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विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह का अभिनंदन कर आभार माना…

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एलएलएम की स्वीकृति पर राजनांदगांव शिक्षा मंडल कार्यकारिणी ने पुष्प गुच्छ भेंट किया…

राजनांदगांव: पंडित किशोरी लाल शुक्ल विधि महाविद्यालय में एल एल एम की कक्षाओं हेतु स्वीकृति तथा विधि की कक्षाओं में सीट बढ़ाए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह का अभिनंदन किया गया।

कार्यकारिणी सदस्यों ने आज उनसे मुलाकात कर उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर उनके अविस्मरणीय सहयोग के लिए साधुवाद दिया।

राजनांदगांव शिक्षा मंडल द्वारा संचालित पंडित किशोरी लाल शुक्ल विधि महाविद्यालय में नवीन सत्र से एल एल एम की कक्षाएं संचालित की जाएगी।

राजनांदगांव शिक्षा मंडल का विधि के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन का सपना साकार करने में अहम भूमिका क्षेत्रीय विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह की रही है।

राजनांदगांव शिक्षा मंडल का प्रतिनिधि मंडल अध्यक्ष सुरेश एच लाल के नेतृत्व में कमलेश उभरानी, नंदकुमार अग्रवाल, सुशील पसारी, किशोर बेलावाला, अशोक चौधरी, प्राचार्य डॉ. निमिषा मिश्रा तथा प्रशासक डॉ. आर एन सिंह ने उनसे मिलकर सहयोग हेतु धन्यवाद ज्ञापन किया। डॉ. रमन सिंह का अभिनंदन कर राजनांदगांव शिक्षा मंडल ने भविष्य में इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा की।

बेमेतरा में उर्वरक विक्रेता पर कार्रवाई, लाइसेंस 15 दिनों के लिए निलंबित

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बेमेतरा जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, तस्करी, डायवर्सन, जमाखोरी, अधिक कीमत पर विक्रय, अमानक एवं नकली उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण एवं कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में उर्वरक निरीक्षक नवागढ़ द्वारा 08 जून 2026 को मेसर्स कृषि विकास केन्द्र, ग्राम मानिकपुर, विकासखंड नवागढ़ का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान विभिन्न अनियमितताओं को देखते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संतोषप्रद जवाब न देने के कारण उक्त संस्थान के उर्वरक लायसेंस को 15 दिवस के लिए निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान द्वारा उर्वरकों के भंडारण एवं विक्रय संबंधी किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जा सकेगी।

रिश्वत लेने के मामले में बैंक शाखा प्रबंधक निलंबित…

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मृतक खातेदार के नामिनी को राशि भुगतान के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की निपानिया शाखा की प्रभारी शाखा प्रबंधक अनिता पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मृतक खातेदार की जमा राशि जारी करने के लिए शाखा प्रबंधक ने नामिनी से रिश्वत की मांग की।

शिकायत की प्रारंभिक जांच नोडल अधिकारी के माध्यम से कराई गई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद बैंक कर्मचारी सेवा नियमों के तहत अनिता पाण्डेय को निलंबित करते हुए नोडल कार्यालय महासमुंद अटैच किया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने किया पहल अध्ययन कक्ष का शुभारंभ…

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”प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग से मिलेगा मार्गदर्शन – विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह”

– विधानसभा अध्यक्ष ने किया पहल अध्ययन कक्ष का शुभारंभ’
– विधानसभा अध्यक्ष ने इस नवाचार के लिए पुलिस विभाग की पूरी टीम को दी बधाई’
– कोटवारों का गांवों की सुरक्षा एवं सूचना तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान’
– सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद कर उनकी जान बचाना संवेदनशीलता की मिसाल’
– विधानसभा अध्यक्ष ने अपराध मुक्त ग्रामों, कोटवारों एवं यातायात मित्रों का किया सम्मान’

राजनांदगांव। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज पुलिस लाइन राजनांदगांव में आयोजित पहल कार्यक्रम में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए स्थापित नि:शुल्क पहल अध्ययन कक्ष का शुभारंभ किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव पुलिस द्वारा समाज से सीधे जुडऩे और जनसहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल एक अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास है।

