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Salary Structure change from 1 April: 1 अप्रैल से आपकी सैलरी स्लिप में दिखेगा बड़ा बदलाव, लागू होने जा रहा नया नियम…

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Salary Structure change from 1 April: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर है. 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने जा रहा है. इस दौरान वेतनभोगी कर्मचारियों के पे-स्लिप में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.

दरअसल, 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 (New Income Tax Act 2025) और नया लेबर कोर्ड (Labour Code) लागू होने जा रहा है. इससे आपका सैलरी स्ट्रक्चर और टेक होम सैलरी में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे.

क्या होगा बदलाव?

नए लेबर कोड के मुताबिक, आपकी बेसिक सैलरी आके टोटल CTC का 50 परसेंट होनी चाहिए. अभी बहुत सी कंपनियां टैक्स बचाने के लिए बेसिक सैलरी को कम रखती हैं और HRA, Travel Allowance और Special Allowance जैसे भत्ताें को 70-80 परसेंट तक बढ़ा देती हैं. लेकिन अब नए नियम के तहत कंपनियां सभी भत्तों को मिलाकर टोटल सैलरी के 50 परसेंट से ज्यादा नहीं रख पाएंगी.

अब चूंकि आपके पीएफ और ग्रैच्युटी का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी के आधार पर होता है इसलिए अगर बेसिक पे बढ़ेगी, तो आपका रिटायरमेंट फंड और उस पर आपका कंट्रीब्यूशन भी अपने आप ही बढ़ जाएगा.

पीएफ ज्यादा कटने का असर आपकी टेक होम सैलरी पर पड़ेगा. पीएफ ज्यादा कटने से हाथ में आने वाली सैलरी कुछ कम हो सकती है. हालांकि, यह कंपनियों के मौजूदा स्ट्रक्चर पर भी निर्भर करेगा. यानी कि बेसिक पे 50 परसेंट रखने का असर इस बात पर तय होगा कि अभी आपकी कंपनी ने आपकी बेसिक सैलरी कितनी रखी है. उदाहरण के तौर पर, अगर अभी आपकी सीटीसी 50000 रुपये है और बेसिक पे 25000 (50 परसेंट) है, तो नए नियम का आप पर कोई असर नहीं होगा. आपकी इन-हैंड सैलरी ज्यों की त्यों रहेगी. हां, अगर आपकी टोटल सैलरी 50000 रुपये है और कंपनी टैक्स बचाने के लिए आपको सिर्फ 10000 रुपये (20 परसेंट) बेसिक पे दे रही है और बाकी 40000 रुपये अलाउंस में जोड़ रही है, तो इस स्थिति में कंपनी को आपकी बेसिक पे बढ़ानी होगी.

बेसिक सैलरी बढ़ने से कुछ मामलों में टैक्स की देनदारी बढ़ सकती है. इनकम टैक्स नियम के मुताबिक, आपको मिलने वाली HRA छूट आपकी बेसिक सैलरी पर बेस्ड होती है. बेसिक सैलरी बढ़ने पर आपके किराए में से घटने वाला हिस्सा (बेसिक पे का 10 परसेंट) बढ़ जाएगा. इससे HRA की टैक्स छूट कम हो जाएगी. यहां यह ध्यान में रखने वाली बात हैकि पुरानी टैक्स व्यवस्था अभी खत्म नहीं हुई है. जिनकी सालाना इनकम 10-30 लाख रुपये के बीच है और जो मेट्रो सिटीज में रहते हैं और किराया ज्यादा देना पड़ रहा है या होम लोन ज्यादा अमाउंट में कट रहा है, वे 80C और NPS जैसी स्कीम्स का फायदा टैक्स बचाने के लिए कर सकते हैं.

नया टैक्स रिजीम चुनने वालों के लिए टैक्स बढ़ने का डर कम है क्योंकि न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12.75 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री है. नए रिजीम में HRA या अन्य भत्तों पर छूट नहीं मिलती है. इसमें 75000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर 12.75 लाख सालाना कमाने वालों को शून्य टैक्स देना होगा. ऐसे में बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका टैक्स कैलकुलेशन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.

Petrol Diesel Price Today 22 March: आज पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ या महंगा? पंप जाने से पहले चेक कर लें आज का रेट…

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अगर आप आज यानी 22 मार्च 2026 को अपनी गाड़ी का टैंक फुल कराने के लिए घर से निकल रहे हैं, तो पेट्रोल पंप पहुंचने से पहले ईंधन के ताज़ा भाव जानना आपके लिए बेहद ज़रूरी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ ली है.

