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France Rafale Deal: 30 की मार ही झेल नहीं पाया पाकिस्तान! अब भारत के पास होंगे 150 राफेल, 12 दिन बाद खून के आंसू रोएंगे मुनीर…

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फरवरी के तीसरे सप्ताह में भारत आ रहे हैं. उनके 18 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है. फ्रेंच प्रेसीडेंट के दौरे को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं.

भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति का भारत दौरा बेहद खास है. मैक्रों के इस दौरे में भारत-फ्रांस के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत में राफेल की खरीद का प्रस्ताव भी शामिल है. इस डील में इंडियन एयरफोर्स के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की जानी है, जिसमें करीब 3.25 लाख करोड़ खर्च होने हैं.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक प्रस्ताव पर बीते महीने ही भारत का रक्षा खरीद बोर्ड प्रारंभिक सहमति जता चुका है, जिस पर अगले हफ्ते भारत के रक्षा मंत्री की हाई लेवल मीटिंग में चर्चा की संभावना है. मौजूदा सुरक्षा हालात को लेकर इंडियन एयरफोर्स की जरूरतों और ऑपरेशन के लिहाज से इस डील को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

अभी भारत के पास कितने राफेल?

फ्रांस से राफेल विमानों की खरीद की चर्चा का समय बेहद महत्वपूर्ण है. भारतीय वायु सेना के बेड़े में मौजूदा समय में करीब 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जो उसकी स्वीकृत क्षमता 42 स्वाड्रन से काफी कम हैं. डिफेंस एक्सपर्ट बांग्लादेश और पाकिस्तान के अलावा पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक और सैन्य गठजोड़ को भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाले फैक्टर के तौर पर दिखाते हैं.

क्यों खास है राफेल?

राफेल प्रोजेक्ट इंडियन एयरफोर्स के लिए बेहद खास है. 4.5 जेनेरेशन से ज्यादा ताकत वाले मल्टीरोल फाइटर एयरक्रॉफ्ट मिलने से भारत की आक्रामक हवाई ताकत बढ़ेगी. लंबे समय से वायुसेना में घातक लड़ाकू विमानों की कमी खल रही थी, जो राफेल वाली इस डील से पूरी होगी. प्रस्ताव के मुताबिक भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत, 114 राफेल विमानों में से 80 फीसदी का निर्माण भारत में ही पूरा किया जाना है.

इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में होंगे 150 राफेल

सूत्रों के मुताबिक इंडियन एयरफोर्स 88 सिंगल सीटर और 26 ट्विन सीटर विमान खरीदेगी. ज्यादातर का प्रोडक्शन फ्रांस की निर्माता कंपनी द सॉल्ट और भारतीय प्राइवेट सेक्टर की कंपनी करेंगी, जो भारत में ही होगा. डील पूरी होने के बाद भारतीय वायु सेना के राफेल बेड़े में एयरक्राफ्ट की संख्या बढ़कर लगभग 150 हो जाएगी.

ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने पाकिस्तान की हालत की खराब

114 राफेल का सौदा इस मायने में भी खास हैं, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने शानदार प्रदर्शन किया था. इस दौरान भारत के सटीक हमलों के चलते पाकिस्तान घुटने टेकने पर मजबूर हो गया था. राफेल 4.5 जेन का फाइटर जेट है, जो पाकिस्तानी जेएफ-17 से कहीं बेहतर माना जाता है. यही नहीं अभी भारतीय वायुसेना के बेड़े में 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं, जबकि नौसेना भी 36 राफेल के लिए नए वेरिएंट का ऑर्डर दे चुकी है.

‘राहुल ने पूछा सवाल तो क्यों लगी मिर्ची…’, मल्लिकार्जुन खरगे का भाजपा पर पलटवार, PM मोदी को लेकर क्या कहा?