उन्होंने युवाओं के लिए पुलिस लाइन में नि:शुल्क अध्ययन कक्ष, कोचिंग सुविधा एवं मेंटरशिप कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि नव नियुक्त निरीक्षक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे, जिससे उन्हें अपने लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पुस्तक वितरण एवं अध्ययन संसाधनों की उपलब्धता से युवाओं को लाभ मिलेगा तथा शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इस पहल से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने इस नवाचार के लिए पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कार्यक्रम में अपराध मुक्त ग्रामों के प्रतिनिधियों, कोटवारों एवं यातायात मित्रों का सम्मान किया तथा उनके नाम से पौधरोपण भी किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले के 164 ग्रामों द्वारा वर्ष 2024, 2025 एवं 2026 के दौरान अपराध मुक्त रहने का उदाहरण प्रस्तुत करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

यह सफलता केवल पुलिस विभाग की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों, ग्रामवासियों एवं प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त ग्रामों के नाम से किया गया वृक्षारोपण एक सकारात्मक संदेश देता है तथा भविष्य में और अधिक ग्राम इस दिशा में आगे आएं, इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद कर उनकी जान बचाने वाले नागरिकों तथा यातायात मित्रों का सम्मान समाज में सेवा और संवेदनशीलता की भावना को प्रोत्साहित करता है।

उन्होंने कोटवारों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों की सुरक्षा एवं सूचना तंत्र को मजबूत बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत की प्राचीन ग्राम व्यवस्था में कोटवार और सरपंच जैसी व्यवस्थाएं सदियों से सामाजिक सुरक्षा एवं सुशासन की आधारशिला रही हैं।

सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि राजनांदगांव पुलिस द्वारा युवाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग एवं रीडिंग रूम की सुविधा उपलब्ध कराना एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा पुलिस और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

उन्होंने कोटवारों की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि गांवों में शासन की योजनाओं एवं सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाने, शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रशासन को सहयोग देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

सांसद श्री पाण्डेय ने अपराध मुक्त ग्रामों, यातायात मित्रों एवं कोटवारों के सम्मान को सकारात्मक पहल बताते हुए इसके लिए पुलिस विभाग को बधाई दी।

महापौर श्री मधुसूदन यादव ने कहा कि राजनांदगांव पुलिस द्वारा शुरू की गई यह पहल केवल विद्यार्थियों के लिए कोचिंग एवं अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं सकारात्मक संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने अपराध मुक्त ग्रामों, कोटवारों एवं यातायात मित्रों के सम्मान को सामाजिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। ऐसे प्रयास समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देते है।

पुलिस महानिरीक्षक श्री बालाजी राव ने कहा कि पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जनभागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और नागरिकों के बीच विश्वास का मजबूत सेतु बनाकर ही सामाजिक विकास को गति दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए शुरू किए गए पहल रीडिंग रूम, कोचिंग एवं मेंटरशिप कार्यक्रम को प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा ने कहा कि पहल कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक दिशा, बेहतर अध्ययन वातावरण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि पुलिस लाइन में स्थापित पहल रीडिंग रूम, नि:शुल्क कोचिंग एवं मेंटरशिप कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि कोटवारों, अपराध मुक्त ग्रामों एवं यातायात मित्रों के सहयोग से समाज में सुरक्षा, जागरूकता और जनसहभागिता को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव पुलिस कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा एवं अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में लगातार प्रभावी कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, अध्यक्ष राज्य सहकारी विपणन संघ श्री शशीकांत द्विवेदी, अध्यक्ष जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक श्री सचिन बघेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती किरण साहू, अध्यक्ष राजगामी संपदा श्रीमती पूर्णिमा साहू, उपाध्यक्ष राजगामी संपदा श्री मनोज निर्वाणी, श्री खूबचंद पारख, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री संतोष अग्रवाल, श्री दिनेश गांधी, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन, सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, श्री भावेश बैद, समाजसेवी श्री बहादुर अली, पुलिस विभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कोटवार, यातायात मित्र, अपराध मुक्त ग्रामों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

Somvati Amavasya 2026: 300 साल बाद बने दुर्लभ महासंयोग पर उमड़ा आस्था का सैलाब, संतों ने बताया विशेष महत्व…