स्थिति यह है कि क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है. इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार गिरावट देखी जा रही है. इन दोनों बड़े आर्थिक बदलावों के बीच, देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं.

100 डॉलर के पार कच्चा तेल

नियमों के मुताबिक, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के आधार पर ईंधन के दाम तय करती हैं. वर्तमान में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और रुपये की कमजोरी के कारण तेल कंपनियों पर दाम बढ़ाने का भारी दबाव बना हुआ है.

हालांकि, राहत की बात यह है कि कंपनियों ने फिलहाल आम ग्राहकों पर इसका सीधा बोझ नहीं डाला है. आपको यह जानकर तसल्ली होगी कि देश में सामान्य पेट्रोल-डीजल के आधार मूल्य में 30 अक्टूबर 2024 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है. विपणन कंपनियां अभी भी इस भारी दबाव को खुद सहकर ग्राहकों को राहत देने का प्रयास कर रही हैं.

प्रीमियम तेल भरवाने वालों को लगा झटका

भले ही सामान्य ईंधन के दाम स्थिर हों, लेकिन अगर आप अपनी गाड़ी में प्रीमियम क्वालिटी का तेल इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए खर्च बढ़ चुका है. इंडियन ऑयल ने अपने प्रीमियम पेट्रोल ‘एक्सपी95’ (XP95) के दामों में 20 मार्च को 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत अब 101.89 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है. वहीं, राहत इस बात की है कि प्रीमियम डीजल ‘एक्सजी’ (XG) की कीमतों में फिलहाल शांति है और यह 91.49 रुपये प्रति लीटर के भाव पर स्थिर बना हुआ है.

आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के भाव?

देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय टैक्स (VAT) और माल ढुलाई के खर्च के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भिन्नता देखने को मिलती है. प्रमुख महानगरों की ताज़ा स्थिति इस प्रकार है:

नई दिल्ली: देश की राजधानी में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है.

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में पेट्रोल का रेट औसतन 104.21 रुपये और डीजल 92.15 रुपये प्रति लीटर है (शहर के कुछ पंपों पर पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर के भाव पर भी दर्ज किया गया है).

कोलकाता: यहां पेट्रोल 103.94 रुपये और डीजल 90.76 रुपये प्रति लीटर है (कुछ इलाकों में पेट्रोल 105.45 रुपये और डीजल 92.02 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर भी है).

चेन्नई: दक्षिण के इस प्रमुख महानगर में पेट्रोल 100.75 रुपये और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर है (अन्य क्षेत्रों में यह क्रमशः 100.84 रुपये और 92.39 रुपये तक है).

पटना: बिहार की राजधानी में आज पेट्रोल 105.58 रुपये और डीजल 93.80 रुपये प्रति लीटर के भाव पर टिका हुआ है.

टियर-2 शहरों में क्या है भाव

  • हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46 / डीजल ₹95.70
  • इंदौर: पेट्रोल ₹106.48 / डीजल ₹91.88
  • जयपुर: पेट्रोल ₹104.72 / डीजल ₹90.21
  • पुणे: पेट्रोल ₹104.04 / डीजल ₹90.57
  • बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 / डीजल ₹89.02
  • लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69 / डीजल ₹87.80
  • अहमदाबाद: पेट्रोल ₹94.49 / डीजल ₹90.17
  • चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30 / डीजल ₹82.45
  • नासिक: पेट्रोल ₹95.50 / डीजल ₹89.50
  • सूरत: पेट्रोल ₹95.00 / डीजल ₹89.00

Windows 11 में आ रहा बड़ा अपडेट! स्पीड, स्टेबिलिटी और एक्सपीरियंस होगा पहले से कहीं बेहतर…

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माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) अपने Windows 11 को और बेहतर बनाने की तैयारी में है, जिसमें यूजर्स को पहले से ज्यादा तेज और स्मूथ अनुभव मिलेगा. कंपनी का फोकस इस बार तीन चीजों-स्पीड, स्टेबिलिटी और यूजर एक्सपीरियंस पर है.

