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पटना में आज कांग्रेस CWC की बैठक, जानिए दिल्ली के बदले बिहार में मंथन क्यों?”

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बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने राजधानी पटना में आज यानी 24 सितंबर को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में ‘वोट चोरी’ और अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ सहित राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव दीपा दास मुंशी और सैयद नासिर हुसैन, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार समेत कई शीर्ष नेता शामिल होंगे।

चुनाव के चलते पटना में CWC की बैठक नहीं- कांग्रेस बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (बीपीसीसी) प्रमुख ने NDA के लगाए गए इस आरोप को खारिज कर दिया कि सीडब्ल्यूसी की बैठक आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पटना में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘आजादी के बाद सीडब्ल्यूसी बैठकों का इतिहास देखें तो ये कई जगहों पर हुई हैं। हाल के वर्षों में गुजरात में भी सीडब्ल्यूसी बैठक हुई थी। कल की बैठक विस्तारित कार्यसमिति की होगी, जिसमें राज्य इकाई प्रमुखों और अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।’

क्या होगा पटना वाली CWC की बैठक में राजेश कुमार ने कहा, ‘सीडब्ल्यूसी बैठकों में हम राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित करते हैं। कल भी यही होगा। इसमें ‘वोट चोरी’ और भारत पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ जैसे विषयों पर चर्चा होगी।’

बीजेपी-जेडीयू-LJP (R) ने कस दिया तंज इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने विपक्षी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, ‘पहले सीडब्ल्यूसी की बैठकें दिल्ली में होती थीं, जहां कांग्रेस चुनावों में शून्य पर सिमटती रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में भी उसका यही हाल होगा।’ इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले दबाव की राजनीति कर रही है। जद(यू) के विधान पार्षद नीरज कुमार ने आरोप लगाया स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई कह कर कांग्रेस स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी की पटना में होने वाली बैठक में भी जननायक कर्पूरी ठाकुर का कांग्रेस अपमान करेगी।

राजद ने किया कांग्रेस का बचाव हालांकि, राजद के वरिष्ठ नेता और बक्सर से लोकसभा सदस्य सुधाकर सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘पटना में सीडब्ल्यूसी की बैठक सकारात्मक संदेश देगी, जिसका लाभ केवल कांग्रेस को ही नहीं, बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन को मिलेगा।’

“केरल में ‘दिमाग खाने वाली बीमारी’ से 19 लोगों की मौत, Dr. की चेतावनी-साइलेंट किलर के 4 लक्षण न करें इग्नोर”

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डॉक्टर ने सलाह दी है कि जब तक ब्रेन-ईटिंग एमीबा के लिए और प्रभावी दवाइयां नहीं बनतीं, तब तक लोगों की सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। यही हमें इस खतरनाक और ‘साइलेंट किलर’ बीमारी से बचा सकता है।

केरल में इन दिनों एक खतरनाक बीमारी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस जानलेवा बीमारा का नाम प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) है। राज्य में इस साइलेंट किलर से अब तक 69 मामले सामने आए हैं और 19 लोगों की मौत हो गई है। यह जानकारी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में दी है। चिंता की बात यह है कि यह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।

इसे दिमाग खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है, क्योंकि यह दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। यह इतना खतरनाक है कि एक बार संक्रमित होने पर मृत्युदर 90% से अधिक होती है। डॉक्टर कौस्तुभ महाजन, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, एसएल रहेजा हॉस्पिटल, माहिम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं।क्या है यह बीमारी और कैसे फैलती है?

इस बीमारी कि बोलचाल की भाषा में ब्रेन-ईटिंग एमीबा (brain-eating amoeba) कहा जाता है। यह नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) नामक एमीबा से होता है, जो गर्म और गंदे पानी में पाया जाता है। यह तालाब, झील, नदी और सही से साफ न किए गए स्विमिंग पूल में आसानी से मिल सकता है।

एमीबा शरीर में कैसे जाता है

डॉक्टर कौस्तुभ के अनुसार, यह एमीबा नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है, जब लोग तैरते हैं या गंदे पानी से नहाते हैं। नाक से होकर यह दिमाग तक पहुंचता है और प्राइमरी एमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) नाम की खतरनाक बीमारी करता है।

एमीबा के लक्षण

डॉक्टर ने बताया कि शुरुआत में इसके लक्षण बुखार, सिरदर्द, उल्टी और गर्दन में अकड़न जैसे होते हैं। बाद में यह तेजी से बढ़कर भ्रम, दौरे और कोमा तक पहुंचा देता है। कई बार मरीज को रोशनी भी बर्दाश्त नहीं होती, जिसे फोटोफोबिया कहते हैं।