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300 साल बाद बने दुर्लभ सोमवती अमावस्या महासंयोग पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा. महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि गीता में भगवान कृष्ण ने पीपल को विशेष महत्व दिया है.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि इस बार की सोमवती अमावस्या कई मायनों में बेहद खास है. उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, लगभग 300 वर्षों बाद जेठ माह में अधिक मास और सोमवती अमावस्या का ऐसा दुर्लभ संयोग बना है. सनातन धर्म में इस महासंयोग को बहुत पुण्यदायी और लाभकारी माना जाता है. यही वजह है कि हरिद्वार, प्रयागराज, अयोध्या और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर लाखों श्रद्धालु स्नान, दान और तर्पण के लिए पहुंच रहे हैं.

महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान, पितृ तर्पण और दान-पुण्य करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म और परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करने का आग्रह भी किया.

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या क्यों मानी जाती है बेहद शुभ?

महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और जब यह सोमवार के दिन पड़ती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन पितरों के नाम से तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

उन्होंने कहा कि जेठ माह की अमावस्या पर किया गया तर्पण विशेष फलदायी माना जाता है. श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से गंगा तटों पर विधि-विधान से पूजा और तर्पण कर रहे हैं.

भगवान कृष्ण ने गीता में बताया पीपल का महत्व

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है. उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, “अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्” अर्थात सभी वृक्षों में मैं पीपल हूं. सनातन परंपरा में पीपल को देववृक्ष माना गया है और इसकी पूजा को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी बताया गया है.

महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, पीपल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत जरूरी वृक्ष है. हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना को जोड़ते हुए इसकी पूजा की परंपरा स्थापित की थी. उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना, उसका अभिषेक करना, दीपदान करना और उसकी परिक्रमा करना विशेष रूप से कल्याणकारी माना जाता है.

ऐसा करने से पितृ दोष में कमी आती है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की कामना से पीपल की पूजा-अर्चना करते हैं. हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों और गंगा घाटों पर भी सोमवती अमावस्या के अवसर पर पीपल पूजन और दीपदान का विशेष उत्साह देखने को मिला.

घर बैठे भी कमा सकते हैं सोमवती अमावस्या का पुण्य

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि यदि कोई श्रद्धालु किसी कारणवश हरिद्वार या अन्य तीर्थ स्थलों तक नहीं पहुंच सकता है, तो वह घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकता है. इसके बाद पितरों का स्मरण कर तर्पण, दान और प्रार्थना करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया पूजन भी उतना ही फलदायी माना जाता है जितना तीर्थ स्थलों पर किया गया अनुष्ठान. इसलिए श्रद्धालुओं को इस दिन धर्म, सेवा और सद्कर्म के कार्यों में भाग लेना चाहिए.

सोमवती अमावस्या स्नान को लेकर हाई अलर्ट पर रहा प्रशासन

हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि, सोमवती अमावस्या स्नान पर्व को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं. घाटों पर सुरक्षा, सफाई, पेयजल, चिकित्सा और यातायात की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं और प्रशासन हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

वहीं एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 6 सुपर जोन, 16 जोन और 40 सेक्टरों में विभाजित किया गया है. पुलिस बल के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराया जा सके.

अच्छी पैदावार के लिए खेती में सिर्फ खाद डालना ही काफी नहीं होता बल्कि सही मात्रा में खाद डालना ज्यादा जरूरी होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में…

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देशभर के किसान खरीफ सीजन की फसलों की तैयारी कर रहे हैं. खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही किसानों के बीच यूरिया और डीएपी की उपलब्धता की चिंता बनी रहती है. खेत तैयार करने से लेकर उसमें खाद डालने तक इस समय किसान अपने जरूरी काम निपटाते हैं. हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए खेती में सिर्फ खाद डालना ही काफी नहीं होता बल्कि सही मात्रा में खाद डालना ज्यादा जरूरी होता है.

