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मुख्यमंत्री श्री साय ने की बड़ी घोषणा – छत्तीसगढ़ से ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को मिलेगा 21 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित सर्किट हाउस सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा की बैठक में शामिल हुए। इस दौरान बैठक में वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट का अनुमोदन, वर्ष 2025-26 का वार्षिक बजट प्रस्तुतिकरण एवं अनुमोदन, वर्ष 2025-26 हेतु ऑडिटर की नियुक्ति सहित अन्य महत्वपूर्ण एजेंडा पर चर्चा की गई।

छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ से ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को 21 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। इन प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और निखारने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है। हमने पूर्व में बंद हुए खेल अलंकरण समारोह को पुनः प्रारंभ किया है और जल्द ही उत्कृष्ट खिलाड़ी सम्मान समारोह भी प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया के नए परिसरों की शुरुआत की गई है। कुछ महीने पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया का भी छत्तीसगढ़ आगमन हुआ था, जहां हमने उनसे खेल अधोसंरचना के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की। विशेषकर ओलंपिक खेलों को लेकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हेतु हमने विशेष तैयारी की है। ओलंपिक खेलों में प्रदेश के स्वर्ण पदक विजेताओं को तीन करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं को दो करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेताओं को एक करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया है। स्वाभाविक रूप से इससे खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि खेलों का बजट बढ़ाया जाए और कॉरपोरेट क्षेत्र की सहभागिता को भी प्रेरित किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2036 में हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ओलंपिक खेलों के लिए भारत की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है और अहमदाबाद शहर को इसके लिए प्रस्तावित किया गया है। स्वाभाविक रूप से केंद्र सरकार का पूरा ध्यान देश में खेलों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर है, ताकि एक दशक के भीतर हम खेलों के क्षेत्र में महाशक्ति के रूप में उभर सकें। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी हमें राष्ट्रीय स्तर के खेलों के आयोजन हेतु सामूहिक प्रयास करने होंगे।

कैबिनेट मंत्री एवं संघ के उपाध्यक्ष श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर ओलंपिक जैसी खेल प्रतियोगिताओं की शुरुआत हुई है, जिससे सुदूर वनांचल की खेल प्रतिभाओं को एक सुनहरा मंच मिला है।

इस अवसर पर सचिवीय प्रतिवेदन का वाचन महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया ने किया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष श्री हिमांशु द्विवेदी, श्री गजराज पगारिया एवं कोषाध्यक्ष श्री संजय मिश्रा सहित खेल संघ से जुड़े पदाधिकारी एवं सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसानों को मिला जीएसटी सुधार का लाभ

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मुख्यमंत्री श्री साय ने अभनपुर के बिरोदा निवासी श्री रवि कुमार साहू को उनके नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी। इस अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए श्री रवि साहू ने कहा, “मैने सपने में भी नहीं सोच था कि मैं नया हार्वेस्टर खरीदूंगा। मैं सेकेंड हैंड हार्वेस्टर खरीदने के बारे में सोच रहा था। जीएसटी उत्सव में नए हार्वेस्टर खरीद पर मुझे पूरे 2 लाख रुपए की बचत हुई है। किसानों की चिंता का समाधान हमारे संवेदनशील प्रधानमंत्री मोदी जी और किसानहितैषी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ही कर सकते हैं। मुख्यमंत्री जी ने स्वयं मुझे मेरे नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी और मुझसे बेहद आत्मीयता से संवाद किया। मैंने उन्हें बताया कि मेरे पास दो एकड़ खेत है और अब हार्वेस्टर आने से मैं गांव में साझेदारी से और अधिक खेती कर पाऊंगा।” श्री रवि ने जीएसटी में कटौती के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अभनपुर कोलर से आए वरिष्ठ किसान श्री ज्ञानिक राम साहू को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी। मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए श्री साहू ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद नए ट्रैक्टर की खरीदी पर उन्हें पूरे 60 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि इस बचत से उनका परिवार त्योहार को और अच्छे से मना सकेगा।

ट्रैक्टर शो रूम के प्रोप्राइटर श्री अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से संवाद में बताया कि जीएसटी में कटौती के कारण बिक्री में इज़ाफ़ा हो रहा है और ग्राहकों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा, “पहले जो ट्रैक्टर 10.25 लाख रुपए का आता था, वह अब 9.75 लाख रुपए में उपलब्ध है, जिससे किसानों को 50 हजार रुपए की बचत हो रही है। इसी तरह 7.62 लाख का ट्रैक्टर अब 7.21 लाख और 6.51 लाख का ट्रैक्टर अब 6.11 लाख रुपए में मिल रहा है। कीमतों में कटौती और फेस्टिवल डिस्काउंट से किसानों की बड़ी बचत हो रही है। जीएसटी दर घटने के बाद हार्वेस्टर भी सस्ते हो गए हैं।”