नए अपडेट के साथ सिस्टम न सिर्फ तेज चलेगा, बल्कि क्रैश और लैग जैसी समस्याएं भी काफी हद तक कम हो जाएंगी. यह बदलाव रोजमर्रा के काम को आसान और बिना रुकावट के बनाने के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं. चलिए जानते हैं विंडोज 11 अपडेट के फीचर्स और नए बदलावों के बारे में…

स्पीड और परफॉर्मेंस में होगा बड़ा सुधार

माइक्रोसॉफ्ट इस अपडेट के जरिए Windows 11 को ज्यादा तेज और रिस्पॉन्सिव बनाने की योजना पर काम कर रहा है. सिस्टम के रिसोर्स का इस्तेमाल कम किया जाएगा, जिससे ऐप्स तेजी से खुलेंगे और बिना रुकावट के चलेंगे. फाइल एक्सप्लोरर जैसे जरूरी टूल्स की स्पीड भी बढ़ाई जाएगी, जिससे फाइल कॉपी और सर्च करना पहले से आसान होगा. कुल मिलाकर, यह अपडेट रोजमर्रा के काम को तेज और आसान बनाने पर केंद्रित है, ताकि यूजर्स को बेहतर अनुभव मिल सके.

स्टेबिलिटी और क्रैश की समस्या पर फोकस

नए अपडेट का एक बड़ा लक्ष्य सिस्टम को ज्यादा स्टेबल बनाना है. कंपनी कोशिश कर रही है कि बार-बार होने वाले क्रैश और एरर को कम किया जाए. इसके अलावा, ब्लूटूथ, USB और अन्य डिवाइस कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाया जाएगा, जिससे डिवाइस ज्यादा भरोसेमंद तरीके से काम करेंगे. कैमरा और ऑडियो परफॉर्मेंस में भी सुधार किया जाएगा, जिससे वीडियो कॉल और मीडिया एक्सपीरियंस बेहतर हो सके.

नए फीचर्स और आसान कंट्रोल्स मिलेंगे

Windows 11 अपडेट में यूजर्स को अपडेट मैनेज करने के बेहतर ऑप्शन मिलेंगे. अब आप आसानी से अपडेट को पॉज या कंट्रोल कर पाएंगे. इसके अलावा, मल्टीटास्किंग को और स्मूथ बनाया जाएगा, जिससे एक साथ कई ऐप्स इस्तेमाल करना आसान होगा. माइक्रोसॉफ्ट का ध्यान इस बात पर है कि यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल मिले और सिस्टम का इस्तेमाल आसान बने.

इंटरफेस होगा क्लीन और कस्टमाइजेशन ज्यादा

नए अपडेट के साथ Windows 11 का इंटरफेस पहले से ज्यादा साफ और कम डिस्टर्ब करने वाला होगा. नोटिफिकेशन कम होंगे और यूजर को ज्यादा फोकस्ड एक्सपीरियंस मिलेगा. स्टार्ट मेन्यू और टास्कबार में ज्यादा कस्टमाइजेशन ऑप्शन मिलेंगे, जिससे यूजर्स अपने हिसाब से सिस्टम को सेट कर सकेंगे. AI फीचर्स को भी सोच-समझकर जोड़ा जाएगा, ताकि यूजर्स को कंट्रोल मिले और सिस्टम ज्यादा जटिल न हो.

ईरान पर हमले के लिए PAK पर दबाव डाल रहा सऊदी, क्यों चाहकर भी अटैक नहीं कर सकती मुनीर की सेना? समझें कारण…

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ईरान पर हमले के लिए सऊदी अरब पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है और उसे 2025 के रक्षा समझौते की याद दिला रहा है. सऊदी विशेषज्ञों के जरिए कनाडा को भेजे गए एक टीवी संदेश में रियाद ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर वो इस्लामाबाद से कार्रवाई की उम्मीद करते हैं.

सऊदी अरब यमन में जमीनी अभियानों को जारी रखने में आई चुनौतियों के बाद पाकिस्तान की अनुभवी सेना पर निर्भर नजर आ रहा है. कहा जाता है कि इस रक्षा समझौते से रियाद को पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का लाभ मिलेगा, जिससे अमेरिका पर उसकी निर्भरता कम होगी. इसके अलावा वो ईरान के खिलाफ मजबूत स्थिति में होगा.

क्यों ईरान पर हमला नहीं कर सकता पाकिस्तान?