बीमारी कितनी खतरनाक है

इस बीमारी की मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। सिर्फ इस साल केरल में लगभग 70 मामले सामने आए हैं और कई मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि इलाज मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं। डॉक्टर इसमें एंटीबायोटिक और एंटिफंगल दवाइयां देते हैं। अगर समय पर इलाज शुरू किया जाए तो बचने की संभावना रहती है, लेकिन देर होने पर हालत बिगड़ जाती है।

रोकथाम है सबसे जरूरी

डॉक्टर ने बताया कि इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है सावधानी और रोकथाम। इसके लिए आपको गंदे या बिना उपचार वाले पानी में तैरने से बचना चाहिए, स्विमिंग पूल को हमेशा क्लोरीन से साफ रखना चाहिए, नाक की सफाई के लिए उबला या डिस्टिल्ड पानी ही इस्तेमाल करना चाहिए, अगर किसी को पानी के संपर्क के बाद तेज सिरदर्द, बुखार या व्यवहार में बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर् करना चाहिए।

लोगों में जागरूकता जरूरी

डॉक्टर ने बताया कि लोगों के बीच इसे लेकर जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है। स्कूलों, हेल्थ सेंटरों और स्थानीय सभाओं में इस बीमारी के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए ताकि बच्चे और परिवार गर्मियों में सतर्क रहें। डॉक्टरों को भी चाहिए कि अगर किसी मरीज में पानी के बाद अचानक दिमागी समस्या दिखे तो इस बीमारी का शक तुरंत करें। समय पर पहचान से कई जिंदगियां बच सकती हैं।

“पश्चिमी राजस्थान से विदा हो चुका मॉनसून, अगले चार दिन में छोड़ेगा राजस्थान, आज 6 जिलों में बारिश की चेतावनी”

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करीब साढ़े तीन महीने पहले आया मॉनसून अब विदा हो रहा है। पश्चिमी राजस्थान से मॉनसून की विदाई हो चुकी है और अब पूर्वी राजस्थान से विदा होने वाला है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले चार पांच दिन में मॉनसून पूर्वी राजस्थान से भी विदा हो जाएगा।

विदा होने से पहले प्रदेश के कई जिलों में मॉनसून की अंतिम बारिश हो रही है। हालांकि जयपुर सहित दो दर्जन जिलों में बादलों की आवाजाही हो रही है लेकिन दक्षिण राजस्थान के जिले बारिश में भीग रहे हैं। मौसम विभाग का मानना है कि मॉनसून की विदाई के बाद गर्मी के दिन आने वाले हैं।

आज 6 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र जयपुर की ओर से जारी किए गए ताजा अपडेट के मुताबिक आज बुधवार 24 सितंबर को प्रदेश के छह जिलों में बारिश होने वाली है। ये सभी छह जिले पूर्वी राजस्थान में स्थित हैं जिन जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। उनमें बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिले शामिल हैं। मौसम विभाग ने कल गुरुवार और परसों शुक्रवार को मौसम शांत रहने की संभावना जताई है। इसके बाद शनिवार 27 सितंबर को एक बार फिर से तीन जिलों बारां, झालावाड़ और कोटा में बारिश होने की संभावना जताई है।

मॉनसून की विदाई के साथ बढ़ी गर्मी मॉनसून की विदाई के साथ ही तेज धूप खिलने लगी है। तेज धूप की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हुई है। अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर निकल गया है। मंगलवार को सर्वाधिक तापमान श्रीगंगानगर में रिकॉर्ड किया गया। गंगानगर का तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस रहा। उधर झुंझुनूं जिले के पिलानी 38.6 डिग्री सेल्सियस और चूरू में 38.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अन्य शहरों की बात करें तो संगरिया में 37.2 डिग्री सेल्सियस, जैसलमेर में 37.2 डिग्री सेल्सियस, बीकानेर में 37.1 डिग्री सेल्सियस, फतेहपुर में 37.0 डिग्री सेल्सियस, अलवर में 36.8 डिग्री सेल्सियस, फलोदी में 36.8 डिग्री सेल्सियस, बाड़मेर में 36.6 डिग्री सेल्सियस, जयपुर में 36.5 डिग्री सेल्सियस, करौली में 36.5 डिग्री सेल्सियस, लूणकरणसर में 36.4 डिग्री सेल्सियस, झुंझुनूं में 36.2 डिग्री सेल्सियस, कोटा में 35.9 डिग्री सेल्सियस, चित्तौड़गढ़ में 35.8 डिग्री सेल्सियस, दौसा में 35.7 डिग्री सेल्सियस, अंता बारां में 35.3 डिग्री सेल्सियस, भीलवाड़ा में 35.2 डिग्री सेल्सियस और सीकर में 35.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

