव साफ नजर आ रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो चिप सप्लाई पर असर पड़ सकता है जिसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर दिखेगा. यानी आने वाले समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप और यहां तक कि कारें भी महंगी हो सकती हैं.

भारत के लिए यह स्थिति चुनौती और अवसर दोनों लेकर आई है. एक तरफ जहां बढ़ती लागत देश में उभर रही सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है वहीं दूसरी ओर यह आत्मनिर्भर बनने का मौका भी देती है. अब जरूरत सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि उनसे जुड़े कच्चे माल और केमिकल्स के घरेलू उत्पादन पर भी ध्यान देना होगा. दुनिया के किसी एक हिस्से में पैदा हुआ संकट अब सीधे हमारी जेब पर असर डाल सकता है और यही आज की ग्लोबल इकोनॉमी की सच्चाई भी है.