जीएसटी कटौती से बाइक खरीदी में 7 हजार की बचत

इसके बाद मुख्यमंत्री श्री साय देवपुरी के बजाज बाइक शोरूम पहुंचे और यहां मौजूद ग्राहकों से जीएसटी कटौती पर आत्मीय चर्चा की। उन्होंने बाइक खरीदने आए संतोषी नगर निवासी श्री एम.डी. गुलाब को उनकी नई बाइक की चाबी सौंपी। श्री गुलाब ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद बाइक खरीदने पर उन्हें 7 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा, “मैंने बजाज प्लेटिना 110 सीसी बाइक खरीदी है, जिसकी पहले कीमत 89,000 रुपए थी, जो अब मुझे 82,000 रुपए में मिली।”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने आम जनता, किसानों और उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत दी है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों की कीमतों में आई कमी से किसानों को सीधा लाभ हो रहा है, जिससे उनकी खेती-किसानी और जीवनयापन और सुगम होगा। उन्होंने कहा कि इस जीएसटी बचत उत्सव से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम हुआ है और त्यौहारी सीजन में परिवारों की खुशियाँ बढ़ी हैं। यह सुधार न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहा है बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उत्साह और समृद्धि का नया वातावरण भी बना रहा है।

छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन में निभाएगा अग्रणी भूमिका – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में “मेक-इन-सिलिकॉन: राष्ट्रीय सिंपोजियम ऑन एनेबलिंग इंडिजिनस सेमीकंडक्टर इन्फ्रास्ट्रक्चर” के पोस्टर और आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। यह संगोष्ठी भारत में सेमीकंडक्टर मिशन को नई दिशा देने और देश में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की पहल है।
ट्रिपल आईटी-नया रायपुर के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश व्यास ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी 7–8 नवम्बर 2025 को ट्रिपल आईटी-नया रायपुर में आयोजित होगी। इसमें देशभर के विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल होंगे। संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर व्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए ठोस रणनीति बनाना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों को मिलकर नवाचार करना होगा और नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उनके अनुसार, स्वदेशी सेमीकंडक्टर अधोसंरचना ही भारत की डिजिटल और आर्थिक मजबूती की नींव है। यह आयोजन भारत सरकार के “सेमीकंडक्टर इंडिया मिशन” और छत्तीसगढ़ सरकार की तकनीकी आत्मनिर्भरता की सोच के अनुरूप है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेंगे। इस अवसर पर संयोजक डॉ. मनोज मजूमदार, डॉ. दीपिका गुप्ता और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि मण्डल की सौजन्य मुलाकात

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रतिनिधि मण्डल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर रायपुर की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने मुख्यमंत्री श्री साय को आगामी 10 से 13 अक्टूबर तक माउण्ट आबू में आयोजित होने वाले वैश्विक शिखर महासम्मेलन में सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधि मण्डल को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं तथा आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा शांति, आध्यात्मिकता और मानवता के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्य अनुकरणीय हैं।

भेंट के दौरान सविता दीदी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आगामी रायपुर प्रवास के दौरान नवा रायपुर, सेक्टर-20 स्थित शान्ति शिखर के नये भवन “एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड- शान्ति शिखर” के लोकार्पण कार्यक्रम की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी।

प्रतिनिधि मण्डल में ब्रह्माकुमारी सविता दीदी के साथ बीके रश्मि दीदी, बीके महेश डोडवानी और बीके हीरेन्द्र नायक भी उपस्थित रहे।

सिलतरा फैक्ट्री हादसे में 6 श्रमिकों की मौत, कई घायल – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

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राजधानी रायपुर के सिलतरा स्थित फैक्ट्री में आज हुए दर्दनाक हादसे में 6 श्रमिकों की मृत्यु हो गई तथा कई श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की टीम राहत और बचाव कार्य में जुट गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिला प्रशासन को घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक घटना है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने पांच करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

