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 राहुल के स्वागत पर मंत्री केदार कश्यप का तंज…

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: राहुल गांधी के 21 जून रायपुर दौरे से पहले वन मंत्री केदार कश्यप का विवादित बयान सामने आया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी का स्वागत दारू से चरण धोकर किया जाए।

छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे से पहले सियासत गरमा गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्षों के 21 जून को रायपुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहुल गांधी शामिल होने वाले हैं। उनके लंबे समय बाद हो रहे छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने विवादास्पद टिप्पणी कर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

मीडिया से चर्चा के दौरान मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अपने शीर्ष नेताओं को खुश करने के लिए नए-नए तरीके अपनाती रही है।

उन्होंने कहा कि पिछली बार प्रियंका गांधी के दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गुलाब की पंखुड़ियों से सड़क बनाई थी। इसी संदर्भ में तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यकाल में कथित शराब घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही है, इसलिए राहुल गांधी के आगमन पर उनका स्वागत “दारू से चरण धोकर” करना चाहिए।

राहुल गांधी के दौरे पर सियासी बयानबाजी तेज

राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ा है। ऐसे में उनके आगमन से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। केदार कश्यप के बयान को कांग्रेस पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है, जबकि इस पर कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना भी बढ़ गई है।

रेत उत्खनन और भाजपा नेता की हत्या पर भी बोले

कोरिया जिले में भाजपा नेता लल्ला सिंह की हत्या और अवैध रेत उत्खनन के मुद्दे पर भी मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय रेत खदानों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं देखने को मिली थीं। कश्यप ने दावा किया कि पूर्ववर्ती शासनकाल में जिन क्षेत्रों में खनन के ठेके दिए गए थे, वहां गहरी खुदाई और बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण देखने को मिलता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ऐसी गतिविधियों पर नियंत्रण करने का प्रयास कर रही है और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।

बिजली दरों को लेकर कांग्रेस के आंदोलन पर पलटवार

बिजली दरों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर भी मंत्री केदार कश्यप ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए आंदोलन कर रही है। कश्यप ने दावा किया कि अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में बिजली की दरें अपेक्षाकृत कम हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सूर्यघर योजना जैसी पहल के माध्यम से लोगों को मुफ्त और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनके अनुसार आने वाले समय में बिजली संकट की स्थिति भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

21 जून को रायपुर आएंगे राहुल गांधी

कांग्रेस संगठन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राहुल गांधी 21 जून को रायपुर पहुंचेंगे। पार्टी इस कार्यक्रम को संगठनात्मक मजबूती और आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। वहीं उनके दौरे से पहले भाजपा नेताओं के बयान प्रदेश की राजनीति का तापमान लगातार बढ़ा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी के दौरे के साथ-साथ भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिससे छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई हलचल देखने को मिलेगी।

दक्षिण-पश्चिम मानसून: मौसम के बदलते मिजाज के बीच प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी…

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”छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है, जिससे उमस और भीषण गर्मी से लोगों को आंशिक राहत मिली है।”

”छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है, जिससे उमस और भीषण गर्मी से लोगों को आंशिक राहत मिली है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।”

”मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले तीन दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मेघगर्जन, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं अगले चार से पांच दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताई गई हैं।”

”मौसम विभाग के अनुसार पंजाब से बिहार तक सक्रिय मौसमी द्रोणिका और विदर्भ से दक्षिण भारत तक बने सिस्टम का असर प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। इसी वजह से कई इलाकों में बादल गरजने और बिजली गिरने की स्थिति बन रही है।”

”राजधानी रायपुर में शुक्रवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश और अंधड़ चलने की संभावना जताई गई है। शहर का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।”

”पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। केशकाल और छिंदगढ़ में 3-3 सेंटीमीटर वर्षा हुई, जबकि कांकेर, गंडई, जगदलपुर, बोराई, बड़े राजपुर, कुआकोंडा, माकड़ी और दुर्ग में 2-2 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा पिपरिया, धमधा, बड़े बचेली, राजनांदगांव, चारामा, तोंगपाल, खड़गांव और भीमभोरी में 1-1 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई।”

राज्य सरकार ने पशुधन विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए गो-समृद्धि कार्य योजना…