हक की लड़ाई का नया अध्याय, असदुद्दीन औवैसी ने सीमांचल न्याय यात्रा के लिए भरी हुंकार

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सीमांचल के विकास, न्याय और अधिकारों को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में आज (24 सितंबर) से सीमांचल न्याय यात्रा शुरू हो रही है. यह चार दिवसीय यात्रा 27 सितंबर तक चलेगी, जिसमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिलों के कई हिस्सों का दौरा किया जाएगा. सीमांचल न्याय यात्रा का उद्देश्य सीमांचल क्षेत्र में फैली समस्याओं जैसे बेरोजगारी, बाढ़, खराब बुनियादी सुविधाएं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को लेकर जन जागरूकता फैलाना और सरकार तक आवाज पहुंचाना है. ओवैसी का कहना है कि यह आंदोलन सीमांचल के लोगों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है.
कार्यकर्ताओं में उत्साह
स्थानीय कार्यकर्ताओं में इस यात्रा को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. किशनगंज के एक युवा कार्यकर्ता ने कहा, “ओवैसी साहब हमारी उम्मीद हैं. सीमांचल की आवाज को अब दबाया नहीं जा सकेगा”. बताया जा रहा है कि यात्रा के हर दिन की पूरी जानकारी पोस्टरों और सोशल मीडिया के जरिए साझा की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें. AIMIM की यह पहल सीमांचल में राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई को नया आयाम दे रही है.
कैसे चलेगी यात्रा?
बता दें कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा 24-27 सितंबर तक किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार में अधिकारों और समस्याओं पर जनजागरण का अभियान है.

24 सितंबर को किशनगंज के पोठिया, ठाकुरगंज, बहादुरगंज और जनता हाट जैसे इलाकों से यात्रा की शुरुआत होगी.
25 सितंबर को अररिया के विभिन्न क्षेत्रों में सभाएं होंगी.
26 सितंबर को पूर्णिया में रैलियों का आयोजन किया जाएगा.
यात्रा का समापन 27 सितंबर को फिर किशनगंज लौटकर डांगरा, बलरामपुर और बरसोई जैसे इलाकों में जनसभाओं के साथ होगा.
क्या ओवैसी बन पाएंगे सीमांचल की आवाज?

एआईएमआईए प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा बिहार की सियासत में एक नए मोड़ की ओर संकेत कर रही है. असदुद्दीन ओवैसी इस यात्रा के माध्यम से ओवैसी सीमांचल के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं. AIMIM की इस पहल से सीमांचल में राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई को नया आयाम मिल रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि इस यात्रा का आगामी विधानसभा चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या यह सीमांचल के लोगों के लिए एक प्रभावी आवाज बन पाएगी.

ग्लेशियल फ्लड से रीयल-टाइम वॉर्निंग तक… भारत के तीसरे सबसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मिला हरी झंडी, बनेगी 2220 मेगावाट बिजली

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अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में, चीन की सीमा के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में 2,220 मेगावाट के ओजू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने मंजूरी दे दी है. यह भारत के सबसे बड़े रन-ऑफ-रिवर हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में से एक है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 25,000 करोड़ रुपये है.
भारत का तीसरा सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट
ओजू प्रोजेक्ट सुबनसिरी नदी पर प्रस्तावित कई बांधों में सबसे बड़ा है और इसे विकसित करने की योजना पिछले करीब 20 सालों से चल रही है. प्रोजेक्ट में 100 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रैविटी डैम, 14 किलोमीटर लंबा हेडरेस टनल और भूमिगत पावरहाउस कॉम्प्लेक्स शामिल है. यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है, जिसे पर्यावरण मंजूरी मिली है, इससे पहले अरुणाचल प्रदेश के 3,087 मेगावाट के एतालिन और 2,880 मेगावाट के डिबांग प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी.

विशेषज्ञ समिति ने प्रोजेक्ट को मंजूरी देते समय सुरक्षा और पर्यावरण उपायों को अनिवार्य किया है. समिति ने कहा कि प्रोजेक्ट डिजाइन में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की संभावना शामिल हो, रीयल-टाइम अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किया जाए और स्थानीय समुदायों के लिए तैयारी और प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित किए जाएं. इसके अलावा, प्रोजेक्ट चालू होने के 5 साल बाद पर्यावरण प्रभाव का अध्ययन करना भी अनिवार्य किया गया है.
5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
ओजू प्रोजेक्ट को पूरा होने में कम से कम 5 साल का समय लग सकता है. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा.