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छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान, शहर समागम’’ एवं ‘स्वच्छता संवाद’ कार्यक्रम में आज उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोरमी के कबीर भवन में अतिरिक्त सुविधाओं के विस्तार कार्य का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया। उन्होंने इसके साथ ही लोरमी में पांच करोड़ 23 लाख रुपए के तीन नए कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इनमें नगर उद्यान निर्माण, बाबाधाम मुक्तिधाम सौंदर्यीकरण तथा ब्राह्मणपारा मुक्तिधाम सौंदर्यीकरण के कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से शहर की सुंदरता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप लोरमी क्षेत्र का व्यवस्थित विकास करना मेरी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करते हुए लोरमी को एक स्वच्छ और सुंदर शहर बनाने में सहयोग करें, ताकि स्वच्छता के मामले में लोरमी प्रदेश में शीर्ष स्थान पर पहुँच सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। बीते 20 महीनों में करोड़ों रुपए के विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। आने वाले समय में भी करोड़ों रुपए की योजनाएं धरातल पर उतरेंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गांवों और शहरों के संतुलित विकास पर जोर दे रही है। लोरमी नगर को सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने तथा स्वच्छ और सुंदर शहर का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों को पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध है।

कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों एवं नागरिकों ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में स्थानीय सहभागिता की भूमिका पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि समाज के हर वर्ग को अपनी भागीदारी निभाते हुए समग्र विकास में सहयोग देना होगा। कार्यक्रम में नगरवासियों ने स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, जन-जागरूकता फैलाने तथा सामूहिक प्रयासों से लोरमी को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संकल्प लिया। पूर्व विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर, लोरमी नगर पालिका के अध्यक्ष श्री सुजीत वर्मा और जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती वर्षा सिंह सहित पार्षदगण, अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

विधानसभा चुनावः 6 सीट नहीं दिया तो 24 पर करेंगे नुकसान?, सीमांचल में ओवैसी की धमक?

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“विधानसभा चुनावः 6 सीट नहीं दिया तो 24 पर करेंगे नुकसान?, सीमांचल में ओवैसी की धमक?, मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव से महागठबंधन को नुकसान, तेजस्वी-राहुल को टेंशन”

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही जारी सियासी हलचल के बीच सीमांचल ईलाके में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी गतिविधि को तेज कर राजद नेता तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ा दी है।

सीमांचल इलाके में खुद ही मोर्चा संभाले हुए ओवैसी ने मुख्य रूप से राजद पर खूब निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजद से उनकी पार्टी ने केवल 6 सीटें मांगी थी, लेकिन वो इसके लिए भी तैयार नहीं है। दरअसल, मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार तेजस्वी यादव की टेंशन बढ़ा दी है। बता दें कि बिहार की सियासत में मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका रही है। बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ से अधिक है। इसमें मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 17 फीसदी है। 2020 के चुनाव में इस समुदाय के करीब 75 फीसदी वोट महागठबंधन को मिले थे।

जबकि लगभग 17 फीसदी वोट एआईएमआईएम के खाते में गए। यही बंटवारा कई सीटों पर महागठबंधन को भारी पड़ा। इस बार भी अभी तक एआईएमआईएम के साथ तेजस्वी की पार्टी ने हाथ नहीं मिलाया है। 2024 लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने एआईएमआईएम से दूरी बनाते हुए 83 फीसदी तक समर्थन महागठबंधन को दिया।

लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव में उनकी नाराजगी भी साफ झलक रही है। इसबीच इस बार प्रशांत किशोर भी चुनावी मैदान में हैं। वे मुस्लिम समुदाय को अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात कर रहे हैं। हालांकि प्रशांत किशोर ने यह ऐलान किया है कि जिस सीट पर महागठबंधन के द्वारा मुस्लिम उम्मीदवार उतारा जाएगा, वहां उनके द्वारा किसी मुस्लिम उम्मीदवार को नही उतारा जाएगा।

इसबीच एक निजी मीडिया केन्द्र के द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक मुस्लिम मतदाता इस बार सतर्क हैं। वे ये तय कर रहे हैं कि क्या पूरा समर्थन महागठबंधन को ही दें या कुछ और विकल्प पर भी विचार करें। सर्वे के अनुसार मुस्लिम समुदाय में असंतोष की एक बड़ी वजह है-राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी।

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की हाल की “मतदाता अधिकार यात्रा” में मुस्लिम नेताओं को पर्याप्त जगह न मिलने से असंतोष बढ़ा है। समुदाय का एक बड़ा हिस्सा टिकट बंटवारे में अधिक हिस्सेदारी और उपमुख्यमंत्री की मांग कर रहा है। उल्लेखनीय है कि सीमांचल के पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले में ओवैसी की उपस्थिति 2015 से ही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अररिया, किशनगंज और पूर्णिया से 5 सीटें जीतकर राजद को बड़ा झटका दिया था। बाद में पांच में से चार विधायक राजद का दामन थाम लिया था।