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार (6 फरवरी) को भारतीय जनता पार्टी पर करारा हमला किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की रक्षा पर नहीं बोलते हैं, लेकिन राहुल गांधी सवाल पूछते हैं तो भाजपा को मिर्ची लग जाती है.

खरगे ने संसद के बजट सत्र से इतर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों को उठाया. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सिख धर्म का भी जिक्र किया.

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, ‘देश की रक्षा पर पीएम नहीं बोलते हैं. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कोई खास बात नहीं की. पीएम ने हम लोगों की बात का एक भी जवाब नहीं दिया.’ उन्होंने कहा, ‘सिखों का अपमान नहीं किया गया था जो बात हो रही थी, दोस्ती में हो रही थी. सिख धर्म बहुत बड़ा धर्म है. कांग्रेस ने दो बार सिख को प्रधानमंत्री बनाया. कांग्रेस सिख का अपमान नहीं करती है.’

पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर लगाया था सिखों के अपमान का आरोप

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर सिख गुरुओं का अपमान करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा था कि इस सदन के एक सांसद को कांग्रेस के युवराज ने गद्दार कह दिया. सोचिए, इनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच चुका है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने (कांग्रेसी युवराज) उन्हें गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे सिख थे. खरगे ने पीएम मोदी की इसी बात का जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया.

Human Survival Limits: बिना खाए-पिए कितने दिन तक जिंदा रह सकता है इंसान, क्या है ह्यूमन बॉडी की कैपेसिटी?

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पानी खून के सर्कुलेशन, तापमान कंट्रोल और गंदगी निकालने के लिए जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंसानी शरीर का लगभग 60% से 70% हिस्सा पानी से बना होता है. इस वजह से डिहाइड्रेशन जल्दी से अंगों के काम को बिगाड़ देता है.

एक इंसान बिना पानी के सिर्फ तीन से पांच दिनों तक ही जिंदा रह सकता है. कुछ मामलों में जिंदा रहना एक हफ्ते तक भर सकता है लेकिन गंभीर किडनी फेलियर और अंगों का काम बंद होना आमतौर पर काफी पहले ही हो जाता है.

बिना पानी के खून गाढ़ा हो जाता है. इसी के साथ किडनी टॉक्सिन को फिल्टर करना बंद कर देती है और शरीर का तापमान बेकाबू होकर बढ़ जाता है. दिमाग पर भी असर पड़ता है क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट का बैलेंस बिगड़ जाता है. डिहाइड्रेशन से मौत अक्सर भूख से मौत की तुलना में ज्यादा तेज और ज्यादा दर्दनाक होती है. यही वजह है कि पानी को हमेशा जिंदा रहने के लिए सबसे जरूरी प्राथमिकता माना जाता है.

अगर कोई इंसान पानी पीता रहता है तो शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है. एनर्जी बनाने के लिए सबसे पहले जमा फैट का इस्तेमाल होता है, उसके बाद मांसपेशियों के टिशु का. ऐसे मामलों में एक स्वस्थ व्यस्क बिना खाने के 3 से 8 हफ्ते तक जिंदा रह सकता है. मेडिकल मामलों से ऐसा पता चलता है कि जिंदा रहना 70 दिनों तक बढ़ सकता है. लेकिन ऐसे मामले में शरीर काफी कमजोर हो जाता है.

जिन लोगों के शरीर में ज्यादा फैट होता है वह आमतौर पर बिना खाने के ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि फैट एनर्जी रिजर्व का काम करता है. जैसे-जैसे भूख बढ़ती है इम्यून सिस्टम कमजोर होता जाता है, मांसपेशियों का वजन कम होता जाता है और अंगों का काम धीमा हो जाता है. अंत में दिल और दिमाग को काम करने के लिए पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती.

इंसानी सहनशक्ति को समझने के लिए 3 के नियम को समझना जरूरी है. बिना ऑक्सीजन के 3 मिनट, बिना पानी के 3 दिन, बिना खाने के तीन हफ्ते.