भारत में फटी ज्वालामुखी, समंदर में पानी की तरह बहने लगे अंगारे, इंडियन नेवी के वॉरशिप ने रिकॉर्ड किया VIDEO

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पोर्ट ब्लेयर. अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के बैरन द्वीप पर आठ दिन के भीतर दो बार मामूली ज्वालामुखी विस्फोट हुए. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है. अधिकारियों ने बताया कि ज्वालामुखी विस्फोट 13 और 20 सितंबर को हुए हालांकि ये मामूली थे.
यह द्वीप पोर्ट ब्लेयर से समुद्र मार्ग से लगभग 140 किलोमीटर दूर है. बैरन द्वीप का कुल क्षेत्रफल 8.34 वर्ग किलोमीटर है.

अंडमान और निकोबार प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, बैरन द्वीप पर पहला विस्फोट 1787 में हुआ था इसके बाद 1991, 2005, 2017 और 2022 में हल्के विस्फोट हुए.

ज्वालामुखी क्यों फटता है?
ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर वह स्थान है जहां से लावा, राख, गैसें और अन्य पदार्थ बाहर निकलते हैं. यह मुख्य रूप से पृथ्वी के अंदर मौजूद मैग्मा (पिघला हुआ चट्टानी पदार्थ) की गति और दबाव के कारण फटता है. पृथ्वी की सतह कठोर है, लेकिन इसके नीचे का हिस्सा अत्यधिक गर्म और पिघला हुआ होता है. पृथ्वी का आंतरिक तापमान और भू-गर्भीय प्रक्रियाएं लगातार मैग्मा का निर्माण करती रहती हैं.
जब पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती, अलग होती या फिसलती हैं, तो उनके बीच दरारें और कमजोर स्थान बन जाते हैं. इन्हीं दरारों से मैग्मा सतह की ओर बढ़ने लगता है. धीरे-धीरे यह मैग्मा अंडरग्राउंड चैंबर में जमा होकर दबाव पैदा करता है. जब दबाव बहुत अधिक हो जाता है और सतह इसे रोक नहीं पाती, तो मैग्मा ज्वालामुखी के मुहाने (क्रेटर) से बाहर निकल जाता है. यही प्रक्रिया ज्वालामुखी विस्फोट कहलाती है.
ज्वालामुखी फटने पर लावा, जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें और राख का गुबार भी निकलता है. ये विस्फोट कभी हल्के होते हैं, जिनमें लावा धीरे-धीरे बहता है, तो कभी अत्यधिक हिंसक होते हैं, जिनमें राख और गैसें आसमान तक फैल जाती हैं.

“नहीं मिल रहा घटी हुई GST का फायदा? WhatsApp पर कर पाएंगे शिकायत, समझें तरीका”

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22 सितंबर से देशभर में GST की नई दरें लागू हो गई हैं। इसके बाद फ्रिज, टीवी, प्रोजेक्टर और एयर कंडीशनर जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स पर 28% की जगह 18% GST लगेगा। हालांकि इंटरनेट पर लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, कि उन्हें कुछ जगहों पर अभी भी GST की पुरानी दर पर ही सामान खरीदने को मिल रहा है।

अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हुआ है या आप चाहते हैं कि आपको इस तरह की समस्या का सामना न करना पड़े, तो बता दें कि इसकी शिकायत WhatsApp के जरिए भी की जा सकती है। बता दें कि ऐसा करना बेहद आसान है और एक नंबर को अपनी फोन बुक में सेव करके आप इस सर्विस का इस्तेमाल कर पाएंगे। चलिए डिटेल में समझ लेते हैं कि आखिर आप किस तरह से WhatsApp के जरिए इस तरह की शिकायत दर्ज कर पाएंगे।

नोट कर लें नंबर WhatsApp के जरिए शिकायत करने के लिए जरूरी है कि आपके पास वह नंबर हो जिसके जरिए आप WhatsApp पर अपनी समस्या सरकारी विभाग तक पहुंचा पाएं।

दरअसल सरकार ने इसके लिए यह WhatsApp नंबर 8800001915 उपलब्ध कराया है, ताकि लोग GST की दरों में हुए बदलावों को कही लागू होता न पाएं तो शिकायत सरकार तक पहुंचा सकें। इसके अलावा आप 1915 के जरिए भी कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। वही अगर आप पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना टचाहें, तो आप INGRAM पर जा सकते हैं।

WhatsApp पर ऐसे होगी शिकायत अगर आप कहीं GST की नई दरों को लागू होता नहीं पाते, तो:

8800001915 पर Hi  लिख कर एक WhatsApp मैसेज करें। इसके बाद हिंदी या अंग्रेजी में से एक भाषा चुनें। इसके बाद Register Grievance को चुनें। इसके बाद अपने राज्य और शहर को चुनें। आप जिस प्रोडक्ट को लेकर शिकायत करना चाहते हैं, उसकी इंडस्ट्री को चुनें। इसके बाद प्रोडक्ट की कैटेगरी को चुनें जैस कि Electronics Products इंडस्ट्री के लिए TV कैटेगरी। इसके बाद प्रोडक्ट किस कंपनी का है यह चुनें। इसके बाद अपने प्रोडक्ट की कीमत को चुनें. आखिर में आपसे अपनी शिकायत लिख कर देने को कहा जाएगा। इसमें आप जिस भी समस्या का सामना कर रहे हैं, उसे अच्छे से मैसेज के रूप में लिख कर भेज दें।

इसके बाद आपसे जारी रखने या मैसेज को ए़डिट करने के बारे में पूछा जाएगा। अगर आप अपनी शिकायत में कुछ भी सुधारना चाहते हैं, तो Edit या फिर Continue को चुनें। इसके बाद आपसे शिकायत से संबंधित डॉक्युमेंट अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। अगर आप कोई डॉक्युमेंट देना चाहें, तो हां या ना पर टैप करें। इसके बाद आपकी शिकायत रजिस्टर हो जाएगी और आपको आपकी शिकायत का नंबर भी दिया जाएगा। WhatsApp पर ही आप अपनी शिकायत का स्टेटस भी जान सकते हैं।

शिकायत का स्टेटस ऐसे जानें अपनी शिकायत का स्टेटस जानने का तरीका भी शिकायत करने जैसा ही है। इसके लिए भी आपको:

8800001915 पर Hi लिख कर एक  WhatsApp मैसेज करना होगा। भाषा चुनने के बाद आप से शिकायत के दर्ज करने या स्टेटस पता करने के बीच किसी एक को चुनने के लिए कहा जाएगा। यहां आप शिकायत का स्टेटस पता करें, इसे चुन लें। इसके बाद शिकायत करने पर मिले नंबर को दर्ज करके अपनी शिकायत का स्टेटस बेहद ही आसानी से पता कर लें।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का सफाया: केंद्र की ताकत, राज्य की इच्छाशक्ति का तालमेल

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घने जंगलों की सघनता, जहां कभी गोलियों की गूंज और खून की नदियां बहा करती थीं, आज विकास की रोशनी बिखर रही हैं. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे इलाकों से नक्सलवाद का काला साया धीरे-धीरे मिट रहा है. पिछले एक साल में 300 से अधिक नक्सलियों का सफाया, 1,100 से ज्यादा गिरफ्तारियां और 1,000 के करीब आत्मसमर्पण-ये आंकड़े न सिर्फ एक अभियान की सफलता की कहानी कहते हैं, बल्कि एक ऐसी क्रांति की गवाही देते हैं जो केंद्र की रणनीतिक ताकत और राज्य की अटल इच्छाशक्ति का अनोखा संगम है. लेकिन इस विजय के पीछे की कहानी में एक अनकही सच्चाई छिपी है-राज्य सरकार की भूमिका को मीडिया ने उतना ही महत्व दिया जितना जंगल की छांव में छिपे एक पत्ते को. केंद्र की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रदेश की दृढ़ता ने ही इस सफाए को इतना बड़ा और निर्णायक बनाया है. इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

नक्सलवाद, जो 1967 के नक्सलबाड़ी आंदोलन से जन्मा था, छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के छह जिलों को अपनी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में जकड़ चुका था. 2000 में राज्य के गठन के बाद से यह ‘रेड कॉरिडोर’ का केंद्र बन गया. 2010 में नक्सली हिंसा के 47 प्रतिशत घटनाएं यहीं दर्ज की गईं. अबूझमाड़ के जंगलों में छिपे ये उग्रवादी न सिर्फ विकास को रोकते थे, बल्कि आदिवासी समुदायों को भी अपने जाल में फंसा लेते थे. लेकिन 2023 के अंत में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद सीन बदल गया. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में राज्य ने नक्सलियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन कागर’ और ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ जैसे अभियानों को नई गति दी. मई 2025 में कर्रेगुट्टा हिल्स में चले 21 दिवसीय ऑपरेशन में 31 नक्सलियों का सफाया हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था.