पाकिस्तान को ईरान के साथ किसी भी संघर्ष में गंभीर जोखिम उठाने पड़ सकते हैं. शिया-बहुल ईरान पर हमला देश में सांप्रदायिक अशांति को जन्म दे सकता है. पाकिस्तान में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी है, जिसकी अनुमानित संख्या 30 से 50 मिलियन के बीच है. इसके अलावा युद्ध कंगाल पाकिस्तान को पहले से और कमजोर बना सकता है. तेल की बढ़ती कीमतें, खाड़ी देशों से आने वाली धनराशि में कमी और पहले से ही तनावपूर्ण वित्तीय स्थिति संकट को और गहरा कर सकती है.

दरअसल पाकिस्तान ईरान के साथ 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, जिससे जवाबी कार्रवाई का खतरा बढ़ जाता है. वह पहले से ही अफगानिस्तान में आतंकवादियों और बलूच विद्रोहियों से जुड़े तनावों से निपट रहा है. कोई भी नया संघर्ष पाकिस्तानी सेना को कई मोर्चों पर फेल कर सकता है.

अबतक तटस्थ रहा है पाकिस्तान

भारतीय खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की सीमित भूमिका जैसे हवाई रक्षा सहायता या सऊदी अरब या होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनाती भी प्रभावी रूप से पश्चिमी मोर्चे को खोल देगी. यह ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. शिया आबादी वाले ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने से घरेलू अशांति और कट्टरपंथ भी बढ़ सकता है.

सूत्रों का मानना ​​है कि पाकिस्तान के ईरान में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण करने या जमीनी सेना भेजने की संभावना नहीं है. इस्लामाबाद के हालिया बयानों को युद्ध की बजाय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. पाकिस्तान ने अब तक अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष में तटस्थता बनाए रखी है.

PM Modi Meeting: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच एक्शन में PM मोदी! ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा फैसला तय, करने वाले हैं हाई-लेवल मीटिंग…

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने ग्लोबल लेवल पर बैचेनी बढ़ा दी है. जहां ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बीते 23 दिन से लड़ाई जारी है. इसकी वजह से दुनियाभर में तेल और गैस की किल्लत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है.

इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. इसी समस्या को हल करने के लिए रविवार (22 मार्च 2026) की शाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अहम बैठक करने जा रहे हैं. इस बैठक में सरकार के कई बड़े मंत्री शामिल होंगे और देश की ऊर्जा से जुड़ी स्थिति की समीक्षा की जाएगी.

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं. इसी को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है ताकि देश पर किसी तरह का असर न पड़े. पीएम मोदी के बैठक में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, बिजली और खाद (फर्टिलाइजर) जैसे जरूरी क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन सभी चीजों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे. इसके साथ ही देश में सामान की ढुलाई और वितरण सही तरीके से हो, इस पर भी चर्चा होगी, ताकि आम लोगों और उद्योगों को किसी तरह की परेशानी न हो.

भारत सरकार उठा रही जरूरी कदम

भारत सरकार पहले से ही ऐसे कदम उठा रही है, जिससे ऊर्जा की सुरक्षा बनी रहे और देश में जरूरी चीजों की कमी न हो. साथ ही दुनिया में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि समय रहते सही फैसले लिए जा सकें और लोगों के हित सुरक्षित रहें. बता दें कि ईरान में जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैकड़ों की संख्या में तेल और गैस से भरें टैंकर फंसे हुए हैं. ये एक ऐसा रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी ट्रांसपोर्ट होता है. ऐसी स्थिति में भारत की सरकार के लिए ये काफी जरूरी हो जाता है कि वे समय रहते जरूरी कदम उठाए, जिसे देश के लोगों को तकलीफ का सामना न करना पड़े.

रुपया, क्रूड ऑयल से लेकर ईरान मिडिल ईस्ट वॉर! अगले हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार?

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शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए. सेंसेक्स 300 से ज्यादा अंक ऊपर चढ़ा, जबकि निफ्टी 23,100 के ऊपर बंद हुआ. इसकी वजह यह रही कि तेल की कीमतें थोड़ी नरम पड़ गईं. गुरुवार को हुई भारी बिकवाली के बाद ‘बियर्स’ (बाजार में गिरावट लाने वाले) को काफी राहत मिली.

इस बिकवाली के चलते BSE में लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन से 11.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो गया था. आगे की बात करें तो, बाज़ार में काफी उतार-चढ़ाव रहने और घटनाओं से प्रभावित होने की संभावना है. बाजार की नजदीकी दिशा काफी हद तक मध्य-पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी.