ज्यादा गर्मी डिहाइड्रेशन को बढ़ाती है. ठंडा माहौल एनर्जी की खपत को बढ़ाता है. शारीरिक मेहनत से पानी और एनर्जी रिजर्व तेजी से खत्म हो जाते हैं. इससे जीवित रहने का समय भी कम हो जाता है.

आ गई कमाल की टेक्नोलॉजी, स्मार्ट रिंग बन जाएगी रिमोट कंट्रोल, आपके इशारे पर चलेंगे फोन और कारें…

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कई शानदार फीचर्स के साथ आने वाली स्मार्ट रिंग को अब और भी स्मार्ट बनाने की तैयारी चल रही है. एक कंपनी ने स्मार्ट रिंग्स के लिए नई टच एंड जेस्चर कंट्रोल टेक्नोलॉजी का ऐलान किया है, जो फ्यूचर मॉडल में टैप एंड स्वाइप कंट्रोल देने के काम आ सकती है.

इस टेक्नोलॉजी को UltraTouch RG1 नाम दिया गया है और इसे अल्ट्रासेंस सिस्टम नाम की की कंपनी ने डेवलप किया है. आइए जानते हैं कि यह टेक्नोलॉजी किस काम आ सकती है.

कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी?

UltraTouch RG1 टेक्नोलॉजी मेटल और सिरामिक कोटिंग वाली रिंग्स के साथ काम कर सकती है. इसमें कई ऐसे जेस्चर मिलते हैं, जिससे फीचर्स को एक्टिवेट और दूसरे डिवाइसेस को कंट्रोल किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर इस टेक्नोलॉजी से लैस स्मार्ट रिंग की मदद से आप स्मार्ट ग्लास, अपने फोन और यहां तक कि अपनी कार को भी कंट्रोल कर सकेंगे. ऐसे में आपकी रिंग एक रिमोट कंट्रोल की तरह काम करेगी. इस पर टैप, स्लाइड और प्रेस जेस्चर की मदद से आप इसे कमांड दे पाएंगे. इसकी खास बात यह भी है कि इसके लिए कोई हार्डवेयर बटन, ग्लास या दूसरे मैटेरियल की जरूरत नहीं पड़ती.

इसका फायदा क्या होगा?

दरअसल, मार्केट में ऐसे स्मार्टग्लासेस हैं, जिनके डिस्प्ले को स्मार्ट रिंग से कंट्रोल किया जा सकता है. यह कॉन्सेप्ट शानदार है, लेकिन इसके लिए स्मार्ट रिंग में फिजिकल बटन की जरूरत पड़ती है, जिन्हें प्रेस करना काफी मुश्किल हो सकता है. इसी तरह इनका टच सेंसेटिव पैनल भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है. इस समस्या से निपटने में नई टेक्नोलॉजी काम आ सकती है. बता दें कि दूसरी कंपनियां भी ऐसे कॉन्सेप्ट पर काम कर रही है. Oura ने स्मार्टग्लासेस के लिए एक पेटेंट दायर किया है, जिसमें स्मार्ट रिंग इंटीग्रेटेड है. इसी तरह मेटा भी अपने मेटा रे-बेन डिस्प्ले ग्लासेस को कंट्रोल करने के लिए रिस्ट बैंड दे रही है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का काउंटडाउन! जयशंकर ने बता दिया सीक्रेट, बोले- ‘बहुत जल्द…’

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भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसे बहुत जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को वॉशिंगटन यात्रा से लौटने के बाद यह बात कही.

यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही दोनों देशों ने भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है. माना जा रहा है कि इस समझौते के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया दौर शुरू होगा.

वॉशिंगटन दौरे के बाद बड़ा बयान

एस. जयशंकर अमेरिका में अहम खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने गए थे. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की और व्यापार व आर्थिक सहयोग पर बातचीत की. जयशंकर ने बताया कि इस व्यापार समझौते का काम वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल देख रहे हैं और समयसीमा को लेकर उनके पास अभी पक्की जानकारी नहीं है.

सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘अमेरिका की यात्रा सकारात्मक और उपयोगी रही. भारत-अमेरिका का ऐतिहासिक व्यापार समझौता अब अंतिम दौर में है और बहुत जल्द पूरा हो जाएगा. इससे दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय खुलेगा और आगे कई नई संभावनाएं बनेंगी.’

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है. आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर भी बातचीत देखने को मिलेगी. कुल मिलाकर, दोनों देशों के रिश्तों में अब साफ तौर पर अच्छी गति दिख रही है, खासकर उन महीनों के बाद जब व्यापार से जुड़े मुद्दों पर तनाव देखा गया था.

टैरिफ पर क्या बोले विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अमेरिकी पक्ष ने साफ कर दिया है कि भारतीय सामान पर अंतिम टैरिफ 18% होगा. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को हुई फोन बातचीत के बाद आए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पीएम ने भी बताया था कि भारतीय उत्पाद अब 18% के कम टैरिफ पर अमेरिका भेजे जाएंगे.

रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘यह व्यापार समझौता हमारे निर्यात को बड़ा बढ़ावा देगा. इससे भारत के श्रम-आधारित उद्योगों को फायदा होगा, नए रोजगार के मौके बनेंगे और देश में विकास व समृद्धि आएगी.’

पहला चरण में होगा यह समझौता

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि 18% का यह कम टैरिफ तब लागू होगा, जब सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी और दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे देंगे. यह भारत-अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण होगा.

स्कॉट बेसेंट के साथ बैठक में जयशंकर ने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की. वहीं, मार्को रुबियो के साथ हुई बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक जैसे मुद्दे शामिल रहे. दोनों पक्षों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तंत्रों की जल्द बैठक करने पर भी सहमति जताई.

संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बरकरार

इस पूरे मामले से जुड़े लोगों ने यह भी बताया कि भारत की ओर से अमेरिकी सामान पर टैरिफ शून्य किए जाने की संभावना कम है. भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपने हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम सुनिश्चित किए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क, जिसमें नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बैठकें भी शामिल हैं, इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भारत और अमेरिका कई क्षेत्रों में रिश्तों को फिर से संतुलित और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके.

ट्रेन से मिसाइल दागेगा भारत, ‘अग्नि’ से कांप उठेंगे चीन-पाकिस्तान, रूस से अमेरिका तक किसी के पास नहीं ‘घोस्ट’

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भारत की अग्नि प्राइम मिसाइल ने एक और बड़ा कारनामा कर दिखाया है. इस बार अग्नि को रेल-आधारित लॉन्च से दागा गया, जिसके बाद दुनियाभर का ध्यान भारत के परीक्षण पर टिक गया है. इससे चीन और पाकिस्तान में काफी चिंता और दहशत फैल गई है.

यह मिसाइल भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दे रही है और इसे ‘घोस्ट ट्रेन’ जैसा हथियार कहा जा रहा है, क्योंकि भारत के विशाल रेल नेटवर्क पर यह आसानी से छिप सकती है और दुश्मन के लिए ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

9 हजार किमी की रफ्तार से आगे बढ़ती अग्नि

ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से 24 दिसंबर 2025 को अग्नि प्राइम का सफल परीक्षण हुआ था, जो रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से किया गया. यह मिसाइल मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, जिसकी रेंज लगभग 2 हजार किलोमीटर तक है. यह सॉलिड-प्रोपेलेंट वाली मिसाइल है, और कैनिस्टर लॉन्च्ड है. इस वजह से फ्यूलिंग की जरूरत नहीं पड़ती और इसे बहुत तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. इसकी स्पीड 8,500 से 9,000 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो इसे नई पीढ़ी की मिसाइल बनाती है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, जिससे भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस मजबूत हो गया है.