केंद्र सरकार की भूमिका यहां नकारना असंभव है. गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 से ही ‘नक्सल-मुक्त भारत’ का संकल्प लिया है. उन्होंने 11 समीक्षा बैठकें आयोजित कीं, जिसमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की 60 बटालियनें छत्तीसगढ़ में तैनात की गईं. 2024 से 2025 के बीच 237 नक्सलियों को निष्प्रभावी किया गया, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों की खुफिया जानकारी और हथियारों की आपूर्ति महत्वपूर्ण रही. शाह का बार-बार दौरा-रायपुर से बस्तर तक-ने न सिर्फ सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि विकास परियोजनाओं को भी गति दी. स्वच्छ भारत अभियान, आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों आदिवासियों को लाभ पहुंचा. मार्च 2026 तक नक्सलवाद उखाड़ फेंकने का लक्ष्य केंद्र की रणनीति का हिस्सा है, और छत्तीसगढ़ इसमें अग्रणी है. बिना केंद्रीय सहायता के राज्य अकेला यह लड़ाई नहीं लड़ सकता था.

फिर भी, इस सफलता का एक बड़ा हिस्सा राज्य की इच्छाशक्ति का है, जो मीडिया की सुर्खियों में कम ही उभरा है. भाजपा सरकार ने नक्सलियों को ‘हमारी सरकार’ कहने की पुरानी मानसिकता को तोड़ा. डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) को पूर्ण स्वतंत्रता दी गई, जो स्थानीय आदिवासी युवाओं से बनी है. इन युवाओं ने जंगलों की हर गली-कूची को जाना-पहचाना. जनवरी 2024 से फरवरी 2025 तक 985 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो राज्य की पुनर्वास नीति का कमाल है. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “यह आत्मसमर्पण सिर्फ हथियार डालने का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा में शामिल होने का संकेत है.” राज्य ने 1,214 डाकघर, 297 बैंक शाखाएं और 268 एटीएम खोले, जो नक्सल प्रभावित इलाकों में वित्तीय समावेशन लाए. बस्तर को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से हटा दिया गया-यह राज्य की दृढ़ता का प्रमाण है. लेकिन मीडिया में ये कहानियां केंद्र की चकाचौंध में दब गईं. एक स्थानीय पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “केंद्र की बड़ी घोषणाएं तो सुर्खियां बनती हैं, लेकिन राज्य की जमीनी मेहनत को भुला दिया जाता है.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2025 में बिलासपुर रैली में कहा, “कांग्रेस की नीतियों ने दशकों तक नक्सलवाद को बढ़ावा दिया. पिछड़े इलाकों में विकास न होने से नक्सल फला-फूला.” पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में नक्सली ‘हमारी सरकार’ कहते थे, और शांति वार्ता की बातें होती थीं. सलवा जुडुम महेंद्र कर्मा जैसे आदिवासी नेता की महत्वाकांक्षी सोच थी. जिसे विवादास्पद बना कर नक्सल ईको सिस्टम और अर्बन नक्सल ने सफल नहीं होने दिया. बाद में नक्सलियों ने 2013 के दर्भा घाटी हमले में एक दर्जन से अधिक कांग्रेस नेताओं के साथ महेंद्र कर्मा की नृशंस हत्या की. कांग्रेस पर नक्सलियों को संरक्षण देने के आरोप भी लगे. पूर्व भाजपा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार में नक्सली घुसपैठिए थे. मीडिया में नक्सलियों को ‘रोबिन हुड’ बनाने की प्रवृत्ति थी-उनके इंटरव्यू प्रसारित होते, और आंदोलनकारी गिरोह उनकी सहानुभूति दिखाते. लेकिन अब, जब सफाया हो रहा है, अर्बन नक्सल ईको सिस्टम चुप हैं.

यह सच है कि अब नक्सलवाद का ग्रामीण चेहरा मिट रहा है, लेकिन इसका शहरी अवतार-‘अर्बन नक्सल’-आज भी एक बड़ी चुनौती है. नक्सली दस्तावेज, जैसे सीपीआई (माओइस्ट) के आंतरिक पत्र, साफ बताते हैं कि अब उनका उद्देश्य जंगलों से निकलकर शहरों और महानगरों में जहर फैलाना है. 1980 के दशक से उभरा यह ‘इंटेलेक्चुअल वॉर’ शिक्षा संस्थानों, मीडिया और राजनीति में घुस चुका है. इनकी विचारधारा से प्रभावित होकर जेएनयू, जादवपुर यूनिवर्सिटी जैसे केंद्रों से निकले युवा विभिन्न राजनीतिक दलों के आईटी सेल, बौद्धिक प्रकोष्ठों में जगह बना रहे हैं. विवेक अग्निहोत्री की किताब ‘अर्बन नक्सल्स’ इसे उजागर करती है-शहरी बुद्धिजीवी नक्सलियों को वैचारिक समर्थन देते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च 2025 में कहा, “जंगल से नक्सलवाद गायब हो रहा, लेकिन शहरों में जड़ें जमा रहा है. कुछ राजनीतिक दलों में अर्बन नक्सल घुस चुके हैं.” हाल के वर्षों में भारत की राजनीति में अराजकता का स्वर-शाहीन बाग जैसे आंदोलनों से-इस संदेह को गहरा बनाता है. महाराष्ट्र सरकार ने ‘अर्बन नक्सल’ विरोधी बिल लाने की तैयारी की है.