ख़ास तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के आस-पास बन रही स्थिति भी शेयर बाजार को प्रभावित करने का काम करेगी. अगर यह व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के निशान से ऊपर बनी रह सकती हैं. इससे महंगाई और चालू खाता घाटे का दबाव बढ़ेगा, और साथ ही बाजार में जोखिम से बचने का माहौल भी बना रहेगा. FII का निवेश, रुपए की चाल, और वैश्विक संकेत-जिनमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बाजार का आम रुझान शामिल है-वे अहम कारक होंगे जिन पर नजर रखनी होगी.

अगर तनाव कम होने या कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कोई संकेत मिलते हैं, तो इससे ‘शॉर्ट-कवरिंग’ या राहत भरी तेजी देखने को मिल सकती है. वहीं, अगर तनाव फिर से बढ़ता है, तो बाज़ार पर और नीचे जाने का दबाव पड़ सकता है. आइए उन फैक्टर्स पर विस्तार से चर्चा करते हैं जो अगले हफ्ते शेयर बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं.

US, इजराइल और ईरान वॉर

ईरान और US-इजराइल गठबंधन के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है, और सभी पक्षों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि स्थिति और भी खराब हो सकती है. शनिवार को, इजराइली सेना ने ईरान और बेरूत पर हमले किए, जबकि US ने मिडिल ईस्ट में हजारों अतिरिक्त मरीन तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी थी.

पिछले हफ्ते, ईरान ने इजराइल पर अपने साउथ पार्स गैस क्षेत्र में सुविधाओं पर हमला करने का आरोप लगाया और जवाब में खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस संपत्तियों पर हमले की धमकी दी. उसने कतर और सऊदी अरब की ओर मिसाइलें दागीं, और सऊदी अरब, UAE और कतर में ऊर्जा को टारगेट किया. ईरान ने कतर में एक LNG प्लांट पर हमला करने का भी दावा किया.

कच्चा तेल 110 डॉलर के करीब

शुक्रवार को तेल की कीमतें बढ़ गईं, और लगभग चार वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर बंद हुईं. ऐसा तब हुआ जब इराक ने विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित सभी तेल क्षेत्रों पर ‘फोर्स मेज्योर’ (अपरिहार्य स्थिति) घोषित कर दिया और ईरान वॉर तेज हो गया, जिसके चलते US मध्य पूर्व में हज़ारों अतिरिक्त मरीन और नाविक तैनात करने की तैयारी कर रहा था. मई के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 3.54 डॉलर, या 3.26 फीसदी बढ़कर 112.19 डॅलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है. अप्रैल के लिए US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा, जिसकी समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो गई, 2.18 डॉलर, या 2.27 फीसदी बढ़कर 98.32 डॉलर पर बंद हुआ.

‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ के बंद होने से दुनिया के तमाम बड़े बाजार हिल गए हैं त्. ईरान और ओमान के बीच यह संकरा जलमार्ग आमतौर पर दुनिया के कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा ले जाता है. व्यावहारिक रूप से, ग्लोबल डिमांड के लगभग 20 फीसदी के बराबर तेल हर दिन इस जलमार्ग से गुजरता है. पिछले सात दिनों से इस जलमार्ग के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण, लगभग 140 मिलियन बैरल तेल-जो वैश्विक मांग के लगभग 1.4 दिनों के बराबर है-अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचने से रुक गया है.

FII का पलायन जारी

NSE के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs/FPIs) शुद्ध विक्रेता बने रहे; उन्होंने 28,496.17 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जबकि 34,014.56 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जिससे 5,518.39 करोड़ रुपए का शुद्ध बहिर्प्रवाह हुआ. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 20 मार्च, 2026 को शुद्ध खरीदार रहे; उन्होंने 22,938.31 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे और 17,232.08 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जिसके परिणामस्वरूप 5,706.23 करोड़ रुपए का शुद्ध अंतर्प्रवाह हुआ.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाज़ार में अपनी बिकवाली जारी रखी. 15 मार्च को समाप्त पखवाड़े में उन्होंने 52,703 करोड़ रुपए निकाले. यह वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बीच जोखिम से बचने की तीव्र भावना को दर्शाता है. खास बात तो ये है कि मार्च में अब तक विदेशी निवेशक 88 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल चुका है. जबकि मौजूदा साल में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली कर चुकी है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके. विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में वॉर के बाद वैश्विक इक्विटी बाज़ारों में आई कमज़ोरी, रुपए का लगातार गिरना, और भारत की आर्थिक वृद्धि तथा कॉर्पोरेट कमाई पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के असर को लेकर चिंताएं-इन सभी कारकों ने FPIs की चिंताओं को बढ़ाया है.