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छत्तीसगढ़ सरकार ने पशुपालकों की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ‘गो-समृद्धि कार्ययोजना’ शुरू की है। इस योजना का मुख्य केंद्र बिंदु नस्ल सुधार है, जिसके लिए प्रति गाय 2.85 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इसमें सेक्स सार्टेड सीमन तकनीक का इस्तेमाल कर मादा पशुओं की संख्या बढ़ाने और पशुओं के डिजिटल प्रबंधन पर जोर दिया गया है।

राज्य सरकार ने पशुधन विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए गो-समृद्धि कार्ययोजना शुरू की है। योजना के तहत उत्कृष्ट नस्ल की गायों के विकास, वैज्ञानिक पालन-पोषण और उन्नत प्रजनन तकनीक के लिए प्रति गाय 2.85 लाख रुपये तक का प्रविधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालकों की आय में वृद्धि करने और आवारा गोवंश की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

योजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल और चयनित एनजीओ के माध्यम से लागू किया जाएगा। इसके तहत एक्सेलरेटेड ब्रीड इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के जरिए सेक्स सार्टेड सीमन तकनीक का उपयोग कर मादा बछड़ों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और आवारा नर गोवंश की समस्या में कमी आने की उम्मीद है।

योजना में पशु चिकित्सा, चारा-पोषण, आधुनिक शेड, उन्नत गर्भाधान और डिजिटल प्रबंधन के लिए अलग-अलग बजट तय किया गया है। पशुओं की डिजिटल टैगिंग, स्वास्थ्य निगरानी और टीकाकरण भी अनिवार्य रहेगा।

प्रति गाय 2.85 लाख रुपये का खर्च, सबसे ज्यादा राशि नस्ल सुधार पर

  • पशु चिकित्सा एवं दवाइयां : 25 हजार
  • आधुनिक शेड निर्माण : 1 लाख
  • चारा एवं पोषण : 25 हजार
  • सेक्स सार्टेड सीमन व उन्नत गर्भाधान : 1.50 लाख
  • टैगिंग एवं प्रशासनिक खर्च : 8 हजार
  • कुल प्रावधान : 2.85 लाख प्रति गाय

दूध उत्पादन के आधार पर मिलेगा अनुदान

  • 20 लीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता
  • कुल लागत : 1.58 लाख
  • सरकारी अनुदान : 1.31 लाख
  • हितग्राही अंशदान : 27 हजार
  • 30 लीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता
  • कुल लागत : 1.90 लाख
  • सरकारी सहायता : 1.50 लाख
  • 35 लीटर से अधिक उत्पादन क्षमता
  • कुल लागत : 2.55 लाख
  • सरकारी सहायता : 1.50 से 1.58 लाख तक

कलेक्टर की निगरानी में चलेगी योजना

  1. एनजीओ और निजी एजेंसियों का चयन ईओआई के जरिए होगा।
  2. चयनित संस्था को सरकार के साथ पांच वर्ष का अनुबंध करना गा।
  3. पशुओं की डिजिटल टैगिंग और स्वास्थ्य प्रबंधन अनिवार्य रहेगा।
  4. प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निगरानी करेगी।
  5. अनियमितता मिलने पर संबंधित एजेंसी का अनुबंध निरस्त किया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ जनजागरूकता और पुनर्वास प्रयासों को गति देने राज्य सरकार ने पांच नए नशामुक्ति केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।

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छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ जनजागरूकता और पुनर्वास प्रयासों को गति देने राज्य सरकार ने पांच नए नशामुक्ति केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।

इसके तहत 17 से 26 जून तक पूरे प्रदेश में नशा मुक्त भारत सप्ताह मनाते हुए व्यापक जनअभियान चलाया जाएगा।

प्रदेश में नशे के खिलाफ जनजागरूकता और पुनर्वास प्रयासों को गति देने राज्य सरकार ने पांच नए नशामुक्ति केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।

इसके तहत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, बेमेतरा और कोरबा में नए केंद्र खोले जाएंगे। साथ ही 17 से 26 जून तक पूरे प्रदेश में नशा मुक्त भारत सप्ताह मनाते हुए व्यापक जनअभियान चलाया जाएगा।

समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत माता वाहिनी योजना के विस्तार, नशामुक्ति केंद्रों की मानिटरिंग, पुनर्वास सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और विभागीय समन्वय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

समिति ने 15 बिस्तरों वाले एकीकृत पुनर्वास केंद्रों की क्षमता बढ़ाकर 50 बिस्तर करने का सुझाव दिया।

जिन जिलों में नशामुक्ति केंद्र संचालित नहीं हैं, वहां स्थापना की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी।

बैठक में नशामुक्ति केंद्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरे तथा बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली लगाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।

वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक किए गए कार्यों और व्यय की समीक्षा के साथ वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।

इधर, समाज कल्याण विभाग ने 17 से 26 जून तक प्रदेशभर में नशा मुक्त भारत सप्ताह मनाने की घोषणा की है।

नशा मुक्त भारत अभियान-विकसित भारत की पहचान थीम के तहत स्कूलों, कालेजों और सार्वजनिक स्थलों पर रैली, शपथ ग्रहण, सेमिनार, खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।

प्रमुख सचिव शहला निगार ने मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।

मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि पीएम मोदी….

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त के रूप में देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेंगे। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को दी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त के रूप में देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेंगे। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को दी गई।

मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त किसानों के खाते में ट्रांसफर करेंगे। इस दौरान वह ‘विकसित भारत, विकसित पश्चिम बंगाल’ के संकल्प को नई गति देने के उद्देश्य से कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, राष्ट्र को समर्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे।

साथ ही, वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीटेक, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन तथा प्रधानमंत्री धन‑धान्य कृषि योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे, जिनसे किसानों की आय, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और समावेशी विकास को व्यापक बल मिलेगा और पश्चिम बंगाल का कृषि परिदृश्य भी बदल जाएगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में पश्चिम बंगाल में होने वाला यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम किसानों, ग्रामीण समुदाय और युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का संकल्प है कि पूर्वी भारत को कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास का मजबूत केंद्र बनाया जाए और 20 जून का कार्यक्रम इसी विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त के तहत केवल पश्चिम बंगाल में ही 45.35 लाख से अधिक लाभार्थी किसानों को लगभग 907 करोड़ रुपये किस्त के रूप में प्राप्त होंगे। इसके साथ ही राज्य में पीएम‑किसान योजना के अंतर्गत अब तक वितरित कुल राशि 15,055 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी जबकि 2019 में योजना की शुरुआत से लेकर पूरे देश में कुल वितरण 4.46 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) का भी शुभारंभ करेंगे, जिनकी संयुक्त लागत लगभग 12,200 करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2026‑27 के दौरान इन योजनाओं के माध्यम से लगभग 1.10 करोड़ किसानों को 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसल बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके तहत लगभग 28,140 करोड़ रुपये मूल्य की फसलें बीमा संरक्षण के दायरे में आएंगी।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 19 से 21 जून तक केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर रहेंगे…

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 19 से 21 जून तक केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह लेह में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 19 से 21 जून तक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह लेह में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, उपराष्ट्रपति 20 जून को वाइब्रेंट विलेज लुकुंग का दौरा करेंगे। वहां वह स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप्स) से बातचीत करेंगे और वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमा क्षेत्र में चल रही विकास परियोजनाओं का जायजा लेंगे।

इसके बाद उपराष्ट्रपति युद्ध स्मारक जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

21 जून को उपराष्ट्रपति लेह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में युवा, सशस्त्र बलों के जवान और विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल होंगे तथा योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण का संदेश देंगे।

इस बीच, राधाकृष्णन ने देशभर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से पिछले वर्ष शुरू किए गए ड्रग-फ्री कैंपस अभियान से जुड़ने की अपील की।

उन्होंने विश्वविद्यालयों से छात्रों को इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं के बीच सामूहिक प्रयास और लगातार जागरूकता बेहद जरूरी है।

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ”मैंने इस वर्ष की शुरुआत में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में ड्रग-फ्री कैंपस अभियान और ई-प्लेज प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। मैंने छात्रों से नशा मुक्त भारत के दूत बनने और नशे की बुराई के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया था।”

उन्होंने कहा, ”मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि विश्वविद्यालय ने नशा मुक्त परिसर अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सामूहिक प्रयासों के जरिए 53,000 से अधिक छात्रों ने शपथ ली है, जो एक स्वस्थ, मजबूत और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लक्ष्य में योगदान दे रही है।”