पिछले कुछ सालों में राजनीति में आई अस्थिरता-विपक्षी दलों के आईटी सेल से निकलने वाली अफवाहें, सोशल मीडिया पर उकसावे-यह संकेत देती है कि अर्बन नक्सल अपनी जगह बना चुके हैं. एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, 250 से अधिक संकाय सदस्य विश्वविद्यालयों में उग्रवादी विचारों का प्रचार कर रहे हैं. ये लोग कानूनी सहायता, फंडिंग और प्रचार से नक्सलियों को मजबूत करते हैं. छत्तीसगढ़ में सफलता के बावजूद, अगर शहरी मोर्चा न संभाला गया, तो जंगल की जीत व्यर्थ हो जाएगी. राज्य सरकार ने अब अर्बन नक्सल पर नजर रखने के लिए विशेष इकाई गठित की है.

इस सफर में आदिवासी समुदाय की भूमिका सराहनीय है. बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से नक्सल प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा गया. 1,143 युवाओं को बस्तरिया बटालियन में भर्ती किया गया. विकास परियोजनाएं-रेल, सड़क, बिजली – 33,700 करोड़ की लागत से शुरू हुईं. लेकिन एनजीओ कर्मी हिमांशु कुमार जैसे लोग सवाल उठाते हैं: क्या एन्काउंटरों में निर्दोष आदिवासी मारे जा रहे हैं? जनवरी 2025 में बीजापुर में एक छह माह की बच्ची की मौत ने विवाद खड़ा किया. सरकार का कहना है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हैं, लेकिन जांच जरूरी है. स्थानीय पुलिस, आदिवासी समाज और सेना को मिलकर संवेदनशीलता के साथ जंगल में ऑपरेशन को अंजाम देना होगा. जिससे निर्दोष शिकार ना हो और नक्सलियों के प्रोपगेंडा मशीनरी को अफ़वाह फैलाने का अवसर ना मिले.

अंत में, छत्तीसगढ़ की यह जीत साबित करती है कि केंद्र की मजबूत रीढ़ के बिना यह सफलता हासिल नहीं होती, लेकिन राज्य की इच्छाशक्ति ने ही इसे उड़ान दी. मीडिया को अब इस संतुलन को उजागर करना चाहिए क्योंकि असली श्रेय तो जमीनी सिपाहियों और आदिवासी बहनों का है, जो जंगल की हर शाखा पर विकास की बीज बो रही हैं. मार्च 2026 नजदीक आ रहा है; नक्सल-मुक्त भारत का सपना साकार होने को है. लेकिन सतर्क रहना होगा क्योंकि जंगल शांत हो चुके हैं, शहर अभी जाग रहे हैं

सोना अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा, इन चार वजहों से बढ़ती जा रही कीमत

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भारत में सोने की कीमत हर द‍िन एक नई ऊंचाई देख रही है. अब सोना र‍िकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गया है. द‍िल्‍ली में 10 ग्राम 24K सोन की कीमत 1,17,475 रुपये दर्ज की गई है. भारत के बाकी के राज्‍यों और शहरों में भी यही रेट है. आपको याद होगा क‍ि कुछ साल पहले तक सोने की कीमत 30000 रुपये थी. तब आपने सोचा भी नहीं होगा क‍ि सोने का गहना खरीदना सपना बन जाएगा. तो सवाल ये है क‍ि आख‍िर सोने की कीमत क्‍यों बढ़ रही है ? इसके पीछे की क्‍या वजह है.
सोने की कीमतों में द‍िख रहा इजाफा, चार वजहों से है. आइए इसके पीछे के चार प्रमुख कारणों पर नजर डालते हैं.
1. भारत में त्योहारों के मौसम की मांग
नवरात्रि के त्योहार की शुरुआत ने आभूषण खरीदारी को बढ़ावा दिया है, जिसे भारतीय घरों में शुभ माना जाता है. मौसमी खरीदारी और आने वाले दिवाली और शादी के मौसम के लिए अग्रिम खरीदारी ने भौतिक मांग को मजबूत बनाए रखा है, भले ही कीमतें ऊंची हैं.