कई किसान बिना मिट्टी की जांच करें अनुमान के आधार पर खेत में खाद डाल देते हैं, इससे फसल को फायदा कम और मिट्टी को नुकसान ज्यादा होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि आपके खेत में कितनी खाद की जरूरत है, आप कैसे चेक कर सकते हैं?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से जाने खेत में कितनी खाद की जरूरत?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को यह जानने में मदद करता है कि उनके खेत में कितनी और कौन सी खाद की जरूरत है. मृदा हेल्थ कार्ड बनवाने के लिए किसानों को अपने खेत के अलग-अलग हिस्सों से पहले मिट्टी के नमूने लेने होते हैं. इसके लिए उन्हें खेत में 15 से 20 अलग-अलग स्थान से मिट्टी निकालनी होती है. इसके बाद सभी नमूनों को मिलाकर एक नमूना तैयार किया जाता है, फिर इन नमूने को पॉलिथीन बैग में भरकर कृषि विभाग या मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जमा कराया जाता है. मिट्टी का नमूना जमा होने के बाद हाईटेक मशीन से उसकी जांच की जाती है. वहीं आमतौर पर 5 दिन के अंदर रिपोर्ट तैयार हो जाती है. जांच के दौरान मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का स्तर देखा जाता है.

रिपोर्ट से पता चलता है खेत में क्या कमी?

मिट्टी की जांच की रिपोर्ट आने के बाद किसानों को पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व कम है और कौन सा पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. जैसे अगर खेत में फास्फोरस की कमी है, तो उसी के अनुसार खाद डाली जा सकती है. वहीं अगर पोटाश पर सही मात्रा में है, तो ज्यादा पोटाश डालने की जरूरत नहीं होती है. आपको बता दें कि जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है. यह कार्ड 3 साल तक मान्य रहता है, इस कार्ड में कौन सी फसल के लिए कौन सा खाद कितनी मात्रा में खाद कब देना है और कौन से सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत है यह सारी जानकारी दी जाती है.

बिना जांच के कैसे पता करें खेत में खाद की जरूरत?

कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी किसान की मिट्टी जांच रिपोर्ट नहीं आती है और अगर वह मिट्टी की जांच नहीं कर सकता है, तो वह मानक सिफारिश के अनुसार खाद का उपयोग कर सकता है. जैसे प्रति एकड़ के लिए 48 किलो नाइट्रोजन, 24 किलो फास्फोरस और 16 किलो पोटाश डालना सुरक्षित माना जाता है. वहीं अगर किसान डीएपी का उपयोग कर रहा है तो 52 किलो डीएपी, 84 किलो यूरिया और 27 किलो पोटाश, अगर एसएसपी खाद का उपयोग कर रहे हैं तो 150 किलो एसएसपी, 105 किलो यूरिया, 27 किलो पोटाश और अगर एनपीके खाद का उपयोग कर रहे हैं तो 75 किलो एनपीके, 85 किलो यूरिया और 60 किलो पोटाश डाल सकते हैं.

होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद कितने दिन में नॉर्मल होगी LPG और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई, जानें कितना हो जाएगा सस्ता?

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अमेरिका और ईरान के आपसी समझौते से रणनीतिक समुद्री जलमार्ग होर्मुज के ताले तो खुल जाएंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि देश में तेल और गैस की आपूर्ति कब तक नॉर्मल हो पाएगी.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की खबर से पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है. दोनों देशों के बीच हुए इस शांति समझौते के बाद वैश्विक बाजार में एक नई उम्मीद जागी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी साझा की है कि दशकों पुराना यह विवाद अब थमने की ओर है. इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री रास्ते यानी होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का फैसला किया गया है. हालांकि इस रास्ते के खुलने की खबर जितनी सुखद है, जमीनी स्तर पर ईंधन की सप्लाई को पटरी पर लाना उतना ही पेचीदा काम है.

कितने दिन में नॉर्मल हो सकती है सप्लाईं?

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने के तुरंत बाद पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य नहीं होने वाली है. आम जनता को लग सकता है कि समझौता होते ही सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन हकीकत अलग है. इस समुद्री रास्ते के पूरी तरह चालू होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को सुचारू रूप से चलने में कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों का समय लग सकता है. इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कई तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कारण शामिल हैं, जो तेल की निर्बाध सप्लाई के रास्ते में बड़ी बाधा बने हुए हैं.