’13 दिनों में 19 राज्यों तक पहुँचा मॉनसून’ बन रहे हैं अल-नीनो (El Niño) के हालात…’

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पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार धीमी पड़ गई है। लगभग 15 दिन पहले तक ऐसा लग रहा था कि देश के ज़्यादातर हिस्सों में जल्द ही भारी बारिश होगी, लेकिन मौजूदा हालात ने लोगों को निराश किया है। IMD ने इस देरी की वजहों के बारे में जानकारी देते हुए एक प्रेस रिलीज़ जारी की है।

13 दिनों में 19 राज्यों तक पहुँचा मॉनसून

4 जून को केरल पहुँचने के बाद, मॉनसून 13 दिनों में 19 राज्यों तक पहुँच गया। हालाँकि, 8 जून से यह तेलंगाना के भद्राचलम में रुका हुआ है। आम तौर पर, मॉनसून 18-20 जून तक उत्तर प्रदेश, 15-16 जून तक मध्य प्रदेश और 20 जून तक राजस्थान पहुँच जाता है; लेकिन इस साल, यह इन राज्यों में 22 जून के बाद ही पहुँचेगा। यह लगातार तीसरा साल है जब जून में मॉनसून की रफ़्तार में लंबी रुकावट देखी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4-5 दिनों में मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना है, जिससे कुल मिलाकर 13 से 15 दिनों की देरी हो सकती है। 2024 और 2025 में सामान्य से ज़्यादा बारिश के बावजूद, इस साल 17 जून तक देश में सामान्य से 37.8% कम बारिश हुई है।

बन रहे हैं अल-नीनो (El Niño) के हालात

US नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने सैटेलाइट डेटा के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है। इससे पता चलता है कि इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस ज़ोन (ITCZ) काफ़ी तेज़ी से सक्रिय नहीं हुआ है, जिसकी वजह से मॉनसून धीमा पड़ गया है। अल-नीनो के हालात भी बन रहे हैं, जिससे लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है और बारिश असमान हो सकती है। मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी भारत में कहीं-कहीं बादल छाए हुए हैं।

20 जून के आसपास तेज़ हवाओं की संभावना

इस साल मॉनसून की प्रक्रिया पूरी क्षमता से नहीं चल रही है। मज़बूत सोमाली जेट (Somali jet) न होने के कारण, भारत में नमी का आना काफ़ी कम रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश की कमी हुई है। अब अनुमान मॉडल बताते हैं कि 20 जून के आसपास जेट हवाएँ काफ़ी तेज़ हो सकती हैं। जैसे-जैसे अरब सागर के ऊपर हवाएँ तेज़ होंगी, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और पश्चिमी भारत के अन्य हिस्सों में नमी का आना तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है।

मौजूदा जेट स्ट्रीम पैटर्न

मौसम विभाग के अनुसार, जैसे-जैसे मौजूदा जेट स्ट्रीम पैटर्न कमजोर होगा, मॉनसून की हवाएं और तेज हो जाएंगी। अगले 4-5 दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। जेट स्ट्रीम तेज गति वाली हवाएं होती हैं जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में, आमतौर पर पृथ्वी की सतह से 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहती हैं। ये मॉनसून के बादलों और पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) को प्रभावित करती हैं।

वैज्ञानिक भी चिंतित

भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर सूखी हवा का लगातार बहना मॉनसून की प्रगति में एक बड़ी बाधा है। कई राज्य मॉनसून की बारिश शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, और बारिश की कमी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। मॉनसून की इस लंबी सुस्ती ने किसानों, जल प्रबंधन विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों सभी को चिंतित कर दिया है। देश के बड़े हिस्सों में लू (हीट वेव) का दौर जारी है, लेकिन मॉनसून को उपमहाद्वीप में और अंदर तक ले जाने के लिए जरूरी वायुमंडलीय स्थितियां कमजोर बनी हुई हैं।