2. फेडरल रिजर्व की दर कटौती की उम्मीदें
वैश्विक निवेशक इस बात को लेकर आश्वस्त होते जा रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगामी बैठकों में ब्याज दरों में कटौती करेगा. कम दरें गैर-उपज वाले संपत्तियों जैसे सोने को रखने की अवसर लागत को कम करती हैं, जिससे यह मूल्य के भंडार के रूप में अधिक आकर्षक हो जाता है. व्यापारी अब इस सप्ताह के अंत में फेड चेयर जेरोम पॉवेल की टिप्पणियों का इंतजार कर रहे हैं.

3. अमेरिकी डॉलर की कमजोरी
एक कमजोर अमेरिकी डॉलर ने बुलियन की रैली को गति दी है, जिससे अन्य मुद्राओं को रखने वाले खरीदारों के लिए सोना अधिक सस्ता हो गया है और वैश्विक स्तर पर निवेश की मांग को बढ़ावा मिला है.
4. सुरक्षित निवेश की अपील
वैश्विक आर्थिक वृद्धि के बारे में अनिश्चितता, चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिर इक्विटी बाजार निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर धकेल रहे हैं. मुद्रास्फीति और मुद्रा उतार-चढ़ाव के खिलाफ हेज के रूप में सोने की भूमिका फिर से ध्यान में है.

बाजारों ने इसके अनुसार प्रतिक्रिया दी. भारत में, ज्वैलर्स ने मजबूत फुटफॉल की रिपोर्ट दी क्योंकि खरीदारों ने आगे की कीमतों में वृद्धि से पहले खरीदारी करना चुना. हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक ऊंची कीमतें थोक खरीद को सीमित कर सकती हैं, विशेष रूप से मूल्य-संवेदनशील घरों में. वैश्विक स्तर पर, सोने के ईटीएफ और वायदा में निवेश प्रवाह मजबूत बना हुआ है, सट्टेबाज लंबी स्थिति बढ़ा रहे हैं. वैश्विक जोखिम भावना बुलियन में निरंतर प्रवाह का समर्थन कर रही है.

36 हथियार, 82 राउंड गोला-बारूद… मणिपुर में सेना को बड़ी कामयाबी, 9 कट्टर उग्रवादी गिरफ्तार

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मणिपुर के विभिन्न जिलों में संयुक्त अभियानों की एक सीरीज में सेना और अन्य सुरक्षा बलों ने नौ कट्टर उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है और 36 हथियार, कुछ इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), ड्रग्स और अन्य युद्ध संबंधी सामान बरामद किया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अमित शुक्ला ने बताया कि सेना और असम राइफल्स की टुकड़ियों ने मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर सात जिलों, टेंग्नौपाल, थौबल, इंफाल पूर्व, तामेंगलोंग, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और चंदेल, जो इंफाल घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों में आते हैं, में कई सटीक, खुफिया जानकारी पर आधारित संयुक्त अभियान चलाए. पिछले कुछ दिनों में चलाए गए इन अभियानों में विभिन्न पहाड़ी और घाटी-आधारित उग्रवादी समूहों के नौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और 36 हथियार, नशीले पदार्थ और अन्य युद्ध-संबंधी सामग्री बरामद की गई.
गिरफ्तार किए गए उग्रवादी सोशलिस्ट रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक (सोरेपा), रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ)/पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वार ग्रुप) और यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट के सदस्य थे.

बरामद हथियारों में चार सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर), चार इंसास राइफलें, दो .303 राइफलें, एक एआर-15/एम-16 राइफल, कई बोल्ट-एक्शन राइफलें, कई 9 मिमी पिस्तौल, एक स्कोप, 82 राउंड गोला-बारूद, 25 मैगजीन और तीन मोबाइल फोन शामिल हैं. रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा बलों के ये समन्वित प्रयास मणिपुर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.

मणिपुर के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि म्यांमार की सीमा से लगे तेंग्नौपाल जिले के अंतर्गत सीता-तेंग्नौपाल मार्ग पर सोमवार रात सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए एक अभियान के दौरान, एक चीनी केनबो बाइक से 600 पैकेट बरामद किए गए, जिनमें 1,20,000 अत्यधिक नशीली मेथैम्फेटामाइन की गोलियां थीं, जिनका वजन 13 किलोग्राम था और जिनकी कीमत 39 करोड़ रुपए से अधिक है. इस बाइक को एक अज्ञात सवार ने सुरक्षा बलों को देखकर छोड़ दिया था.
तस्करी का सामान और दोपहिया बाइक जब्त कर ली गई है, और सवार की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है. पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि ये ड्रग्स म्यांमार से तस्करी करके लाए गए थे, जिसकी मणिपुर के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा है. अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बल पहाड़ी और इंफाल घाटी के जिलों के सीमांत और संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान और क्षेत्र में दबदबा बनाए हुए हैं.