एलपीजी के लिए लंबा इंतजार

पेट्रोल और डीजल से भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई को लेकर बनी हुई है. जानकारों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर बाधित हो चुकी एलपीजी की पूरी सप्लाई चेन को दोबारा दुरुस्त करने में लगभग 3 से 4 साल का एक लंबा वक्त लग सकता है. भारत के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील मामला है, क्योंकि हमारा देश अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का करीब 60% हिस्सा पश्चिमी एशिया के देशों से ही मंगाता है. इस संकट के कारण जो सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह बिखर चुका है, उसे दोबारा अपनी पुरानी क्षमता में लौटने में लंबा समय लगेगा.

तेल के लिए कब तक मिलेगी राहत?

समझौते के बाद शुरुआती कुछ दिनों में उन जहाजों को बड़ी राहत मिलेगी जो पिछले काफी समय से समुद्र में फंसे हुए थे. होर्मुज स्ट्रेट के खुलते ही इन अटके हुए तेल टैंकरों की आवाजाही तुरंत प्रभाव से शुरू हो जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आवक बढ़ेगी. हालांकि यह राहत बेहद शुरुआती और सीमित होगी क्योंकि यह केवल उस तेल तक सीमित है जो पहले से जहाजों में लोड हो चुका है. बाजार की तात्कालिक मांग को पूरा करने के लिए यह कदम अच्छा है, लेकिन भविष्य की नियमित सप्लाई के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा.

कुओं को दोबारा चालू करने की चुनौती

कच्चे तेल के कुओं को एक बार बंद करने के बाद उन्हें दोबारा चालू करना बेहद जटिल और धीमी प्रक्रिया मानी जाती है. तेल के उत्पादन को संकट से पहले वाले स्तर पर लाने और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया को सामान्य करने में कम से कम 3 से 4 महीने का समय लग जाएगा. कुछ खास तेल क्षेत्रों में तो इस उत्पादन को पूरी तरह बहाल होने में 6 से 12 महीने तक की अवधि भी लग सकती है. रिफाइनरियों तक नया क्रूड ऑयल पहुंचने और वहां से पेट्रोल-डीजल तैयार होने के अपने तय नियम और समयसीमा होती है जिसे छोटा नहीं किया जा सकता.

समुद्री बीमा का बड़ा आर्थिक बोझ

युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन समुद्र में जहाजों को लेकर पैदा हुआ डर इतनी जल्दी खत्म नहीं होता है. जब तक शिपिंग कंपनियों और जहाजों को सुरक्षा का पूरा भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक समुद्री बीमा की दरें यानी इंश्योरेंस प्रीमियम बहुत ज्यादा ऊंचा बना रहेगा. बढ़ा हुआ इंश्योरेंस प्रीमियम सीधे तौर पर तेल की ढुलाई लागत को बढ़ा देता है. जब तक यह बीमा खर्च कम नहीं होगा, तब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता रहेगा, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा.

भारत तक तेल पहुंचने में कितना लगेगा समय?

खाड़ी देशों से भारत की दूरी को देखते हुए तेल के परिवहन में एक निश्चित समय लगता है. इस समुद्री रास्ते के पूरी तरह खुलने के बाद भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए नए सिरे से तेल लोड करने और जहाजों को भारत के बंदरगाहों तक पहुंचने में लगभग 30 से 40 दिन का समय लगेगा. इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के दौरान बिछाई गई बारूदी सुरंगों की आशंका को भी खारिज नहीं किया जा सकता. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इन रास्तों की बारीकी से जांच करने और उन्हें पूरी तरह साफ करने में भी काफी दिन लग सकते हैं.

कीमतों में कितनी हो सकती है कटौती?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मार्ग के खुलने से कच्चे तेल पर बना हुआ मानसिक और आर्थिक दबाव जरूर कम हुआ है. लेकिन तेल के उत्पादन, शिपिंग और रिफाइनिंग की धीमी रफ्तार को देखते हुए आम जनता के लिए ईंधन की कीमतों में किसी बहुत बड़ी या जादुई कटौती की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. समुद्री बीमा की ऊंची दरों और सप्लाई चेन के पुनर्निर्माण के खर्च के कारण भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बहुत ही सीमित और बेहद धीमी गिरावट देखने को मिलेगी, जो कि उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे महसूस होगी.

टीएमसी बागी गुट को अदालत में चुनौती दे सकती है? क्या है पहला कदम? 