हालात फिर से पटरी पर

मौसम वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि स्थिति बदल सकती है। मॉनसून की जोरदार प्रगति के लिए जरूरी कई अहम कारक अब अनुकूल होते दिख रहे हैं। भारत के पश्चिमी तट पर धीरे-धीरे नमी लौट रही है, जिससे बारिश वाले बादल बनने के लिए अधिक अनुकूल माहौल बन रहा है। यदि पूर्वानुमान के अनुसार ये मौसमी कारक मजबूत होते हैं, तो आने वाले दिनों में मॉनसून तेजी से भारत में उत्तर और पश्चिम की ओर बढ़ सकता है।

 

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग (विनिर्माण) अब भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं की श्रेणी (कटेगरी) में तीसरे सबसे बड़े स्थान…

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग (विनिर्माण) अब भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं की श्रेणी (कटेगरी) में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुंच गया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग (विनिर्माण) अब भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं की श्रेणी (कटेगरी) में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुंच गया है।

केंद्रीय मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच की सराहना की।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अब 13 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। शुरुआत में इस क्षेत्र का लक्ष्य शीर्ष 10 निर्यात श्रेणियों में स्थान बनाना था, लेकिन इसके बाद यह लगातार 9वें, 7वें, 5वें, 4वें और अब तीसरे स्थान तक पहुंच गया है।

अश्विनी वैष्णव ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पुणे के रंजनगांव में जैबिल की अत्याधुनिक और उच्च तकनीक वाली विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि एआई वैश्विक विकास की एक बड़ी ताकत बन चुकी है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का देश के भीतर विकसित होना बेहद जरूरी है।

वैष्णव ने कहा कि आज एआई डेटा सेंटर दुनिया भर में विकास का एक बड़ा इंजन बन चुके हैं। इसलिए प्रधानमंत्री की ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि इन डेटा सेंटरों को चलाने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही हो।

उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात की कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट सोच और नीतियों ने भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण साझेदार बना दिया है।

जैबिल अपनी आधुनिक और अत्याधुनिक इकाई के माध्यम से पुणे में डेटा सेंटरों के लिए जरूरी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण करेगी।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता बहुत अधिक है और यह भारत की घरेलू तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ दुनिया के विभिन्न देशों को निर्यात भी करेगा।

इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों, तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और स्थानीय आपूर्ति शृंखला को जोड़ने वाला यह नया तंत्र देश को महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुंचाने वाला है।

यह यूनिट अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र है, जो आधुनिक तकनीकी अवसंरचना के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है।

इस संयंत्र में एआई सिस्टम, एआई आधारित डेटा सेंटर उपकरण, 5जी तकनीक, उच्च स्तरीय नेटवर्किंग उपकरण, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।

सरकार के सक्रिय सहयोग से यह परियोजना स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

इसके साथ ही यह गहन स्थानीयकरण कार्यक्रम को बढ़ावा देगी, जिसके तहत घरेलू आपूर्ति शृंखला और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सीधे वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा जाएगा।

विवा टेक 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में भारत की भूमिका पर बोलते हुए गोयल ने कहा…

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, सस्ता डेटा, बढ़ती तकनीकी क्षमताएं और समावेशी विकास का दृष्टिकोण भारत को वैश्विक तकनीकी क्रांति में अग्रणी स्थान पर पहुंचा रहा है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, सस्ता डेटा, बढ़ती तकनीकी क्षमताएं और समावेशी विकास का दृष्टिकोण भारत को वैश्विक तकनीकी क्रांति में अग्रणी स्थान पर पहुंचा रहा है।

विवा टेक 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में भारत की भूमिका पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि भारत के पास कई ऐसी प्राकृतिक ताकतें हैं, जो उसे वैश्विक तकनीकी अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने योग्य बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत कई देशों की तुलना में तकनीक को अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से अपनाता है तथा एआई को खतरे के बजाय विकास का माध्यम मानता है।

गोयल ने कहा, “भारत दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। हमारी युवा और प्रतिभाशाली आबादी, सस्ता डेटा, बढ़ती क्षमताएं और साझा विकास का दृष्टिकोण हमें तकनीकी विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करता है।”

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई कभी भी मानव बुद्धिमत्ता, मानवीय मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं का स्थान नहीं ले सकता।

उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। देश की औसत आयु 30 वर्ष से कम है, जो उसे अन्य देशों की तुलना में विशेष बढ़त देती है।