अब ओवैसी के सामने फिर से नई चुनौती है। जन सुराज पार्टी बनने के बाद इस बार सीमांचल में विधानसभा चुनाव का समीकरण काफी बदल गया है। इसलिए एआईएमआईएम राजद से गठबंधन के फिराक में है, ताकि सियासी जमीन को और मजबूत कर सके। दरअसल, सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते है। इसमें मुसलमान लगभग 17.7 फीसदी हैं।

सीमांचल की सीटों पर उनका प्रतिशत 40 से 70 फीसदी तक पहुंचता है। एआईएमआईएम ने बिहार में 2015 में चुनावी कदम रखा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने लगभग 3 लाख वोट हासिल किए थे, वह तीसरे स्थान पर रहे थे। यहीं से पार्टी की जमीन तैयार हो गई।

लेकिन सफलता 2019 के किशनगंज विधानसभा उप-चुनाव जीतकर मिली। इस परिणाम ने सभी को चौंका दिया। साल 2020 में एआईएमआईएम ने सीमांचल की 5 विधानसभा सीटें जीतकर राजद को बड़ा झटका दिया। इसमें मुख्य रूप से अमौर, कोचाधामन, जोकीहाट, बायसी, बहादुरगंज और किशनगंज शामिल हैं।

सीमांचल में महागठबंधन को केवल एक सीट ही मिली थी, जबकि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद राजद की इस इलाके में पकड़ कमजोर दिखाई दी। ओवैसी का कहना है कि राजद ने सीमांचल की उपेक्षा की है। ओवैसी-राजद हाथ मिलाते हैं या नहीं, यह सीमांचल की मतदाता राजनीति और विधानसभा सीटों के समीकरण पर निर्णायक असर डालेगा।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में बीजेपी के नेता रतन दुबे की हत्या मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बड़ी कार्रवाई…

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में बीजेपी के नेता रतन दुबे की हत्या मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने इस घटना में शामिल पाए गए दो आरोपियों शिवानंद नाग और उसके पिता नारायण प्रसाद नाग के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है.

अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार (26 सितंबर) को जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दूसरा पूरक आरोपपत्र पेश किया गया. इसमें दोनों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों ने रतन दुबे की हत्या की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी.

क्या है पूरा मामला एनआईए की जांच में सामने आया है कि शिवानंद नाग प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का सक्रिय सदस्य था. उसका दुबे से राजनीतिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत स्तर पर पुराना विवाद था. इसी दुश्मनी और संगठन के दबाव के कारण वह हत्या की योजना में शामिल हुआ.

नवंबर 2023 में हुई थी रतन दुबे की हत्या गौरतलब है कि 2023 के नवंबर महीने में बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर जिला बीजेपी उपाध्यक्ष रतन दुबे की निर्मम हत्या कर दी गई थी. यह हमला झारा घाटी क्षेत्र के कौशलनार गांव के साप्ताहिक बाजार में हुआ, जब दुबे चुनाव प्रचार में व्यस्त थे. माओवादियों ने उन पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई.

जनता के बीच दहशत फैलाना था उद्देश्य एनआईए ने आरोप लगाया कि यह हमला चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने और स्थानीय जनता को भयभीत करने के लिए किया गया था. जांच में माओवादी संगठन के पूर्वी बस्तर डिविजन की बयानार एरिया कमेटी और बारसूर एरिया कमेटी के सदस्यों और उनके सहयोगियों की संलिप्तता भी उजागर हुई है.

एनआईए कर रहा मामले की जांच फरवरी 2024 में इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी. तब से लेकर अब तक एजेंसी एक मुख्य आरोपपत्र और दो पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही अन्य संदिग्धों पर भी कार्रवाई की जाएगी.

एनआईए की इस कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार और जांच एजेंसियां नक्सलवाद और राजनीतिक हत्याओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं. अब देखना होगा कि अदालत में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है.

“ट्रंप की टैरिफ वाली टेंशन पर सामने आया बड़ा अपडेट, भारत सरकार बोली- ‘ट्रेड डील को जल्दी ही…'”

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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय आयात पर लगाए गए टैरिफ के बीच भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 22 से 24 सितंबर तक अमेरिका के दौरे पर गया.

इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई. इस पर सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा- भारत, अमेरिका पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते पर जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए प्रयास करेंगे.

अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात गोयल ने अमेरिकी राजदूत जेमीसन ग्रीयर, यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव और भारत में नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की. इन बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका स्थित बड़ी कंपनियों और निवेशकों से भी मुलाकात की. इसका उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश को और बढ़ावा देना था.