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

शुक्रवार को भारतीय रुपया 110 पैसे तक गिर गया, जो 2022 के अंत के बाद से एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट थी. यह गिरावट तब आई जब पश्चिम एशिया में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे की ऊर्जा सुविधाओं पर लगातार हमलों के बीच तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. एक रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली ने गुरुवार को तेल की आपूर्ति के लिए काफी अधिक कीमत चुकाई थी; इस रिपोर्ट के बीच रुपया गिरकर 93.73 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद बाज़ार बंद होते समय यह 93.71 प्रति डॉलर पर रहा.

गिरावट की गति काफी तेज थी, जो संभवतः मुंबई में गुरुवार को बाजार की छुट्टी की भरपाई कर रही थी. व्यापारियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक की ‘शॉर्ट डॉलर’ स्थितियों (डॉलर की कमी) को लेकर बाजार के अनुमानों और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी संपत्तियों की लगातार बिकवाली ने रुपए पर और दबाव डाला. ईरान वॉर शुरुआत के बाद से रुपया 2.5 फीसदी से अधिक गिर चुका है.

वीक टेक्नीकल सेटअप

तकनीकी नजरिए से, Nifty 50 हाल की तेज गिरावट के बाद 23,00023,200 के सपोर्ट जोन के पास स्थिर होने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, इंडेक्स अभी भी मुख्य रेजिस्टेंस लेवल से नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि इसका ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है. अगर 23,000 का लेवल निर्णायक रूप से टूटता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, जिससे इंडेक्स 22,70022,500 की ओर खिसक सकता है, और आगे 22,00021,800 तक गिरने का जोखिम बना रहेगा.

ऊपर की तरफ, 23,30023,400 का जोन अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है, जबकि 24,000 एक मजबूत रुकावट है. इस लेवल से ऊपर लगातार बढ़त ही किसी सार्थक रिकवरी का संकेत देगी. मोमेंटम इंडिकेटर्स अभी भी कमजोर बने हुए हैं. RSI ओवरसोल्ड जोन के करीब है और MACD नेगेटिव जोन में है, जिससे पता चलता है कि कोई भी उछाल सीमित ही रहने की संभावना है.

“कौन होते हैं AI कंसल्टेंट, कैसे बन सकते हैं? जानें डिग्री से लेकर सैलरी तक सबकुछ”

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आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से हर क्षेत्र को बदल रहा है. कंपनियां अपने काम को आसान, तेज और बेहतर बनाने के लिए AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. ऐसे में AI कंसल्टेंट की मांग भी तेजी से बढ़ी है.

ये प्रोफेशनल्स कंपनियों को बताते हैं कि AI तकनीक का सही उपयोग कैसे किया जाए ताकि बिजनेस को फायदा मिल सके. अगर आप भी टेक्नोलॉजी में करियर बनाना चाहते हैं तो AI कंसल्टेंट एक शानदार विकल्प हो सकता है. यहां जानिए पूरी जानकारी.

क्या होता है AI कंसल्टेंट?

AI कंसल्टेंट वह एक्सपर्ट होता है जो कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों को अपनाने और सही तरीके से लागू करने में मदद करता है. उनका काम बिजनेस की जरूरतों को समझकर AI आधारित समाधान तैयार करना होता है, जिससे काम की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ सके.

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन क्या होनी चाहिए?

AI कंसल्टेंट बनने के लिए आमतौर पर कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग या मैथ्स जैसे विषयों में ग्रेजुएशन जरूरी होता है. इसके अलावा मास्टर्स डिग्री या AI और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स करने से नौकरी के मौके और बढ़ जाते हैं.

जरूरी स्किल्स कौन-सी हैं?

इस क्षेत्र में सफल होने के लिए पायथन और आर जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं की जानकारी जरूरी है. साथ ही मशीन लर्निंग, डेटा एनालिसिस और AI टूल्स की समझ होनी चाहिए. इसके अलावा समस्या सुलझाने की क्षमता, अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और नई चीजें सीखने की क्षमता भी अहम होती है.

क्या होती हैं जिम्मेदारियां?