रेल-आधारित होने की वजह से यह मोबाइल और छिपने में माहिर है. दुश्मन के सैटेलाइट के लिए इसे ढूंढना ‘हजारों टन भूसे में सूई ढूंढने’ जैसा है. हालांकि रेल से लॉन्च की लागत ज्यादा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह जरूरी माना जा रहा है. भारत ने इसे दो मुख्य जगहों पर तैनात किया है:

महाराष्ट्र के पुणे जिले में देहू (पाकिस्तान सीमा से 700 किमी से कम दूरी पर).

असम के नागांव जिले में मिस्सा (चीन पर निशाना साधने के लिए सटीक जगह).

यहां रेल साइडिंग, रिट्रैक्टेबल शेल्टर और लॉन्च एरिया तैयार हैं.

अग्नि की क्षमता से कापेंगे चीन और पाकिस्तान

चीन और पाकिस्तान में डर की सबसे बड़ी वजह इसकी मोबिलिटी और छिपने की क्षमता है. अमेरिकी थिंक टैंक IISS के मुताबिक, रेल-माउंटेड मिसाइलें स्वाभाविक रूप से मोबाइल होती हैं और इन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है. पाकिस्तान के लिए देहू से दूरी कम होने से पूरा देश निशाने पर आ जाता है. चीन के लिए उत्तर-पूर्व के अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों से हमला आसान हो जाता है. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी ने कहा कि चीन की आक्रामकता को देखते हुए भारत को ऐसी मिसाइलों की जरूरत है, जो दुश्मन के खास इलाकों को पूरी तरह तबाह कर सकें.

रेल-आधारित मिसाइलें किन देशों के पास हैं?

दुनिया में रेल-आधारित मिसाइलें कम देशों के पास हैं:

रूस ने RT-23 और बार्गुजिन प्रोजेक्ट किए, लेकिन महंगे होने से बंद कर दिए.

अमेरिका ने पीसकीपर पर विचार किया लेकिन आगे नहीं बढ़ाया.

चीन ने DF-41 का टेस्ट किया लेकिन पूरी रेल क्षमता नहीं बना पाया.

उत्तर कोरिया ने ह्वासोंग-11A का दावा किया.

भारत की अग्नि प्राइम मिसाइल पुरानी अग्नि-1, अग्नि-II की जगह लेगी और अग्नि-III की तरह रेल-मोबाइल है. जून 2025 में हुए ईरान-इजरायल युद्ध से सीख मिली कि मोबाइल लॉन्चर नष्ट हो सकते हैं, लेकिन रेल नेटवर्क पर अदृश्य रहना संभव है. IISS का कहना है कि यह क्षमता पहले हमले से बचाव में मदद करती है, लेकिन हथियार नियंत्रण को चुनौती देती है. यह परीक्षण भारत के मिसाइल कार्यक्रम की सफलता दिखाता है, जो शीतयुद्ध से प्रेरित रेल-मोबाइल तकनीक पर फोकस करता है. इससे भारत की क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस मजबूत होती है और पड़ोसी देशों के लिए रणनीतिक संतुलन बदल रहा है.

नागपुर के जंगलों में छुपी 1000 साल पुरानी कर्पूर बावड़ी, जिसका पानी कभी नहीं सूखता!

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महाराष्ट्र के रामटेक के पास जंगलों और छोटी-छोटी पहाड़ियों के बीच बसा, करपुर बावड़ी नागपुर के सबसे कम सराहे गए धरोहर स्थलों में शामिल है.

यह प्राचीन सीढ़ीदार कुआं प्राचीन और स्थानीय लोककथाओं से घिरी हुई है, शहर के आम पर्यटक पर्यटक मार्गों से दूर इस इलाके के समृद्ध इतिहास की झलक पेश करती है.

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करपुर बावली कहां हैं?

करपुर बावड़ी का निर्माण 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है, जो रामटेक मंदिर परिसर के अंदर स्थित है. भारत में बावड़ियां कभी दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करती थीं, जिनका इस्तेमाल पीने, धार्मिक अनुष्ठानों और खेती के लिए पानी जमा करने के लिए किया जाता था.