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हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय की घोषणा कर दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या पार्टी इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है या नहीं.

तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 बागी सांसदों द्वारा अपने गुट का नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा ने एक नई राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी है. हालांकि बागी सांसद दल बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा का दावा कर सकते हैं लेकिन संवैधानिक प्रावधान यह साफ करता है कि सिर्फ दूसरी पार्टी में शामिल होने से उन्हें अयोग्य घोषित होने से अपने आप सुरक्षा नहीं मिलती. अब इस कदम की संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत जांच होने की संभावना है और तृणमूल कांग्रेस के पास इस विलय को चुनौती देने के लिए कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं.

टीएमसी बागी गुट को अदालत में चुनौती दे सकती है?

भारत के संवैधानिक ढांचे के तहत मूल राजनीतिक पार्टी बागी सांसदों या फिर विधायकों को कानूनी रूप से चुनौती दे सकती है अगर उसे लगता है कि उन्होंने दल बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है.  पहला कदम आमतौर पर लोकसभा या फिर विधानसभा के स्पीकर के सामने उठाया जाता है. लेकिन खास परिस्थितियों में न्यायिक हस्तक्षेप भी संभव है.

क्या है पहला कदम?

तृणमूल कांग्रेस लोकसभा स्पीकर के सामने अयोग्यता याचिका दायर कर सकती है और 10वीं अनुसूची के तहत बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकती है. स्पीकर ही वह प्राधिकारी है जिन्हें यह तय करने का अधिकार है कि क्या सांसदों ने दल बदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया है. अगर स्पीकर फैसला लेने में देरी करते हैं तो पीड़ित पक्ष सुप्रीम कोर्ट या फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है और समय सीमा के अंदर फैसले के लिए निर्देश मांग सकता है.

सिर्फ दो तिहाई का नियम काफी नहीं

कई बागी समूह पार्टी के कम से कम दो तिहाई विधायकों का समर्थन होने का दावा करके अयोग्यता से बचने की कोशिश करते हैं. हालांकि संवैधानिक संशोधन में इन प्रावधानों को काफी सख्त बना दिया है. 91वें संवैधानिक संशोधन ने उस पुराने प्रावधान को खत्म कर दिया जो पार्टी के साधारण विभाजन के आधार पर सुरक्षा की अनुमति देता था. आज बागी सिर्फ इसलिए कानूनी मान्यता का दावा नहीं कर सकते कि उनके पास विधायी पार्टी के अंदर पर्याप्त संख्या बल है.

विलय को संवैधानिक दोहरे परीक्षण पर खरा उतरना होगा

दल बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए पात्र होने के लिए बागी गुट को किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ वैध विलय का प्रमाण देना होगा. विलय को संवैधानिक शर्तों को पूरा करना होगा. इसमें शामिल विधायकों में से कम से कम दो तिहाई का समर्थन होना शामिल है.

किसी दूसरे पार्टी के साथ विलय की सिर्फ घोषणा करना ही काफी नहीं है. विलय की वैधता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या सभी संवैधानिक जरूरतों को पूरा किया गया है.

अदालत कब दखल दे सकती है?

अदालत तब दखल दे सकती है जब इस बात के सबूत हो कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया या फिर बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी बागी गुट को मान्यता दी. अगर कथित विलय में वास्तविक संगठनात्मक मंजूरी की कमी हो तो भी न्यायिक जांच हो सकती है.

घरेलू शेयर बाजार पर आज ईरान-अमेरिका में शांति समझौते की खबर, 1197 अंक उछला सेंसेक्स, निफ्टी भी 362 अंक ऊपर…

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घरेलू शेयर बाजार पर आज ईरान-अमेरिका में शांति समझौते की खबर का असर देखने को मिल रहा है. युद्ध खत्म होने के ऐलान से दुनियाभर के निवेशकों में उत्साह चरम पर है.

अमेरिका-ईरान शांति समझौते से शेयर बाजार में तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार में आज ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है और बाजार रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त होने के लिए शांति समझौते (Iran-US Peace Deal) की बड़ी घोषणा के बाद बाजार में जबरदस्त लिवाली देखी जा रही है. इस दौरान सेंसेक्स 1197 अंक उछलकर 76725.27 के लेवल पर कारोबार की शुरुआत की और इसी तरह से एनएसई का निफ्टी भी लगभग 362 अंकों की भारी बढ़त के साथ 23984.85 के लेवल पर खुला.