समझौते पर सकारात्मक संकेत सरकार के बयान के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई बैठकें रचनात्मक रहीं. दोनों पक्षों ने संभावित व्यापार समझौते के ढांचे पर विचार-विमर्श किया और इस पर जल्द से जल्द पारस्परिक लाभकारी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया. बैठक में शामिल अमेरिकी व्यापार नेताओं ने भारत की विकास यात्रा पर विश्वास जताया. उन्होंने भारत में अपने व्यापारिक गतिविधियों को और तेज करने की इच्छा भी जताई.

ये बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब भारत-अमेरिका संबंधों में कई बड़े मुद्दे सामने आए हैं. इनमें भारतीय आयात पर टैरिफ, वीज़ा याचिकाओं पर $100,000 की नई फीस और ब्रांडेड व पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ शामिल हैं.

निवेश को बढ़ावा देने पर भी हुई चर्चा अमेरिका में द्विपक्षीय व्यापार मामलों पर ट्रंप सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों के अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख अमेरिकी व्यवसायों और निवेशकों के साथ भी व्यापक चर्चा की.

”आखिर क्यों ऐन मौके पर नेतन्याहू ने बदला हवाई रूट? जानें इसके पीछे की मुख्य वजह ”

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जब इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में शामिल होने न्यूयॉर्क रवाना हुए तो उनकी यात्रा ने सबका ध्यान खींचा. सामान्य तौर पर तेल अवीव से जेएफके एयरपोर्ट तक की उड़ान 10.5 घंटे की होती है, लेकिन इस बार उनकी यात्रा करीब 13 घंटे लंबी रही.

विमान ने पूर्वी भूमध्य सागर से होते हुए ग्रीस और इटली के ऊपर से उड़ान भरी. फिर अचानक दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़कर जिब्राल्टर स्ट्रेट से होकर अटलांटिक महासागर पार किया. सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि विमान ने फ़्रांस और स्पेन के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज किया. यह रूट चेंज करना सिर्फ़ तकनीकी कारण नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक और कानूनी वजहें थीं.

आईसीसी वारंट और अंतर्राष्ट्रीय कानूनी दबाव 2024 में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों के दौरान कथित युद्ध अपराधों के लिए नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया. नेतन्याहू ने इसे झूठा और बेतुका कहकर खारिज कर दिया,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत आईसीसी के सदस्य देशों को यदि मौका मिले तो उन्हें गिरफ्तार करना होगा.यही कारण है कि नेतन्याहू ने उन देशों के ऊपर से उड़ान भरने से परहेज किया, जहां उतरने की स्थिति में कानूनी जोखिम पैदा हो सकता था. ध्यान देने वाली बात यह है कि न तो अमेरिका और न ही इजरायल आईसीसी के सदस्य हैं, इसलिए वहां नेतन्याहू को किसी कानूनी खतरे का सामना नहीं करना पड़ता.

यूरोप की कूटनीतिक सख्ती हालांकि फ्रांस ने नेतन्याहू को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दे दी थी, लेकिन उन्होंने खुद ही इसे टालना उचित समझा. इसका कारण था बढ़ते यूरोपीय राजनीतिक दबाव. स्लोवेनिया ने हाल ही में नेतन्याहू पर प्रतिबंध लगाए हैं, आईसीसी की कार्यवाही का हवाला देते हुए. जुलाई 2025 में, स्लोवेनिया ने इज़रायली मंत्रियों बेज़ेलेल स्मोट्रिच और इटमार बेन ग्विर पर भी फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा भड़काने के आरोप में प्रतिबंध लगाए थे. कई यूरोपीय देश हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में फ़िलिस्तीनी राज्य की मान्यता की घोषणा कर चुके हैं, जिसका नेतन्याहू कड़ा विरोध कर रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी स्टीव गनयार्ड के अनुसार, ‘कुछ सरकारों के लिए नेतन्याहू को अपने देश के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति देना ही राजनीतिक दायित्व बन सकता है.’

नेतन्याहू के लिए बढ़ते कूटनीतिक खतरे इस उड़ान मार्ग से साफ संकेत मिलता है कि नेतन्याहू की अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं अब केवल कूटनीतिक नहीं रहीं, बल्कि वे कानूनी जोखिमों से भी घिरी हुई हैं. यूरोपीय देशों का दबाव और आईसीसी वारंट उन्हें सीमित कर रहा है. अमेरिका जैसे सहयोगी देशों में वे सुरक्षित हैं, लेकिन यूरोप में उनका दायरा लगातार सिमट रहा है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह इजरायल की छवि और नेतन्याहू की व्यक्तिगत राजनीतिक स्थिति दोनों पर असर डाल रहा है.