इस बावड़ी की खास बात ये है कि, माना जाता है कि, इसके निर्माण के दिन से लेकर आज तक किसी भी मौसम चाहे वर्षा ही क्यों न हो इसका जल स्थिर रहा है. आज यह बावड़ी घने जंगलों से घिरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है.

इसे कर्पूर बावली क्यों कहते हैं?

कर्पूर का मतलब कपूर होता है, जबकि बावड़ी का अर्थ पानी की टंकी या सीढ़ीदार कुआं होता है. स्थानीय लोककथाओं की माने तो, यहां के पानी में कभी कपूर जैसी सुंगध हुआ करती थी और माना जाता था कि, इसमें औषधीय गुण हैं. हालांकि अब वह सुगंध महसूस नहीं होती है, फिर भी यह नाम सालों से प्रचलित है.

कर्पूर बावड़ी मात्र एक जल संरचना नहीं, बल्कि एक पूजा स्थल भी है. यह स्थल 6 देवियों मां चामुंडा, इंगलाज, काली, रणचंडी और कपूरता को समर्पित है. सीढ़ीदार कुएं के किनारे एक छोटा काली मंदिर आज भी मौजूद है.

वास्तुकला के नजरिए से बावड़ी में तीनों ओर स्ंतभों वाला गलियारा है और आंशिक रूप से ढह चुके गर्भगृह के अवशेष भी हैं, जिसमें कभी एक देवी विराजती थीं. समय के साथ-साथ इसकी संरचना जर्जर होते चली गई, लेकिन फिर भी अपने युग की ये बेहतरीन शिल्पकारी थी.

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कर्पूर बावली का निर्माण किसने किया?

इतिहासकारों की मानें तो इस सीढ़ीदार कुएं का निर्माण यादव वंश के शासन काल में हुआ था, जिसने 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच वर्तमान समय के महाराष्ट्र के बड़े क्षेत्र पर शासन किया था. इसकी स्थाप्य शैली और बनावट उस काल के मंदिर से जुड़े जल संरचनाओं के अनुरूप है. अपनी प्राचीनता के बावजूद यह स्थल काफी हद तक अज्ञात है, जहां आज भी काफी कम लोग आते हैं.

यह बावड़ी रामटेक में श्री शांतनाथ दिगंबर जैन मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर पर स्थित है. बावड़ी और उसके आसपास के इलाको में घूमने में आतौर पर 1 घंटे का समय लगता है. यहां कोई औपचारिक सुविधाएं नहीं, बल्कि आंगतुकों को अपनी योजना के मुताबिक बनानी चाहिए और इस स्थान का सावधानीपूर्वक ध्यान रखना चाहिए.

आप नजदीक के ही पहाड़ी पर स्थित रामटेक किले का दौरा भी कर सकते हैं, जहां से आसपास के ग्रामीण इलाकों का मजेदार दृश्य देखने को मिलता है. यहां आप खिंडसी झील भी देख सकते हैं, जो नौका विहार या पिकनिक मानने के लिए बेहतरीन जगह है.

क्रिप्टो निवेशकों को लगा 440 वोट का झटका! बिटकॉइन 67 हजार डॉलर से नीचे फिसला, एथेरियम-सोलाना भी धड़ाम…

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क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिल रही है. लगातार हो रही बिकवाली के दबाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. बीते कुछ दिनों से बिटकॉइन में तो जबरदस्त सेलिंग देखने को मिल रही है.

क्रिप्टो बाजार में यह गिरावट तब शुरू हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श को नामित किया था.

इसके बाद निवेशकों ने रिस्की एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी. भारी दबाव के चलते बिटकॉइन की कीमत 67,000 डॉलर से नीचे फिसल गई है. जबकि क्रिप्टो मार्केट कैप घटकर 2.27 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है. आइए जानते हैं, बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी का क्या हाल है…..