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने पर सहमत हो गए हैं और दोनों ही पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि समझौते पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो.” उन्होंने आगे कहा, “तेल बहने दो!”

एशियाई बाजार

अमेरिका और ईरान के बीच बीते 4 महीने से चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए एक शुरुआती डील हो गई है, जिसका असर आज एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है. सोमवार को एशियाई बाजार बढ़त के साथ खुले. इस दौरान कोस्पी (Kospi) ने 7.01% की बढ़त हासिल की, जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.25% का इजाफा हुआ. इसी तरह से जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 3.4% चढ़ा और टॉपिक्स (Topix) में 1.8% की तेजी देखी गई. हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 24,376 पर था, जो इंडेक्स की पिछली क्लोजिंग 24,249.29 से ज्यादा है.

अमेरिकी शेयर बाजार

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की आधिकारिक घोषणा के बाद वॉल स्ट्रीट में भी गजब का उत्साह रहा. रविवार देर रात ट्रंप के ऐसा कहने के बाद कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने के समझौते पर पहुंच गए हैं, सोमवार को अमेरिकी बेंचमार्क के फ्यूचर्स में तेजी आई. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज से जुड़े फ्यूचर्स में 342 अंक या 0.7% की बढ़त हुई.S&P 500 फ्यूचर्स 0.9% चढ़े, जबकि नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में 1.4% का उछाल आया.

क्रूड ऑयल की कम हुई कीमत

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स में 4.45% की भारी गिरावट आई और यह 81.10 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करने लगा. दूसरी ओर, अगस्त डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स आज सुबह $84.08 पर ट्रेड कर रहे थे, जिसमें 3.5% की गिरावट आई और यह 85 डॉलर के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया. COMEX पर क्रूड की कीमतें 4.47% बढ़कर 81.09 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करने लगीं.

क्या अब कम होगी पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमत? होर्मुज के खुलने का होगा बड़ा असर!

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अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के बाद इस पर लगे नाकेबंदी को हटा लिया जाएगा, जिससे पहले जहाजों को गुजरने के लिए लगभग 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ते थे

पश्चिमी एशिया में तनाव के चलते पिछले कुछ महीनों से ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन अब इसमें ब्रेक लगने की उम्मीद है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बिना किसी टोल के दोबारा खोलने के ऐलान के बाद कच्चे तेल के दामों में बड़ी गिरावट आई है.

रविवार देर रात को ब्रेंट क्रूड 3.9 प्रतिशत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US क्रूड 4.8 प्रतिशत गिरकर लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल हो गया. यह मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है.

होर्मुज का रास्ता क्यों है इतना अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक ऐसा रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का ज्यादातर तेल शिपमेंट गुजरता है. फरवरी के आखिर में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से यह बंद है. ईरान के एक सांसद के मुताबिक, कुछ कमर्शियल जहाज इस जलमार्ग से गुजरने के लिए औसतन लगभग 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करते थे.

जानकारों ने चेतावनी दी थी कि अगर जलडमरूमध्य में रुकावट जारी रही, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर के मध्य से उच्च स्तर तक और अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं. यही वजह है कि पूरी दुनिया को दोनों देशों के बीच एक समझौते का बेसब्री से इंतजार था, जो आखिरकार हो गया. जैसे ही ट्रंप ने समझौते के पूरा होने की घोषणा की, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई.

भारत को इससे क्या फायदा?

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से भारत के आयात बिल में कमी आएगी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी कम होगा.

पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों पर असर

भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया था कि आने वाले महीनों में तेल और गैस दोनों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है. ईरान और अमेरिका के बीच जंग के चलते पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8-8.5% तक की बढ़ोतरी की गई थी. अब कच्चे तेल के 80 डॉलर के स्तर पर आने से कंपनियां जल्द ही कीमतों में 3-5 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती कर सकती है. हालांकि, इस पर अभी आधिकारिक रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता. इसी तरह से रसोई गैस सिलेंडरों के भी दाम कम हो सकते हैं.