गोयल ने कहा, “हमारे पास युवा आबादी है और यह बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी औसत आयु 30 वर्ष से कम है। हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। इससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और नवाचार को गति मिलती है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे पास 1.4 अरब लोगों का विशाल बाजार है, जो मांग पैदा करता है और हमें बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था का लाभ देता है।”

मंत्री ने कहा कि भारत के पास डेटा सेंटरों और कंप्यूटिंग ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली संसाधन उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, “भारत में डेटा की लागत अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। हमारे पास डेटा सेंटरों, कंप्यूटिंग क्षमता और अन्य तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध है।”

गोयल ने यह भी कहा कि भारत दुनिया में विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या में स्नातक तैयार करता है।

उन्होंने कहा, “हम दुनिया में सबसे अधिक एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) स्नातक तैयार करते हैं, जो तकनीकी क्षेत्र की रीढ़ हैं।”

एआई के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं पर गोयल ने कहा कि तकनीकी प्रगति मानवों की भूमिका को खत्म नहीं करेगी, बल्कि नए अवसर और नए करियर विकल्प पैदा करेगी।

बजट 2026 में कूरियर आयात-निर्यात नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव…

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राष्ट्रीय राजधानी में यूनियन बजट 2026 में एक्सप्रेस (कूरियर) सेक्टर के लिए घोषित नीतिगत सुधारों पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत, सीमा शुल्क विभाग और व्यापार विशेषज्ञों ने भाग लिया और बजट में घोषित नई व्यवस्थाओं और उनके संभावित प्रभावों पर विस्तार से बात की।

राष्ट्रीय राजधानी में यूनियन बजट 2026 में एक्सप्रेस (कूरियर) सेक्टर के लिए घोषित नीतिगत सुधारों पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत, सीमा शुल्क विभाग और व्यापार विशेषज्ञों ने भाग लिया और बजट में घोषित नई व्यवस्थाओं और उनके संभावित प्रभावों पर विस्तार से बात की।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने कहा कि बजट 2026 में कूरियर आयात-निर्यात नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले ई-कॉमर्स के जरिए कूरियर और डाक माध्यम से होने वाले निर्यात पर 10 लाख रुपए की मूल्य सीमा लागू थी, लेकिन अब सरकार ने इस सीमा को समाप्त कर दिया है।

उन्होंने कहा कि इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को काफी फायदा होगा, खासकर उन कंपनियों को जो उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात करती हैं। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अधिक मजबूत होगी।

वहीं, ईआईसीआई के सीईओ विजय कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि बजट में घोषित सुधारों का मुख्य उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना है। उन्होंने बताया कि उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात पर लगी सीमा हटाने से निर्यातकों को कूरियर माध्यम से बड़े मूल्य की शिपमेंट भेजने में सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय गंतव्य पर अस्वीकार होने वाली खेपों (रिटर्न-टू-ओरिजिन – आरटीओ) को वापस लाने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। उनका मानना है कि ये सुधार व्यापार जगत के सामने आने वाली कई चुनौतियों को कम करेंगे और निर्यात गतिविधियों को नई गति देंगे।

इसके अलावा, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य योगेंद्र गर्ग ने न्यूज एजेंसी से कहा कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस और कूरियर उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में मूल्य सीमा और रिटर्न-टू-ओरिजिन जैसी सुविधाओं का अभाव शामिल था।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक सुधार किए हैं, जिससे कूरियर और एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स उद्योग को अधिक तेज, सरल और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।

इसके साथ ही, दिल्ली के एयर कार्गो के कमिश्नर योगेंद्र सिंह ने कहा कि इस बार के केंद्रीय बजट में व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। इन्हीं सुधारों की जानकारी उद्योग जगत तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए बदलावों से व्यापार प्रक्रियाएं अधिक सरल और प्रभावी बनेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में किए गए ये सुधार भारतीय निर्यातकों, ई-कॉमर्स कंपनियों और लॉजिस्टिक्स उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। मूल्य सीमा हटने और प्रक्रियाओं के सरलीकरण से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजारों में पहुंच बढ़ेगी, जबकि व्यापार करने में आसानी आने से देश के निर्यात को भी नया बल मिलेगा।