Home विदेश ईरान पर हमले के लिए PAK पर दबाव डाल रहा सऊदी, क्यों...

ईरान पर हमले के लिए PAK पर दबाव डाल रहा सऊदी, क्यों चाहकर भी अटैक नहीं कर सकती मुनीर की सेना? समझें कारण…

2
0

ईरान पर हमले के लिए सऊदी अरब पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है और उसे 2025 के रक्षा समझौते की याद दिला रहा है. सऊदी विशेषज्ञों के जरिए कनाडा को भेजे गए एक टीवी संदेश में रियाद ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर वो इस्लामाबाद से कार्रवाई की उम्मीद करते हैं.

सऊदी अरब यमन में जमीनी अभियानों को जारी रखने में आई चुनौतियों के बाद पाकिस्तान की अनुभवी सेना पर निर्भर नजर आ रहा है. कहा जाता है कि इस रक्षा समझौते से रियाद को पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का लाभ मिलेगा, जिससे अमेरिका पर उसकी निर्भरता कम होगी. इसके अलावा वो ईरान के खिलाफ मजबूत स्थिति में होगा.

क्यों ईरान पर हमला नहीं कर सकता पाकिस्तान?

पाकिस्तान को ईरान के साथ किसी भी संघर्ष में गंभीर जोखिम उठाने पड़ सकते हैं. शिया-बहुल ईरान पर हमला देश में सांप्रदायिक अशांति को जन्म दे सकता है. पाकिस्तान में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी है, जिसकी अनुमानित संख्या 30 से 50 मिलियन के बीच है. इसके अलावा युद्ध कंगाल पाकिस्तान को पहले से और कमजोर बना सकता है. तेल की बढ़ती कीमतें, खाड़ी देशों से आने वाली धनराशि में कमी और पहले से ही तनावपूर्ण वित्तीय स्थिति संकट को और गहरा कर सकती है.

दरअसल पाकिस्तान ईरान के साथ 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, जिससे जवाबी कार्रवाई का खतरा बढ़ जाता है. वह पहले से ही अफगानिस्तान में आतंकवादियों और बलूच विद्रोहियों से जुड़े तनावों से निपट रहा है. कोई भी नया संघर्ष पाकिस्तानी सेना को कई मोर्चों पर फेल कर सकता है.

अबतक तटस्थ रहा है पाकिस्तान

भारतीय खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की सीमित भूमिका जैसे हवाई रक्षा सहायता या सऊदी अरब या होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनाती भी प्रभावी रूप से पश्चिमी मोर्चे को खोल देगी. यह ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. शिया आबादी वाले ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने से घरेलू अशांति और कट्टरपंथ भी बढ़ सकता है.

सूत्रों का मानना ​​है कि पाकिस्तान के ईरान में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण करने या जमीनी सेना भेजने की संभावना नहीं है. इस्लामाबाद के हालिया बयानों को युद्ध की बजाय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. पाकिस्तान ने अब तक अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष में तटस्थता बनाए रखी है.