AI कंसल्टेंट का काम कंपनी की जरूरतों का विश्लेषण करना, AI रणनीति तैयार करना और उसे लागू करना होता है. इसके अलावा वे कर्मचारियों को ट्रेनिंग देते हैं, AI सिस्टम की निगरानी करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी प्रक्रियाएं नियमों और नैतिक मानकों के अनुसार चलें.

सैलरी और जॉब के मौके

हाल की रोजगार रिपोर्ट के अनुसार IT सेक्टर में AI से जुड़ी नौकरियों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. फरवरी में इस क्षेत्र में करीब 12% की वृद्धि दर्ज की गई. खास बात यह है कि AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी भर्तियों में 40% तक इजाफा हुआ है. AI कंसल्टेंट की सैलरी भी काफी आकर्षक होती है. शुरुआती स्तर पर अच्छी कमाई के साथ अनुभव बढ़ने पर लाखों रुपये तक का पैकेज मिल सकता है.

“शहर हो या हाईवे, हर सफर होगा आसान!15 लाख के अंदर आती हैं ये बेहतरीन ऑटोमैटिक सेडान”

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“शहर हो या हाईवे, हर सफर होगा आसान!

15 लाख के अंदर आती हैं ये बेहतरीन ऑटोमैटिक सेडान”

शहर हो या हाईवे, हर सफर होगा आसान!15 लाख के अंदर आती हैं ये बेहतरीन ऑटोमैटिक सेडान

हुंडई ऑरा (AMT) सेडान की शुरुआती कीमत 7.39 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. इसमें 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ स्मार्ट ऑटो AMT सिस्टम दिया गया है. ये इंजन 81 हॉर्सपावर की अधिकतम पावर और 113.8 एनएम का अधिकतम टॉर्क जनरेट करता है.

टाटा टिगोर (AMT) की शुरुआती कीमत 6.72 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसमें 1.2 लीटर रेवोट्रॉन पेट्रोल इंजन लगा है. ये सेडान 84.82 हॉर्सपावर की अधिकतम पावर और 113 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करती है. इस मॉडल में पांच-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का विकल्प मिलता है.

हुंडई वरना (iVT) की शुरुआती कीमत 14.40 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. ये मॉडल 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल और 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन ऑप्शन के साथ आता है. टर्बो पेट्रोल इंजन 157.57 हॉर्सपावर की अधिकतम पावर और 253 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है. नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन iVT गियरबॉक्स के साथ आता है, जबकि टर्बो पेट्रोल इंजन सात-स्पीड डीसीटी (DCT) ट्रांसमिशन से लैस है.

मारुति सुजुकी डिजायर के ऑटोमैटिक वेरिएंट की कीमत 7.62 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. एएमटी वर्जन में 1.2 लीटर का पेट्रोल इंजन लगा है जो 80.46 हॉर्सपावर और 111.7 एनएम का टॉर्क जनरेट करता है. ये इंजन छह-स्पीड गियरबॉक्स से जुड़ा है और एएमटी मोड में 25.71 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है.

होंडा अमेज़ के ऑटोमैटिक वेरिएंट की शुरुआती कीमत 8.62 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. इनमें 1.2 लीटर का वाटर-कूल्ड पेट्रोल इंजन दिया गया है जो 88.50 हॉर्सपावर और 110 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है. होंडा सेडान में सीवीटी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन है और कंपनी का दावा है कि ये 19.46 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है.

PM Kisan 23rd Installment:  कब आएगी पीएम किसान की 23वीं किस्त? इन किसानों को नहीं मिलेंगे 2000 रुपये…

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PM Kisan 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आ रहा है। देश के करोड़ों किसान, जिन्हें हाल ही में 22वीं किस्त का लाभ मिला है, अब अगली यानी 23वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

यह केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है।

इस योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। यदि आप भी अगली किस्त का लाभ उठाना चाहते हैं, तो समय रहते अपनी ई-केवाईसी और लैंड वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाएं पूरी कर लें, ताकि भुगतान में कोई बाधा न आए।

PM Kisan: कब जारी होगी 23वीं किस्त?