बिटकॉइन में जोरदार गिरावट

कॉइनमार्केटकैप के अनुसार सुबह करीब 11:45 बजे बिटकॉइन 66,656.83 डॉलर पर कारोबार कर रहा था. आंकड़ों की बात करें तो, पिछले 24 घंटे में इसमें करीब 5.29 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही थी. वहीं, बीते 7 दिनों में बिटकॉइन लगभग 19.44 फीसदी टूट चुका है.

इन आंकड़ों से साफ है कि हाल के दिनों में क्रिप्टो बाजार पर दबाव बना हुआ है और बिटकॉइन में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. निवेशक लगातार बिटकॉइन की बिकवाली कर रहे हैं.

एथेरियम की मौजूदा स्थिति

कॉइनमार्केटकैप के अनुसार एथेरियम की मौजूदा कीमत करीब 1,962.48 डॉलर है. पिछले 24 घंटे में इसमें लगभग 5.53 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, बीते 7 दिनों में एथेरियम करीब 28.32 प्रतिशत टूट चुका है. जिससे साफ है कि एथेरियम पर हाल के दिनों में काफी दबाव बना हुआ है.

टीथर की कीमत

टीथर की कीमत फिलहाल लगभग 0.9988 डॉलर पर बनी हुई है. पिछले 24 घंटे में इसमें करीब 0.09 फीसदी की मामूली बढ़त देखने को मिली है. वहीं, 7 दिनों में इसमें लगभग 0.05 प्रतिशत की हल्की तेजी दर्ज की गई है. स्टेबल कॉइन होने की वजह से टीथर में ज्यादा उतार-चढ़ाव नजर नहीं आ रहा है.

बीएनबी, सोलाना और डॉजकॉइन की कीमत

बीएनबी की मौजूदा कीमत करीब 639.84 डॉलर है, जिसमें पिछले 24 घंटे में लगभग 7.42 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. जबकि बीते 7 दिनों में यह करीब 24.38 प्रतिशत कमजोर हुआ है. वहीं, सोलाना इस समय करीब 81.35 डॉलर पर कारोबार कर रहा है और इसमें पिछले 24 घंटे में लगभग 9.99 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली है.

वहीं, पिछले 7 दिनों में यह करीब 29.37 फीसदी टूट चुका है. दूसरी ओर, डॉजकॉइन की मौजूदा कीमत लगभग 0.09320 डॉलर है. जिसमें बीते 24 घंटे में करीब 8.46 प्रतिशत की गिरावट आई है और पिछले 7 दिनों में यह लगभग 18.65 फीसदी कमजोर हुआ है.

देहरादून एयरपोर्ट के आस-पास में बिना अनुमति निर्माण पर कार्रवाई, AAI ने जारी किया आदेश…

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देहरादून स्थित जॉलीग्रांट एयरपोर्ट के आसपास निर्माण कार्य को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. AAI के अनुसार एयरपोर्ट के 20 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होगा.

बिना अनुमति किया गया निर्माण विमानन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा.

AAI ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए हैं. एयरपोर्ट के आसपास ऊंची इमारतें, टावर या अन्य संरचनाएं विमान के उड़ान और लैंडिंग के दौरान जोखिम पैदा कर सकती हैं. ऐसे में नियमों का उल्लंघन न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि यह कानूनी अपराध की श्रेणी में भी आता है.

बिना NOC निर्माण करने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

AAI के मुताबिक एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 की धारा 9A के तहत एयरपोर्ट के आसपास निर्धारित क्षेत्र में किसी भी निर्माण के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है. इस नियम के तहत बिना NOC निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. जिसमें निर्माण को ध्वस्त करना, जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है.

निर्माण कार्यों से पहले प्राधिकरण से अनुमति ले लोग- प्रशासन

एयरपोर्ट प्रशासन ने बिल्डरों, भू-स्वामियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार का निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति अवश्य लें. सुविधा को ध्यान में रखते हुए NOC के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है. जिससे लोग आसानी से प्रक्रिया पूरी कर सकें.

नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ नहीं बरती जाएगी ढिलाई

AAI का कहना है कि कई मामलों में जानकारी के अभाव में लोग नियमों का उल्लंघन कर देते हैं. जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की चूक से बचा जा सके. प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी. यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसे लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा.

“Paro Pinaki Ki Kahani Review: ये है असली सैयारा, दिल छू लेगी ये फिल्म”

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मैं किसी रेल सा, तू पटरी के किनारे का घर जब भी गुजरती है तो बच्चा बाहर आता है और हाथ हिलाता है. अब बच्चे के हाथ हिलाने का मतलब क्या है, दिल का धड़कना. इन खूबसूरत लाइनों जैसी ही खूबसूरत है ये फिल्म.इन दिनों लव स्टोरीज का ट्रेंड खूब है.

सैयारा के बाद कई तरह की लव स्टोरीज आई लेकिन ये है असली सैयारा जो प्रेम का असली मतलब समझाती है.

कहानी – ये कहानी है एक सीवर साफ करने वाले लड़के और सब्जी बेचने वाली लड़की की, दोनों प्यार करते हैं. ट्रेन में मिलते हैं लेकिन इनकी मोहब्बत आसान नहीं है, यहां मोहब्बत का दुश्मन को इंसान नहीं कोई और है. वो क्या है, ये जानने थिएटर चले जाइए.

कैसी है फिल्म – ये एक दिल को छू लेने वाली फिल्म है,फिल्म आपको कई जगह इमोशनल करती है. आपको चौंकाती है, आपको सोचने पर मजबूर करती है. लड़की जब लड़के से कहती है कि तुम ये काम क्यों करते हो तो वो कहता है कोई भी कोई काम क्यों करता है.पैसों के लिए तो आप सीवर साफ करने वालों का दर्द समझते हैं. ये लड़का बड़े आराम से कहता है कि सीवर साफ करने वालों का 40 की उम्र के बाद शरीर खराब हो जाता है तो आप इन कर्मचारियों के दर्द को खुद फील करते हैं. ये लड़की जब कहती है कि कभी कभी ऐसा लगता है कि मेरे बाप ने मुझे रखा ही इसलिए है कि मैं सब्जी बेचने में उसकी मदद कर सकूं तो आप इस लड़की की कहानी में उसके साथ हो लेते हैं. फिल्म अच्छी पेस पर चलती है, कहीं खींची हुई नहीं लगती. म्यूज़िक अच्छा है और फिल्म के फील को और बढ़ाता है. इनके रोमांस के सीन दिल को छूते हैं, क्लाइमैक्स चौंकाता है और फिल्म एंड में आपको कुछ सोचने पर मजबूर करती है.

एक्टिंग – इशिता सिंह ने कमाल का काम किया है.उन्होंने इसके लिए अपना लुक बदला है. स्किन टोन डार्क की है, और इस किरदार में जान डाल दी है.उनके गजब का कॉन्फिडेंस दिखता है, संजय बिश्नोई एक सीवर साफ करने वाले के दर्द को जैसे दिखते हैं. उससे आपको लगता है कि उनके अलावा ये किरदार कोई कर ही नहीं सकता. एक सीन में उनके शरीर से बदबू आती है, वो सीन इतना कमाल का है कि आप उनके कायल हो जाएंगे.हनुमान सोनी ने बढ़िया काम किया है.

राइटिंग और डायरेक्शन – Rudra jadon ने फिल्म को कमाल तरीके से लिखा है और डायरेक्शन भी अच्छा है. कहीं कोई सीन एकस्ट्रा नहीं लगता, फिल्म की पेस अच्छी रखी गई है ताकि दर्शक कहीं बोर न हो.कुल मिलाकर ये दिल को छू लेने वाली फिल्म जरूर देखिए.