पिछले रिकॉर्ड्स और मीडिया रिपोर्ट्स के विश्लेषण से यह संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जुलाई 2026 के आसपास 23वीं किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक किसी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन योजना के नियमित अंतराल को देखते हुए यही समय संभावित माना जा रहा है।

PM Kisan Yojana: इन लोगों को नहीं मिलेगा योजना का लाभ

PM किसान योजना का लाभ केवल उन किसानों को मिलता है जिनके नाम पर कृषि भूमि है। निम्नलिखित श्रेणियों को इस योजना से बाहर रखा गया है:

सरकारी कर्मचारी: केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कार्यरत लोग।

संवैधानिक पद: किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति।

पेंशनभोगी: जिन्हें प्रति माह 10,000 रुपये से अधिक की पेंशन मिलती है।

इनकम टैक्स: आयकर का भुगतान करने वाले किसान।

PM Kisan Installment: किस्त पाने के लिए ये 4 काम हैं सबसे जरूरी

किस्त अटकने से बचाने के लिए लाभार्थियों को निम्नलिखित सुधार तुरंत कर लेने चाहिए:

ई-केवाईसी (e-KYC): सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है। आप PM Kisan पोर्टल पर OTP के जरिए या नजदीकी CSC सेंटर पर बायोमेट्रिक से इसे पूरा कर सकते हैं।

लैंड वेरिफिकेशन: जमीन का रिकॉर्ड अपडेट होना अनिवार्य है। यदि यह अधूरा है, तो अपने पटवारी या राजस्व विभाग से संपर्क करें।

आधार सीडिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए।

DBT इनेबल: बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की सुविधा सक्रिय होनी चाहिए।

PM Kisan Status: अपना स्टेटस कैसे चेक करें?

आप PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Beneficiary Status’ लिंक पर । यहां अपना आधार नंबर या मोबाइल नंबर डालकर चेक करें कि आपका नाम सूची में है या नहीं और बैंक विवरण सही हैं या नहीं।

हेल्पलाइन नंबर:

किसी भी प्रकार की सहायता या शिकायत के लिए आप सरकार के टोल-फ्री नंबर 155261 पर कॉल कर सकते हैं।

LPG Cylinder: होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चांदी! बढ़ गया कमर्शियल गैस सप्लाई का कोटा, अब मिलेगा कितना फायदा?

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LPG Cylinder:  मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट की आहट के बीच, केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने और आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए, सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) के कोटे में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

आगामी 23 मार्च 2026 से प्रभावी होने वाले इस निर्णय के तहत, कमर्शियल गैस का मौजूदा कोटा 30% से बढ़ाकर सीधे 50% कर दिया जाएगा। सरकार का यह रणनीतिक फैसला न केवल बढ़ती मांग को पूरा करेगा, बल्कि उद्योगों को ईंधन की कमी के कारण होने वाले नुकसान से भी बचाएगा।

इन सेक्टरों की चमकेगी किस्मत, प्राथमिकता सूची तैयार

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई एलपीजी सप्लाई का लाभ चुनिंदा और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को सबसे पहले दिया जाएगा। इस फैसले से होटल, फूड इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में छाई अनिश्चितता खत्म होगी। प्राथमिकता वाले मुख्य क्षेत्र इस प्रकार हैं:

फूड एंड हॉस्पिटैलिटी: रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे-बड़े होटल।

कैंटीन सेवा: औद्योगिक और सब्सिडी वाली कैंटीन।

प्रोसेसिंग यूनिट्स: फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उद्योग।

सामाजिक सेवाएं: कम्युनिटी किचन, स्कूल और अस्पताल।

प्रवासी मजदूर: मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे सिलेंडरों की आसान रिफिल सुविधा।

LPG Crisis: एनर्जी संकट के बीच केंद्र का बड़ा कदम, राज्यों के लिए बढ़ाई 20% सप्लाई, इन सेक्टर को होगा फायदा

PNG कनेक्शन की अनिवार्य शर्त और रजिस्ट्रेशन

अतिरिक्त एलपीजी कोटा का लाभ उठाने के लिए सरकार ने उपभोक्ताओं के सामने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है। जो उपभोक्ता अधिक एलपीजी चाहते हैं, उन्हें अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा।

उपभोक्ताओं को भारत पेट्रोलियम (BPCL) के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

स्थानीय सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से PNG कनेक्शन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

LPG Cylinder: क्लीन एनर्जी और भविष्य की तैयारी

सरकार के इस दोहरे दृष्टिकोण का उद्देश्य एक तरफ तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करना है, तो दूसरी तरफ देश को स्वच्छ ऊर्जा यानी Clean Energy की ओर ले जाना है। PNG को बढ़ावा देने से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भविष्य में होने वाली गैस किल्लत जैसी समस्याओं का भी स्थायी समाधान निकल सकेगा।